Menu

Importance of Mass Media in Teaching Mathematics

Importance of Mass Media in Teaching Mathematics

गणित शिक्षण में संचार माध्यम (Importance of Mass Media in Teaching Mathematics 

Importance of Mass Media in Teaching Mathematics

Importance of Mass Media in Teaching Mathematics 

गणित शिक्षण में रेडियो, टीवी और कम्प्यूटर महत्त्वपूर्ण संचार साधन हैं। इनका टार्गेट ग्रुप (Target Group), संख्या और वितरण क्षेत्र (Distribution area) बड़ा होने के कारण ये साधन जनसंचार माध्यम कहलाते हैं।

1.रेडियो(Radio) –

 रेडियो को सुनकर शिक्षक और विद्यार्थी गणित विषय की नवीनतम जानकारी एवं खोजों से परिचित हो सकता है। आकाशवाणी तथा बी.बी.सी. से प्रसारित होने वाले कार्यक्रमों जैसे गणित का इतिहास, गणितज्ञों की जीवनियां, उनका योगदान, गणित सम्बन्धी व्यवसायों का विवरण, गणित में कैरियर (carrier),गणित से सम्बंधित नियोजन सूचनाएं (Employment Information), गणित की उपयोगिता, गणित सम्बन्धी पहेलियां, गणित सम्बन्धी प्रश्नोत्तरी, अन्त्याक्षरी आदि का ज्ञान प्राप्त किया जा सकता है। अध्यापक व विद्यार्थी अपनी रुचि तथा आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए कार्यक्रमों का चयन कर सकता है। रेडियो का महत्त्व होते हुए भी हमारे देश में इसका बहुत कम उपयोग किया जा रहा है या यों कहे कि न के बराबर उपयोग किया जा रहा है तो अतिश्योक्ति नहीं होगी।
लाभ-(1.)भाषण और संगीत को रिकाॅर्ड करना, उन्हें दोहराना, आवश्यकतानुसार शैक्षिक क्रम में प्रस्तुत करना।
(2.)महानतम गणितज्ञों को भी सामान्य विद्यार्थी सुनकर प्रेरणा प्राप्त कर सकता है।
(3.)रेडियो के माध्यम से नेशनल व इंटरनेशनल अनुसंधानों की नवीनतम जानकारी प्राप्त कर सकता है।

2.टेलीविजन (Television)

टीवी में भी रेडियो की तरह कार्यक्रमों का प्रसारण किया जाता है परन्तु इसकी विशेषता यह है कि टीवी पर श्रव्य और दृश्य दोनों ही प्रकार के अनुभव उपलब्ध होते हैं। इसलिए रेडियो कार्यक्रमों की अपेक्षा टीवी पर कार्यक्रम अधिक रुचि से देखे जाते हैं इसलिए ये कार्यक्रम अधिक प्रभावी और आकर्षक होते हैं। आजकल अनेक टीवी चैनल के माध्यम से विद्यार्थी अपने ज्ञान में वृद्धि कर सकता है।
टेलीविजन से लाभ –
(1.)इसके प्रयोग से देश दुनिया की नवीनतम जानकारी तत्काल प्रभाव से मिल जाती है।
(2.)यह हर घर में मौजूद है इसलिए इसके लिए अलग से धन खर्च करने की जरूरत नहीं है।
(3.)इसके माध्यम से हमारी दो इन्द्रियां सक्रिय रहती है अर्थात् हम देख भी सकते है और सुन भी सकते हैं इसलिए हमारी स्मरण शक्ति में जानकारी अधिक स्थायी रूप से रहती है।
(4.)यदि कोई जानकारी अधिक महत्वपूर्ण है तो उसको हम रिकाॅर्ड करके रख सकते हैं और जब चाहे पुन: सुन सकते हैं।
(5.)इसके माध्यम से गणित में विश्व में कहीं भी कोई नई खोज हुई है तो तत्काल पता चल जाता है।
(6.)टेलीविजन के माध्यम से विश्व की अत्यधिक दूरी भी नजदीक हो जाती है।
(7.)इससे हमारे समय और श्रम की बचत हो जाती है।

3.गणित शिक्षण में कम्प्यूटर की भूमिका (Role of Computer in Mathematics Teaching)

(1.)शिक्षक (Tutor) – 

यह व्यक्तिगत शिक्षक की तरह हमारे पास मौजूद रहता है और जब चाहे तब इसकी सहायता से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। इसकी उपादेयता के कारण दिनोंदिन इसका उपयोग बढ़ता जा रहा है। अनुसन्धानों से यह स्पष्ट हो चुका है कम्प्यूटर बहुत प्रभावी(Effective) और दक्ष (Efficient) सिद्ध हुआ है।

Mass Media in Teaching Mathematics in hindi

Alexa Hui, a student at St. Thomas Aquinas High School in Fort Lauderdale

(2.)शिक्षार्थी (Tutee)

 कम्प्यूटर शिक्षार्थी को एक मित्र की तरह समस्या समाधान के रूप में और कौशलों को सीखने के अवसर उपलब्ध कराता है। शिक्षार्थी को अपनी बौद्धिक क्षमता और सृजनशीलता को विकसित करने के लिए कम्प्यूटर द्वारा चुनौतियां प्राप्त होती है।

(3.)उपकरण (Tool)

 शिक्षा संस्थानों में कम्प्यूटर की लोकप्रियता और उपादेयता के कारण मांग बढ़ती जा रही है। कम्प्यूटर का उपयोग सभी क्षेत्रों में बढ़ता जा रहा है। कम्प्यूटर की सहायता से आज हम घर बैठे ही शिक्षण प्राप्त कर सकते हैं और कोई भी समस्या का समाधान प्राप्त कर सकते हैं। इसमें लगे हुए साफ्टवेयर की सहायता से आवश्यक गणनाएं, रेखाचित्र, लेखाचित्र एंव निर्णयन भी कम्प्यूटर से प्राप्त कर सकते हैं।
दूरसंचार (Telecommunication) साधनों के उपयोग में माइक्रो कम्प्यूटर प्रौद्योगिकी का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इसकी सहायता से शिक्षक या शिक्षार्थी दुनिया के किसी भी कोने में माइक्रो कम्प्यूटर की सहायता से संवाद कर सकता है।

(4.)ट्यूटोरियल(Tutorial)-

गणित शिक्षक की भूमिका के लिए कम्प्यूटर में ऐसे साॅफ्टवेयर होने चाहिए जिनमें ऐसे प्रोग्राम होंं जो कि विद्यार्थी की जिज्ञासा के अनुरूप अनुदेशनात्मक स्थिति प्रस्तुत कर सकें। ऐसे साॅफ्टवेयर इंजीनियर तैयार कर रहे हैं लेकिन अभी बहुत कुछ करना शेष है। कई उच्चस्तरीय प्रोग्राम लैन्गुवेज (Higher level programmes language) विकसित किये जा रहे हैं। स्मार्ट सिस्टम ऐसा प्रोग्राम है जिसमें उपयोगकर्ता द्वारा प्रस्तुत अदा को स्वीकृत करने की क्षमता हो तथा यह उन नियमों और प्रक्रमों से तुलना करने में समर्थ हो जो कि पूर्ववर्ती अदाओं के द्वारा स्थापित किए गए हों।

(5.)समस्या समाधान (Problem solving)

 ऐसे प्रोग्राम समस्या और समाधान पर मूल्यांकन एवं प्रतिपुष्टि के साथ सम्मिलित होते हैं, सर्वथा लोकप्रिय और आसान है। इस प्रकार के साॅफ्टवेयर पर्याप्त तैयार हो रहे हैं। गणित के सभी विषयों में इन प्रोग्रामों की पर्याप्त उपयोगिता है।
(6.)निर्देशात्मक सहायता (Instructional Support) – कक्षा अनुदेशन को कम्प्यूटर के उपयोग से सहायता उपलब्ध होती है। कक्षा में विद्यार्थियों का वैयक्तिक मार्गदर्शन प्राप्त नहीं किया जा सकता है। कक्षा शिक्षण हर विद्यार्थी की जिज्ञासा को सन्तुष्ट नहीं कर सकता है।अनुदेशन में मूल्यांकन एवं प्रतिपुष्टि (Feedback) सम्भव नहीं है। साॅफ्टवेयर प्रोग्रामों में कक्षानुदेशन की इन कमियों को दूर किया जा सकता है।

(7.)सामग्री उत्पादन (Material Production) – 

वर्ड प्रोसेसर और लेजर किरणों की सहायता से शिक्षक कम्प्यूटर की सहायता से गणित एवं विज्ञान की विषय सम्बन्धी डाक्यूमेण्ट प्रस्तुत कर सकते हैं। गणित इनको बिना अपना तथा कक्षा का समय नष्ट किए हुए अधिक प्रभावी और आकर्षक ढंग से कक्षा में प्रस्तुत कर सकता है। निष्कर्ष :गणित शिक्षण के हर स्तर पर साधन सामग्रियों का उपयोग प्रारम्भ से ही हो रहा है। रेडियो, टेलीविजन ने जहाँ शिक्षा में संचार व्यवस्था के महत्त्व को दृढ़ता के साथ प्रस्तुत किया वहीं कम्प्यूटर सूचना प्रौद्योगिकी के द्वारा शिक्षा के सकल क्षेत्र में नई क्रांति लाया। यदि हम अवलोकन करें तो पाएंगे कि सन् 1980-90 का दशक शिक्षा में संचार प्रोद्योगिकी का और सन् 1990-2000 का दशक सूचना प्रौद्योगिकी का रहा है। इन दोनों ही साधनों से शिक्षा को बहुआयामी लाभ मिप्रस्तुत अदा को स्वीकृत करने की क्षमता हो तथा यह उन नियमों और प्रक्रमों से तुलना करने में समर्थ हो जो कि पूर्ववर्ती अदाओं के द्वारा स्थापित किए गए हों।

(8.)समस्या समाधान (Problem solving) – 

ऐसे प्रोग्राम समस्या और समाधान पर मूल्यांकन एवं प्रतिपुष्टि के साथ सम्मिलित होते हैं, सर्वथा लोकप्रिय और आसान है। इस प्रकार के साॅफ्टवेयर पर्याप्त तैयार हो रहे हैं। गणित के सभी विषयों में इन प्रोग्रामों की पर्याप्त उपयोगिता है।

(9.)निर्देशात्मक सहायता (Instructional Support) – 

कक्षा अनुदेशन को कम्प्यूटर के उपयोग से सहायता उपलब्ध होती है। कक्षा में विद्यार्थियों का वैयक्तिक मार्गदर्शन प्राप्त नहीं किया जा सकता है। कक्षा शिक्षण हर विद्यार्थी की जिज्ञासा को सन्तुष्ट नहीं कर सकता है।अनुदेशन में मूल्यांकन एवं प्रतिपुष्टि (Feedback) सम्भव नहीं है। साॅफ्टवेयर प्रोग्रामों में कक्षानुदेशन की इन कमियों को दूर किया जा सकता है।

(10.)सामग्री उत्पादन (Material Production) – 

वर्ड प्रोसेसर और लेजर किरणों की सहायता से शिक्षक कम्प्यूटर की सहायता से गणित एवं विज्ञान की विषय सम्बन्धी डाक्यूमेण्ट प्रस्तुत कर सकते हैं। गणित इनको बिना अपना तथा कक्षा का समय नष्ट किए हुए अधिक प्रभावी और आकर्षक ढंग से कक्षा में प्रस्तुत कर सकता है। निष्कर्ष :गणित शिक्षण के हर स्तर पर साधन सामग्रियों का उपयोग प्रारम्भ से ही हो रहा है। रेडियो, टेलीविजन ने जहाँ शिक्षा में संचार व्यवस्था के महत्त्व को दृढ़ता के साथ प्रस्तुत किया वहीं कम्प्यूटर सूचना प्रौद्योगिकी के द्वारा शिक्षा के सकल क्षेत्र में नई क्रांति लाया। यदि हम अवलोकन करें तो पाएंगे कि सन् 1980-90 का दशक शिक्षा में संचार प्रोद्योगिकी का और सन् 1990-2000 का दशक सूचना प्रौद्योगिकी का रहा है। इन दोनों ही साधनों से शिक्षा को बहुआयामी लाभ मिले। आज हम देखते हैं कि शिक्षा ने नया स्वरूप ले लिया है। आज शिक्षा से औपचारिक, अनौपचारिक, निरौपचारिक जैसे शब्दों का विलोपन हो गया है। वर्तमान कल्प में समानांतर धाराएं परम्परागत (Traditional) और दूरस्थ (Distance) अविरल प्रवाहित हो रही है। दूरस्थ शिक्षा विभिन्न साधनों की शिक्षा में प्रयुक्ति के लिए प्रमुख रुप से उत्तरदायी है। हमने देखा कि इस व्यवस्था (system) के विकास ने शिक्षा में बहुसाधन – उपागम (Multi-media approach) को स्थापित किया। टेली कम्यूनिकेशन, टीवी, रेडियो, बिम्बन(Imaging), वीडियो-आॅडियो रिकॉर्डिंग, कम्प्यूटर नेटवर्क आदि की शिक्षा में क्रान्तिकारी भूमिकाएं रही हैं। समकालीन दशक (current decade) शिक्षा का दशक कहा जा सकता है इसको साधन अभिसरण (Media Convergence) का नाम देते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *