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Define Ring in Algebra

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1.बीजगणित में वलय  को परिभाषित करें (Define Ring in Algebra),बीजगणित में वलय उदाहरण (Ring in Algebra Example):

बीजगणित में वलय  को परिभाषित करने (Define Ring in Algebra) के लिए ग्रुप को ठीक से समझ लेना चाहिए।ग्रुप पर लागू गुणधर्म वलय पर भी लागू होते हैं।
प्रमेय (Theorem):1.वलय \left[z_{p}=\{0,1,2, \ldots, p-1\},+_{P}, \bullet_{P} \right] एक पूर्णांकीय प्रान्त है यदि और केवल यदि p अभाज्य है।
(Ring \left[z_{p}=\{0,1,2, \ldots, p-1\},+_{P}, \bullet_{P} \right] is an integral domain iff p is prime.)
उपपत्ति (Proof):क्योंकि z_{p} के अवयव पूर्णांक है इसलिए z_{p} एक क्रमविनिमेय तत्समकी वलय है।
माना कि p एक अभाज्य संख्या है तथा x, y \in z_{p} दो अवयव हैं कि

x \bullet_{P} y=0 तब 
x \bullet_{P} y \Rightarrow p \mid x y \\ \Rightarrow p|x  या p|y
\Rightarrow x=0 या y=0[ \because p अभाज्य है और 0 \leq x<p, 0 \leq y<p
z_{p} के शून्य भाजकों रहित क्रमविनिमेय तत्समकी वलय है अर्थात् z_{p} एक पूर्णांकीय प्रान्त है।
विलोमत: (Conversely):अब माना z_{p} एक पूर्णांकीय प्रान्त है।
पूर्णांकीय प्रान्त की परिभाषानुसार z_{p} शून्य के भाजक रहित होगा अर्थात्
किन्हीं x, y \in z_{p} के लिए x \bullet_{P} y=0 \Rightarrow x=0 या y=0
अब माना p अभाज्य संख्या नहीं है तो p के दो खण्ड माना p_{1}.p_{2} ऐसे होंगे कि
p=p_{1}.p_{2} जहाँ 0<p_{1}<p, 0<p_{2}<p तब  p_{1} \bullet_{P} p_{2}=p_{1} p_{2}=P=0 \Rightarrow z_{p} में p_{1}, p_{2} शून्य भाजक अवयव है।
इसलिए z_{p} पूर्णांकीय प्रान्त नहीं हो सकता जो कि विरोधाभास है अथवा असत्य है।
अतः p अभाज्य संख्या है।
प्रमेय (Theorem):2.किसी तत्समकी वलय के एकाकों का समुच्चय एक गुणनात्मक ग्रुप होता है।
(The set of all units in a ring with unity forms a multiplicative group.)
उपपत्ति (Proof):माना कि R एक तत्समकी वलय है तथा 1,R का गुणन तत्समक अवयव है।माना कि U वलय R के सभी एकाकों (units) का समुच्चय है तब
1.1=1 इसलिए 1 \in U
अतः U में गुणन तत्समक अवयव विद्यमान है।
माना a, b \in U  तब c, d \in U
ऐसे अवयव U में विद्यमान हैं कि
ac=1=ca तथा bd=1=db
अब (ab)(dc)=a(bd)c=a.1.c=a.c=1
तथा (ab)(dc)=d(ca)b=d.1.b=db=1
अतः ab वलय R का एकांक (unit) अवयव है इसलिए
फलतः a \in U ; b \in U \Rightarrow a b \in U
पुनः प्रतिलोम की परिभाषा से c=a^{-1}, d=b^{-1}
साथ ही c तथा d एकांक अवयव है इसलिए c,d \in U
वलय R में दोनों संक्रियाएँ सहचारी है अतः R के अवयव ही U के अवयव हैं इसलिए U में गुणन संक्रिया सहचारी होगी।
फलतः U एक गुणनफल ग्रुप है।
प्रमेय (Theorem):3.यदि वलय R में दो से अधिक अवयव हैं और यह एक तत्समकी वलय है तो सिद्ध कीजिए कि 1 \neq 0
(If R has more than two elements and it is a ring with unity show that 1 \neq 0.)
उपपत्ति (Proof):क्योंकि R में दो से अधिक अवयव हैं इसलिए एक अशून्य अवयव a\in R
अब माना a\in R
अब माना 0=1 तो

0=1 \Rightarrow a \cdot 0=a \cdot 1 \Rightarrow 0=a
जो कि विरोधाभास है
अतः 1 \neq 0 अर्थात् 0 एवं 1 भिन्न अवयव हैं।
प्रमेय (Theorem):4.सिद्ध कीजिए कि प्रत्येक क्षेत्र एक पूर्णांकीय प्रान्त है परन्तु विलोम सत्य हो यह आवश्यक नहीं है।
(Prove that every field is an integral domain but the converse is not necessarily true.)
उपपत्ति (Proof):माना कि F एक क्षेत्र है तथा a, b \in F, a \neq 0 तो
a \cdot b=0 \Rightarrow a^{-1}(a \cdot b)=a^{-1} \cdot 0 [चूँकि a \neq 0, a \in F \Rightarrow a^{-1} \in F ]

\Rightarrow(a^{-1} \cdot a) \cdot b=0 \\ \Rightarrow 1 \cdot b=0 \Rightarrow b=0
इसी प्रकार हम सिद्ध कर सकते है कि b \neq 0 तो

a.b=0 \Rightarrow a=0
फलतः a.b=0 \Rightarrow a=0 या b=0
इसलिए क्षेत्र F के शून्य के भाजक रहित हैं।अतः क्षेत्र F एक पूर्णांकीय प्रान्त है।
परन्तु इसका विलोम सदैव सत्य नहीं होता क्योंकि पूर्णांकों का वलय <z,+,•> एक ऐसा वलय है जो कि पूर्णांकीय प्रान्त तो है इसका प्रत्येक अशून्य अवयव प्रतिलोमी नहीं होता,(-1,1) के अतिरिक्त किसी भी अशून्य अवयव का प्रतिलोम z में नहीं है।
प्रमेय (Theorem):5.सिद्ध कीजिए कि शून्य के भाजकों से रहित एक परिमित क्रमविनिमेय वलय एक क्षेत्र होता है
(Prove that a finite commutative ring without zero divisor is a field.)
उपपत्ति (Proof):माना कि R एक परिमित क्रमविनिमेय वलय तथा शून्य के भाजकों रहित हैं।अतः क्षेत्र की परिभाषा से स्पष्ट है कि R को क्षेत्र सिद्ध करने हेतु हमें यह दर्शित करना होगा कि R इकाई सहित वलय है तथा प्रत्येक शून्येतर (अशून्य) अवयव का गुणन के सम्बन्धित प्रतिलोम R में विद्यमान है।
माना कि वलय R में n-अवयव a_{1},a_{2}, a_{3}, \cdots a_{n} हैं।अब माना कि R का कोई अशून्य अवयव ‘x’ है तब
a_{1} \cdot x,a_{2} \cdot x, a_{3} \cdot x, \cdots a_{n} \cdot x , R के अवयव हैं।
अब हम सिद्ध करेंगे कि उपर्युक्त सभी अवयव भिन्न हैं इसके लिए यदि हम यह मान लें कि
a_{i} \cdot x=a_{j} \cdot x \quad i \neq j \cdots(1)\\ \Rightarrow a_{i} \cdot x-a_{j} \cdot x=0 \\ \Rightarrow\left(a_{i}-a_{j}\right) x=0 \\ \Rightarrow a_{i}-a_{j}=0 या x=0 [क्योंकि R शून्य भाजक रहित है]
परन्तु परिकल्पनानुसार x \neq 0 अतः a_{i}-a_{j}=0 या a_{i}=a_{j}
अतः उपर्युक्त सभी अवयव भिन्न है तथा यह n अवयव R के हैं।

R=\left\{a_{1},a_{2}, a_{3}, \ldots a_{n}\right\} = \left\{a_{1} \cdot x, a_{2} \cdot x, \ldots a_{n} \cdot x \right\}
इससे यह स्पष्ट है कि x \in R है तो a_{i} \in R ऐसा अवयव अवश्य होगा कि

a_{1} \cdot x=x
साथ ही R क्रमविनिमेय वलय है इसलिए

a_{1} x=x=x \cdot a_{1}
यदि y \in R कोई अन्य अवयव है तो किसी a_{m} \in R के लिए
y=a_{m} \cdot x \\ a_{1} \cdot y=y \cdot a_{1}=\left(a_{m} \cdot x\right) \cdot a_{1}=a_{m i}\left(x \cdot a_{1}\right)= a \cdot x=y \\ a_{l}, R का इकाई अवयव है माना कि a_{l}=1
अन्त में 1 \in R \Rightarrow \exists a \in R ऐसा अवयव है कि
परन्तु x तो स्वेच्छित कोई R का अशून्य अवयव है।

1=a.x=x.a
अतः R के प्रत्येक अशून्य अवयव गुणनात्मक प्रतिलोमी है।
फलत: R एक क्षेत्र है।
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2.बीजगणित में वलय  को परिभाषित करें के साधित उदाहरण  (Define Ring in Algebra Solved Examples):

Example:1.सिद्ध कीजिए कि समुच्चय S=\left\{x+y \cdot 3^{\frac{1}{3}}+z \cdot 9^{\frac{1}{3}}| x, y, z \in Q\right\} योग तथा गुणा संक्रिया के लिए वलय है।
(Prove that the set S=\left\{x+y \cdot 3^{\frac{1}{3}}+z \cdot 9^{\frac{1}{3}}| x, y, z \in Q\right\} is a ring with respect to addition and multiplication.)
Solution:(1.)संवृत्तता (Closure Property):
माना S=x_{1}+y_{1} \cdot 3^{\frac{1}{3}}+z_{1} \cdot 9^{\frac{1}{3}}, x_{2}+y_{2} \cdot 3^{\frac{1}{3}}+z_{2} \cdot 9^{\frac{1}{3}} जहाँ x_{1}, y_{1}, z_{1}, x_{2}, y_{2}, z_{2} \in Q \\ x_{1}+y_{1} \cdot 3^{\frac{1}{3}}+z_{1} \cdot 9^{\frac{1}{3}}+x_{2}+y_{2} \cdot 3^{\frac{1}{3}}+z_{2} \cdot 9^{\frac{1}{3}} =\left(x_{1}+x_{2}\right) +\left(y_{1}+y_{2}\right) \cdot 3^{\frac{1}{3}}+\left(z_{1}+z_{2}\right) \cdot 9^{\frac{1}{3}}

तथा \left(x_{1}+y_{1} \cdot 3^{\frac{1}{3}}+z_{1} \cdot 9^{\frac{1}{3}}\right) \cdot\left(x_{2}+y_{2} \cdot 3^{\frac{1}{3}}+z_{2} \cdot 9^{\frac{1}{3}}\right) = x_{1} x_{2}+\left(x_{1} y_{2}+x_{2} y_{1}\right) \cdot 3^{\frac{1}{3}}+\left(x_{1} z_{2}+y_{1} y_{2}+x_{2} z_{1}\right) 3^{\frac{2}{3}}+z_{1} z_{2} 3^{\frac{4}{3}} +3 z_{1} y_{2}+3 y_{1}z_{2} \\ x_{1}+x_{2}, y_{1}+y_{2}, z_{1}+z_{2}, x_{1} x_{2}+3 z_{1} y_{2}+3 y_{1} z_{2}, x_{1} z_{2}+y_{1} y_{2}+x_{2} z_{1}, z_{1} z_{2} \in Q
अतः S योग व गुणन के लिए संवृत्त है।
(2.)योग का साहचर्य (Associativity of Addition):
माना S=x_{1}+y_{1} \cdot 3^{\frac{1}{3}}+z_{1} \cdot 9^{\frac{1}{3}}, x_{2}+y_{2} \cdot 3^{\frac{1}{3}}+z_{2} \cdot 9^{\frac{1}{3}}, x_{3}+y_{3} \cdot 3^{\frac{1}{3}}+z_{3} \cdot 9^{\frac{1}{3}} \\ \left.\left(x_{1} +y_{1} \cdot 3^{\frac{1}{3}}+z_{1} \cdot 9^{\frac{1}{3}}\right)+\left(x_{2}+y_{2} \cdot 3^{\frac{1}{3}}+z_{2} \cdot 9^{\frac{1}{3}}\right)\right]+x_{3}+y_{3} \cdot 3^{\frac{1}{3}}+z_{3} \cdot 9^{\frac{1}{3}} \\ \Rightarrow  \left(x_{1}+x_{2}\right)+\left ( y_{1}+y_{2}\right ) \cdot 3^{\frac{1}{3}}+\left(z_{1}+z_{2}\right) \cdot 9^{\frac{1}{3}}+x_{3}+y_{3} \cdot 3^{\frac{1}{3}}+z_{3} \cdot 9^{\frac{1}{3}} \\ \Rightarrow \left(x_{1} +x_{2} +x_{3} \right)+\left(y_{1}+y_{2}+y_{3}\right) \cdot 3^{\frac{1}{3}}+\left(z_{1}+z_{2} +z_{3} \right) \cdot 9^{\frac{1}{3}} \\ =x_{1}+\left(x_{2}+x_{3}\right)+\left\{y_{1}+\left(y_{2}+y_{3} \right) \right\} \cdot 3^{\frac{1}{3}}+\left\{z_{1}+\left(z_{2}+z_{3}\right) \right\}\cdot 9^{\frac{1}{3}} \\ \Rightarrow \left(x_{1}+ y_{1} \cdot 3^{\frac{1}{3}}+z_{1} \cdot 9^{\frac{1}{3}}\right)+\left[x_{2}+x_{3}+ \left(y_{2}+ y_{3}\right) \cdot 3^{\frac{1}{3}}+\left(z_{2}+z_{3}\right) \cdot 9^{\frac{1}{3}}\right]
अतः S योग के लिए सहचारी होना।
(3.)तत्समक अवयव का अस्तित्व (Existence of Identity):
माना x_{2}+y_{2} 3^{\frac{1}{3}}+z_{2} 9^{\frac{1}{3}} तत्समक अवयव है।

x_{1}+y_{1} \cdot 3^{\frac{1}{3}}+z_{1} \cdot 9^{\frac{1}{3}}+x_{2}+y_{2} \cdot 3^{\frac{1}{3}}+z_{2} \cdot 9^{\frac{1}{3}}=x_{1}+y_{1} \cdot 3^{\frac{1}{3}}+z_{1} 9^{\frac{1}{3}}\\ \Rightarrow x_{2}+y_{2} \cdot 3^{\frac{1}{3}}+z_{2} \cdot 9^{\frac{1}{3}}=0 \\ \Rightarrow x_{2}=0, y_{2}=0, z_{2}=0\\ \Rightarrow x_{2}+y_{2} 3^{\frac{1}{3}}+z_{2} \cdot 9^{\frac{1}{3}}=0+0.3^{\frac{1}{3}}+0.9^{\frac{1}{3}}\\ 0 \in Q
अतः S में तत्समक अवयव का अस्तित्व है।
(4.)प्रतिलोम अवयव का अस्तित्व (Existence of Inverse):

माना x_{2}+y_{2} \cdot 3^{\frac{1}{3}}+z_{2} \cdot 9^{\frac{1}{3}} प्रतिलोम अवयव है।

x_{1}+y_{1} \cdot 3^{\frac{1}{3}}+z_{1} \cdot 9^{\frac{1}{3}}+x_{2}+y_{2} \cdot 3^{\frac{1}{3}}+z_{2} \cdot 9^{\frac{1}{3}}=0+0.3^{\frac{1}{3}}+0.9^{\frac{1}{3}} \\ \Rightarrow x_{2}+y_{2} \cdot 3^{\frac{1}{3}}+z_{2} \cdot 9^{\frac{1}{3}}=-x_{1}-y_{1} \cdot 3^{\frac{1}{3}}-z_{1} \cdot 9^{\frac{1}{3}} \\ \Rightarrow x_{2}=-x_{1}, y_{2}=-y_{1}, z_{2}=-z_{1} \\ \Rightarrow -x_{1},-y_{1},-z_{1} \in Q
अतः S में प्रतिलोम अवयव का अस्तित्व है।
(5.)गुणन का साहचर्य (Associativity of Multiplication):

\left[\left(x_{1}+y_{1} \cdot 3^{\frac{1}{3}}+z_{1} \cdot 9^{\frac{1}{3}}\right) \cdot\left(x_{2}+y_{2} \cdot 3^{\frac{1}{3}}+z_{2} \cdot 9^{\frac{1}{3}}\right)\right]\left(x_{3}+y_{3} \cdot 3^{\frac{1}{3}}+z_{3} \cdot 9^{\frac{1}{3}}\right) \\ =\left(x_{1}+y_{1} \cdot 3^{\frac{1}{3}}+z_{1} \cdot 9^{\frac{1}{3}}\right) \left[\left(x_{2}+y_{2} \cdot 3^{\frac{1}{3}}+z_{2} \cdot 9^{\frac{1}{3}} \right) \cdot\left(x_{3}+y_{3} \cdot 3^{\frac{1}{3}}+z_{3} \cdot 9^{\frac{1}{3}}\right)\right]
अतः S गुणन संक्रिया सहचारी है।
(6.)योग क्रमविनिमेय (Commutativity of Addition):

x_{1}+y_{1} \cdot 3^{\frac{1}{3}}+z_{1} \cdot 9^{\frac{1}{3}}+ x_{2}+y_{2} \cdot 3^{\frac{1}{3}}+z_{2} \cdot 9^{\frac{1}{3}}=x_{1}+x_{2}+\left(y_{1}+y_{2}\right) \cdot 3^{\frac{1}{3}}+\left(z_{1}+z_{2}\right) \cdot 9^{\frac{1}{3}} \\ =x_{2}+x_{1}+\left(y_{2}+y_{1}\right) \cdot 3^{\frac{1}{3}}+\left(z_{2}+z_{1}\right) \cdot 9^{\frac{1}{3}} \\ \Rightarrow x_{1}+y_{1} \cdot 3^{\frac{1}{3}}+z_{1} \cdot 9^{\frac{1}{3}}=\left(x_{2}+y_{2} \cdot 3^{\frac{1}{3}}+z_{2} \cdot 9^{\frac{1}{3}} \right)+\left(x_{1}+y_{1} \cdot 3^{\frac{1}{3}} +z_{1} \cdot 9^{\frac{1}{3}}\right) +x_{2}+y_{2} \cdot 3^{\frac{1}{3}}+z_{2} \cdot 9^{\frac{1}{3}}
अतः S में योग संक्रिया सहचारी है।
(7.)गुणन की योग पर बंटनशीलता (Distributivity of Multiplication):
माना S=x_{1}+y_{1} \cdot 3^{\frac{1}{3}}+z_{1} \cdot 9^{\frac{1}{3}}, x_{2}+y_{2} \cdot 3^{\frac{1}{3}}+z_{2} \cdot 9^{\frac{1}{3}}, x_{3}+y_{3} \cdot 3^{\frac{1}{3}}+z_{3} \cdot 9^{\frac{1}{3}} \\ \Rightarrow \left(x_{1}+y_{1} \cdot 3^{\frac{1}{3}}+z_{1} \cdot 9^{\frac{1}{3}} \right) \cdot\left[x_{2}+y_{2} \cdot 3^{\frac{1}{3}}+z_{2} \cdot 9^{\frac{1}{3}}+x_{3}+y_{3} \cdot 3^{\frac{1}{3}}+z_{3} \cdot 9^{\frac{1}{3}}\right] \\ \Rightarrow\left(x_{1}+y_{1} \cdot 3^{\frac{1}{3}}+z_{1} \cdot 9^{\frac{1}{3}}\right) \left[\left(x_{2}+x_{3}\right)+y_{2} \cdot 3^{\frac{1}{3}} +y_{3} \cdot 3^{\frac{1}{3}}+z_{2} 9^{\frac{1}{3}}+z_{3} \cdot 9^{\frac{1}{3}}\right]\\ \Rightarrow x_{1} x_{2}+x_{1} x_{3}+x_{1} y_{2} \cdot 3^{\frac{1}{3}}+x_{1} y_{3} \cdot 3^{\frac{1}{3}}+x_{1} y_{3} \cdot 3^{\frac{1}{3}}+x_{3} y_{1} \cdot 3^{\frac{1}{3}}+y_{1} y_{2} \cdot 3^{\frac{2}{3}}+ y_{1} y_{3} \cdot 3^{\frac{2}{3}}+3 y_{1} z_{2} +3 y_{1} z_{3}+x_{2} z_{1} \cdot 9^{\frac{1}{3}}+x_{3} z_{1} \cdot 9^{\frac{1}{3}}+3y_{2} z_{1}+3 y_{3} z_{1}+z_{1} z_{2} \cdot 9^{\frac{2}{3}}+z_{1} z_{3} \cdot 9^{\frac{2}{3}}\\ =x_{1} x_{2}+x_{1} x_{3}+3 y_{2} z_{1}+3 y_{3} z_{1}+3 y_{1}z_{2}+ 3y_{1}z_{3}+\left(x_{1} y_{2}+x_{1} y_{3}+x_{2} y_{1}+x_{3} y_{1}+x_{1}y_{2}+x_{1}y_{3}\right)\cdot 3^{\frac{1}{3}}+\left(y_{1} y_{2}+y_{1} y_{3}+x_{2} z_{1}+x_{3} z_{1}\right) 9^{\frac{1}{3}}+\left(z_{1} z_{2}+z_{2} z_{3}\right) 9^{\frac{1}{3}} \\ \Rightarrow \left(x_{1}+y_{1}\cdot 3^{\frac{1}{3}}+z_{1} \cdot 9^{\frac{1}{3}}\right)\left(x_{2}+y_{2} \cdot 3^{\frac{1}{3}}+z_{2} \cdot 9^{\frac{1}{3}} \right)+\left(x_{1}+ y_{1} \cdot 3^{\frac{1}{3}}+z_{1} \cdot 9^{\frac{1}{3}} \right) \cdot\left(x_{3}+y_{3} \cdot 3^{\frac{1}{3}}+z_{3} \cdot 9^{\frac{1}{3}}\right) \\ = x_{1} x_{2}+x_{1} x_{3}+3 y_{1} z_{2}+3 y_{2} z_{1}+3 y_{3} z_{1}+3 y_{1} z_{3}+\left(x_{1} y_{2}+x_{1} y_{3}+x_{2} y_{1}+x_{3} y_{1}+x_{1} y_{2}+x_{1} y_{3}\right) 3^{\frac{1}{3}}+\left(y_{1} y_{2}+y_{1} y_{3}+x_{2} z_{1}+x_{3} z_{1}\right) 9^{\frac{1}{3}}+\left(z_{1} z_{2}+z_{1} z_{3}\right) 9^{\frac{2}{3}}
अतः \left(x_{1}+y_{1} \cdot 3^{\frac{1}{3}}+z_{1} \cdot 9^{\frac{1}{3}} \right) \cdot\left[\left(x_{2} +y_{2} \cdot 3^{\frac{1}{3}}+z_{2} \cdot 9^{\frac{1}{3}} \right)+\left(x_{3}+y_{3} \cdot 3^{\frac{1}{3}}+z_{3} \cdot 9^{\frac{1}{3}}\right)\right]\\ =\left(x_{1}+y_{1} 3^{\frac{1}{3}}+z_{1} 9^{\frac{1}{3}}\right)\left(x_{2} +y_{2} 3^{\frac{1}{3}}+z_{2} \cdot 9^{\frac{1}{3}}\right)+\left(x_{1}+y_{1} \cdot 3^{\frac{1}{3}}+z_{1} \cdot 9^{\frac{1}{3}}\right) \cdot \left(x_{3}+y_{3} 3^{\frac{1}{3}}+z_{3} 9^{\frac{1}{3}}\right)
S में योग की गुणन पर बंटनशीलता है।
Example:2. (R,+,\bullet ) एक वलय है जिसमें \odot निम्न प्रकार परिभाषित है

a \odot b=a \cdot b+b \cdot a \forall a, b \in R
सिद्ध कीजिए कि (R,+,\bullet ) एक क्रमविनिमेय वलय है।
(is a ring in which \odot is defined as)

a \odot b=a \cdot b+b \cdot a \forall a, b \in R
Solution: a \odot b=a \cdot b+b \cdot a \forall a, b \in R \\ b \odot a=b \cdot a+a \cdot b \\ a \odot b=a \cdot b+b \cdot a=b \cdot a+a \cdot b=b \odot a
अतः यह एक क्रमविनिमेय वलय है।

Example:3.सिद्ध कीजिए कि बीजीय संरचना \left(z_{6},+_{6}, \bullet_{6}\right) एक क्रमविनिमेय तत्समकी वलय है जहाँ z_{6}=\left \{ 0,1,2,3,4,5 \right \} क्या यह एक पूर्णांकीय प्रान्त है?
(Prove that the algebraic structure \left(z_{6},+_{6}, \bullet_{6}\right) is a commutative ring with unity where z_{6}=\left \{ 0,1,2,3,4,5 \right \}.Is it an integral domain?)
Solution:तथा के लिए संक्रिया सारणी निम्न हैं

\begin{array}{c|cccccc} +_{6} & 0 & 1 & 2 & 3 & 4 & 5 \\ \hline 0 & 0 & 1 & 2 & 3 & 4 & 5 \\ 1 & 1 & 2 & 3 & 4 & 5 & 0 \\ 2 & 2 & 3 & 4 & 5 & 0 & 1 \\ 3 & 3 & 4 & 5 & 0 & 1 & 2 \\ 4 & 4 & 5 & 0 & 1 & 2 & 3 \\ 5 & 5 & 0 & 1 & 2 & 3 & 4 \end{array} \quad \quad \begin{array}{c|cccccc} \bullet_{6} & 0 & 1 & 2 & 3 & 4 & 5 \\ \hline 0 & 0 & 0 & 0 & 0 & 0 & 0 \\ 1 & 0 & 1 & 2 & 3 & 4 & 5 \\ 2 & 0 & 2 & 4 & 0 & 2 & 4 \\ 3 & 0 & 3 & 0 & 3 & 0 & 3 \\ 4 & 0 & 4 & 2 & 0 & 4 & 2 \\ 5 & 0 & 5 & 4 & 3 & 2 & 1 \end{array}
(1.)संवृत्तता (Closure Property):सारणी +_{6}  व \bullet_{6} का प्रत्येक अवयव z_{6} का अवयव है।अतः +_{6}\bullet_{6} के लिए बीजीय संरचना संवृत्त है।
(2.)साहचर्यता (Associativity):माना x,y,z तीन कोई स्वेच्छ अवयव हैं।उदाहरणार्थ तो

x +_{6}(b +_{6} c)=a +_{6}(b+c) [ \because b +_{6} c\equiv b+c (mod 6) ]
=least non negative remainder when a+(b+c) is divided by 6
=least non-negative remainder when (a+b)+c is divided by 6

\Rightarrow (a+b) +_{6} c=(a+b)+_{6} c [ \because  a+b \equiv a +_{6} b (mod 6) ]
इसीलिए प्रकार a \bullet_{6} (b \bullet_{6} c) =(a \bullet_{6} b) \bullet_{6} c \forall a,b,c \in z_{6}
अतः z_{6},+_{6} तथा \bullet_{6} के लिए साहचर्यता का पालन करता है।
(3.)तत्समक अवयव का अस्तित्व (Existence of Identity):
0 \in z_{6} अतः संक्रिया सारणी से:
0 +_{6} a=a=a +_{6} 0 फलतः 0 योग के लिए तत्समक अवयव है।
(4.)प्रतिलोम अवयव का अस्तित्व (Existence of Inverse):
योग की संक्रिया सारणी से स्पष्ट है कि 0,1,2,3,4,5 का प्रतिलोम 0,5,4,3,2,1 है।उदाहरण के लिए
5+_{6} 1=0=1 +_{6}5 \Rightarrow 1,5 का प्रतिलोम है।
(5.)योग का क्रमविनिमेय (Commutativity of Addition):
संक्रिया सारणी सममित है अतः योग संक्रिया क्रमविनिमेय है।
(6.)गुणन की योग पर बंटनशीलता (Distributivity of Multiplication over Addition):

a\bullet_{6}(b +_{6} c)=a \bullet_{6} (b+c) \quad[\because b +_{6} c \equiv b +_{6} c (mod 6)]
=least non-negative remainder when a(b+c) is divided by 6
=least non-negative remainder when ab+ac is divided by 6

(ab) +_{6} (ac) \\ (a \bullet_{6} b ) +_{6}(ac) [ \because a \bullet_{6} b \equiv ab (mod 6)]

(a \bullet_{6} b ) +_{6} (a \bullet_{6} c ) [ \because a \bullet_{6} c \equiv ac (mod 6)]
इसी प्रकार हम सिद्ध कर सकते हैं कि (b +_{6} c) \bullet_{6} a=(b \bullet_{6} a) +_{6} (c \bullet_{6} a)
अतः गुणन की योग पर बंटनशीलता का पालन करता है।
फलतः z_{6} एक क्रमविनिमेय वलय है।
(7.)गुणन का तत्समक (Identity of Multiplication)
\bullet_{6} के लिए 1 तत्समक अवयव विद्यमान हैं।अतः z_{6} क्रमविनिमेय तत्समकी वलय है।
उपर्युक्त \bullet_{6} संक्रिया सारणी में 2 व 3 शून्य नहीं है परन्तु 2 \bullet_{6} 3=0
वलय में ऐसे अवयव का अस्तित्व है जो शून्य नहीं है परन्तु गुणनफल शून्य है।अतः वलय शून्य भाजक रहित नहीं है।फलतः यह एक पूर्णांकीय प्रान्त नहीं है।
Example:4.यदि R एक वलय हो जिसमें 1 तत्समक है तो a,b,c,d \in R के लिए सिद्ध कीजिए कि
(If R is a ring and 1 is the unity then a,b,c,d \in R for prove that)
(i)(-1)a=-a=a(-1)
(ii)(-1)(-1)=1

(iii)(a+b)^{2}=a^{2}+a b+b a+b^{2}
(iv)(a-b)-c=a-(b+c)
Solution:(i)(-1)a=-a=a(-1)
1 वलय का तत्समक है अतः
a.1=a=1.a …..(1)
[1+(-1)].A=1.a+(-1).a [वाम बंटनशीलता से \forall a \in R ]

0.a=a+(-1)a \Rightarrow 0=a+(-1)a

\Rightarrow (-1)a=-a….(1)
इसी प्रकार a[1+(-1)]=a.1+a.(-1)

\Rightarrow a.0=a+a(-1) \Rightarrow 0=a+a(-1)

a(-1)=-a……(2)

(1) व (2) से 

(-1)a=-a=a(-1)
(ii)(-1)(-1)=1
उपर्युक्त परिणाम (2) से:
a (-1)=-a
a=-1 रखने पर:
(-1)(-1)=-(-1)
=योगात्मक प्रतिलोम (1 का योगात्मक प्रतिलोम)
=(-1) का योगात्मक प्रतिलोम
=1\left [ \because (a^{-1})^{-1}=a \right ]

\Rightarrow (-1)(-1)=1

(iii)(a+b)^{2} =a^{2}+a b+b a+b^{2} \\ \Rightarrow(a+b)^{2} =(a+b) \cdot(a+b) \\=a(a+b)+b(a+b) \\=a.a+a.b+b.a+b.b \\ \Rightarrow (a+b)^{2} =a^{2}+a b+b a+b^{2}
(iv)(a-b)-c=a-(b+c)
(a-b)-c=[a+(-b)]+(-c)
=a+(-b)+(-c)
=a+[(-b)+(-c)]
=a+(-b-c)
=a+[-(b+c)]
=a-(b+c)
(a-b)-c=a-(b+c)
Example:5.सिद्ध कीजिए कि प्रत्येक 2 अभिलक्षण वाली क्रमविनिमेय वलय में
(Prove that in every commutative ring of characteristics 2)

(a+b)^{2}=a^{2}+b^{2}
Solution:(a+b)^{2} =(a+b)(a+b)

=a(a+b)+b(a+b) [दक्षिण बंटनशीलता से ]

=(a a+a b)+(b a+b b)[वाम बंटनशीलता से ]
=a^{2}+a b+b a+b^{2}\\ =a^{2}+a b+a b+b^{2} [क्रमविनिमेय वलय है]

=a^{2}+2 a b+b^{2}
अभिलक्षण 2 है अतः 2ab=0

\Rightarrow(a+b)^{2}=a^{2}+b^{2}
उपर्युक्त उदाहरणों के द्वारा बीजगणित में वलय  को परिभाषित करें (Define Ring in Algebra),बीजगणित में वलय उदाहरण (Ring in Algebra Example) को समझ सकते हैं।

3.बीजगणित में वलय  को परिभाषित करें पर आधारित सवाल (Questions Based on Define Ring in Algebra):

(1.)यदि a \oplus b=a+b+1 तथा a \odot b=a+b+ab है जिसमें a,b \in R वास्तविक संख्याएँ हैं तो सिद्ध कीजिए कि (R,\oplus ,\odot ) एक क्षेत्र है।
(For any real numbers a,b \in R we define a\oplus b=a+b+1 and a \odot b=a+b+ab then show that (R,\oplus ,\odot ) is a field.)
(2.)सिद्ध कीजिए m+n \sqrt{2} कि जहाँ m तथा n पूर्णांक हों,आकार की वास्तविक संख्याओं का समुच्चय संख्याओं के योग एवं गुणन के लिए वलय है।
(Prove that the set of all real numbers of the form m+n \sqrt{2} where m and n are integers with ordinary addition and multiplication forms a ring.)
उपर्युक्त सवालों को हल करने पर बीजगणित में वलय  को परिभाषित करें (Define Ring in Algebra),बीजगणित में वलय उदाहरण (Ring in Algebra Example) को ठीक से समझ सकते हैं।

Also Read This Article:-Ring in Algebraic Structures

4.बीजगणित में वलय  को परिभाषित करें (Define Ring in Algebra),बीजगणित में वलय उदाहरण (Ring in Algebra Example) के सम्बन्ध में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:

प्रश्न:1.शून्य भाजक सहित वलय की परिभाषा दो। (Define the ring with zero divisor):

उत्तर:एक वलय R शून्य भाजक सहित वलय कहलाता है यदि R के ऐसे दो अवयव a,b विद्यमान हों कि a\neq 0,b \neq 0 तथा a.b=0
इस स्थिति में a,R का एक वाम शून्यभाजक (left zero divisor) कहलाता है तथा b,R का एक दक्षिण शून्यभाजक (Right zero divisor) कहलाता है।

प्रश्न:2.शून्यभाजक रहित वलय की परिभाषा दो। (Define a ring without zero divisor):

उत्तर:एक वलय R,शून्य भाजक रहित वलय कहलाता है यदि R के ऐसे दो अवयव विद्यमान होना सम्भव नहीं हो कि a\neq 0,b \neq 0 तथा a.b=0 अर्थात् शून्य भाजक रहित होगा
यदि a.b=0 \Rightarrow या तोa=0 या b=0

प्रश्न:3.पूर्णांकीय प्रान्त (डोमेन) की परिभाषा दो। (Define the integral domain):

उत्तर:एक वलय जो कि इकाई सहित हो तथा शून्य भाजक रहित तथा क्रमविनिमेय हो तो उस वलय को पूर्णांकीय प्रान्त कहते हैं।
(A ring with unity without zero divisor and commutative is called integral domain.)
उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर द्वारा बीजगणित में वलय  को परिभाषित करें (Define Ring in Algebra),बीजगणित में वलय उदाहरण (Ring in Algebra Example) के बारे में ओर अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

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Define Ring in Algebra

बीजगणित में वलय  को परिभाषित करने
(Define Ring in Algebra)

Define Ring in Algebra

बीजगणित में वलय  को परिभाषित करने (Define Ring in Algebra) के लिए ग्रुप
को ठीक से समझ लेना चाहिए।ग्रुप पर लागू गुणधर्म वलय पर भी लागू होते हैं।

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