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Maths Study from Professional Perspective

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2 2.व्यावसायिक दृष्टिकोण से गणित का अध्ययन (Maths Study from Professional Perspective),गणित अध्ययन में व्यावसायिक परिप्रेक्ष्य (Professional Perspective in Mathematics Study) के सम्बन्ध में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:

1.व्यावसायिक दृष्टिकोण से गणित का अध्ययन (Maths Study from Professional Perspective),गणित अध्ययन में व्यावसायिक परिप्रेक्ष्य (Professional Perspective in Mathematics Study):

  • व्यावसायिक दृष्टिकोण से गणित का अध्ययन (Maths Study from Professional Perspective) में व्यवसाय से तात्पर्य है प्रयत्न,प्रयास,उद्योग,संकल्प,व्यापार,कर्म,कौशल,पेशा (प्रोफेशन),कोई पेशा करना है।इस प्रकार व्यावसायिक का अर्थ हुआ कुशलतापूर्वक व्यवसाय चलाने की योग्यता।
  • प्रोफेशन की मूल अवधारणा व्यवसाय,उद्योग धंधों तथा कंपनियों से अन्य क्षेत्रों में विकसित हुई है।इसलिए प्रोफेशन में व्यावसायिकता है।अन्य क्षेत्रों में जैसे इंजीनियरिंग,शिक्षा,स्वास्थ्य सेवाओं में व्यासायिकता के प्रवेश से कुछ विशेष बातों का समावेश हो गया है।शिक्षा तथा गणित शिक्षा में प्राचीनकाल में सेवा,परोपकार व धार्मिक कृत्य समझा जाता था।वर्तमान समय में व्यावसायिक शिक्षा से तात्पर्य वेतन लेकर उसके एवज में अथवा वेतन की मानसिकता के साथ विशेष प्रकार के ज्ञान,कौशल,प्रशिक्षण को तथा अध्ययन व अध्यापन करना।
  • व्यावसायिक दृष्टिकोण से किसी पेशे को सक्षम,विश्वसनीय,सम्मानजनक समझा जाता है तथा इसमें उच्च मानकों जैसे समय प्रबंधन,प्रभावी लेखन,प्रौद्योगिकी ज्ञान,तकनीकी ज्ञान इत्यादि का पालन किया जाना चाहिए।
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(1.)धन के प्रति दृष्टिकोण (Attitude Towards Money):

  • धन एक शक्ति और चार पुरुषार्थों धर्म,अर्थ,काम,मोक्ष में इसे स्थान दिया गया है।धन के सहारे मनुष्य देव भी बन सकता है तो राक्षस भी बन सकता है।धन प्राप्ति को व्यवसाय का साधन मानने तथा उसे छात्र-छात्राएं,अध्यापक व शिक्षण संस्थाएं अध्ययन-अध्यापन को पवित्र,पावन,शुभ व कल्याणकारी समझकर प्रोफेशन को करता है तो यह देवत्व उपलब्ध करा देता है।धन को भोगप्राप्ति, केवल अपने स्वार्थ की सिद्धि तथा येनकेन प्रकारेण धन प्राप्ति का हेतु रहता है तो यही मानव के पतन और गर्त में गिरानेवाला हो जाता है।इससे मनुष्य राक्षस प्रवृत्ति को धारण कर लेता है।
  • पाश्चात्य संस्कृति से प्रभावित होकर धर्म से ज्यादा धन को महत्त्व देने के कारण शिक्षा संस्थान,शिक्षा के केन्द्रों को सुसज्जित तथा आधुनिक सुख-सुविधाओं से सम्पन्न रखते हैं जिससे छात्र-छात्राओं,अभिभावकों को आकर्षित करके उनसे मोटी-मोटी रकम वसूल की जा सके।वहाँ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं उपलब्ध करायी जाती है।शिक्षा के नाम पर केवल औपचारिकता मात्र रह गया है।
  • गणित अध्यापक शिक्षा संस्थान में वेतन (धन) प्राप्त करने के बावजूद वह अन्य तरीकों कोचिंग व ट्यूशन के द्वारा धन प्राप्त करता है या धन प्राप्त करने की लालसा रखता है।इसलिए वह शिक्षा संस्थानों में गणित विषय को ठीक से,कर्त्तव्य भाव तथा समर्पित होकर नहीं पढ़ाता है।छात्र-छात्राएं भी गणित शिक्षा को केवल जाॅब प्राप्त करने की दृष्टि से पढ़ते हैं।गणित शिक्षा से डिग्री येनकेन प्रकारेण अर्थात् परीक्षा में नकल करके,अनुचित साधनों से,परीक्षा पूर्व पेपर प्राप्त करने की जुगत लगाकर,शिक्षकों से मिलीभगत करके प्राप्त करता है या प्राप्त करने की लालसा रखता है।
  • बहुत से समाज सुधारक,दार्शनिक, गणितज्ञ,विद्वान शिक्षा में धन के प्रवेश अर्थात् इसे व्यवसाय मानने का विरोध करते हैं।उनका मानना है कि धन से शिक्षा में कई दुर्गुणों का प्रवेश हो गया है।
  • परंतु किसी भी क्षेत्र में ऐसे अवगुण आ सकते हैं।इसका तात्पर्य यह नहीं है कि उसको काटकर अलग कर दिया जाए।यदि किसी व्यक्ति के सिर पर बाल नहीं है तो इसका अर्थ यह समझकर कि इस सिर की क्या आवश्यकता है,उसकी गर्दन काट दी जाए।
  • धर्म में भी अनेक विकृतियाँ आ गई थी।पूजापाठ, कर्मकांड,नरबलि, पशुबलि तथा पूजापाठ में ब्राह्मणों को दान-दक्षिणा देने से पापों से मुक्ति इत्यादि विकृतियाँ आ गई थी।परन्तु सुधारकों, दार्शनिकों तथा चिन्तकों ने धर्म को मानव जीवन से हटाने का निर्देश नहीं दिया बल्कि उसमें आई हुई विकृतियों को दूर करने का प्रयास किया।जैसे शंकराचार्य व गौतम बुद्ध ने कर्मकांड व नरबलि तथा अन्य विकृतियों को दूर करने का प्रयास किया तथा धर्म का सही अर्थ समझाया।
  • धन बल के आधार पर दुर्योधन तथा उसके परिवार का विनाश हुआ परंतु धन में शुचिता रखने वाले अर्जुन विजय हुआ।इसलिए धन का उचित उपयोग,सही दृष्टिकोण रखने से यह उत्थान का कारण बनता है।हमारे सभी सांसारिक कर्त्तव्यों और धर्म का पालन करने के लिए धन की आवश्यकता होती है।इसलिए भौतिक क्षेत्र में धन एक बहुत बड़ा बल है।
  • चाणक्य नीति में भी कहा है कि:
  • “धर्मं धनं च धान्यं च गुरोर्वचनमौषधम्।
    सुगृहीतं च कर्तव्यमन्यथा तु न जीवति”।।(अध्याय:14)
  • धर्म,धन,अन्न,गुरु के वचन और अनेक प्रकार की औषधियों का भली-भांति संग्रह करना चाहिए।जो इनका संग्रह नहीं करता ऐसा मनुष्य संसार में ठीक प्रकार जी नहीं सकता।
  • शुक्र नीति में भी कहा है कि:
  • “अस्ति यावत्तु सधनस्तावत्सर्वैस्तु सेव्यते।
    निर्धनस्त्यज्यते भार्यापुत्राद्यै:सगुणोप्यत:”।।
  • अर्थात् जब तक मनुष्य के पास धन रहता है तब तक सब लोग उसकी सेवा करते हैं और जब वह धनहीन हो जाता है तब गुणवान होने पर भी स्त्रीपुत्रादि उसे त्याग देते हैं।

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(2.)अध्ययन-अध्यापन के प्रति दृष्टिकोण (Proper Approach to Study-Teaching):

  • देश की उन्नति में शिक्षा प्रभावी साधन है।इसलिए अध्ययन-अध्यापन में उचित दृष्टिकोण रखने की आवश्यकता है।छात्र-छात्राओं की अध्ययन के प्रति निष्ठा तथा अध्यापक की अध्यापन के प्रति निष्ठा होने से ही दोनों गणित के अध्ययन-अध्यापन में कठोर परिश्रम करेंगे।छात्र-छात्राओं तथा अध्यापकों को यह सोचना चाहिए कि उसके कार्य से देश की उन्नति हो।यह तभी संभव है जबकि गुणवत्तापूर्ण अध्ययन-अध्यापन हो।गुणवत्तापूर्ण अध्ययन-अध्यापन से ही श्रेष्ठ भावी छात्र-छात्राएँ तैयार हो सकते हैं।जिन छात्र-छात्राओं व अध्यापकों का अध्ययन-अध्यापन के प्रति व्यवसायिक दृष्टिकोण सकारात्मक होता है वे अध्ययन-अध्यापन को रुचिपूर्ण बना लेते हैं।ऐसे छात्र-छात्राएँ व अध्यापक गणित में नई-नई बातों को खोजने का माद्दा रखते हैं।नकारात्मक दृष्टिकोण से गणित से छात्र-छात्राएं पीछा छुड़ाना चाहते हैं तथा गणित विषय के प्रति वे आकर्षित नहीं होते हैं।योजनाबद्ध,व्यवस्थित तरीके से,गणित की समस्याओं को हल करने में रुचि लेने से गणित के अध्ययन-अध्यापक को आनन्ददायक बनाया जा सकता है।

(3.)लक्ष्य केन्द्रित अध्ययन-अध्यापन (Goal-Centric Study Teaching):

  • छात्र-छात्राएं अपने लक्ष्य को ध्यान में रखकर अध्ययन करेंगे और उसमें आने वाली कठिनाइयों,समस्याओं को हल करते जाएंगे तो यह लक्ष्य केन्द्रित अध्ययन करना हुआ।तात्पर्य यह है कि जैसे आपका लक्ष्य गणित के सवालों को हल करना है,उसमें आनेवाली शब्दावली का अर्थ समझना है,सिद्धांतों तथा प्रमेयों का भली-भांति अध्ययन करना है।अब यदि इनको हल करते समय कहीं भी दिक्कत आती है तो उसको हल करें। सर्वप्रथम कोशिश करें कि वह आपके द्वारा हल हो जाए।एक तरीके से हल नहीं हो तो दूसरे तरीके को आजमाएं।फिर भी हल नहीं होती है तो पुस्तक के उदाहरणों की सहायता लें।यदि आप द्वारा कोशिश करने पर व पुस्तक की सहायता से हल नहीं होती है तो अपने मित्रों व शिक्षकों की सहायता लें।
  • जैसे आपके सामने ‘स्वेच्छ चर’ आ गया।अब आप इसका अर्थ नहीं जानते हैं तो इससे संबंधित थ्योरी भी ठीक से समझ नहीं आएगी।इसके लिए आप गणित के शब्दकोश की सहायता लें,यदि उसमें नहीं मिलता है तो अपनी अन्य कक्षाओं की पाठ्यपुस्तक से ढूंढने की कोशिश करें।संदर्भ ग्रंथों तथा सहायक पुस्तकों की सहायता लें।लेकिन पढ़ते समय इस तरह आप ढूंढने लग जाएंगे तो आपका काफी समय व्यतीत हो जाएगा।इसलिए इस तरह के शब्दों को एक नोटबुक में लिख लें और पाठ्यपुस्तक में इन शब्दों को अंडर लाइन कर लें ताकि उस टाॅपिक को दोबारा पढ़ें और समझें।
  • इस तरह एक साथ कई शब्द इकट्ठे हो जाए तो उनका अर्थ एक साथ देख लें।जो पुस्तकों में न मिले उन्हें अपने साथियों और अध्यापक से पूछ ले।उसके पश्चात टाॅपिक को पुनः पढ़ेंगे तो वह टाॅपिक ठीक से समझ में आ जाएगा।
  • लक्ष्य का निर्धारण करते समय अपनी प्रतिभा, शक्ति,कमजोरियों तथा उसमें आनेवाली कठिनाइयों के समाधान में सहायक जैसे पुस्तकें,मित्र,शिक्षक इत्यादि का ध्यान रखें।यदि इनकी समुचित उपलब्धि है तो ही आप लक्ष्य का निर्धारण करें।जैसे आपमें गणित की प्रतिभा तो है परन्तु शिक्षा संस्थान,मित्र व पुस्तके उपलब्ध नहीं है तो यदि आप गणित से इंजीनियरिंग या एमएससी,पीएचडी करना चाहते हैं तो बहुत सी मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा।यदि आप सोचते हैं कि मुझे गणित से ही आगे अध्ययन करना है तो आप को अन्यत्र जाना पड़ सकता है जहां इसके अनुकूल वातावरण है।अथवा ऑनलाइन स्रोतों का उपयोग करके भी आप आगे बढ़ सकते हैं।लक्ष्य निर्धारण करना तथा उस लक्ष्य को पाने में बहुत सी बातों को ध्यान रखना पड़ता है।

(4.)तकनीकी ज्ञान (Knowledge of Technologies):

  • आधुनिक युग में गणित अध्ययन को प्रोफेशनल तरीके से अध्ययन करने के लिए तकनीकी का ज्ञान भी होना आवश्यक है।छात्र-छात्राओं तथा अध्यापकों को गणित की विषयवस्तु को एकत्रित करने के लिए इंटरनेट,पुस्तकें,पत्र-पत्रिकाएं,सन्दर्भ पुस्तकें,सहायक पुस्तकें,विभिन्न वेबसाइट्स का प्रयोग करते रहना चाहिए।गणित विषय में नवीन खोजों,अनुसंधान तथा नवीन जानकारी के लिए इन स्रोतों से अपने आपको अपटूडेट (up to date) करते रहना आवश्यक है।विभिन्न वेबसाइट्स से सामग्री लेते समय इस बात का ध्यान रखें कि वह विश्वसनीय है तथा वहां पर गुणवत्तापूर्ण सामग्री उपलब्ध होती है।
  • जैसे फिजिकल संसार में फ्रॉड,चोरी,धोखाधड़ी,छल-कपट किया जाता है वैसे ही इंटरनेट और सोशल मीडिया पर भी साइबर क्राइम करने वाले मिल जाएंगे।साइबरक्राइम करने वाले ऐसी वेबसाइट्स का प्रयोग करते हैं।
  • अतः गणित विषय की सामग्री इकट्ठा करने में वेबसाइट्स का चुनाव सर्तकता व सचेत होकर करना चाहिए।अन्यथा आपका समय तो नष्ट होगा ही साथ ही धोखाधड़ी के शिकार भी हो सकते हैं।

(5.)समय प्रबंधन (Time Management):

  • गणित विषय में कोर्स विस्तृत होता है।इसलिए इस विषय का गहरा ज्ञान प्राप्त करने के लिए समय का उचित उपयोग करना अत्यंत आवश्यक है।समय प्रबंधन में बहुत सी बातों का ध्यान रखना आवश्यक है।समय प्रबंधन में तकनीकी का ज्ञान तो होना ही चाहिए।साथ ही गणित विषय सामग्री को पढ़ते समय सामान्य रूप से पढ़ें।क्योंकि गणित की हर सामग्री आपके लक्ष्य प्राप्ति में सहायक हो या न हो। सामान्य रूप से पढ़ते हुए अपने काम की विषय सामग्री को नोट करते जाएं।इसके पश्चात उसको गंभीरतापूर्वक पढ़े।इस प्रकार आपका समय भी बचेगा और अनावश्यक विषय सामग्री मस्तिष्क में नहीं भरेगी।
  • समय को लापरवाही,फालतू के कार्यों में न व्यतीत करके अपने लक्ष्य प्राप्ति में लगाएं।समय का एक-एक क्षण अमूल्य हैं जिसे पुनः प्राप्त नहीं किया जा सकता है।योजनाबद्ध तरीके से अध्ययन करेंगे।योजना इस तरह से हो कि जिसका आप पालन कर सकें।ऐसा टाइम टेबल बनाने का कोई तुक नहीं है जिसका पालन नहीं करते हों।टाइम टेबल बनाने से हर विषय को उचित समय दे सकेंगे।

(6.)निष्कर्ष (Conclusion of Maths Study from Professional Perspective):

  • शिक्षा समाज सेवा,धर्म की स्थापना तथा अपने कर्त्तव्यों का पालन करने का साधन था।परन्तु वर्तमान समय में इसे व्यवसाय मानने के कारण शिक्षा संस्थान, शिक्षक और छात्र-छात्राएँ अनैतिक तरीके से एकमात्र धन का उपार्जन करने में लगे हुए हैं।शिक्षा संस्थान में शिक्षक ठीक से तथा समर्पित भाव से नहीं पढ़ाते हैं इसके बजाय वे छात्र-छात्राओं को कोचिंग व ट्यूशन के लिए प्रेरित करते हैं।
  • छात्र-छात्राएँ भी शिक्षा को ज्ञानार्जन का माध्यम न मानकर मात्र इसे डिग्री प्राप्त करने का माध्यम मानते हैं जिससे उनमें जरूरी स्किल तथा व्यावहारिक ज्ञान का विकास नहीं होता है और न ही जीवन में आनेवाली समस्याओं का सामना करने का माद्दा तैयार होता है।
  • शिक्षा में व्यावसायिकता का प्रवेश बुरा नहीं है परन्तु व्यावसायिकता के मानकों का पालन करना भी जरूरी है।शिक्षण व्यवसाय को सकारात्मक दृष्टिकोण से न देखकर नकारात्मक दृष्टिकोण से देखा जाता है।अतः शिक्षण व्यवसाय में जो विकृतियां घुस गई हैं उनको दूर करने की आवश्यकता है।व्यावसायिकता के मूल्यों का शिक्षा संस्थानों,शिक्षक व छात्र-छात्राओं को ज्ञान तो होना ही चाहिए और उनका पालन भी करना चाहिए।
  • उपर्युक्त आर्टिकल में व्यावसायिक दृष्टिकोण से गणित का अध्ययन (Maths Study from Professional Perspective),गणित अध्ययन में व्यावसायिक परिप्रेक्ष्य (Professional Perspective in Mathematics Study) के बारे में बताया गया है।

(7.)दिमाग को रिफ्रैश करने का तरीका (हास्य-व्यंग्य) [Way to Refresh the Brain (Humor-Satire)]:

  • घर से बाहर निकला तो चौराहे पर मेरे पास पढ़ने वाला युवक खड़ा मिल गया।वह इधर-उधर तांका-झाँकी कर रहा तथा कुछ भद्दे कमेंट कर रहा था।मेरे आवाज देने पर बोला,बोलो सर।मैंने विचार किया कि इसे अब काॅलेज में होना चाहिए,ओर इस समय यह यहाँ क्या कर रहा है?
  • मैंने कहा काॅलेज नहीं गया।युवक बोला काॅलेज में पढ़ाई होती नहीं है फिर वहाँ जाकर भी क्या करें?
    मैंने ज्यादा कहना इसलिए भी मुनासिब नहीं समझा क्योंकि आजकल के युवा माता-पिता को ही कुछ नहीं समझते हैं।माँ-बाप को ही यार माम,यार डैड बोलते हैं तो सर तो ऐसे युवकों के कहाँ लगते हैं और सर है भी किस खेत की मूली उनको कहनेवाले।
  • फिर मैंने कहा यहाँ क्यों खड़े हो?तो युवक बोला मूड फ्रैश कर रहा हूँ।यानि लड़कियों की ताँका-झाँकी करना,उन पर भद्दे कमेन्ट कसना,उन पर लाईन मारना युवकों के लिए मूड फ्रैश करना हो गया।लड़कियों को ऐसे युवक पटाखा या माल शब्द का प्रयोग करते हैं।
  • आजकल गली-नुक्कड़ पर खड़े होकर अपने सैक्सी भावों को इजहार करना रिफ्रैश करना समझते हैं।उसके जबाब से मैं सन्न रह गया क्योंकि जो वह कहना चाहता था मैं भी समझ गया था।
  • कहाँ मूड फ्रैश करने के लिए बुजुर्गों से धार्मिक कहानियाँ,किस्से और कथाएँ सुना करते थे।ओर आज आर्थिक और यांत्रिक युग में मूड फ्रैश करने की बिल्कुल परिभाषा ही बदल गई।बल्कि ऐसे युवा बेधड़क अपने शिक्षकों,माता-पिता से भी सेक्सी भावों को इजहार कर देते हैं।इस उम्र में जहां विद्या ग्रहण करना चाहिए था वहां सैक्स का ज्ञान अर्जित करने में लगा हुआ है.नव युवक दिशाहीन और भटक रहे हैं.

