Maths Student:3 Magic Spell to Win Classmate’s Heart
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1.गणित के छात्र:सहपाठी के दिल को जीतने के 3 जादुई मंत्र (Maths Student:3 Magic Spell to Win Classmate’s Heart):
- गणित के छात्र:सहपाठी के दिल को जीतने के 3 जादुई मंत्र (Maths Student:3 Magic Spell to Win Classmate’s Heart) के आधार पर आप जानेंगे कि सहपाठी का दिल जीतने की जरूरत क्यों है? ऐसा हम किसलिए करें और कैसे करें? आइए जानते हैं ये जादुई मंत्र।
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2.सहपाठी को प्रभावित करने के कौन-से मंत्र हैं? (What are the mantras to impress a classmate?):
- संपत्ति कमाना आसान है,परंतु अपने मित्रों के दिलों को जीतना और सहपाठियों को प्रभावित करना मुश्किल है। सहपाठी को प्रभावित क्यों करें? गणित ऐसा विषय है जिसमें कदम-कदम पर हमें सहयोग की जरूरत होती है।हर सवाल या समस्या शिक्षक से नहीं पूछी जा सकती है।पुस्तकों और संदर्भ पुस्तकों में भी समझाने वाली छोटी-छोटी बातें नहीं बताई जा सकती है।अतः हम मित्र या सहपाठी से ही अपनी समस्याओं को शेयर कर सकते हैं और पूछ सकते हैं।
- सहपाठी या मित्र क्यों बताना चाहेगा? यह दुनिया स्वार्थ पर टिकी हुई है।आपके व्यक्तित्व में कोई खूबी होगी,आपका व्यक्तित्व सहपाठी को आकर्षित करेगा तभी तो आपको वह अपना अमूल्य समय देकर आपकी समस्याओं को हल करने में मदद करेगा।
- शोध अध्ययनों से पता चला है कि किसी की आर्थिक सफलता का केवल 15% ही उसके व्यवहार की कला पर निर्भर करती है;यानी उसका व्यक्तित्व और लोगों का नेतृत्व करने की उसकी कला उसे 85% सफलता दिलाती है।अतः अगर किसी छात्र-छात्रा में तकनीकी ज्ञान है,अपने विचारों को व्यक्त करने की कला है,लीडर बनने की योग्यता है और लोगों में उत्साह भरने की क्षमता है,तो उस छात्र-छात्रा का महत्त्व निश्चित रूप से अधिक होगा और वह जीवन में सफल और संतुष्ट होगा।
अपने सहपाठी या मित्र को प्रभावित करने के मूलभूत तरीकों में तीन सिद्धांत आते हैं:(1) पहला सिद्धांत है:बुराई मत करो,निंदा मत करो,शिकायत मत करो;(2.) दूसरा सिद्धांत:सच्ची तारीफ करने की आदत डालो;(3.) तीसरा सिद्धांत है:सामने वाले छात्र-छात्रा में प्रबल इच्छा जगाओ।अब हम इन सिद्धांतों को थोड़ा विस्तार से समझते हैं।
(1.)बुराई या आलोचना मत करो (Don’t criticize):
- अगर आप दूसरों से स्नेह,सम्मान,सहानुभूति चाहते हैं तो उनकी आलोचना,बुराई ना करें।किसी की आलोचना (Criticism) करने से कोई फायदा नहीं होता;क्योंकि इससे सामने वाला छात्र-छात्रा अपना बचाव करने लगता है,बहाने बनाने लगता है या तर्क देने लगता है।आलोचना खतरनाक भी है;क्योंकि इससे उस छात्र-छात्रा का बहुमूल्य आत्मसम्मान आहत होता है,उसके दिल को ठेस पहुंचती है और वह आपके प्रति दुर्भावना रखने लगता है।आलोचना से कोई सुधरता नहीं है,बल्कि इससे संबंध जरूर बिगड़ जाते हैं।महान मनोवैज्ञानिक हैंस सेल्ये ने इस संदर्भ में कहा है:”जितना हम सराहना के भूखे होते हैं,उतना ही हम निंदा से डरते हैं।” आलोचना या निंदा (Reproof) से कर्मचारियों,परिवार के सदस्यों और दोस्तों का मनोबल कम हो जाता है और उस स्थिति में कोई सुधार नहीं होता,जिसके लिए आलोचना की जाती है।
- मनुष्य का स्वभाव ही यह है कि हर गलत काम करने पर वह दूसरों को दोष देता है,परिस्थितियों को दोष देता है,परंतु खुद को दोष नहीं देता।
- स्वयं अब्राहम लिंकन (Abraham Lincoln) ने अपने जीवन के अनुभव से दूसरों की आलोचना करने के पूरे परिणाम को जाना।उनका प्रिय कोटेशन था:”किसी की आलोचना मत करो,ताकि आपकी भी आलोचना न हो।” जब भी श्रीमती लिंकन और दूसरे लोग दक्षिणी प्रांत के लोगों की आलोचना करते तो लिंकन जवाब देते थे:”उनकी आलोचना मत करो,अगर हम उन परिस्थितियों में होते तो हम भी वैसे ही होते।” लिंकन अपने जीवन के कटु अनुभवों से यह जानते थे कि तीखी आलोचना और डांट-फटकार (Rebuke and reprimand) हमेशा नुकसानदायक होती है और उससे कोई लाभ नहीं होता है।
- आलोचना यदि दूसरों को सुधारने के लिए हो तो दूसरों को सुधारने के बजाय खुद को सुधारना ज्यादा फायदेमंद होता है और कम खतरनाक भी।
- यदि किसी के मन में स्वयं के प्रति विद्वेष पैदा करना है,जो दशकों तक पलता रहे और मौत के बाद भी बना रहे,तो इसके लिए कुछ खास नहीं करना पड़ता,सिर्फ चुनिंदा शब्दों में चुभती हुई आलोचना करनी होती है।आलोचना करने में इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि की गई आलोचना कितनी सही या गलत है।जाने-अनजाने ज्यादातर छात्र-छात्रा ऐसा ही करते हैं और दूसरों के मन में खुद के प्रति विषबीज (poison-seed) बो देते हैं।
- बेंजामिन फ्रैंकलिन अपनी युवावस्था में अभद्र थे,लेकिन आगे चलकर इतने बदल गए और लोगों के साथ व्यवहार करने में इतने कुशल हो गए कि उन्हें फ्रांस में राजदूत के रूप में भेजा गया।उनकी सफलता का राज क्या है? जब उनसे पूछा गया तो उनका जवाब था:”मैं किसी के बारे में बुरा नहीं बोलूंगा,…… और हर एक के बारे में अच्छा ही बोलूंगा।” उनका प्रिय कोटेशन था:”कोई भी मूर्ख बुराई कर सकता है,निंदा कर सकता है,शिकायत कर सकता है और ज्यादातर मूर्ख यही करते हैं,परंतु समझने और माफ करने के लिए आपको समझदार और संयमी (Wise and abstemious) होना पड़ता है।”
- प्रसिद्ध व्यक्ति कार्लायल ने कहा था:”महान व्यक्ति छोटे लोगों के साथ व्यवहार करने में अपनी महानता दिखाते हैं।”
संयम और समझदारी के साथ व्यवहार करने के एक अनुपम उदाहरण है बाॅब हूवर।बाॅब हूवर एक प्रसिद्ध टेस्ट पायलट थे,जो एअर शो में अक्सर प्रदर्शन किया करते थे।एक बार वे सैनडिएगो से एअर शो में हिस्सा लेने के बाद लॉस एंजिल्स में अपने घर की तरफ लौट रहे थे कि अचानक हवा में 300 फीट की ऊंचाई पर उनके हवाई जहाज के दोनों इंजन बंद हो गए।कुशल तकनीक से उन्होंने हवाई जहाज उतार लिया,लेकिन इस प्रक्रिया में उनके जहाज को काफी नुकसान पहुंचा,पर किसी को चोट नहीं आई।इस घटना के बाद हूवर ने सबसे पहले हवाई जहाज के ईंधन की जांच की।जैसी उन्हें शंका थी,वही उन्होंने पाया,उनके द्वितीय विश्वयुद्ध के प्रसिद्ध जहाज में गैसोलीन की जगह किसी ने जेट का ईंधन डाल दिया था। - हवाई अड्डे पर लौटने के बाद उन्होंने उस मैकेनिक के बारे में पूछा,जिसने उनके हवाई जहाज की सर्विसिंग की थी।युवा मैकेनिक अपनी गंभीर गलती पर बुरी तरह शर्मिंदा था।जब हूवर उसके पास पहुंचे तो उसकी आंखों में आंसू बह रहे थे।उसकी गलती की वजह से एक बहुत महंगा हवाई जहाज नष्ट हो गया था और कई जिंदगियाँ भी जा सकती थीं।ऐसी परिस्थिति में किसी भी कुशल और स्वाभिमानी पायलट का कड़ी फटकार लगना स्वाभाविक है,परंतु हूवर ने मैकेनिक को फटकार नहीं लगाई।
- उन्होंने उसकी आलोचना भी नहीं की।इसके बजाय,उन्होंने अपनी बाँह को उसके कंधे पर रखकर कहा-“तुम्हें यह बताने के लिए मुझे तुम पर पूरा भरोसा है और अब तुम दोबारा ऐसा नहीं करोगे,मैं चाहता हूं कि तुम कल मेरे एफ-51 हवाई जहाज की सर्विसिंग करो।” उनके इस व्यवहार से उस मैकेनिक के अंदर हूवर के प्रति श्रद्धा विश्वास का भाव पनपा और फिर कभी भी उसने अपनी पुरानी गलती नहीं दोहराई।
- इसलिए लोगों की आलोचना करने के बजाए हमें उन्हें समझने की कोशिश करनी चाहिए।हमें यह पता लगाना चाहिए कि जो काम वे करते हैं,उन्हें वे क्यों करते हैं।यह आलोचना करने से बहुत ज्यादा रोचक और लाभदायक होगा।यही नहीं,इससे सहानुभूति,सहनशक्ति और दयालुता (Sympathy,endurance and kind heartedness) का माहौल भी बनेगा;क्योंकि ‘सबको समझ लेने का मतलब है-सबको माफ कर देना।’ डाॅ. जॉनसन ने भी कहा था-“भगवान खुद आदमी की मौत से पहले उसका फैसला नहीं करता।”
(2.)छात्र-छात्रा के अच्छे कार्य की प्रशंसा (Praise the good deeds of the other student):
- किसी भी छात्र से कोई भी काम करवाने का एक ही तरीका है कि उस कार्य को करने की इच्छा उसमें पैदा करना।इसका अलावा कोई दूसरा तरीका नहीं है।हां,यह बात जरूर है कि किसी को डरा-धमकाकर भी काम लिया जा सकता है;लेकिन इन जंगली तरीकों के परिणाम अच्छे नहीं होते।केवल एक ही तरीके से किसी भी छात्र से कोई चीज हासिल की जा सकती है और वह तरीका है कि उसे वह चीज देना,जो वह चाहता है।
- छात्र क्या चाहता है? इस संदर्भ में अमेरिका के महान दार्शनिक जाॅन ड्यूई ने कहा है कि मानव प्रकृति में सबसे गहन आकांक्षा ‘महत्त्वपूर्ण बनने की इच्छा’ (desire) होती है।वैसे छात्र-छात्रा की चाहते अनगिनत होती हैं,पर बहुत कम चीजों को चाहने की प्रबलता होती है,ज्यादातर छात्र-छात्राओं में ये आकांक्षाएं होती हैं:
- (1.)स्वास्थ्य और जीवन का संरक्षण (protection of health and life);(2.)भोजन (food);(3.)नींद (sleep) ;(4.)पैसा (money) और पैसे से खरीदी जाने वाली वस्तुएं;(5.)परलोक सुधारना (to Improve next world);(6.)काम (अध्ययन) की संतुष्टि (satisfaction of Study) ;(7.) अपना और परिवार का कल्याण;(8.)महत्त्व की भावना।
लगभग ये सभी आकांक्षाएं सामान्यतः पूरी हो जाती हैं या संतुष्ट हो जाती है सिवाय एक के और वह है महत्त्वपूर्ण या महान बनने की आकांक्षा।अब्राहम लिंकन ने एक बार अपने एक पत्र की शुरुआत में लिखा था:”हर एक को तारीफ अच्छी लगती है।” विलियम जेम्स ने भी इसे इस प्रकार कहा था:”हर मनुष्य के दिल की गहराई में यह लालसा छिपी होती है कि उसे सराहा जाए।”
यहां पर इस आकांक्षा को इच्छा,चाहत या कामना नहीं कहा गया,बल्कि उसे ‘लालसा’ (craving) कहा गया है।’लालसा’ एक ऐसी मानवीय भूख है,जो स्थायी है और वह दुर्लभ छात्र-छात्रा,जो छात्र-छात्राओं की इस भूख को संतुष्ट करता है,छात्र-छात्राओं को अपने वश में कर सकता है।
- इंसानों और जानवरों में यही फर्क है कि इंसानों में महत्त्वपूर्ण बनने की आकांक्षा होती है।महत्त्वपूर्ण बनने की इसी आकांक्षा के कारण एक अशिक्षित और गरीब ग्राॅसरी क्लर्क कानून की किताबें पढ़ने के लिए प्रेरित हुआ,जो उसने रद्दी वाले से 50 सेंट में खरीदी थीं।उस ग्राॅसरी क्लर्क का नाम सभी जानते हैं:अब्राहम लिंकन।
- सहानुभूति और ध्यान आकर्षित करने तथा महत्त्वपूर्ण होने का अनुभव करने के लिए कई बार छात्र बीमार होने का भी बहाना करते हैं।अगर छात्र महत्त्व की भावना के इतने भूखे हैं कि वे उसके लिए सचमुच बीमार हो सकते हैं,पागल भी हो सकते हैं तो अपने आस-पास के लोगों को सच्ची प्रशंसा देकर कितना बड़ा चमत्कार किया जा सकता है और कितना कुछ हासिल किया जा सकता है।
- चार्ल्स श्वाब एक ऐसे व्यक्ति का नाम है,जिसने सहानुभूति और सच्ची प्रशंसा (true praise) के द्वारा लोगों के दिलों में राज किया।एंड्रयू कारनेगी ने चार्ल्स श्वाब को एक साल में 10 लाख डॉलर से अधिक की तनख्वाह दी।इसका कारण श्वाब ने बताया कि वे लोगों के साथ व्यवहार की कला में निपुण थे।श्वाब का कहना था:”मैं मानता हूं कि मेरी सबसे बड़ी पूंजी अपने कर्मचारियों का उत्साह बढ़ाने की कला है और मैं सराहना और प्रोत्साहन के द्वारा लोगों से सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करवा लेता हूं।
(3.)छात्र-छात्रा में प्रबल इच्छा जगाना (Arouse a strong desire in other students):
- अपनी प्रसिद्ध पुस्तक ‘इनफ्लुएंसिंग ह्यूमन बिहेवियर’ में हैरी ए० ओवर स्ट्रीट ने लिखा है:”कर्म पैदा होता है,हमारी मूलभूत इच्छा से……और बिजनेस,घर,स्कूल और राजनीति में दूसरों को काम करने के लिए प्रेरित करने (motivate) वाले लोगों को सबसे बढ़िया सलाह यही दी जा सकती है कि सबसे पहले सामने वाले आदमी में काम करने की प्रबल इच्छा जगाएं।जो यह कर सकता है,उसके साथ पूरी दुनिया है।जो यह नहीं कर सकता,वह अकेला ही रहेगा।”
- एन्ड्रयू कारनेगी गरीबी में पले स्कॉटलैंड के किशोर थे,जिन्होंने अपनी नौकरी की शुरुआत दो सैंट प्रति घंटे के काम से की थी और बाद में उन्होंने 365 मिलियन डॉलर दान (donation) में दिए।उन्होंने जीवन की शुरुआत में ही सीख लिया था कि लोगों को प्रभावित करने का इकलौता तरीका सामने वाले की इच्छाओं के बारे में बात करना है।वे केवल चार साल तक ही स्कूल गए थे,परंतु उन्होंने यह सीख लिया था कि लोगों के साथ किस तरह व्यवहार किया जाता है।
- शालीन,शिष्ट एवं विनम्र व्यवहार (polite behavior) के द्वारा हम औरों के दिल जीत सकते हैं।अतः हमें सदा औरों के साथ विनम्र व्यवहार करना चाहिए।हमारी व्यवहार कुशलता से ही हमारी पहचान होती है,अतः इसको समुन्नत करके हमें अपनी पहचान बनानी चाहिए।
- प्रिय छात्र-छात्राओं देखा आपने आलोचना न करने,दूसरे की अच्छे कार्यों की प्रशंसा करने और सामने वाले छात्र-छात्रा में प्रबल इच्छा जगाना,ये तीन जादुई मंत्र है जिससे आप दूसरों के दिलों पर राज कर सकते हैं।इनके अलावा और भी सिद्धांत है जैसे दूसरों की निस्वार्थ सहायता-सहयोग करना,मधुर वाणी बोलना,दूसरों के विचारों का आदर करना आदि।परंतु हमने मुख्य रूप से इन तीन का ही वर्णन किया है।आप इन मंत्रों को भी जीवन में अपना लोगे तो जीवन में चमत्कार हो जाएगा।इन तीन गुणों को जीवन में अपनाने का कुल मतलब यह नहीं है कि हमें अपने स्वार्थ को सिद्ध करना है।अकेला छात्र न तो अपनी पीठ थपथपा सकता है और न ही अपने आप को लात मार सकता है।
- यानी आप अच्छे कार्य करते हैं,अध्ययन में अच्छे मार्क्स प्राप्त करते हैं,अच्छा जाॅब प्राप्त करते हैं तो आपकी पीठ थपथपाने से आपका हौसला बढ़ता है।आप अपने कार्य को और रुचिपूर्वक करते हैं।जीवन में प्रोत्साहन और प्रेरणा (Inspiration) भी जरूरी है भले ही प्रेरणा का महत्त्व कम है परन्तु इसे नजरअंदाज तो नहीं किया जा सकता है।
यदि आप गलत रास्ते पर जा रहे हैं।जैसे विद्यार्थी काल में ही ड्रग्स का सेवन करना,अय्याशी करना,लड़ाई झगड़ा करना,परीक्षा में नकल करना,शिक्षकों व छात्र-छात्राओं के साथ मारपीट करना,तो आपको सचेत करने वाला भी होना चाहिए।आपको सही दिशा का ज्ञान करने वाला,आपको मार्गदर्शन (guidence) करने वाला भी होना चाहिए ताकि आप भटक न सकें,सही रास्ते पर चल सकें।
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3.छात्र के पसीने छूटे (हास्य-व्यंग्य) (The student sweats) (Humour-Satire):
- छात्र:सर,आपने दूसरों के दिलों पर राज करने के करिश्माई मंत्र बताए।इन मंत्रों से मेरे जीवन में बहुत बड़ा बदलाव आएगा।पर एक समस्या रह गई।कभी-कभी दूसरों के पसीने छुड़वाने की जरूरत भी पड़ जाती है।
- शिक्षक:आप चिंता ना करें,मैं यह कला भी सिखा दूंगा। आप द्वारा मेरी कोचिंग की फीस जमा कराते ही यह कला भी सीख जाएंगे।
4.गणित के छात्र:सहपाठी के दिल को जीतने के 3 जादुई मंत्र (Frequently Asked Questions Related to Maths Student:3 Magic Spell to Win Classmate’s Heart) से संबंधित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:
प्रश्न:1.जीतने का मंत्र क्या है? (What is the winning mantra?):
उत्तर:क्रोध न करके क्रोध को,भलाई करके बुराई को, दान करके कृपण को और सत्य बोलकर असत्य को जीतना चाहिए।
प्रश्न:2.महावीर कौन होता है? (Who is Mahavir?):
उत्तर:वीर पुरुष वह कहलाता है जो दुनिया को जीतता है,लेकिन महावीर वह है जिसने अपने ऊपर जय पायी है।और दुनिया में ऐसे छुप गया है जैसे दूध में शक्कर।
प्रश्न:3.अपने पर विजयी कौन होता है? (Apne Par kon vijayi hota hai?):
उत्तर:जो अपने मन को काबू में रखता है।कामवासना से मुक्त रहता है,अपनी जीभ पर नियंत्रण रखता है।
- उपर्युक्त आर्टिकल में गणित के छात्र:सहपाठी के दिल को जीतने के 3 जादुई मंत्र (Maths Student:3 Magic Spell to Win Classmate’s Heart) के द्वारा आप और अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
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