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5 Best Tips to Achieve Success in Exam

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1.परीक्षा में सफलता अर्जित करने की 5 बेहतरीन टिप्स (5 Best Tips to Achieve Success in Exam),परीक्षा में सफलता हासिल करने की 5 स्मार्ट टिप्स (5 Smart Tips to Achieve Success in Exams):

  • परीक्षा में सफलता अर्जित करने की 5 बेहतरीन टिप्स (5 Best Tips to Achieve Success in Exam) के बारे में शैक्षिक तथा प्रतियोगिता परीक्षा में भाग लेने वाले छात्र-छात्राएं जानना चाहते हैं। विभिन्न प्रतियोगिता परीक्षाओं तथा शैक्षिक परीक्षाओं के टॉपर्स की सफलता का रहस्य बताते हैं तो एक बात उन सभी ने बताई है कि सफलता के लिए कठिन परिश्रम करना बहुत आवश्यक है। इसका तात्पर्य यह नहीं है कि सफलता के लिए अन्य गुणों की आवश्यकता नहीं होती है,बिल्कुल आवश्यक है।कठिन परिश्रम का कोई विकल्प नहीं है।केवल कठिन परिश्रम के बल पर सफलता प्राप्त करना बहुत मुश्किल है।हम विभिन्न आर्टिकल्स में सफलता के लिए काॅमन गुणों तथा विशिष्ट गुणों की चर्चा करते रहते हैं।किसी एक ही आर्टिकल में सभी गुणों को बताना संभव नहीं है क्योंकि आर्टिकल बहुत लंबा हो जाता है।इसलिए अलग-अलग आर्टिकल में अलग-अलग गुणों को देखकर छात्र-छात्राओं को भ्रमित नहीं होना चाहिए।न ही सभी गुणों पर एक साथ अमल करना चाहिए। अपनी योग्यता,क्षमता तथा प्रतिभा को पहचानते हुए कुछ गुणों को अथवा एक-एक गुण को अपनाते हुए उसमें प्रवीणता प्राप्त करें।
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2.परीक्षा में सफलता के लिए कठिन परिश्रम अपरिहार्य (Hard work is Indispensable to Achieve Success in Exams):

  • महाभारत में पुरुषार्थहीन तथा अकर्मण्य व्यक्ति की भर्त्सना की है।महाभारत में कहा गया है कि अकर्मण्य व्यक्ति और कंजूस व्यक्ति को उसके गले में पत्थर बांधकर जल में डूबा देना चाहिए।
  • परीक्षा में ही नहीं बल्कि जीवन में कोई जाॅब,उद्योग,कार्य किया जाए सभी में कठिन परिश्रम करने की आवश्यकता है।बिना परिश्रम किए कोई भी कार्य नहीं किया जा सकता है और न ही परीक्षा में सफलता अर्जित की जा सकती है।
  • जैसे यदि आप भोजन करना चाहे तो मुंह से रोटी-रोटी का उच्चारण करने से मुंह में रोटी नहीं जाएगी।रोटी या भोजन करने के लिए आपको हाथों से तथा मुँह से चबाने का पुरुषार्थ करना ही होगा।
  • कई विद्यार्थी पुस्तकों में गणित के सवाल को देखकर हल नहीं करते हैं।वे या तो शिक्षकों से सवालों के हल पूछते हैं अथवा अपने मित्रों,माता-पिता से पूछ लेते हैं।अथवा पासबुक में सवालों के हल देख लेते हैं।परंतु नोटबुक में सवालों को हल नहीं करते हैं।कोई थ्योरीटिकल विषय भौतिक विज्ञान,रसायन विज्ञान इत्यादि पढ़ते हैं तो उसके नोट्स नहीं बनाते हैं।केवल पुस्तकों से टाॅपिक को समझ लेते हैं।विद्यार्थियों तथा प्रतियोगिता परीक्षाओं के कैंडिडेट्स को यह समझ लेना चाहिए कि कठिन परिश्रम और पुरुषार्थ किए बिना अगर उनके भाग्यवश कोई सफलता मिल भी जाती है तो ऐसी सफलता बिना नमक की रोटी के समान है।ऐसी रोटी में स्वाद नहीं आता है।
  • पुरुषार्थ किए बिना,नकल करके अथवा अनैतिक तरीके अपनाकर सफलता अर्जित करने से आत्मिक संतोष,आत्मिक संतुष्टि नहीं मिल सकती है।
  • कोई भी छात्र कितना भी मेधावी,विषय अथवा गणित व अन्य विषयों के टाॅपिक को कितनी भी जल्दी समझ लेता हो परंतु यदि वह कठिन परिश्रम करके अध्ययन नहीं करता है,नोट्स नहीं बनाता है,स्वाध्याय नहीं करता है,पढ़े हुए का चिंतन-मनन नहीं करता है तो वह ज्ञान प्राप्त नहीं कर सकता है,न किसी विषय में पारंगत हो सकता है और नहीं अधिक समय तक उस ज्ञान को संचित रख सकता है।
  • विद्यार्थी तथा कैंडिडेट जितना अधिक कठिन परिश्रम करेगा उतना ही ज्ञान स्थायी होता जाएगा। मेधा समझकर पढ़ने और याद करने में कठिन परिश्रम की सहायक बन जाती है परंतु मेधा कठिन परिश्रम का विकल्प नहीं बन सकती है।

3.कठिन परिश्रम के दृष्टांत (Examples of Hard Work):

  • हम किसी भी टॉपर्स की दिनचर्या का अवलोकन करेंगे तो आप पाएंगे कि वह समय को बिल्कुल भी बर्बाद नहीं करते हैं।हमेशा अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कठिन परिश्रम करते रहते हैं,लक्ष्य को प्राप्त करने में जुटे रहते हैं।अपने अध्ययन को अप-टु-डेट करने के लिए वे हर समय अध्ययन करते रहते हैं।अध्ययन करने की तकनीक सीखते रहते हैं क्योंकि परीक्षा में कौनसा सवाल,प्रश्न आएगा इसका पता परीक्षा के पूर्व नहीं लगाया जा सकता है।कोई भी प्रश्न और सवाल आ सकता है। कठिन परिश्रम किए बिना अध्ययन करना संभव नहीं है और अध्ययन व स्वाध्याय के बिना प्रगति संभव नहीं है।प्रगति के बिना जीवन में सुख-सुविधाएं अर्जित नहीं की जा सकती है। अध्ययन तथा कठिन परिश्रम चुम्बक की भाँति  होते हैं जो अच्छी-अच्छी ज्ञानवर्धक,परीक्षा उपयोगी सामग्री को विद्यार्थी तथा कैंडिडेट के पास खींच लाते हैं क्योंकि वे अनवरत अध्ययन,कठिन परिश्रम,स्वाध्याय करते रहते हैं।
  • प्रतिभाशाली विद्यार्थी अध्ययन करके ही संतुष्ट नहीं हो जाते हैं बल्कि अध्ययन के फल व परिणाम को भी अपने अनुकूल प्राप्त करने की चेष्टा करते हैं। यदि किसी विद्यार्थी की प्रगति नहीं हो रही है या कोई उपलब्धि न हो तो वे सदैव दु:खी,निराश तथा विपन्न बन जाते हैं।ऐसी प्रतिभा किस काम की जिसमें उसे कुछ उपलब्धि अथवा प्राप्ति ही न हो।टाॅपर्स की प्रतिभा इसीलिए परिणामजनक होती है क्योंकि वे अपनी प्रतिभा का उपयोग करने के लिए कठिन परिश्रम करते हैं।
  • यदि किसी विद्यार्थी में प्रतिभा नहीं है तो भी कठिन परिश्रम,अनवरत अध्ययन,अभ्यास के बल पर प्रतिभाशाली विद्यार्थी बन सकता है।परंतु कठिन परिश्रम,अभ्यास के बिना प्रतिभाशाली विद्यार्थी न तो सफलता अर्जित कर सकता है,न विद्या ग्रहण कर सकता है।
  • दूसरा उदाहरण यह है कि स्वतंत्रता प्राप्ति के 75 वर्ष पूर्ण होने के बाद भी भारत विकसित देशों की श्रेणी में खड़ा नहीं हो पाया है।कारण यह है कि बालक,छात्र-छात्राएँ ही देश का भविष्य है परंतु वे इस तरह के कार्यों में संलग्न रहते हैं जो देश की लुटिया डुबोने वाले हैं।जैसे नवयुवक आतंकवादी बन जाते हैं और देश के खिलाफ षड्यंत्र रचते हैं।ये पढ़े-लिखे युवा हैं।इसी प्रकार छात्र-छात्राएं कठिन परिश्रम करके अध्ययन करने के बजाय हत्या,अपहरण,डकैती,बैंक डकैती,साइबर क्राइम,दुराचार,व्यभिचार,नशाखोरी,ड्रग्स का सेवन करने,हड़ताल,परीक्षाओं में नकल करना इत्यादि कार्यों में संलग्न रहते हैं।परिश्रम के प्रति निष्ठा न होने के कारण छात्र-छात्राओं को आलसी,अकर्मण्य बना दिया है।परिश्रम की उपेक्षा के कारण ही भारत बहुत से मामलों में दूसरों देशों पर आश्रित है।
  • कठिन परिश्रम का तीसरा उदाहरण है जर्मनी,जापान।द्वितीय विश्वयुद्ध में जर्मनी के टुकड़े कर दिए गए थे तथा जापान के हिरोशिमा व नागाशाकी शहरो को तहस नहस कर दिया था।इतनी विध्वंस लीला सहन करने के बावजूद जापान व जर्मनी के युवाओं ने गलत रास्ता नहीं अपनाया। वहां के युवाओं ने कठिन परिश्रम,अनवरत अध्ययन करके जर्मनी और जापान को विकसित देशों की श्रेणी में ला खड़ा कर दिया।जर्मनी व जापान के युवाओं में राष्ट्र भावना कूट-कूट कर भरी हुई है। जापान के उद्योगों में कर्मचारी हड़ताल भी करते हैं वे अधिक परिश्रम करके,काम के घंटे बढ़ाकर हड़ताल करते हैं।उनका हड़ताल करने का तरीका अनोखा है।भारत में हड़ताल करते हैं तो हमारे युवा अध्ययन कार्य को छोड़ देते हैं और लूटपाट,आगजनी,अन्य व्यक्तियों के कार्य में बाधा पहुंचाना,अन्य व्यक्तियों जैसे व्यापारियों की दुकानों को बन्द करवाना इत्यादि कार्यों में संलग्न रहते हैं।

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4.कठिन परिश्रम का विकल्प (The Choice of Hard Work):

  • कठिन परिश्रम (Hard Work) का विकल्प तो नहीं हो सकता है।हां यह अवश्य हो सकता है कि कठिन परिश्रम को चतुर (smart) तरीके से करें।कठिन परिश्रम को चतुर तरीके से करने से समय बचता है,समय का श्रेष्ठ उपयोग कर सकते हैं,अध्ययन की गुणवत्ता में सुधार कर सकते हैं।
  • जैसे कोई कैंडिडेट प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी कर रहा हो तो ऐसी अध्ययन सामग्री का अध्ययन नहीं करना चाहिए जो परीक्षा की दृष्टि से उपयोगी नहीं हो।जैसे गणितज्ञ आर्किमिडीज साइराक्यूज की सड़कों पर नग्न ही क्यों दौड़ पड़ते हैं?महान गणितज्ञ थेल्स गड्ढे में क्यों गिर गए थे? गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजम किस देवी की पूजा करते थे? गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह किस बीमारी से पीड़ित थे।इस प्रकार की विषयवस्तु ज्ञानवर्धन के लिए तो पढ़ी जा सकती है परंतु परीक्षा के दृष्टिकोण से इस प्रकार के प्रश्न नहीं पूछे जाते हैं।इसलिए परीक्षार्थी को इस तरह की विषय सामग्री नहीं पढ़नी चाहिए।इससे उसके समय और परिश्रम की बचत होती है।
  • कई बार परीक्षार्थी रोचक,मनोरंजक,लोमहर्षक घटनाओं को पढ़ने में सलंग्न हो जाते हैं।इससे उनका समय व्यतीत होता है जबकि परीक्षा के लिए समय की कमी होती है तथा ज्ञान का ओर-छोर नहीं है।अतः परीक्षार्थी को अपने विवेक से निर्णय लेना चाहिए कि कौनसी विषय सामग्री परीक्षापयोगी है और कौनसी सामग्री परीक्षापयोगी नहीं है।
  • कठिन परिश्रम का अर्थ है कि अध्ययन को परंपरागत तरीके से करना,अधिक से अधिक कार्य करना और प्रत्येक क्षण का उपयोग करना।परंतु स्मार्ट वर्क से तात्पर्य है कि अध्ययन की सही,नवीन और बेहतरीन तकनीक अपनाना जिससे समय और परिश्रम की बचत हो सके।छात्र-छात्राओं को कठिन परिश्रम,स्मार्ट सोच के साथ करना चाहिए जिससे अच्छा और बेहतरीन परिणाम प्राप्त किया जा सके।
  • केवल कठिन परिश्रम के बल पर अच्छा तथा बेहतरीन परिणाम प्राप्त नहीं किया जा सकता है। जैसे मजदूर,बेलदार,कुली,रिक्शावाला इत्यादि सुबह से रात तक,सर्दी-गर्मी में भी कठिन परिश्रम करते हैं परंतु उनके जीवन में कोई बदलाव नहीं होता है।कारण यही है कि वे चतुर सोच का प्रयोग नहीं करते हैं।विद्यार्थियों,परीक्षार्थियों को अध्ययन में चतुर सोच का प्रयोग करेंगे तो उसके बेहतरीन परिणाम प्राप्त कर सकेंगे।

5.कठिन परिश्रम पर प्रेरक विचार (Inspiring Thoughts on Hard Work):

  • (1.)परिश्रम हमारा देवता है।-विनोबा
  • (2.)बिना स्वयं परिश्रम किए देवों की मैत्री नहीं मिलती।-ऋग्वेद
  • (3.)बिना परिश्रम के उन्नति नहीं होती।-सोफोक्लीज
  • (4.)परिश्रम उज्जवल भविष्य का पिता है।
  • (5.)जीवन में शारीरिक और मानसिक परिश्रम के बिना कोई फल नहीं मिलता।दृढ़ चित्त और महान उद्देश्य वाला मनुष्य जो करना चाहे सो कर सकता है।-ऐरी शेफर
  • (6.) प्रतिभा महान कार्यों का प्रारंभ करती है किंतु परिश्रम ही उनको समाप्त करता है।-जीवरी
  • (7.)परिश्रम की निज की प्रतिष्ठा इतनी है कि उसने महात्मा को प्रतिष्ठा दी।-विनोबा
  • (8.)जो अपने हिस्से का काम किए बिना ही भोजन पाते हैं वह चोर हैं।-महात्मा गांधी
  • (9.)परिश्रम से भागने वाला किसी न किसी प्रकार की चोरी अवश्य करता है।यदि नहीं करता तो भविष्य में करेगा।
  • (10.)अध्ययन खंडन और असत्य सिद्ध करने के लिए न करो,न विश्वास करके मान लेने के लिए करो,
    न बातचीत और विवाद करने के लिए करो बल्कि मन और परिशीलन के लिए करो।
  • (11.)मनुष्य मात्र में बुद्धिगत ऐसा कोई दोष नहीं है जिसका प्रतिकार उचित अभ्यास के द्वारा न हो सकता हो।शारीरिक व्याधि दूर करने के लिए जैसे अनेक प्रकार के अध्ययन है।-बेकन
  • (12.)उद्यमेन हि सिध्यन्ति कार्याणि न मनोरथैः।
    न हि सुप्तस्य सिंहस्य प्रविशन्ति मुखे मृगाः।। (हितोपदेश)
  • अर्थात् उद्यम (कठिन परिश्रम) करने से ही कार्य सिद्ध होते हैं केवल मनोरथ (कामना) करने से नहीं। जैसे सोते हुए सिंह के मुख में मृग (हरिण) अपने आप प्रवेश नहीं करते हैं।
  • उपर्युक्त आर्टिकल में परीक्षा में सफलता अर्जित करने की 5 बेहतरीन टिप्स (5 Best Tips to Achieve Success in Exam),परीक्षा में सफलता हासिल करने की 5 स्मार्ट टिप्स (5 Smart Tips to Achieve Success in Exams) के बारे में बताया गया है।

6.गणित को पढ़ाने का तरीका (हास्य-व्यंग्य) (How to Teach Mathematics) (Humour-Satire):

  • पत्नी (गुस्से में होकर पति से बोली):आपका बेटा कभी भी गणित के सवाल हल नहीं करता है।न मुझे कभी गणित मैम कहकर पुकारता है।
  • पति:आज उसको घर आने दो।फिर मैं उसकी ऐसी पिटाई करूंगा कि वह क्या उसका बाप भी गणित के सवाल हल करेगा और गणित मैम कहकर पुकारेगा।

7.परीक्षा में सफलता अर्जित करने की 5 बेहतरीन टिप्स (5 Best Tips to Achieve Success in Exam),परीक्षा में सफलता हासिल करने की 5 स्मार्ट टिप्स (5 Smart Tips to Achieve Success in Exams) से संबंधित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:

प्रश्न:1.क्या परीक्षा में सफलता के लिए कठिन परिश्रम पर्याप्त है? (Is Hard Work Enough to Earn Success in Exams?):

उत्तर:नहीं,कठिन परिश्रम लक्ष्य केंद्रित होना चाहिए तथा परीक्षा की सही रणनीति बनाना और उसका पालन करना भी आवश्यक है।कठिन परिश्रम के अलावा स्मार्ट वर्क, स्मार्ट थिंकिंग,योजनाबद्ध,नियमित व निरंतर अध्ययन,निष्ठापूर्वक तैयारी,स्मरण शक्ति,एकाग्रता पूर्वक अध्ययन,इंद्रियों तथा मन को वश में रखना जैसे कई फैक्टर्स का योगदान होता है।

प्रश्न:2.परीक्षा में असफलता का क्या कारण है? (What is the Reason for Failure in the Exam?):

उत्तर:असफलता के कई कारण होते हैं।परीक्षा की रणनीति बनाने के बाद उसका क्रियान्वयन न करना,अध्ययन करने की ढुलमुल नीति,परीक्षा में सफलता के लिए सशंकित रहना अर्थात् आत्मविश्वास की कमी,अध्ययन कार्य को ठीक समय पर पूर्ण न करना,संकल्प शक्ति का अभाव। जिनके अंदर दृढ़ संकल्प शक्ति होती है,जो किसी कार्य को करने की ठान लेते हैं वे बिना किसी योजना के भी सफलता अर्जित कर लेते हैं।अध्ययन योजना के क्रियान्वयन में सबसे बड़ी बाधा आलस्य,बहानेबाजी,अनुशासित दिनचर्या का न होना इत्यादि कारणों से योजना कागजी ही रह जाती है।

प्रश्न:3.किताबी ज्ञान और व्यावहारिक ज्ञान में क्या अंतर है? (What is the Difference Between Bookish Knowledge and Practical Knowledge?):

उत्तर:किताबी ज्ञान को जब व्यावहारिक रूप में करते हैं तब व्यावहारिक ज्ञान हो जाता है।जैसे शैक्षिक डिग्रियां हासिल करना किताबी ज्ञान है,योगासन-प्राणायाम को किताबों में पढ़ लेना किताबी ज्ञान है।परंतु जब प्रैक्टिकली हम योगासन-प्राणायाम करते हैं तो वह व्यावहारिक ज्ञान है।किताबी ज्ञान से व्यावहारिक ज्ञान का अधिक महत्त्व है।

  • उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर द्वारा परीक्षा में सफलता अर्जित करने की 5 बेहतरीन टिप्स (5 Best Tips to Achieve Success in Exam),परीक्षा में सफलता हासिल करने की 5 स्मार्ट टिप्स (5 Smart Tips to Achieve Success in Exams) के बारे में ओर अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

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परीक्षा में सफलता अर्जित करने की 5 बेहतरीन टिप्स (5 Best Tips to Achieve Success in Exam)
के बारे में शैक्षिक तथा प्रतियोगिता परीक्षा में भाग लेने
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