Menu

A Strong Foundation of Geometry

Contents hide

1.ज्यामिति की मजबूत आधारशिला (A Strong Foundation of Geometry),ज्यामिति की मजबूत आधारशिला का रहस्य (The Secret to Strong Foundation of Geometry):

  • ज्यामिति की मजबूत आधारशिला (A Strong Foundation of Geometry) का रहस्य है कि इसे तार्किक आधार प्रदान किया गया है।यह मजबूत आधार प्रदान किया था यूक्लिड ने।यूक्लिड ने प्लेटो (अफलांतून) की अकादमी में अध्ययन किया था।इस अकादमी के प्रवेश द्वार पर लिखा हुआ थाः”जो व्यक्ति ज्यामिति से अनभिज्ञ है,उसे इस विद्यालय में प्रवेश मना है।”इस विद्यालय में यूनान के बड़े-बड़े वैज्ञानिकों तथा गणितज्ञों ने अध्ययन किया था।यूनानी ज्यामिति के विकास में इस विद्यालय ने महत्त्वपूर्ण योगदान दिया था।हालांकि इस अकादमी के संस्थापक प्लेटो स्वयं बहुत बड़े गणितज्ञ नहीं थे परंतु प्लेटो को हमें ‘गणितज्ञों का निर्माता’ तो मानना ही होगा।प्रख्यात गणितज्ञ यूक्लिड,यूदोक्सु,आर्किटस इत्यादि इसी अकादमी में पढ़े थे।
  • आपको यह जानकारी रोचक व ज्ञानवर्धक लगे तो अपने मित्रों के साथ इस गणित के आर्टिकल को शेयर करें।यदि आप इस वेबसाइट पर पहली बार आए हैं तो वेबसाइट को फॉलो करें और ईमेल सब्सक्रिप्शन को भी फॉलो करें।जिससे नए आर्टिकल का नोटिफिकेशन आपको मिल सके । यदि आर्टिकल पसन्द आए तो अपने मित्रों के साथ शेयर और लाईक करें जिससे वे भी लाभ उठाए । आपकी कोई समस्या हो या कोई सुझाव देना चाहते हैं तो कमेंट करके बताएं।इस आर्टिकल को पूरा पढ़ें।

Also Read This Article:Basic Concepts of Geometry Class 9

2.प्लेटो की एक अकादमी (Academy of Plato):

  • प्लेटो की ‘अकादमी’ एक विशेष प्रकार की शिक्षा का केंद्र थी।विद्यार्थी का अर्थ आजकल के विद्यार्थियों जैसा नहीं था।आज स्कूल के नियमों का पालन करना पड़ता है,रोज हाजरी लगानी पड़ती है,अनेक भौतिक विषय पढ़ने पड़ते हैं।इसके बावजूद चारित्रिक शिक्षा बिल्कुल नहीं दी जाती है।हमारी वर्तमान शिक्षा का सबसे बड़ा दोष है कि सालभर पढ़े हुए एक-एक विषय की परीक्षा केवल तीन घण्टों में देनी पड़ती है।
  • परंतु प्लेटो की अकादमी में आज जैसी व्यवस्था नहीं थी।दूर-दूर से विद्यार्थी प्लेटो की अकादमी में पढ़ने आते थे।अकादमी में न तो कोई परीक्षा होती थी और न किसी प्रकार का सर्टिफिकेट दिया जाता था।इस बात की भी कोई गारंटी नहीं थी कि प्लेटो की अकादमी में शिक्षा प्राप्त करने के बाद कोई बड़ी सरकारी नौकरी मिल जाएगी।वस्तुतः विद्यार्थी अकादमी में इसलिए आते थे कि उन्हें असली ज्ञान प्राप्त हो।
  • जहां तक स्वयं प्लेटो की बात है,वह गणित शिक्षा पर अधिक जोर देते थे।उन्होंने तो यहां तक कहा था कि राजनीति की शिक्षा के लिए भी गणित परमावश्यक है और इसके लिए ऐसा कानून बनना चाहिए कि राजकीय व्यक्ति गणितशास्त्र का अध्ययन अवश्य करें।आजकल के शासकों को यदि यह बात कही जाए तो पता नहीं क्या सोचेंगे?
  • गणित दो प्रकार का होता हैःविशुद्ध गणित (Pure Mathematics) और उपयोगी गणित (Applied Mathematics)।प्लेटो की शिक्षाओं में विशुद्ध गणित को ही अधिक महत्त्व दिया जाता था।सच तो यह है कि यूनानी गणितज्ञ विशुद्ध गणित के अध्ययन की ओर ही ज्यादा झुके हुए थे।प्लेटो ने यहाँ तक कहा था कि भगवान हमेशा ज्यामिति में मग्न रहता है अर्थात् भगवान एक महान गणितज्ञ है।
  • प्लेटो एक महान दार्शनिक के रूप में प्रसिद्ध है।परंतु उन्हें हमें एक महान गणितज्ञ-दार्शनिक ही मानना चाहिए।प्लेटो ने स्वयं किसी गणितीय सिद्धांत की खोज शायद नहीं की।पंरतु यूनानी गणित को उन्होंने एक मजबूत नींव पर खड़ा करके गणितशास्त्र को एक नई दिशा दी।
  • गणित क्या है? गणित तर्कशास्त्र है।संपूर्ण गणित तार्किक सूत्रों से बंधा हुआ है।प्लेटो ने गणित को तर्क का जामा पहनाकर यूनानी गणित को एक निश्चित परंपरा की ओर आगे बढ़ाया।यूक्लिड इसी परंपरा में पैदा हुए थे।यूक्लिड पर प्लेटो की शिक्षाओं का कितना अधिक प्रभाव पड़ा यह भी चर्चा का विषय है।
  • प्लेटो स्वयं बहुत बड़े गणितज्ञ नहीं थे परंतु पाश्चात्य जगत के प्राचीन गणित पर उनके दार्शनिक विचारों का बहुत गहरा प्रभाव पड़ा है।प्रोक्लुस ने यूक्लिड की ज्यामिति की प्रथम पुस्तक पर एक टीका लिखी थी।उस टीका में उन्होंने लिखा हैः
    “प्लेटो ने गणित विशेषतः ज्यामिति की उन्नति में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है।उनकी पुस्तकों में दार्शनिक विचारों के साथ-साथ गणित के उदाहरणों की भरमार मिलती है।”
  • यूक्लिड की प्रारंभिक शिक्षा प्लेटो की इसी अकादमी में हुई थी।

3.ज्यामिति की आधारशिला (The Foundation of Geometry):