2.व्यावसायिक दृष्टिकोण से गणित का अध्ययन (Maths Study from Professional Perspective),गणित अध्ययन में व्यावसायिक परिप्रेक्ष्य (Professional Perspective in Mathematics Study) के सम्बन्ध में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:

प्रश्न:1.गणित के शिक्षक के व्यावसायिक विकास की क्या आवश्यकता है? (What is the need for professional development of a mathematics teacher?):

उत्तर:गणित के शिक्षकों के लिए व्यावसायिक होना विकास क्षेत्र में विकास के शीर्ष पर होने के लिए एक आवश्यक है।शिक्षकों को अपने प्रमाण पत्र या लाइसेंस को चालू रखने,नए पाठ्यक्रम सीखने या अन्य शिक्षकों के साथ जुड़ने के लिए पीडी (Personal Development) में भाग लेने की आवश्यकता हो सकती है।सत्र आमतौर पर पाठ्यक्रम,शिक्षण रणनीतियों और डेटा प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित करते हैं।

प्रश्न:2.गणित के शिक्षक के व्यावसायिक विकास से आपका क्या मतलब है? (What do you mean by professional development of mathematics teacher?):

उत्तर:गणित के शिक्षकों के लिए व्यावसायिक विकास कार्यक्रमों को व्यापक और कठोर होने के लिए डिज़ाइन किया गया है,जो शिक्षकों को अपनी कक्षाओं में अधिक प्रभावी होने के लिए शैक्षणिक कौशल (pedagogical skills) के एक विस्तृत सेट से लैस करता है।

प्रश्न:3.शिक्षकों के लिए कुछ पेशेवर विकास लक्ष्य क्या हैं? (What are some professional development goals for teachers?):

उत्तर:एक शिक्षक के व्यावसायिक विकास लक्ष्य
शिक्षक बर्नआउट से बचें (Avoid Teacher Burnout)।
छात्रों को कुछ शासन दें (Give Students Some Reign)।
टेक उपकरण एकीकृत करें (Integrate Tech Tools)।
माता-पिता को अधिक शामिल करें (Involve Parents More)।
एक ऑनलाइन उपस्थिति बनाएँ (Create an Online Presence)।
सहकर्मियों के साथ संबंधों को विकसित करें (Cultivate Relationships with Colleagues)। I
माइंडफुलनेस को शामिल करें। (Incorporate Mindfulness)।
अधिक खेलने के लिए प्रोत्साहित करें (Encourage More Play)

प्रश्न:4.गणित शिक्षण पेशेवर क्या है? (What is mathematics teaching professional?):

उत्तर:एक गणित शिक्षक एक शिक्षा पेशेवर है जो हाई स्कूल के छात्रों के माध्यम से गणितीय विषयों की पूरी श्रृंखला के माध्यम से मध्य ग्रेड पढ़ाने में माहिर है।उनका प्राथमिक उद्देश्य राज्य द्वारा अनुमोदित गणित पाठ्यक्रम प्रदान करना है।

प्रश्न:5.शिक्षक पेशेवर विकास में सुधार कैसे कर सकते हैं? (How can teachers improve professional development?):

उत्तर:शिक्षक व्यावसायिक विकास में सुधार के लिए कुंजी
प्रतिक्रिया और प्रतिबिंब पर ध्यान केंद्रित करें। शिक्षकों के लिए पेशेवर विकास में सुधार करने के लिए,भाग लेने वाले समूहों पर स्पष्ट ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए और उनकी आवश्यकताएं क्या हैं।
मॉडल सर्वोत्तम प्रथाओं (Model Best Practices)।
प्रासंगिक लक्ष्य निर्धारित करें (Set Relevant Goals)।
इसे इंटरैक्टिव बनाएं (Make it Interactive)।

उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर द्वारा व्यावसायिक दृष्टिकोण से गणित का अध्ययन (Maths Study from Professional Perspective),गणित अध्ययन में व्यावसायिक परिप्रेक्ष्य (Professional Perspective in Mathematics Study) के बारे में ओर अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

Maths Study from Professional Perspective

व्यावसायिक दृष्टिकोण से गणित का अध्ययन
(Maths Study from Professional Perspective)

Maths Study from Professional Perspective

व्यावसायिक दृष्टिकोण से गणित का अध्ययन (Maths Study from Professional Perspective)
में व्यवसाय से तात्पर्य है प्रयत्न,प्रयास,उद्योग,संकल्प,व्यापार,कर्म,कौशल,पेशा (प्रोफेशन),
कोई पेशा करना है।इस प्रकार व्यावसायिक का अर्थ हुआ कुशलतापूर्वक व्यवसाय चलाने की योग्यता।

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