Menu

3 Guidelines for Understanding Religions of Foreign Origin

Contents hide
4 4.पारसी धर्म भगवान की निराकार उपासना और मिलजुलकर रहने की अनोखी विशेषता वाला धर्म (Zoroastrianism is a religion characterized by the incorporeal worship of God and the unique characteristic of living together):

1.विदेशी मूल के धर्मों को समझने के लिए 3 दिशानिर्देश (3 Guidelines for Understanding Religions of Foreign Origin):

  • विदेशी मूल के धर्मों को समझने के लिए 3 दिशानिर्देश (3 Guidelines for Understanding Religions of Foreign Origin) से आप जानिए कि विदेशी मूल के मूलतः कौन-कौनसे धर्म हैं? उन धर्मों की मूल विशेषताएँ क्या-क्या हैं? और उनकी क्या-क्या मान्यताएँ और सिद्धान्त हैं?

Also Available in Hindi:Mahakumbh of Faith in Prayagraj 2025

2.इस्लाम धर्म शक्ति और भेदभाव न करने की विशेषता वाला धर्म (Islam Religion:A Religion Characterized by Power and Non-discrimination):

  • ‘इस्लाम’ का शाब्दिक अर्थ है-शांति,शुभकामना,सुरक्षा और मुक्ति।नीतिशास्त्रीय दृष्टिकोण से इसका अभिप्राय है:न्यायसंगति (Righteousness) के लिए संघर्ष।
  • इस्लाम धर्म के प्रवर्तक हजरत मुहम्मद साहब थे।मोहम्मद साहब का जन्म 570 ई. में अरब देश के प्रसिद्ध नगर मक्का में हुआ।जन्म के पूर्व ही इनके पिता का और 6 वर्ष की अवस्था में ही इनकी माँ की मृत्यु हो गई।इनका पालन-पोषण इनके चाचा अबू तालिब द्वारा किया गया।25 वर्ष की अवस्था में इन्होंने खादीजा नामक एक विधवा से शादी कर ली।40 वर्ष की आयु में हिरा नामक गुफा (A cave called Hira) में मुहम्मद साहब को ‘सत्य के दिव्य दृश्य दिखाई पड़े।
    जिबाइल नामक एक फरिश्ता निरन्तर उन्हें भगवदीय सन्देश देता रहा।आगे चलकर इन्हीं भगवदीय सन्देशों को ‘कुरान शरीफ’ नामक पवित्र धार्मिक ग्रन्ध में संकलित किया गया।दिव्य दृश्यों को देखकर एवं भगवदीय सन्देशों को सुनकर मुहम्मद साहब को पूर्ण विश्वास हो गया कि अल्लाह एक है और केवल वे ही भगवान के पैगम्बर हैं।
    इस्लाम धर्म की मुख्य मान्यताएं निम्नवत् हैं:
  • (1.)अल्लाह एक है।वह सर्वज्ञ और सर्वव्यापी है।वह निराकार है।
  • (2.)इस्लाम भी हिन्दू धर्म की भाँति कर्म के सिद्धान्त (Principles of Karma) को मान्यता देता है।मनुष्य को उसके सत्कर्मों से जन्नत (स्वर्ग) और कुकर्मों से दोजख (नर्क) प्राप्त होता है।कयामत के दिन मनुष्य के कर्मों का लेखा-जोखा होता है और उसी के अनुसार फल प्राप्त होता है।
  • (3.)इस्लाम पाँच कर्म-सिद्धान्तों का प्रावधान करता है:कल्मा,नमाज,रोजा,जकात और हज-ये पाँच पुण्य कर्म प्रत्येक मुसलमान के लिए अनिवार्य हैं।कल्मा (‘ला इलाह-इल्ल अल्लाह,मुहम्मद-उर-रसूल अल्लाह’) इस्लाम का मूलमंत्र है।अर्थात् अल्लाह एक है,उसके अतिरिक्त और कोई नहीं हैं और मुहम्मद उसके पैगम्बर है।रोजा का अर्थ है (Meaning of Roza):व्रत।इस्लाम की यह मान्यता है कि रमजान के पवित्र मास में प्रत्येक मुसलमान को सूर्योदय से सूर्यास्त तक रोजा रखना चाहिए।प्रत्येक मुसलमान को हर रोज पाँच बार नमाज (प्रार्थना) पढ़नी चाहिए।जकात का आशय है (Zakat means):पुण्य कार्य के लिए दान।इस्लाम धर्म के प्रत्येक अनुयायी को अपनी आय का निश्चित भाग स्वेच्छा से गरीबों को दान करना चाहिए।प्रत्येक मुस्लिम को अपने जीवन में कम से कम एक बार हज (पुण्यभूमि मक्का की तीर्थयात्रा) अवश्य करना चाहिए।
  • (4.)मुहम्मद साहब ने मुसलमानों को संगठित करने एवं एक सूत्र में बाँधने के लिए भी कतिपय नियम निर्धारित किए:
    इज्मा:हर समय,स्थान एवं परिस्थिति में इस्लाम के सिद्धान्तों पर एकमत रहना।
    सुन्ना:मुहम्मद साहब द्वारा किए गए कार्यों को आदर्श मानकर पालन करना।
    कयास:मूल उपदेश के भाव व अर्थ को भलीभाँति समझकर ही उसका पालन करना।
  • (5.)मुस्लिम कुरान के अतिरिक्त मुहम्मद साहब की दिनचर्या से शिक्षा लेकर उसके अनुसार आचरण करते हैं।जीवनचर्या का वर्णन ‘सुत्रत’ तथा उपदेशों का संग्रह हदीश’ में है।ये सही आचरण के मानक समझे जाते हैं।
  • (6.)इस्लाम में मूर्ति पूजा वर्जित है।यही कारण है कि मुहम्मद साहब का कोई चिन्ह या मूर्ति उपलब्ध नहीं है। इस्लाम में उपासना के लिए किसी पुरोहित की आवश्यकता नहीं होती,न ही इसमें किसी प्रकार के कर्मकाण्ड का प्रावधान है।मक्का की ओर मुख करके किसी भी स्थान पर नमाज अदा की जा सकती है।

3.ईसाई धर्म सभी से प्यार और दलितों,पतितों की सेवा करने की अद्भुत गुणधर्म वाला धर्म (Christianity is a religion with the wonderful quality of loving all and serving the downtrodden and the depraved):

  • ईसाई धर्म या ईसाइयत का प्रारम्भ ईसा मसीह से होता है जिनका जन्म 4 ई.पू. के लगभग फिलिस्तीन के गेलीली प्रदेश में नाजरेथ नामक स्थान पर एक बढ़ई के घर हुआ।उनकी माँ का नाम मेरी और पिता का नाम जोजेफ था।30 वर्ष की अवस्था में जूडिया के रेगिस्तान में लगातार 40 दिनों तक प्रार्थना और चिन्तन (Prayer and Reflection) करते रहे। इसके बाद उन्होंने फिलिस्तीन में प्रचलित यहूदी धर्म में व्याप्त दोषों के विरुद्ध अपना सन्देश सुनाया।
  • सबसे पहले एंडूज तथा पीटर नामक दो मछुआरे उनके शिष्य बने,दूर-दूर से लोग उनके उपदेश सुनने आने लगे।उनकी लोकप्रियता से कट्टर यहूदी घबरा गए और उनके शत्रु बन गए।ईसा पर राजद्रोही और धर्मदोही होने का आरोप लगाया गया।अपराध सिद्ध न होने पर भी ईसा को रोमन गवर्नर ‘पोंटियस’ ने मृत्युदण्ड दिया और उन्हें सूली (कॉस) पर लटका दिया गया।
  • ईसा मानवमात्र के बंधुत्व में विश्वास रखते थे,क्योंकि सभी सर्वशक्तिमान भगवान की सन्तान हैं।उन्हें शोषित और दलित (Exploited and downtrodden people) लोगों से विशेष लगाव था।उन्होंने उन्हें आशा और उत्साह की संजीवनी बूटी देते हुए कहा:
    ‘तुम निर्धनो ! धन्य हो,क्योंकि भगवान का राज्य तुम्हारा ही है।
    तुम मूर्खों! धन्य हो,क्योंकि तुम्हें सब कुछ मिलेगा।
    तुम रोने वालो!धन्य हो,क्योंकि तुम हँसोगे।
  • तुम,जिनसे लोग घृणा करते हैं,जिन्हें वे दुत्कारते और धिक्कारते हैं और मनुष्य होने के नाते अपमान के साथ पुकारते हैं,धन्य हो।
    ऐसा होने पर प्रसन्न हो जाओ,खुशी से कूद पड़ो,क्योंकि तुम्हें स्वर्ग में श्रेष्ठ पुरस्कार मिलेगा।”
    साथ ही उन्होंने समृद्ध और सम्पत्तिशाली लोगों को चेतावनी दी (Warned the powerful):
    “किन्तु अमीरो। तुम पर खेद है,क्योंकि तुम्हारे सुख समाप्त हो चुके हैं।
    भरे पेट वालो ! तुम पर खेद है,क्योंकि तुम भूखों मरोगे।
  • हँसने वालो तुम पर खेद है,क्योंकि तुम,रोओगे और झंझाओगे।”
    प्रेम,सहिष्णुता,सदाचार और परोपकार का सन्देश देते हुए उन्होंने कहा:
    “…. अपने शत्रुओं से प्रेम करो,जो तुमसे घृणा करें,उनसे अच्छा व्यवहार करो,जो तुम्हें कोसे उन्हें आर्शीवाद दो,जो तुम्हें गाली दे,तुम उनके कल्याण की कामना करो,जो तुम्हारे गाल पर चपत लगाए,उसकी तरफ दूसरा गाल कर दो”(Turn the other cheek to him)
    “…..दूसरों के साथ वैसा ही व्यवहार करो जैसा तुम चाहते हो कि तुम्हारे साथ किया जाए…..'(सर्मन ऑन दी माउण्ट,न्यू एंजिल,ल्यूक,6.20-38)
    ईसाई धर्म का मूल सिद्धान्त यही है कि देश,वेष,भाषा के भेद के बिना भला चाहना और करना ही भलाई का रास्ता है।सदाचारी व्यक्ति को किसी प्रकार के कर्मकाण्ड की आवश्यकता नहीं है।
  • ईसाई धर्म की मान्यताएं (Beliefs of Christianity):ईसाई धर्म की मुख्य मान्यताएं निम्नवत् है:
  • (1.)त्रिक:भगवान एक सत्ता है पर इसके तीन रूप हैं:पिता,पुत्र और पवित्रात्मा।
  • (2.)पतन:भगवान ने मनुष्य को पूर्ण बनाया,किन्तु आदम ने भगवान की आज्ञा न मानने का अपराध किया जिसके कारण समस्त मानव-जाति भगवान से दूर हो गई और उसका पतन हो गया।
  • (3.)अवतार (incarnation):मनुष्य और भगवान के सायुज्य को फिर से स्थापित करने के लिए भगवान ईसू के रूप में मनुष्य बना।
  • (4.)ईसामसीह का द्वैत रूप (The duality of Jesus Christ):ईसा एक ही समय में भगवान भी थे और मनुष्य भी।
  • (5.)प्रायश्चित:भगवान ने ईसा के रूप में कष्ट सहा और मनुष्य बनकर अपना बलिदान किया जिससे समस्त मानव जाति के पापों से प्रायश्चित हो सके।
  • (6.)पुनरुत्थान:भगवान ने ईसा के रूप में कब्र से उठकर अपने में विश्वास करने वालों को अमरता का आश्वासन दिया।
  • (7.)चर्च का दैवी आधार (The Divine Basis of the Church) भगवान ने ईसा के रूप में मनुष्य और भगवान के सायुज्य को स्थापित करने की पद्धति के रूप में चर्च का निर्माण किया।
  • (8.)कृपा:भगवान अपने प्रेम द्वारा मनुष्य को पाप से बचने के लिए शरण देता है।
  • (9.)पुनरागमन:भगवान ईसा के रूप में पृथ्वी पर फिर आएगा,मृतप्राणी कब्रों से उठ खड़े होंगे।पुण्यात्माओं की मुक्ति होगी और पापात्मा सदा के लिए नरक में जाएंगे।

Also Available in Hindi:Religion

4.पारसी धर्म भगवान की निराकार उपासना और मिलजुलकर रहने की अनोखी विशेषता वाला धर्म (Zoroastrianism is a religion characterized by the incorporeal worship of God and the unique characteristic of living together):

  • पारसी या जरथुस्त धर्म का उदय ईसा से लगभग 1000 वर्ष पूर्व ईरान में हुआ।इसके प्रवर्तक का नाम जरथुस्त (यूनानियों के अनुसार जोरेस्टर) था।
    तत्कालीन ईरान में आदर और भय के कारण अनेक देवी-देवताओं की उपासना की जाती थी,जैसे मिथ्र,अहुर,अर्त,यिम,गंगदेव आदि।ऐसे समय में संत जरथुस्त ने प्रतिपादित किया कि भगवान एक है और वह है:अहुरमज्दा।जरथुस्त के उपदेश एवं शिक्षाएं ‘जेन्द अवेस्ता’ नामक ग्रन्थ में संकलित हैं।
    पारसी धर्म की मुख्य मान्यताएं (Main Beliefs of Zoroastrianism):पारसी धर्म की मुख्य मान्यताएं निम्नलिखित हैं:
  • (1.) भगवान एक है।वह सर्वशक्तिमान है।उसी के निर्देश पर सूर्य,चन्द्र,अग्नि,इंद्र,पृथ्वी,जल,वायु आदि परिचालित होते हैं।वही विवेक का जनक,अच्छे विचारों को उत्पन्न करने वाला और मनुष्य के कार्यों का नियामक भी है।
  • (2.)आत्मा अजर और अमर है।
  • (3.)मनुष्य अपने कर्म के अनुसार अच्छे और बुरे परिणाम का भागी होता है।
  • (4.)मूर्तिपूजा और बाह्य आडंबर निरर्थक है।
  • (5.)मनुष्य का कल्याण सद्‌कार्यों से ही सम्भव है।
  • (6.) मनुष्य को अन्धविश्वासों पर विश्वास नहीं करना चाहिए।
  • (7.) इस सृष्टि में हमेशा सत्य और असत्य का संघर्ष चलता रहता है जिसमें अन्ततः सत्य की विजय होती है।
  • (8.)जरथुस्त ने प्रकाश को अहुमज्दा (भगवान) (Ahuramazda) और सत्य का प्रतीक माना है।सूर्य और अग्नि प्रकाश को जन्म देने वाले हैं।अतएव भगवान के प्रतीक सूर्य एवं अग्नि की पारसी धर्म में उपासना की जाती है।
    इस प्रकार धर्म के क्षेत्र में भारत की सुदीर्घ सांस्कृतिक विरासत है।ज्ञातव्य हो कि सभी धर्मों के मूलभूत मूल्य एक जैसे हैं,जैसाकि उपर्युक्त विवरण से स्पष्ट है।वैसे भी Religion शब्द की उत्पत्ति लैटिन भाषा के दो शब्दों:’Re’ और ‘Legree’ या ‘Ligare’ शब्द से हुई है जिसका अर्थ होता है:’बाँधना या धारण करना’ अर्थात् धर्म वह बंधन है जो मानवमात्र को परस्पर प्यार,सहानुभूति और सहृदयता के बंधन में बाँधता है,मानवमात्र ही परमपिता परमेश्वर से बाँधता है जिसकी कृति यह पूरी प्रकृति है।

5.विदेशी मूल के धर्मों को समझने के लिए 3 दिशानिर्देश का सारांश (Summary of 3 Guidelines for Understanding Religions of Foreign Origin):

  • (A)विदेशी मूल के धर्मों को समझने के लिए उनके कुछ मौलिक गुणधर्म (Some of the fundamental properties of foreign origin religions to understand them):
  • (1.) इस्लाम धर्म शक्ति और भेदभाव न करने की विशेषता वाला धर्म (Islam Religion: A religion characterized by power and non-discrimination)
  • (2.) ईसाई धर्म सभी से प्यार और दलितों, पतितों की सेवा करने की अद्भुत गुणधर्म वाला धर्म
    (Christianity is a religion with the wonderful quality of loving all and serving the downtrodden and the depraved)
  • (3.) पारसी धर्म भगवान की निराकार उपासना और मिलजुलकर रहने की अनोखी विशेषता वाला धर्म
    (Zoroastrianism is a religion characterized by the incorporeal worship of God and the unique characteristic of living together)
  • (B)विदेशी मूल के धर्मों से सम्बन्धित कुछ छात्र-छात्राओ के लिए चिन्तन योग्य प्रश्न (Questions to Ponder for Some Students Related to Religions of Foreign Origin):
  • (1.) विदेशी मूल के धर्मों की मूलभूत अवधारणाएँ क्या है? (What are the basic concepts of Religions of Foreign Origin?):
  • (2)विदेशी मूल के धर्मों में कौन-कौनसे मुख्य धर्म हैं? (Which are the main religions among the Religions of Foreign Origin?)
  • (3.) तुम विदेशी मूल के धर्मों से क्या शिक्षा लेते हो? (What lessons do you learn from Religions of Foreign Origin?)
  • (4.) क्या तुमने विदेशी मूल के धर्मों या किसी एक धर्म के बारे में जाना है? (Have you learned about Religions of Foreign Origin or any one religion?)
  • (5.) क्या विदेशी मूल के धर्मों था धार्मिक ग्रन्थों को पढ़ना अधार्मिक है? (Whether it was a Religions of Foreign Origin is unreligious to read religious texts?)
  • (6.) विदेशी मूल के धर्मों का मानवता के विकास में क्या योगदान है? (What is the contribution of Religions of Foreign Origin to the
    mon amaran Tongions of any one religio
  • (5.) क्या विदेशी मूल के धर्मों या धार्मिक ग्रन्थों को पढ़ना अधार्मिक है? (Whether it was a Religions of Foreign Origin is unreligious to read religious texts?)
  • (6.) विदेशी मूल के धर्मों का मानवता के विकास में क्या योगदान है? (What is the contribution of Religions of Foreign Origin to the development of humanity?)
  • (7.) विदेशी मूल के धर्मों के अस्तित्व के बाद भी इतने रक्तपात, युद्ध क्यों हुए? (Why did there be so many bloodshed and wars even after the existence of Religions of Foreign Origin?)
  • (8.) विभिन्न विदेशी मूल के धर्म इंसान का पाठ पढ़ाने वाले हैं फिर भी विदेशों में इतने युद्ध क्यों रहे हैं? (Why are there so many wars in foreign countries when different religions teach the lesson of man?)
  • (9.) क्या धर्म का मतलब केवल पूजा-पाठ करना है और समाज में अराजकता, देश में अशांति और एक देश का दूसरे देश से लड़ने के मामलों में उन्हें (धार्मिक व्यक्ति /संगठन) के मामलों में नहीं पड़ना चाहिए? (Does religion only mean worship and should not be involved in the affairs of them (religious persons/organizations) in the cases of anarchy in the society,unrest in the country and one country fighting with another?)
    उपर्युक्त आर्टिकल में विदेशी मूल के धर्मों को समझने के लिए 3 दिशानिर्देश (3 Guidelines for Understanding Religions of Foreign Origin) के बारे में विस्तार और गहराई से समझाया गया है।
  • ### 📢 यदि आपको यह गणित का आर्टिकल पसंद आया हो:
    * 👥 **मित्रों के साथ शेयर करें:** ज्ञान बांटने से बढ़ता है,इसलिए इसे अपने दोस्तों के साथ ज़रूर साझा करें।
    * 🔔 **वेबसाइट को फॉलो करें:** अगर आप यहाँ पहली बार आए हैं, तो हमारे **ईमेल सब्सक्रिप्शन** को फॉलो करें।साथ ही, **Push Notification (घंटी के आइकॉन) को भी अलाउ (Allow) करें** ताकि हर नए ज़रूरी आर्टिकल और टेस्ट सीरीज़ का नोटिस आपके मोबाइल पर तुरंत मिल जाए!
    * 💬 **अपने सुझाव दें:** यदि आपकी कोई समस्या है या कोई सुझाव देना चाहते हैं,तो नीचे **कमेंट** करके हमें ज़रूर बताएं।
    **पूरा आर्टिकल पढ़ने के लिए आपका स्वागत है!** 🙏

Also Available in Hindi:How to Become Devoted?

6.विदेशी युवक के अन्तर्चक्षु खुले (हास्य-व्यंग्य) (The Eyes of a Foreign Young Man Open) (Comedy and Satire):