  • प्राचीन यूनान के सबसे प्रसिद्ध तीन व्यक्ति हैंःसुकरात (socrates),अफलांतून (Plato) और अरस्तू (Aristotle)।अफलांतून (प्लेटो) सुकरात के शिष्य थे और अरस्तू अफलांतून के शिष्य।अरिस्टोटल अर्थात् अरस्तू का जन्म यूनान के स्तागिरा नगर में 384 ईस्वी पूर्व में हुआ था।अरस्तू के पिता मकदूनिया के राजा के मित्र तथा चिकित्सक थे।अरस्तू का बचपन भी मकदूनिया में बीता।बड़े होने पर अरस्तू प्लेटो की अकादमी में अध्ययन करने एथेन्स गए।यहां उन्होंने 20 वर्ष तक अध्ययन किया।
  • अलेक्जेंडर (सिकंदर) (Alexander) जिसने नील नदी के मुहाने पर अलेक्जेंड्रिया नगर की स्थापना की थी।अलेक्जेंडर के पिता का नाम था फिलिप।राजा फिलिप ने अरस्तू को तरुण अलेक्जेंडर का शिक्षक नियुक्त किया था।अलेक्जेंडर कितना भाग्यशाली था कि उसे अरस्तू जैसा विद्वान गुरु मिला था।
  • अरस्तू बहुमुखी प्रतिभा के व्यक्ति थे।वह एक महान दार्शनिक के रूप में प्रसिद्ध हैं।वह एक भौतिकवेत्ता,खगोलवेत्ता,चिकित्सक,जीववेत्ता,तर्कशास्त्री तथा गणितज्ञ थे।प्लेटो की अकादमी की तरह अरस्तू ने भी एथेन्स नगर में एक नए विद्यालय की स्थापना की।अरस्तू का यह विद्यालय लाइसियम के नाम से प्रसिद्ध था।
  • प्रारंभिक ज्यामिति की किसी भी पुस्तक में हम देखते हैं कि यह परिभाषाओं (डेफिनिशंज) से शुरू होती है।जैसेः
    (1.)बिंदु वह है जिसका न कोई अंश होता है और न परिमाण।
    (2.)चौड़ाई रहित लंबाई को रेखा कहते हैं।
    (3.)रेखा के सिरे बिंदु होते हैं इत्यादि।
  • उपर्युक्त कथनों में बिंदु,रेखा आदि के बारे में कुछ ठोस बातें कही गई हैं।बिंदु,रेखा आदि ऐसी धारणाएं हैं जिनसे समस्त ज्यामिति की रचना होती है।
  • अब मान लो कि ज्यामिति या कोई भी अन्य विज्ञान एक विशाल भवन है।भवन के निर्माण में प्रमुख बात है भवन की नींव।नींव मजबूत हो तो भवन अधिक दिनों तक कायम रहेगा।नींव के साथ-साथ हमें उन वस्तुओं पर विचार करना पड़ेगा जिनसे भवन का निर्माण होता है।
  • आजकल भवन के निर्माण में जिन चीजों की आवश्यकता होती है,उनमें प्रमुख हैं सीमेन्ट,लोहा,ईंटें या पत्थर,बालू आदि।यह सामग्री विभिन्न स्थानों से तैयार होकर आती है।भवन बनाने के लिए जिन सैकड़ों लोगों से काम लिया जाता है,वे अधिकतर साधारण मजदूर होते हैं।उनका काम होता है,बताया गया काम करना।आजकल बड़े-बड़े भवनों का निर्माण होता है और वहां पर जो सैकड़ों मजदूर काम करते हैं वे उस भवन की योजना नहीं बना सकते।भवन की योजना बनानेवाला व्यक्ति दूसरा व्यक्ति ही होता है।
  • ज्यामिति एक बहुत बड़ा भवन है।ज्यामिति के अनेक प्रमेय,कृत्य तथा सिद्धान्त इस भवन की ईंट,लोहा तथा सीमेंट हैं।जिस प्रकार ईंट,लोहा तथा सीमेन्ट विभिन्न लोगों द्वारा तैयार होकर भवन-निर्माण के स्थान पर पहुंचते हैं,उसी प्रकार ज्यामिति के विभिन्न प्रमेय तथा सिद्धांत विभिन्न देशों के विभिन्न विद्वानों ने खोज निकाले थे।
  • अब जरूरत थी एक मजबूत महल तैयार करने की।अब जरूरत थी एक ऐसे ‘दिमाग’ की जो उपलब्ध सामग्री को एकत्र करके एक महल की योजना तैयार कर सकें।ज्यामिति के महल की योजना तैयार की यूक्लिड ने।
  • विज्ञान का हर विषय एक भवन है।इस भवन का निर्माण करने के पहले इसकी एक सुनियोजित योजना तैयार करनी पड़ती है।इस भवन की ‘नींव’ के बारे में गम्भीरता से सोचना पड़ता है।नींव जितनी ही मजबूत होगी भवन भी उतना ही अधिक दिनों तक कायम रहेगा।

4.यूक्लिड की ज्यामिति का सारांश तथा यूक्लिड पर अरस्तू का प्रभाव (A Summary of Euclid’s Geometry and Aristotle’s Influence on Euclid):

  • यूक्लिड की ज्यामिति की परिभाषाएँ,अभिधारणाएँ (postulates) तथा स्वयंतथ्य (Axioms) ज्यामिति की नींव हैं।इस नींव पर यूक्लिड ने अपनी ज्यामिति के ग्रन्थ की भव्य इमारत खड़ी की।
  • परिभाषाएं किसी विशेष विज्ञान के विषयों की मौलिक बातों का अर्थ स्पष्ट करती हैं या इसकी सीमाएँ निर्धारित करती हैं।इसीलिए यूक्लिड ने सबसे पहले बिन्दु,रेखा आदि ज्यामितीय धारणाओं की व्याख्या की।किसी भी विज्ञान के लिए पहले परिभाषाओं की जरूरत होती है,इस बात पर अरस्तू ने ही जोर दिया था।उसने कहा था कि ज्यामिति के लिए बिन्दु,रेखा आदि जैसी मूल धारणाओं को स्वीकार कर लेने से काम चल सकता है।तदनंतर,इन मूल धारणाओं से निर्मित प्रत्येक आकृतिःत्रिकोण,आयत और उनके गुणधर्म-का अस्तित्व सिद्ध करना होता है।मूल धारणाओं से आकृतियों के निर्माण की अरस्तू की इस पद्धति का ही यूक्लिड ने अनुकरण किया है।इसके माने यह नहीं है कि ज्यामिति की नींव की सभी बातें अरस्तू की देन है।ऊपर जो तीन परिभाषाएँ दी गई हैं,वे अवश्य अरस्तू की देन है।परंतु यूक्लिड ने ओर भी अनेक परिभाषाएं दी हैं और उन्हें अपने ढंग से प्रस्तुत किया है।
  • परिभाषाओं के बाद यूक्लिड ने कुछ कुछ अभिधारणाएँ (पोस्टुलेट्स) दी हैं।इन अभिध्रणाओं को देने से पहले उन्होंने कहा है किः
  • हम इसे मान लेंगे कि……
  • अर्थात् जो अभिधारणाएँ दी गई हैं वे बिना किसी सिद्धि के,हमें स्वीकार कर लेनी है।ये अभिधारणाएँ केवल एक विशेष विषय से संबंधित होती हैं।ये एक ही विषय से सीमित होती हैं।स्वयंतथ्यों की तरह अभिधारणाएँ सार्वभौमिक कथन नहीं होती।ज्यामिति की अभिधारणाएँ रेखाओं,वृत्तों,कोणों आदि से संबंधित होती हैं।
  • यूक्लिड ने अपने ग्रंथ के आरंभ में जो पाँच अभिधारणाएँ दी हैं,उनमें पाँचवीं अभिधारणा अत्यन्त महत्त्व की है।
  • परिभाषाओं तथा अभिध्रणाओं के बाद यूक्लिड ने कुछ स्वयंतथ्य (Axioms) दिए हैं।यूनानी भाषा में ‘एक्सिओम’ का अर्थ होता है, ‘सम्मान करने योग्य’। विज्ञान में तथा ज्ञान की अन्य शाखाओं में इन ‘स्वयंतथ्यों’ को,बिना किसी हिचक के,स्वीकार कर लिया जाता है।ये सार्वभौमिक होते हैं।ये अपने-आपमें परिपूर्ण होते हैं।इन्हें सिद्ध करने की जरूरत नहीं होती।कोई भी बुद्धिमान व्यक्ति इन्हें सुनेगा तो वह इन्हें फौरन स्वीकार कर लेगा।उदाहरण के लिए,इस स्वयंतथ्य को ही लोः
  • यदि समान वस्तुओं में से समान वस्तुएं निकाल ली जाएं तो समान वस्तुएँ ही शेष रहती हैं।
  • क्या हम इस कथन पर विश्वास नहीं करेंगे? यदि पांच-पांच किलोग्राम तौल की दो वस्तुओं से समान रूप से दो-दो किलोग्राम तौल की वस्तुएं निकाल ली जाएं,तो दोनों समूहों में समान रूप से तीन-तीन किलोग्राम तौल की वस्तुएं शेष रहेंगी।यह यूक्लिड की ज्यामिति का तीसरा स्वयंतथ्य है।अरस्तू इस स्वयंतथ्य का अक्सर इस्तेमाल किया करते थे।
  • बहुत संभव है कि अपनी ज्यामिति को तार्किक आधार देने की प्रेरणा यूक्लिड को अरस्तू से ही मिली हो।परन्तु इसमें कोई संदेह नहीं कि ज्यामिति की निगमनिक (डिडक्टिव) विधि का प्रतिपादन स्वयं यूक्लिड की खोज है।
  • अरस्तू ने जीवशास्त्र के क्षेत्र में विज्ञान की बड़ी सेवा की है।उन्हें प्रारम्भिक ज्यामिति की भी बहुत-सी बातें ज्ञात थीं।अरस्तू ने गोल की परिभाषा दी है:”गोल ऐसी आकृति है जिसकी सभी त्रिज्याएँ समान होती हैं।”परन्तु यूक्लिड ने गोल की परिभाषा दी हैः”अर्धवृत्त द्वारा इसके अपने व्यास पर परिक्रमण से निर्मित आकृति गोल है।” यूक्लिड की यह और अन्य अनेक परिभाषाएं सही हैं।
  • यूक्लिड अरस्तू से बेहतर ज्यामितिकार थे।यूक्लिड ने अपने समय तक ज्ञात संपूर्ण ज्यामिति का संग्रह किया।संग्रह करने में यूक्लिड की विशेषता नहीं है।संग्रह तो कोई भी परिश्रमी व्यक्ति कर सकता था।यूक्लिड की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि उन्होंने इस ज्यामितीय ज्ञान को एक ठोस तार्किक आधारशिला पर खड़ा किया।ज्यामिति के सिद्धांतों को एक विशिष्ट विधि का जामा पहनाया।
  • अरस्तु यूक्लिड के लगभग समकालीन ही थे।अरस्तु की मृत्यु 322 ईसवी पूर्व में हुई थी।इस समय यूक्लिड की उम्र लगभग 25 वर्ष की रही होगी।इसलिए यूक्लिड पर अरस्तू के तार्किक चिन्तन का प्रभाव पड़ा है,तो कोई आश्चर्य की बात नहीं है।

5.महान दार्शनिक अरस्तू का दृष्टान्त (The Parable of the Great Philosopher Aristotle):

  • मैसीडोन के राजा फिलिप अपने पुत्र को अच्छी शिक्षा दिलाना चाहते थे,इसके लिए उन्हें योग्य गुरु की तलाश थी।उन्हें दार्शनिक अरस्तू में सिकन्दर का निर्माण करने वाला योग्य गुरु दिखाई दिया।फिलिप विद्वान और व्यक्ति निर्माता गुरु का मूल्य समझते थे।उन्होंने अरस्तू को एक पत्र लिखा और कहा कि मुझे खुशी इस बात की है कि सिकंदर ऐसे जमाने में पैदा हुआ है जबकि आप जैसे व्यक्ति निर्माता दार्शनिक मौजूद हैं।मैं इसे आपके द्वारा शिक्षित और सुसंस्कृत हुआ देखना चाहता हूं।अरस्तू ने प्रस्ताव स्वीकार कर लिया।
  • अरस्तू शिष्य सिकंदर को विश्व विजयी बनाना चाहते थे।इसके लिए आवश्यक था कि वह इन्द्रियों पर नियंत्रण रखे और कामुक न हो।परन्तु युवावस्था में विपरीत लिंग के प्रति आकर्षण हो जाता है और उसे सही दिशा न मिले तो भटक जाता है।
    आजकल के छात्र-छात्राएं विद्यार्जन करने के बजाय कामुकता में संलग्न हो जाते हैं और विद्या अर्जित करने से वंचित हो जाते हैं।
  • सिकन्दर की भी एक वेश्या में आसक्ति हो गई।अरस्तू ऐसा सोच रहे थे सिकन्दर स्वयं ही उस मार्ग से हट जाए क्योंकि कामाग्नि ऐसी आसक्ति है जिसमें लिप्त हो जाने पर छात्र-छात्राओं पर कोई सीख भी काम नहीं देती।कामाग्नि में आसक्त विद्यार्थी की बुद्धि भ्रष्ट हो जाती है,इन्द्रिय शक्ति नष्ट हो जाती है और उसे कुछ भी दिखाई नहीं देता है।कामान्ध व्यक्ति को न दिन में कुछ दिखाई देता है और न रात में कुछ दिखाई देता है।लोकलाज की भी वह परवाह नहीं करता।
  • सिकन्दर नहीं सुधरा तो अरस्तू ने एक उपाय सोचा।अरस्तू ने उस वेश्या से रोमांस के लिए निवेदन किया।वेश्या ने शर्त रखी कि उसे चार घण्टे तक घोड़ा बनकर घुमाना पड़ेगा।उतनी देर तक मैं सवारी करूँगी।दरअसल सिकन्दर अपने गुरु का बहुत सम्मान करता था।अतः वेश्या सिकन्दर की नजरों से गुरु को गिराना चाहती थी और गुरु से सम्बन्ध तोड़ना चाहती थी।अरस्तू ने वेश्या के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया।
  • अरस्तू नियत समय पर पहुंचे और घोड़ा बनकर वेश्या को पीठ पर लादकर उसके आंगन में फिरने लगे।उसी दौरान सिकंदर भी आ गया और यह सारा दृश्य देखा।सिकंदर ने कहा किःगुरुदेव!यह क्या?अरस्तू ने कहाःजिस मार्ग पर कदम बढ़ाते मेरे जैसे ज्ञानवानों की यह दुर्दशा हो रही है।मूर्ख,उस दलदल में फंसने पर तेरा तो निकलना ही असंभव हो जाएगा।सिकंदर की आंखें खुल गई और कामासक्ति से मोहभंग हो गया।उसने पतन की ओर जाने का रास्ता बदल दिया।इस प्रकार अरस्तू ने सिकंदर को महान बना दिया और आजीवन अरस्तू का कृतज्ञ बना रहा।
  • उपर्युक्त आर्टिकल में ज्यामिति की मजबूत आधारशिला (A Strong Foundation of Geometry),ज्यामिति की मजबूत आधारशिला का रहस्य (The Secret to Strong Foundation of Geometry) के बारे में बताया गया है।

