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Teaching of Algebra

Teaching of Algebra

(1.)बीजगणित का अर्थ (Meaning of Algebra) –

बीजगणित का अर्थ है कि ‘समीकरण’ में एक ओर से दूसरी ओर संख्या ले जाने से उसका चिन्ह बदल जाता है। ‘एलजेबरा’ अरबी भाषा के शब्द ‘Al-Jebral  Muqabullah’ का बिगड़ा हुआ रूप है|आरम्भ में बीजगणित का तात्पर्य समीकरण से ही लिया जाता था किन्तु बीजगणित के विकास के साथ-साथ इसकी विषय सामग्री में नए नए उपविषयों का समावेश होता गया। बीजगणित की शुद्ध परिभाषा देना कठिन है। अंकगणित के समान बीजगणित भी संख्याओं का विज्ञान है। केवल अन्तर इतना ही है कि बीजगणित में अंकों के स्थान पर अक्षरों का प्रयोग होता है। बीजगणित तथा अंकगणित में घनिष्ठ सम्बन्ध है। अंकगणित गणित के प्रत्ययों को बीजगणित का आधार बनाया गया है। बीजगणित को बीजीय पद-समूहों का विज्ञान भी कहा जाता है।
अंकगणित के प्रारम्भ में मानव ने स्थूल वस्तुओं को आधार बनाकर संख्या प्रणाली तथा अनेक संकल्पनाओं का विकास किया। अंकगणित की संख्या प्रणाली को आधार बनाकर जब संख्याओं के स्थान पर अक्षरों या पदों या संकेतों का प्रयोग किया जाने लगा तो बीजगणित का जन्म हुआ। बीजगणित को अंकगणित का विकसित रूप माना जाता है।

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अध्यापक को यह बात स्पष्ट रूप से समझ लेना चाहिए कि जो विद्यार्थी बीजगणित में कमजोर होते हैं वे वस्तुतः अंकगणित में भी कमजोर पाये जाते हैं। जब तक अंकगणित के प्रत्ययों, संकल्पनाओं, प्रक्रियाओं तथा शब्दावली का स्पष्ट ज्ञान नहीं होता तब तक अंकगणित के प्रत्ययों, संकल्पनाओं, प्रक्रियाओं तथा शब्दावली का स्पष्ट ज्ञान नहीं होता तब तक बीजगणित की संकल्पनाओं आदि को समझने में कठिनाई पैदा होती है। अंकगणित ही बीजगणित शिक्षण का आधार है। जिन विद्यार्थियों को संख्याओं की विशेषताओं तथा गुणों का ज्ञान नहीं होता वे उन संख्याओं को बीजगणितीय भाषा में प्रकट नहीं कर सकते हैं।
बीजगणित वस्तुतः अंकगणित का प्रसार है। अंकगणित में प्रकट विचारों को बीजगणित की भाषा में लिखी संख्या को समझ भी नहीं सकते हैं।
बीजगणित वस्तुतः अंकगणित में प्रकट विचारों को बीजगणित की भाषा सूत्रों द्वारा संक्षिप्त में लिखा जाता है। बीजगणित गणित की एक संक्षिप्त भाषा है जिसका विकास अंकगणित के साथ सम्भव हो सका है। बीजगणित की भाषा, संकेतों, अक्षरों, संक्रियाओं आदि को समझने के लिए मस्तिष्क का परिपक्व होना आवश्यक है। बीजगणित एक सामान्यीकृत भाषा है जिसके द्वारा गूढ़ विचारों को संक्षिप्त भाषा के द्वारा प्रकट करते हैं। अंकगणितीय प्रत्ययों को बीजगणित की भाषा में सूत्रों द्वारा लिखा जाता है। बीजगणित के सूत्रों को समझने के लिए अंकगणित के गूढ़ विचारों के बारे में स्पष्टता अनिवार्य है। समुच्चय भाषा बीजगणित भाषा है।

2.बीजगणित शिक्षण के उद्देश्य (Objectives of Teaching Algebra) –

(1.)अंकगणित के सिद्धान्तों, प्रत्ययों, प्रक्रियाओं आदि की पुष्टि एवं प्रसार करना।
(2.)अंकगणित तथा गणित की अन्य शाखाओं के सिद्धान्तों, संकल्पनाओं आदि का समुच्चय भाषा में सूत्रों या संकेतों द्वारा व्यक्त करने की क्षमता का विकास करना।
(3.)गणितीय विचारों का सामान्यीकरण (Generalisation) करने की योग्यता का विकास करना।
(4.)सूत्रों, समीकरणों एवं लेखाचित्रों, समुच्चयों द्वारा समस्याओं को हल करने की क्षमता पैदा करना तथा समुच्चय भाषा में उन्हें व्यक्त करने की योग्यता का विकास करना।
(5.)गणितीय भाषा में व्यक्त वाक्यों, सूत्रों, समीकरणों, सम्बन्धों, फलनों आदि की शब्दों में विवेचना करने की दक्षता पैदा करना।
गणितीय सम्बन्धों को सांकेतिक भाषा में लिखना एवं पढ़ना तथा संख्यात्मक सम्बन्धों को सूत्रों एवं समीकरणों में व्यक्त करना।
(7.)गणित के सिद्धान्तों, प्रत्ययों, प्रक्रियाओं आदि के बारे में गूढ़ चिन्तन (Abstract Thinking) करने की क्षमता पैदा करना।
(8.)गणित तथा विज्ञान की अनेक समस्याओं को बीजगणित द्वारा समझना एवं उनमें दिए हुए सम्बन्धों को व्यक्त करना।
(9.)गणना सम्बन्धी योग्यता का विकास कर बालकों को गणित के उच्च अध्ययन के योग्य बनाना।
(10.)गूढ़ चिन्तन द्वारा सूक्ष्म चिन्तन करने की प्रवृत्ति का विकास करना।
(11.)ऐसी समस्याओं के हल ज्ञात करना जिन्हें अंकगणित की सहायता से हल नहीं किया जा सकता।
(12.)तथ्यों एवं स्थितियों में शीघ्रता से सम्बन्धों को समझना तथा उनके गणितीय पक्ष को सम्पूर्ण स्थिति के सन्दर्भ में समझना।
(13.)समुच्चय भाषा, रेखिक प्रोग्रामन, बहुपदों, संख्या प्रणाली, असमिकाओं, ग्राफ, सम्मिश्र संख्याओं का अध्ययन करना।
(14.)मानसिक शक्ति का विकास करना।

3.बीजगणित शिक्षण से लाभ (Benefit from Educating Algebra) –

(1.)विद्यार्थियों में अंकगणित तथा ज्यामिति के सिद्धान्तों एवं प्रत्ययों के बारे में अधिक स्पष्टता आती है।
(2.)बीजगणित का अध्ययन गणित की अन्य शाखाओं को सीखने के लिए आवश्यक है।
(3.)समीकरण, असमीकरण और लेखाचित्रों, रेखिक प्रोग्रामन, समुच्चय का अध्ययन समस्याओं को हल करने में सहायक होता है।
(4.)विद्यार्थियों में सामान्यीकरण एवं सूत्रीकरण की प्रवृत्ति उन्हें गूढ़ चिन्तन करने में सहायक होती है।
(5.)बीजगणित प्रक्रियाओं के प्रयोग से गणना करने में समय की बचत होती है। बीजगणितीय भाषा संक्षिप्त होती है।
(6.)विज्ञान के अध्ययन के लिए बीजगणित उपयोगी है।
(7.)समुच्चय सिद्धान्त का अध्ययन बीजगणित द्वारा ही सम्भव है।
(8.)संख्या प्रणाली के गुण एवं धर्म बीजगणित द्वारा ही भलीभांति समझे जा सकते हैं।

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4.बीजगणित अंकगणित का सामान्यीकृत रूप कैसे?

अंकगणित ही बीजगणित का आधार है। बीजगणित को अंकगणित का प्रसार कहा जा सकता है। अंकगणित की विषय-सामग्री ही बीजगणित की विषय-सामग्री है और बीजगणित में उस सामग्री के विवेचन तथा अध्ययन का स्तर गूढ़ हो जाता है। दोनों में चिंतन की विषय-सामग्री लगभग समान है किन्तु बीजगणित में अधिक मानसिक चिंतन और सूक्ष्म तर्क की आवश्यकता होती है। अंकगणित में हम संख्याओं का प्रयोग करते हैं तथा बीजगणित में संख्याओं के स्थान पर अक्षरों, संकेतनों या प्रतीकों का प्रयोग करते हैं। अंकगणित की प्रक्रियायें ही बीजगणित की प्रक्रियाएं हैं। जिस प्रकार अंकगणित में हम संख्याओं पर चारों संक्रियाओं अर्थात् जोड़, बाकी, गुणा और भाग करते हैं, उसी प्रकार बीजगणित में बीजीय पदों या प्रतीकों पर भी इन्हीं चारों संक्रियाओं को करते हैं। अंकगणित में हम राशियों को धनात्मक मानते हैं परन्तु बीजगणित में बीजीय राशियों को धनात्मक एवं ऋणात्मक दोनों मानते हैं। अंकगणित के सिद्धांत एवं प्रत्यय ही बीजगणित की सामग्री के लिए स्वीकृत हैं। दोनों के लिए समान चिंतन एवं कार्य-विधि का प्रयोग होता है।

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अंकगणित की विषय-सामग्री का विस्तार बीजगणित में किया जाता है। संख्या-प्रणाली का विस्तार तथा चिन्हित संख्याओं के प्रयोग से बीजगणित की विषय-सामग्री अनेक प्रकार से विकसित हो सकी है। बीजगणित में सूत्रीकरण और सामान्यीकरण का आधार अंकगणित की विषय-सामग्री है। सूत्रों के द्वारा अंकगणित के सिद्धान्तों, प्रक्रियाओं तथा संख्यात्मक सम्बन्धों का आशुलिपीय कथन हुआ है। बीजगणित के सभी सूत्रों का अंकगणितीय सम्बन्धों के अध्ययन के पश्चात् ही निर्माण किया गया है। सबसे पहले संख्यात्मक सम्बन्धों का अनेक उदाहरणों द्वारा अध्ययन किया जाता है तथा इसके पश्चात् सामान्यीकरण कर सूत्रों का निर्माण करते हैं तथा सूत्रों को संकेतों तथा संक्षिप्त भाषा में लिखा जाता है।बीजगणित वास्तव में एक संक्षिप्त भाषा है जिसमें सामान्यीकरण द्वारा सिद्धान्तों को सूत्रों के रूप में लिखा गया है। इन सूत्रों का प्रयोग उच्च गणित में व्यापक स्तर पर होता है।
अंकगणित की संख्या बीजगणित का अक्षर नहीं है किन्तु बीजगणित का अक्षर अंकगणित की संख्या का एक प्रकार से प्रतिनिधित्व करता है। गणित के अध्यापक को चाहिए कि प्रारम्भ में संख्याओं के उदाहरणों को लेकर उनकी विशेषताओं का कक्षा में स्पष्ट विवेचन करे तथा बाद में संख्याओं के स्थान पर अक्षरों को आधार बनाकर सामान्यीकरण करवाए। अंकगणित की संख्याओं का शनैः शनैः प्रतिस्थापन अक्षरों द्वारा किया जाना चाहिए। सूत्र एक प्रकार से ‘बीजगणितीय वाक्‍य कहा जा सकता है जिसमें अंकगणित के सिद्धान्त आदि संक्षिप्त रूप में व्यक्त किए जाते हैं तथा अक्षरों और प्रतीकों की भाषा को जल्दी समझा जा सकता है।
बीजगणित के अध्यापन के समय बालकों को यह बता देना चाहिए कि वास्तव में अंकगणित तथा बीजगणित समान विषय हैं किन्तु बीजगणित की समुच्चय भाषा अधिक संक्षिप्त है तथा इसमें संकेतों और अक्षरों का प्रयोग किया जाता है।
बीजगणित के सूत्रों में यदि संख्याओं का प्रतिस्थापन कराया जाय तो उनमें निहित अंकगणितीय सम्बन्ध स्पष्ट हो जायेंगे। प्रतिस्थापन द्वारा विद्यार्थी अंकगणित और बीजगणित के समान आधारों को समझ सकेंगे तथा बीजीय भाषा की उपयोगिता उन्हें स्पष्ट हो जायेगी। समीकरण बीजगणित की विषय-सामग्री का एक महत्त्वपूर्ण भाग है तथा समीकरण के आधारभूत सिद्धान्तों का निर्धारण अंकगणित के क्षेत्र से ही है। बीजीय पद एवं राशियां अंकगणित राशियों का प्रतिनिधित्व करते हैं। बीजीय पदों पर की गई क्रियाएं अंकगणित में जानेवाली क्रियाओं की नकल मात्र हैं। अतः बीजगणित को अंकगणित का प्रसार माना जा सकता है।
यदि हम विद्यार्थियों को अंकगणित और बीजगणित की प्रक्रियाएं साथ-साथ कराएं तो वे समझ जाएंगे कि बीजगणित, अंकगणित का सामान्यीकृत रूप है।
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