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Moral Values of Mathematics

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1.गणित के नैतिक मूल्य (Moral Values of Mathematics),गणित शिक्षा के नैतिक मूल्य (Moral Values of Maths

  • गणित के नैतिक मूल्य (Moral Values of Mathematics) में नैतिक शब्द का अर्थ है कि मनुष्य द्वारा किए गए ऐसे ऐच्छिक तथा आदतन कर्म जिनको अच्छा-बुरा,शुभ-अशुभ,उचित-अनुचित,कर्तव्य आदि कहा जाता है।ये कर्म जानबूझकर या सोच-विचारकर किए जाते हैं।नैतिक मूल्य विद्यार्थी को करने के लिए अन्त:प्रेरित करते हैं।गणित शिक्षा में मूल्यों को कई वर्गों
  • शैक्षिक,व्यावसायिक,सांस्कृतिक,आर्थिक,मनोरंजनात्मक,बौद्धिक,जिज्ञासा,सौन्दर्यानुभूतिक,नैतिक इत्यादि में वर्णित किया जाता है।
  • नैतिक मूल्य तथा गणित शिक्षा दोनों का नाम आपस में जुड़ना अटपटा सा लगता है।नैतिकता व्यक्ति के आचरण का मापदंड है।नैतिक मूल्य अथवा मूल्यों का अध्ययन मूल्य मीमांसा (Axiology) में किया जाता है।पतंजलि के अष्टांग योग में प्रथम यम व नियम को नैतिक मूल्य कहा जा सकता है।यम (अहिंसा,सत्य,अस्तेय,ब्रह्मचर्य,अपरिग्रह) तथा नियम (शौच,संतोष,तप,स्वाध्याय,भगवत भक्ति) हैं। यदि गणित विषय के संदर्भ में नैतिक नियमों को देखें तो एक विद्यार्थी किस प्रकार नैतिक मूल्यों का पालन करता है।गणित का अध्ययन करते समय छात्र-छात्राओं में शुद्धता (स्वच्छता),एकाग्रता पूर्वक अध्ययन,अभ्यास,गणित के सवालों का सही हल करना (सत्य),एक दूसरे की नकल व लेख की चोरी न करना (अस्तेय),विद्या अध्ययन अच्छा आचरण, संयम का पालन करना (बह्मचर्य) इत्यादि नैतिक नियमों को विद्यार्थी में देखे जा सकते हैं।गणित शिक्षा के द्वारा स्वाभाविक रूप से इन नैतिक नियमों व गुणों का विकास छात्र-छात्राओं में स्वाभाविक रूप से होता है।
  • सत्यनिष्ठता,स्पष्टता,एकाग्रता,चिंतन,कठिन परिश्रम,नियमितता,समयबद्धता,सहयोग,एक-दूसरे का आदर,आत्मसम्मान,आत्मविश्वास,विचारों की मौलिकता,ज्ञान-पिपासा का भाव,ईमानदारी,कर्तव्यनिष्ठा इत्यादि ऐसे गुण है जो कि नैतिकता के अंतर्गत आते हैं।गणित के अध्ययन से छात्र-छात्राओं में इन गुणों का विकास होता है।
    गणित में संशयात्मक ज्ञान नहीं।दो और दो चार ही होते हैं।इस प्रकार की गणनाएँ करने से विद्यार्थी में सत्य और सही का बोध होता है।विद्यार्थी गणित की समस्याओं को हल करते-करते यह समझ लेता है कि सही क्या है,गलत क्या है?इस प्रकार उसमें सत्य का पालन करने की योग्यता विकसित होती है।गणित में या तो सवाल सत्य होता है अर्थात् सही होता है या गलत इसमें संशयात्मक स्थिति की कोई गुंजाइश नहीं है।धीरे-धीरे अभ्यास करते रहने से सत्य और सही से आगे बढ़ते हैं तो असत्य और मिथ्या का अस्तित्व समाप्त होता जाता है।
  • गणित की पहेलियों,कूट प्रश्नों,जादुई वर्ग तथा मानसिक योग्यता संबंधी सवालों को हल करने से छात्र-छात्राओं को आनंद की अनुभूति होती है।साथ ही छात्र-छात्राओं का मनोरंजन भी होता है।इस प्रकार छात्र-छात्राओं में आनंद संबंधी मूल्य का विकास होता है।किसी पहाड़ी की चोटी की ऊंचाई ज्ञात करना,नदी की चौड़ाई ज्ञात करना इत्यादि भ्रमण करने से उसे प्रकृति के सौंदर्य का दर्शन होता है।इस प्रकार उसमें सौंदर्य संबंधी नैतिक मूल्य का विकास तो होता ही है साथ ही मनोरंजन भी होता है यानि मनोरंजनात्मक मूल्य का विकास भी होता है। गणित चिंतन-मनन,सत्य कथन जैसे गुणों को निखारती है।इसमें गणित का अभ्यास करने वाले विद्यार्थी में छल-कपट,झूठ बोलना,झूठी प्रशंसा करने का अभाव देखा जा सकता है।
  • उपर्युक्त विवरण से ऐसा लगता है कि गणित के विद्यार्थी नैतिक,आदर्श,चरित्रवान,संस्कारवान तथा उच्च नैतिकता धारण करने वाले होते हैं।दरअसल यह तस्वीर का एक पहलू ही है।जिस प्रकार प्राचीन काल में पितामह भीष्म, पाण्डु पुत्र अर्जुन उर्वशी के जाल में नहीं फंसे तथा नैतिकता से नहीं डिगे।ब्रह्मचर्य का पालन किया।परंतु ऋषि विश्वामित्र मेनका के जाल में फंस गए,शृंगी ऋषि सुंदर युवती के जाल में फंस गए।इस प्रकार नैतिकता तथा ब्रह्मचर्य का पालन करने वाले आधुनिक युग में मिल जाएंगे जैसे स्वामी दयानंद सरस्वती,स्वामी विवेकानंद तथा गुरु हनुमान।नैतिकता का पालन करना हर समय संभव है,यह अवश्य है कि नैतिकता का पालन करना कठिन है।
  • आधुनिक युग में शिक्षक तथा छात्र-छात्राओं (अधिकांश) के रंग-ढंग देखकर ऐसा लगता ही नहीं है कि वह गणित शिक्षा से ऐसे नैतिक मूल्यों को सीखते हैं और पालन करते हैं।आधुनिक युग में बहुत से छात्र-छात्राएं ऋषि विश्वामित्र तथा शृंगी ऋषि के पदचिन्हों पर चलने वाले मिलते हैं।पांडु पुत्र अर्जुन तथा पितामह भीष्म के पदचिन्हों पर चलने वाले बहुत कम है।ऐसा क्यों है?इसके कई कारण हैं?
  • आज समाज पर राजनीतिक नेताओं,मीडिया, फिल्मों के नायक-नायिकाओं का जैसा चरित्र होता है,आज के युवावर्ग उनको ही आदर्श मानकर वैसा ही करने का प्रयास करते हैं।ओर उनमें अधिकांश का नैतिक चरित्र कैसा है,यह किसी से छिपा हुआ नहीं है।कहावत है कि भांड के घर ब्याहो और मन में आवे जो गाओ।यानी इनके नायक भंगडा करेंगे तो आज के युवा भी भंगडा नृत्य ही करेंगे।इसके विपरीत महात्मा गौतम बुद्ध को बुद्धत्व प्राप्त हुआ तो उन्होंने लोगों के दु:ख से द्रवित होकर जीवन का वास्तविक रहस्य समझाने का प्रयास किया।लेकिन उनकी बात न तो कोई सुनता था और न ही समझने के लिए कोई तैयार था।बुद्ध को बड़ा आश्चर्य हुआ कि लोग उनकी बातों के लिए प्रमाण चाहते थे जो कि आत्मा-परमात्मा का अनुभव करने के लिए संभव नहीं है।इसके अलावा लोग उनसे चमत्कार की अपेक्षा करते थे।अंततः महात्मा गौतम बुद्ध को तंत्र-विद्या का ज्ञान अर्जित करना पड़ा।आजकल के युवा भटक रहे हैं उसके कुछ कारण निम्नलिखित हैं:
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(1.)युवाओं की मानसिकता (Youth Mentality):

  • युवाओं की मानसिकता होती है कि वे एकाएक किसी को अपना नेता,गुरु,शिक्षक तथा अपने से श्रेष्ठ को जल्दी से स्वीकार नहीं करते हैं।जब स्वीकार कर लेते हैं तो अपने पथ प्रदर्शक को दागरहित देखना चाहते हैं।उन पर हल्का सा दाग उन्हें मर्माहत कर देता है।उदाहरणार्थ मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पूर्व कार्यकाल में महिपाल मदेरणा मंत्री थे।जब आम लोगों को तथा युवाओं को पता चला कि वे भँवरी देवी सेक्स कांड में लिप्त हैं तो उनको पद से इस्तीफा देना ही पड़ा साथ ही उनको जेल की सींखचों के अंदर भी जाना पड़ा।
  • इसके अलावा पाश्चात्य देशों में इसके विपरीत स्थिति देखने को मिलेगी।बिल क्लिंटन जब गर्वनर थे तो पोला जोंस नामक महिला ने उन पर यौन शोषण का आरोप लगाया।इन आरोपों की छाया में ही वे अमेरिकी राष्ट्रपति का चुनाव जीत गए।राष्ट्रपति पद पर रहते हुए उनकी सहयोगी मोनिका लेविंस्की ने उन पर यौन शोषण का आरोप लगाया।परन्तु न तो पद से हटना पड़ा बल्कि अपना कार्यकाल मजे से पूरा किया।हालांकि इस प्रकरण का बवाल खूब मचा।परंतु उनकी सेहत पर कोई असर नहीं हुआ।कहा तो यह जाता है कि उनका 100 से भी अधिक औरतों से यौन संबंध थे।
  • उपर्युक्त उदाहरण देने का एक मकसद यह भी है कि भद्र युवा वर्ग तथा लोग यह उम्मीद रखते हैं उनके नेता नैतिकता का पालन करें।हालांकि कानून की नजर में हो सकता है कि यह गलत न हो परंतु युवा वर्ग तथा लोग चाहते हैं कि उनका नेता श्रेष्ठ तथा उच्च नैतिकता के आदर्श अपनाने वाला नेता हो।नेता कोई रातोंरात नहीं बनता है।कोई नेता,आदर्श पुरुष या महान् रातोंरात बनता है वह उतनी जल्दी गिर भी जाता है।

(2.)नेताओं की मानसिकता (Mindset of Leaders):

  • इसी प्रकार गायत्री प्रजापति यूपी में पूर्व कैबिनेट मंत्री पर यौन शोषण का आरोप लगा।प्रधानमंत्री ने व्यक्तिगत रुचि लेकर गायत्री प्रजापति को गिरफ्तार करवाया।इसी प्रकार प्रधानमंत्री ने निर्भया के साथ रेप करनेवाले दोषियों को फाँसी दिलवायी।हैदराबाद में एक महिला चिकित्सक से रेप करने वाले चारों आरोपियों को एसपी ने एनकाउंटर में मार गिराया। अफसोस की बात है कि फिर भी नेताओं की मानसिकता परिवर्तित नहीं होती है।दरअसल नैतिकता के आधार पर नेताओं को जनता न तो वोट देती है और न नैतिकता चुनावों में कोई इश्यू बनता है।इसीलिए नेता यह सोचते हैं कि नैतिकता न तो ओढ़ने के काम आती है और न बिछाने के काम आती है।फिर नैतिकता का अनुसरण क्यों किया जाए।
  • नैतिकता के हर व्यक्ति के अपने-अपने मापदण्ड होते हैं।नैतिकता पर एक राय कायम नहीं होती है।जैसे यदि हिंदू धर्म में एक पत्नी रखना नैतिकता है तो मुस्लिम धर्म में बहुपत्नी रखना नैतिकता माना जाता है।इसलिए नेताओं ने भी नैतिकता की अपने-अपने स्वार्थ,अपने निजी हित के अनुसार नैतिकता की परिभाषा गढ़ रखी है और उसी के अनुसार आचरण करते हैं।युवा वर्ग उनसे इसी तरह की बातें सीखते हैं वरना निर्भया से रेप करने के लिए अक्षय ठाकुर,पवन गुप्ता,मुकेश सिंह,विनय शर्मा तथा राम सिंह ने कहीं कोई ट्रेनिंग नहीं ली थी। लेकिन उन्होंने नेताओं के चरित्र से यही सीखा था। एक तरफ निर्भया का केस वकील सीमा कुशवाहा नि:शुल्क लड़ रही थी।वहीं दूसरी तरफ जाने-माने वकील एपी सिंह (अजय प्रकाश सिंह) निर्भया के गुनहगारों की पैरवी कर रहे थे।उनको बचाने के लिए हर संभव प्रयास (षड्यंत्र) कर रहे थे (कानून की कमजोरी ढूँढ रहे थे)।
  • महात्मा गांधी गृहस्थ थे परंतु नैतिकता का पालन करने के कारण उन्हें संत की उपाधि दी गई थी। उनके आदर्श को नेता लोग अपने स्वार्थ के लिए इस्तेमाल करते हैं,पर उनके पद चिन्हों पर चलने वालों को उंगलियों पर गिना जा सकता है।दूसरी तरफ जवाहरलाल नेहरू नास्तिक थे तथा सौंदर्य के उपासक थे।सौंदर्य के उपासक आपको चारों तरफ मिल जाएंगे।सरोजिनी नायडू ने जीवन भर चित्त को भ्रमित नहीं होने दिया परंतु लोगों ने आरोप लगाया कि यह सब आडंबर था।
  • देश को बनाना या बिगाड़ना हमारे हाथ में है।महात्मा गांधी तथा भगत सिंह आजाद के रास्ते पर चलेंगे तो देश का कोई बाल बांका नहीं कर सकता। परंतु भारत इतनी सदियों की गुलामी भुगतने के बाद भी युवावर्ग सुधरने तथा सही रास्ते पर चलने के लिए तैयार नहीं है।जब तक भारत पर कोई विपत्ति नहीं आती है,टूटने की कगार पर नहीं पहुंचता है तब तक महात्मा गांधी और भगतसिंह की जरूरत नहीं है।तब तक नैतिकता को ताक पर रखा जा सकता है।

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(3.)मीडिया की कार्यशैली (Media Working Style):

  • दरअसल मीडिया भी अपने हित के अनुसार खबरों को तरजीह देता है।दिल्ली में तंदूर कांड हुआ।युवा कांग्रेसी नेता ने नयना साहनी को तन्दूर में जला डाला।एक दैनिक अखबार उबल पड़ा।उसने ऐसे नेताओं को बेनकाब करने के लिए बीड़ा उठाया।लेखों की श्रृंखलाएं छपनी शुरू हुई परन्तु पढ़ने वालों को कुछ नहीं मिला।क्योंकि उन खबरों में किसी का कोई नाम नहीं था।
  • जेबी पटनायक अपने आदेशों के पालन के लिए जवान लड़के-लड़कियों को अपने यहां रखते थे। इसका क्या अर्थ लगाया जाए?कर्नाटक में जे एच पटेल ने मुख्यमंत्री रहते हुए हसीन नजरों पर खुलकर बात की,क्या यह सब ठीक था?करुणानिधि ने तीन बीवियां रखी,यदि इसका संबंध सेक्स से नहीं है तो फिर क्या समझा जाए?गोपीनाथ मुंडे के लिए एक खबर छपी थी कि वह एक नृत्यांगना के मोह में फंस गए।उन्होंने उसे एक खूबसूरत घर खरीद कर दिया है।यदि उनसे पूछा जाता तो वह कहते यह सब बकवास है क्योंकि लीपापोती संभव है।लालू यादव फिल्म अभिनेत्री पूजा भट्ट को राज्यसभा में भेजना चाहते थे क्यों यह तो वही बेहतर बता सकते हैं।अम्मा (जयललिता) की साड़ी पर चर्चा होती है।नैतिकता से इसका क्या संबंध है।अच्छे भले जनता के सामने दिखाई देने वाले नेता पांच सितारा होटल में शराब पीते हुए तथा रंगरेलियां मनाते हुए मिल जाएंगे।यानि अंदर कुछ ओर बाहर कुछ ओर चरित्र।
  • एक मंत्री का पुत्र भी किसी से बात करता है तो मंत्री की हैसियत से बात करता है।दरअसल नेताओं का मानना है कि वह सरकार सबसे गयी-गुजरी है जो नैतिकता की बात करती है,नैतिक होती है।हरकिशन सुरजीत मार्क्सवादी थे परंतु अपनी बात कितनी बार बदलते थे पता ही नहीं चलता। लालकृष्ण आडवाणी को सभी अच्छा व्यक्ति बताते हैं परंतु राजनीति चमकाने के लिए जो धर्मोन्माद फैलाया वैसी मिशाल मिलना मुश्किल है।लेकिन मीडिया के पास इन सबकी सच्ची तथा यथार्थ बात जनता तक पहुंचाने के लिए काॅलम नहीं है।

(4.)जनता की कार्यप्रणाली (Public Functioning):

  • युवावर्ग तथा लोग एक तरफ आदर्श,चरित्रवान,बेदाग तथा साफ छवि वाला नेता,मुखिया चाहते हैं।दूसरी तरफ युवावर्ग तथा लोग अपना कार्य तुरत-फुरत करवाने के लिए कर्मचारियों-अधिकारियों को घूस देते हैं।भ्रष्टाचार इसी तरह पनपता है,फलता-फूलता है।यदि किसी व्यक्ति से पूछा जाए कि वह ऐसा क्यों करता है तो साफ जवाब है कि उसकी विवशता है।युवावर्ग अपनी समस्याओं का हल तत्काल चाहता है।वह चाहे जिस तरीके से हो।नैतिक हो चाहे अनैतिक। कर्मचारियों-अधिकारियों को पता है कि इनका काम करने के एवज में घूस देंगे।इसलिए वे भी काम पर कुंडली मारकर बैठ जाते हैं।जब तक घूस नहीं दी जाती है तब तक वे काम नहीं करते हैं।
  • अदालत से भी लोगों का भरोसा उठता जा रहा है। अदालतों में भी वी रामास्वामी जैसे न्यायाधीशों की कमी नहीं है।किसी केस की जांच कराने में पुलिस (प्रोसीक्यूशन),न्यायपालिका और वकील की भूमिका होती है।तीनों के सहयोग से ही अपराधी को सजा मिल सकती है।इसमें कोई भी कुंडली मारकर बैठ जाए तो अपराधी बच निकलता है। इसलिए सबसे बड़ी समस्या नैतिकता की है।

(5.)निष्कर्ष (Conclusion of Moral Values of Mathematics):

  • युवावर्ग गणित से नैतिक मूल्यों को क्यों सीखेगा।वह प्रैक्टिकली नेताओं के चरित्र ,कार्यशैली तथा रंग-ढ़ग को देखता है।वही करना पसंद करता है। इसलिए युवाओं में भी एय्याश तबीयत के,शराब तथा मादक पदार्थ का सेवन करने वाले,जीवन को मौज मस्ती से गुजारने वाला समझते हैं तो कोई आश्चर्य नहीं है।राजनेता बहुत घाघ होते हैं।उनसे किसी बात का उत्तर पूछो तो वे सीधे, सपाट व स्पष्ट जवाब नहीं देते हैं।घुमा फिरा कर बात करते हैं।युवावर्ग भी उन्हीं से यही सब सीखता है।
  • नैतिकता व अच्छी बात सीखने के लिए त्याग,तप,समर्पण के साथ-साथ बहुत कुछ करना व खोना पड़ता है।इसलिए हमारा विचार तो यह है कि लीडरशिप मेनिया (उन्माद) से निकलकर कुछ ठोस तथ्यों तथा तर्कों से टकराया जाए।यदि शुरुआत इस आसान सवाल से की जाए कि क्या गणित से नैतिक मूल्यों को युवाओं को सीखना चाहिए,अपनाना चाहिए तथा पालन करना चाहिए तो सवाल का सीधा,सपाट और स्पष्ट उत्तर है,हां। नेता या ज्यादातर लोग ऐसा करते हैं,वैसा करते हैं इससे युवावर्ग को यह निष्कर्ष नहीं निकाल लेना चाहिए कि वे भी ऐसा ही करेंगे क्योंकि असलियत यह है कि आप जैसा करेंगे,जो आप करेंगे उसके परिणाम आपको ही भुगतने होंगे कोई नेता नहीं भुगतेगा।
  • उपर्युक्त आर्टिकल में गणित के नैतिक मूल्य (Moral Values of Mathematics),गणित शिक्षा के नैतिक मूल्य (Moral Values of Mathematics) के बारे में बताया गया है।

2.गणित के नैतिक मूल्य (Moral Values of Mathematics),गणित शिक्षा के नैतिक मूल्य (Moral Values of Mathematics) के सम्बन्ध में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:

1.गणित के नैतिक मूल्य (Moral Values of Mathematics),गणित शिक्षा के नैतिक मूल्य (Moral Values of Mathematics Education):

प्रश्न:1.गणित के नैतिक मूल्य क्या हैं? (What Moral Value of Mathematics?):
उत्तर:नैतिक गणित गणित से मारी गई विचारों के संग्रह के रूप में समझा जा सकता है और सकारात्मक मानव सामाजिक कार्रवाई का समर्थन और सहयोग करने के लिए (अक्सर प्रतीकात्मक (metaphorically) रूप से) का उपयोग किया जाता है।

प्रश्न:2.गणित के मूल्य क्या हैं? (What are the values of mathematics?):

उत्तर:गणित सीखने में मुख्य रूप से दस मूल्य हैं। वे व्यावहारिक मूल्य (Practical Value),बौद्धिक मूल्य (Intellectual Value),सामाजिक मूल्य (Social Value),नैतिक मूल्य (Moral Values),अनुशासनात्मक मूल्य (Disciplinary Values),सांस्कृतिक मूल्य (Cultural Values),अंतरराष्ट्रीय मूल्य (International Values),सौंदर्य मूल्य (Aesthetic Values),व्यावसायिक मूल्य (Vocational Values) और मनोवैज्ञानिक मूल्य (Psychological Values) हैं।

प्रश्न:3.गणित का सामाजिक मूल्य क्या है? (What is the social value of mathematics?):

उत्तर:उनके अनुसार,गणितीय मूल्यों में तर्कवाद (rationalism) शामिल हैं, जबकि सामाजिक मूल्यों को उन धारणाओं के रूप में परिभाषित किया जाता है जो बच्चों को समस्या-समाधान में वास्तविक जीवन सेटिंग्स और समाज में मौजूद हैं।

प्रश्न:4.आप गणित में मूल्यों को कैसे सिखाते हैं? (How do you teach values in math?):

उत्तर:गणित के लिए एक समस्या को सुलझाने के दृष्टिकोण के माध्यम से शिक्षण मूल्यों
जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए छात्रों को लैस करना।
सामान्य ज्ञान (general knowledge) और सामान्य समझ (common sense) का विकास।
सीखना कैसे ज्ञान के उपयोग में भेदभाव (discriminating) किया जा करने के लिए,कि क्या ज्ञान क्या प्रयोजनों के लिए उपयोग करने के लिए उपयुक्त है इसे जानते है ।

प्रश्न:5.गणित में मूल्यों का एकीकरण क्या है? (What is values integration in mathematics?):

उत्तर:मूल्य एकीकरण विभिन्न शिक्षण क्षेत्रों में शिक्षण-अधिगम गतिविधियों के माध्यम से मूल्यों के विकास का एक चैनल है। मूल्यों के एकीकरण का प्रारंभिक बिंदु शिक्षण क्षेत्रों की प्रकृति और ज्ञान के निकायों के रूप में उनका अनूठा योगदान है।

उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर द्वारा गणित के नैतिक मूल्य (Moral Values of Mathematics),गणित शिक्षा के नैतिक मूल्य (Moral Values of Mathematics) के बारे में ओर अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

Moral Values of Mathematics

गणित के नैतिक मूल्य
(Moral Values of Mathematics)

Moral Values of Mathematics

गणित के नैतिक मूल्य (Moral Values of Mathematics) में नैतिक शब्द का अर्थ है कि मनुष्य द्वारा किए गए ऐसे ऐच्छिक तथा आदतन कर्म
जिनको अच्छा-बुरा,शुभ-अशुभ,उचित-अनुचित,कर्तव्य आदि कहा जाता है।ये कर्म जानबूझकर या सोच-विचारकर किए जाते हैं।

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