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How Do Students Recognize Opportunity?

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1.छात्र-छात्राएं अवसर को कैसे पहचाने? (How Do Students Recognize Opportunity?),गणित के छात्र-छात्राएं अवसर से कैसे लाभ उठाएं? (How Do Mathematics Students Take Advantage of Opportunity?):

  • छात्र-छात्राएं अवसर को कैसे पहचाने? (How Do Students Recognize Opportunity?) में अवसर से तात्पर्य है मौका,सुयोग तथा अवसरवादी से तात्पर्य है जो किसी स्थिर नीति पर दृढ़ न रहकर प्रत्येक उपयुक्त अवसर से पूरा-पूरा लाभ उठाने का प्रयत्न करें।इस प्रकार अवसर व अवसरवादिता को एक-दूसरे से विपरीत समझा जाता है।अवसरवादी को नकारात्मक प्रवृत्ति का द्योतक माना जाता है।छात्र-छात्राओं के जीवन में कई सुअवसर आते हैं परंतु उसके लिए वे तैयार नहीं होते हैं,उपयुक्त योग्यता हासिल किए हुए नहीं होते हैं,उपयुक्त प्रयत्न नहीं करते हैं इसलिए अवसर का लाभ उठाने से वंचित रह जाते हैं।
  • अवसर हमारे जीवन में कहकर प्रकट नहीं होता है अर्थात् कहकर हमारे सामने नहीं आता है परंतु जो सचेष्ट,सतर्क,सावधान व सजग रहते हैं वे अवसर से लाभ उठा लेते हैं।जो सदैव जागरूक व प्रयत्नशील रहते हैं वे जिस क्षण भी अवसर आता है उसको लपक लेते हैं लेकिन लापरवाह,आलसी व्यक्तियों के सामने अवसर आता है तो वे मौका चूक जाते हैं और जब अवसर हाथ से निकल जाता है तो पश्चाताप करते रहते हैं।
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2.अवसर सभी के जीवन में आते हैं (Opportunities Come in Everyone’s Life):

  • अवसर हर छात्र-छात्रा व व्यक्ति के जीवन में आते हैं परंतु अवसर का लाभ वही उठा पाता है जो हर पल,हर क्षण प्रयत्नशील और सजग व सतर्क रहता है।परंतु अकर्मण्य छात्र-छात्राएं तथा व्यक्ति अवसर को पहचान ही नहीं पाते हैं और जब अवसर निकल जाता है तो हाथ मलते हुए रह जाते हैं।इसके बजाय मेधावी छात्र-छात्राएं तो सामान्य अवसर को भी अपने समय प्रबंधन,समर्पण,जीवट तथा पुरुषार्थ से उसको विशिष्ट और खास अवसर बना लेते हैं।
  • आर्किमिडीज ने सोने की शुद्धता का पता नहाने के लिए तालाब में कूदते समय पता लगाया जब पानी उछलकर तालाब से बाहर निकल गया।
  • हर व्यक्ति पेड़ से फल गिरते हुए देखता था परंतु सबके लिए वह सामान्य घटना थी जबकि वही सामान्य घटना न्यूटन के लिए वरदान साबित हो गई और उन्होंने गुरुत्वाकर्षण शक्ति का पता लगाया।अल्बर्ट आइंस्टीन ने सापेक्षता के सिद्धांत का पता लगाया।
  • इन महान् गणितज्ञों व वैज्ञानिकों ने अद्भुत खोज का पता इसलिए लगाया कि वे हमेशा जागरूक,सचेत तथा प्रयत्नशील रहते थे।वे अवसर की प्रतीक्षा करके बैठे हुए नहीं थे परंतु ज्योंही उनके जीवन में अवसर ने दस्तक दी तो फौरन उन्होंने बुद्धि और चेतना के बल से पकड़ लिया और महान् खोज दुनिया के सामने प्रस्तुत कर दी।
  • जो छात्र-छात्राएं समय के एक-एक क्षण का सदुपयोग करता है वही अवसर का लाभ उठा सकता है।समय की महत्ता क्या है? समय इतना बलवान कैसे है? इसे समझाने के लिए सिकंदर के समकालीन यूनानी मूर्तिकार लिसिपस ने एक मूर्ति बनायी थी।वह मूर्ति तो अब न जाने कहां है परन्तु कैलिस्ट्रोटस नामक विद्वान ने उस मूर्ति का केवल चित्र देखा था और उसका अपने शब्दों में इस प्रकार वर्णन किया थाः
  • “किसी ने उससे पूछा तुम कौन हो?”
    “उसने उत्तर दिया मैं  समय हूं और सबको वश में कर सकता हूं।”
  • “उस व्यक्ति ने पुनः पूछा “परन्तु तुम इस प्रकार अपने पैरों की उंगलियों में पर खड़े क्यों हो?”
    ” उसका उत्तर था क्योंकि मैं हमेशा गतिशील रहता हूँ।”
  • उस व्यक्ति का अगला प्रश्न था “तुम्हारे पैरों में यह पंख क्यों लगे हुए हैं?”
    “उसका उत्तर था कि मैं इन पंखों से ही गतिशील रहने के लिए तेज उड़ता हूँ।”
  • “और तुम्हारे हाथ में इतना धार का हथियार क्यों है?”
    “उसका उत्तर था कि कोई भी वस्तु मुझसे अधिक तेज धार वाला इस संसार में मौजूद नहीं है।”
  • “तुम्हारे ये बाल सिर के आगे क्यों लटके हुए हैं?”
    “क्योंकि मुझे सामने से ही पकड़ा जा सकता है।”
  • “तुम्हारे सिर के पिछले भाग में बाल क्यों नहीं है?”
    “समय का उत्तर था कि जब मैं गुजर जाता हूं (उड़ जाता हूं) तो कोई भी पीछे से मुझे नहीं पकड़ सकता है।”
  • ” उस व्यक्ति ने अंतिम प्रश्न किया कि तुम्हारा इतना रूप सुंदर क्यों है?”
  • “समय ने उत्तर दिया कि हे जिज्ञासु!हर व्यक्ति मुझे पकड़ने का प्रयास करें (समय का सदुपयोग करें) किन्तु मेरा सदुपयोग केवल कर्मठ और गतिशील व्यक्ति ही कर सकते हैं क्योंकि वे अवसर को पहचानते हैं।सुंदरता के प्रति हर व्यक्ति आकर्षित होता है परंतु उपयोग वही कर सकता है जो पुरुषार्थी है और हमेशा सजग रहता है।”
  • तो देखा आपने अवसर का सदुपयोग वही कर सकता है जो समय की कद्र करता है।अवसर अपने अंदर समय के कई चमत्कारिक रहस्यों को समेटे हुए है।जब हम अवसर की पहचान करना सीख जाएंगे तो ऐसे छात्र-छात्राएं अपने समय,ऊर्जा और उपलब्ध साधन-सुविधाओं का बेहतरीन उपयोग कर सकेंगे।उदाहरणार्थ किसी छात्र-छात्रा ने सत्रारंभ से ही अवसर को पहचान लिया तथा जिसने जनवरी अर्थात परीक्षा से दो माह पूर्व अवसर को पहचाना है तो  सत्रारम्भ से तैयारी करने वाले के पास कोर्स को पूरा करने,रिवीजन करने तथा मॉडल पेपर्स को हल करने का अनुभव रहेगा।जबकि जनवरी से अवसर को पहचानने वाले विद्यार्थी को कोर्स भी पूरा करने के लाले पड़ जाएंगे।

3.छात्र-छात्राएं अवसर को कैसे पहचाने? (How Do Students Recognize the Opportunity?):

  • अक्सर छात्र-छात्राओं के सामने अवसर आता है और अवसर आकर,ठहरकर चला भी जाता है परंतु वे इसे नहीं पहचान पाते हैं।इसका कारण है कि छात्र-छात्राएं दुनियादारी के प्रपंचों,गपशप और मौज मस्ती में उलझे रहते हैं इसके बजाय वे प्रयत्नशील और जागरूक तथा सचेत रहें तो तत्काल अवसर को न केवल पकड़ सकते हैं बल्कि उसका उपयोग कर सकते हैं।
  • दूसरा तरीका यह है कि अपने आपका मूल्यांकन करते रहें और जो अवसर आपने गँवा दिया है उसके बारे में सोचें कि वह अवसर कैसे आया और किस प्रकार हाथ से निकल गया? लेकिन अवसर का लाभ आप तभी उठा सकते हैं जबकि उसके लिए आवश्यक योग्यता और अनुभव भी हो।
  • उदाहरणार्थ आप गणित विषय से अध्ययन कर रहे हैं।बहुत से छात्र-छात्राओं को यह पता ही नहीं रहता है कि जेईई-मेन की परीक्षा कब होती है? उसके लिए विज्ञप्ति कब निकलती है? परंतु यदि आप इस अवसर का लाभ उठाना चाहते हैं तो 11वीं कक्षा से ही आपको ग्यारहवीं परीक्षा के साथ-साथ जेईई-मेन की परीक्षा की तैयारी प्रारंभ कर देनी चाहिए।
  • कई विद्यार्थी जेईई-मेन के नाम से आत्म-विश्वास खो देते हैं परीक्षा की तैयारी करना तो दूर रहा।यह अवसर हर गणित के छात्र-छात्रा के जीवन में आता है परंतु इसका लाभ वही उठाता है जो योग्य,अनुभवी और आत्मविश्वासी हो।साथ ही जेईई-मेन की विज्ञप्ति की जानकारी रखता है व आवेदन प्रक्रिया को विधिवत पूर्ण करता है।
  • कई छात्र-छात्राएं अवसर की प्रतीक्षा करते रहते हैं और यह सोचते हैं कि अवसर साक्षात प्रकट होकर अनुदान-वरदान उनकी झोली में डाल देगा और वे मालामाल हो जाएंगे।ऐसे छात्र-छात्राओं के जीवन में सुनहरे अवसर आते हैं परंतु वे उन्हें सामान्य ढंग से लेते हैं।उन्हें लगता है कि यह तो रूटीन का कार्य है।इसी चक्कर में वे एक के बाद एक अवसर को खोते चले जाते हैं।
  • छात्र-छात्राओं को यह धारणा भी बदल लेनी चाहिए कि उनके सामने अनेक अवसर हैं और वे जब चाहेंगे तभी अवसर का लाभ उठा लेंगे।अवसर को प्रभावशाली व्यक्ति की पहुँच,धन-संपत्ति के द्वारा वश में नहीं किया जा सकता है बल्कि जो भी उसका स्वागत करने के लिए तैयार रहता है वह उसे पा लेता है।छात्र-छात्राएं को अपने लक्ष्य और अवसर को पाने के लिए कोई कोर-कसर नहीं छोड़नी चाहिए क्योंकि अवसर किसी का गुलाम नहीं है जो उसे जब चाहे अपने सामने हाजिर कर ले।
  • अवसर को पहचानने और उसे पाने के लिए अपनी तमाम योग्यता,ऊर्जा,जागरूकता,चेतना,प्रयत्न,क्षमता तथा अनुभव को लगा देना चाहिए।एक बार आप अवसर को पा लेते हैं तो उसके साथ आपको सफलता,यश,पद तथा प्रतिष्ठा प्राप्त होती है।
  • यदि अवसर को आपने पहचान भी लिया परंतु आपके पास उसको प्राप्त करने की योग्यता,कुशलता और अनुभव नहीं है तो वह उल्टे पांव लौट जाता है।बाद में आपके पास पछतावा नाउम्मीदें,लाचारी और अक्षमता ही रहती है जो आपको निष्क्रिय और बेजान कर देती है,हताश कर देती है।
  • अवसर को पहचानने और उसका उपयोग करने के लिए अपनी कुशलता,योग्यता और गुणों में वृद्धि करते रहें और जब भी अवसर सामने आए तत्काल उसका उपयोग कर लें।
  • अपनी प्रत्युत्पन्नमति (उचित उपाय तत्काल सूझ जाए),प्रतिभा,साहस को तराशना होगा।प्रत्युत्पन्नमति,प्रतिभा व साहस को तराशना एक दिन में संभव नहीं है बल्कि बचपन से इसे तराशना,निखारना और उभारना होगा।यह वर्षों के तप (पुरुषार्थ) और साधना के द्वारा ही उत्पन्न होती और उपजती है।
  • अपना आत्मनिरीक्षण और आत्म प्रशिक्षण लगातार करते रहना चाहिए क्योंकि मन में विकार रहते हैं तब तक हमें सही अवसर की पहचान करना और उपयोग करना नहीं आ सकता है।
  • अपनी उर्जा,बोध,मन को एकाग्र करने का अभ्यास करें।इसे नियमित रूप से तथा रोजाना एकीकृत करने के लिए ध्यान व योग का अभ्यास करें।
  • इसके अलावा सज्जन,विद्वानों,शिक्षकों से भी लगातार संपर्क बनाए रखें।वे भी हमें अवसर को पहचान करने में मदद करते हैं।

