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What is freedom and discipline in hindi

1.स्वतंत्रता और अनुशासन क्या है का परिचय (Introduction to What is freedom and discipline in hindi), स्वतंत्रता और अनुशासन क्या है? (What is liberty and discipline?):

  • हिंदी में स्वतंत्रता और अनुशासन क्या है? (What is freedom and discipline in hindi), स्वतंत्रता और अनुशासन क्या है? (what is liberty and discipline?):मृदु अथवा कठोर अनुशासन बुरे कर्मों को दूर करने वाला होता है।बुद्धिमान मनुष्य उसे हितकर मानता है परन्तु असाधु मनुष्य के लिए वही द्वेष का कारण होता है।भयमुक्त बुद्धिमान मनुष्य कठोर अनुशासन को भी हितकर मानते हैं परन्तु मूर्खों के लिए वही द्वेष का कारण बन जाता है।

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  • पाश्चात्य संस्कृति और भारतीय संस्कृति में अनुशासन का फर्क है।अंग्रेजी में अनुशासन ‘डिसिप्लिन (Discipline)’ का पर्याय माना जाता है है जो कि उचित नहीं है।भारतीय शास्त्रों में श्रेष्ठ लोगों,सज्जनों,सन्तों,ऋषियों के आदेशों,उपदेशों,वचनों का पालन करना अनुशासन है।
  • भारतीय परम्परा यही रही है कि आप्तजन,गुरुजन,ज्ञानीजन तथा अनुभवी वृद्धजन जो हितकर बातें बताएं उनके अनुसार लोग आचरण करें।प्रत्येक मनुष्य में इतना विवेक नहीं होता है कि वह भले-बुरे को पहचान सके,इसलिए उसे मार्गदर्शन की आवश्यकता होती है।यह मार्गदर्शन उसे सज्जनों,सन्तों,गुरुजनों से प्राप्त होता है।परन्तु इसके लिए मनुष्य में श्रद्धा और विश्वास होना चाहिए।इन्हीं की कमी से आज समाज पतन की ओर जा रहा है।हरेक मनुष्य तर्क करता है और अपने को बुद्धिमान समझता है।प्राचीनकाल के शास्त्रकारों को मूर्ख कहता है।यदि कोई उसे सदुपदेश दे तो बुरा मानता है।
  • आज मनुष्य जाति को ऐसे ही अनुशासन की आवश्यकता है जो स्वयं-स्फूर्त हो और जिसे अन्तरात्मा स्वीकार करती हो बशर्ते की अन्तरात्मा शुद्ध और पवित्र हो,कलुषित न हो गई हो।
  • via https://youtu.be/7-ziGEyPXJI

2.स्वतंत्रता और अनुशासन क्या है? (What is freedom and discipline in hindi), स्वतंत्रता और अनुशासन क्या है? (What is liberty and discipline?):

  • विद्यार्थियों को विचार अध्ययन तथा निरीक्षण करने की स्वतंत्रता हो तो उनका उचित बौद्धिक विकास हो सकता है।उसे खेलकूद,शारीरिक विकास की स्वतंत्रता होनी चाहिए।
  • अनुशासन में व्यवहार,आत्म-संयम,उत्तरदायित्व,दूसरों के अधिकारों की रक्षा करना आदि सम्मिलित है।
  • बोर्ड ऑफ एजुकेशन के अनुसारःअनुशासन वह साधन है जिसके द्वारा बच्चों को व्यवस्था,आचरण और उनमें निहित सर्वोत्तम गुणों की आदत को प्राप्त करने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है।
  • स्वतंत्रता तथा अनुशासन में वही संबंध है जो आत्मा और शरीर में संबंध है।सच्चा अनुशासन वही है जो स्वतंत्रता पर आधारित हो।स्वतंत्रतापूर्वक ग्रहण किया हुआ अनुशासन ही स्थायी होता है।
  • व्हाइटैड के अनुसार “आदर्श सुनियोजित शिक्षा का उद्देश्य यह होना चाहिए कि अनुशासन स्वेच्छापूर्वक और स्वतंत्र रूप से हो और स्वतंत्रता,अनुशासन रखने में अधिक सहायक है।दोनों सिद्धांत स्वतंत्रता और अनुशासन एक दूसरे के विरोधी नहीं है वरन इन दोनों का बालक के जीवन में ऐसा अनुकूलन होना चाहिए कि वे बालक के व्यक्तित्व के विकास में इधर-उधर होने वाली स्वाभाविक प्रवृत्तियों के अनुसार हो।
  • तात्पर्य यह है कि बालक को अपने विकास के लिए नियंत्रित स्वतंत्रता मिलनी चाहिए क्योंकि पूर्ण रूप से स्वतंत्रता दिए जाने पर बालक स्वतंत्रता का दुरुपयोग करने लगता है।अध्यापक का चरित्र भी उत्तम होना चाहिए जिससे बालक विनम्र और चरित्रवान बन सकता है।
  • यदि बालक को पूर्ण स्वतन्त्रता दी जाए तो कुछ बालक उसका दुरुपयोग करने लगते हैं।जैसे यदि कोई बालक या मनुष्य यह कहकर कि मुझे पूर्ण स्वतंत्रता है इसलिए मैं सड़क के बीच में चलूंगा।या यह कहे कि मुझे पूर्ण स्वतन्त्रता है कि मैं नहीं पढूँगा।इस प्रकार की स्वतंत्रता वास्तविक रूप में स्वतंत्रता नहीं है जिसमें कोई नियम या अनुशासन न हो तथा हमें प्रगतिशील और विकास करने में मदद न करती हो।इस प्रकार मनमर्जी के अनुसार करना,जो मन में आए वही करना,कोई रोक-टोक न होना स्वतंत्रता नहीं बल्कि स्वच्छन्दता है।
  • यदि बालकों को अपनी उन्नति व विकास करना है तो हमें कुछ नियमों व अनुशासन का अनुकरण करना होगा जो हमारी उन्नति व विकास में बाधक न हो बल्कि सहायक हो।यदि जीवन में कोई नियम व अनुशासन नहीं होगा तो बिना ब्रेक की गाड़ी का जो हाल होगा अर्थात् बिना ब्रेक के गाड़ी कहीं न कहीं टकराएगी तथा स्वयं का तो नुकसान होगा ही और दूसरों का भी नुकसान होगा,वही हाल हमारा होगा।इसलिए जीवन में नियम व अनुशासन जो हमारे जीवन के निर्माण में सहायक हो,होना आवश्यक है।
  • बहुत अधिक नियम व अनुशासन भी हमारी प्रगति में अवरोधक बन जाते हैं इसलिए नियम और अनुशासन के मामले में मध्यम मार्ग अपनाना चाहिए।यदि नियम और अनुशासन न हो तो राज्य का शासन,समाज के नीति नियम तथा पारिवारिक कर्त्तव्यों व नियम,मर्यादाएँ सब चौपट हो जाएंगी,कोई किसी को कुछ नहीं समझेगा।ये नियम और अनुशासन ही है जिनकी वजह से शासन-प्रशासन,समाज व परिवार की व्यवस्था बनी रहती है।वे नियम-अनुशासन चाहे नैतिक हो,कानूनी हो,धार्मिक हो,राजनीतिक हो।
  • उपर्युक्त आर्टिकल में स्वतंत्रता और अनुशासन क्या है? (What is freedom and discipline in hindi), स्वतंत्रता और अनुशासन क्या है? (What is liberty and discipline?) के बारे में बताया गया है।
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