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Bharat Ke Deshbhakt Baniye: 6 Easy Ways to Become a True Patriot

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3 3.भारत माता की अस्मिता की रक्षा करें (Protect the identity of Mother India):

1.भारत के देशभक्त बनिए: देशभक्त बनने के 6 आसान तरीके (Bharat Ke Deshbhakt Baniye: 6 Easy Ways to Become a True Patriot):

  • भारत के देशभक्त बनिए (Bharat Ke Deshbhakt Baniye) के इस आर्टिकल में पढ़िए कि देशभक्त बनने के मायने क्या हैं? एक सच्चा सच्चा देशभक्त कौन होता है और सच्चा देशभक्त बनने के लिए कौन-कौनसे गुण होने चाहिए?

Also Available in Hindi:What Will Be Scenario of 21st Century?

2.हमारे माँगने की प्रवृत्ति (Our tendency to demand):

  • हमारी माँगें पूरी हों,हमारी माँगें पूरी हों”:इस नारे से आजकल समस्त दिशाएं गूँजती रहती हैं।आज जिधर देखते हैं,उधर माँगें ही मांगे हैं।विद्यार्थी हो या अध्यापक,मजदूर हो या किसान,कर्मचारी हों अथवा अधिकारी,डॉक्टर हो या इंजीनियर-सब माँगें लेकर खड़े हैं,सब माँग रहे हैं।मानों हमारे देश में भिखारियों की जमात एकत्र हो गई है,हमारा सारा का सारा राष्ट्र भिखारी हो चला है।क्या हमने,आपने कभी यह विचार किया है कि जब पूरा राष्ट्र माँग रहा है,तब देने वाला कौन है,क्या वह आसमान से टपकेगा?
  • हम माँग शासन से करते हैं और समझते है कि शासन हमारी समस्त आवश्यकताओं की पूर्ति कर देगा।प्रकारान्तर से हम अपने अवचेतन में यह मान बैठे हैं कि हमारी समस्त आवश्यकताओं की पूर्ति का उत्तरदायित्व सरकार का है।कैसी विडम्बना है कि राजनीति का व्यवसाय करने वालों की सब्जबाग दिखाने वाली बातों में आकर हम निकम्मे होते जा रहे हैं,उद्यमहीनता को पुरुषार्थ का लक्षण मान बैठे हैं।लुभावने वायदों में पड़कर हमारी मानसिकता विकृत हो गई है,हम अपने स्वाभिमान को भूलकर केवल दीनता प्रदर्शित करने वाले भिखारी बन बैठे हैं।
  • शासन या सरकार कहाँ से देती है अथवा देगी-क्या हमने कभी इस पर विचार किया है? देने वाली है रत्नगर्भा हमारी भारतमाता उर्वरा भूमि,अनेक पर्वतों उनसे निकलने वाली अमृतमयी नदियों,उसके वनों में उत्पन्न होने वाली सम्पदा,खनिज,आदि उसकी सम्पत्ति के विपुल भण्डार हैं।सरकार इनका दोहन करती है,प्रशासन उसका वितरण करता है।ऐसा करते हुए शासन-प्रशासन बिचौलियों के रूप में कितनी दलाली खा जाता है-इसका लेखा किसके पास है?
  • अनेकानेक घोटालों का पर्दाफ़ाश इसकी झलक यदा-कदा दे जाता है।हम और आप यदि भारतमाता की वेदना को सुनने-जानने का प्रयत्न करेंगे,तो वह यह कहती हुई सुनाई पड़ेगी-मेरे बेटों,तुम्हारी आवश्यकताओं की पूर्ति के नाम पर सरकारी अफसरों ने मेरी सम्पदा का मनमाना दुरुपयोग किया है।वनों को उजाड़ दिया है,वनों को उजाड़ दिया है,नदियों को सुखा दिया है,खदानों को खाली कर दिया है तथा रासायनिक खादें डाल-डाल कर मेरी भूमि को विषाक्त बना दिया है आदि। यह सब किया जाता है स्वार्थपूर्ति के लिए अपने घरों को भरने के लिए,परन्तु नाम लिया जाता है तुम्हारा।दुर्भाग्य यह है कि तुमने उनके इन कारनामों की उपेक्षा ही नहीं की है,अपितु आलसी और लालची बन गए हो।इतना पढ़-लिखकर,इतनी उपाधियाँ एकत्र करके क्या तुम इतना भी नहीं समझते हो कि देने वाली तो मैं हूँ,शासन-प्रशासन तो मेरे कारिंदे और मुनीम है।ये तुमको क्या दे सकते हैं? परन्तु मैं कब तक देती रहूंगी,कब तक दे सकूँगी? खाते-खाते तो कुबेर का भी खजाना खाली हो जाता है,बड़े-बड़े कुएं भी रीते हो जाते हैं?

3.भारत माता की अस्मिता की रक्षा करें (Protect the identity of Mother India):

  • माता पडी है जेल में,जाकर उसे छुड़ाए कौन?
    देखें गुलाम कौम थे,मुल्क के काम आए कौन?
    इस आवाज को सुनकर अनगिनत नौनिहाल निकल कर आ गए थे।परन्तु आज मेरी आवाज सुनने वाले बेटों का अभाव हो गया है।
    आज वस्तुस्थिति यह है कि प्रत्येक व्यक्ति निर्धन और सम्पन्न माँग करता हुआ दिखाई देता है।ऐसा लगता है कि पूरा भारतवर्ष दीन-हीन और विपन्न हो गया है।दूसरी ओर हम रहन-सहन के स्तर को ऊँचा उठा देने का दम्भ भरते है और तत्सम्बन्धी आँकडे प्रस्तुत करते हैं।विदेशी ऋण के भरोसे हम सम्पन्नता का नाटक करते हैं। विपन्नता का स्वांग करके सम्पन्न बनने के लिए धमाचौकड़ी के फेर में हम अपनी अस्मिता को भूल गए हैं।
  • ऐसा क्यों न हो? अपने ऋणदाता देशों के यहाँ हमने अपनी राष्ट्रीय स्वाभिमान को गिरवी जो रख दिया है। राष्ट्रीय अस्मिता की आत्महत्या का ऐसा उदाहरण विश्व इतिहास में खोजने पर भी नहीं मिलेगा।एक ओर भारतीय स्वतंत्रता की स्वर्ण जयन्ती मनाने के नाम पर हम स्वर्ण-वर्षा कर रहे हैं और दूसरी ओर अपनी भुखमरी के नारे लगाकर आन्दोलन कर रहे हैं।कुल जमा,स्वार्थ की रोकड़ बाकी यह है कि स्वर्ण जयन्ती का उत्सव सरकारी जश्न बनकर रह गया है।अपनी गरीबी एवं दीनता को मिटाने के लिए हमने अपनी आँखें बहुउद्देशीय विदेशी कम्पनियाँ की दीवालों पर लगा दी है।
  • आज आवश्यकता इस बात की है कि हमारे नवयुवक नए सिरे से चिन्तन करें:कि अपनी भारतमाता को हम क्या दे सकते हैं? हम उसकी सम्पदा की लूट की योजनाओं को निरस्त करके उसकी लज्जा और उसकी अस्मिता की बात करें।
  • मेरे शान्त मन ने भारत माता की चीत्कार सुनी है,आप चाहेंगे तो आप भी सुन सकेंगे:”है कोई वीर,जो भारत को उसके गौरव को,उसकी उस शक्ति को वापिस दिला सके,जिसके कारण समस्त संसार उसको नमन करता था?”
  • राम,कृष्ण,बुद्ध,महावीर,कबीर,नानक,प्रताप,शिवाजी,लक्ष्मीबाई,दयानन्द,तिलक,गांधी,भगतसिंह,सुभाष आदि को जन्म देने वाली भारतभूमि को क्या बंध्या समझ लिया गया है?
  • मार्टिन किंग लूथर ने एक बार कहा था।”किसी राष्ट्र की शक्ति की परख इससे नहीं होती कि उसके कोषागार में कितनी दौलत जमा है,न इस पर निर्भर करती है कि उस राष्ट्र में अपने बचाव के लिए कितनी किलेबन्दी कर रखी है और न इस पर ही निर्भर करती है कि उस देश की अट्टालिकाएं कितनी भव्य अथवा गगनचुम्बी है वरन किसी देश की शक्ति का मूल आधार है तो केवल यह कि उस देश के सपूत कितने जाग्रत है,कितने पुरुषार्थी है,कितने चरित्रवान हैं।”

Also Available in English:Patriot

4.भारत देशभक्त के गुण और कर्त्तव्य (Qualities and duties of an Indian patriot):

  • आज हमको सुनने को मिलता है और उन कथनों को लेकर वाद-विवाद प्रतियोगिताएं भी होती हैं कि हमारे देश में चरित्र नाम की कोई वस्तु नहीं रह गई है,नैतिक पतन हमारी राष्ट्रीय समस्या बन गया है,कहीं कोई अनुशासन नहीं रह गया है,चारों ओर स्वार्थपरता,लूट-खसोट,छीना-झपटी,हत्या,बलात्कार,अपहरण आदि का बोल बाला है आदि।इतना ही नहीं,विदेशी पत्रकार लिखते हैं कि भारत के बारे में चर्चा करना अपराधियों के बारे में लिखने के समान है-आदि
    हम चाहते हैं कि हमारे युवक-युवतियों यह संकल्प करें कि हम भारतमाता की अस्मिता एवं लज्जा की रक्षा को अपने जीवन का सर्वोपरि उद्देश्य मानेंगे,उससे माँगना बन्द करेंगे तथा यह सोचेंगे कि अपनी माता के प्रति हम क्या सेवा कर सकते है।हमें याद रखना चाहिए कि माँग करना शोषण करने के समान है,जो हाथ उत्पादन,अर्जन एवं दान देने के लिए बने हैं,उनको भीख मांगने के लिए आगे बढ़ाना सर्जनहारे के प्रति अपराध है।माँगना ही है,तो सेवाभावी सपूत बनने के लिए आशीर्वाद माँगे।
  • देशभक्त के गुण और कर्त्तव्य (Virtues and duties of a patriot)
  • एक सच्चे देशभक्त में देश के प्रति समर्पण,सम्मान और उत्तरदायित्व की भावना होती है।मुख्य गुण और कर्त्तव्य निम्नलिखित हैं:
  • देशभक्त के प्रमुख गुण (Key qualities of a patriot):
  • निःस्वार्थ सेवा और समर्पण: अपने व्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर उठकर देश के हित को प्राथमिकता देना।
    संविधान और नियमों का सम्मान: देश के कानून, संविधान,राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रगान का सम्मान करना।
    सद्भाव और भाईचारा: धर्म, जाति, भाषा या क्षेत्र के भेदभाव से परे हटकर समाज में एकता और शांति बनाए रखना।
    ईमानदारी और सत्यनिष्ठा: सार्वजनिक जीवन और कार्यक्षेत्र में भ्रष्टाचार से दूर रहना तथा ईमानदारी का परिचय देना।
    देशभक्त के मुख्य कर्त्तव्य (The main duties of a patriot):
  • सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा: बस, ट्रेन, पार्क और सरकारी भवनों जैसी राष्ट्रीय संपत्ति की रक्षा करना और उन्हें नुकसान न पहुँचाना।
    पर्यावरण और स्वच्छता का ध्यान: अपने आसपास स्वच्छता बनाए रखना, पेड़-पौधे लगाना और जल व ऊर्जा का संरक्षण करना।
    सक्रिय नागरिकता: मतदान में भाग लेना,सही प्रतिनिधि चुनना और कर (Tax) का सही समय पर भुगतान करना।
    सामाजिक बुराइयों का विरोध: बाल विवाह,दहेज प्रथा, और अंधविश्वास जैसी कुरीतियों के खिलाफ आवाज उठाना तथा शिक्षा को बढ़ावा देना।

5.सच्चे देशभक्त बनने के आसान तरीके (Easy ways to become a true patriot):

  • हमें अपनी माँगने की प्रवृत्ति के बजाय देने की प्रवृत्ति का भाव जगाना होगा।देने का भाव के लिए त्याग और समर्पण की भावना का होना जरूरी है।हमारी विरासत है सांस्कृतिक और ऐतिहासिक गौरव,उसकी हमें प्राणपण से रक्षा करनी चाहिए।सत्यनिष्ठा को जीवन में अपनाना चाहिए।सत्यनिष्ठा से हमारे अन्य गुण खिल उठते हैं,चमकने लगते हैं।परोपकार की भावना से स्वार्थ की भावना का लोप होता है।दूसरों का जितना सहयोग बन पड़े,उतना सहयोग करना चाहिए।
    जीवन में ईमानदारी का पालन करना चाहिए।ईमानदारी का पालन करने से हम हर कार्य को पूरी निष्ठा के साथ करने लगते हैं।विद्यार्थियों को आपस में एक-दूसरे का सहयोग करना चाहिए।
  • जीवन में नियम और अनुशासन का पालन करना चाहिए।नियमबद्धता और अनुशासन से हर कार्य को नियत समय पर पूरी कुशलता के साथ करते है।हमारे हर कार्य में देशभक्ति की भावना झलकनी चाहिए। देशभक्ति का भाव केवल दिखाने के लिए नहीं बल्कि सच्ची निष्ठा के साथ करना चाहिए।एक सच्चा विद्यार्थी भी देशभक्त हो सकता है।केवल पढ़ाई करते रहना,परीक्षा में अंक अर्जित कर लेना ही पर्याप्त नहीं है।देशभक्ति हमारे व्यक्तित्व का वह गुण है जिससे सारे गुणों का सौन्दर्य निखर उठता है।
  • विद्यार्थी सार्वजनिक,व्यक्तिगत और सामाजिक कार्यों को पूरी निष्ठा,ईमानदारी और कर्त्तव्यनिष्ठा के साथ सम्पन्न करता है।समय का अपव्यप बिल्कुल नहीं करता है।विद्यार्थी देश का भविष्य है,यह इस रूप में है कि कल को जब वह कोई भी जॉब या कार्य करेगा तो उससे देश का गौरव बढ़ेगा।विद्यार्थी काल ही ऐसा समय होता है जिसमें हर गुण की नींव लगती है और उसके बाद वे गुण पुष्पित और पल्लवित होते हैं।कुछ विद्यार्थी अच्छे गुणों को धारण करना जरूरी नहीं समझते हैं और लापरवाह रहते हैं।ऐसे विद्यार्थी आगे जाकर देश के लिए भार स्वरूप होते हैं।वे हर काम को लाभ-हानि की नजर से देखते हैं।सब कार्यों के पीछे स्वार्थ की भावना रहती है।
  • इससे उनकी जड़े कमजोर हो जाती है।सत्संग,स्वाध्याय,अध्ययन-मनन और चिन्तन से ऐसे गुणों की वृद्धि होती है।अतः सत्साहित्य का अध्ययन करना चाहिए और जो भी पढ़ा गया है उसके बारे में चिन्तन-मनन करें।दैनिक जीवन में उसका अभ्यास करें,आचरण में उतारे तभी जीवन की सार्थकता है।

6.भारत के देशभक्त बनिए: देशभक्त बनने के 6 आसान तरीके का सारांश (Summary of Bharat Ke Deshbhakt Baniye: 6 Easy Ways to Become a True Patriot): (A)छात्र-छात्राओं से देश भक्ति से सम्बच्चित कुछ उपयोगी प्रश्न (Some Useful Questions for Students Regarding Patriotism):

  • (1.)हम राष्ट्रीय सम्पत्ति को नुकसान क्यों पहुँचाते हैं? (Why do we damage national property?)
    (2.)देशभक्ति का एक छात्र-छात्रा के लिए क्या मायने हैं? (What does patriotism mean to a student?)
    (3.) छात्र-छात्रा में देशभक्ति का भाव किस प्रकार जगाया जा सकता है। (How can the spirit of patriotism be instilled in students?)
    (4.) यदि आप अकेले हो तो बहुत से लोगों को राष्ट्रीय सम्पत्ति का नुकसान करने से कैसे रोक सकते हैं? (If you are alone,how can you stop a large group of people from damaging national property?)
    (5.)आम लोगों की देशभक्ति के बारे में क्या धारणा है? (What is the general public’s perception of patriotism?)
    (6.) हरेक में राष्ट्रभक्ति की भावना जगाने के लिए क्या किया जाना चाहिए? (What should be done to awaken the spirit of patriotism in everyone?)
    (7.) क्या बसों में आग लगाना,तोड़-फोड़ करना,सरकारी भवनों को क्षति पहुँचाना राष्ट्रभक्ति के दायरे में नहीं है? (Do acts like torching buses,vandalism, and damaging government buildings fall outside the realm of patriotism?)
    (8.)आप राष्ट्रभक्ति को किस तरह मापते हैं? (How do you measure patriotism?)
    (9.) क्या राष्ट्रभक्ति स्वयं के प्रति सच्ची निष्ठा का भाग नहीं है? (Is patriotism not a part of true loyalty to oneself?)
    (10.) बड़े-बड़े अधिकारी/ नेताओं में राष्ट्रभक्ति क्यों नहीं है? (Why do high-ranking officials and leaders lack patriotism?)
  • (B)सच्चे देशभक्त बनने के मुख्य बिन्दु (Key points to becoming a true patriot):
    (1.) हमारे माँगने की प्रवृत्ति (Our tendency to demand)
    (2.) भारत माता की अस्मिता की रक्षा करें (Protect the identity of Mother India)
    (3.) भारत देशभक्त के गुण और कर्त्तव्य (Qualities and duties of an Indian patriot)
    (4.) सच्चे देशभक्त बनने के आसान तरीके (Easy ways to become a true patriot)
    उपर्युक्त आर्टिकल में भारत के देशभक्त बनिए: देशभक्त बनने के 6 आसान तरीके (Bharat Ke Deshbhakt Baniye: 6 Easy Ways to Become a True Patriot) के बारे में विस्तार और गहराई से बताया गया है।
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Also Available in Hindi:Review of Secularism in India

7.राष्ट्रीय सम्पत्ति का छात्र द्वारा दुरुपयोग (हास्य-व्यंग्य) (Misuse of National Property by Students) (Satire):

  • टीचर (छात्र से): सार्वजनिक टंकी का नल खुला क्यों छोड़ रखा है? पानी पीने के बाद बन्द करना चाहिए।
  • छात्र: खुला छोड़ने पर मेरा और आपका क्या नुकसान है?
  • टीचर:यह राष्ट्रीय सम्पत्ति है।और राष्ट्रीय संपत्ति की सुरक्षा करना हमारा कर्त्तव्य है।
  • छात्र (व्यंग्यपूर्वक):आप कुछ ज्यादा ही राष्ट्र‌भक्ति नहीं दिखा रहे हो।
  • टीचर: तुम्हें पता होना चाहिए।राष्ट्रीय सम्पत्ति हमारे ही द्वारा कर अदा करने पर जुड़ती है।इसकी सुरक्षा करना हमारा दायित्व है। राष्ट्रीय सम्पत्ति कन्यादान की तरह होती है।जिसका दुरुपयोग और सदु‌पयोग हमारे हाथों में है।
  • टीचर (झुंझलाकर): मुझे अफसोस है कि एक पढ़े-लिखे व्यक्ति को इतनी बातें बतानी पड़ रही है।अशिक्षित व्यक्ति तो कितना नुकसान कर सकता है।तुम्हारी कुहनी पर चोट लगे तब तुम्हें दर्द महसूस होगा।
  • यह सुनकर छात्र से जवाब नहीं बना और उसने नजरे झुका ली।

8.भारत के देशभक्त बनिए: देशभक्त बनने के 6 आसान तरीके (Frequently Asked Questions Related to Bharat Ke Deshbhakt Baniye: 6 Easy Ways to Become a True Patriot) से सम्बन्धित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:

प्रश्न:1.क्या देशभक्त बनने के गुण व्यक्तिगत होते हैं? (Are the qualities of being a patriot personal?):

उत्तर:देशभक्त बनने के गुण व्यक्तिगत ही विकसित होते हैं जैसे ईमानदारी,अनुशासन,नियम पालन,वोटिंग करना आदि।

प्रश्न:2.विद्यार्थी देशभक्ति के गुण कैसे विकसित कर सकता है? (How can a student develop patriotic qualities?):

उत्तर:पढ़ाई के साथ-साथ उसे स्वाध्याय और सत्संग तथा मनन-चिन्तन भी करना चाहिए।

प्रश्न:3.क्या देशभक्त सीमा पर जवान ही होता है? (Is a patriot a soldier on the border?):

उत्तर:केवल जवान ही नहीं होता है बल्कि हर व्यक्ति देशभक्त हो सकता है और होना चाहिए।

  • उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर द्वारा भारत के देशभक्त बनिए: देशभक्त बनने के 6 आसान तरीके (Bharat Ke Deshbhakt Baniye: 6 Easy Ways to Become a True Patriot) की प्राइमरी टर्म्स के बारे जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
  • *”यह आर्टिकल **Satyam Mathematics** ब्लॉग पर **Satyam Coaching Centre** के द्वारा तैयार किया गया है।”*

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