4.अवसर को पहचानने के लिए महत्वपूर्ण बिंदु (Important Points to Identify the Opportunity):

  • (1.)अपने अध्ययन कार्य को अथवा जॉब को एकाग्रचित्त होकर तथा पूर्ण लगन के साथ करें।कार्य को इतना तल्लीन होकर करें कि उसी में डूब जाएं अर्थात् अपने आपकी सुध-बुध ही न रहे। अध्ययन अथवा जॉब की बारीक से बारीक बातों को सीखे।
  • (2.)अध्ययन करने पर आपकी कोई प्रशंसा करता है या नहीं करता है अथवा जॉब में वेतन कम मिलता है या संतोषजनक नहीं मिलता है।इन बातों पर ध्यान न देकर अवसर पर नजर रखें और आपके लिए उपयुक्त अवसर प्राप्त होते ही उसे फौरन पकड़ लें।
  • (3.)किसी काम को पूरी तत्परता,उत्साह,बड़ी सावधानी के साथ करें यदि आपके शिक्षक अथवा बाॅस (Boss) अत्यधिक व्यस्त रहते हैं तो उनके छोटे-छोटे कार्यो की जानकारी हासिल करें और जब भी वे काम की अत्यधिक व्यस्तता के कारण परेशान हों तो उनके काम में सहयोग करने के अवसर से न चूके।आप स्वयं भी पहल करके ऐसा पूछ सकते हैं कि श्रीमान यह कार्य में कर दूं क्या?इस प्रकार आप अध्ययन अथवा जाॅब में तरक्की का अवसर प्राप्त कर सकते हैं।
  • (4.)अवसर का लाभ उठाने से न चूके।आलस्य,लापरवाही और गपशप में समय नष्ट करने के बजाय किसी भी कार्य में प्रवीणता हासिल करने की कोशिश करते रहे।चापलूसी,गलत काम करने वाले व्यक्ति की जल्दी छुट्टी हो जाती है।आलसी और कामचोर अवसर का लाभ नहीं उठा सकते हैं।
  • (5.)आपको जितना कार्य सौंपा जाए हमेशा उससे अधिक कार्य करने की चेष्टा करें देर-सबेर आपके काम की परख अवश्य होगी।अपने काम में अधिक से अधिक रुचि लें और उसे पूर्ण निष्ठा के साथ करें।इससे न केवल आपकी तरक्की के रास्ते खुलेंगे बल्कि आपको आत्म संतुष्टि भी मिलेगी।
  • (6.)अपने स्वभाव को सौम्य और सरल रखें और शांत चित्त होकर अपने कार्य में आनंद का अनुभव करें।
  • (7.)बड़े काम के चक्कर में छोटे-छोटे कार्यो की उपेक्षा न करें बल्कि काम छोटा हो अथवा बड़ा उसको पूर्ण निष्ठा के साथ करें।
  • (8.)आज हर कहीं ऐसे प्रतिभाशाली व चरित्रवान व्यक्तियों की जरूरत महसूस की जाती है जो अपने कर्त्तव्य को,अपने दायित्त्वों को पूरी तरह से निभाता हो।परंतु ऐसे व्यक्ति बहुत कम होते हैं और ऐसे व्यक्तियों की कद्र करने वालों की भी दुनिया में कमी नहीं है।

5.अवसर को पहचानने का दृष्टान्त (A vision of Recognizing Opportunity):

  • एक विद्यार्थी उच्च अध्ययन के लिए गांव छोड़कर शहर चला गया।निर्धनता के कारण पढ़ाई का खर्च मेहनत-मजदूरी करके निकालता था।एक बार लेब असिस्टेंट के लिए भर्ती निकली।हायर सैकण्डरी के अंकों के आधार पर भर्ती की जानी थी।वह विद्यार्थी रोजगार कार्यालय में गया तथा आवेदन पत्र में आवश्यक खाना पूर्ति करने के लिए बेंच पर बैठ गया।तभी एक दूसरा युवक उसके पास आकर बैठ गया।युवक ने विद्यार्थी से पूछा कि क्या कर रहे हो?विद्यार्थी ने उत्तर दिया कि वह लेब असिस्टेंट के पद के लिए आवेदन कर रहा है।उस युवक ने हायर सैकण्डरी की अंक तालिका देखने के लिए माँगी।विद्यार्थी ने फाॅर्म  में से अंक तालिका (प्रमाणित प्रति) निकालकर उस युवक को दे दी।थोड़ी देर में विद्यार्थी ने समस्त खानापूर्ति करके और आवेदन पत्र के साथ आवश्यक प्रमाण पत्र नत्थी कर दिए।
  • ज्योंही वह विद्यार्थी उठा त्योंही उस युवक ने वह अंकतालिका लौटा दी।जल्दी-जल्दी में विद्यार्थी को यह ध्यान नहीं रहा कि यह अंकतालिका आवेदन पत्र में से निकाल कर दी गई है।अतः उस विद्यार्थी ने अंकतालिका फाईल में रख ली।लेब असिस्टेंट की भर्ती हायर सैकण्डरी गणित विषय वाले विद्यार्थियों से ही की जानी थी।वह विद्यार्थी गणित से बीएससी करने शहर गया हुआ था।
  • इसके पश्चात विद्यार्थी ने आवेदन पत्र रोजगार कार्यालय में जमा करा दिया।परन्तु उस विद्यार्थी के मन में एक सन्देह बना हुआ था कि कहीं आवेदन पत्र में कोई खामी रह गई तो आवेदन पत्र को निरस्त कर दिया जाएगा।इसलिए उसने अपने परिचित एक शिक्षक से संपर्क किया।वे शिक्षक संयोगवश उसी विद्यालय में पढ़ाते थे जिसमें लेब असिस्टेंट के लिए मेरिट लिस्ट बनाई जा रही थी।परन्तु उन शिक्षक महोदय ने गम्भीरता से उस विद्यार्थी की बात को नहीं लिया तथा आश्वासन देकर विदा कर दिया।
  • कुछ दिनों बाद लैब असिस्टेंट की मेरिट लिस्ट जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में जारी कर दी।उस विद्यार्थी का उस लिस्ट में कहीं भी नम्बर नहीं था जबकि उससे कम अंक प्राप्त करने वाले का चयन हो गया था।
  • उस विद्यार्थी ने जिला शिक्षा अधिकारी से शिकायत की।जिला शिक्षा अधिकारी ने तत्काल उस शिकायत पत्र को विद्यालय के प्राचार्य को अग्रेषित कर दिया और जवाब मांगा।वह विद्यार्थी शिकायत पत्र लेकर तथा अपने परिचित शिक्षक को साथ लेकर संबंधित विद्यालय में गया।मेरिट लिस्ट की जांच की गई तो उसमें विद्यार्थी का नाम रजिस्टर में अंकित था परन्तु अंक तालिका के अभाव में नोट डाल रखा था कि निरस्त किया गया।प्राचार्य ने शिक्षक को उलाहना देते हुए कहा कि अंक तालिका की पूर्ति तो बाद में भी की जा सकती थी।यदि यह आपके परिचित और रिश्तेदार हैं तो आपको ध्यान रखना चाहिए।इस प्रकार विद्यार्थी ने जल्दबाजी में एक सुअवसर को गँवा दिया।
  • उपर्युक्त आर्टिकल में छात्र-छात्राएं अवसर को कैसे पहचाने? (How Do Students Recognize Opportunity?),गणित के छात्र-छात्राएं अवसर से कैसे लाभ उठाएं? (How Do Mathematics Students Take Advantage of Opportunity?) के बारे में बताया गया है।

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6.गणित के छात्र का सफाई का ज्ञान (हास्य-व्यंग्य) (Mathematics Student’s Knowledge of Cleanliness) (Humour-Satire):

  • जज (नकल करने वाले गणित छात्र से):आपको अपनी सफाई में क्या कहना है?
  • नकलची छात्र:मैं तो गणित का अध्ययन करता हूँ।सफाई से मेरा कोई लेना-देना नहीं है।मेरे कपड़ों और कमरे की सफाई तो नौकरानी करती है।सफाई के बारे में तो उसे ही ज्ञान है।सफाई का ज्ञान तो मुझे बिल्कुल नहीं है।इसलिए सफाई के बारे में जो कुछ पूछना है वह हमारी नौकरानी से ही पूछा जाए,वही बता सकती है।

7.छात्र-छात्राएं अवसर को कैसे पहचाने? (Frequently Asked Questions Related to How Do Students Recognize Opportunity?),गणित के छात्र-छात्राएं अवसर से कैसे लाभ उठाएं? (How Do Mathematics Students Take Advantage of Opportunity?) से सम्बन्धित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:

प्रश्न:1.अवसर को कैसे पहचानें? (How to Recognize the Opportunity?):

उत्तर:समस्याएं,अध्ययन में आने वाली समस्याएं,बुराई को दूर करने में किया जाने वाला संघर्ष,सावधानी,प्रयत्न (पुरुषार्थ),जागरूकता तथा बोध इत्यादि ही अवसर को पहचानने की अद्भुत क्षमता प्रदान करते हैं।

प्रश्न:2.अवसर कहां छुपे रहते हैं? (Where are the Opportunities Hidden?):

विघ्न,बाधाओं,संकटों,संघर्षों,प्रतिकूल परिस्थितियों,समस्याओं व कठिनाइयों को सुलझाते हैं और उनका डटकर मुकाबला करते हैं तो उनके गर्भ में ही सुनहरे अवसर छिपे हुए मिलते हैं और प्रकट हो जाते हैं।

प्रश्न:3.अवसरवादी से क्या तात्पर्य है? (What Do You Mean by Opportunist?):

उत्तर:अवसरवादी छात्र-छात्राएं व व्यक्ति न अपनी योग्यता को निखारता,तराशता,उभारता है,न संघर्ष करता है वह तो भाग्य के भरोसे हाथ पर हाथ धरकर बैठा रहता है।अवसरवादी केवल स्वयं के लाभ के अलावा अन्य किसी को कुछ भी नहीं देता है।

  • उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर द्वारा छात्र-छात्राएं अवसर को कैसे पहचाने? (How Do Students Recognize Opportunity?),गणित के छात्र-छात्राएं अवसर से कैसे लाभ उठाएं? (How Do Mathematics Students Take Advantage of Opportunity?) के बारे में ओर अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
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