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Why did mathematics fade in India?

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1 1.”भारत में गणित की चमक फीकी क्यों पड़ी” का परिचय (Introduction to Why did mathematics fade in India?):
1.2 (2.)”भारत में गणित की चमक फीकी पड़ी “के सुधार का तरीका (Method of improving “Mathematics faded in India”):

1.”भारत में गणित की चमक फीकी क्यों पड़ी” का परिचय (Introduction to Why did mathematics fade in India?):

  • आर्यभट्ट के देश भारत में गणित की चमक फीकी(Mathematics faded) पड़ने लगी है।भारत गणितज्ञों की भूमि रहा है लेकिन वर्तमान समय में विद्यार्थी गणित में अच्छे नंबर नहीं ला रहे हैं तथा असफल भी हो रहे हैं।अधिकतर विद्यार्थी गणित में कमजोर होने के कारण असफल हो जाते हैं।इसकी मूल वजह है गणित शिक्षा और गणित शिक्षकों का स्तर गिरता जा रहा है।भारत में पहले की तरह गणितज्ञ पैदा नहीं हो रहे हैं या बहुत कम पैदा हो रहे हैं।
  • भारत शून्य की खोज करने वाला देश है।प्रथम बार बिहार की जमीन से अध्ययन करके गणितज्ञ-भौतिकशास्त्री आचार्य आर्यभट्ट ने बताया कि चंद्रग्रहण और सूर्यग्रहण कैसे होता है?आर्यभट्ट का जन्म दिसंबर 476 में हुआ था और मृत्यु दिसंबर 550 में हुई थी।उनका कार्यक्षेत्र कुसुमपुर था अर्थात् आज का पटना।पांचवी शताब्दी के इस गणितज्ञ को पूरी दुनिया याद करती है। बीजगणित की आधारशिला आर्यभट्ट ने रखी थी। इन्होंने आर्यभट्टीय व आर्य सिद्धांत और तंत्र नामक दो ग्रंथों की रचना की थी। इन्हीं के नाम पर भारत के प्रथम उपग्रह सेटेलाइट का नाम आर्यभट्ट रखा गया। स्थानीय मान प्रणाली आर्यभट्ट की ही देन है,इसी से आगे चलकर शून्य का जन्म हुआ।गिनती तो 1 से शुरू होकर 10 तक पहुंचेगी लेकिन एक कहां से शुरू होगा इसकी जरूरत को सबसे पहले आर्यभट्ट ने ही समझा और स्थानीय मान प्रणाली को प्रतिपादित किया।
  • वर्तमान दानापुर के पास ही प्राचीन कुसुमपुरा था, जहां खगोलशास्त्री आर्यभट्ट ने एक वेधशाला का निर्माण किया था। कुछ विद्वान यहां तक मानते हैं कि आर्यभट्ट का जन्म स्थान बिहार स्थित कुसुमपुरा ही है जबकि कुछ विद्वानों का कहना है कि उनका जन्म महाराष्ट्र में हुआ था और कुसुमपुरा या पटना पढ़ने आए आर्यभट्ट यहीं के होकर रह गए।पटना के पास तारेगना ही वह जगह है जिसे ग्रहण देखने के लिए सबसे उपयुक्त जगह माना जाता है।कहा जाता है कि आर्यभट्ट भी यहां ग्रहण के समय अध्ययन के लिए आया करते थे।
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(1.)भारत में गणित की चमक फीकी क्यों पड़ी? (Why did mathematics fade in India?):

  • देश में शिक्षकों की गुणवत्ता सुधारने की जरूरत है।भारत में गणित की चमक फीकी (Mathematics faded) पड़ने का कारण है शिक्षकों की गुणवत्ता में कमी होती जा रही है।आज शिक्षा को व्यवसाय मानकर गणित शिक्षा से धन कैसे कमाया जाए इस पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है। गणित शिक्षकों की गुणवत्ता को सुधारने की तरफ ध्यान नहीं है।इसके लिए प्रशिक्षित और समर्पित शिक्षकों को आगे बढ़ाना पड़ेगा।धन तथा वेतन तो बायोप्रोडक्ट है परंतु शिक्षा को व्यवसाय मान लिया जाएगा तो उसकी गुणवत्ता में गिरावट तो आएगी ही।

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(2.)”भारत में गणित की चमक फीकी पड़ी “के सुधार का तरीका (Method of improving “Mathematics faded in India”):

  • भारत में गणितज्ञों और गुणीजनों का आदर नहीं करने के कारण गणित की चमक फीकी(Mathematics faded) पड़ती जा रही है।इसलिए सक्षम संगठनों व सरकार को गणितज्ञों तथा गुणीजनों का आदर करना होगा।आज देश की प्रतिभाएं विदेशों में जाकर अपना व्यवसाय करना ज्यादा उचित समझते हैं तथा भारत में उनकी उपेक्षा की जाती है।इसलिए गणितज्ञों को सम्मानित करके प्रतिभा पलायन को रोकना पड़ेगा।

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(3.)”भारत में गणित की चमक फीकी पड़ी” के अन्य कारण (Other reasons for “Mathematics faded in India”):

  • गणित के विद्यार्थियों की स्कूलों और कॉलेजों में कमी होती जा रही है।ग्रामीण क्षेत्रों में हालत ओर भी खराब है।इसे गणित का डर कहें या फिर गणित विषय के प्रति रुचि का अभाव ,विद्यार्थी गणित विषय से कतराने लगे हैं।पिछले कुछ वर्षों से इंजीनियरिंग कालेजों का हाल खराब है।
  • इंजीनियरिंग कॉलेजों में विद्यार्थी नहीं मिल रहे हैं।कई निजी व सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज बंद होने की हालत में पहुंच गए हैं।गणित संकाय अब छोटा संकाय बनता जा रहा है। कॉलेजों के एडमिशन से भी पता चल रहा है कि विद्यार्थियों की रुचि गणित विषय में कम होती जा रही है। गणित की चमक फीकी पड़ने का कारण यह है कि पिछले दशक में गणित के इंटेलिजेंट विद्यार्थियों ने कठिन समझे जाने वाले इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। प्रतिभा होने के बावजूद उन्हें नौकरी नहीं मिल पा रही है।यह सभी स्कूलों से निकले ब्रिलिएंट विद्यार्थी थे, जिन्हें देखकर वर्तमान में विद्यार्थी गणित से कतराने लगे हैं।आज के युवा ज्यादा व्यावहारिक हैं जिनका दृष्टिकोण है कि जब आसान विषय लेकर नौकरी मिल रही है तो फिर गणित लेकर जटिल पढ़ाई क्यों करें? जबकि दो दशक पहले गणित के विद्यार्थियों को नौकरी मिलने की शत-प्रतिशत संभावना रहती थी।ऐसी स्थिति में स्कूलों और कॉलेजों में विद्यार्थियों की संख्या कम होती जा रही है।इसलिए भारत में गणित की चमक फीकी पड़ी(Mathematics faded) है।

2.भारत में गणित की चमक फीकी क्यों पड़ी? (Why did mathematics fade in India?) के सम्बन्ध में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:

प्रश्न:1.भारत ने गणित से दुनिया कैसे बदली? (How did India change the world with math?):

उत्तर:हमें शून्य की अवधारणा देने के साथ-साथ,भारतीय गणितज्ञों ने अन्य क्षेत्रों में त्रिकोणमिति,बीजगणित, अंकगणित और ऋणात्मक संख्याओं के अध्ययन में मौलिक योगदान दिया।शायद सबसे महत्वपूर्ण रूप से, दशमलव प्रणाली जिसे हम आज भी दुनिया भर में लागू करते हैं,पहली बार भारत में देखी गई थी।
शून्य और दशमलव मान प्रणाली के आधार पर आज विज्ञान की नींव खड़ी हुई है।शुन्य तथा दशमलव प्रणाली के आधार पर ही आज विज्ञान ने इतनी तरक्की कर ली है।यदि शून्य तथा दशमलव प्रणाली की खोज नहीं हुई होती तो आज विज्ञान का जितना विकास हुआ है उतना विकास नहीं हुआ होता है।

प्रश्न:2.प्राचीन भारत ने दुनिया को कैसे बदला? (How does the mathematical knowledge of ancient India affect our lives today?):

उत्तर:प्राचीन भारत ऋषियों और ऋषियों की भूमि होने के साथ-साथ विद्वानों और वैज्ञानिकों की भूमि थी।शोध से पता चला है कि दुनिया में सबसे अच्छा स्टील बनाने से लेकर दुनिया को गिनती सिखाने तक,भारत आधुनिक प्रयोगशालाओं की स्थापना से सदियों पहले विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सक्रिय रूप से योगदान दे रहा था।

प्रश्न:3.प्राचीन भारत का गणितीय ज्ञान आज हमारे जीवन को कैसे प्रभावित करता है? (How does the mathematical knowledge of ancient India affect our lives today?):

उत्तर:आवश्यक प्रश्न प्राचीन भारत का गणितीय ज्ञान आज हमारे जीवन को कैसे प्रभावित करता है?हम जिन अंकों का उपयोग करते हैं,वे भारत में उत्पन्न हुए हैं।परिणामस्वरूप, हम उन्हें अरबी अंक (Arabic numerals) या हिंदू-अरबी अंक (Hindu-Arabic numerals) कहते हैं।संख्या प्रणाली सबसे पहले भारत में विकसित हुई और आज भी इस्तेमाल की जाती है,इसे दशमलव प्रणाली (decimal system) कहा जाता है।

प्रश्न:4.गणित ने दुनिया को कैसे बदल दिया? (How did math change the world?):

उत्तर:यह हमें पैटर्न को समझने,रिश्तों को मापने और भविष्य की भविष्यवाणी करने का एक तरीका देता है।  गणित हमें दुनिया को समझने में मदद करता है-और हम गणित को समझने के लिए दुनिया का इस्तेमाल करते हैं।  दुनिया आपस में जुड़ी हुई है।इसका उपयोग करके,छात्र दुनिया को समझ सकते हैं और जटिल और वास्तविक समस्याओं को हल कर सकते हैं।
गणित के द्वारा छात्र-छात्राओं में एक विशेष प्रकार की तार्किक क्षमता का विकास होता है तथा जीवन में काम आने वाले कई प्रकार के अनुशासन का विकास होता है।

प्रश्न:5.प्राचीन काल में गणित का प्रयोग किस प्रकार किया जाता था? (How was math used in ancient times?):

उत्तर:यद्यपि उन्होंने सैद्धांतिक गणित में वस्तुतः कोई योगदान नहीं दिया,प्राचीन रोमनों (ancient Romans) ने सर्वेक्षण (surveying),संरचनात्मक इंजीनियरिंग (structural engineering),मैकेनिकल इंजीनियरिंग (mechanical engineering),बहीखाता पद्धति (bookkeeping),चंद्र (lunar) और सौर कैलेंडर (solar calendars) के निर्माण और यहां तक ​​​​कि कला (arts) और शिल्प (crafts) में प्रयुक्त गणित (applied mathematics) का इस्तेमाल किया।

प्रश्न:6.गणित की पहली समस्या क्या थी? (What was the first math problem?):

उत्तर:पहला उल्लेखनीय और सबसे प्रसिद्ध रूप से संचालित समीकरण पाइथागोरस का प्रमेय (Pythagoras’ theorem) था।हालांकि यह लगभग 530 ई.पू. तो कुछ और जल्दी होना चाहिए।थेल्स (Thales) पाइथागोरस के लिए एक प्रभाव था।उन्होंने लगभग 550 ई.पू. में अपने इंटरसेप्ट प्रमेय (Intercept theorem) के साथ उन दोनों के बीच की लड़ाई जीती।

प्रश्न:7.नंबर किसने बनाए? (Who made numbers?):

उत्तर:बेबीलोनियाई (Babylonians) लोगों ने अपनी संख्या प्रणाली सुमेरियों (Sumerians) से प्राप्त की,जो गिनती प्रणाली विकसित करने वाले दुनिया के पहले लोग थे।4,000 से 5,000 साल पहले विकसित,सुमेरियन प्रणाली स्थितीय (positional) थी-एक प्रतीक का मूल्य अन्य प्रतीकों के सापेक्ष उसकी स्थिति (position relative to other symbols) पर निर्भर करता था।

प्रश्न:8.गणित की सबसे लंबी समस्या क्या है? (What is the longest math problem?):

उत्तर:फ़र्मेट्स लास्ट थ्योरम (Fermat’s Last Theorem) के 1995 के प्रमाण के बाद से, एक समस्या जो 365 वर्षों तक खड़ी रही,वर्तमान में सबसे लंबे समय तक चलने वाली गणित की समस्या 1742 में एक रूसी गणितज्ञ क्रिश्चियन गोल्डबैक (Christian Goldbach) (1690-1764) द्वारा प्रस्तुत अनुमान है।

उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर द्वारा भारत में गणित की चमक फीकी क्यों पड़ी? (Why did mathematics fade in India?) के बारे में ओर अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

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