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coaching vs education in hindi

1.कोचिंग बनाम शिक्षा का परिचय (Introduction to Coaching vs education in hindi),शैक्षिक कोचिंग क्या है? (what is educational coaching?):

    • कोचिंग बनाम शिक्षा (Coaching vs education in hindi),शैक्षिक कोचिंग क्या है? (what is educational coaching?):कोचिंग से तात्पर्य है प्रशिक्षण,पढ़ाना,शिक्षा देना इत्यादि।कोचिंग केवल छात्र-छात्राएं ही शिक्षा अर्जित के लिए नहीं जाते हैं बल्कि विभिन्न क्षेत्रों जैसे नृत्य,खेल,भजन,संगीत इत्यादि में भी अभ्यर्थी जाते हैं।इस आर्टिकल में हमारा तात्पर्य शैक्षिक कोचिंग से है।अर्थात् छात्र-छात्राएं अपनी परीक्षा की तैयारी करने अथवा जेईई-मेन,जेईई-एडवांस,गेट इत्यादि प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी के लिए कोचिंग जाते हैं।
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via https://youtu.be/RoFMLMR8Yv4

2.कोचिंग बनाम शिक्षा (Coaching vs education in hindi),शैक्षिक कोचिंग क्या है? (what is educational coaching?):

  • वस्तुतः कोचिंग संस्थानों में विद्यार्थियों को अपने कोर्स की तैयारी के लिए जाने की जरूरत क्यों है? दरअसल आजकल विद्यालयों तथा महाविद्यालयों में छात्र-छात्राओं की अत्यधिक संख्या होने के कारण अध्यापक तथा प्राध्यापक प्रत्येक छात्र-छात्रा पर ठीक से ध्यान नहीं दे पाता है।दूसरा कारण यह है कि आधुनिक युग प्रतियोगिता का युग इसलिए हर छात्र-छात्रा अथवा हर कैंडिडेट आगे निकलना चाहता है।तीसरा कारण है प्रतियोगिता परीक्षाओं के लिए कोई स्कूल या विद्यालय नहीं है।प्रतियोगिता परीक्षाओं की तैयारी के लिए एकमात्र कोचिंग ही विकल्प है।चौथा कारण है कि घर पर पढ़ने व अध्ययन करने का उचित वातावरण नहीं मिलता है।पाँचवा कारण है कि छात्र-छात्राओं के अतिरिक्त समय का सदुपयोग हो जाता है।छठा कारण है कि छात्र-छात्राओं को कठिन विषय विद्यालय के अलावा अन्य स्थान पर पढ़ लेता है तो उसकी पुनरावृत्ति हो जाती और पुनरावृत्ति से विषय सरलता से समझ में आ जाता है।सातवां कारण है कि कुछ हुनर और स्किल सीखने के लिए कोचिंग की आवश्यकता है।उपर्युक्त कारणों की वजह से छात्र-छात्राएं कोचिंग संस्थानों में जाना पसन्द करते हैं।
  • मनुष्य खेलकूद को फिर भी छोड़ सकता है लेकिन यदि शिक्षा से वंचित रखा जाए तो बालक मूढ़ और अज्ञानी रह सकता है।शिक्षा की आवश्यकता के बारे में नीति में कहा गया है कि “जो निरन्तर अध्ययनशील होता है, उसमें मूर्खता नहीं रहती है।जो बराबर जप करता रहता है उसमें कोई पातक नहीं रह सकता है।जो जाग्रत उसमें कोई पातक नहीं रह सकता है।जो मौन धारण करनेवाला होता है उससे किसी का भी कलह नहीं होता है।”
  • तात्पर्य यह है कि कि समाज में बिना पढ़े-लिखे या कम पढ़े-लिखे कोई नहीं पूछता है।हर कोई उसका तिरस्कार करते हैं।गँवार और मूर्ख समझकर उससे कोई बात नहीं करना चाहता है।सार्वजनिक संस्थाओं में अशिक्षित को कोई पद नहीं मिलता है।
  • समाज में आदर व सम्मान के पात्र वे ही मनुष्य होते हैं जो सुशिक्षित और सुसंस्कृत हैं और जिन्हें देश-विदेश की नवीनतम गतिविधियों का ज्ञान है।अर्थात् जो अपने आपको अपडेट और अपग्रेड रखता है। इसलिए कोचिंग संस्थानों में बालक-बालिकाओं को शिक्षा प्रदान करवाना हर तरह से लाभदायक और हितकारी है।
  • उपर्युक्त आर्टिकल में कोचिंग बनाम शिक्षा (Coaching vs education in hindi),शैक्षिक कोचिंग क्या है? (what is educational coaching?) के बारे में बताया गया है।
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3 Comments
  1. jackharry October 31, 2019 / Reply
  2. jackharry October 31, 2019 / Reply
  3. PANELE akustyczne June 11, 2020 / Reply

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