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How to teach definition of words in Mathematics in hindi

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2 गणित में परिभाषाओं का अध्ययन(To teach definition of words in Mathematics)

How to teach definition of words in Mathematics

गणित में परिभाषाओं का अध्ययन(To teach definition of words in Mathematics)

How to teach definition of words in Mathematics

How to teach definition of words in Mathematics

(1.)परिभाषाओं को पढ़ाते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि वह जटिल व शंकास्पद न हो कुछ शब्द जैसे बिन्दु, रेखा, समतल, धरातल आदि की परिभाषाएं छात्र-छात्राओं के मस्तिष्क में स्पष्टता के स्थान पर भ्रम उत्पन्न कर सकती है इसलिए इनको पढ़ाते समय सावधानी रखने की आवश्यकता है। 


(2.)परिभाषा में ऐसे कठिन व तकनीकी शब्दों का प्रयोग नहीं करना चाहिए कि उनको पढ़ाते समय फिर से उन शब्दों की परिभाषा बतानी पड़े। जैसे दो प्रतिच्छेदी रेखाएं एक बिन्दु पर मिलती है। दो रेखाएं सम्पाती होती है तो समान कोण बनाती है। इन परिभाषाओं में प्रतिच्छेदी व संपाती जैसे शब्दों को समझाए बिना ये परिभाषाएं समझ में नहीं आएगी। इसलिए इन शब्दों की अलग से परिभाषा देनी पड़ेगी ऐसी स्थिति से बचा जाए तो ज्यादा अच्छा है। 

(3.)किसी शब्द की परिभाषा तथा उसकी आकृति को जानना समझना अलग-अलग बात है। अधिकांश विद्यार्थी आकृतियों को तो पहचानते हैं परंतु उनकी परिभाषा नहीं जानते हैं। यदि परिभाषा को रट लिया जाए तो उसका वास्तविक अर्थ समझ नहीं आएगा इसलिए परिभाषाओं को उसके वास्तविक उदाहरण से समझाना चाहिए। 


(4.)कुछ शब्दों को परिभाषा द्वारा समझाना तथा उदाहरण देकर समझाना अत्यंत कठिन है इसलिए अच्छा है कि ऐसे शब्दों की प्राथमिक जानकारी दे देनी चाहिए। उच्च कक्षाओं में पहुँचने पर छात्र-छात्राएं स्वयं ही समझ जाते हैं। इस प्रकार के शब्द स्वयं सिद्धियाँ होती जैसे बिन्दु, रेखा, दिशा |जैसे कोण की परिभाषा इस प्रकार देना कि दो प्रतिच्छेदी रेखाओं के बीच के धरातल को कोण कहते हैं। यह अस्पष्ट परिभाषा है क्योंकि धरातल स्वयं क्षेत्रफल से जुड़ा हुआ शब्द है। हम कोण की परिभाषा में क्षेत्रफल को सम्मिलित नहीं कर सकते हैं। 


(5.)परिभाषाओं को समझाते समय अलंकारिक, क्लिष्ट एवं कठिन शब्दों का प्रयोग नहीं करना चाहिए जहां तक हो सके सरल शब्दों का प्रयोग करना चाहिए। परिभाषा को पुस्तक से जैसी है वैसी ही रटकर बोलना या लिखना परिभाषा नहीं कहा जा सकता है। परिभाषाएं किसी शब्द को समझाने का भाग होती है। 


(6.)परिभाषा के द्वारा एक शब्द की दूसरे शब्द से भिन्नता दर्शाना हो तो उन शब्दों को ठीक से विवरण देकर समझाना चाहिए जिससे छात्र उन शब्दों के अर्थ को ठीक प्रकार से पहचान व समझ सके। यदि वास्तविक प्रतीको के द्वारा समझाया जाए तो ज्यादा अच्छा है। 


(7.)छात्र-छात्राओं को तकनीकी शब्दों का अर्थ समझना और समझाना कठिन कार्य है। इसका सबसे उपाय यह हो सकता है कि छात्र-छात्राओं को अनेक प्रश्नों एवं उदाहरणों द्वारा समझाया जाए। केवल तकनीकी शब्दों को रटकर याद कर लेने से गणित में रुचि समाप्त हो जाएगी। 


(8.)परिभाषाओं को प्रायोगिक कार्य या चित्र द्वारा समझाया जा सकता हो तो परिभाषा सरलतापूर्वक समझ में आ सकती है और उसको अधिक सफलतापूर्वक स्पष्ट किया जा सकता है। जैसे कोणों के चित्र बनाकर कोणों को समझाया जा सकता है। न्यून कोण, अधिक कोण, समकोण, सरल कोण, वृहत कोण आदि को चित्र के द्वारा अधिक सरलता से समझाया जा सकता है। 

(9.)कुछ परिभाषाओं को प्रयोगशाला में माॅडल आदि के द्वारा समझाया जा सकता है। जैसे प्रिज्म, गोला आदि के माॅडल से उनके क्षेत्रफल व आयतन को समझाया जा सकता है। 
(10.)परिभाषाओं का विशेष अर्थ होता है। अतः इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि छात्र-छात्राएं परिभाषाएं को रटे नहीं बल्कि समझकर फिर उसे याद करे। जहां तक हो सके परिभाषा को उसकी आकृतियों, चित्रों, माॅडलों एवं अनुभवों के द्वारा करना चाहिए। कभी-कभी ऐसा भी सम्भव है कि किसी परिभाषा को उसके अर्थ से बताना कठिन प्रतीत होता है ऐसी स्थिति में केवल अर्थ बताकर संतोष कर ले। 


     

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