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8 Specific Humor Tips for Students

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1.छात्र-छात्राओं के लिए हास्य की 8 विशिष्ट टिप्स (8 Specific Humor Tips for Students),हास्य क्यों जरूरी है? (Why is Humor Important?):

  • छात्र-छात्राओं के लिए हास्य की 8 विशिष्ट टिप्स (8 Specific Humor Tips for Students) के आधार पर जानेंगे कि छात्र-छात्रा के लिए अध्ययन के दौरान हास्य कितना जरूरी है? हास्य से हमारा रोम-रोम खिल जाता है और तनावरहित हो जाते हैं।
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2.हास्य की भूमिका (The Role of Humor):

  • किसी भी बात को व्यंग्यपूर्वक कहा जाए,हास्यपूर्वक कहा जाए या गंभीरतापूर्वक शर्त यही है की बात कल्याणकारी होनी चाहिए,पालन की जा सकने वाली हो और दूसरे के दिल को दुखाने वाली या ठेस पहुंचाने वाली ना हो।
    हँसी,हास्य का प्रारंभ कब हुआ होगा? हँसी स्वयं पर आई होगी या दूसरों पर,यह बहस का विषय हो सकता है परंतु हमें इस पचड़े में नहीं फँसना है,लेकिन हँसना-हँसाना सभी को अच्छा लगता है।लेकिन कभी-कभी हँसी की खांसी हो जाती है जैसे दुर्योधन से द्रौपदी ने ठिठोली की थी कि अँधों के अंधे ही पैदा होते हैं जिसका उत्तर दुर्योधन ने द्रौपदी का चीर हरण करके दिया था और पूरा महाभारत युद्ध का कारण बना था।
  • वैसे रोने से जी हल्का-फुल्का होता है,बच्चा जन्म लेते ही रोता है और आंखों की खूबसूरती बढ़ती है।यह सब जानने के बावजूद रोना किसी का भी अच्छा नहीं लगता है।दूसरी तरफ हँसी-ठिठोली,मजाक और चुटकुले का जीवन में विशेष महत्त्व है।शादी के समय साली जीजाजी के जूते छुपा कर ठिठोली करती है।
  • कोई हँस क्यों रहा है? यह बात बताना मुश्किल है।कोई सफलता मिलने पर,दूसरा किसी को धोखा देकर,ठगकर,मूर्ख बनाकर,अन्य किसी को संकट में पड़े देखकर,मुसीबत में फँसे देखकर तथा कोई स्वयं का दिल हल्का-फुल्का करने के लिए हँस सकता है।हँसी ज्ञानी और मूर्ख पर समान रूप से असरकारक होती है। वह बालक और वृद्ध पर समान भाव से असर करती है।व्यक्ति खुश होकर भी हँस सकता है तथा फँसकर भी। वैसे,लोग बिना मतलब के भी हँस सकते हैं।हँसी के पीछे कोई कारण तलाशना कुछ ऐसा ही है।
    दो अप्रैल को मूर्ख दिवस मनाया जाता है और उस दिन लोग एक-दूसरे से ठिठोली करके,मूर्ख बनाकर हँसने का प्रयास करते हैं।जैसे कोई मिठाई में नमक मिलाकर उसे प्रसाद बताकर दूसरों को खिला देता है और जब वह खा लेता है और खाते ही थूकता है तो खिलाने वाला अप्रैल फूल मनाया कहकर हँसता है।
  • जब हम मुस्कराते हैं,खिल-खिलाते हैं तो अपने भीतरी मन को एक स्वस्थ संकेत देते हैं कि प्रफुल्लित रहो।यानी हमारा मन भी मधुर कल्पनाओं,शुभकामनाओं तथा पवित्र विचारों से ओतप्रोत हो जाता है।और ये सब हमारे मानसिक स्वास्थ्य को उत्तम स्थिति में रखते हैं।हँसने,हँसाने,मुस्कुराने,खिलखिलाने के अनेक उपाय हो सकते हैं।अच्छी,शिष्ट,सहज चुटकुलों वाली पुस्तकें भी हमारी मदद करती हैं।हास-परिहास व्यक्ति के मन को खुशी से प्रफुल्लित कर देता है और शायद इसी वजह से हर साल एक जुलाई को ‘इंटरनेशनल जोक डे’ मनाया जाता है।अमेरिका जैसे देशों में इस दिन लोग किसी खास जगह पर अपने मित्रों और नाते-रिश्तेदारों के साथ इकट्ठे होते हैं और जम कर हँसी ठिठोली करते हैं।हर देश में चुटकुलों और हँसी-मजाक के अलग-अलग तरीके हैं।भारत में बीरबल,तेनालीराम आदि के किस्से लोगों को तनाव रहित माहौल रखने के लिए प्रेरित करते रहे हैं।

3.हास्य निरापद औषधि (Humor Safe Medicine):

  • विद्यार्थी पूरे दिन,सप्ताह,महीनों और वर्षभर पुस्तकों को पढ़ने में खोया रहता है।पाठ याद नहीं होता है तो तनाव में आ जाता है,कोर्स पूरा नहीं होता है तो दुःखी होता है,टीचर अनुपस्थित रहने से कोर्स की चिंता खाए जाती है,क्लास टेस्ट,रैंकिंग टेस्ट जैसी परीक्षाओं से अधमरा हो जाता है,ऐसी स्थिति में हास्य उसके जी को हल्का-फुल्का कर देती है।
  • यह सच है कि आदतें या स्वभाव सिर्फ व्यक्तित्व को ही परिभाषित नहीं करते बल्कि स्वास्थ्य को भी प्रभावित करते हैं।विभिन्न शोधों के अनुसार व्यक्तित्व संबंधी आदतों,स्वभाव और हाव-भाव के पीछे तमाम बीमारियाँ भी मौजूद रहती हैं।यह भी कहा गया है कि मानव स्वभाव और हाव-भाव का रिश्ता सीधे जींस से होता है।इसके अनुसार खुश रहने वाले लोगों की उम्र तनाव में रहने वाले लोगों से अधिक होती है।
  • यदि हम मनोविज्ञान के नजरिये से देखें तो पाएंगे कि मुस्कराना,दिल खोल कर हँसना और चित्त प्रफुल्लित रखना एक निरापद औषधि है।इसके कोई साइड इफेक्ट भी नहीं होते।….. तो फिर इससे वंचित क्यों रहा जाए?
    चेहरे की उम्र घटाना हो तो मुस्कराहट बिखेरना एक सरल व्यायाम है।अनुभवी लोगों का कहना है कि मुस्कराना एक ऐसा व्यायाम है जो चेहरे पर आती झुर्रियों को रोकने में मददगार है।

4.हास्य के लाभ (Benefits of humor):

  • विद्यार्थी पढ़ते-पढ़ते बोर हो जाता है,बोरियत महसूस करता है।कभी उसका मूड ऑफ हो जाता है और पढ़ने का मन नहीं कर पाता है।वह समझ नहीं पाता है कि बोरियत और मूड ऑफ तथा तनावग्रस्त स्थिति से बाहर कैसे निकले।यों तो इससे निकलने के कई माध्यम है जैसे अपनी हॉबी को समय देना,कुछ मनोरंजन,किसी दूसरे विषय को पढ़ने लग जाना,टहलना,संगीत या भजन सुनना आदि।इनमें हास्य भी एक तरीका है जिससे मन रिफ्रेश हो जाता है,तनावरहित हो जाता है।
  • मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है।वह समाज में रहता है।विभिन्न अवसरों पर अन्य लोगों से मिलता-जुलता है।कभी किसी प्रसंग पर,किसी की बेवकूफी पर अथवा  किसी के सुनाए मजेदार चुटकुले पर मुस्कराता,हँसता अथवा जोर से ठहाके भी लगाता है।शर्त यह है कि मनुष्य ठहाके लगाने के लिए मानसिक तौर पर तैयार हो।विशेषज्ञ मानते हैं कि मुस्कराना और हँसना परिस्थितियों के अधीन हो सकता है,लेकिन ठहाका लगाना हर व्यक्ति के लिए तभी संभव हो सकता है जब वो स्वयं को प्रफुल्लित रखने को प्रयासरत हो।
  • ये ठहाके वातावरण में प्रफुल्लता तो बिखेरते ही हैं,उसे सहज भी बना देते हैं।सबसे महत्त्वपूर्ण बात तो यह है कि ठहाकों से स्वयं को सर्वाधिक लाभ होता है,क्योंकि हँसने से शारीरिक अंगों की रक्त वाहिनियाँ फैलती है। इससे रक्त में तनाव से संबंधित हार्मोन की मात्रा में कमी आती है।
  • हँसते-मुस्कराते,ठहाके लगाते रहने से जीवन सरल हो जाता है और छोटी-छोटी बातों पर क्रोध नहीं आता।साथ ही आपस में मिल-जुल कर रहने,सहज और प्रफुल्लित रहने की कला भी आती है।क्योंकि हँसी-ठहाके मूड को तरोताजा रखने हैं।व्यक्तित्व भी बहिर्मुखी बनता है।हाँ,अपनी खुशी के लिए ठहाके लगाकर किसी का दिल न दुःखे,इतनी गरिमा तो रखनी ही चाहिए।

5.हँसना और हँसाना तो सही है (It’s okay to laugh):

  • विद्यार्थियों को ध्यान रखना चाहिए कि हँसना और हँसना तो ठीक है परंतु किसी की हँसी उड़ाना,किसी की कमजोरियों पर हँसना,किसी में कोई कमी पर हँसना जैसे किसी के हकलाने,तुतलाने,लँगड़ाने आदि पर हँसना ठीक नहीं है,किसी पर दुःख,आपत्ति आ पड़ने पर मजाक उड़ाना ठीक नहीं है।
  • प्रसन्नता मनुष्य के सौभाग्य का चिन्ह है।जो व्यक्ति हर समय प्रसन्नचित्त रहता है,उसके पास लक्ष्मी का निवास रहता है।जिसकी मुस्कान चली जाती है,प्रसन्नता तिरोहित हो जाती है,उससे लक्ष्मी रूठ जाती है।श्री,लक्ष्मी का बहुत लोकप्रिय नाम है।हँसने से,प्रसन्न रहने से मनुष्य के मुख पर एक श्री,एक कांति,एक तेज विराजमान रहता है,जो संसार के समस्त श्रेयों को खींच कर ले आता है।
    प्रसन्नचेता व्यक्ति को देखकर लोग प्रसन्न होते हैं,उसकी ओर आकर्षित होते हैं,उसकी मैत्री प्राप्त करना चाहते हैं।प्रसन्नता एक आध्यात्मिक वृत्ति है,एक देवी चेतना है।इसका आश्रय ग्रहण करने वाले के सारे शोक-संताप भाग जाते हैं।प्रमुदित मन और प्रसन्नचित्त व्यक्ति के पास बैठकर लोग अपना दुःख-दर्द भूल जाते हैं,सुख और संतोष का अनुभव करते हैं।मुदितात्मा व्यक्ति देवदूत होता है,संसार का कलुष दूर करने वाला होता है।
  • मनुष्य को जब भी हँसने का अवसर मिले खूब हँसना चाहिए।जो हँसना नहीं जानता,वह जीना नहीं जानता।हँसी,मुसकान और प्रसन्नता यौवन की आधारशिला है। जो हँस सकता है,मुस्करा सकता है,प्रसन्न हो सकता है,वह बुढ़ापे में भी युवा है।इसके विपरीत जो मन-मलीन और उदास रहता है,वह युवा भी बूढ़ा है।यौवन का गुण है:आकर्षण।हँसने वाले की ओर सारा संसार आकर्षित हो उठता है और रोने-झींकने वाले से सबको विकर्षण रहता है।जो हर समय रोता-झींकता और विषाद करता रहता है,वह जीवन के संजीवनी तत्व को नष्ट कर देता है और जो हर समय प्रसन्न और प्रमुदित रहता है वह अमृत को ग्रहण करता है।

5.हँसना एक टाॅनिक (Laughing is a tonic):

  • आप हँसेगे तो संसार आपका साथ देगा।आप रोएंगे तो आप अकेले रह जाएंगे,कोई आपके पास बैठना ना चाहेगा।हास में जीवन और रुदन में मृत्यु की छाया उतनी ही अवधि की वृद्धि कर लेता है।हास्य मनुष्य का सच्चा मित्र,सेवक,साथी और सहचर-सब कुछ है।जो इसको अपने साथ लेकर चलता है,वह जीवन में अवश्य सफल होता है।हास्य शत्रुता का शमन करता है,प्रतिकूलताओं को मित्र और क्रोध को शांत बनाता है।प्रसन्नचेता व्यक्ति की जिंदगी एक महोत्सव के समान बन जाती है,जिससे उसे क्षण-क्षण उत्साह,उल्लास और आनंद की प्राप्ति होती है।
  • हँसना स्वास्थ्य का मूल मंत्र है।हँसने से मनुष्य के मानसिक तनाव दूर हो जाते हैं।उसे एक मधुर विश्राम प्राप्त होता है।हँसना एक मानसिक,शारीरिक एवं बौद्धिक व्यायाम है।हँसने से नाड़ी संस्थान पर एक विशेष प्रभाव पड़ता है,जिससे वे नवीन शक्ति पाकर क्रियाशील हो उठती हैं।ईर्ष्या,द्वेष,क्रोध आदि उत्तेजनाओं से जो शारीरिक अस्त-व्यस्तता उत्पन्न हो जाती है,मनोविकारों का जो विष अवयवों में संचित हो जाता है वह हँसने,प्रसन्न होने से दूर हो जाता है।हँसने से  फेफड़ों को नवीन शक्ति मिलती है,जिससे शरीर का रक्त शुद्ध और सशक्त बनता है।हास्य से उत्पन्न होने वाली पुलकन से पेट के सारे विकार नष्ट हो जाते हैं।इससे मनुष्य के पाचन-क्रिया का सुधार होता है,शुद्ध रक्त की वृद्धि होती है।आरोग्य के लिए हास्य अमोघ रसायन है।

6.प्रसन्नता का जीवन में उपयोग (Using Happiness in Life):

  • जीवन में पग-पग पर आने वाली कठिनाइयों,मुसीबतों और समस्याओं से मनुष्य में जो एक क्लान्ति,कमजोरी और अरुचि उत्पन्न हो जाती है,वह हँसने से दूर हो जाती है और शरीर में एक नवीन चेतना,नव-स्फूर्ति का समावेश होता है।
    संसार के किसी भी महापुरुष का जीवन देख लिया जाए,उनके अन्य गुणों के साथ प्रसन्नता का गुण प्रधानरूप से जुड़ा हुआ मिलेगा।हर स्थिति एवं परिस्थिति में एकरस,प्रसन्न रहना महापुरुषों की सफलता का सबसे बड़ा रहस्य रहा है।प्रसन्नता मनुष्य की कार्यक्षमता को कई गुना बढ़ा देती है।
  • अप्रसन्न,उदास तथा खिन्न रहने वाले व्यक्ति की सारी शक्तियां शिथिल हो जाती हैं।विषादोत्पादक स्थिति में एक ऐसी तपन होती है,जो मानव जीवन के सारे उपयोगी तत्त्वों को जला डालती है।खिन्नता मानव जीवन का भीषण अभिशाप है।यह जीती-जागती नरक की भयानक ज्वाला की भाँति मनुष्य को दीन-हीन,दुःखी और दरिद्र बनाकर रख देती है।जिसके चेहरे पर मुस्कान नहीं,हँसी नहीं,प्रसन्नता नहीं,कोई भी उसके पास बैठना,उसे याद करना,उसके संपर्क में रहना पसंद नहीं करता।हर आदमी उससे दूर भागता है,जिससे उसका जीवन एकाकीपन के भार से दबकर दुरूह बन जाता है।
  • जीवन में जिसने प्रसन्नता का महत्त्व नहीं समझा उसने मानो सौभाग्यपूर्ण अभ्युदय के द्वार ही बंद कर दिए।मनुष्य का जीवन रोते-बिलखते काटने के लिए नहीं बल्कि हँसते-खेलते और गाते-मुस्कराते हुए महोत्सव की भाँति आनंद लेने के लिए ही है।जीवन में ऐसी घटनाएं तथा परिस्थितियाँ भी आती हैं जब हँसी-खुशी का प्रदर्शन सभ्यता की दृष्टि से गलत माना जा सकता है,किंतु इसका यह मतलब कदापि नहीं है कि उस दुखद परिस्थिति को इतनी गहराई तक अपना लिया जाए कि सारा जीवन ही विषाद पूर्ण बनकर रह जाए।संसार के क्रम के अनुसार अनेक परिस्थितियों को मनुष्य के दो आँसुओं की भी आवश्यकता हो सकती है।किंतु उनको उतने ही आँसू देने चाहिए,जितने का कि अधिकार उनको है।संपूर्ण जीवन को आंसुओं के रूप में उँडेल देना बुद्धिमानी नहीं।आँसू मनुष्य के लिए अपवाद और हास उसके जीवन का सत्य है,यथार्थ है।

7.छात्र-छात्राएं ध्यान रखें (Students,take care):

  • हास्य और प्रसन्नता जीवन की सच्चाई है परंतु फिर भी कुछ अवसरों पर हँसना,प्रसन्न होना उचित नहीं है।उदाहरणार्थ आपका सहपाठी परीक्षा में असफल हो जाए,उसका प्रश्न-पत्र खराब हो जाए,किसी प्रतियोगिता परीक्षा में असफल हो जाए,दुर्घटनाग्रस्त हो जाए,बीमार हो जाए,चोट लग जाए,उसके परिवार में किसी का देहावसान हो जाए,किसी आर्थिक संकट में फँस जाए,किसी से लड़ाई-झगड़ा हो जाए,किसी मुकदमे में फँस जाए,कोई पुलिस केस हो जाए आदि ऐसे अवसरों पर उसको सान्त्वना देनी चाहिए और हिम्मत बँधानी चाहिए।
  • ऐसे अवसरों पर हँसना,हँसी-मजाक करना हमारे ओछेपन को दर्शाता है।जिंदगी में हर किसी के दुःख और सुख के पल आते हैं अतः दुःख के पलों में हँसना,हास-परिहास करना उसके घावों पर नमक छिड़कने के समान है।समय पर हँसना,हास-परिहास करना शोभा देता है।साथ ही हमेशा हास-परिहास करते रहना भी शोभा नहीं देता है।अध्ययन के समय अध्ययन करना,शिक्षक के पढ़ाते समय ध्यान देकर पढ़ना आपकी परिपक्वता दर्शाता है।अध्ययन करते-करते काफी समय हो गया हो,कोई दावत-पार्टी हो,जन्मदिन,विवाहोत्सव पर हास-परिहास करना शोभा देता है,ऐसे अवसरों पर गमगीन रहना,मुंह लटकाकर रहना शोभा नहीं देता।ऐसे अवसरों पर हँसते-मुस्कराते रहना ठीक रहता है।
  • ऐसे सहपाठी के साथ भी हास-परिहास नहीं करना चाहिए जिसे हँसी-मजाक बिल्कुल पसंद नहीं है।हँसी-मजाक दिल खुश करने के लिए की जाती है परंतु हँसी-मजाक किसी को पसंद नहीं तो वहाँ बात का बतंगड़ बन सकती है,लड़ाई-झगड़ा हो सकता है।यदि आपके द्वारा हँसी-मजाक से किसी के दिल को ठेस पहुँची हो तो तत्काल खेत व्यक्त कर देना चाहिए जिससे बात बिगड़ने से बच जाए।किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ हास-परिहास करने से बचें।यदि आप पुरुष है तो महिला के साथ,यदि महिला हैं तो परपुरुष के साथ हास-परिहास करने से बचें क्योंकि इस प्रकार के हास-परिहास में अर्थ का अनर्थ निकाल लिया जाता है।इन बातों का ध्यान रखेंगे तो हास-परिहास से आप का जीवन खुशहाल हो जाएगा।
  • उपर्युक्त आर्टिकल में छात्र-छात्राओं के लिए हास्य की 8 विशिष्ट टिप्स (8 Specific Humor Tips for Students),हास्य क्यों जरूरी है? (Why is Humor Important?) के बारे में बताया गया है।

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8.छात्र का सहपाठी के साथ भद्दा मजाक (हास्य-व्यंग्य) (Student’s Lewd Joke with Classmate) (Humour-Satire):

  • नमित:ऐसे कैसे गमगीन होकर,देवदास की तरह बैठे हो।
  • अनिल:परीक्षा में फेल हो गया।पूरा साल खराब हो गया।घर वाले,माता-पिता डाँटेंगे सो अलग।
  • नमितःभगवान की मर्जी है फेल होना,पास होना।तुमने मेहनत ही नहीं की तो फेल नहीं होंगे तो क्या होगा?
  • अनिल:तुम मुझे सान्त्वना देने के बजाय मेरे घावों पर नमक छिड़क रहे हो,कैसे दोस्त हो तुम।

9.छात्र-छात्राओं के लिए हास्य की 8 विशिष्ट टिप्स (Frequently Asked Questions Related to 8 Specific Humor Tips for Students),हास्य क्यों जरूरी है? (Why is Humor Important?) से संबंधित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:

प्रश्न:1.मन की गाँठे कैसे खुलती है? (How do the knots of the mind untie?):

उत्तर:हँसी मन की गाँठे आसानी से खोल देती है।हमारे मन की ही नहीं बल्कि सामने वाले के मन की भी।

प्रश्न:2.हमें हँसी कब आती है? (When do we get laughter?):

उत्तर:या तो हमारा हँसमुख स्वभाव हो या जब हम किसी वस्तु और उसके मनोभाव में यकायक कोई असंबद्धता अथवा असंगति देख लेते हैं तो हँसी आती है।

प्रश्न:3.विषाद और अवसाद की दवा क्या है? (What is a drug for gloom and depression?):

उत्तर:हमारे भीतर का विषाद और अवसाद हँसी के तेज झोंकों से रुई के कतरों की भाँति उड़कर नष्ट हो जाता है।

  • उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर द्वारा छात्र-छात्राओं के लिए हास्य की 8 विशिष्ट टिप्स (8 Specific Humor Tips for Students),हास्य क्यों जरूरी है? (Why is Humor Important?) के बारे में और अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
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