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How to make good usage of time in hindi

1.समय का सदुपयोग कैसे करें का परिचय (Introduction to How to make good usage of time in hindi),समय का सही उपयोग कैसे करें? (How make proper usage of time?):

  • समय का सदुपयोग कैसे करें? (How to make good usage of time in hindi),समय का सही उपयोग कैसे करें? (How make proper usage of time?):विद्यार्थियों के समय अमूल्य है।गुजरे हुए समय को किसी भी कीमत पर हासिल नहीं किया जा सकता है।समय सबसे प्रबल है।हरेक बात का एक निश्चित समय होता है।यदि उस निश्चित समय पर उस कार्य को नहीं किया जाए तो बाद में किया गया कार्य का कोई महत्त्व नहीं होता है।


via https://youtu.be/veVGnIcgwc4

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2.समय का सदुपयोग कैसे करें? (How to make good usage of time in hindi),समय का सही उपयोग कैसे करें? (How make proper usage of time?):

  • बहुत से विद्यार्थियों की यह शिकायत रहती है कि उनको विद्याध्ययन के लिए समय नहीं है।वस्तुतः यदि विद्यार्थी अपनी दिनचर्या पर नजर डालें तो उन्हें यह मालूम होगा कि वे कई काम ऐसे करते हैं जिन्हें नहीं करने चाहिए।उदाहरणार्थ फिल्में देखना,मित्रों से गप्पें,हँसी-मजाक करना,मटरगश्ती करना इत्यादि।यदि वे समय प्रबन्धन पर ध्यान दें और योजनाबध्द ढंग से काम करें तो उसी समय में वे सभी कार्यों को निपटा सकते हैं।
  • प्राचीनकाल में विद्यार्थियों की दिनचर्या गुरुकुल में ही व्यतीत होती थी जिसमें धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन-मनन-चिंतन तथा विद्या अध्ययन में ही समय व्यतीत होता था।लोग अतिरिक्त समय को धार्मिक चर्चा,कहानी-किस्से या शास्त्र पढ़ने में ही व्यतीत करते थे।जो लोग शराब,जुआ,खेल-तमाशे तथा चौपड़ इत्यादि व्यसनों में फँस जाते थे उनकी जिन्दगी नरक बन जाती थी।
  • यदि हम प्रकृति का अध्ययन करें तो हर कार्य एक नियत समय पर के अनुसार होता हुआ देखते हैं।सूर्य निश्चित समय पर उदय और अस्त होता है।पृथ्वी निश्चित समय में सूर्य की परिक्रमा तथा परिभ्रमण करती है।सर्दी,वर्षाऔर गर्मी का भी एक निश्चित समय होता है।मनुष्य भी प्रकृति का अंग है परन्तु अपनी बुद्धि या कुबुद्धि से प्रकृति के नियमों से छेड़छाड़ करता है,अपनी स्वभाविक प्रकृति के नियमों की अवहेलना करता है फलस्वरूप उसे तथा आगामी पीढ़ी को इसके परिणाम भुगतने पड़ते हैं।
  • इसलिए मनुष्य को अपना प्रत्येक कार्य समय के अनुसार करना चाहिए।कौनसा काम किस समय करना चाहिए और किस समय नहीं करना चाहिए उसे विवेकपूर्वक तथा सोच-समझकर करना चाहिए।जितना वह विवेक का प्रयोग करेगा उतना ही समयोचित व्यवहार करने में सफल हो सकता है।
  • जैसे चुप रहने का भी समय होता है तो बोलने का भी समय होता है।रोने का भी समय होता है तो हँसने का भी समय होता है। सोने का भी समय होता है तो जागने का भी समय होता है।जन्म का समय होता है तो मरण का भी समय होता है।इसी प्रकार अध्ययन करने का भी समय होता है तो नित्यकर्मों को करने का भी समय होता है।यदि छात्र-छात्राएं समय के महत्त्व को समझ कर उसका सदुपयोग करें तो उनकी कायापलट हो जाए।

3.समय की महत्ता (Importance of Time),समय का सही उपयोग कैसे करें? (How make proper usage of time?):

  • बहुत से विद्यार्थी और लोग आधुनिक जीवन शैली में इतने व्यस्त हो गए हैं और भौतिक-सुविधाएं तथा धन को कमाने में उन्हें समय का अभाव महसूस होता है जिससे वह अपने नित्यकर्मों और अध्ययन के लिए हमेशा यही शिकायत करते हुए पाए जाते हैं कि उन्हें समय ही नहीं मिलता है।वस्तुतः यदि समय का प्रबंधन सही ढंग से किया जाए तो उनके सभी कार्य ठीक ढंग से संपन्न किए जा सकते हैं।
  • हम बहुत से कार्य ऐसे करते हैं जिन्हें नहीं करना चाहिए,यदि हम ऐसा करके कर सकें तो उस समय को उपयोगी कार्य में लगा सकते हैं।
  • विद्यार्थी काल से ही विद्यार्थी अपने समय को बेकार के कार्यों में जैसे मटरगश्ती करना,गप्पे लड़ाना,सोने,आलस्य में,संबंधों का निर्वाह करने,शादी-विवाह तथा पार्टियों को अटेंड(attend) करने में व्यतीत करते रहते हैं जबकि विद्यार्थी काल अध्ययन तथा विद्या ग्रहण करने का है।इसलिए उसे अध्ययन तथा विद्या ग्रहण करने में ही अपने समय को व्यतीत करना चाहिए।
  • अध्ययन काल में जो अवकाश काल आता है जैसे ग्रीष्मकालीन अवकाश इस समय को कोई हुनर जैसे कंप्यूटर कोर्स,नृत्य कला,इंग्लिश स्पीकिंग कोर्स,व्यायाम या कुछ अन्य जीवनोपयोगी साहित्य को पढ़ने-लिखने में व्यतीत करना चाहिए।
    अध्ययन काल अर्थात् हमारा शिक्षण सत्र चालू रहता है उस समय भी अध्ययन करने के पश्चात यदि समय बचता है या कोई अवकाश आता है जैसे शीतकालीन अवकाश,दीपावली अवकाश इत्यादि को अपने रुचि के किसी हुनर को सीखने में लगाना चाहिए।
  • दरअसल यदि समय का सदुपयोग नहीं करते हैं तो निश्चित है कि उसका दुरुपयोग अवश्य होगा।समय का दुरुपयोग करने पर विद्यार्थियों में अनेक प्रकार के विकार,दुर्व्यसन,जहां-तहां निठल्ले उठने-बैठने में व्यतीत कर देते हैं।
  • विद्यार्थी यदि इस अवकाश काल को शुरू से ही थोड़ा-थोड़ा कोई कार्य सीखने में लगाए या उसको प्रशिक्षण दिलाया जाए तो एक लाभ तो यह है कि समय का सदुपयोग होगा।दूसरा लाभ है कि बालक गलत कार्य करने से बचेगा।तीसरा लाभ है कि जब वह बड़ा होगा तो काम की बारीकियां तथा कठिनाइयों से परिचित रहेगा,वह कार्य करना बालक के लिए नया या कठिन नहीं होगा।
  • जो माता-पिता,अभिभावक बालकों को पुस्तकों,शिक्षा-संस्थानों व शिक्षकों पर छोड़ देते हैं वे बालकों को शिक्षा के व्यावहारिक एवं जीवन की कठोर सच्चाइयों से सामने करने से वंचित रखते हैं और बालक कच्चे ही रह जाते हैं।जब जीवन में आनेवाली परेशानियों और संकटों से उनका सामना होता है तो उनके पसीने छूट जाते हैं।परेशानियों व कठिनाइयों को ठीक से handle नहीं कर पाते हैं।इसलिए माता-पिता व अभिभावकों को बालकों को सदा समय का सदुपयोग करना सीखाए।इस मामले में बिल्कुल भी लापरवाही नहीं करना चाहिए तथा माता-पिता व अभिभावकों को सदा सजग,सावधान और सक्रिय रहने की आवश्यकता है।
  • समय के महत्त्व को निम्न कहावतों से भी समझा जा सकता हैः
    (1.)जो समय को नष्ट करता है,समय उसको नष्ट कर देता है।
    (2.)बीता हुआ समय और बोले गए शब्द वापस नहीं आते हैं।
    (3.)समय सबसे मूल्यवान है,परमात्मा से भी।भक्ति आदि साधनों से परमात्मा को उपलब्ध हो सकते हैं किंतु लाखों-करोड़ों उपाय करने से भी बीता हुआ समय नहीं लौट सकता है।कहने का तात्पर्य यही है कि यदि हम समय की कद्र करेंगे तो समय हमारी कद्र करेगा।
  • उपर्युक्त आर्टिकल में समय का सदुपयोग कैसे करें? (How to make good usage of time in hindi),समय का सही उपयोग कैसे करें? (How make proper usage of time?) के बारे में बताया गया है।
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