Mathematics Mein Niyambaddhta ka Mahatv
1.गणित में नियमबद्धता का महत्त्व (Mathematics Mein Niyambaddhta ka Mahatv):
- गणित में नियमबद्धता का महत्त्व (Mathematics Mein Niyambaddhta ka Mahatv) ही सफलता पाने का असली खेल है।जानिए कैसे एक गणित छात्र अनुशासन और निरंतर अभ्यास से जटिल प्रमेयों और गणनाओं में सिद्धहस्त हो सकता है।
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2.गणित में अनुशासन के फायदे (Mathematics Mein Discipline Ke Fayde):
(1.)नियमबद्धता क्या है? (Niyambaddhta Kya hai:A Student’s Perspective):
- एक गणित के छात्र के लिए नियमबद्धता का मतलब है जटिल समीकरणों को छोटे प्रबंधकीय पार्ट्स में तोड़ना और उन्हें बिना रुके हल करना।जैसे कैलकुलश में हर एक स्टेप पिछले स्टेप पर निर्भर करता है,वैसे ही आपका सीखना पिछले दिन की मेहनत पर टिका होता है।यदि आपने पिछले दिन कुछ नहीं किया तो नियमबद्धता टूट जाएगी फिर से आपको श्रृंखला बनाने के लिए पीछे लौटना होगा।और आज कुछ नहीं किया तो कल के लिए बीज नहीं बोया,कल के लिए आपके कुछ भी करने के लिए नहीं रहेगा।इसलिए हर दिन कुछ न कुछ करते रहना जरूरी है वरना क्रम टूटने का खामियाजा उठाना पड़ता है।गणित के विद्यार्थी के लिए हर दिन महत्त्वपूर्ण है।
(2.)अनुशासन (Discipline):
- नियमबद्धता से एक अनुशासन कायम होता है।रोजाना सूत्रों को याद करने की जरूरत नहीं पड़ती,वो स्वाभाविक लगने लगती है।जब आप सवालों को हल करने का अभ्यास करते हैं तो सूत्र अपने आप याद होते चले जाते हैं।अभ्यास से कॉन्सेप्ट क्लेरिटी (concept clarity) होती है।नियम और अनुशासन से आप सवालों के बीच छिपे पैटर्न (pattern recognition) को पहचानना सीख सकते हैं।आप अपने जीवन में गणित को हल करने के साथ-साथ नियमबद्धता और अनुशासन सीख जाते हैं।एक बार आपके जीवन में अनुशासन और नियमबद्धता का समावेश हो गया तो पढ़ाई ही नहीं बल्कि हर काम नियमबद्धता और अनुशासन के साथ करने लगेंगे।हर काम व्यवस्थित और समय पर करने के आदी हो जाएंगे।
(3.)गति और शुद्धता (Speed and Accuracy):
- जितनी ज्यादा नियमबद्धता होगी उतनी हम गणना करने में कम त्रुटि करेंगे।दरअसल गणित में गलतियां ज्यादा कब होती है जब अनुशासन और नियमबद्धता नहीं होती।आप रोजाना जितना प्रैक्टिस करेंगे गति और शुद्धता उतनी ही बढ़ती जाएगी।आपने सड़क के किनारे बोर्ड टँगा हुआ देखा होगा सावधानी हटी और दुर्घटना घटी।
- नियमबद्धता और अनुशासित वही छात्र रह सकता है जो जागरूक होता है और जो जागरूक और होशपूर्वक कार्य करता है उससे उतनी कम गलतियां और अशुद्धियां होती हैं।एक आदर्श गणित का वही विद्यार्थी होता है जिसकी गति बढ़ने के साथ-साथ गलतियां बहुत कम होती है या न के बराबर होती है।उसके सोने,उठने,जागने,शौचादि क्रियाएं,खाने-पीने,पढ़ने और शिक्षा संस्थान में जाने आदि हर कार्य नियमबद्ध और अनुशासित होता है।
- परंतु आजकल के विद्यार्थियों में ऐसे बहुत कम छात्र-छात्राएँ ऐसे होते हैं जिनका ध्यान इस तरफ जाता है वरना अधिकांश छात्र-छात्राएँ तो इनसे नाक-भौं सिकोड़ते हैं।इन नियमों का पालन करने के लिए कहते ही उन्हें बिजली का सा करंट लग जाता है।
(4.)गणित के छात्र के लिए व्यावहारिक संकेत (Mathematics Student Ke Liye Practical Hints):
- नियम समय सेट करो (Set a Fixed Time):
- गणित हमेशा उस वक्त हल करें जब आपका दिमाग सबसे ज्यादा सक्रिय हो।यदि आपका मन गणित के सवालों को हल करने में आनाकानी कर रहा हो,तो कम से कम एक-दो मुश्किल सवाल जरूर हल करें। इससे आपके पढ़ने का क्रम (Sequence) बना रहेगा।अपनी गलतियों की समीक्षा करो (Review Your Mistakes):
- अपनी पुरानी गलतियों को रोज जांच करना भी नियमबद्धता का हिस्सा है।पुरानी गलतियों की जांच करके उनमें सुधार करने से एक अनुशासन और नियमबद्धता कायम होती है जो हमें प्रोग्रेसिव बनाती है।
3.कॉलेज गणित:नियमबद्धता से सफलता तक का सफर (College Student:Niyambaddhta se Success Tak Ka Safar):
- (1.)कॉलेज मेथ VS स्कूल मैथ (College Math VS School Math):
स्कूल में हम फाॅर्मूले रटते थे,लेकिन कॉलेज में हमें प्रमाण (Proofs) और प्रमेय (Theorems) की लॉजिक समझनी होती है।यहाँ नियमबद्धता का मतलब है: परिभाषाओं को ध्यान से पढ़ना,हर प्रमेय के पीछे का क्यों तलाशना। - (2.)दीर्घावधि निरंतरता के फायदे (Long Term Consistency Ke Fayde):
अगर आपने ग्रुप थ्योरी में निरंतरता नहीं रखी,तो रिंग थ्योरी (Ring Theory) समझना नामुमकिन हो जाएगा।कॉलेज एग्जाम का सिलेबस बड़ा होता है।रोजाना का एक घंटा,एग्जाम समय के 10 घंटे से बेहतर होता है।परीक्षा के निकट सीरीज,वन वीक सीरीज को रटकर उत्तीर्ण होने का मोह त्यागें और डीप स्टडी करें। - मानक संदर्भ पुस्तकें (Standard Refeference Books):
सिर्फ नोट्स पर डिपेंड ना रहे हैं।रोजाना किसी मानक पुस्तक के लेखक जैसे Gilbert Strans ya S.C. Malik की पुस्तक का एक सेक्शन जरूर पढ़ें। - कॉलेज परीक्षा में प्रमाण (Proofs) लिखने होते हैं।रोजाना एक नयी प्रमेय का प्रमाण बिना देखें लिखने की आदत डालें।
एडवांस मैथमेटिकल लॉजिक (Advanced Mathematical Logic) के टॉपिक को पढ़ें और अपने आपकी इस टॉपिक को तैयार करने के लिए पूरी शक्ति और बुद्धि का प्रयोग करें।
- अमूर्त तार्किक में निरंतरता (Consistency in Abstract Reasoning) में निरन्तरता की आवश्यकता होती है।गणित के छात्र-छात्राएं अक्सर बीजगणित के टॉपिक में कठिनाई महसूस करते हैं।यदि कंसिस्टेंसी (Consistemcy) के साथ इसको हल किया जाए तो इस पर मजबूत पकड़ बनाई जा सकती है।
- थ्योरम डेरिवेशन प्रेक्टिस (Theorem Derivation Practice):थ्योरम्स प्रेक्टिस मांगती हैं,प्रैक्टिस भी कंसिस्टेंसी (Consistency) के साथ की जाए तो प्रमेय का टॉपिक तैयार किया जा सकता है।थ्योरम को पूरे फोकस के साथ समझना और फिर उसे लिखना।पूरी एकाग्रता के साथ लिखने से समझी गई थ्योरम्स आसानी से याद हो जाती हैं।जिस थ्योरम में डेरिवेशन हो उसमें डेरिवेशन को समझना जरूरी है।
- यूनिवर्सिटी लेवल मेथ डिसिप्लिन (University Level Math Discipline) में उच्च स्तर का अनुशासन और कठिन अभ्यास की जरूरत होती है।
4.सफलता के लिए क्विक हिंटस (Quick Hints for Success):
- (1.)लाॅजिकल सीक्वेंस (Logical Sequence) कभी भी सीधे एडवांस लेवल पर ना कूदें।लेवल n से n+1 पर ही जाएं।
- (2.)विज्युअलाजेशन (Visualize) करने की कोशिश करें,इससे रुचि बनी रहती है।
- (3.)कोई शॉर्टकट्स नहीं (No shortcuts):शॉर्टकट्स तभी सीखें जब आपको लंबे मेथड पर पूरी कमाण्ड हो।कॉलेज के लिए हिंट (Hints for College Students):Library Rituals:कॉलेज खत्म होने के बाद लाइब्रेरी में 45 मिनट बिताने की नियमबद्धता बनाएँ।वहां का माहौल फोकस बढ़ाता है।पीअर डिसकसन (Peer Discussion):हफ्ता में एक बार अपने दोस्तों के साथ किसी टफ कॉन्सेप्ट पर चर्चा करें। दूसरों को सिखाना सबसे बड़ी नियमबद्धता है।
- (4.)डिजिटल टूल्स (Digital Tools):अगर आप ब्लॉग लिखते हैं,तो कॉलेज स्टूडेंट के लिए LaTex या Desmo जैसे उपयोग करके ग्राफ और समीकरण खींचना चाहिए,इसे पढ़ने में रुचि बढ़ती है।
- (5.)शुद्ध गणित और अनुप्रयुक्त गणित (Pure Mathematics and Applied Mathematics) दोनों ही समुद्र हैं,लेकिन इनकी नियमबद्धता का तरीका काफी अलग होता है।
- (6.)ब्लॉग में शुद्ध गणित और प्रयुक्त गणित के लेख पढ़ कर आप जान सकते हैं कि कैसे शुद्ध गणित की कॉन्सेप्ट (जैसे Number Theory) प्रयुक्त गणित में काम आती है।
- (7.)हर थ्योरम को एक कहानी की तरह समझें।अगर एक लॉजिक (Logic) भी चूक हुआ तो पूरा प्रमाण गिर जाएगा।
- (8.)एप्लाइड मैथ (Applied Math) (जैसे Fluid Dynamics,Statistics,Cryptography) में फोकस सिद्धांत (हल) पर होता है।यहां कंसिस्टेंसी (Consistency) का मतलब है रोजाना गणना अभ्यास और एल्गोरिथम को वास्तविक संसार आंकड़ों पर लागू करना।इसमें गति और शुद्धता दोनों चाहिए।रोजाना 5-10 आंकिक सवालों को हल करना ही असली नियमबद्धता है।
- (9.)रोजाना पांच इंटीग्रल और डिफरेंशियल इक्वेशन सॉल्व करें।इंटीग्रेशन को क्षेत्रफल और डिफरेंशियेशन को ढाल की तरह विजुअलाइज करें।
- (10.)3D ज्योमेट्री और ऑप्टीमाइजेशन:ये दोनों अनुप्रयुक्त गणित की जगह हैं।3D Geometry:रोजाना समतल और लाइन्स की समीकरणों को 3D स्पेस में कल्पना करने की कोशिश करें।ऑप्टीमाजेशन constants के बीच हल निकालने के लिए लिनियर प्रोग्रामिंग (L.P.P.) का रोजाना अभ्यास जरूरी है।
- (11.)3D Geometry में डायग्राम का महत्त्व है।नोटबुक में x,y,z अक्ष खींचने की नियमबद्धता रखें।
5.नियमबद्ध बनने की आवश्यकता (The need to become a rule-bound):
- जीवन को जागृत बनाने के लिए दो बातों की प्रधान रूप से आवश्यकता है।एक तो समय का कार्य विभाजन,दूसरे अपने कार्य में रुचि।प्रातःकाल चारपाई पर उठते ही दिनभर का कार्यक्रम बना लेना चाहिए कि आज कौन-कौन कार्य किस समय करना है? उन कार्यों की विशेष आवश्यकता के अनुसार समय में हेर-फेर करना पड़े तो कोई बात नहीं,परंतु अपनी निजी ढील के कारण जरा भी विलंब नहीं होने देना चाहिए।जिन्हें प्रातःकाल का नियत किया हुआ कार्यक्रम याद रखने में अड़चन पड़ती हो तो उन्हें डायरी में नोट कर लेना चाहिए और रात को सोते समय देखें कि उस कार्यक्रम पर अमल हुआ या नहीं? यदि नहीं हुआ तो ध्यान करें कि उसका कारण अन्य परिस्थितियाँ थीं या अपनी ढील? जहां अपनी ढील दिखाई पड़े,वहाँ अपने को डांटना चाहिए और आगे के लिए सावधानी रखने की दृढ़ता स्थापित करनी चाहिए।
- हर कार्य को अपने ‘गौरव की कसौटी’ समझकर करना चाहिए।इस कार्य की श्रेष्ठता या निकृष्टता पर मेरा व्यक्तित्व परखा जाने वाला है,यह अनुभव करना चाहिए।जैसे कई 3D ज्यामेट्री का छात्र चित्र बनाते समय यह ध्यान रखता है कि इस अभ्यास से तात्कालिक लाभ न सही पर अभ्यास हो जाने पर जब मैं सफलता के शिखर पर पहुँचूंगा तो वह लाभ बहुत बड़ा होगा।इस दृष्टिकोण से वह कड़ी मेहनत और एकाग्रता से डायग्राम बनाता है।वह जानता है कि शिक्षाकाल की छोटी-मोटी रद्दी कागज पर मामूली स्याही से बनने वाली तस्वीरों (Diagrams) का स्वयं कुछ विशेष महत्त्व नहीं है,तो भी इन रद्दी कागज पर बड़े परिश्रमपूर्वक बनाए जाने वाले चित्रों के अंतर्गत 3D में महान सफलता का रहस्य निहित है।
- साधारण छोटे-मोटे दैनिक जीवन के कार्यों को जो विद्यार्थी अच्छे से अच्छा,सुंदर से सुंदर,बढ़िया से बढ़िया बनाने का प्रयत्न करता है,वह अपनी क्रियाशक्ति को सतेज करता है,अपने अभ्यास को बढ़ाता है।उन छोटे कामों में विशेष मनोयोगपूर्वक अधिक सुंदरता उत्पन्न करना तत्काल कुछ विशेष महत्त्व भले ही न रखता हो,पर उससे अभ्यास,सुरुचि को बनाने और बढ़िया काम करने की जो आदत पड़ती है,वह अत्यंत ही मूल्यवान है।
- यह बढ़िया काम किसने किया है? जब इस प्रश्न को प्रसन्न और संतुष्ट चेहरे से कोई पूछता हो तो समझ लीजिए कि उस काम के कर्त्ता के लिए सजीव उपहार भेंट किया जा रहा है।विद्यार्थी का गौरव इस बात में है कि उसके कामों की अच्छेपन,सुघड़ता और निर्दोषिता के लिए प्रशंसा की जाए।
- जो व्यक्ति अपने काम को प्रशंसा योग्य बनाता है,वह काम उलटकर अपने करने वाले को प्रशंसा योग बनाता है।बहुत काम करना अच्छी बात है,पर उससे अच्छी बात यह है कि काम को उत्तमता से किया जाए।बहुत काम करना,पर खराब करना यह कोई अच्छी बात नहीं है,चाहे अपेक्षाकृत कुछ कम काम हो,पर वह उत्तमता से किया होना चाहिए।
- चीजों को संभालकर यथास्थान रखना यह एक बड़ा अच्छा गुण है।इससे वस्तुएं खोने,फूटने-टूटने या मैली-कुचैली होने से बच जाती है और वे अधिक समय तक अपनी मजबूती तथा सुंदरता को कायम रखे रहती हैं।सौंदर्य का प्रथम नियम चीजों को यथास्थान रखना है,नियत स्थान से भिन्न स्थान पर पड़ी हुई वस्तु ही कूड़ा-कचरा कही जाती है।प्रयोजन पूरा होने के उपरान्त वस्तुओं को जहां-तहां न पड़ी रहने देना चाहिए,वरन उन्हें यथास्थान रखने के बाद तब वहां से हटाना चाहिए।किसी काम की समाप्ति तब समझनी चाहिए,जब उस कार्य में प्रयुक्त हुई वस्तु यथास्थान पहुंचा दी जाए।
- (1.)इस कार्य में कोई भूल तो नहीं हो रही है?
- (2.)कार्य को और अच्छा किस प्रकार बनाया जा सकता है? इन दोनों प्रश्नों को सदैव मन में जागृत रखने में ऐसे उपाय सूझ पड़ते हैं,जिनके द्वारा अधिक लाभदायक,संतोषजनक और उन्नतिशील स्थिति प्राप्त हो सके।मैं जागृत तंद्रा में तो नहीं जा रहा हूं? कोई लापरवाही तो नहीं बरत रहा हूं? आलस्य में बहुमूल्य समय तो नहीं गँवा रहा हूं।
- प्रमाद के लक्षण तो मुझ में नहीं आ रहे हैं? इस प्रकार के प्रश्नों से अपनी शोधक दृष्टि को रखना चाहिए और एक निष्पक्ष एवं खरे आलोचक की तरह अपने आप की परीक्षा तथा समीक्षा करते रहना चाहिए।जैसे मुंह पर मक्खी या मच्छर आ बैठे तो उसे तुरंत उठा देने के लिए हाथ उठता है,वैसे ही लापरवाही को मक्खी और आलस्य को मच्छर समझ कर उन्हें पास ना आने देना चाहिए और जैसे ही वह दिखाई दें,वैसे ही तुरंत उन्हें भगा देना चाहिए।
- अपना स्वभाव ढील-पोल मत बनने दीजिए,अपने मन को उदास,निराश और गिरा हुआ मत रहने दीजिए।अपने आप को सदा चैतन्य,जागरूक और कर्त्तव्य परायण रखिए।जागृति में जीवन और तंद्रा में मृत्यु है।आप जीवितो का जीवन जीना चाहते हैं तो जागृत रहिए।अपने सब काम को सावधानी और सतर्कता के साथ कीजिए।
6.गणित में नियमबद्धता के महत्त्वपूर्ण प्रश्न (Important Questions of Niyambaddhta in Mathematics):
- प्रश्न:1.क्या सिर्फ ब्रिलियन्स से मैथ में टॉपर बना जा सकता है? (Kya sirf brilliance se math mein topper bana ja sakata hai?):
- उत्तर:नहीं,गणित में प्रतिभा से ज्यादा कंसिस्टेंसी (consistency) नियमबद्धता काम आती है।एक औसत विद्यार्थी भी नियमित अभ्यास से किसी भी जीनियस (Genius) को पीछे छोड़ सकता है।
- प्रश्न:2.अगर बीच में गैप हो जाए तो क्या करें? (Agar beech mein gap ho jaye toh kya karein?):
उत्तर:गैप होने पर बेसिक्स से शुरू करें,गणित एक चेन (chain) की तरह है।अगर एक लिंक टूट गया,तो पूरी चैन कमजोर हो जाती है। - प्रश्न:3.नियमबद्धता कैसे मेंटेन करें? (Niyambaddhta Kaise maintain karein?):
उत्तर:फाॅर्मूला डायरी बनाएं और रोजाना 15 मिनट रिवीजन का नियम बनाएं। - प्रश्न:4.कॉलेज मैथ में सिलेबस बहुत बड़ा है,रेगुलेटरी कैसे बनाएं? (College mein syllabus bahut bada hai,regularity Kaise banayein?):
- उत्तर:सिलेबस को चैप्टर में नहीं कॉन्सेप्ट में डिवाइड करें,रोजाना एक बड़ी कॉन्सेप्ट और उससे जुड़ी 2 प्रमेय हल करने का टारगेट रखें।
- प्रश्न:5.क्या कॉलेज लेवल पर लास्ट नाईट स्टडी काफी है? (Kya college level par sirf last night study kaffi hai?)
उत्तर:नहीं,इंजीनियरिंग और शुद्ध गणित में कांसेप्ट अंतर्संबंधित होते हैं।नियमबद्धता के बिना आप एग्जाम में प्रूफ स्टेप-बाय-स्टेप नहीं लिख पाएंगे। - प्रश्न:6.कौन सा सब्जेक्ट ज्यादा मुश्किल है? (Kaunsa subject zyada mushkil hai?):
उत्तर:मुश्किल कोई नहीं है,बस माइंडसेट का फर्क है।पूरे मैथ में डीप थिंकिंग चाहिए और एप्लाइड मैथ में क्विक एग्जीक्यूशन (Quick Execution)। - प्रश्न:7.क्या अप्लाइड मैथ के लिए प्योर मैथ आना जरूरी है? (Kya Applied Math Ke liye pure math aana zaroori hai?):
- उत्तर:बिल्कुल प्योर मैथ आपका बेस बनाता है।अगर आपको फंक्शन की थ्योरी (प्योर) नहीं पता तो आप उन्हें ऑप्टिमाइज (optimize (apllied)) नहीं कर सकते।
- प्रश्न:8.कैरियर के लिए क्या बेहतर है? (Career ke liye kya behtar hai?):
उत्तर:रिसर्च और टीचिंग के लिए प्योर मैथ बेहतर है,जबकि डाटा साइंस (Data Science),फाइनेंस और इंजीनियरिंग के (Finance aur Engineering) लिए (Applied Math) का बोलबाला है। - उपर्युक्त आर्टिकल में गणित में नियमबद्धता का महत्त्व (Mathematics Mein Niyambaddhta ka Mahatv) के बारे में बताया गया है।
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7.गणित में नियमबद्धता का महत्त्व (Frequently Asked Questions Related to Mathematics Mein Niyambaddhta ka Mahatv) से संबंधित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:
प्रश्न:9.आप्टीमाइजेशन में सबसे बड़ी गलती क्या होती है? (Optimization mein sabse badi galti kya hoti hai?):
उत्तर:सबसे बड़ी गलती कांसट्रेन्ट्स (Constraints) को इग्नोर करना।नियमबद्धता के साथ प्रैक्टिस करने से आप बाउन्ड्रीज (boundaries) को पहचानना सीख जाते हैं।
प्रश्न:10.क्या विविक्त गणित और कैलकुलस साथ में पढ़ सकते हैं? (Kya Discrete Math aur Calculus saath mein padh sakte hain?):
उत्तर:हाँ! दोनों दिमाग के अलग हिस्सो को प्रशिक्षित करते हैं।एक आपको लाॅजिकल रीजनिंग (Logical Reasoning) सिखाता है और दूसरा सतत विश्लेषण (Continuous Analysis)।
प्रश्न:11.काॅलेज एग्जाम में मार्क्स कैसे बढ़ाएं? (College exams mein marks kaise badhayein?):
उत्तर:हमेशा उत्तर के साथ मेथड का नाम (जैसे:Using Taylor’s Theorem) और फाॅर्मूला बाक्स जरूर बनाएं।
- उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर द्वारा गणित में नियमबद्धता का महत्त्व (Mathematics Mein Niyambaddhta ka Mahatv) के बारे में और अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
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Lekhak Ke Baare Mein (About the Author)
**Satyam Narain Kumawat**
**Website Name:Satyam Mathematics**
*Owner:satyamcoachingcentre.in*
*Sthan:Manoharpur,Jaipur (Rajasthan)*
**Teaching Mathematics aur Anya Anubhav**
***Shiksha:**B.sc.,B.Ed.,(M.sc. star Ke Mathematics Ko Padhane ka Anubhav),B.com.,M.com. Ke vishayon Ko Padhane ka Anubhav,Philosophy,Psychology,Religious,sanskriti Mein Gahri Ruchi aur Adhyayan
***Anubhav:**phichale 23 varshon se M.sc.,M.com.,Angreji aur Vigyan Vishayon Mein Shikshaka Ka Lamba Anubhav
***Visheshagyata:*Maths,Adhyatma (spiritual),Yog vishayon ka vistrit Gyan*
****In Brief:I have read about M.sc. books,psychology,philosophy,spiritual, vedic,religious,yoga,health and different many knowledgeable books.I have about 23 years teaching experience upto M.sc. ,M.com.,English and science.