Also Read This Article:Non Euclidean Geometry

6.गणित सम्मेलन की यात्रा (हास्य-व्यंग्य) (Journey to Mathematics Conference) (Humour-Satire):

  • लालीःतुम्हारी गणित सम्मेलन की यात्रा कैसी रही?
  • काली:अरे क्या बताऊं? रास्ते में मेरे ब्वॉयफ्रेंड पानी लेने के लिए उतरे और गाड़ी चल दी।वे स्टेशन पर ही रह गए।
  • लालीःमैं समझ रही हूं तुम्हारी पीड़ा।इतने लंबे सफर में तुम्हें बॉयफ्रेंड के बिना यात्रा करनी पड़ी।

7.ज्यामिति की मजबूत आधारशिला (Frequently Asked Questions Related to A Strong Foundation of Geometry),ज्यामिति की मजबूत आधारशिला का रहस्य (The Secret to Strong Foundation of Geometry) से संबंधित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:

प्रश्न:1.अभिगृहीत और अभिधारणा में क्या अंतर है? (What is the Difference Between Axioms and Postulate?):

उत्तर:अभिधारणा (postulate):यदि कोई ज्यामितीय रचना इतनी सरल हो कि उसके प्रमाण की आवश्यकता न हो और उसे सम्भव मान सके तो उसे अभिधारणा कहते हैं।
अभीगृहीत (Axioms):इहें स्वयंसिद्ध भी कहते हैं।ज्यामिति  में जिस तर्क की आवश्यकता पड़ती है,वह थोड़े से सिद्धांतों एवं परिभाषाओं पर आधारित है।ये सिद्धांत इतने सरल,स्पष्ट एवं प्रत्यक्ष हैं कि इनकी सत्यता सिद्ध करने की आवश्यकता नहीं होती है।आजकल अभिधारणा और अभीगृहीत दोनों पदों को एक दूसरे के लिए एक ही अर्थ में प्रयोग किया जाता है।

प्रश्न:2.साध्य किसे कहते हैं? (What is Called Propositions?):

उत्तर:साध्य (Propositions) को प्रमेय (Theorem) भी कहते हैं।अभिध्रणाओं,अभीगृहीतों का प्रयोग अन्य परिणामों को सिद्ध करने में किया।फिर इन परिणामों का प्रयोग करके,निगमनिक तर्कण द्वारा (deductive reasoning) कुछ ओर परिणामों को सिद्ध किया।जिन परिणामों को सिद्ध किया वे साध्य (propositions) या प्रमेय (Theorem) कहलाते हैं।

प्रश्न:3.परिभाषाएं कितने प्रकार की होती हैं? (How Many Types of Definitions are There?):

उत्तर:परिभाषाएं कई प्रकार की होती हैं।जैसे दार्शनिक परिभाषा (philosophic definitions),तार्किक परिभाषाएं (logical definitions),वर्णनात्मक परिभाषाएं इत्यादि।

  • उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर द्वारा ज्यामिति की मजबूत आधारशिला (A Strong Foundation of Geometry),ज्यामिति की मजबूत आधारशिला का रहस्य (The Secret to Strong Foundation of Geometry) के बारे में ओर अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
No. Social Media Url
1. Facebook click here
2. you tube click here
3. Instagram click here
4. Linkedin click here
5. Facebook Page click here
6. Twitter click here

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *