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Adoption of E-Learning during Lockdown

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1.भारत में लॉकडाउन के दौरान ई-लर्निंग को अपनाना (Adoption of E-Learning during Lockdown in India),ई-लर्निंग को लागू करते समय आपको जिन कारकों पर विचार करना चाहिए (Factors You Need to Consider When Implementing E-Learning)-

  • कोरोनावायरस से फैली महामारी कोविड-19 के कारण तथा भारत में लॉकडाउन के दौरान ई-लर्निंग को अपनाना (Adoption of E-Learning during Lockdown in India) आवश्यक हो गया है।
  • भारत में स्कूलों तथा उच्च शिक्षण संस्थानों में नामांकित विद्यार्थियों की संख्या यूरोप तथा अमेरिका की तुलना में बहुत अधिक है।यहां तक कि यूरोप के कई देशों की जनसंख्या से अधिक है।
  • अब यदि क्लासरूम और ब्लैक बोर्ड तक ही शिक्षा को सीमित कर दिया जाएगा तो लाखों-करोड़ों छात्र-छात्राएं शिक्षा से वंचित रह सकते हैं।
  • प्राचीन काल की तुलना में आधुनिक समय में शिक्षा में बहुत बदलाव आ गया है।इसी प्रकार आधुनिक समय में वैश्विक महामारी,खराब मौसम,क्षेत्र विशेष में कर्फ्यू,उपद्रव तथा अन्य अप्रत्याशित घटनाओं के कारण शिक्षण संस्थाओं को बंद करना पड़ता है।अतः ई लर्निंग को अपनाना आवश्यकता बनता जा रहा है।वैसे भी सभी छात्र-छात्राओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना क्लासरूम तथा फिजिकल एजुकेशन के द्वारा संभव नहीं है।
  • इन सभी कारणों के कारण शिक्षा क्षेत्र को ऑनलाइन शिक्षा जैसा माध्यम अपनाना समय की आवश्यकता है।यदि भारत को आत्मनिर्भर बनाना है तथा विकसित करना है तो युवा पीढ़ी को शिक्षित करने के लिए लिए ऑनलाइन एजुकेशन उपलब्ध कराना (Adoption of E-Learning during Lockdown in India) ही होगा।
  • ऑनलाइन शिक्षा के लिए संसाधन और इच्छाशक्ति दोनों की आवश्यकता है।हालांकि गत एक वर्ष में लॉकडाउन के कारण देश के कर्णधारों तथा शिक्षाविदों ने इन दोनों ही मोर्चो पर उत्साहजनक प्रदर्शन किया है।
  • ऑनलाइन शिक्षा के क्षेत्र में भारत एक मानक बन सकता है।केंद्रीय सरकार ने भी ऑनलाइन के महत्त्व को समझा है इसलिए नवीन राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को ऑनलाइन शिक्षा के साथ सेट अप किया है।
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(1.)परंपरागत शिक्षा की अड़चनें (Bottlenecks in Traditional Education)-

  • परंपरागत शिक्षा व्यवस्था में कुछ मौलिक अड़चनें हैं।उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रवेश का मानक इतना उच्च स्तर है कि ग्रामीण पृष्ठभूमि के छात्र-छात्राएं उस मानक के आसपास भी नहीं फटकते हैं।इसलिए ग्रामीण क्षेत्र के छात्र छात्राओं का प्रवेश इन उत्कृष्ट शिक्षण संस्थानों में नहीं हो पाता है। दिल्ली विश्वविद्यालय जैसे प्रतिष्ठित महाविद्यालयों में प्रवेश का पैमाना 99% और यहां तक शत-प्रतिशत अंकों तक जाता है।
  • आर्थिक व सामाजिक रूप से पिछड़े वर्ग तथा ग्रामीण पृष्ठभूमि के छात्र-छात्राओं के लिए 90 प्रतिशत का स्तर पाना ही बहुत मुश्किल है।

(2.)ऑनलाइन शिक्षा की विशेषता (Characteristic of Online Education)-

  • परंपरागत शिक्षण संस्थानों में प्रवेश के मानक के विपरीत ऑनलाइन शिक्षा में प्रवेश विद्यार्थियों की इच्छाशक्ति के आधार पर होता है।
  • विश्व-व्यवस्था में ऑनलाइन शिक्षा के माध्यम से ही भारत की धाक जम सकती है।भारत में ऑनलाइन एजुकेशन के पक्ष में कई आंकड़े हैं।
  • वर्ष 2030 तक भारत में कामगार लोगों की सबसे बड़ी संख्या होगी।भारत सरकार की योजना और सोच भी है कि उच्च शिक्षण संस्थानों में ऑनलाइन प्रवेश को दुगुना करना।
  • ऑनलाइन शिक्षा में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या संसाधनों की दृष्टि से यह संभव लगता है?इसका दूसरा पक्ष गुणवत्ता से जुड़ा हुआ है।
  • परंपरागत शिक्षा के द्वारा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना दुष्कर है।इसके लिए भारत को ऑनलाइन मोड में आना ही पड़ेगा।यह परंपरागत शिक्षा का एक सार्थक और बेहतर विकल्प है।ऑनलाइन एजुकेशन में वैश्विक समावेश की गुंजाइश भी है।
  • अतः आवश्यकता है तो विश्व के उत्कृष्ट विश्वविद्यालय जैसी सोच विकसित करने की, इससे भारत की दशा और दिशा दोनों बदल जाएगी।
  • ऑनलाइन शिक्षा में दक्षिणी एशिया,पूर्वी एशिया और अफ्रीकी देशों के करोड़ों विद्यार्थी भारत से जुड़ सकते हैं। मल्टीमीडिया के माध्यम से ऑनलाइन शिक्षा को रुचिकर और ज्ञानवर्धक बनाने में मदद मिलेगी।
  • अमेरिका के हार्वर्ड विश्वविद्यालय की 2019 में आई रिपोर्ट में इस बात की व्याख्या है कि ऑनलाइन माध्यम में छात्र-छात्राओं की शिक्षा और मूल्यांकन ज्यादा गुणवत्तापूर्ण रहा है।शिक्षक का भी विद्यार्थियों के साथ अकादमिक सम्पर्क अधिक सशक्त होता है।
  • भारत ब्राॅडबैंड मिशन के तहत 2022 तक देश के सभी गांवों और शहरों को इंटरनेट से जोड़ दिया जाएगा।इसलिए ऑनलाइन शिक्षण संस्थान या ऑनलाइन शिक्षा देश को बदलने में सफल हो सकते हैं।डिजिटल भारत दुनिया के सामने एक मानक हो सकता है।देश के पास ऑनलाइन (Adoption of E-Learning during Lockdown in India) के सारे साधन मौजूद है।आवश्यकता है तो पारंपरिक सोच के बजाए आधुनिक दृष्टिकोण अपनाने और सटीक रणनीति की।

(3.)ऑनलाइन शिक्षा में अड़चनें (Obstacles in Online Education)-

  • हालांकि ऑनलाइन शिक्षा को अपनाने में अड़चनें भी कम नहीं है।पहली चुनौती तो मानसिकता की है।पुराने और अनुभवी शिक्षक परंपरागत शिक्षा को छोड़ने के लिए तैयार नहीं है।ऑनलाइन शिक्षा के नाम पर वे विरोध की कतार में खड़े हैं।
  • पुराने और अनुभवी शिक्षकों की नजर में ऑनलाइन शिक्षा युवा पीढ़ी तथा मौजमस्ती के लिए है।उनकी नजर में ऑनलाइन शिक्षा बेहतर विकल्प नहीं हो सकती है।जबकि ऐसी बात नहीं है जब एक कम पढ़ा लिखा व्यक्ति स्मार्टफोन से डिजिटल रुपयों का लेनदेन कर सकता है तो एक अनुभवी व्यक्ति मल्टीमीडिया के प्रयोग से ऑनलाइन शिक्षा का अंग क्यों नहीं बन सकता है?
  • दूसरी चुनौती कंप्यूटर और इंटरनेट के अभाव की है।देश के कई हिस्से अभी तक पूरी तरह इंटरनेट से नहीं जुड़े हैं और कई हिस्सों में नेटवर्क की समस्या भी है।सभी छात्र-छात्राओं के पास स्मार्ट फोन और लैपटॉप नहीं है।
  • तीसरी चुनौती ऑनलाइन परीक्षा की है।कई जगहों पर पर्याप्त संसाधन या आवश्यक तकनीक नहीं है।चौथी समस्या भाषा की समस्या है।ऑनलाइन शिक्षा को सहज और सुलभ बनाने के लिए कई राज्यों में पढ़ाई-लिखाई के लिए क्षेत्रीय भाषा में होनी चाहिए।इसके लिए क्षेत्रीय भाषाओं में ऑनलाइन शिक्षा के लिए सामग्री तैयार करनी होगी।

2.भारत में लॉकडाउन के दौरान ई-लर्निंग को अपनाना का सारांश (Conclusion of Adoption of E-Learning during Lockdown in India)-

  • उपर्युक्त चुनौतियां अवश्य है परंतु ऑनलाइन शिक्षा में अपार संभावनाएं हैं।साथ ही भारत की कायापलट हो सकती है।
  • कोई भी नई चीज अपनाने में शुरू में तमाम तरह की अड़चनें होती है।परन्तु इच्छाशक्ति तथा आवश्यकता उन अड़चनों को दूर करने का मार्ग प्रदान करती है।
  • जहां चाह होती है वहां राह भी मिल ही जाती है।उपग्रह प्रक्षेपण हेतु राकेट के लिए रूस ने क्रायोजेनिक इंजन की तकनीक उपलब्ध कराने से मना कर दिया था क्योंकि अमेरिका ने रूस पर यह दबाव डालकर क्रायोजेनिक इंजन की तकनीक उपलब्ध कराने के लिए अड़ंगा डाल दिया था कि भारत इसका उपयोग मिसाइल बनाने में करेगा।परंतु भारत के वैज्ञानिकों ने हार नहीं मानी और स्वयं ही क्रायोजेनिक इंजन विकसित कर लिया है।
  • आज भारत स्वयं तथा विश्व के अन्य देशों के उपग्रह का प्रक्षेपण स्वयं कर रहा है यानी उसने आवश्यक व्यावसायिक क्षमता भी पैदा कर ली है।
  • इसी प्रकार ऑनलाइन शिक्षा में तमाम अड़चनें दूर की जा सकती हैं।इसलिए हमें अपनी मानसिकता को बदलना होगा।परम्परागत तथा फिजीकल एजुकेशन के साथ तीव्र गति से ऑनलाइन शिक्षा को अपनाना आज की आवश्यकता है।
  • उपर्युक्त विवरण में भारत में लॉकडाउन के दौरान ई-लर्निंग को अपनाना (Adoption of E-Learning during Lockdown in India) के बारे में बताया गया है।

3.ऑनलाइन सीखने में भागीदारी को प्रभावित करने वाले कारक (Factors that Influence Participation in Online Learning)-

  • निष्कर्षों ने संकेत दिया कि ऑनलाइन शिक्षार्थी भागीदारी और भागीदारी के पैटर्न निम्नलिखित कारकों से प्रभावित थे: प्रौद्योगिकी और इंटरफ़ेस विशेषताओं,सामग्री-क्षेत्र का अनुभव,छात्र भूमिकाएं और निर्देशात्मक कार्य और सूचना अधिभार।इन कारकों के बीच एक पारस्परिक व्युत्क्रम संबंध हो सकता है।
  • ऑनलाइन सीखने में भागीदारी को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारकों में समुदाय, प्रशिक्षक की भागीदारी, जीवन की विशेषताएं शामिल हैं।
  • उच्च शिक्षा में यह जांचने के लिए कि ई-लर्निंग गतिविधियों में नियमित रूप से छात्र कैसे भाग लेते हैं,किसी भी जनसांख्यिकीय या अध्ययन-संबंधित कारकों पर प्रभाव पड़ता है।

4.ऑनलाइन सीखने को बढ़ाने वाले कारक (Factors that Enhance Online Learning)-

  • पिछले PPIC अनुसंधान ने ऑनलाइन कार्यक्रमों में छात्र की सफलता सुनिश्चित करने में मदद करने के लिए पांच प्रमुख कारकों की पहचान की है:
  • कोर्स डिजाइन के लिए एक सिस्टम दृष्टिकोण का उपयोग करें।
  • पेशेवर विकास प्रदान करें।
  • छात्र अपेक्षाएं निर्धारित करें।
  • समुदाय बनाएँ।
  • ऑनलाइन एनवायरमेंट का लाभ उठाएं।
  • प्रभावी दृष्टिकोण।पाठ्यक्रम वीडियो के साथ सशक्त।संचार की शक्ति को गले लगाओ।आभासी वास्तविकता (वीआर) लचीले सबक योजनाओं को लागू करें।सक्षम और कुशल शिक्षकों की एक टीम।परिणाम-उन्मुख मूल्यांकन।कार्रवाई में तरीकों का अनुवाद करने के लिए पर्याप्त धन।

5.ऑनलाइन शिक्षा को प्रभावित करने वाले कारक (Factors Affecting Online Education)-

  • यहां ऐसे कारक हैं जो ई लर्निंग सफलता को प्रभावित करते हैं।
  • कारक 1: शिक्षार्थियों का अनुभव
  • प्रतिष्ठा
  • आत्म सम्मान।
  • आत्म-सम्मान/अनुभव की अनुभूति।
  • मौद्रिक प्रोत्साहन।
  • सामाजिक आवश्यकताएं।
  • आदर करना।
  • श्रद्धा।
  • विरासत।
  • पाठ्यक्रम प्रबंधन प्रणालियों और चर्चा बोर्ड इंटरफ़ेस में शैक्षणिक डिजाइन तत्व भागीदारी और सीखने को प्रभावित कर सकते हैं।
  • ऑनलाइन और मिश्रित शिक्षा के लिए छात्रों की प्राथमिकताएं प्रभावित करने वाले कारक: प्रेरक बनाम।  संज्ञानात्मक · ई-लर्निंग के लिए ई-प्रमाणीकरण विकसित करना।
  • ऑनलाइन कक्षाओं पर एटीट्यूड,पाठ्यक्रम,प्रेरणा, प्रौद्योगिकी और प्रशिक्षण का प्रभाव पाया गया।

6.स्कूलों में ई लर्निंग को कैसे लागू किया जाए? (How to Implement e Learning in Schools?)-

  • सफल ई-लर्निंग कार्यान्वयन के लिए 14 सर्वश्रेष्ठ अभ्यास
  • अपनी ई-लर्निंग आवश्यकताओं को पहचानें।
  • ई-लर्निंग की जरूरतों को इकट्ठा करने और दस्तावेज करने के लिए एक औपचारिक प्रक्रिया है।
  • प्रशिक्षण कार्यक्रमों का चयन करें जो ई-लर्निंग द्वारा वितरण के लिए उपयुक्त हैं।
  • अपने संगठन में ई-लर्निंग तत्परता का आकलन करें।
  • ई-लर्निंग की बाधाओं को पहचानें।
  • व्यवसाय का मामला बनाएं।
  • शीर्ष प्रबंधन में खरीद प्राप्त करें।

7.शिक्षा में ई-लर्निंग क्या है? (What is E-Learning in Education?)-

  • उत्तरी केरोलिना की ई-लर्निंग शिक्षा पहल के अनुसार, ई-लर्निंग एक पारंपरिक कक्षा के बाहर शैक्षिक पाठ्यक्रम का उपयोग करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक तकनीकों का उपयोग कर रहा है।ई-लर्निंग पाठ्यक्रम या कार्यक्रम आम तौर पर ऑनलाइन आधारित होते हैं।स्कूलों में ई-लर्निंग एकल-सेवा मॉडल नहीं है।
  • औपचारिक शिक्षण पर आधारित एक शिक्षण प्रणाली लेकिन इलेक्ट्रॉनिक संसाधनों की मदद से ई-लर्निंग के रूप में जाना जाता है।जबकि शिक्षण कक्षाओं में या उससे बाहर हो सकता है,कंप्यूटर और इंटरनेट का उपयोग ई-लर्निंग का प्रमुख घटक है।
  • ई-लर्निंग एक सस्ती (और अक्सर मुफ्त) समाधान है जो शिक्षार्थियों को उनकी जीवन शैली के आसपास सीखने की क्षमता के साथ प्रदान करता है,प्रभावी ढंग से अनुमति देता है।

8. ई लर्निंग के कारक (Factors of e Learning)-

  • ई-लर्निंग सफलता: कारक जो कार्यस्थल पर्यावरण में eLearning की प्रभावशीलता का निर्माण करते हैं
  • प्रतिष्ठा।
  • आत्मसम्मान।
  • आत्मसम्मान/उपलब्धि की भावना
  • मौद्रिक प्रोत्साहन
  • सामाजिक आवश्यकताएं
  • आदर करना।
  • संबंधितता
  • विरासत।
  • इस पेपर का लक्ष्य बहु-मापदंड विश्लेषणात्मक पदानुक्रम का उपयोग करके COVID-19 के दौरान ई-लर्निंग के लिए महत्वपूर्ण सफलता कारकों की पहचान करना था।
  • प्रकाशित ई-लर्निंग तकनीकी पहलुओं का सर्वेक्षण किया गया और उन्हें छह श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया, जिसमें पहुंच में आसानी, इंटरफ़ेस डिज़ाइन, सहभागिता का स्तर शामिल है।
  • उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर तथा विवरण के आधार पर भारत में लॉकडाउन के दौरान ई-लर्निंग को अपनाना (Adoption of E-Learning during Lockdown in India),ई-लर्निंग को लागू करते समय आपको जिन कारकों पर विचार करना चाहिए (Factors You Need to Consider When Implementing E-Learning),के बारे में जान सकते हैं।

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