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Modern Day Mathematician Saint

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1.आधुनिक युग का गणितज्ञ संत (Modern Day Mathematician Saint),नवयुग का महान गणितज्ञ (The Great Mathematician of New Age):

  • आधुनिक युग का गणितज्ञ संत (Modern Day Mathematician Saint) देवव्रत को एक करिश्माई व्यक्तित्त्व कहना वैसा ही अटपटा लगता है जैसे किसी भव्य स्मारक को एक अच्छा गुरुकुल कहना।सचमुच देवव्रत की छवि उसके अनुयायियों में किसी आधुनिक युगीन देवता जैसी ही है और यह बात उस समय असंदिग्ध रूप से सच साबित हो गई जब पिछले दिनों इस गणितज्ञ ने एक त्रिदिवसीय विचार गोष्ठी का आयोजन किया।इस आयोजन में अपार सुशिक्षित और समृद्ध-संपन्न लोगों के बीच अत्यंत लोकप्रिय इस व्यक्ति की आधुनिक दिनचर्या देखते ही बनती थी।आयोजन में भाग लेने वाले लोगों की प्रतिक्रिया थी कि देवव्रत कोई मामूली आदमी नहीं है।यह तो आज की दुनिया का सबसे महान गणितज्ञ है।यह इसी महान् व्यक्तित्त्व का करिश्मा है कि ग्रीष्मकालीन शिविर में भी अपार जनसमूह भाग ले रहा है।अब वह दुनिया का महानतम गणितज्ञ एक संत है या नहीं इस पर भले ही कुछ लोगों की राय अलग हो परंतु इसमें कोई दो राय नहीं है कि अपने अनुयायियों की बढ़ती संख्या के बीच भारत में जन्मा गणितज्ञ आज के समाज में श्रद्धा का केंद्र बन चुका है।आधुनिक गणित बीजगणित और ज्यामिति का यही विशेषज्ञ है जो भारतीय गणित का सबसे बड़ा प्रचारक बन गया है और इसी कारण विश्व के विकसित देशों में रहने वाले भारतीयों के बीच अधिक प्रसिद्ध और लोकप्रिय हो उठा है।
  • गणितज्ञ देवव्रत ने गणित में अनेक लेख लिखे हैं जो बहुत पसंद किए जाते हैं और सर्वाधिक पढ़ने वालों की सूची में बराबर प्रकाशित होता रहता है।
  • एक समय था जब उसके काल्पनिक एवं अकाल्पनिक लेखों को बहुत कम पढ़ा जाता था।उसने गणित में सफलता अर्जित करने के उपायों,जाॅब प्राप्त करने की युक्तियां ,प्रतिभा विकास करने की युक्तियां जैसे विषय पर जो कुछ भी लिखा है उसमें आध्यात्मिकता का पुट अधिक है।इन लेखों में भारतीय संस्कृति तथा लोकप्रिय विज्ञान का अच्छा सम्मिश्रण है और उसने युवक-युवतियों को खासा आकर्षित किया है।
  • गणितज्ञ देवव्रत ने भारतीयों को ही सबसे अधिक आकृष्ट किया है।ये सभी लोग सुशिक्षित होने के साथ-साथ समृद्धि एवं संपन्नताओं में भी किसी से पीछे नहीं है।इनमें अधिकतर तो पाश्चात्य शिक्षा पद्धति में पढ़े-लिखे युवक-युवतियां ही हैं।अब सवाल उठता है कि इस आकर्षण का आखिर कारण क्या है? विभिन्न गणित में पढ़े-लिखे युवक-युवतियों का कहना है कि यह गणितज्ञ देवव्रत ही है जिनके लेख पढ़कर वे और उनके साथी भारत की उस महत्त्वपूर्ण आस्था से पुनः जुड़ सके हैं जो अन्यथा वे खो चुके थे।आधुनिक जीवन शैली में अत्यंत व्यस्तता जनित तनावपूर्ण महसूस कर रहे थे और भारतीय संस्कृति और विरासत को भूल चुके थे।गणितज्ञ देवव्रत के लेखों से ध्यान एवं योग में विश्वास फिर लौटा है और उसके महत्त्व एवं उपयोगिता को समझकर आत्म-साक्षात्कार,अन्तर्ज्ञान की ओर वापस लौट सके हैं।
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2.गणितज्ञ का बहुआयामी व्यक्तित्त्व (Multidimensional Personality of a Mathematician):

  • देवव्रत की दार्शनिक एवं आध्यात्मिक विचारधारा भारतीयों के लिए नई नहीं है।अपने भाषणों और लेखों में अपने अनुभव तो अक्सर सुनाया ही करते हैं,प्रेरक दृष्टांत भी गूंथ दिया करते हैं।यद्यपि उन्होंने मानसिक तनाव को कम करने के लिए इन दार्शनिक विचारों को थोड़ा आधुनिक मोड़ दे दिया है।लेकिन देखा जाए तो उनके विचार-श्रृंखला का मूल स्रोत प्राचीन भारतीय संस्कृति से जुड़ा हुआ है और यह बताना कोई जरूरी नहीं है कि विश्व का प्राचीनतम धर्म-हिंदू धर्म तथा संसार का आदि धर्म वेदों के प्रकाश से ही प्रकाशित है।फिर भी आश्चर्य है कि भारतीय अपने मूल ग्रंथों के बजाय गणितज्ञ देवव्रत की ओर मुड़ रहे हैं।इसके कारण भी कोई अनजान नहीं है।
  • पहला कारण तो यह है कि गणितज्ञ देवव्रत ने इन ग्रंथों के मूल उपदेशों को आधुनिक जरूरतों के अनुकूल व्यवस्थित करके प्रस्तुत किया है और मोक्ष (मुक्ति) को भी ‘आधुनिक जीवन की तनावकारी चूहा-दौड़’ से छुटकारे के रूप में परिभाषित किया है,जो आज की भौतिकवादी जीवन-शैली से उत्पन्न तमाम तनावों से मुक्ति की आकांक्षा ही है।जिसने दुनिया के मशहूर लोगों और हस्तियों को भी अपनी ओर आकर्षित किया है।
  • देवव्रत का व्यक्तित्त्व बहुआयामी है।उनके लेखों में रसोद्रेक का आभास होता है।जब वे लेख लिखते हैं और भाषण करते हैं तो युवक-युवतियों के मनों में बरसो से दबी भावनाएं उमड़ने लगती हैं और इससे भी उन्हें तनाव में कमी महसूस होने लगती है।विचार गोष्ठी में जब देवव्रत ‘आत्म-ज्ञान और अन्तर्ज्ञान के लिए ज्ञानोदय’ विषय पर भाषण कर रहे थे तो एक युवती को आंसू बहाते भी देखा गया।लेकिन ये आंसू किसी दुःख या पीड़ा के आंसू नहीं थे वरन बरसो से उनके हृदय में दबी भावनाओं का ही उद्रेक था।इन आंसूओं के इस तरह बह जाने पर वह एक तरह की राहत महसूस कर रही थी।यों भी गणितज्ञ देवव्रत की वक्तृत्व कला में रहस्यवाद,व्यावहारिक उपदेश,गणितीय विश्लेषण और किसी हद तक हास्य-व्यंग्य का भी संतुलित सम्मिश्रण तो होता ही है जो युवक-युवतियों को काफी मानसिक शांति प्रदान करता है।
  • युवकों-युवतियों में आध्यात्मिकता की भूख बढ़ती जा रही है।दिल्ली,मुंबई,कोलकाता जैसे तेज रफ्तार शहरों में रहने वाले हिन्दीभाषी युवक युवतियों में तो इसका अंदाजा भी नहीं लगाया जा सकता है।देवव्रत का कहना है कि जब हम अपने जीवन का प्रत्येक कार्य केवल भौतिक सफलता के लिए करने लगते हैं तो हमारा संबंध अपनी आत्मिक चेतनाओं से कटता चला जाता है और इसी क्रम में हम अपनी आत्मा तक को भुला बैठते हैं।लेकिन इस तमाम भागदौड़ में भी मनुष्य की आत्मिक चेतना समाप्त नहीं हो जाती।किसी न किसी रूप में वह इसे फिर से पा लेने की चेष्टाएं करता ही रहता है।इसका सीधा-सादा एक ही अर्थ है कि मनुष्य रोजमर्रा के कामों से ऊबकर कभी-कभी अपनी आंतरिक चेतना से भी जुड़ना चाहता है।अब मनुष्य कुछ न कुछ ऊँचा और चमत्कारिक करना या पाना ही चाहता है तो वे क्यों न इस कार्य में उसकी यथाशक्ति मदद करें।यही देवव्रत करते भी हैं।

3.गणितज्ञ देवव्रत का युवाओं को सन्देश (Mathematician Devvrat’s Message to the Youth):

  • (1.)युवाओं को स्मरणशक्ति बढ़ाने के लिए खान-पान शुद्ध एवं सात्विक रखें और अपने खाने-पीने की चीजों के माध्यम से शरीर में अनावश्यक विषैले तत्त्वों को न जाने दें।भोजन व दूध ताजा,शुद्ध खाएं।इसके अलावा डिआक्सीडेंट का प्रयोग भी इसके लिए सकारात्मक प्रभाव देता है।
  • (2.)सोच हमेशा सकारात्मक ही रखें यानी अपने व्यवहार से न तो किसी को भयभीत करें और न ही स्वयं भयभीत रहें।भयप्रेरित व्यवहार के स्थान पर प्रेमपूरित व्यवहार करें।
  • (3.)भूत-भविष्य को भुलाकर केवल वर्तमान में जिएँ।वर्तमान में जीना अधिक सरल है क्योंकि ऐसा करते हुए हम वर्तमान संसार के अधिक अनुकूल रहते हैं और न तो हम दुनिया को अपने ढंग में ढालने का व्यर्थ प्रयास करते हैं और न ही हम उसे अपने ऊपर हावी होने देते हैं।
  • (4.)धन कमाना कोई बुरी बात नहीं है लेकिन उसे कमाने के तरीके साफ-सुथरे होने चाहिए।भारतीय धर्मग्रंथों का इस संबंध में सार यही है कि हम अपने जीवन में अत्यधिक ऐशो-इशरत की कामना करते हैं तो यह सही नहीं है।लेकिन इसका यह अर्थ भी नहीं है कि हम साधुओं की तरह गेरुआ पहनकर निष्क्रियता की स्थिति में चले जायें।
  • (5.)जीवन में भौतिक सफलता और आध्यात्मिकता के बीच एक निश्चित संतुलन होना चाहिए।
  • (6.)तनाव से राहत के लिए अथवा मौज शौक के लिए शराब,सिगरेट,नशीली दवाओं तथा ड्रग्स आदि का सहारा न लें।क्योंकि इनसे उलझने तात्कालिक रूप से कम चाहे हो जाती हो परंतु खत्म नहीं होती है।अपनी अंतरात्मा को खोजकर उसे अपनी बौद्धिक एवं शारीरिक शक्तियों से जोड़े।इससे आप अधिक राहत और शांति महसूस करेंगे तथा तनाव का स्थायी समाधान भी प्राप्त कर सकेंगे।
  • (7.)दिन-रात अपने काम के पीछे ही दीवाना न रहें बल्कि समय निकालकर ध्यान व योग करें। 

4.गणितज्ञ का विरोध (Mathematician’s Opposition):

  • देवव्रत के अनुयायियों की संख्या बढ़ने के साथ ही उनके विरोधियों की संख्या में भी वृद्धि हुई है। खासकर पाश्चात्य तथा तथाकथित आधुनिक जीवनशैली अपनाने वाले विरोध इस आधार पर कर रहे हैं कि वे गणित को कुछ ज्यादा ही बढ़ावा दे रहे हैं।गणित की नींव मुख्य रूप से संख्या पद्धति रही है और आधुनिक (अन्तर्राष्ट्रीय) संख्या पद्धति का आविष्कार भारत में ही हुआ है।गणित की मौलिक रूप से शाखाएं अंक गणित (संख्या पद्धति),बीजगणित और ज्यामिति को माना जाता है।भारतीय गणितज्ञों ने भी इस पर काम किया है परंतु वे गणित के अध्ययन के साथ-साथ मानसिक क्षमता को विकसित करने पर भी बल देते थे।यही कारण है कि भारतीय गणितज्ञ गणित के अतिरिक्त ध्यान और मानसिक शांति को भी बराबर महत्त्व देते थे।
  • पाश्चात्य गणितज्ञ केवल गणित के विकास पर ही बल देते हैं तथा वे इसे छात्र-छात्राओं के विकास के लिए पर्याप्त मानते हैं।
    देवव्रत आधुनिक गणित को पढ़ने पर बल देने के साथ ही इसके पूरक के रूप में ध्यान व योग करने की सलाह देते हैं।इसके बावजूद कई पाश्चात्य गणितज्ञ आधुनिक गणित के साथ ध्यान व योग करने को अच्छी निगाह से नहीं देखते हैं और देवव्रत की शिक्षाओं को अधिक महत्त्व नहीं देते हैं।वे इसे छात्र-छात्राओं को गणित के वास्तविक अध्ययन से हटाकर मनोभ्रम की स्थिति में ले जाने जैसा ही मानते हैं।लेकिन देवव्रत है कि इस विरोध से तनिक भी प्रभावित नहीं होते।देवव्रत ने कई लेख ऐसे लिखे हैं जिसमें बताया है कि अंतर्ज्ञान के आधार पर भारतीय गणितज्ञों ने कई ऐसे खोजें की हैं जिनका हल करने में आज भी गणितज्ञ लगे हुए हैं।
  • देवव्रत के लेखों पर कई लोगों की कुदृष्टि लगी हुई है तथा वे इस ताक में हैं कि उन पर कोई न कोई न कोई कारण ढूंढकर अथवा अकारण दोषारोपण लगाकर कोर्ट में घसीटा जाए।कई लोग तो इस ताक में रहते हैं कि आए दिन उनके लेखों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते रहते हैं परंतु देवव्रत इन सब प्रतिक्रियाओं का उत्तर अपने लेखों को ओर अधिक उत्कृष्ट बना कर कड़ी टक्कर देते हैं।

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5.देवव्रत का सफरनामा (The Journey of Devvrat):

  • देवव्रत की सादगी और रहन-सहन की बेपरवाही देखते ही बनती है।वे कहीं भी विचार गोष्ठियों में जाते हैं तो बिल्कुल साधारण वेशभूषा पहनकर जाते हैं।बहरहाल,देवव्रत की यह गणितीय,आध्यात्मिक और आनंदी जीवन शैली चक्करदार है।पारिवारिक पृष्ठभूमि शिक्षा अर्जित न करने की होते हुए भी उन्होंने जाॅब क्षेत्र गणित को अपनाने की सोची।इसलिए उन्होंने गणित विषय में डिग्री हासिल की।हालांकि जिस काॅलेज से उन्होंने डिग्री हासिल की उसमें विदेशी छात्र-छात्राएं भी अध्ययन करते थे।इसलिए कॉलेज के छात्र-छात्राओं में यह इच्छा अनजाने ही घर कर जाती है कि जैसे भी मौका मिले तो किसी विकसित देश में जाकर अपना भविष्य बना लेना चाहिए।
  • परंतु उन्होंने अपने देश को ही कार्यस्थली बनाने का विचार किया।विदेशों में आकर्षक पैकेज मिलते हैं और अपने देश को कार्यस्थली बनाने का अर्थ है कि आर्थिक संकटों का सामना करना और संघर्ष करना पड़ता है।ग्रामीण माहौल में रहकर उनको अनेक कठिनाइयों और संघर्षों का सामना करना पड़ता है।स्वयं को समायोजित करने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।हालांकि यहाँ हर कोई हर किसी को भलीभाँति जानता-पहचानता है और विदेशों में ऐसा कतई नहीं हैं।विदेशों में हर कोई व्यक्ति अपने काम में व्यस्त रहता है और आसपास के लोगों से उसे कोई दिलचस्पी नहीं होती है।विदेशों में आत्मीयता की भारी कमी है।वहाँ कोई भी व्यक्ति अपने पड़ोसी तक को नहीं जानता है।ऐसी दशा में विदेशों में गणितज्ञ मात्र गणितज्ञ ही बनकर रह जाते हैं और मानवीयता के धरातल पर वे बौनों से अधिक कुछ नहीं है।
  • देवव्रत ने अपना जाॅब भलीभांति जमा लिया है।प्रारंभिक स्तर पर उन्हें तमाम तरह की तकलीफों का सामना करना पड़ा।उनसे शिक्षा प्राप्त करके युवक-युवतियों ज्यों की त्यों रहते थे।उनके जीवन में बदलाव तब आया जब उन्होंने आध्यात्मिक पत्र-पत्रिकाओं का गहन अध्ययन और मनन-चिंतन किया।पुस्तकें पढ़ना उनका शगल था।एक दिन यूं ही एक मित्र ने उन्हें एक पुस्तक पढ़ने के लिए दी।उसे पढ़ने पर उस पुस्तक ने काफी हद तक देवव्रत को प्रभावित किया।उन्हें पता चला कि मानसिक व्यायाम से भी शांति पाई जा सकती है।
  • इस पुस्तक के आधार पर उन्होेंने कई अन्य पुस्तकें खरीदी और उन पुस्तकों को पढ़ने पर उन्होंने ध्यान करना प्रारंभ किया।उनके जीवन में इससे ओर अधिक अनुशासन आया।ध्यान से उन्होंने आंतरिक संतुष्टि और शांति का अनुभव किया।गणित के ज्ञान और भारतीय योग-विधा से परिचित होने के बाद देवव्रत ने गणित के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया।इससे वे अपने बहुत से परिचित लोगों से पृथक हो गए।
  • गणित संस्थान को उन्होंने व्यावसायिक रूप प्रदान किया।वे सपरिवार इस संस्थान के लिए कार्य करने लगे।उन्होंने स्वतंत्र रूप से इसके लिए कार्य करना प्रारंभ किया।इस संस्थान में आने वाले छात्र-छात्राओं से नाम मात्र का शुल्क लिया जाता है।यहां पर छात्र-छात्राओं को न केवल गणित की शिक्षा प्राप्त होती है बल्कि मानसिक बाधाओं को दूर करके उनको उनकी व्यक्तिगत क्षमताओं से भी परिचित कराया जाता है।
  • देवव्रत कार्य जीवन में चाहे जितने भी सफल और स्वाबलंबी हो परंतु उनकी असली प्रेरणा भारतीय धर्म,संस्कृति में आस्था ही है जो किसी भी परिस्थिति में उन्हें विचलित नहीं होने देती है।भारतीय धर्म एवं संस्कृति की प्रेरणा तथा प्रोत्साहन से ही देवव्रत जो कुछ भी ऊँचाई हासिल की है,वह उसे ही श्रेय देते हैं।
  • उपर्युक्त आर्टिकल में आधुनिक युग का गणितज्ञ संत (Modern Day Mathematician Saint),नवयुग का महान गणितज्ञ (The Great Mathematician of New Age) के बारे में बताया गया है।

6.छात्र-छात्राओं की खुशी का राज (हास्य-व्यंग्य) (The Secret of Students’ Happiness) (Humour-Satire):

  • सभी छात्र-छात्राएं (गणित अध्यापक से):हमें गणित विषय लेने का बहुत बड़ा फायदा हुआ है।
  • गणित अध्यापक (खुशी से):वो क्या?
  • छात्र-छात्राएं:सर (sir),हमें हमारे गुनाहों की सजा जीते जी ही मिल गई।

7.आधुनिक युग का गणितज्ञ संत (Frequently Asked Questions Related to Modern Day Mathematician Saint),नवयुग का महान गणितज्ञ (The Great Mathematician of New Age) से संबंधित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:

प्रश्न:1.संत से क्या तात्पर्य है? (What do You Mean by Saint?):

उत्तर:जिसमें राग-द्वेष,काम-क्रोध इत्यादि विकार नहीं है।जो सभी द्वन्द्वों (सुख-दुख,जय-पराजय,हानि-लाभ,यश-अपयश इत्यादि) से ऊपर उठ चुका है,जो चुनाव रहित है,जिसकी कोई कामना नहीं है,इच्छाओं से मुक्त है,जो अनासक्त है और सारी दुनियादारी के प्रपंचों से प्रभावित नहीं होता है वह संत है।

प्रश्न:2.गणितज्ञ संत की चाहत क्या है? (What is the Desire of a Mathematician Saint?):

उत्तर:गणितज्ञ संत भारतीय संस्कृति को चाहते भी बहुत है।इसका तात्पर्य यह नहीं है कि वे पाश्चात्य संस्कृति के विरोधी हैं।पाश्चात्य संस्कृति की जो बातें अच्छी हैं उन्हें भी वे ग्रहण करते हैं तथा भारतीय संस्कृति में भी जो बातें दकियानूसी,समयानुकूल नहीं हैं उसको ग्रहण नहीं करते हैं।

प्रश्न:3.गणितज्ञ देवव्रत से युवाओं के जुड़ने का क्या रहस्य है? (What is the Secret of the Youth Joining Mathematician Devvrata?):

उत्तर:वे युवाओं से प्यार करते हैं।उनके दुख-सुख में भागीदार बनते हैं,उनकी मदद करते हैं।युवा उनका स्पर्श पाकर आनंदित हो जाते हैं।उनमें मानवीय संवेदनाएं हैं।वे हर अच्छी बात को अपने से जुड़े युवाओं के साथ साझा करते हैं।वे युवाओं को सही दिशा में मार्गदर्शन करते हैं।इसलिए युवा उनसे जुड़ते हैं।

  • उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर द्वारा आधुनिक युग का गणितज्ञ संत (Modern Day Mathematician Saint),नवयुग का महान गणितज्ञ (The Great Mathematician of New Age) के बारे में ओर अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

Modern Day Mathematician Saint

आधुनिक युग का गणितज्ञ संत
(Modern Day Mathematician Saint)

Modern Day Mathematician Saint

आधुनिक युग का गणितज्ञ संत (Modern Day Mathematician Saint)
देवव्रत को एक करिश्माई व्यक्तित्त्व कहना वैसा ही अटपटा लगता है जैसे किसी भव्य स्मारक
को एक अच्छा गुरुकुल कहना।सचमुच देवव्रत की छवि उसके अनुयायियों में किसी आधुनिक युगीन देवता जैसी ही है

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