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3 Tips to be Patient for Math Students

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1.छात्र छात्राओं के लिए धैर्य धारण करने की 3 टिप्स (3 Tips to be Patient for Math Students),गणित के छात्र-छात्राएं धैर्य कैसे धारण करें? (How Can Mathematics Students be Patient?):

  • छात्र छात्राओं के लिए धैर्य धारण करने की 3 टिप्स (3 Tips to be Patient for Math Students) के आधार पर धैर्य का महत्त्व समझेंगे।छात्र-छात्राओं के लिए अन्य गुणों विवेक,बुद्धि,आत्म-विश्वास,दृढ़ संकल्पशक्ति इत्यादि का जितना महत्त्व है उनसे कम महत्त्व धैर्य का नहीं है।धैर्य के बिना उपर्युक्त गुण तथा अन्य गुण टिके नहीं रह सकते हैं।अध्ययन में तथा गणित के सवालों को हल करने में कठिनाई महसूस हो तो धैर्यपूर्वक अध्ययन करते रहना चाहिए तथा गणित के सवालों का अभ्यास करते रहना चाहिए।
  • कोई भी सवाल या समस्या हल नहीं हो रही हो तो उसको हल करने के अन्य विकल्पों और तरीकों पर विचार करना चाहिए।इसमें कुछ समय लगे तो उसकी प्रतीक्षा करनी चाहिए।धैर्य का अर्थ केवल प्रतीक्षा करना ही नहीं है बल्कि प्रतीक्षा के समय आपका दृष्टिकोण कैसा है,यह भी शामिल होता है।धैर्य का अर्थ दिवास्वप्न देखना नहीं है बल्कि अध्ययन व गणित के सवाल में आनेवाली अड़चनों के यथार्थ को समझा जाए और जब सही विकल्प मिल जाए तो मन की भटकन को बंद करके उस विकल्प के आधार पर सवाल अथवा समस्या को हल किया जाए।
  • सवाल हल करने के कई तरीके होते हैं,लेकिन सवाल हल करते समय सही तरीकों के साथ गलत तरीके भी दिमाग में तैरने लगते हैं।इसलिए सवाल हल नहीं हो पाता है और इसीलिए सही तरीके को ढूंढने के लिए प्रतीक्षा करनी पड़ती है तथा सही विकल्प की तलाश करनी पड़ती है।
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2.गणित की समस्याओं में धैर्य धारण करें (Be Patient in Math Problems):

  • धर्म के दस लक्षणों में धृति (धैर्य) प्रथम लक्षण है। इसी से इसके महत्त्व का पता चल जाता है।किसी प्रश्नावली के सवालों को साहसपूर्वक हल करना और फिर कितनी भी विपत्ति,कैसे भी सवाल आएं फिर भी उसको हल करने में लगे रहना धैर्य कहलाता है।धैर्य जिस छात्र-छात्रा में नहीं है वह अध्ययन अथवा गणित के सवालों को हल करना ही क्या,जीवन में कोई भी कार्य नहीं कर सकता है।ऐसे विद्यार्थी का मन सदा डांवाडोल रहता है।किसी भी पाठ अथवा प्रश्नावली को हल करने का उसे साहस ही नहीं होता।
  • जिसमें धैर्य नहीं है वे अध्ययन तथा गणित के सवालों में आनेवाले विघ्नों,समस्याओं के भय से पहले ही घबरा जाते हैं और उस पाठ या प्रश्नावली को प्रारंभ करने का उनमें साहस नहीं होता है।ऐसे विद्यार्थी अधम श्रेणी (नीचे दरजे) के होते हैं।
  • कुछ विद्यार्थी गणित के सवालों व प्रश्नावली को हल करना तो प्रारंभ कर देते हैं परंतु ज्यों ही बीच में जटिल सवाल व समस्याएँ आती है तो उसको बीच में ही छोड़ देते हैं तथा प्रश्नावली या गणित को पूरी तरह हल नहीं करते हैं ऐसे विद्यार्थी मध्यम दर्जे के होते हैं,इन्हें प्रारम्भशूर भी कह सकते हैं।
  • सबसे उत्तम श्रेणी के ऐसे छात्र-छात्राएं होते हैं जो धैर्यपूर्वक गणित तथा अध्ययन को या तो आरंभ करते ही नहीं है,सोच-विचारकर प्रारम्भ करते हैं और एक बार प्रारंभ करने के बाद बीच में आने वाली बाधाओं,समस्याओं तथा कठिन सवालों के बार-बार आने पर भी उसको हल करना छोड़ते नहीं है।गणित के अध्ययन को पूरा करके ही दम लेते हैं,बीच में अधूरा नहीं छोड़ते हैं।बल्कि ऐसे छात्र-छात्राएं बीच में आने वाले संकट,बाधाओं तथा समस्याओं को वे एक अवसर के रूप में देखते हैं।वे सोचते हैं कि इनको हल करने पर ही उनकी प्रतिभा विकसित होगी।ऐसे धैर्यशाली छात्र-छात्राओं का उत्साह तथा तेज ओर अधिक बढ़ जाता है।ऐसे धैर्यशाली छात्र-छात्राओं को अपने आप पर पूर्ण आत्म-विश्वास होता है।अन्य छात्र-छात्राएं यदि उनकी निन्दा-प्रशंसा,हर्ष-शोक प्रकट करें तो बिल्कुल परवाह नहीं करते हैं बल्कि अपने अध्ययन कार्य में जुटे रहते हैं।
  • अध्ययन करना वे अपना कर्त्तव्य समझते हैं,कर्त्तव्यपालन में उनके सामने कितने ही संकट आएं,उनकी परवाह वे बिल्कुल ही नहीं करते हैं और अपने न्यायसंगत मार्ग पर बराबर डटे रहते हैं तथा बिल्कुल ही विचलित नहीं होते हैं।
  • उत्तम श्रेणी के विद्यार्थी धैर्यशाली होते हैं वे न तो क्रोध करते हैं और न इन्द्रियों के विषयों में फंसता है,न दुखी होता है और न हर्ष में फूलता है चाहे जितना भयंकर संकट उसके सामने आ जाएं परंतु अपने कर्त्तव्य पथ से बिल्कुल भी विचलित नहीं होता है,हिमालय पर्वत की तरह अचल तथा अडिग रहता है।
  • महाभारत के शांति पर्व में कहा है किः
    “यमर्थसिद्धिः परमा न हर्षयेत्तथैव काले व्यसनं न मोहयेत्।
    सुखं च दुःखं च तथैव मध्यमं निषेवते यः स धुरन्धरो नरः।।
  • अर्थात् चाहे जितना धन उसको मिल जाए वह हर्ष नहीं मनाता और चाहे जितना उस पर कष्ट आ जाए,वह घबराता नहीं है।ऐसा धुरंधर मनुष्य सुख-दुःख की अवस्था में भी अपने को समरस रखता है।जैसे समुद्र अपनी मर्यादा को धारण करता है,उसी प्रकार धीर पुरुष सदैव धीर-गंभीर रहकर अपनी मर्यादा को नहीं छोड़ता।
  • धैर्य का महत्त्व केवल अध्ययन तथा गणित के सवाल हल करने में ही नहीं है बल्कि जॉब करने में,सांसारिक व पारिवारिक कर्त्तव्यों का पालन करने में भी धैर्य धारण करने से कार्य सिद्ध होते हैं।
  • गणित में एक से अधिक एक जटिल समस्याएं आती है तब भी धैर्य नहीं छोड़ना चाहिए क्योंकि शायद धैर्य धारण करने से उस समस्या के हल का कोई न कोई तरीका मालूम पड़ जाय।उदाहरणार्थ समुद्र में जब जहाज डूब रहा होता है तब भी उसके यात्रीगण पार पाने की इच्छा रखते हैं और धैर्य के कारण बहुत से लोगों को ऐसे-ऐसे साधन मिल जाते हैं कि उनका जीवन बच जाता है।

3.धैर्य धारण की उपयोगिता (The Utility of Patience):

  • गणित विषय लेने अथवा जाॅब करने या कोई भी कार्य करने से पहले व्यक्ति उचित-अनुचित परिणाम पर भली प्रकार विचार करता है।उस कार्य को पूरा करने के लिए मार्ग तय करता है।उस कार्य की उपयोगिता-अनुपयोगिता पर विचार करता है।जबकि अधैर्यवान व्यक्ति बिना सोचे समझे गणित विषय अथवा अन्य कार्य को करना प्रारंभ कर देता है।उसमें उस कार्य को करने की न तो योग्यता होती है और न ही क्षमता होती है।अधीर व्यक्ति में कार्य को करने की गंभीरता का अभाव रहता है,जिससे चपलता के कारण अन्य व्यक्ति व छात्र-छात्राएं उसकी हंसी-मजाक उड़ाते हैं,निंदा करते हैं।अधीर व्यक्ति का मन व बुद्धि स्थिर नहीं रहते हैं।निन्दा व खिल्ली उड़ाने के कारण वह अपने निर्णय को बदलने के लिए उतावला हो जाता है।वह सोचता है कि गणित विषय लेकर उसने गलती कर दी है।अथवा यह जाॅब उसके अनुकूल नहीं है।अधीर व्यक्ति में आवश्यक योग्यता व दक्षता का भी अभाव होता है।
  • अधीर व्यक्ति बार-बार अपने निर्णय को बदलता रहता है।वह किसी भी विषय में ठीक से निर्णय नहीं ले पाता है।उसके जीवन में अस्त-व्यस्तता,अक्षमता,अनिर्णय की स्थिति देखने को मिलेगी जिससे वह हर क्षेत्र में असफल हो जाता है।जबकि धैर्यवान छात्र-छात्राएं गणित विषय अथवा अन्य विषय या कोई भी जॉब को सोच-समझकर पकड़ता है तथा फिर उसे पूर्ण एकाग्रता,विवेक,बुद्धि,योग्यता तथा क्षमता के साथ पूरा करने का पूर्ण प्रयास करता है।ऐसे छात्र-छात्राएं परीक्षा के परिणाम अथवा जाॅब के परिणाम की प्रतीक्षा में उतावला नहीं होता है बल्कि फल में आसक्ति नहीं रखता है।उसका पूरा ध्यान अपने कार्य को करने पर केंद्रित रहता है।
  • छात्र-छात्राएं अपना लक्ष्य कोई भी निर्धारित करें चाहे शैक्षिक परीक्षा उत्तीर्ण करना हो,जेईई-मेन अथवा कोई भी प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण करना हो,जाॅब में सफलता प्राप्त करना अथवा सांसारिक जीवन में सफलता प्राप्त करना हो इन सभी में धैर्य की महत्त्वपूर्ण भूमिका है।प्रत्येक छात्र-छात्रा को मन में एक निश्चय कर लेना चाहिए कि लक्ष्य को प्राप्त होने के अन्त तक पूरी निष्ठा और धैर्य के साथ उसे करेंगे।लक्ष्य को साधने के लिए दृढ़ निश्चय और अडिग रहने की आवश्यकता है।
  • अतएव जो छात्र-छात्राएं धैर्यशाली हैं वे धन्य हैं।ऐसे छात्र-छात्राएं बहुत थोड़े होते हैं और ऐसे ही विद्यार्थियों से ही परिवार,समाज व देश का गौरव बढ़ता है।विद्यार्थियों के पास चाहे धन,सुख,यश इत्यादि कुछ भी न हो और चाहे जितने कष्ट उठाने पड़े परन्तु उन्हें धैर्य रखते हुए अध्ययन कार्य को जारी रखना चाहिए,सदा उत्साहपूर्वक अपना कर्त्तव्यपालन करते रहना चाहिए।
  • नीति में कहा है कि “जिनको सम्पदा में हर्ष नहीं और विपदा में विषाद नहीं तथा रण में निर्भय होकर शत्रु का का नाश करते हैं,कभी पीठ नहीं दिखाते,ऐसे धीर पुरुष तीनों लोकों के तिलक हैं।माता ऐसे विरले सुत पैदा करती है।सभी विद्यार्थियों को ऐसे ही श्रेष्ठ पुरुष बनने का प्रयत्न करना चाहिए।

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4.धैर्य का दृष्टांत (A Parable of Patience):

  • विद्यार्थी अध्ययन करते हैं तथा जाॅब प्राप्त करने के लिए परीक्षा देते हैं उनमें सफलता प्राप्त करने के लिए अन्य गुणों के साथ धैर्य का होना भी जरूरी है।क्योंकि धैर्य हो तो वे अपने लक्ष्य को स्थिर बुद्धि और एकाग्रता के साथ प्राप्त कर सकते हैं।अथवा यह कह लीजिए कि स्थिरता और एकाग्रता तभी कायम रहती है जब धैर्य हो।अस्थिरता और उच्चाटन से अध्ययन अथवा कोई भी कार्य सफलतापूर्वक नहीं किया जा सकता है।उतावलेपन और अधीरता वाला विद्यार्थी अध्ययन कार्य को ठीक से नहीं कर सकता है।अस्थिरता और चंचलता से एकाग्रता और ध्यान भंग होता है।धैर्य के साथ एकाग्रता व ध्यान का होना जरूरी है तभी अध्ययन कार्य को ठीक से संपन्न कर सकेंगे।लेकिन यह ध्यान रखना चाहिए कि धैर्यवान और आलसी व अकर्मण्य में फर्क होता है।धैर्यवान होने का मतलब आलसी व अकर्मण्य होना नहीं है।धैर्य से लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है।धैर्य और साहस से ही अन्य गुण टिके रहते हैं।धैर्य से ही गणित में आने वाली अथवा जीवन में आने वाली समस्याओं का सामना किया जा सकता है।धैर्य और स्थिर बुद्धि से किसी भी कार्य को दक्षतापूर्वक और पूरे होने तक करते रहने की प्रेरणा और शक्ति मिलती है।जो धैर्य धारण नहीं करते वे किसी भी कार्य को बीच में छोड़कर भाग खड़े हो जाते हैं।बीच में छोड़ने से कार्य के परिणाम से तो वंचित रहते ही हैं साथ ही किए गए कार्य में परिश्रम और समय भी बेकार में नष्ट हो जाता है।
  • एक तन्मय नाम के विद्यार्थी ने गणित ऐच्छिक विषय के रूप में लिया।उसका अनुमान था कि उसके 90% अंक प्राप्त हो जाएंगे।परन्तु वार्षिक परीक्षा होने पर उसे 60% अंक ही प्राप्त हुए।उसका धैर्य टूट गया।उसने सीपीटी करने के लिए कॉमर्स विषय ले लिया।काॅमर्स में जब उसे 90% अंक प्राप्त नहीं हुए तो उसने आर्ट्स विषय ले लिया।
  • एक दिन उनके पारिवारिक गुरुजी आ गए।उन्होंने तन्मय से पूछा कि क्या करते हो? तन्मय रुआँसा होकर बोला क्या बताऊँ गुरुजी।पहले गणित विषय लिया था परंतु उसमें वांछित अंक प्राप्त नहीं हुए अतः जेईई-मेन प्रवेश परीक्षा देने का विचार त्याग दिया।फिर काॅमर्स विषय लिया परन्तु उसमें भी वांछित सफलता नहीं मिली अतः सीपीटी परीक्षा देने का विचार त्याग दिया।अब आर्ट्स विषय लिया है।
  • गुरुजी ने उसे समझाया कि पहली बात तो यह है कि अपनी क्षमता,योग्यता,लगन व धैर्य को देखना चाहिए।अपने शुभ चिन्तकों से परामर्श लेना चाहिए।एक बार लक्ष्य तय कर लिया तो फिर धैर्यपूर्वक उसको प्राप्त करने में जुट जाना चाहिए।एक बार में सफलता न मिले तो पुनः अपनी पूरी क्षमता,योग्यता,लगन व धैर्य के साथ तैयारी करनी चाहिए।अब तक तुम गणित विषय से ही तैयारी करते होते तो तुम्हें सफलता मिल चुकी होती।धैर्य रखते तो कभी का तुम्हारे अनुकूल परिणाम सामने आ जाता जाता।इस तरह बार-बार लक्ष्य बदलने और धैर्य धारण न करने से तुम्हारी एकाग्रता भंग होती है तथा अध्ययन के प्रति लगाव हट जाता है।फिर जीवन में भी उससे असफलता ही हाथ लगती है क्योंकि अधीर व्यक्ति कहीं भी कभी भी सफल नहीं होता है।तन्मय को अपनी भूल का अहसास हुआ तथा उसने धैर्य,एकाग्रता व एक ही लक्ष्य के लिए प्रयास करने का निश्चय किया।
  • उपर्युक्त आर्टिकल में छात्र छात्राओं के लिए धैर्य धारण करने की 3 टिप्स (3 Tips to be Patient for Math Students),गणित के छात्र-छात्राएं धैर्य कैसे धारण करें? (How Can Mathematics Students be Patient?) के बारे में बताया गया है।

5.गणित में बोले जाने वाले सामान्य शब्द (हास्य-व्यंग्य) (General Words Spoken in Mathematics) (Humour-Satire):

  • गणित अध्यापक (छात्र से):गणित के सवाल हल करने में अक्सर सबसे ज्यादा कौनसे शब्द बोले जाते हैं?
  • छात्र (गणित अध्यापक से):यह सवाल तो मुझे नहीं आता।
  • गणित अध्यापक (छात्र से):शाबाश,बैठ जाओ।

6.छात्र छात्राओं के लिए धैर्य धारण करने की 3 टिप्स (Frequently Asked Questions Related to 3 Tips to be Patient for Math Students),गणित के छात्र-छात्राएं धैर्य कैसे धारण करें? (How Can Mathematics Students be Patient?) से संबंधित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नः

प्रश्नः1.धैर्य के साथ विद्यार्थी में ओर कौनसे गुण होने चाहिए? (What Other Qualities Should a Student Possess with Patience?):

उत्तर:धैर्य के साथ-साथ विद्यार्थी में विवेक,साहस,मन की एकाग्रता,लक्ष्य पर नजर,लगन,कठिन परिश्रम इत्यादि गुणों को धारण करना चाहिए।लेकिन इन सभी गुणों को एक साथ धारण नहीं किया जा सकता है।अतः धैर्य के साथ एकाग्रता और साहस का गुण तो होना ही चाहिए।दो-दो गुणों को एक साथ धारण करने से धीरे-धीरे अन्य गुणों को धारण करना आसान हो जाता है।एक साथ सभी गुणों को धारण करने का संकल्प ले लें और फिर उनको धारण न कर पाने से संकल्प शक्ति कमजोर हो जाती है।फिर एक-एक,दो-दो गुणों को धारण करना भी कठिन हो जाता है।

प्रश्नः2.धैर्य कब कायम रहता है? (When Does Patience Last?):

उत्तर:जब हम स्थिर बुद्धि हो,चंचल बुद्धि नहीं,मन:स्थिति शांत हो अशांत न हो,तनाव रहित हों,उतावलापन नहीं हो,उच्चाटन नहीं हो तभी धैर्य कायम रहता है।

प्रश्नः3.संकट में धैर्य किस प्रकार सहायक है? (How is Patience Helpful in Crisis?):

उत्तर:वाल्मीकि रामायण के अनुसार शोक में,आर्थिक संकट में अथवा प्राणान्तकारी भय उपस्थित होने पर जो अपनी बुद्धि से दुःख निवारण के उपाय का विचार करते हुए धैर्य धारण करता है,उसे कष्ट नहीं उठाना पड़ता है।लेकिन धैर्य का गीता में लक्षण बताया गया है कि हे पार्थ,योग से अटल रहने वाली जिस धृति (धैर्य) से मन,प्राण और इंद्रियों की क्रियाओं को मनुष्य धारण करता है,वह धृति सात्त्विकी है।

  • उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर द्वारा छात्र छात्राओं के लिए धैर्य धारण करने की 3 टिप्स (3 Tips to be Patient for Math Students),गणित के छात्र-छात्राएं धैर्य कैसे धारण करें? (How Can Mathematics Students be Patient?) के बारे में ओर अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

3 Tips to be Patient for Math Students

छात्र छात्राओं के लिए धैर्य धारण करने की 3 टिप्स
(3 Tips to be Patient for Math Students)

3 Tips to be Patient for Math Students

छात्र छात्राओं के लिए धैर्य धारण करने की 3 टिप्स (3 Tips to be Patient for Math Students)
के आधार पर धैर्य का महत्त्व समझेंगे।छात्र-छात्राओं के लिए अन्य गुणों
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का जितना महत्त्व है उनसे कम महत्त्व धैर्य का नहीं है।

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