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4 Tips to Improve Mental Cramping

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1.मानसिक उच्चाटन को ठीक करने की 4 टिप्स (4 Tips to Improve Mental Cramping),मानसिक उच्चाटन को ठीक करने की 4 बेहतरीन टिप्स (4 Best Tips to Improve Mental Eradiction):

  • गणितज्ञ देवव्रत मानसिक उच्चाटन को ठीक करने (4 Tips to Improve Mental Cramping) की एक पुस्तक का सुबह-सुबह अपने कक्ष में अध्ययन कर रहे थे।मानसिक उच्चाटन अर्थात् मन का विषय से हट जाना,अलग हो जाना,न लगना।जैसे कि उनकी दिनचर्या थी सुबह जल्दी ही अपने नित्यकर्मों ध्यान-योग,योगासन इत्यादि से निवृत्त होकर अपने कक्ष में अध्ययन कर रहे थे।चूँकि  सुबह-सुबह जल्दी कोई छात्र-छात्राएं तो गणितज्ञ देवव्रत के पास अध्ययन करने नहीं आते थे।इसलिए वे इत्मीनान से एकाग्र होकर इस ग्रंथ का अध्ययन कर रहे थे।अक्सर गणित अध्यापक तथा गणितज्ञ अधिक उम्र अर्थात् प्रौढ़ावस्था में अध्ययन करना छोड़ देते हैं।वे पिछली तैयारी के आधार पर ही गणित का अध्यापन कराते हैं।शास्त्रों में कहा गया है कि स्वाध्याय में आलस्य नहीं करना चाहिए।क्योंकि व्यक्ति स्वाध्याय न करने से याद किया हुआ धीरे-धीरे भूलने लगता है,नई बातों के बारे में जानकारी प्राप्त नहीं होती है।सबसे बड़ी बात यह है कि दिमाग निष्क्रिय हो जाता है।
  • थोड़ी ही देर बाद एक नवयुवक ने कक्ष में प्रवेश किया और गणितज्ञ देवव्रत को अभिवादन किया। वह झिझकता हुआ बोला आपकी प्रसिद्धि सुनकर मैं आपके मार्गदर्शन हेतु आया हूं।मेरी समस्या बहुत गंभीर है।बहुत जगह भटकने के बाद आपके पास आया हूँ।विभिन्न डॉक्टरों व वैद्यों की दवाई ले चुका हूं परंतु धन गंवाने (खर्च करने) पर भी कोई फायदा नहीं हुआ।अब अंतिम प्रयास के रूप में आपके पास आया हूं।बहुत निराश हो चुका हूं।मैं बहुत दुखी और अशांत हूं।गणितज्ञ देवव्रत ने सारी चिन्ताएँ,आशंकाएं छोड़कर अपनी समस्या बताने के लिए कहा।आपकी समस्या गणित पढ़ने में आने वाली समस्या से संबंधित है या अन्य कोई मामला है।
  • युवक बोला मैं गणित की पुस्तक लेकर ज्योंही बैठता हूँ तो मेरा मन गणित की पुस्तक से हट जाता है,अलग हो जाता है।मानसिक उच्चाटन हो जाता है।गणितज्ञ देवव्रत ने देखा कि युवक बिल्कुल हट्टा-कट्टा था।शरीर सुडौल और सशक्त था। शारीरिक रूप से उसमें कोई कमजोरी नजर नहीं आती थी।यह भी एक संयोग की बात थी कि गणितज्ञ देवव्रत मानसिक उच्चाटन का ग्रंथ ही पढ़ रहे थे और युवक को भी मानसिक उच्चाटन से संबंधित समस्या थी।गणितज्ञ देवव्रत ने पूछा कोई मादक द्रव्यों का सेवन वगैरह तो नहीं करते हो।
  • युवक बोला मेरे माता-पिता अच्छे संस्कारवान हैं,उन्होंने मुझे भारतीय संस्कृति में ही पाला-पोसा है।भारतीय संस्कृति का मैं आदर करता हूं और यथासंभव पालन करने की कोशिश भी करता हूँ।
  • गणितज्ञ देवव्रत ने पूछा नींद ठीक से आती है अर्थात् अनिद्रा से ग्रस्त तो नहीं हो तथा पेट व पाचन शक्ति तो ठीक है।युवक बोला हां यह बात तो ठीक है कि मुझे नींद ठीक से नहीं आती है।रात को कई बार नींद खुल जाती है।लगातार 5-6 घंटे की नींद नहीं आती है।
  • गणितज्ञ देवव्रत बोले आपको मानसिक चिंता,अनिद्रा,एकाग्रचित्त होकर कार्य न करने के कारण मानसिक उच्चाटन होता है।मानसिक उच्चाटन न हो इसके लिए शारीरिक रूप के साथ-साथ मानसिक रूप से भी सशक्त,सबल तथा स्वस्थ रहना जरूरी है।अब मैं सिलसिलेवार कुछ उपाय बताता हूं उनका पालन करने से आपकी समस्या का समाधान हो जाएगा।आप ध्यानपूर्वक सुने और समझें।
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2.चिंता नहीं चिंतन करें (Do not worry but Think):

  • विद्यार्थियों में चिंता का मुख्य कारण है कि वे प्रखर बुद्धि वाले विद्यार्थियों से अपनी तुलना करते हैं।हर विद्यार्थी अद्वितीय होता है वह दूसरे जैसा बन सकता है लेकिन हूबहू उसके जैसा नहीं बन सकता है।दूसरे की तरह हूबहू अर्थात् गणित में निपुण नहीं बन सकता है तो उसका मन स्थिर नहीं रहता है।ओर जहाँ मन स्थिर नहीं रहता है वहाँ चिंता जरूर होगी।
  • विद्यार्थियों को चिंता करने से बेचैनी,मन का उच्चाटन,अनिद्रा जैसी मानसिक विकृतियां घेर लेती हैं।गणित में कमजोर है,गणित के सवाल हल नहीं हो रहे हैं तो चिंता करने से कुछ नहीं होगा।चिंता करने के कारण विद्यार्थी चिंतन-मनन व गणित का अभ्यास नहीं कर पाते हैं।क्योंकि चिंता के चक्रव्यूह में ज्योंही कोई फंसता है तो नकारात्मक विचार मन में आते जाते हैं और विचारों की एक श्रृंखला बनती जाती है जिससे ऊर्जा का क्षय होता रहता है।इससे विद्यार्थी निराश,उदासीन,बैचेन व उखड़ा-उखड़ा रहने लगता है।न उसको रात को ठीक से नींद आती है और न दिन में चैन से रह पाता है।चिंता करने से विद्यार्थी विवेक से काम नहीं ले पाता है।
  • चिंता करने से विद्यार्थी की ऊर्जा क्षय होती है तो उसका मन गणित को हल करने में,अध्ययन करने में नहीं लगता है।वह मन ही मन अपने आपसे लड़ता रहता है।अपने आपसे लड़ने से उसमें कुंठा पैदा हो जाती है।
  • इसलिए चिंता करने के बजाय चिंतन-मनन करें। गणित विषय में या अन्य विषय में कमजोर हैं तो उस कमजोरी को दूर करने का प्रयास करे।यह चिन्तन-मनन करे कि कौनसी तकनीक अपनाने से गणित में कमजोरी दूर की जा सकती है।जब आपका मन अध्ययन करने में,गणित के सवालों को हल करने में लगेगा तो चिंता से मुक्त होते जाएंगे।

3.गहरी नींद सोएं (Sleep deeply):

  • मन के उच्चाटन का एक कारण गहरी नींद से न सोना भी है।रात को विद्यार्थी जब सोता रहता है तो कुछ न कुछ कल्पना करता रहता है।जैसे गणित का इतना कोर्स बाकी रह गया है,फलां विषय में तो मैंने अभी कुछ नहीं किया।परीक्षा नजदीक आ रही है अब कोर्स कैसे पूरा हो पाएगा? ऐसी ढेरों प्रकार की चिंताएं बिस्तर पर पड़े-पड़े विद्यार्थी करता रहता है। जब रात को गहरी नींद नहीं सोएगा तो दिन में पूर्ण एकाग्रता,पूर्ण तन्मयता से अध्ययन नहीं कर पाएगा।
  • विद्यार्थी को चाहिए कि रात को ठीक समय पर सोए तथा रात को 10-11 बजे तक सो जाना चाहिए। सुबह जल्दी उठने का नियम बना ले।इस प्रकार अपने सोने का नियम बना लेगा तो ठीक समय पर नींद भी आएगी और गहरी नींद आएगी।शरीर को पूर्ण विश्राम मिल जाएगा तो सुबह तरोताजा होकर उठेगा।उसका अध्ययन में मन लगेगा।गणित के सवालों को हल करने में मन लगेगा।
  • यदि रात को ठीक समय पर सोने पर दिमाग में भिन्न-भिन्न विचार आएं तो उनको कम्पनी न दें।मन को पूर्ण एकाग्र करके ॐ का या इष्टदेव का जप करें।अथवा अपने मन को भ्रूमध्य (आज्ञाचक्र) पर केंद्रित करें।धीरे-धीरे अभ्यास करने से गहरी नींद आने लग जाएगी।मन में उच्चाटन नहीं होगा।दिन भर के क्रियाकलापों के बारे में सोचने-विचारने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि बिस्तर पर पड़े-पड़े फालतू के विचारों को कंपनी देने,सोचने-विचारने से आखिर होगा भी क्या? हां,यह अवश्य हो जाएगा की आपकी नींद उड़ जाएगी।आप गहरी नींद में सो नहीं पाएंगे।मन में बुरे विचारों तथा तनाव व चिंता से युक्त विचारों में उलझे रहने से फायदा तो कुछ होने वाला नहीं बल्कि नुकसान ही होगा।आपकी मानसिक शक्ति का क्षय होगा,आपकी एकाग्रता भंग होगी।यदि दिन में आपने अध्ययन नहीं किया है,गणित के सवालों को हल नहीं किया तो भी उसका पश्चाताप करने से कुछ नहीं होगा।उसके बजाय आप यह संकल्प करें कि दिनभर यथाशक्ति अध्ययन करूंगा,गणित के सवालों,समस्याओं को हल करूंगा।गलती से सीख लेकर बार-बार गलती की पुनरावृत्ति न करें वरना आपका मनोबल कमजोर होगा।आपको कई मानसिक बीमारियां घेर लेंगी।अपना भला-बुरा भलीभाँति सोचकर वही करें जिससे आपको फायदा हो।

4.वर्तमान में जिएं (Live in the present):

  • युवक-युवतियां अक्सर भूतकाल या भविष्यकाल में जीते हैं।भूतकाल में उन्होंने जो गलतियां की है जैसे समय का दुरुपयोग किया है। उदाहरणार्थ:कोरोनावायरस से फैली महामारी में बोर्ड व विद्यालय की परीक्षा रद्द होने तथा सीधे अगली कक्षा में प्रोन्नत करने के कारण बहुत से विद्यार्थियों ने पढ़ाई स्थगित कर दी।अध्ययन के लिए कठिन परिश्रम नहीं किया।परंतु अब वर्तमान समय में पुनः परीक्षा देनी है ऐसी स्थिति में पिछली कक्षा के कोर्स को न पढ़ने के कारण अगली कक्षाओं में उन्हें बहुत सी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।जैसे किसी विद्यार्थी ने 11 वीं की गणित को हल नहीं किया है तो 12वीं की गणित को हल करने में उन्हें बहुत कठिन परिश्रम करना पड़ रहा है।12वीं की थ्योरी,सवाल तथा समस्याएँ उन्हें एकाएक समझ में नहीं आ रही है।
  • अब युवक-युवतियाँ भूतकाल में नष्ट किए गए समय के कारण पश्चाताप कर रहे हैं जो कि उनके वश में नहीं है।भविष्य काल में कोई सुंदर-सुंदर,ऊँचा लक्ष्य निर्धारित करके कल्पना लोक में खोए रहते हैं तो भविष्य काल भी हाथ में नहीं है।साथ ही वे भूतकाल व भविष्य काल के बारे में सोच-विचार कर के वर्तमान समय को नष्ट कर रहे हैं।वर्तमान काल का सही उपयोग करके ही वर्तमान काल में जीना है।वर्तमान काल से चूकना या वंचित रहना समय को नष्ट करना है।जितना समय हम नष्ट करते जाते हैं उतना जीवन नष्ट होता जाता है।
  • वास्तविक रूप में विद्यार्थी वही है जो वर्तमान काल का उपयोग करता है।भूतकाल बीत चुका है उसमें की गई लापरवाही आगे न हो यह सबक लेना ही पर्याप्त है।उसके बारे में विचार-चिंतन करने से कोई फायदा नहीं होने वाला है।इसी प्रकार भविष्यकाल अभी आया नहीं है इसलिए भविष्य काल में अच्छे-अच्छे सपने देखना,कल्पना लोक में विचरण करना,सुंदर-सुंदर कामनाएं पालना समय को नष्ट करना है।भविष्य और भूतकाल का चिंतन करने से मन का उच्चाटन होता है।

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5.पूर्ण एकाग्रता के साथ अध्ययन करें (Study with full concentration):

  • यदि हम अध्ययन तथा गणित के सवालों को आधे-अधूरे मन से करते हैं,अस्थिर चित्त से करते हैं, संशयग्रस्त मनोवृत्ति और उच्चाटन के साथ करते हैं तो गणित में तथा अध्ययन करने में सफल नहीं हो सकते हैं।मानसिक उच्चाटन को रोकने का सबसे कारगर तरीका है पूर्ण एकाग्रता के साथ अध्ययन करना,गणित के सवालों और समस्याओं को हल करना।
  • दरअसल मानसिक उच्चाटन,मन के उच्चाटन से हम तनावग्रस्त होते हैं जिससे मानसिक थकावट उत्पन्न होती है।शारीरिक थकावट उतनी हानिकारक नहीं है जितनी मानसिक थकावट हानिकारक है।
  • यदि अध्ययन,मनन-चिंतन तथा गणित के सवालों,समस्याओं को पूरे मनोयोग से,पूर्ण एकाग्रता के साथ करें तो गणित की जटिल से जटिल समस्याओं को हल कर सकते हैं।
  • मानसिक उच्चाटन से हमारी ऊर्जा कई भागों में बँटी हुई रहती है और कई भागों में सोच-विचार करने से मानसिक ऊर्जा का क्षय होता है।पूर्ण एकाग्रता का अभ्यास करने से विचारों की श्रृंखलाएं एक जगह केंद्रित होती है।ऊर्जा का क्षय रुकता है। ऊर्जा एक जगह केंद्रित होने से विद्यार्थी तेजस्वी,प्रखर और अपने कार्य में दक्ष हो जाता है। मन का उच्चाटन रुकता है।इसलिए रोजाना ध्यान व योग के द्वारा पूर्ण एकाग्रता का अभ्यास करना चाहिए।गणित की समस्याओं को डूबकर हल करें तो भी एकाग्रता सधने लगती है।इस प्रकार मानसिक उच्चाटन से मुक्ति मिल सकती है।
  • उपर्युक्त आर्टिकल में मानसिक उच्चाटन को ठीक करने की 4 टिप्स (4 Tips to Improve Mental Cramping),मानसिक उच्चाटन को ठीक करने की 4 बेहतरीन टिप्स (4 Best Tips to Improve Mental Eradiction) के बारे में बताया गया है।

6.गणित के जनक का जन्म स्थल (हास्य-व्यंग्य) (Birthplace of Father of Mathematics) (Humour-Satire):

  • गणित अध्यापक (विमल से):गणित के जनक और प्रसिद्ध वैज्ञानिक आर्कमिडीज का जन्म स्थल कहां है?
  • विमल (गणित अध्यापक से):सर (sir) वह तो गुणाकर मुले द्वारा लिखित ज्यामिति की कहानी पुस्तक के पृष्ठ संख्या 76 पर है।

7.मानसिक उच्चाटन को ठीक करने की 4 टिप्स (4 Tips to Improve Mental Cramping),मानसिक उच्चाटन को ठीक करने की 4 बेहतरीन टिप्स (4 Best Tips to Improve Mental Eradiction) से संबंधित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:

प्रश्न:1.विद्यार्थी के सफल होने का वास्तविक तात्पर्य क्या है? (What does the student really mean to succeed?):

उत्तर:नकल करके उत्तीर्ण होना,घूस देकर डिग्री सर्टिफिकेट हासिल करना,बोर्ड कर्मचारियों को घूस देकर अंकतालिका में अंक बढ़वाना सफल होना नहीं है।वास्तविक सफलता तो विद्यार्थी के लिए तभी कही जा सकती है जब पढ़ाई करके,कठिन परिश्रम करके,पुस्तकों को मनोयोग से अध्ययन करके,अनुचित साधनों का उपयोग न करके परीक्षा देता है और उत्तीर्ण होता है।

प्रश्न:2.क्या आयुर्वेदिक औषधि के सेवन से मानसिक उच्चाटन को रोका जा सकता है? (Can the intake of Ayurvedic medicine prevent mental elevation?):

उत्तर:केवल आयुर्वेदिक औषधि के सेवन से मानसिक उच्चाटन को नहीं रोका जा सकता है और न ही केवल जड़ी बूटियों तथा सूखे मेवों का सेवन करने से मानसिक उच्चाटन को रोका जा सकता है। आयुर्वेदिक औषधि के साथ-साथ विद्यार्थियों को एकाग्रचित्त होकर अध्ययन करना चाहिए।साथ ही ऊपर बताए गए उपायों को अमल में लेना चाहिए। पूर्ण एकाग्रता से मस्तिष्क की शक्ति बढ़ती है और ऊर्जा एक जगह केंद्रित होती है।

प्रश्न:3.मानसिक उच्चाटन के दुष्परिणाम क्या है? (What are the side effects of mental elevation?):

उत्तर:मानसिक उच्चाटन से चिन्ता,तनाव उत्पन्न होता है।चिंता और तनाव से अनिद्रा,आलस्य,बेचैनी,कुंठा,मानसिक दुर्बलता जैसी मानसिक विकृतियां उत्पन्न होती हैं।समय रहते यदि मानसिक उच्चाटन और चिंता व तनाव को नहीं रोका जाए तो अनेक मानसिक रोगों से ग्रस्त हो जाता है।धीरे धीरे मानसिक विकृतियों से शारीरिक रोग उत्पन्न होते जाते हैं।इस प्रकार व्यक्ति मानसिक व शारीरिक रोगों के मकड़जाल में फंसता जाता है।

  • पर्युक्त प्रश्नों के उत्तर द्वारा मानसिक उच्चाटन को ठीक करने की 4 टिप्स (4 Tips to Improve Mental Cramping),मानसिक उच्चाटन को ठीक करने की 4 बेहतरीन टिप्स (4 Best Tips to Improve Mental Eradiction) के बारे में ओर अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

4 Tips to Improve Mental Cramping

मानसिक उच्चाटन को ठीक करने की 4 टिप्स
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4 Tips to Improve Mental Cramping

गणितज्ञ देवव्रत मानसिक उच्चाटन को ठीक करने (4 Tips to Improve Mental Cramping)
की एक पुस्तक का सुबह-सुबह अपने कक्ष में अध्ययन कर रहे थे।
मानसिक उच्चाटन अर्थात् मन का विषय से हट जाना,अलग हो जाना,न लगना।

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