Menu

Simple properties of Groups

1.ग्रुप के साधारण गुणधर्म (Simple properties of Groups)-

ग्रुप के साधारण गुणधर्म (Simple properties of Groups) का अध्ययन करने से पूर्व हमने ग्रुप की परिभाषा,ग्रुप की द्विचर संक्रिया,तत्समक अवयव का अस्तित्त्व,प्रतिलोम अवयव का अस्तित्त्व इत्यादि के बारे में अध्ययन किया था।
अब प्रश्न उठता है कि क्या तत्समक अवयव,क्या एक अवयव के एक से अधिक प्रतिलोम अवयव होता है?इस आर्टिकल में यह सिद्ध करेंगे कि तत्समक अवयव अद्वितीय होता है तथा किसी एक अवयव के एक से अधिक प्रतिलोम अवयव नहीं हो सकते हैं।

2.ग्रुप के साधारण गुणधर्म (Simple properties of Groups) पर आधारित प्रमेय-

प्रमेय (Theorem)1.यदि \left( G,\ast \right) एक ग्रुप है तो
(1.)G का तत्समक अवयव अद्वितीय होता है
(2.)प्रत्येक a\in G का प्रतिलोम अद्वितीय होता है
(3.)\forall a\in G,{ \left( { a }^{ -1 } \right) }^{ -1 }=a
(4.)\forall a,b\in G,{ \left( a\ast b \right) }^{ -1 }={ b }^{ -1 }\ast { a }^{ -1 }(उत्क्रमण नियम)
If \left( G,\ast \right) be a group then
(1.)The identity of G is unique
(2.)Every a\in G has a unique inverse in G.
(3.)For every \forall a\in G,{ \left( { a }^{ -1 } \right) }^{ -1 }=a
(4.)For all \forall a,b\in G,{ \left( a\ast b \right) }^{ -1 }={ b }^{ -1 }\ast { a }^{ -1 }
उपपत्ति (Proof)-(1.) प्रमेय \left( G,\ast \right) में दिया हुआ ग्रुप है।तत्समक अवयव अद्वितीय होता है।इसे हम विरोधाभास से सिद्ध करेंगे।
माना कि दो तत्समक अवयव { e }_{ 1 } तथा { e }_{ 2 } हैं।
अब यदि { e }_{ 1 },G का तत्समक अवयव है तो

{ e }_{ 1 }\ast { e }_{ 2 }={ e }_{ 2 }\ast { e }_{ 1 }={ e }_{ 2 }....(1)
इसी प्रकार यदि{ e }_{ 2 },G का तत्समक अवयव है तो 

\Rightarrow { e }_{ 2 }\ast { e }_{ 1 }={ e }_{ 1 }\ast { e }_{ 2 }={ e }_{ 1 }.....(2)

समीकरण (1) तथा ( 2) से-

{ e }_{ 2 }={ e }_{ 1 }\ast { e }_{ 2 }={ e }_{ 2 }\ast { e }_{ 1 }={ e }_{ 1 }\\ \Rightarrow { e }_{ 1 }={ e }_{ 2 }
अतः G में तत्समक अवयव अद्वितीय होता है।
आपको यह जानकारी रोचक व ज्ञानवर्धक लगे तो अपने मित्रों के साथ इस गणित के आर्टिकल को शेयर करें ।यदि आप इस वेबसाइट पर पहली बार आए हैं तो वेबसाइट को फॉलो करें और ईमेल सब्सक्रिप्शन को भी फॉलो करें जिससे नए आर्टिकल का नोटिफिकेशन आपको मिल सके ।यदि आर्टिकल पसन्द आए तो अपने मित्रों के साथ शेयर और लाईक करें जिससे वे भी लाभ उठाए ।आपकी कोई समस्या हो या कोई सुझाव देना चाहते हैं तो कमेंट करके बताएं। इस आर्टिकल को पूरा पढ़ें।
(2.)माना कि ग्रुप G के किसी अवयव a के दो प्रतिलोम अवयव b तथा c हैं तो

a\ast b=b\ast a=e
तथा a\ast c=c\ast a=e\\ b=b\ast e=b\ast \left( a\ast c \right) \\ =\left( b\ast a \right) \ast c\\ =e\ast c\\ b=c

