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4 Tips for Student to Progress in Math

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1.छात्र-छात्राओं के लिए गणित में उन्नति करने के 4 टिप्स (4 Tips for Student to Progress in Math),छात्र-छात्राओं के लिए गणित में विकास करने के 4 टिप्स (4 Tips to Develop in Mathematics):

  • छात्र-छात्राओं के लिए गणित में उन्नति करने के 4 टिप्स (4 Tips for Student to Progress in Math) के आधार पर गणित में प्रगति कर सकते हैं।गणित में आगे बढ़ने,उन्नति करने के लिए छात्र-छात्राओं को कुछ अलग हटकर करना होगा। यदि छात्र-छात्राएं गणित में श्रेष्ठ करना चाहते हैं तो उन्हें गणित में अधिक से अधिक ज्ञान प्राप्त करने की चेष्टा करनी होगी।छात्र-छात्राओं को गणित के सवालों,गणित की समस्याओं से मित्रता करनी होगी।गणित में अन्धकार रूपी कमजोरियों को गणित के प्रकाशरूपी ज्ञान से दूर करना होगा।
  • गणित में जो जटिल सवाल,समस्याएं हैं,बहुत कठिनाई से साध्य हैं उनको पहले हल न करें।क्योंकि उनको हल न कर पाने से मनोबल कमजोर होता है तथा आप अपने आपको कमतर आँकने लगते हैं जिससे आपमें निराशा का भाव पैदा होता है।निराशा आपकी गणित में प्रगति का अवरोधक है।
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2.गणित में निपुणता प्राप्त करने के लिए क्या करें?(What to Do Mastery in Mathematics?):

  • (1.)गणित में यदि किसी सवाल,समस्या,प्रमेय को प्रयत्न करने पर भी हल नहीं कर पा रहे हैं तो उसकी चर्चा हर किसी से नहीं करें,हर किसी के साथ शेयर (Share) नहीं करें।क्योंकि दुनिया में मनोबल बढ़ाने वाले कम तथा मनोबल गिराने वाले तथा हमारी कमजोरियों का उपहास उड़ाने वाले ज्यादा हैं।अपनी गणित की कमजोरियों को अपने माता-पिता,शिक्षक,अभिभावक तथा मनोबल बढ़ाने वालों के साथ ही शेयर (Share) करें।
  • (2.)यदि आप गणित में अत्यधिक कमजोरी महसूस कर रहे हैं।जिस प्रश्नावली को भी शुरू करते हैं उसमें समस्याओं,कठिनाइयों का सामना करते हैं तो समझ ले कि आपकी नींव कमजोर है।आपने पिछली कक्षाओं में गणित को गंभीरतापूर्वक तथा ठीक से हल नहीं किया है अर्थात् लापरवाही बरती है।लेकिन ऐसी स्थिति में भी धैर्य रखें तथा शांत चित्त होकर उसका हल ढूंढने का प्रयास करें।
  • (3.)एक उपाय यह हो सकता है कि किसी योग्य शिक्षक तथा निर्लोभी शिक्षक से गणित पढ़ना प्रारंभ करें।उनको अपनी वस्तुस्थिति से अवगत करा दें।आप देखेंगे कि ऐसे योग्य शिक्षक आपकी कमजोरियों को ऐसे दूर कर देता है जैसे फिटकरी पानी की सारी गंदगी को दूर कर देती है।
  • (4.)अपने व्यवहार को शिष्ट,विनम्र तथा मधुर बनाएं क्योंकि गणित सीखने का यह एक बढ़िया तरीका है।प्रखर,निपुण छात्र-छात्राएं तथा लोग शिष्टाचार युक्त तथा मधुर वाणी वाले छात्र-छात्राओं के साथ जुड़ते हैं।ऐसे लोग छात्र-छात्राओं की समस्याओं को हल नहीं कर सकते हैं तो हल करने वाले से आपका संपर्क कराते हैं।वैसे भी विद्या (गणित का ज्ञान) विनम्र व्यक्ति ही ग्रहण कर सकता है।उज्जड़,उद्दण्ड,कामचोर,आलसी,चिड़चिड़े,अनुज्ञाकारी,अहंकारी,अशांत,उत्तेजित होने वाला,आक्रामक,पुरातनपंथी,अनुशासनहीन,बहानेबाज,निष्क्रिय छात्र-छात्राएं गणित का ज्ञान प्राप्त नहीं कर सकता है।
  • (5.)मित्रों के साथ वार्तालाप करते समय अपने लक्ष्य को ध्यान में रखें।आपका लक्ष्य है विद्या प्राप्त करना,अध्ययन करना,गणित का ज्ञान प्राप्त करना। उनसे अनावश्यक बातें,गप्पें हाँकने,मटरगश्ती करने से आपका समय बर्बाद होगा।वैसे ही विद्यार्थी के पास समय का अभाव रहता है।यदि आप गणित में कमजोर है तो अतिरिक्त समय देकर ही गणित की कमजोरी को दूर कर सकते हैं।
  • (6.)मित्रों तथा अपने सहपाठियों से वार्ता करें तो पहले उनकी पूरी बात सुनें।फिर अपनी समस्याओं को उनको बताएं।यदि उनकी बात काटकर आप अपनी समस्या को कहेंगे तो वे आपको मतलबी समझेंगे।ऐसी स्थिति में वे आपकी मदद नहीं करेंगे बल्कि कोई न कोई बहाना बना लेंगे।
  • (7.)हमेशा किसी सवाल व समस्या का हल जो आप जानते हैं उसे ही सर्वोपरि न समझे क्योंकि गणित में कोई भी सवाल,समस्या को हल करने के अनेक तरीके हो सकते हैं।अपनी बात को,अपने ही गणित के हल को सही मानने वाले छात्र-छात्राएं अलोकप्रिय हो जाते हैं।
  • (8.)कई बार गणित के सवालों व समस्याओं को हल करते समय मित्रों में व्यक्तिगत बातें,पारिवारिक बातें भी छिड़ जाती है।ऐसी स्थिति में संयत होकर तथा संतुलित जवाब दें।कई बार जाति,आरक्षण को लेकर आपस में वाद-विवाद बढ़ जाता है तथा नौबत यहां तक आ जाती है कि मारपीट हो जाती है।इसलिए इस तरह के विवादास्पद मुद्दों पर या तो चुप रहें,यदि बोलना ही तो तटस्थ रहें।
  • (9.)गणित में कमजोरी दूर करने का यह भी एक तरीका है कि दूसरों की अधिक सुनें तथा स्वयं कम बोलें।यदि आप अपनी समस्याओं का रोना रोते रहोगे,अपनी ही राम कहानी सुनाते रहोगे तो ऐसे व्यक्ति से अन्य छात्र-छात्राएं ऊब जाते हैं।फिर वे आपकी समस्याओं और कठिनाइयों को हल करने में दिलचस्पी नहीं लेते हैं।अधिक बोलने वाले के ज्ञान में वृद्धि नहीं होती है और ना ही कोई लाभ होता है।सीखने के लिए धैर्यपूर्वक दूसरों की बात सुननी चाहिए।
  • (10.)गणित के सवालों को समझते समय,हल करते समय व्यर्थ के वाद-विवाद,तर्क-वितर्क तथा अपनी पीड़ा ही कहने से बचे।
  • (11.)गणित में कमजोरी दूर करने,गणित में निपुण बनने के लिए जिज्ञासा व सीखने की ललक रखें। इससे आप आगे से आगे बढ़ते जाएंगे।नई-नई बातें सीखेंगे और गणित के ज्ञान में अप टू डेट (up to date) रहेंगे।
  • (12.)आधुनिक युग ज्ञान के विस्फोट का युग है। आज गणित में खोज व आविष्कार गुणोत्तर रूप से बढ़ रहा है।लेकिन इन सबको सीखने के लिए दिमाग को खुला और विस्तृत रखें।संसार में एक से बढ़कर एक गणितज्ञ हैं।किसी भी गणितज्ञ,गणित के शिक्षक,गणित के छात्र-छात्रा के पास कोई ना कोई विशिष्ट तथा अच्छी बात सीखने को मिल सकती है।लेकिन उनसे आप तभी सीख सकेंगे जब आप सीखने के लिए हमेशा तैयार रहेंगे।

3.गणित को सीखने का तरीका (How to Learn Mathematics?):

  • (1.)वर्तमान युग में माता-पिता अभिभावक धन-दौलत कमाने की अंधी दौड़ में शामिल है।वे सभा,सोसाइटी, क्लबों के सदस्य बने हुए हैं और उनमें भाग लेते हैं।माता-पिता अपने बच्चों को शिक्षा तथा गणित शिक्षा उपलब्ध कराने हेतु अच्छे,महंगे विद्यालय में प्रवेश दिला देते हैं,कोचिंग की सुविधा उपलब्ध कराते हैं तथा घर पर भी सुख सुविधा युक्त आवास,खाने-पीने,कपड़ों इत्यादि की व्यवस्था कर देते हैं।परंतु इतना कुछ करने के बाद भी छात्र-छात्राओं का विकास नहीं होता है।धन से सुख के साधन जुटाए जा सकते हैं परंतु विद्या अर्जित नहीं की जा सकती है।माता-पिता सभा-सोसाइटी में व्यस्त रहते हैं और उनके बच्चों का ओर ही तरह का भला हो जाता है।
  • (2.)शिक्षा तथा गणित शिक्षा प्राप्त करने के लिए माता-पिता,अभिभावकों तथा शिक्षकों का छात्र छात्राओं के प्रति समर्पित होना आवश्यक है।बच्चों को समय देना आवश्यक है।साथ ही छात्र-छात्राएं भी माता-पिता अभिभावकों व शिक्षकों के प्रति समर्पित रहेंगे तो ही विद्या तथा ज्ञान प्राप्त कर सकते हैं।
  • (3.)अब व्यावसायिकता ने नकारात्मक रूप धारण कर लिया है।शिक्षा संस्थानों में छात्र-छात्राओं की शिक्षा की फीस चुकाने के बाद गुरु-शिष्य का रिश्ता खत्म।अब छात्र-छात्राएं फीस चुकाने के बाद विद्यालय तथा शिक्षकों के प्रति कर्तव्य से अपने आपको मुक्त समझ लेता है।ऐसी स्थिति में प्राप्त किया गया ज्ञानार्जन फलदायी नहीं होता है।जब तक छात्र-छात्रा शिक्षक के प्रति श्रद्धा नहीं रखता है तब तक शिक्षा न तो अर्जित की जा सकती है और न फलदायी हो सकती है।

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4.गणित में आने वाली चुनौतियों का सामना (Face the Challenges in Mathematics):

  • (1.)जो छात्र-छात्राएं गणित के कठिन सवालों,कठिन सिद्धांतों,कठिन समस्याओं को हल करने से कतराते हैं उन छात्र-छात्राओं की गणितीय प्रतिभा सुप्त रह जाती है,प्रस्फुटित नहीं होती है,निखरती नहीं है।क्योंकि कठिन सवाल,कठिन समस्याएं छात्र-छात्राओं को चिंतन-मनन करने के लिए मजबूर करती है।उनको हल करने से ही दिमाग खुलता है।जो छात्र-छात्राएं समस्याओं का सामना करने से घबराते हैं वे छात्र-छात्राएं अपने जीवन में भी ऐसा ही करते हैं।उत्तरदायित्व पूर्ण पदों पर कार्य करना नहीं चाहते हैं।चुनौतीपूर्ण पदों पर कार्य करने से घबराते हैं।केवल दूसरों द्वारा निर्धारित किए गए कार्यों का ही अनुसरण करते हैं।स्वतंत्र रूप से अपनी छाप नहीं छोड़ पाते हैं।
  • गणित में हल किए गए सवालों,शिक्षकों तथा मित्रों द्वारा बताए गए सवालों को हल कर लेते हैं तथा सीधे-सादे सवालों को हल कर लेते हैं।परंतु पेचीदे सवालों और समस्याओं को छोड़ देते हैं।
  • (2.)जबकि प्रखर व तेजस्वी बालक-बालिकाएं कठिन सवालों,कठिन समस्याओं को हल करने में आनंद का अनुभव करते हैं।उनका दिमाग खुलता है और विस्तृत होता जाता है।वे शिक्षकों द्वारा बताए गए कठिन से कठिन सवालों को हल करने की पूरी चेष्टा करते हैं।नए-नए तरीकों को सीखते हैं।एक ही सवाल को भिन्न-भिन्न तरीके से हल करते हैं।
  • वस्तुतः सफलता व जीवन निर्माण पता नहीं कौन से अवसर के द्वारा प्राप्त हो जाए और छात्र-छात्राओं का सुखद सवेरा हो जाए,भाग्योदय हो जाए।ऐसे छात्र-छात्राएं किसी भी अवसर को खोना नहीं चाहते हैं।हर अवसर का फायदा उठाते हैं।

5.गणित को हल करने में सत्संग का योगदान (Contribution of Good Company in Solving Mathematics):

  • (1.)छात्र-छात्राओं की जैसी कार्यप्रणाली विचारधारा होती है उसी कार्यप्रणाली और विचारधारा के लोग उनके इर्द-गिर्द इकट्ठे हो जाते हैं।
  • (2.)यदि आप गणित के सवालों को,समस्याओं को हल करने में आलस्य करते हैं, सुस्त हैं तो आपके पास ऐसे ही लोग रहेंगे।यदि गणित के सवालों को हल करने में आप चुस्त हैं,विनम्र हैं,एक-एक क्षण का उपयोग करते हैं,गणित के सवालों को एक-एक नहीं बल्कि अनेक तरीकों से हल करते हैं तो ऐसे ही गुणों को धारण करने वाले लोग आपके पास इकट्ठे होते जाएंगे।
  • (3.)यदि आपके माता-पिता,अभिभावक,शिक्षकगण सज्जन,मधुरभाषी हैं तो आप पर भी उनका प्रभाव पड़े बिना नहीं रहेगा।आप भी वैसा ही बनने का प्रयास करेंगे।विद्या विनम्रता,सरलता इत्यादि गुणों से ही धारण की जा सकती है।अहंकारी व्यक्ति विद्या ग्रहण नहीं कर सकता है।
  • (4.)यदि छात्र-छात्राएं कायरों,बदमाशों, बेईमानों व चोरों की संगत करेंगे तो वैसे ही बनते जाएंगे।परीक्षा में नकल करना,प्रश्न-पत्र को चुराना,बोर्ड अंकतालिका में अंक बढ़ाने के कार्य में लिप्त पाए जाएंगे।विचारों से कर्म बनते हैं तथा कर्म से आदतों और संस्कारों का निर्माण होता है।यदि छात्र-छात्राएं आदर्श,चरित्रवान,धार्मिक व दृढ़ संकल्पशक्ति वाले हैं तो वे भी गणित में कठिन परिश्रम करेंगे,किसी की नकल नहीं करेंगे तथा गणित को हल करने के नैतिक तरीके अपनाएंगे।
  • उपर्युक्त आर्टिकल में छात्र-छात्राओं के लिए गणित में उन्नति करने के 4 टिप्स (4 Tips for Student to Progress in Math),छात्र-छात्राओं के लिए गणित में विकास करने के 4 टिप्स (4 Tips to Develop in Mathematics) के बारे में बताया गया है।

6.गणित अध्यापक को गिफ्ट (हास्य-व्यंग्य) (Gift to Mathematics Teacher) (Humour-Satire):

  • सोहन (मित्र मोहन से):मैं गणित शिक्षक को शिक्षक दिवस पर कोई गिफ्ट देना चाहता हूं,क्या दूं?
  • मोहन:यार ऐसा कर घड़ी गिफ्ट में दे देना।
  • सोहन:यह नहीं कोई बड़ा आइटम बता।
  • मोहन:तो फिर ऐसा कर कि घड़ा गिफ्ट में दे देना।

7.छात्र-छात्राओं के लिए गणित में उन्नति करने के 4 टिप्स (4 Tips for Student to Progress in Math),छात्र-छात्राओं के लिए गणित में विकास करने के 4 टिप्स (4 Tips to Develop in Mathematics) से सम्बन्धित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:

प्रश्न:1.गणित को हल करने में कैसी दृष्टि होनी चाहिए?(What Should be the Vision to Solve Mathematics?):

उत्तर:यदि छात्र-छात्राएं गणित के कोर्स को गणितज्ञों ने जिस दृष्टि से निर्माण किया है उसी दृष्टि से देखते हैं तो वे गणित को सकारात्मक दृष्टि से देखेंगे।धीरे-धीरे गणित के सवालों को हल करने में पारंगत होते जाएंगे।यदि वे दिव्य,सौंदर्य,प्रसन्नता,आशा,प्रकाश,चारों तरफ शुभ और आनंद अनुभव करते हुए गणित को हल करेंगे तो गणित को चुटकियों में हल करने में दक्षता प्राप्त कर लेंगे।कहा भी है कि जैसी दृष्टि वैसी सृष्टि।

प्रश्न:2.गणित को हल करने में विचारों का क्या फर्क पड़ता है? (What Difference Do Ideas Make in Solving Mathematics?):

उत्तर:हमारा मस्तिष्क एक गुंबद की तरह है जिससे टकराकर वही आवाज हम तक पहुंचती है जैसे हमारे भाव,विचार होते हैं।यदि हम यह सोचते हैं कि गणित को हल करना हमारे वश में नहीं है,गणित कठिन विषय है यानी उदास,उखड़े-उखड़े व निराशावादी विचार रखते हैं तो मस्तिष्क रूपी गुम्बद से टकराकर हमारे मन में वैसे ही भाव पनपते हैं और हम गणित के सवालों को हल कर पाने में अपने आपको असमर्थ पाते हैं।यदि आप सोचते हैं कि गणित को मैं हल कर लूंगा,कर सकता हूं तो वैसे ही आवाज हमारे ह्रदय से निकलेगी।

प्रश्न:3.गणित के सवालों को हल करने में कौनसा तरीका श्रेष्ठ है? (Which Way is Best to Solve Mathematics Questions?):

उत्तर:कोई भी तरीका अपने आप में श्रेष्ठ नहीं है। गणित के सवालों को हल करने में अभ्यास,एकाग्रता,चिंतन-मनन,सृजनात्मकता,तर्कशक्ति इत्यादि सभी का अपनी-अपनी जगह महत्त्व है।सब एक दूसरे के पूरक हैं।सैद्धांतिक और व्यावहारिक ज्ञान में संतुलन रखें।

  • उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर द्वारा छात्र-छात्राओं के लिए गणित में उन्नति करने के 4 टिप्स (4 Tips for Student to Progress in Math),छात्र-छात्राओं के लिए गणित में विकास करने के 4 टिप्स (4 Tips to Develop in Mathematics) के बारे में ओर अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

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छात्र-छात्राओं के लिए गणित में उन्नति करने के 4 टिप्स (4 Tips for Student to Progress in Math)
के आधार पर गणित में प्रगति कर सकते हैं।गणित में
आगे बढ़ने,उन्नति करने के लिए छात्र-छात्राओं को कुछ अलग हटकर करना होगा।

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