Educated Unemployment in India:Causes,Consequences and Solutions
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1.भारत में शिक्षित बेरोजगारी:कारण,परिणाम और समाधान (Educated Unemployment in India:Causes,Consequences and Solutions):
- भारत में शिक्षित बेरोजगारी:कारण,परिणाम और समाधान (Educated Unemployment in India:Causes,Consequences and Solutions) क्या हैं? जानिए कैसे बेरोजगारी एक महामारी की तरह फैल फैल रही है? शिक्षित युवा बेबस और लाचार हैं।सरकारों का मुख्य मुद्दा सत्ता में बने रहना है और सत्ता में बने रहने के लिए ही नीतियाँ (Polycies) बनती है।
2.शिक्षित बेरोजगारी के मुख्य कारण (The main causes of educated unemployment):
- शिक्षित बेरोजगारी इस कारण से उत्पन्न होती है कि बड़ी संख्या में युवा डिग्री लेते हैं परन्तु उन्हें जाॅब नहीं मिलता है।अपनी योग्यता से कम वेतन पर काम करना पड़ता है।जितनी संख्या में शिक्षित युवा डिग्री प्राप्त करते है उसकी तुलना में रोजगार सृजन अत्यन्त कम होता है। हमने इस पर लेख “Math Capable of Solving Unemployment” लिखा है।यदि आप अधिक जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं तो इसे पढ़े।
भारत में सैद्धान्तिक शिक्षा (Theoretical Education) है जिसे पाकर युवा डिग्री तो हामिल कर लेता है परन्तु उसे जॉब नहीं मिलता है।क्योंकि जॉब के लिए स्किल बेस्ड शिक्षा (Skill based education) का होना जरूरी है। - भारत में मैट्रिक और हायर सैण्डरी उत्तीर्न युवकों के पास कोई व्यावसायिक प्रशिक्षण (Vocational Training) नहीं होता।इसलिए वे कोई भी कुशल कार्य करने में सक्षम नहीं होते।
- अनुपयुक्त शिक्षा प्रणाली (Inappropriate educational system) है।दरअसल थोड़े-बहुत फेरबदल के बावजूद यह शिक्षा प्रणाली वही है जिसकी लाई मैकाले ने ब्रिटिश शासन के दौरान की थी।भारतीय शिक्षा प्रणाली का उद्देश्य मानव स्त्रोतों को विकसित करना नहीं रहा है।यहाँ की शिक्षा प्रणाली,सरकार और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए क्लर्क और नीचे दर्जे के प्रशासानिक अफसर पैदा कर सकती है।
- इस प्रकार की शिक्षा देने वाली संस्थाओं के विस्तार से बेरोजगारी बढ़ना जरूरी था,कला,विज्ञान और कॉमर्स की ऐसी शिक्षा लेकर जिसका व्यावहारिक जीवन में अधिक उपयोग नहीं है सभी युवा रोजगार नहीं पा सकते।ये युवा न केवल अल्प शिक्षित है बल्कि सच पूछा जाए तो इनकी शिक्षा गलत प्रकार की है।
- अभिप्राय यह है कि यदि भारत में शिक्षित लोगों की बेरोजगारी (unemployment of Educated youth) कम करनी है तो उसके लिए शिक्षा प्रणाली में महत्त्वपूर्ण परिवर्तन करने होंगे।जो शिक्षा मानव स्रोतों का विकास नहीं करती वह लोगों को व्यापक स्तर पर रोजगार भी नहीं दिला सकती।
- इसका कारण जिसका ऊपर उल्लेख किया जा चुका है कि नौकरी तलाश करने वालों में तकनीकी प्रशिक्षण (Technical Training) तथा आवश्यक योग्यता की कमी तथा शिक्षित लोगों की माँग व पूर्ति में असन्तुलन भी प्रमुख कारण है।युवाओं का एक ही मकसद रहता है कि डिग्री प्राप्त करके नौकरी प्राप्त करना।परन्तु यह सोचने वाली बात है की सरकार किन-किन को नौकरी देगी और कितनों को।युवाओं को सरकार द्वारा स्किल बेस्ड शिक्षा की व्यवस्था नहीं की जाती है फलस्वरूप बड़ी संख्या में युवक उच्च शिक्षा प्राप्त करके बेरोजगार हो रहे हैं।माता-पिता तथा स्वयं युवा भी इस तरफ ध्यान नहीं देते हैं।शुरू में उनका एक ही फोकस रहता है कि किसी प्रकार एमए/बीए,बीएससी/एमएससी की डिग्री हासिल कर लें।ऐसा करके वे स्वयं तो बेरोजगार होते ही हैं साथ ही अल्पशिक्षित युवाओं को रोजगार पाने में समस्या खड़ी कर देते हैं।
- आर्थिक विकास की धीमी गति (Pace of Economic Development) भी शिक्षित बेरोजगारी का कारण है।हालांकि आर्थिक विकास के द्वारा बेरोजगारी की समस्या का अपने आप समाधान नहीं होता।यह बहुत सम्भव है कि यदि रोजगार आयोजन (Employment Events) की तरफ ध्यान न दिया जाए तो आर्थिक विकास की गति तेज होने के बावजूद भी बेरोजगारी की समस्या बनी रहे।इसका कारण यह है कि सबसे ज्यादा तेज विकास उपभोग की टिकाऊ वस्तुओं का उत्पादन करने वाले उद्योगों का हुआ हो और इनकी निर्भरता ऐसी आयातित तकनीकों पर हो जिनकी रोजगार देने की क्षमता ज्यादा नहीं है।
सीमित रोजगार सृजन (Limited job creation):उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले युवाओं की तुलना में नौकरी के अवसरों (विशेषकर सरकारी नौकरियों) का धीमी गति से बढ़ना। - डिग्री का बेमेल (Job Mismatch):अपनी शैक्षणिक योग्यता से बहुत छोटे या कम वेतन काले कार्य करने की मजबूरी।शिक्षा और उद्योग की माँग के बीच बहुत बड़ा अन्तर और जनसंख्या के अनुपात में रोजगार का सृजन का न होना है।यह स्थिति देश के आर्थिक विकास को धीमा करने के साथ-साथ युवाओं में गहरी हताशा और सामाजिक असंतोष पैदा कर रही है।
- शिक्षा और कौशल के बीच असंतोषजनक तालमेल(Unsatisfactory synergy between education and skills):उच्च शिक्षक संस्थानों से हर वर्ष लाखों स्नातक (Graduates) और स्नातकोत्तर (Post-Graduates) निकलते हैं,लेकिन उन्हें बाजार की मांग के अनुरूप तकनीकी और व्यावहारिक कौशल (Skill Gap) का अभाव होता है।इसका कारण डिग्री होने के बावजूद युवा रोजगार पाने में असमर्थ रहते हैं।
तेजी से बढ़ती जनसंख्या के कारण डिग्री होने के बावजूद युवा रोजगार पाने में असमर्थ रहते हैं।
- तेजी से बढ़ती जनसंख्या के कारण कार्यबल (Lobur force) में शामिल होने वाले लोगों की संख्या,उपलब्ध नौकरियों की संख्या से कहीं अधिक हो जाती है।
उद्योगों और कृषिक्षेत्रों में आधुनिक मशीनों,ऑटोमेशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग से मानव श्रम की आवश्यकता घट जाती है,जिससे रोजगार के अवसर सीमित हो जाते हैं। - अधिकांश आबादी में कृषि पर निर्भर (Dependence on Agriculture) होना और कृषि का केवल एक निश्चित मौसम तक ही सीमित रहना (मौसमी बेरोजगारी) बेरोजगारी का एक बड़ा कारण है।इसके अलावा,ग्रामीण और अर्ध शहरी क्षेत्रों में उद्योगों का पर्याप्त विकास न होना भी एक प्रमुख कारण है।
शिक्षित लोगों में बढ़ती बेरोजगारी (या बेकारी) का मुख्य कारण शिक्षा की गुणवत्ता और बाजार की माँग (Skill demand) के बीच भारी असंतुलन,तकनीकी कौशल की कमी और पढ़े-लिखे युवाओं द्वारा छोटे या कम वेतन वाले कार्यों को स्वीकार करने से इंकार करना है। - बेरोजगार के अवसरों में धीमी वृद्धि (Slow growth in jobless opportunities):हर साल लाखों युवा स्कूल और कॉलेज उत्तीर्ण करके निकलते हैं,लेकिन उस अनुपात में बाजार में नई नौकरियाँ (Job creation) पैदा नहीं होती है।
- उच्च शिक्षा प्राप्त युवा अक्सर अपनी योग्यता के अनुसार “व्हाइट कॉलर” या सरकारी नौकरियों की प्रतीक्षा करते हैं।वे छोटे-मोटे,अनौपचारिक या कम वेतन वाले रोजगार करने में संकोच करते हैं,जिससे उनकी बेरोजगारी की दर बढ़ जाती है।
- लगातार बढ़ती जनसंख्या के कारण नौकरी खोज्ने वालों की संख्या उपलब्ध रिक्तियों की तुलना में बहुत अधिक हो जाती है।
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3.शिक्षित बेरोजगारी के प्रभाव (The Effects of Educated Unemployment):
- शिक्षित युवक डिग्री हासिल करके जब रोजगार के लिए दर-दर की ठोकरे खाते हैं तो उन्हें मालूम पड़ता है कि वे ठगे गए है।शिक्षित युवाओं द्वारा “कैरियर एण्ड एजुकेशन सेंटर” (career and education centre) के रोज चक्कर लगाते-लगाते एडियाँ घिस जाती है लेकिन उन्हें साक्षात्कार के लिए बुलावा नहीं आता है।
- इससे युवाओं में मानसिक तनाव (Depression),निराशा,हताशा घर कर जाती है।वे जॉब के लिए चक्कर लगाते-लगाते टूट जाते हैं।कई युवा तो भटक जाते हैं यथा नशा,ड्रग्स का सेवन,अपहरण,डकैती,साइबर क्राइम,अय्याशी आदि कार्यों को करने लगते हैं।युवाओं का अपराध की ओर पलायन का एक कारण बेरोजगारी भी है।
- कई युवा मानसिक रोगी हो जाते हैं,विक्षिप्तावस्था में जिन्दगी काटने के लिए मजबूर हो जाते है।बेरोजगारी आज भारत ही नहीं पूरे विश्व में महामारी की तरह फैलती जा रही है।
4.शिक्षित बेरोजगारी का तुलनात्मक विवरण (Comparative Details of Educated Unemployment):
- सरकारें मंडल-कमंडल और स्वर्णों को आरक्षण का लॉलीपाप थमाकर युवाओं में आपस में वैमनस्यता फैलाने का काम करती है।हर साल करीब 210 मिलियन युवा हाईस्कूल व लगभग 40 मिलियन से 43.3 मिलियन छात्र (2026) उच्च शिक्षा की परीक्षा देते हैं।इतने युवाओं के लिए नौकरियाँ कहाँ है? जाहिर है बहुत अधिक मात्रा में नौकरियों (Jobs) की जरूरत है। लेकिन साल के आँकड़े जोड़ लें 0.1 प्रतिशत रिक्तियाँ निकलती हैं।
- अजीज प्रेमजी विश्वविद्यालय की स्टेट ऑफ वर्किंग इंडिया 2026 रिपोर्ट के अनुसार 20-29 आयुवर्ग के सभी बेरोजगार युवाओं में से 67% स्नातक हैं यानी 1.1 करोड़ लोग।2004 में बेराजगार युवाओं में स्नातकों की संख्या मात्र 32% थी।स्नातक डिग्री प्राप्त 20 से 24 वर्ष की आयु के 44% युवा भारतीय बेरोजगार है।
- 15-25 आयुवर्ग के लगभग 40% स्नातक और 25-29 आयु वर्ग के लगभग 20% स्नातक बेरोजगार हैं,जो कम शिक्षित लोगों की तुलना में कहीं अधिक है।
चौथे स्थान पर बीबीए (बैचलर ऑफ बिजनेस एमिनिस्ट्रेशन)-बेरोजगारी दर 24%।तीसरे स्थान पर:बीएससी (बैचलर ऑफ साईंस)-बेरोजगारी
दर 28%।दूसरे स्थान पर:बीकॉम (बैचलर ऑफ कॉमर्स)-बेरोजगारी दर 32%।पहले स्थान पर:बीए (बैचलर ऑफ आर्ट्स)-बेरोजगारी दर 37%।उच्च शिक्षा संस्थानों में नामांकित 4.33 करोड (43.3 मिलियन) हैं। स्नातक (यूजी) में उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले इन छात्रों में 79% स्नातक स्तर पर नामांकित हैं।34 मिलियन से अधिक यूजी छात्र आर्ट्स (34%);विज्ञान (15%),वाणिज्य (14%) और इंजीनियरिंग (12%) में डिग्री प्राप्त कर रहे हैं। - स्नातकोत्तर (PG), में 5.1 मिलियन छात्र नामांकित हैं। काॅलेज जाने वाले (आयुवर्ग 18-23 वर्ष) 27% से 29.5% है।उच्च माध्यमिक श्रेणी (कक्षा 11 और 12) 58.4% छात्र नामांकित हैं।इसका अर्थ है कि पात्र आयु वर्ग के लगभग 10 में से 4 बच्चे उच्च माध्यमिक स्तर तक अपनी शिक्षा जारी नहीं रखते हैं,हालांकि भारत की स्कूली आयु के बच्चों (कक्षा 9-12) की विशाल आबादी के कारण कुल नामांकन करोड़ों में हैं।
5.भारत में शहरी और ग्रामीण बेरोजगारी (Urban and Rural Unemployment in India):
- शिक्षित बेरोजगारी से तात्पर्य उस स्थिति से है,जहाँ किसी व्यक्ति के पास डिग्री या डिप्लोमा (मैट्रिक,स्नातक,स्नातकोत्तर) होने और काम करने की इच्छा रखने के बावजूद,उस अपनी क्लालिफाईड के उपयुक्त जॉब नहीं मिल पाता है।यह मुख्य रूप से शहरी क्षेत्रों में पाई जाने वाली एक तरह से महामारी (आर्थिक और सामाजिक समस्या) है।
- आज भारत की सबसे बड़ी समस्या बेरोजगारी (विशेष रूप से युवाओं के बीच) है।शिक्षित होने के बावजूद बेरोजगार ग्रामीण क्षेत्रों के स्नातकों की बेरोजगारी दर शहरी क्षेत्रों के स्नातकों की तुलना में 11.8 प्रतिशत है,जो शहरी क्षेत्रों के स्नातकों की तुलना में 10.6 प्रतिशत बेरोजगारी दर से कहीं अधिक है।स्नातकोत्तर छात्रों में यही रुझान देखने को मिलता है,जिनकी बेरोजगारी दर 10 प्रतिशत है।माध्यमिक शिक्षा या उससे उच्च शिक्षा प्राप्त लोगों की बेरोजगारी दर 6.5 प्रतिशत है,जो डिगी धारकों की तुलना में कम है।
6.शिक्षित बेरोजगारी को दूर करने के उपाय (Measures to Overcome Educated Unemployment):
- नौकरियाँ हैँ कहाँ? 1% नौकरियों के लिए आरक्षण का झुनझुना थमाकर सरकारें अपनी सत्ता बचाए रखते हैं। इस अस्त्र के द्वारा युवाओं में आपस में भेद उत्पन्न किया जाता है।इसके लिए युवाओं की लड़ाई पूरी तरह गलत है।ये कुत्तों के आगे हड्डी फेंकने के समान है।नौकरियों हैं नहीं और उन्हें (युवाओं) बाँटा जा रहा है।होना तो यह चाहिए कि काम के अधिकार को मौलिक अधिकार बनाने का आन्दोलन छेड़ा जाये।
- अगड़े और पिछड़े सभी छात्रों को मिलकर यह लड़ाई लड़नी चाहिए।अभी अगड़े (स्वर्ण) लोग अपने पिछड़े वर्ग के भाइयों के दिल में आक्रोश भर दोगे,तो तुम्हारे बीच दीवार खड़ी हो जाएगी और आने वाले दिनों में ये राजनीतिक दल तुम्हारा कोई आन्दोलन सफल नहीं होने देंगे।इसलिए शिक्षित युवाओं को काम के अधिकार (Right to Work) को मौलिक अधिकार (fundamental right) बनाने के प्रयास तेज करो।अगर अभी नहीं तो कभी नहीं यह मंत्र याद रखो।
- भारत में बेरोजगारी यद्यपि एक गम्भीर समस्या है।लेकिन इसे समझने के लिए जितना प्रयास किया जाना चाहिए वह अभी इस देश में नहीं किया गया है।इस देश में रोजगार पाना व्यक्ति का मूल अधिकार नहीं है और बेरोजगारी व्यक्ति की निजी समस्या मानी जाती है।अतः सरकार की ओर से बेरोजगारी हटाने के कोई ठोस प्रयास नहीं किए जाते हैं।
- शिक्षा को सैद्धान्तिक (theoritical Education) के बजाय रोजगारोन्मुख (Job-oriented) और कौशल-आधारित बनाना होगा।छात्रों को अधिक तकनीकी शिक्षा दी जानी चाहिए ताकि पाठ्यक्रम पूरा होने के तुरन्त बाद उन्हें नौकरी मिल सके।पाठ्यक्रम करियर उन्मुख (career oriented) होने चाहिए। शिक्षा व्यावसायिक (vocational) होनी चाहिए।
- स्नातक पाठ्यक्रम के साथ-साथ व्यावसायिक शिक्षा प्रदान की जानी चाहिए जिससे छात्रों की प्रोडक्टिविटी बढ़े।शिक्षा को लोगों को आत्मनिर्भर और उद्यमी बनने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।इससे उनके लिए नए अवसर खुलने चाहिए।
- शिक्षा और बेरोजगारी के बीच सीधा सम्बन्ध है।12वीं कक्षा तक की स्कूली शिक्षा का प्रत्येक वर्ष बेरोजगारी की दर और अवधि पर प्रभाव डालता है।वर्षों की शिक्षा बेरोजगारी की अपेक्षित अवधि को 4% से अधिक कम कर देती है और सामान्य स्तर या उससे ऊपर की योग्यता प्राप्त करने की बेरोजगारी की अपेक्षित अवधि 12% कम हो जाती है,शर्त यही है कि शिक्षा गुणवत्तापूर्ण हो।
- शिक्षा रोजगार क्षमता को बढ़ाती है यह व्यक्ति को उन ज्ञान,योग्यताओं और क्षमताओं से लैस करती है जिनकी नियोक्ताओं को आवश्यकता होती है।यह उन्मीदवारों को अपेक्षाओं और उद्योग मानकों के अनुरूप कार्य करने में सक्षम बनाती है।शिक्षित लोग बेहतर समस्या समाधान कर्ता,लचीले और आलोचनात्मक विचारक होते हैं।उच्च स्तर की शिक्षा से बेहतर वेतन और आर्थिक स्थिरता प्राप्त होती है।उच्च स्तर की शिक्षा से पेशेवर नौकरियों और विशेषज्ञताओं तक पहुंच मिलती है,जिनमें उच्च वेतन मिलता है।
- माता-पिता की जिम्मेदारी है कि बच्चों को योग्य और सुसंस्कारी बनाएं।माता-पिता की केवल इतनी ही जिम्मेदारी नहीं है कि बच्चों की आर्थिक जरूरतें पूरी करें।बेरोजगारी का यह भी एक कारण है कि माता-पिता बच्चों को आत्मनिर्भर बनाने की तरफ ध्यान नहीं देते हैं।हमने बेरोजगारी पर “What is Unemployment and Solution in Current Education?” लेख लिखा है।आप इस पर पूरी जानकारी चाहते हैं तो इसे पढ़ें।
तात्पर्य यह है कि पहला काम को मौलिक अधिकार बनाया जाना चाहिए और दूसरा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा लागू करनी चाहिए।शिक्षा सैद्धान्तिक ही न हो स्किलबेस्ड हो। उच्च शिक्षा में स्किल बेस्ड शिक्षा का भी समावेश हो। - उपर्युक्त आर्टिकल में भारत में शिक्षित बेरोजगारी:कारण,परिणाम और समाधान (Educated Unemployment in India:Causes,Consequences and Solutions) के बारे में बताया गया है।
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7.आज के युवाओं की स्थिति (हास्य-व्यंग्य) (The state of today’s youth) (Humour-Satire):
- टीटी (छात्र से):टिकट दिखाओ।
- फोन से ईमेल दिखाते हुए,यह रहा।
- टीटी:यह तो ईमेल है।
- छात्र:श्रीमन यह ईमेल सारे विश्व में घूमा सकती है तो क्या मैं मेल (रेल) से दिल्ली भी नहीं जा सकता।
8.भारत में शिक्षित बेरोजगारी:कारण,परिणाम और समाधान (Frequently Asked Questions Related to Educated Unemployment in India:Causes,Consequences and Solutions) से सम्बन्धित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नः
प्रश्नः:1.शिक्षित बेरोजगारी का मुख्य कारण क्या है? (What is the main cause of educated unemployment?):
उत्तरः सबसे बड़ा कारण हमारी शिक्षा प्रणाली कौशल-उन्मुख (Skill-oriented) नहीं होना है,जिससे डिग्री तो मिल जाती है पर बाजार के हिसाब से प्रेक्टिकल स्किल नहीं मिलती है।
प्रश्न:2.भारत में शिक्षित बेरोजगारी को कैसे कम किया जा सकता है? (How can educated unemployment be reduced in India?):
उत्तर:इसको कम करने के लिए व्यावसायिक शिक्षा (vocational training),इंटर्नशिप (Internship programs) और तकनीकी शिक्षा (technical education) पर ज्यादा ध्यान देना होगा,ताकि युवा आत्म-निर्भर बन सकें।
प्रश्न:3.शिक्षित बेरोजगारी का क्या प्रभाव पड़ता है? (What is the impact of educated unemployment?):
उत्तर:युवाओं का और कौशल का सही उपयोग न होने से देश की उत्पादकता (productivity) और आर्थिक विकास प्रभावित होते हैं।इसके साथ ही प्रतिभा पलायन होता है।
- उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर द्वारा भारत में शिक्षित बेरोजगारी:कारण,परिणाम और समाधान (Educated Unemployment in India:Causes,Consequences and Solutions) की प्राइमरी टर्म्स के बारे में जान सकते हैं।
- *”यह आर्टिकल **Satyam Mathematics** ब्लॉग पर **Satyam Coaching Centre** के द्वारा तैयार किया गया है।”*