अतः ग्रुप G में प्रत्येक अवयव का प्रतिलोम अद्वितीय होता है।यदि G के अवयव a के प्रतिलोम को { a }^{ -1 } से प्रदर्शित करे तो
b=c={ a }^{ -1 } अर्थात् a.{ a }^{ -1 }=e

(3.)माना G का तत्समक अवयव e तथा a का प्रतिलोम अवयव { a }^{ -1 }   हो तो-

a\ast { a }^{ -1 }={ a }^{ -1 }\ast a=e\\ { a }^{ -1 }\ast a=e\Rightarrow { \left( { a }^{ -1 } \right) }^{ -1 }\ast \left( { a }^{ -1 }\ast a \right) ={ \left( { a }^{ -1 } \right) }^{ -1 }\ast e\\ \Rightarrow \left[ { \left( { a }^{ -1 } \right) }^{ -1 }\ast { a }^{ -1 } \right] \ast a={ \left( { a }^{ -1 } \right) }^{ -1 }\\ \Rightarrow e\ast a={ \left( { a }^{ -1 } \right) }^{ -1 }\\ \Rightarrow a={ \left( { a }^{ -1 } \right) }^{ -1 }
इसी प्रकार a\ast { a }^{ -1 }=e\Rightarrow a={ \left( { a }^{ -1 } \right) }^{ -1 }

अतः { a }^{ -1 }  का प्रतिलोम a है।
(4.)माना कि a,b\in G तथा a व b के प्रतिलोम \left( G,\ast \right) में क्रमशः { a }^{ -1 } तथा { b }^{ -1 } है तब

a\ast { a }^{ -1 }=e={ a }^{ -1 }\ast a.....(1)\\ b\ast { b }^{ -1 }=e={ b }^{ -1 }\ast b......(2)
तथा \left( a\ast b \right) \ast \left( { b }^{ -1 }\ast { a }^{ -1 } \right) =a\ast \left[ b\ast \left( { b }^{ -1 }\ast { a }^{ -1 } \right) \right] \\ =a\ast \left[ \left( b\ast { b }^{ -1 } \right) \ast { a }^{ -1 } \right] \\ =a\ast \left( e\ast { a }^{ -1 } \right) \\ =a\ast { a }^{ -1 }\\ =e
इसी प्रकार यह सिद्ध किया जा सकता है कि

\left( { b }^{ -1 }\ast { a }^{ -1 } \right) \ast \left( a\ast b \right) =e
अतः { \left( a\ast b \right) }^{ -1 }={ b }^{ -1 }\ast { a }^{ -1 }
इस नियम को उत्क्रमण नियम कहते हैं।

उपर्युक्त प्रमेय द्वारा ग्रुप के साधारण गुणधर्म (Simple properties of Groups) को समझा जा सकता है।

प्रमेय (Theorem) 2: सिद्ध कीजिए कि यदि \left( G,\ast \right) एक ग्रुप है तथा a,x,y\in G तब
(Prove that in a group  \left( G,\ast \right)  for any \left( G,\ast \right) )
(1.)वाम काटने का नियम (Left cancellation Law)

a\ast x=a\ast y\Rightarrow x=y
(2.) दक्षिण काटने का नियम (Right cancellation Law)

x\ast a=y\ast a\Rightarrow x=y
उपपत्ति (Proof):प्रमेय में दिया है कि \left( G,\ast \right) एक ग्रुप है तथा a\in b अतः G में a का प्रतिलोम { a }^{ -1 } विद्यमान होगा

a\ast { a }^{ -1 }=e={ a }^{ -1 }\ast a
अब a\ast x=a\ast y को { a }^{ -1 } से पूर्व संक्रिया कराने पर

{ a }^{ -1 }\ast \left( a\ast x \right) ={ a }^{ -1 }\ast \left( a\ast y \right) \\ \Rightarrow \left( { a }^{ -1 }\ast a \right) \ast x=\left( { a }^{ -1 }\ast a \right) \ast y\\ \Rightarrow e\ast x=e\ast y\\ \Rightarrow x=y
इसी प्रकार समीकरण x\ast a=y\ast a के दोनों पक्षों को हे { a }^{ -1 } उत्तर संक्रिया (post operation) कराने पर सिद्ध किया जा सकता है कि

x\ast a=y\ast a\Rightarrow x=y

उपर्युक्त प्रमेय द्वारा ग्रुप के साधारण गुणधर्म (Simple properties of Groups) को समझा जा सकता है।
प्रमेय (Theorem)3:यदि a तथा b किसी ग्रुप \left( G,\ast \right) के कोई दो अवयव हो तो समीकरण a\ast x=b तथा y\ast a=b के ग्रुप G में अद्वितीय हल होते हैं।
(If a,b are any two elements of a group \left( G,\ast \right)   then the equations a\ast x=b and y\ast a=b have unique solution in G .)

उपपत्ति (Proof): \forall a,b\in G\\ a\ast \left( { a }^{ -1 }\ast b \right) =\left( a\ast { a }^{ -1 } \right) \ast b\\ =e\ast b\\ =b

स्पष्ट है कि { a }^{ -1 }\ast b समीकरण a\ast x=b का एक हल है।यह सिद्ध करने के लिए कि x={ a }^{ -1 }\ast b समीकरण का अद्वितीय हल है।
माना कि a\ast x=b  के दो हल { x }_{ 1 } तथा { x }_{ 2 } हैं

a\ast { x }_{ 1 }=b तथा a\ast { x }_{ 2 }=b

परन्तु

a\in G,{ x }_{ 1 }\in G\Rightarrow a\ast { x }_{ 1 }\in G
तथा a\in G,{ x }_{ 2 }\in G\Rightarrow a\ast { x }_{ 2 }\in G

\therefore a\ast { x }_{ 1 }=a\ast { x }_{ 2 }\Rightarrow { x }_{ 1 }={ x }_{ 2 }

अतः a\ast x=b  का ग्रुप G में अद्वितीय हल { a }^{ -1 }\ast x है।
इसी प्रकार हम सिद्ध कर सकते हैं कि y\ast a=b का G में अद्वितीय हल b\ast { a }^{ -1 } है।

उपर्युक्त प्रमेय द्वारा ग्रुप के साधारण गुणधर्म (Simple properties of Groups) को समझा जा सकता है।
प्रमेय (Theorem) 4:एक अरिक्त समुच्चय G द्विचर संक्रिया \ast सहित एक ग्रुप होगा यदि और केवल यदि
(1.)a\ast \left( b\ast c \right) =\left( a\ast b \right) \ast c\forall a,b,c\in G(सहचारिता)
(2.) \forall a,b\in G के लिए समीकरणों a\ast x=b  तथा  y\ast a=b के हल G में अद्वितीय हों
(A nonvoid set G with a binary operation \ast is a group iff
(1.)a\ast \left( b\ast c \right) =\left( a\ast b \right) \ast c\forall a,b,c\in G
(2.)\forall a,b\in G  the equations a\ast x=b  and y\ast a=b have unique solution in G.
अथवा (or)
यदि किसी सेमीग्रुप G में प्रत्येक अवयव a,b\in Gके लिए समीकरण ax=b तथा ya=b के अद्वितीय हल हों तो G एक ग्रुप होता है।
(Prove that a semigroup G is a group if for all elementa,b\in G,the equation ax=b and ya=b have unique solutions in G.)
उपपत्ति (Proof):प्रतिबन्धों की आवश्यकता (Necessary Condition):
माना कि \left( G,\ast \right) एक ग्रुप है तो ग्रुप की परिभाषानुसार तथा प्रमेय 3 के अनुसार उपर्युक्त प्रतिबन्ध सत्य है।
प्रतिबन्धो की पर्याप्तता (Sufficient condition):
माना कि G में प्रतिबन्ध सत्य है। अतः ग्रुप के लिए तत्समक तथा प्रतिलोम होना अनिवार्य है।
अब क्योंकि G अरिक्त समुच्चय है इसलिए G में कम से कम एक अवयव है।माना a\in Gद्वितीय प्रतिबन्ध से G में दो अद्वितीय अवयव { e }_{ 1 }तथा { e }_{ 2 }प्राप्त किए जा सकते हैं कि 

a\ast e=a.....(1)\\ { a }^{ \prime }\ast a=a.....(2)
माना G का स्वेच्छ अवयव b है (arbitrary element of G ) तो द्वितीय प्रतिबन्ध से x तथा y ,G के ऐसे अवयव प्राप्त हो सकते हैं कि
 a\ast b,y\ast a=b
अब b\ast e=\left( y\ast a \right) \ast e=y\ast \left( a\ast e \right) =y\ast a=b
तथा { e }^{ \prime }\ast b={ e }^{ \prime }\ast \left( a\ast x \right) =\left( { e }^{ \prime }\ast a \right) \ast x=a\ast x=b
अतः b\ast e=b,{ e }^{ \prime }\ast b=b.....(3)
क्योंकि b एक स्वेच्छ अवयव है इसलिए b को हम e तथा { e }^{ \prime } लेकर (3) में रखने पर-

{ e }^{ \prime }\ast e={ e }^{ \prime },{ e }^{ \prime }\ast e=e\Rightarrow { e=e }^{ \prime }

अतः e= { e }^{ \prime } अद्वितीय है तथा G का तत्समक अवयव है।
पुनः द्वितीय प्रतिबन्ध से के लिए समीकरण a\ast x=e तथा y\ast a=e के G में अद्वितीय हल होंगे यदि हल क्रमशः { x }_{ 1 } तथा { y }_{ 1 } हों तो a\ast { x }_{ 1 } तथा { y }_{ 1 }\ast a=e\Rightarrow { x }_{ 1 } तथा { y }_{ 1 } दक्षिण तथा वाम प्रतिलोम है।

a\ast { x }_{ 1 }=e\Rightarrow { y }_{ 1 }\ast \left( a\ast { x }_{ 1 } \right) ={ y }_{ 1 }\ast e\\ \Rightarrow \left( { y }_{ 1 }\ast a \right) \ast { x }_{ 1 }={ y }_{ 1 }\\ \Rightarrow e\ast { x }_{ 1 }={ y }_{ 1 }\\ \Rightarrow { x }_{ 1 }={ y }_{ 1 }
अतः x ,स्वेच्छ अवयव a का अद्वितीय प्रतिलोम (Unique Inverse) है जो G में विद्यमान है।फलत: G एक ग्रुप (समूह) है।

उपर्युक्त प्रमेय द्वारा ग्रुप के साधारण गुणधर्म (Simple properties of Groups) को समझा जा सकता है।

Also Read This Article:-Laurent theorem for complex functions

3.ग्रुप के साधारण गुणधर्म (Simple properties of Groups) पर आधारित उदाहरण

Example-1.यदि a,b,c एक आबेली ग्रुप \left( G,\ast \right) के अवयव हैं तो सिद्ध कीजिए

a\ast b\ast c=b\ast c\ast a=c\ast a\ast b=a\ast c\ast b=c\ast b\ast a=b\ast a\ast c
(If a,b and c are elements of an abelian group \left( G,\ast \right) ,prove that

a\ast b\ast c=b\ast c\ast a=c\ast a\ast b=a\ast c\ast b=c\ast b\ast a=b\ast a\ast c
Solution-. a\ast b\ast c=b\ast c\ast a=c\ast a\ast b=a\ast c\ast b=c\ast b\ast a=b\ast a\ast c एक आबेली ग्रुप के अवयव हैं तो

a\ast \left( b\ast c \right) =\left( b\ast c \right) \ast a\\ =b\ast \left( c\ast a \right) [साहचर्यता से]
\Rightarrow a\ast b\ast c=b\ast c\ast a.....(1)\\ =b\ast \left( c\ast a \right) \\ =\left( c\ast a \right) \ast b[a,b,c आबेली ग्रुप के अवयव हैं]
\Rightarrow a\ast b\ast c=c\ast a\ast b......(2)\\ \Rightarrow a\ast b\ast c=a\ast c\ast b[आबेली ग्रुप से]……(3)
=\left( c\ast b \right) \ast a\\ \Rightarrow a\ast b\ast c=c\ast b\ast a......(4)\\ =c\ast \left( b\ast a \right) \\ =\left( b\ast a \right) \ast c[आबेली ग्रुप से]
\Rightarrow a\ast b\ast c=b\ast a\ast c......(5)[आबेली ग्रुप से]
(1),(2),(3),(4),( 5),(6) से-

a\ast b\ast c=b\ast c\ast a=c\ast a\ast b=a\ast c\ast b=c\ast b\ast a=b\ast a\ast c

उपर्युक्त उदाहरण द्वारा ग्रुप के साधारण गुणधर्म (Simple properties of Groups) को समझा जा सकता है।

Example-2.यदि किसी ग्रुप { a }^{ -1 }{ b }^{ -1 }ab=e\forall a,b\in G में तो सिद्ध कीजिए कि G एक क्रमविनिमेय ग्रुप है:
(If in a group G ,{ a }^{ -1 }{ b }^{ -1 }ab=e\quad  \forall a,b\in G then prove that G is an abelian group)
Solution-{ a }^{ -1 }{ b }^{ -1 }ab=e\quad \quad \forall a,b\in G \\<em><strong> </strong></em>\Rightarrow a\left( { a }^{ -1 }{ b }^{ -1 }ab \right) =ae\\ \Rightarrow \left( a{ a }^{ -1 } \right) \left( { b }^{ -1 }ab \right) =a\quad \left[ a{ a }^{ -1 }=e \right] \\ \Rightarrow e\left( { b }^{ -1 }ab \right) =a\\ \Rightarrow { b }^{ -1 }ab=a\\ \Rightarrow b\left( { b }^{ -1 }ab \right) =ba\\ \Rightarrow \left( b{ b }^{ -1 } \right) \left( ab \right) =ba\\ \Rightarrow eab=ba\quad \quad \quad \left[ b{ b }^{ -1 }=e \right] \\ \Rightarrow ab=ba
अतः G एक क्रमविनिमेय ग्रुप है।

Example-3.सिद्ध कीजिए कि एक ग्रुप में किसी अवयव का वाम प्रतिलोम दक्षिण प्रतिलोम भी है।
(Show that the left inverse of an element in a group is also its right inverse)
Solution-माना वाम तत्समक { e }_{ 1 }तथा कथित दक्षिण { e }_{ 2 } तत्समक है

{ e }_{ 1 }\ast a=a....(1)\\ a\ast { e }_{ 2 }=a....(2)

(1) व (2) से –

{ e }_{ 1 }\ast a=a\ast { e }_{ 2 }=a

अतः { e }_{ 1 }={ e }_{ 2 }

फलत: ग्रुप में वाम तत्समक, दक्षिण तत्समक भी है।
उपर्युक्त उदाहरणों के द्वारा ग्रुप के साधारण गुणधर्म (Simple properties of Groups) को समझा जा सकता है।

Also Read This Article:-Vertical motion under resistance

No.Social MediaUrl
1.Facebookclick here
2.you tubeclick here
3.Twitterclick here
4.Instagramclick here
5.Linkedinclick here
6.Facebook Pageclick here

No Responses

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *