Menu

Studying Maths is Penance and Devotion

Contents hide

1.गणित का अध्ययन करना तप और साधना है (Studying Maths is Penance and Devotion),विद्यार्थी जीवन में तप और साधना आवश्यक (Penance and Spiritual Practice are Essential in Student Life):

  • गणित का अध्ययन करना तप और साधना है (Studying Maths is Penance and Devotion) यह वाक्य पढ़कर छात्र-छात्राओं को कुछ अजीब सा लगेगा या लग सकता है।क्योंकि आज की दुनिया में युवावर्ग को ऐसी बातें बासी, ऊबाऊ,बोझिल और उपदेशात्मक लगती है।वे ऐसी बातों को सुनकर यह महसूस करते हैं जैसे उन पर इनका पालन करने के लिए दबाव डाला जा रहा हो।आज के युवावर्ग को फिल्मी बातें,चकाचौंध,दुनियादारी की बातें,भौतिक सुख-सुविधाओं में अध्ययन करने की बातें अच्छी लगती हैं और वे इसी तरह की बातें सुनना पसंद करते हैं।
  • वे रात देर तक फिल्में देखकर आएं तो उन्हें कुछ भी न कहें,वे अपनी गर्लफ्रेंड के साथ मौज मश्ती करते रहें तो कुछ न कहें।दिनभर दोस्तों के साथ गपशप करें तो उन्हें कुछ भी न कहे।वे किसी प्रतियोगिता परीक्षा अथवा शैक्षणिक कोर्स की किसी कक्षा में अनुत्तीर्ण हो जाएं तो उनके साथ सहानुभूति दिखाकर यह कहें कि तुमने कठिन परिश्रम किया था परंतु उत्तर पुस्तिका को जांचने में कहीं गड़बड़ घोटाला हुआ है।साक्षात्कार में असफल हो जाएं तो उन्हें यह सुनना पसंद है कि आजकल इंटरव्यू में बहुत ऊँची सिफारिश वाले को लिया जाता है। तात्पर्य यह है कि युवावर्ग असली बात के बजाय बनावटी बातों और भ्रमजाल में जीना पसंद करते हैं परंतु अपनी कमजोरी को ढूंढकर उसको दूर करना उन्हें पसंद नहीं है।
  • योग,तप,ध्यान,एकाग्रता,साधना,कठिन परिश्रम,मन पर नियंत्रण रखना,यम,नियम इत्यादि हमारे भारतीय ऋषियों द्वारा अपने अनुभवों के द्वारा,आचरण में उतारकर बताई गई वैज्ञानिक पद्धतियां है।इनको छात्र-छात्राएं अपनाएं तो उनका विद्यार्थी जीवन ही नहीं बल्कि पूरा जीवन सुधर जाए,जीवन की कायापलट हो जाए।परंतु उपर्युक्त आध्यात्मिक पद्धतियाँ आज मुरझाई हुई पड़ी है।इन पर भारतीय छात्र-छात्राओं को विश्वास ही नहीं है।कुछ इने-गिने छात्र-छात्राएं इनका पालन करते हैं तो देखते ही देखते उनके जीवन में चमत्कारिक परिवर्तन आ जाता है।योग-साधना भी आज दुनिया में इसलिए लोकप्रिय हो रहा है क्योंकि योगऋषि स्वामी रामदेव ने इसमें व्यावसायिक तड़का लगाया है।वरना कल तक योग साधना और भारतीय संस्कृति की इस अमूल्य धरोहर को कोई पूछता तक नहीं था।
  • वस्तुतः तप और साधना को सुनकर चौंकने की जरूरत नहीं है।क्योंकि तप और साधना का अर्थ यह नहीं है कि घर-परिवार को छोड़कर जंगल में धूणी जमा लो।संसार को छोड़कर जंगल में चले जाओ।तप और साधना घर-परिवार में भी रहकर की जा सकती है।
  • आपको यह जानकारी रोचक व ज्ञानवर्धक लगे तो अपने मित्रों के साथ इस गणित के आर्टिकल को शेयर करें।यदि आप इस वेबसाइट पर पहली बार आए हैं तो वेबसाइट को फॉलो करें और ईमेल सब्सक्रिप्शन को भी फॉलो करें।जिससे नए आर्टिकल का नोटिफिकेशन आपको मिल सके । यदि आर्टिकल पसन्द आए तो अपने मित्रों के साथ शेयर और लाईक करें जिससे वे भी लाभ उठाए । आपकी कोई समस्या हो या कोई सुझाव देना चाहते हैं तो कमेंट करके बताएं।इस आर्टिकल को पूरा पढ़ें।

Also Read This Article:3 Tips to Increase Mathematical Talent

2.तप क्या है? (What is Penance?):

  • यक्ष-युधिष्ठिर संवाद में यक्ष ने युधिष्ठिर से पूछा कि तप क्या है तब उसका जवाब उसने दिया था कि अपने कर्त्तव्यों का पालन करना तप है।कर्त्तव्यों का पालन करने से ही तप का अर्थ बिल्कुल स्पष्ट नहीं होता है इसलिए इसके बारे में थोड़ी ओर सफाई पेश करना जरूरी है।
  • जिन विद्यार्थियों ने गणित विषय ऐच्छिक विषय लिया हुआ है वे विद्यार्थी जब गणित की समस्याओं को हल करते हैं तो ओर नई समस्याएं बल्कि कहें कि विकट समस्याएं सामने आ जाती हैं।समस्याएं हल हो जाती हैं तो उन्हें सुख मिलता है परंतु गणित की विकट समस्याएँ हल नहीं होती है तो वे दुखी हो जाते हैं।इस प्रकार गणित की उच्च कक्षाओं में पहुंचते-पहुंचते सुख और दुख का अंत दिखाई नहीं देता है।
  • सुख और दुःख एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। जिसने सुख चाह लिया उसे दुःख भी मिलेगा।जैसे सिक्के के दोनों पहलुओं को अलग नहीं किया जा सकता है उसी प्रकार सुख और दुःख आपस में जुड़े हुए हैं।इन्हें अलग नहीं किया जा सकता है।जिसको सुख पाने की चाहत है उसको दुख भी मिलेगा।
  • विद्यार्थी का स्वभाव है कि वह अध्ययन कार्य किसी लाभ के लिए अधिकांशत अच्छा जाॅब प्राप्त करने के लिए करता है।ऐसे विद्यार्थी मुश्किल से ही मिलेंगे जो अध्ययन को अनासक्त भाव से सिर्फ कर्त्तव्य पालन की दृष्टि से करते हैं।सांसारिक जीवन में ऐसे विद्यार्थी नहीं मिलेंगे जो बिना किसी लाभ व प्रयोजन के अध्ययन कार्य करते हों।यदि कोई विद्यार्थी ऐसा करता है तो अन्य छात्र-छात्राएं तथा दुनिया के लोग या तो उसे पागल समझेंगे या फिर निकम्मा समझेंगे।परंतु दुनिया वाले क्या समझते हैं इसे नजरअंदाज करके छात्र-छात्राएं सुख-दुःख से प्रभावित नहीं होना चाहते हैं तो उनको समभाव रखना होगा।यह समभाव सुदृढ़ संकल्प शक्ति के बल पर ही प्राप्त किया जा सकता है।जो विद्यार्थी अध्ययन कार्य को समदृष्टि से करता है वह सुख-दुःख से प्रभावित नहीं होता है।सुख-दुःख से प्रभावित न होना ही तप है।द्वंदों (सुख-दुख,हानि-लाभ,जय-पराजय,न्याय-अन्याय इत्यादि) से दूर रहना ही तप है और यही आनंद की अवस्था है।

3.तप करने से लाभ (What is the Benefit of doing Penance?):

  • जीवन का प्रारंभिक काल विद्यार्थी जीवन तप,कठिन परिश्रम,नियम-संयम,अनुशासन और साधना करने का है।प्राचीन काल में विद्यार्थी जीवन घर-परिवार से दूर रहकर गुरुकुल में बिताना होता था।वहां कठोर तपश्चर्या,परिश्रम,ब्रह्मचर्य इत्यादि का पालन करते हुए व्यतीत करना होता था।जब नींव ही सही ढंग से लग जाती थी तो भवन तो मजबूत होगा ही।
  • परंतु आधुनिक युग में युवावर्ग तप यानि सुख और दुःख के प्रति समान भाव रखना और अपने कर्त्तव्यों का पालन नहीं करते हैं।कठिन परिश्रम,नियम-संयम,अनुशासन,साधना इत्यादि से जी चुराते हैं।जो सुख-सुविधाएं आज का युवावर्ग भोग रहा है उसमें वास्तविक रूप से विद्याध्ययन नहीं किया जा सकता है।जब युवावर्ग सुख-सुविधाओं का आदी हो जाता है तो गृहस्थाश्रम में प्रवेश करते ही उसके छक्के छूट जाते हैं।
  • युवावस्था में माता-पिता,मित्रों तथा संबंधियों का साथ-सहयोग रहता है परंतु गृहस्थाश्रम में प्रवेश करते ही ये सभी साथ छूट जाते हैं।तब उसे संसार की वास्तविक कठिनाइयों,जॉब में आने वाली कठिनाइयों,पारिवारिक दायित्वों का निबाहने में आनेवाली कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। जब इन सबका समाधान नहीं करता है तो तनावग्रस्त हो जाता है।और कर भी कैसे सकता है क्योंकि कठिनाइयों,मुसीबतों का सामना करना और समाधान करना तो उसने सीखा ही नहीं है।
  • गणित का अध्ययन करना,गणित के सवालों को हल करना और गणित की समस्याओं को हल करने से केवल डिग्री प्राप्त करने का ही लाभ नहीं मिलता है बल्कि उससे उसे ओर भी कई लाभ होते हैं।अपने कर्त्तव्यों का पालन करना सीखता है,सुख-दुःख को समान भाव से देखना सीखता है। जीवन को सफल और श्रेष्ठ बनाने के लिए अनुशासन का पालन करना सीखता है।
  • तप करने से जीवन सुख शांति से गुजरता है,जीवन में एक अनुशासन कायम होता है,कर्त्तव्य परायणता,नैतिकता जैसे गुणों का पालन करना सीखता है।जाहिर सी बात है कि इन गुणों का पालन करने से उसे जीवन में अनेक लाभ होते हैं।
  • पारिवारिक,सामाजिक,व्यक्तिगत समस्याओं को स्वयं ही सुलझा लेता है।जीवन में कठिनाइयों,समस्याओं से उद्विग्न,निराश,विद्रोही,उद्दण्ड और उच्छृंखल नहीं होता है।क्योंकि जब गहरी और मजबूत नींव तैयार हो जाती है तो इन समस्याओं को चुटकियों में हल कर लेता है।छात्र-छात्राएं अपना पूरा जीवन आनंद के साथ गुजार लेता है और आगामी जीवन के लिए सुंदर,उत्तम और सुदृढ़ नींव रख देता है।

4.साधना से क्या तात्पर्य है? (What is meant by Spiritual Practice?):

  • गणित का विद्यार्थी तथा अन्य विद्यार्थी अहंकार से भरे होंगे तो विद्याध्ययन नहीं कर सकेंगे।जैसे भरे हुए पात्र में पानी नहीं भरा जा सकता है,खाली पात्र में ही पानी भरा जा सकता है।इसी प्रकार गणित तथा अन्य विषयों का अध्ययन करने के लिए विद्यार्थी को अपने आपको खाली करना होगा। विद्यार्थी को अपने आपको खाली करने से तात्पर्य है कि काम,क्रोध,अहंकार इत्यादि विकारों से खुद को मुक्त करना होगा।यदि ये विकार होंगे तो सही मायने में विद्याध्ययन नहीं किया जा सकता है।आप जो भी पढ़ेंगे वह आपके आचरण का अंग नहीं बनेगा।हां यह हो सकता है कि आप पुस्तक की विषयवस्तु,गणित सवालों के हल,गणित की प्रमेयों को रट लें और उत्तीर्ण हो जाए।परंतु ऐसा करने से आप डिग्रीधारी (क्वालिफाइड) तो हो जाएंगे परंतु शिक्षित (एजुकेटेड) नहीं हो सकेंगे।
  • आप गणित की पुस्तक व अन्य पुस्तकों को समर्पित भाव से पढ़ेंगे तभी वह आपके जीवन का अंग बनेगा।शिक्षक जो पढ़ाएगा उसे तभी ठीक से समझ पाएंगे जब आप अपने आपको खाली करके पढ़ेंगे,समर्पण भाव से पढ़ेंगे।शिक्षकों के प्रति समर्पित होकर पढ़ेंगे,पुस्तकों को समर्पित भाव से पढ़ेंगे तभी पढ़ा हुआ आपके आचरण का,आपके जीवन का अंग बनेगा।आचरण में न उतारा हुआ,रटा हुआ आपके जीवन का अंग नहीं बन सकता है।

5.आचरण में उतारने का दृष्टांत (Parable of Conduct):

  • एक सरकारी कर्मचारी की अल्पायु में ही मृत्यु हो गई।अतः उसके पुत्र जो कि पढ़ा लिखा था,को उसकी एवज में नौकरी लग गई।सरकारी कर्मचारी गणित का अध्यापक था।अतः उसके पुत्र नीलमणि को पिता की एवज में अध्यापक पद पर नियुक्त कर दिया गया था।चूँकि उसकी अध्यापक की पात्रता के बिना ही गणित अध्यापक बना दिया गया था।उसे पढ़ाने का कोई अनुभव नहीं था।परन्तु फिर भी उसने बोर्ड के छात्र-छात्राओं को पढ़ाया।वार्षिक परिणाम आया तो बहुत से छात्र-छात्राएं अनुत्तीर्ण हो गए।नीलमणि ने काफी सोच-विचार किया कि आखिर ऐसा क्यों हुआ? अंत में उसने निष्कर्ष निकाला कि बोर्ड परीक्षाओं में पाठ्य पुस्तक से ही सवाल पूछे जाते हैं।यहां तक की परीक्षा के दृष्टिकोण से जो प्रश्नावली नहीं है उसमें से भी  बोर्ड परीक्षा में सवाल नहीं पूछे जाते हैं।उसने शेष प्रश्नावली के सवालों को विद्यार्थियों को रटाना चालू किया।परंतु बिना समझे छात्र-छात्राएं सवालों को रटने में आनाकानी करने लगे।उसने अपने साथी अध्यापकों से विचार-विमर्श करके अपने विचित्र अंदाज को बताया।उसके विचित्र अन्दाज को सुनकर साथी अध्यापक हँसने लगे।
  • अपने इस अजीबोगरीब सोच को अमल में लाने के लिए उसने छात्र-छात्राओं को रटाने के लिए दुबारा से प्रयास किया।एक दिन,दो दिन,तीन दिन तथा एक महीना गुजरते-गुजरते उसने कुछ सफलता प्राप्त की।लड़के उसके बताए हुए सवालों को रटने लग गए।धीरे-धीरे करके उसने गणित की पुस्तक के सभी सवाल विद्यार्थियों को रटवा दिए।उसने अपने साथी अध्यापकों को शेखी बघारते हुए अपनी विचित्र सोच और कामयाबी का वर्णन किया।परन्तु साथी अध्यापक मुस्कुरा दिए।नीलमणि को अपने साथी अध्यापकों की मुस्कुराहट के पीछे का रहस्य समझ में नहीं आया।परंतु उसने इस पर ज्यादा कुछ विचार नहीं किया।उस पर तो अपने विद्यार्थियों को सवाल रटाने की सनक सवार थी।
  • इधर कुछ दिनों से बोर्ड का निरीक्षण दल भी कभी-कभी बोर्ड कक्षाओं की निगरानी करने आता था।औचक निरीक्षण में नीलमणि की कक्षा का भी निरीक्षण किया गया परंतु नीलमणि इन सबसे बेखबर था।
  • बोर्ड निरीक्षण दल ने अपने निरीक्षण की रिपोर्ट बोर्ड अध्यक्ष को सौंप दी।वार्षिक परीक्षा का समय आया।नीलमणि बिल्कुल अपने ख्यालों में खोया हुआ खुश था कि इस बार एक भी परीक्षार्थी असफल नहीं होगा।बोर्ड अध्यक्ष ने प्रश्न-पत्र में सवालों को बदलाव के साथ तैयार करवाके सभी स्कूलों में भेज दिया।परंतु नीलमणि बोर्ड परीक्षा के परिणाम को देखकर भौचक्का रह गया।उसके द्वारा पढ़ाए हुए आधे से अधिक विद्यार्थी असफल हो गए थे।इसका समाचार सभी अखबारों में प्रमुखता से छापा गया।नीलमणि ने सोचा कि उसके द्वारा पढ़ाया गया बेकार कैसे गया? उसके साथी अध्यापकों ने उसे धीरज बंधाया उसे कहा कि हमारे गुरुजी आए हैं उनसे चलकर पूछते हैं।नीलमणि ने गुरु नित्यानंद का काफी नाम सुना था इसलिए उसका भी उन पर विश्वास था।
  • नीलमणि अपने साथी अध्यापकों के साथ गुरु नित्यानन्दजी के पास गया और सारा वृत्तांत कह सुनाया।तब गुरु नित्यानन्द जी बोले कि विद्यार्थियों में इतनी समझ नहीं होती है।यदि वे बुद्धिमान होते तो आपके रटाए हुए सवालों को समझ लेते।सवालों को तथा ऊँची-ऊँची बातों को रट लेने से काम नहीं चलता है।ज्ञान वही सार्थक होता है जो आचरण और अनुभूति का विषय बन जाए।जो विद्यार्थी और लोग धर्मग्रन्थों,महापुरुषों के वचनों को रट लेते हैं परंतु आचरण में नहीं उतारते उनकी गति तुम्हारे विद्यार्थियों की तरह ही होती है।यदि जीवन में कुछ नया करना है तो कठिन परिश्रम करना सीखो और ज्ञान को आचरण में उतारो।गणित रटने का नहीं बल्कि समझकर अभ्यास करने का विषय है,चिन्तन-मनन करने का विषय है।
  • उपर्युक्त आर्टिकल में गणित का अध्ययन करना तप और साधना है (Studying Maths is Penance and Devotion),विद्यार्थी जीवन में तप और साधना आवश्यक (Penance and Spiritual Practice are Essential in Student Life) के बारे में बताया गया है।

Also Read This Article:5 Best Tips to Achieve Success in Exam

6.गणित विद्यार्थी और गधा (हास्य-व्यंग्य) (Math Student and Donkey) (Humour-Satire):

  • गणित शिक्षक (छात्रा से):गणित के विद्यार्थी और गधे में क्या अन्तर है?
  • छात्रा:यही कि गणित के विद्यार्थी को गधा कहा जा सकता है परन्तु गधे को गणित का विद्यार्थी नहीं कहा जा सकता है।
    गणित शिक्षक (छात्रा से):और दोनों में समानता क्या है?
  • छात्रा:गणित का विद्यार्थी अत्यन्त थक जाने पर भी आराम नहीं करता है,गणित के सवालों को हल करने में लगा रहता है।गधा भी अत्यन्त थक जाने पर अपना काम करता है,आराम नहीं करता है।

7.गणित का अध्ययन करना तप और साधना है (Studying Maths is Penance and Devotion),विद्यार्थी जीवन में तप और साधना आवश्यक (Penance and Spiritual Practice are Essential in Student Life) से सम्बन्धित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:

प्रश्न:1.तप और साधना में समय का क्या महत्व है? (What is the Importance of Time in Penance and Spiritual Practice?):

उत्तर:जो विद्यार्थी तप और साधना करते हैं वे समय के एक-एक क्षण का सदुपयोग करते हैं।कुछ लोग इसे कोरी सीख मान सकते हैं और उसके विरोध में तर्क भी दे सकते हैं पर जो लोग समय का सदुपयोग करके शिखर पर पहुंचे हैं वे सामान्य व्यक्ति ही थे।संयुक्त राज्य अमेरिका के प्रसिद्ध गणितज्ञ चार्ल्स फास्ट को गणित की एबीसी तक मालूम नहीं थी किंतु प्रतिदिन एक घंटा अभ्यास करके गणित के महान विद्वान बन गए।

प्रश्न:2.क्या आज के समय में तप और साधना करना संभव है? (Is it Possible to do Penance and Spiritual Practice in Today’s Time?):

उत्तर:छात्र छात्राओं को अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते समय अनावश्यक प्रतिस्पर्धा तथा बुराइयों से बिल्कुल हटकर चलना चाहिए।आपको समर्पण,एकाग्रता,संयम-नियम,नैतिकता तथा समस्त मानवीय मूल्यों को धारण करते हुए अध्ययन करना चाहिए।ये सभी बातें आधुनिक युग में मूर्खता समझी जाती है।लेकिन जो लोग ऐसा समझते हैं उनकी परवाह न करते हुए मूल्यों को आप धारण करते हैं तो मानसिक सुख-शांति,सुकून तो मिलेगा ही साथ ही अपने लक्ष्य को प्राप्त करने में भी सफल होंगे।जीवन में राग-द्वेष,तनाव से परे यह सुकून व्यक्ति को लक्ष्य के प्रति एकाग्रचित्त बनाए रखता है।इसलिए आपको आगे बढ़ना है तो लोगों की टीका-टिप्पणियों पर ध्यान न दें।

प्रश्न:3.व्यक्ति की श्रेष्ठता का मापदंड क्या है? (What is the Measure of superiority of a Person?):

उत्तर:यदि आपको श्रेष्ठ बनना है,आगे बढ़ना है तो सफलता व असफलता मिलने पर फूलकर कुप्पा न हो जाएं और अपने कर्तव्यों को न भूले।चाटुकारों को अपने पास न फटकने दें।व्यक्ति अपने कुल,खानदान,मां-बाप व जन्म के कारण श्रेष्ठ और महान नहीं बनता है।परिवार,समाज व देश में व्यक्ति की पहचान श्रेष्ठ कर्मों और सद्गुणों से ही होती है।

  • उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर द्वारा गणित का अध्ययन करना तप और साधना है (Studying Maths is Penance and Devotion),विद्यार्थी जीवन में तप और साधना आवश्यक (Penance and Spiritual Practice are Essential in Student Life) के बारे में ओर अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

Studying Maths is Penance and Devotion

गणित का अध्ययन करना तप और साधना है
(Studying Maths is Penance and Devotion)

Studying Maths is Penance and Devotion

गणित का अध्ययन करना तप और साधना है (Studying Maths is Penance and Devotion)
यह वाक्य पढ़कर छात्र-छात्राओं को कुछ अजीब सा लगेगा या लग सकता है।
क्योंकि आज की दुनिया में युवावर्ग को ऐसी बातें बासी, ऊबाऊ,बोझिल और उपदेशात्मक लगती है।

No. Social Media Url
1. Facebook click here
2. you tube click here
3. Instagram click here
4. Linkedin click here
5. Facebook Page click here
6. Twitter click here

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *