Life Simplification for Math Students
1.गणित के छात्रों के लिए जीवन सरलीकरण (Life Simplification for Math Students):
- गणित के छात्रों के लिए जीवन सरलीकरण (Life Simplification for Math Students) के द्वारा गणित से जीवन को सरल बनाना सीखेंगे।क्या जीवन जटिल समीकरण की तरह लग रहा है? सीखें कैसे एक गणित छात्र तर्क और सरलता के जरिए अपने जीवन को सरल बना सकता है।
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2.गणित से सीखे जीवन का सरल फाॅर्मूला (Math se seekhein Jeevan Jeene ka Saral Formula):
- आज के छात्रों का जीवन जटिल संख्याओं की तरह उलझा हुआ है (मोबाइल,एग्जाम और कैरियर)।वह कभी मोबाइल में व्यस्त रहता है तो दूसरे क्षण उसे एग्जाम की फिक्र सताने लगती है और फिर उसे अपना करियर धुंधला दिखाई देने लगता है।लेकिन इनसे घबराए मत,जैसे कितनी भी जटिल समीकरण हो तो उसका एक हल होता है वैसे जीवन को सरल किया जा सकता है।
- यदि आप गणित के सिद्धांतों को अपने व्यावहारिक जीवन में एप्लाई करेंगे तो मानसिक तनाव कम हो जाएगा।गणित की समीकरण की तरह BODMAS नियम को अपने जीवन पर वरीयता क्रम से लागू करें।
- बी ब्रैकेट B (Brecket):सबसे पहले अपने आंतरिक और जरूरी कामों पर ध्यान दें और उन्हें सुलझाने की कोशिश करें।ओ आर्डर O (Order):अपने कामों का वरीयता क्रम का सही निर्धारण करे।D/M डिविजन और मल्टीप्लिकेशन (Division/Pultiplication):अपने बड़े लक्ष्य को छोटे-छोटे टास्क में विभाजित करें और अपनी मेहनत को सही दिशा में बढ़ाएं (गुणा करें)।ए/एस एडिशन/सब्सट्रैक्शन A/S(Addition/Subtraction):जिंदगी में अच्छी आदतों को जोड़ते चले जाओ और नकारात्मक विचारों को हटा दें (घटा दें)।
- कांस्टेंट्स (Constants) को हटाओ:जो भी व्यवधान पैदा करने वाली बातें और बाधाएँ हैं उनको हटा दें।गणित में हम चर का मूल्य निकालने के लिए बेकार के कांस्टेंट्स (Constants) को दूसरी तरफ भेज देते हैं।वास्तविक जीवन में सोशल मीडिया पर घंटों बिना मतलब सर्फिंग करना वो कांस्टेंट्स (Constants) हैं जो आपको समाधान तक पहुंचने नहीं देते।The of Lowest Common Denominator (सरलता):मुश्किल भिन्नों को तभी हल किया जा सकता है जब हम एलसीडी (LCD) निकालते हैं।जीवन में भी अगर समस्याएं बहुत सारी हैं,तो उनका हल ढूंढे और वहां से काम शुरू करें।
- वेरिएबल पर फोकस करें,तुम नियंत्रित कर सकते हो।हम x और y के मूल्य तभी निकलते हैं जब समीकरण हमारे नियंत्रण में हैं।छात्र-छात्राओं को परिणाम (जो वेरिएबल (variable) नियंत्रण में नहीं है) की चिंता करने के बजाय प्रयास (जो वेरीएबल (variable) आपके हाथ में हैं) पर फोकस करें।
- जीवन जटिल नहीं है,हमारा दृष्टिकोण,सोचने का तरीका जटिल है।एक सरल जीवन शैली ही अभीष्ट हल है।न तो तो गणित कठिन है और न जीवन की गुत्थी जटिल है परंतु हम हमारी आदतों,विचार करने की दृष्टिकोण से गणित के साथ-साथ जीवन को भी जटिल बनाते जाते हैं।ऐसी स्थिति में गणित और जीवन दोनों बोझ लगने लगते हैं और जीवन को सरल बनाने के बजाय जटिल बना लेते हैं।यदि आपका ध्यान जीवन को सरल बनाने की तरफ होगा तो जीवन की गणित बहुत सरल हो जाएगी।
3.क्विक डिसीजन और मेंटल क्लेरिटी (Quick Decisions and Mental Clarity):
- हर दिन को पिछले दिन से बेहतर करने का प्रयास करें,तभी आपका विद्यार्थी होना सार्थक है।क्योंकि विद्यार्थी जीवन ही जीवन की नींव का काम करता है।यह विद्यार्थी काल ऐसे ही बेमतलब के कामों में गुजारने के लिए नहीं हैं।कुछ कर गुजरने के लिए मिला है,ऐसा आप तभी कर सकते हैं जब आप हर दिन एक कदम बढ़ाते हैं,कुछ नया सीखते हैं।वैदिक गणित में एकाधिकेन पूर्वेण से भी हम यह सीख सकते हैं कि पिछले से एक अधिक।
- निखिलम सूत्र की तकनीक बड़ी गणनाओं को आधार के करीब लाकर सरल करती है।जीवन का पाठ (Life Lesson) अपनी बड़ी समस्याओं को अपने आधार मूल्यों (नैतिक मूल्य और लक्ष्य) से तुलना करके देखें,वो अपने आप छोटी हो जाएगी।मेंटल मैथ=मेंटल स्ट्रैंथ (Mental Math=Mental Strength) वैदिक मैथ पेपर पेन से ज्यादा दिमाग का इस्तेमाल सिखाती है।इससे फोकस बढ़ता है जो डिजिटल डिस्ट्रैक्शन को दूर करने में सरल जीवन के लिए बहुत जरूरी है।
- गणित का मूल उद्देश्य ही यह है कि जटिलता को खत्म करना।जैसे हम गणित के किसी भी जटिल सवाल को हल करते हैं तो उत्तर में सबसे सरल लिखते हैं या सवाल को सबसे सरल उत्तर तक हल करते हैं वैसे ही छात्रों का काम है कि कम साधन-सुविधाओं से अधिकतम अच्छा परिणाम लाकर अपने को प्रूव करना।
4.विद्यार्थी जीवन को जटिल स्वयं बनाता है (Student life makes life complicated):
- जीवन में कठिनाई तथा मुसीबतें तब पैदा होती है जब छात्र-छात्राएँ उसे जटिल,दुरूह और अधिक आडंबरपूर्ण बना लिया करता है।जीवन की सरलता ही सुखद है।व्यवहार में सफलता,विचार और आचरण में स्पष्टता बनी रहे तो छात्र के जीवन में कहीं द्वेष की कठिनाईयाँ नहीं हैं।
- सरलता का अर्थ:लोगों को सही नजरिए से देखना,यथार्थ रूप में देखना।यथार्थ परिस्थिति से भिन्न रूप बनाना ही जटिलता पैदा करना है,इसी से मुसीबतों का जन्म होता है।क्या आपने उस गणित के विद्यार्थी की कहानी पढ़ी है,जिसने शिक्षक के सामने आत्म-श्लाघा (स्वयं की प्रशंसा) के फलस्वरूप अपना वास्तविक रूप प्रकट नहीं किया।अधिक प्रतिभा बताकर उसने खाई पैदा कर ली।किसी टेस्ट में अच्छे अंक लाने के लिए शिक्षक ने निर्देश दिया,किंतु अपनी महत्वाकांक्षा छुपाने के लिए नकल करके उसने शिक्षक की इच्छा पूरी कर दी।दुर्भाग्यवश उत्तर पुस्तिका में नकल की पर्ची पकड़ी जाती है और पूरे अध्ययन काल में उसे शिक्षक से जलील होना पड़ता है।
- आज ऐसी ही कहानियाँ सर्वत्र देखने को मिल सकती हैं। साधारण क्लास टेस्ट,रैंकिंग टेस्ट,प्री बोर्ड,हॉफ ईयरली एग्जाम में विद्यार्थी अपना बड़प्पन दिखाना चाहता है।जिसको साधारण से सवाल भी नहीं आता है वह अपनी वास्तविक स्थिति छिपा कर अपने अधिक मार्क्स बताने में अधिक गौरव का अनुभव करता है।उत्तीर्ण होने के लाले पड़ रहे हैं परंतु सबके सामने ऐसे जाहिर करता है जैसे वह पढ़ने में बहुत धुरन्धर है।इस जटिलता के कारण पारिवारिक जीवन में,सामाजिक जीवन तथा राष्ट्रीय जीवन में अनेक समस्याएं खड़ी होती हैं और विद्यार्थी का जीवन भार स्वरूप हो जाता है।
- उससे न खुद को कोई प्रसन्नता होती है ना औरों को।उसके जीवन में भूचाल आ जाता है,पारिवारिक जीवन में कलह तथा कटुता,व्यक्तिगत जीवन में ऊब,उत्तेजना,अव्यवस्था,जाॅब ना मिलना,डिग्री का जैसे-तैसे जुगाड़ लगाकर प्राप्त करना आदि अनेक कठिनाइयाँ केवल इसलिए खड़ी हो रही हैं कि विद्यार्थी जिस स्थिति में है,उससे बहुत अधिक बढ़-चढ़ कर अपने आप को व्यक्त करना चाहता है।यह बनावटीपन जहाँ भी पैदा होगा,वहां के जीवन में अवश्य भोंडापन अवश्य आएगा।उसके फलस्वरूप विद्यार्थी का जीवन कठिनाइयों,चिंताओं तथा दुरूहताओं में ही फँसता चला जाएगा।
- विद्यार्थी का यह अहंभाव यदि समाप्त हो जाता है तो वह अपने सरल जीवन में आ जाता है।इससे उसमें कुछ हानि नहीं होती।अन्य विद्यार्थी या लोग उसे छोटा मानेंगे ऐसी बात नहीं।ऋषियों के जीवन में,गुरुकुल में पढ़ने वाले शिष्यों में बड़ी सादगी और सरलता थी।इस कारण उनका गौरव सर्वमान्य ही है।समाज में हमेशा बनावटीपन,शेखीखोरी तथा अहंभावना की निंदा की जाती है।नकली चेहरा लगाकर आने वालों पर ही संसार हँसता है।जिसके अंदर सार्वभौम यथार्थता निर्दोष बनकर प्रतिबिंबित होती है,उसका जीवन आदर्श एवं अनुकरणीय होता है।वह जागृत हो जाता है और दूसरों के लिए नमूना बनता है।उसकी अनेक परेशानियाँ उससे दूर रहती हैं और वह मस्ती का जीवन बिताता है।
5.जटिलता से केवल बुद्धि का विकास (Only the development of intelligence from complexity):
- जिसे हम स्वाभिमान और आत्माभिमान कहते हैं,वह इसी जीवन सरलता का परिणाम है।हम जिस स्थिति में हैं,उसी में संतुष्ट रहेंगे तो दूसरों के आगे ना हाथ फैलाना पड़े,न सहायता मांगनी पड़े।विद्यार्थी की सुप्त शक्तियां केवल इसीलिए जागृत नहीं होतीं,क्योंकि विद्यार्थियों को दिखावा करने से फुर्सत नहीं मिलती।मेरे 90% प्रतिशत अंक है,मेरे 85% अंक हैं।गुणों का विकास भी इसीलिए नहीं होता,क्योंकि विद्यार्थी अपने आप को बड़ा-चढ़ा कर प्रदर्शित करने में ही जीवन की सफलता मानते हैं और इसमें जितना सम्मान मिल जाता है उसी में गर्व और संतोष का अनुभव कर लेते हैं।
- बुद्धि का जो भाग जीवन-विकास में लगना चाहिए था,वह बाह्य विडम्बना और आत्म-प्रतारणा में ही बीतता रहता है।विद्यार्थियों की बुद्धि का इससे विकास भले ही हो जाए,किंतु आत्मिक स्तर दिन-दिन गिरता जाता है। नैतिक दृष्टि से ऐसे विद्यार्थियों को पिछड़ा हुआ ही मानना चाहिए।
- पढ़ने लिखने,उत्तीर्ण होने में ही यह बनावटीपन नहीं है बल्कि जीवन के हर क्षेत्र में बनावटीपन देखने को मिलता है।आहार-विहार,रहन-सहन,वेश-भूषा,आचार-विचार तथा जीवन निर्माण में मौलिक सरलता का समावेश होना नितांत आवश्यक है।विद्यार्थी जीवन का एक उद्देश्य है,जिसे निष्प्रयोजन नहीं होने देना चाहिए।आत्मा की आंतरिक स्फुरणा के साथ विद्यार्थी विकसित हो,यह उसकी मूल आवश्यकता है।
- उसके जीवन में स्नेह,प्रेम,आत्मीयता,दया,करुणा,उदारता,सौमनस्यता तथा सहिष्णुता का आदान-प्रदान बना रहे,इसके लिए यह आवश्यक है कि उसका जीवन शुद्ध और सरल बना रहे।इससे उसका मनोबल क्षीण न होगा।वह हतोत्साहित,परावलंबी तथा उदासीन नहीं होगा।उसके जीवन में निरंतर एक ऐसी दैवी प्रतिमा का विकास होता रहेगा जिसकी समीपता में उसके उपर्युक्त मानवीय गुण फलते-फूलते तथा अभिसिंचित होते रहेंगे।
6.विद्यार्थी जीवन को सरल बनाएं (Simplify student life):
- जटिलता जीवन-वृत्तियों को बाह्योपचारों में लगाती है। सरलता आस्तिकता को,अंतःकरण को विशाल बनाती है।सत्य का व्यावहारिक स्वरूप सरलता है।इससे विद्यार्थी का हृदय विस्तीर्ण होता है,भावनाएं परिष्कृत होती हैं।जैसे-जैसे उसकी वृत्तियाँ अंतःवर्ती होती जाती है,वैसे ही वैसे वह संसार को भी अत्यंत स्वच्छ और स्पष्ट रूप में देखने लगता है।संसार के सच्चे रूप को देखना ही आत्मा की मूल आवश्यकता है।भगवान की आकांक्षा को कोई विद्यार्थी भुलाकर सर्वव्याप्त सद्गुणों को ही अपने अंतर्गत अवगाहन करता रहे तो आस्तिकता की सारी आवश्यकताएँ इसी से पूर्ण हो जाती हैं।विद्यार्थी के जीवन में जब मिथ्याहंकार तथा खोखलापन आता है,तभी वह सत्य की वास्तविकता से विभ्रम होता है और नास्तिकता कूट-चक्र में फंसकर जीवन को कठिन बना डालता है।
- मानसिक अशांति का कारण क्या है? विद्यार्थी चाहता है कि उसे बिना परिश्रम किये अच्छे अंक प्राप्त हो जाएँ,बिना स्किल का विकास किए ही उसे जाॅब मिल जाए परंतु जाॅब या अंक ऐसा करने में लाचार हैं।वे जिन प्राकृतिक नियमों में बँधे हैं उनका उल्लंघन नहीं कर सकते।इसलिए जब जाॅब या अंक विद्यार्थी की इच्छापूर्ति नहीं करते,तभी वह दुखी होने लगता है।भलाई तो इसमें थी कि वह जाॅब या अंक प्राप्त करने के स्वरूप को देखकर उसको प्राप्त करने का प्रयत्न करता,परन्तु यह तभी सम्भव है जब अपनी मानसिक वृत्तियों पर नियन्त्रण किया जाए और उन्हें स्थिति की परिधि से बाहर न होने दिया जाए।इच्छाएं,आकांक्षाएं बढ़ें,इसमें हर्ज नहीं,पर वे साधनों के घेरे तोड़कर बाहर न फैलने पाएँ,इतना ध्यान बना रहे तो कोई भी प्रगति अनर्थकारक न होगी।संपन्नता,शक्ति और समृद्धि हमारी शान तो है,किंतु वे यथार्थ होनी चाहिए।केवल प्रदर्शन मात्र ना होना चाहिए।
- मौलिक सरलता इतनी सजीव होती है कि विद्यार्थी जब प्रत्येक वस्तु से अपना अधिकार छोड़ देता है और परिस्थितियों के साथ संयोग करता है,तभी उसे अपने भीतर का खोखलापन अनुभव हो जाता है और विनम्रता,धैर्य,करुणा तथा विवेक का जागरण होने लगता है।आत्मा सरलता में ही वास करती है अर्थात् सरल रहने पर ही आत्मा का अनुभव होता है और उसकी शक्ति का सदुपयोग किया जा सकता है।उसके समर्थन के लिए तर्क की आवश्यकता नहीं समर्पण और सरलता की आवश्यकता है।जटिलता तो केवल दुर्गुणों तथा खोटे कर्मों के कारण उत्पन्न होती है।अतः विद्यार्थी जब तक स्वयं पूर्ण जीवन अभिव्यक्त न कर ले,उन्हें अपने मनोविकारों के शोधन-परिमार्जन में ही लगे रहना चाहिए।अंतःकरण में कलुष न रह जाए और बाह्य जीवन में दंभ न शेष बचे,उसी विद्यार्थी का जीवन निश्चयात्मक,शांत तथा अलौकिक प्रतिभा से ओत-प्रोत होता है।
- सांसारिक,व्यावहारिक और आध्यात्मिक उन्नति और सच्चे आनंद को प्राप्त करने का राजमार्ग वृत्तियों का शमन है।जो विद्यार्थी वृत्तियों के दास बनकर अपनी इच्छाओं की पूर्ति के प्रयत्नों में उचित-अनुचित का विचार नहीं करते,उनकी आत्मा पर अज्ञान का पर्दा पड़ जाता है।इससे छुटकारा तभी संभव है जब विद्यार्थी इच्छाओं की दासता को अस्वीकार कर केवल औचित्य पर ध्यान दे।
- गणित का विद्यार्थी गणित के सवाल हल करने के साथ-साथ उसके व्यावहारिक महत्त्व पर ध्यान देगा तो उसका जीवन सरल होता जाएगा।व्यावहारिक महत्त्व पर ध्यान देगा तो उसका जीवन सरल होता जाएगा।परंतु होता अक्सर यह है कि हमारा ध्यान इस तरफ जाता ही नहीं है और गणित को केवल परीक्षा के दृष्टिकोण,केवल डिग्री प्राप्त करने के दृष्टिकोण से हल करता है।गणित के हर फाॅर्मूले,प्रमेय और सवालों का व्यावहारिक महत्त्व भी है,इसे समझना होगा तभी हमारा विकास,उन्नति हो सकेगी और हम आगे बढ़ सकेंगे।
- उपर्युक्त आर्टिकल में गणित के छात्रों के लिए जीवन सरलीकरण (Life Simplification for Math Students) के बारे में बताया गया है।
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7.गणित की सरल छात्रा (हास्य-व्यंग्य) (Simple math student) (Humour-Satire):
- निवेदिता (अपनी सहेली से):क्या तुम्हें गणित में उत्तीर्ण होने का कोई सरल तरीका मालूम है?
- सहेलीःहाँ,मैंने सोचा है?
- निवेदिता:क्या है,जरा मुझे भी तो बताओ।
- सहेली:मैंने सोचा है कि मैं उत्तीर्ण हो जाऊंगी।सोचने जितना कोई सरल तरीका नहीं है,बस केवल सोचा है,तुम भी सोच लो।
8.गणित के छात्रों के लिए जीवन सरलीकरण (Frequently Asked Questions Related to Life Simplification for Math Students) से संबंधित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:
प्रश्न:1.क्या गणित का तर्क वास्तविक जीवन में काम आता है? (Kya math ka logic real life mein kaam aata hai?):
उत्तर:हां,जैसे हम समीकरण को सरल करते हैं,वैसे ही वरीयता सेट करके जीवन को सरल बना सकते हैं।
प्रश्न:2.सरलता क्यों जरूरी है? (Why is simplicity important?):
उत्तर:मुश्किलों,संकटों,विपत्तियों को तभी हल किया जा सकता है जब हम सरल होते हैं।सरल होने पर इनका यथार्थ स्वरूप दिखाई देता है और इनका हल हमें सूझता है।
प्रश्न:3.विद्यार्थी सरल क्यों नहीं हो पाता है? (Why can’t the student be easy?):
उत्तर:क्योंकि उसकी नजर बाहर की तरफ,दूसरों पर होती है।दूसरों की देखा-देखी वह अंधी दौड़ में शामिल हो जाता है और उस भीड़ में,प्रतिस्पर्द्धा में अपने को खो देता है।
- उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर द्वारा गणित के छात्रों के लिए जीवन सरलीकरण (Life Simplification for Math Students) के बारे में और अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
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Satyam
About my self Lekhak Ke Baare Mein (About the Author) **Satyam Narain Kumawat** **Website Name:Satyam Mathematics** *Owner:satyamcoachingcentre.in* *Sthan:Manoharpur,Jaipur (Rajasthan)* **Teaching Mathematics aur Anya Anubhav** ***Shiksha:**B.sc.,B.Ed.,(M.sc. star Ke Mathematics Ko Padhane ka Anubhav),B.com.,M.com. Ke vishayon Ko Padhane ka Anubhav,Philosophy,Psychology,Religious,sanskriti Mein Gahri Ruchi aur Adhyayan ***Anubhav:**phichale 23 varshon se M.sc.,M.com.,Angreji aur Vigyan Vishayon Mein Shikshaka Ka Lamba Anubhav ***Visheshagyata:*Maths,Adhyatma (spiritual),Yog vishayon ka vistrit Gyan* ****In Brief:I have read about M.sc. books,psychology,philosophy,spiritual, vedic,religious,yoga,health and different many knowledgeable books.I have about 23 years teaching experience upto M.sc. ,M.com.,English and science.