  • एक बार भारत घूमने आए दो विदेशी युवक भारतीय योगी के पास चुहलबाजी करने के लिए गए।
  • विदेशी युवक (मन ही मन व्यंग्यपूर्वक) (योगी से): हमने आपका बहुत बड़ा नाम सुना है।हमें शिष्य बना लीजिए। और दीक्षा दीजिए।
  • भारतीय योगीःतुम शिष्य क्यों बनना चाहते हो? क्या उद्देश्य है?
  • विदेशी युवक:हमें धर्म-कर्म के बारें में जानना है।हम धर्म-कर्म के बारे में कुछ नहीं जानते है।आधुनिक शिक्षा में भौतिक विषय पढ़ाये जाते है।
  • भारतीय योगी उनकी चुहलबाजी ताड़ गए।पर मैंने किसी को शिष्य नहीं बनाया और न शिष्य बनाने का इरादा है।
  • विदेशी युवकः यदि आप शिष्य नहीं बनाते तो हम यहीं अनशन करते हैं (मजाक करते हुए)।
  • भारतीय योगी ने एक युक्ति सोची।उन्होंने कहा कि तुम पढ़े लिखे हो।और इन दो आदिवासी बच्चों को पढ़ना-लिखना सीखा दो तो मैं शिष्य बना लूंगा।
    दोनों विदेशी युवक अपने ही जाल में फँस गए और उन्हें सहमत होना पड़ा।और वे रोज उन्हें पढ़ाने लगे।
    दोनों आदिवासी युवक ठस बुद्धि के थे।इसलिए बहुत समय में भी वे उन्हें नहीं पढ़ा सके।
    एक दिन एक आदिवासी महिला एक दल-दल में फँस गयी।उनमें से एक विदेशी युवक ने सोचा मैं बहुत दिनों से आदिवासी को नहीं पढ़ा सका।चलो उस आदिवासी महिला की मदद करते हैं।
  • पहले युवक ने आदिवासी महिला को दल-दल से बाहर निकाल दिया।
  • आदिवासी महिला ने उसे कहाःतुमने मेरी जान बचायी है।तुम्हारी क्या इच्छा है?
  • विदेशी युवक ने योगीजी से मजाक की बात कही।और कहा मैं बहुत दिनों के बाद भी आदिवासी को नहीं पढ़ा सका।
  • आदिवासी महिलाः बेटे किसी की भी हँसी नहीं उड़ानी चाहिए।और कहा तथास्तु ऐसा ही होगा।
  • विदेशी युवकःमाते मेरी एक शंका है।आपके आशीर्वाद से मैं पढ़ाने में सफल कैसे हो जाऊँगा।जबकि आप अपनी रक्षा नहीं कर सकी।
  • आदिवासी महिलाःकर्म तो तुम कर ही रहे हो और ये मेरी आत्मा की हुक है और आत्मा की हूक से निकली बात सच होती है।रही मेरी रक्षा की बात तो मैंने कातर दृष्टि से भगवान से प्रार्थना की थी इसलिए भगवान ने तुम्हें भेजा।
    विदेशी युवक ने माँ को प्रणाम किया और ज्योंही वापस लौटा तो आदिवासी युवक पाठ कर रहा था।दरअसल उस आदिवासी युवक के तेज झटका लगा कि मुझे
  • शिक्षक (विदेशी युवक) कैसे छोड़ कर चले गए? मुझमें ही कमी है।तेज झटका लगते ही उसे अन्तर्ज्ञान हुआ और पढ़ने व पाठ करने लगा।
    गुरुजी ने पहले विदेशी युवक को शिष्य बना लिया और दूसरे युवक को कहा कि कर्त्तव्य कर्म ( पढ़ना-पढ़ाना) भी धर्म है।पहले तुम पात्रता हासिल करो और उसे अपने देश भेज दिया।

7.विदेशी मूल के धर्मों को समझने के लिए 3 दिशानिर्देश (Frequently Asked Questions Related to 3 Guidelines for Understanding Religions of Foreign Origin) से सम्बन्धित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:

प्रश्न:1.क्या विदेशी मूल के तीन ही धर्म हैं? (Are there only three religions of foreign origin? ):

उत्तर:नहीं,यहूदी धर्म,ईसाई में भी कैथोलिक आदि धर्म है।परन्तु यहाँ विदेशी धर्म के उन धर्मों की चर्चा की है जो भारत में भी निवास करते हैं।

प्रश्न:2.क्या इस्लाम धर्म मूर्ति पूजक है? (Is Islam idolatrous?):

उत्तर:नहीं,इस्लाम धर्म में निराकार (मक्का की ओर मुख करने की उपासना) की जाती है।

प्रश्न:3.सभी धर्मों में क्या समानता है? (What do all religions have in common?):

उत्तर:सभी धर्म में भगवान की उपासना पद्धति की मूलभूत बातें एक जैसी है परन्तु उनमें वैमनस्य,मतभेद इंसान की संकीर्ण मानसिकता के कारण पैदा होता है।

  • उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर द्वारा विदेशी मूल के धर्मों को समझने के लिए 3 दिशानिर्देश (3 Guidelines for Understanding Religions of Foreign Origin) की प्राइमरी टर्म्स के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *