Menu

What is illusion in hindi

1.भ्रम क्या है? का परिचय (Introduction to What is illusion in hindi),मोह क्या है? (What is attachment):

  • भ्रम क्या है? (What is illusion in hindi),मोह क्या है? (What is attachment):भ्रम ज्ञान से दूर होता है।हरेक मनुष्य जानता है कि मोह नही करना चाहिए।तुलसीदास जी ने कहा कि मोह व्याधिन कर सममूला अर्थात् सभी व्याधियों का कारण मोह है।हरेक आदमी जानता है कि सच बोलना चाहिए,परोपकार करना चाहिए,सदाचार का पालन करना चाहिए,सदाचार का जीवन बिताना चाहिए,ईमानदारी बरतनी चाहिए।परन्तु काम, क्रोध, लोभ, मोह इत्यादि मनोविकारों के वशीभूत होकर वह इन सब बातों को भूल जाता है तथा कुकृत्य करता है।
  • आपको यह जानकारी रोचक व ज्ञानवर्धक लगे तो अपने मित्रों के साथ इस Video को शेयर करें। यदि आप इस वेबसाइट पर पहली बार आए हैं तो वेबसाइट को फॉलो करें और ईमेल सब्सक्रिप्शन को भी फॉलो करें जिससे नए आर्टिकल का नोटिफिकेशन आपको मिल सके।यदि वीडियो पसन्द आए तो अपने मित्रों के साथ शेयर और लाईक करें जिससे वे भी लाभ उठाए।आपकी कोई समस्या हो या कोई सुझाव देना चाहते हैं तो कमेंट करके बताएं। इस वीडियो को पूरा देखें।


via https://youtu.be/PnZt8tsCRr4

2.भ्रम क्या है? (What is illusion in hindi),मोह क्या है? (What is attachment):

  • अज्ञान,अविद्या,ममता,भ्रांति,भ्रम आदि।संकुचित दृष्टिकोण मोह होता है यानी मोह की दिशा संकीर्ण मनोवृत्ति की ओर होती है।हमारा दायरा छोटा होता जाता है।वास्तविक ज्ञान का न होना ही मोह है।जैसे रस्सी को सर्प समझ लेना हमारा भ्रम है।हम हमारे शरीर को हमारा वास्तविक रूप समझते हैं जबकि यह शरीर तो हमारे शरीर से चेतना निकलने पर भी मौजूद रहता है।परंतु हमारा मानसिक लगाव इस शरीर से हो जाता है और हम इस शरीर को ही हमारा स्वरूप समझ बैठते हैं।मोह भूतकाल में जीना है तथा भविष्य में जीना लोभ है।जो कुछ हम प्राप्त कर चुके हैं उसको संचित रखने की भावना मोह है।मोह, लोभ से पैदा होता है।
  • नीति में कहा है कि “यह मेरा है,वह तेरा है ऐसी भावना संकुचित मानसिकता वाले लोग करते हैं।उदार मनोवृत्ति के मनुष्य तो सारे संसार को अपना परिवार मानते हैं। महाभारत में महर्षि वेदव्यास जी ने कहा है किः
    “बुद्धि का नाश ही मोह है,वह धर्म और अर्थ दोनों को नष्ट करता है।इससे मनुष्य में नास्तिकता आती है और वह दुराचार में प्रवृत्त हो जाता है।
  • मोह उदार,विस्तृत और अनंत नहीं हो सकता है।उदार,विस्तृत और अनंत प्रेम होता है और परमात्मा प्रेम स्वरूप भी होता है।इसलिए परमात्मा अनंत,व्यापक और उदार है।ज्यों-ज्यों हमारा दायरा बढ़ता है मोह कम होता जाता है।
  • अब प्रश्न है कि इस मोह से छुटकारा कैसे पाया जा सकता है क्योंकि वर्तमान युग अर्थ प्रधान युग है और ऐसे युग में मोह से छुटकारा पाने के बजाय ओर फँसते चले जाते हैं।दरअसल धन-संपत्ति और भौतिक सुख-साधनों को हम अपना मानते हैं यदि हम इन्हें अपने सांसारिक कर्त्तव्यों का निर्वाह करने तक अपना मानते हैं वहां तक तो ठीक है अन्यथा ये अपने नहीं है।जैसे हम किसी किराए के मकान में रहते हैं तो उसको उपयोग में लेने तक अपना है अन्यथा अपना नहीं है।इस प्रकार भौतिक सुख-सुविधाओं को अपना समझ कर भी अपना न समझे।जीवन में सभी संबंधों एवं भौतिक सुख-साधनों को इसी ढंग से लेना चाहिए।
  • लेकिन हम हमारे मनोविकार काम,क्रोध,लोभ,मोह इत्यादि के कारण सांसारिक प्रपंचों में फंसे रहते हैं लेकिन ज्ञान का प्रकाश होने पर हम मोह इत्यादि से छुटकारा पा सकते हैं।समस्त मनोविकारों का कारण अज्ञान ही है और ज्ञान के द्वारा ही इससे छुटकारा पा सकते हैं।ज्यों-ज्यों ज्ञान होता जाता है इनसे हम मुक्त होते जाते हैं।सब कुछ हमारे पर निर्भर है और हमारे संस्कारों तथा मनोवृति पर निर्भर है।क्योंकि मनोविकारों से हमें नुकसान ही नुकसान है परन्तु भ्रान्तिवश हमें इसमें फायदा नजर आता है।इसलिए ज्ञान के द्वारा इससे मुक्त होने में ही फायदा है।
  • उपर्युक्त आर्टिकल में भ्रम क्या है? (What is illusion in hindi),मोह क्या है? (What is attachment) के बारे में बताया गया है।
No. Social Media Url
1. Facebook click here
2. you tube click here
3. Instagram click here
4. Linkedin click here
5. Facebook Page click here
6. Twitter click here

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *