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Ring in Algebraic Structures

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1.बीजीय संरचनाओं में वलय (Ring in Algebraic Structures),बीजगणित में वलय (Ring in Algebra):

बीजीय संरचनाओं में वलय (Ring in Algebraic Structures) में युग्म द्विचर संक्रिया का अध्ययन किया जाता है।ग्रुप का स्रोत प्रतिचित्रणों का समुच्चय था जबकि वलय का स्रोत पूर्णांकों का समुच्चय होता है।
(1.)वलय के प्रारम्भिक गुणधर्म (Elementary Properties of a Ring),बीजगणित में वलय के गुणधर्म (Ring Properties in Algebra):
प्रमेय (Theorem):1.यदि <R,+,.> एक वलय है जिसमें a, b, c \in R है तो सिद्ध कीजिए:
(If <R,+,.> is a ring then prove that for any a, b, c \in R ):
(i)a.0=0.a=0
(ii)(-a).(-b)=-(a.b)=(-a).(b)
(iii)(-a).(-b)=a.b
(iv)a.(b-c)=a.b-a.c
(v)(b-c).a=b.a-c.a
उपपत्ति (Proof):(i)0=0+0
a.0=a.0+a.0 (बंटन गुणधर्म से)

\Rightarrow-(a.0)+(a.0)=-(a.0)+[a.0+a.0]

\Rightarrow 0=[-(a.0)+(a.0)+a.0]
\Rightarrow 0=0+a.0[R_{2} तथा R_{3} से]

\Rightarrow 0=a.0
इसी प्रकार हम सिद्ध कर सकते हैं
0.a=0
(ii)अब (i) से: a \cdot 0=0 \forall a \in R
\Rightarrow a \cdot[b+(-b)]=0 \forall a \in R \\ \Rightarrow a.(b)+a.(-b)=0 \forall a \in R [बंटन गुणधर्म से]
\Rightarrow-(a.b)+[a.b+a.(-b)]=-(a.b)+0 [R_{3} से]
\Rightarrow [-(a.b)+(a.b)]+[a.(-b)]=-(a.b) [R_{1} से]
\Rightarrow 0+[a.[a.(-b)]=-(a.b) [ R_{2} से]

\Rightarrow a.(-b)=-(a.b)
(iii)अब (-a).(-b)=-[a.(-b)]   [(ii) से]
=-[-(a.b)]   [(ii) से]
=a.b
(iv) a (b-c)=a.b+a.(-c)   [बंटन गुणधर्म से]
=a.b-a.c     [(ii) से]
(v)(b-c).a=b.a+(-c).a    [बंटन गुणधर्म से]
=b.a-c.a    [(ii) से]
प्रमेय (Theorem):2.सिद्ध कीजिए कि वलय R शून्य भाजक रहित होगी यदि और केवल यदि R में निरसन नियम लागू होते हैं।
(Prove that a ring R is without zero divisors iff the cancellation laws hold in R.)
अथवा
सिद्ध कीजिए कि एक इकाई सहित क्रमविनिमेय वलय R पूर्णांकीय प्रान्त है,यदि और केवल यदि a \neq 0,ab=ac \Rightarrow b=c,a, b,c \in R
(Show that a commutative ring R with unity is an integral domain if and only if a \neq 0,ab=ac \Rightarrow b=c,a, b,c \in R)
उपपत्ति (Proof):प्रतिबन्ध की आवश्यकता:
माना कि R शून्यभाजक रहित है।माना कि a,b,c \in R इस प्रकार के अवयव हैं कि a.b=a.c,a \neq 0
अब a.b=a.c \Rightarrow a.b+[-(a.c)]=(a.c)+[-(a.c)] \\ \Rightarrow a.b+a.(-c)=0 \Rightarrow a.(b-c)=0
चूँकि R शून्य भाजक रहित है तथा R \neq 0 इसलिए b-c=0 अर्थात् b=c
अतः R में वाम नियम सत्य है।
इसी प्रकार दक्षिण (दाहिन) निरसन नियम सत्य है।
प्रतिबन्ध की पर्याप्तता:माना कि वलय R में निरसन नियम सत्य है तो
यदि सम्भव हो तो माना a, b \in R, a \neq 0, b \neq 0
तथा a.b=0 ….(1)
अब a.0=0 …..(2)
(1) तथा (2) से:

a.b=a.0 \Rightarrow b=0
जो कि विरोधात्मक (Contradiction) है।अतः R शून्य भाजक रहित है।
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2.बीजीय संरचनाओं में वलय के साधित उदाहरण (Ring in Algebraic Structures Solved Examples):

Example:1.सिद्ध कीजिए कि समुच्चय R={a,b} योग तथा गुणन संक्रिया जो कि निम्न प्रकार परिभाषित है:

\begin{array}{l|ll}+ & a & b \\ \hline a & a & b \\ b & b & a\end{array} \quad \quad \begin{array}{l|ll}\cdot & a & b \\ \hline a & a & a \\b & a & b\end{array}
क्रमविनिमेय तत्समकी वलय है,शून्य अवयव a है तथा b तत्समक अवयव है।
(The set R={a,b} with addition and multiplication defined by the following tables):

\begin{array}{l|ll}+ & a & b \\ \hline a & a & b \\ b & b & a\end{array} \quad \quad \begin{array}{l|ll}\cdot & a & b \\ \hline a & a & a \\b & a & b\end{array}
is a commutative ring with unity,a being its zero element and b being its identity element.)
Solution:(i)संक्रिया सारणी का प्रत्येक अवयव R का सदस्य है अतः योग तथा गुणन संक्रिया के लिए उक्त संक्रिया द्विचर संक्रिया है।
(ii)तत्समक अवयव का अस्तित्व (Existence of Identity):
संक्रिया सारणी से स्पष्ट है कि योग के लिए तत्समक अवयव a तथा गुणन के लिए तत्समक b विद्यमान हैं।अतः तत्समक अवयव का अस्तित्व है।
(iii)प्रतिलोम का अस्तित्व (Existence of Inverse):
b+b=a
अतः योग के लिए प्रतिलोम अवयव का अस्तित्व है।
(iv)योग क्रमविनिमेय (Commutativity of Addition):
a+b=a=b+a
R ,योग के लिए क्रमविनिमेय है।
(v)गुणन का साहचर्य (Associativity of Multiplication):
a.(a.b)=a=(a.a).b
R,गुणन के लिए सहचारी है।
(vi)गुणन की योग पर बंटनशीलता (Distributivity of Multiplication):
a.(a+b)=a.b=a
a.a+a.b=a+a=a
\Rightarrow a.(a+b)=a.a+a.b
R,गुणन की योग पर बंटनशीलता गुणधर्म का पालन करता है।
अतः R क्रमविनिमेय तत्समकी वलय है।
Example:2.सिद्ध कीजिए कि \left[\begin{array}{ll}0 & a \\0 & b\end{array}\right], a, b \in R आकार की सभी मैट्रिक्स का समुच्चय मैट्रिक्स योग एवं गुणन के लिए एक वलय है।क्या यह शून्य के भाजक रहित है?
(Prove that the set of matrices of the form \left[\begin{array}{ll}0 & a \\0 & b\end{array}\right], a, b \in R for matrix addition and matrix multiplication is a ring.Is it without zero divisor?)
Solution:\left[\begin{array}{ll}0 & a \\0 & b\end{array}\right], a, b \in R
(i)संवृतता (Closure Property):

A=\left[\begin{array}{ll}0 & a_{1} \\0 & b_{1}\end{array}\right], B=\left[\begin{array}{ll}0 & a_{2} \\0 & b_{2} \end{array}\right] \\ A+B=\left[\begin{array}{ll}0 & a_{1}+a_{2} \\0 & b_{1}+b_{2} \end{array} \right] \\ A B=\left[\begin{array}{ll}0 & a_{1}b_{2} \\0 & b_{1} b_{2}\end{array}\right]
अतः R संवृत्त है।
(ii)योग का साहचर्य (Associativity of Addition):

(A+B)+C=\left[\begin{array}{cc}0 & a_{1}+a_{2} \\0 &b_{1}+b_{2}\end{array}\right] +\left[\begin{array}{ll}0 & a_{3} \\0 & b_{3}\end{array}\right] \\ =\left[\begin{array}{ll}0 & a_{1}+ a_{2}+a_{3} \\0 & b_{1}+b_{2}+b_{3} \end{array}\right] \\=\left[\begin{array}{ll}0 & a_{1}+\left(a_{2} +a_{3}\right) \\0 & b_{1}+\left(b_{2}+b_{3} \right)\end{array}\right] \\= \left[\begin{array}{ll}0 & a_{1} \\0 & b_{1}\end{array}\right]+\left\{\left[\begin{array}{ll}0 & a_{2}+a_{3} \\0 & b_{2}+b_{3} \end{array}\right]\right\}  \\ \left[\begin{array}{ll}0 & a_{1} \\0 & b_{1}\end{array}\right]+\left\{\left[\begin{array}{ll}0 & a_{2} \\0 & b_{2} \end{array}\right]+\left[\begin{array}{ll}0 & a_{3} \\0 & b_{3} \end{array}\right]\right\} \\ \Rightarrow (A+B)+C=A+(B+C)

अतः R,योग के लिए सहचारी है।
(iii)तत्समक अवयव का अस्तित्व (Existence of Identity):
मैट्रिक्स योग के लिए \left[\begin{array}{ll}0 & 0 \\0 & 0\end{array}\right] तत्समक है।अतः R,में तत्समक अवयव का अस्तित्व है।
(iv)प्रतिलोम का अस्तित्व (Existence of Inverse):
योग संक्रिया के लिए मैट्रिक्स में प्रतिलोम का अस्तित्व है।
(v)योग क्रमविनिमेय (Commutativity of Addition):

A=\left[\begin{array}{ll}0 & a_{1} \\0 & b_{1}\end{array}\right], B=\left[\begin{array}{ll}0 & a_{2} \\0 & b_{2} \end{array}\right] \\ A+B=\left[\begin{array}{ll}0 & a_{1}+a_{2} \\0 & b_{1}+b_{2}\end{array}\right] \\=\left[\begin{array}{ll}0 & a_{2}+a_{1} \\0 & b_{2}+b_{1}\end{array}\right] \\=\left[\begin{array}{ll}0 & a_{2} \\0 & b_{2} \end{array}\right] +\left[\begin{array}{ll}0 & a_{1} \\0 & b_{1}\end{array}\right] \\\Rightarrow A+B=B+A
मैट्रिक्स योग संक्रिया के लिए क्रमविनिमेय है।
(vi)गुणन का साहचर्य (Associativity of Multiplication):

(A.B).C =\left\{\left[\begin{array}{ll}0 & a_{1} \\0 & b_{1}\end{array}\right]\left[\begin{array}{ll}0 & a_{2} \\0 & b_{2}\end{array}\right]\right\}\left[\begin{array}{ll}0 & a_{3} \\0 & b_{3}\end{array}\right] \\ =\left[\begin{array}{ll}0 & a_{1} b_{2} \\0 & b_{1} b_{2}\end{array}\right]\left[\begin{array}{ll}0 & a_{3} \\0 & b_{3}\end{array}\right] \\ \Rightarrow (A.B).C =\left[\begin{array}{lll}0 & a_{1} b_{2} b_{3} \\0 & b_{1} b_{2} b_{3}\end{array}\right] \\ A.(B.C) =\left[\begin{array}{ll}0 & a_{1} \\0 & b_{1}\end{array}\right]\left\{\left[\begin{array}{ll}0 & a_{2} \\0 & b_{2} \end{array}\right] \left[\begin{array}{ll}0 & a_{3} \\0 & b_{3}\end{array}\right]\right\} \\=\left[\begin{array}{ll}0 & a_{1} \\0 & b_{1}\end{array}\right]\left[\begin{array}{ll}0 & a_{2} b_{3} \\0 & b_{2} b_{3}\end{array}\right]

\Rightarrow A \cdot(B C)=\left[\begin{array}{cc}0 & a_{1} b_{2} b_{3} \\0 & b_{1} b_{2} b_{3}\end{array}\right] \\ \Rightarrow (A.B).C =A.(B.C)
मैट्रिक्स गुणन के लिए सहचारी है।
(vii)गुणन की योग पर बंटनशीलता (Distributivity of Multiplication):

A=\left[\begin{array}{ll}0 & a_{1} \\0 & b_{1}\end{array}\right], B=\left[\begin{array}{ll}0 & a_{2} \\0 & b_{2}\end{array} \right], C=\left[\begin{array}{ll}0 & a_{3} \\0 & b_{3}\end{array}\right] \\ A.(B+C)=\left[\begin{array}{ll}0 & a_{1} \\0 & b_{1}\end{array}\right] \cdot\left\{\left[\begin{array}{ll}0 & a_{2} \\0 & b_{2}\end{array}\right] +\left[\begin{array}{ll}0 & a_{3} \\0 & b_{3}\end{array}\right]\right\} \\ =\left[\begin{array}{ll}0 & a_{1} \\0 & b_{1}\end{array}\right] \cdot \left[\begin{array}{ll}0 & a_{2}+a_{3} \\0 & b_{2}+b_{3}\end{array}\right] \\ \Rightarrow A.(B+C)=\left[\begin{array}{ll}0 & a_{1}\left(b_{2}+b_{3}\right) \\0 & b_{1} \left(b_{2}+b_{3}\right)\end{array}\right] \\ A.B+A.C=\left[\begin{array}{ll}0 & a_{1} \\0 & b_{1}\end{array}\right] \cdot \left[\begin{array}{ll}0 & a_{2} \\0 & b_{2}\end{array}\right]+\left[\begin{array}{ll}0 & a_{1} \\0 & b_{1}\end{array}\right] \cdot \left[\begin{array}{ll}0 & a_{3} \\0 & b_{3}\end{array}\right] \\ =\left[\begin{array}{ll}0 & a_{1}b_{2} \\0 & b_{1} b_{2}\end{array}\right] +\left[ \begin{array}{cc} 0 & a_{1} b_{3} \\ 0 & b_{1} b_{3}\end{array}\right] \\=\left[\begin{array}{ll}0 & a_{1} b_{2}+a_{1} b_{3} \\0 & b_{1} b_{2}+b_{1} b_{3}\end{array}\right] \\=\left[\begin{array}{ll}0 & a_{1}\left(b_{2}+b_{3}\right) \\0 & b_{1}\left(b_{2}+b_{3}\right)\end{array}\right]

\Rightarrow  A.(B+C)=A.B+A.C
अतः मैट्रिक्स गुणन की योग पर बंटन गुणधर्म का पालन करती है।
फलतः मैट्रिक्स योग एवं गुणन के लिए वलय है।

A=\left[\begin{array}{ll}0 & a \\0 & b\end{array}\right], B=\left[\begin{array}{ll}x & y \\c & d\end{array}\right] \\ A.B=0 \\ \left[\begin{array}{ll}0 & a \\0 & b\end{array}\right]\left[\begin{array}{ll}x & y \\c & d\end{array}\right] =\left[\begin{array}{ll}0 & 0 \\0 & 0\end{array}\right] \\ \Rightarrow \left[\begin{array}{ll}a c & a d \\b c & b d\end{array}\right]=\left[\begin{array}{ll}0 & 0 \\0 & 0\end{array}\right]

\Rightarrow ac=0,ad=0 \\ \Rightarrow bc=0,bd=0 \\ a \neq 0, b \neq 0 अतः c=0,d=0

A=\left[\begin{array}{ll}0 & a \\0 & b \end{array}\right]=0 \\ B=\left[\begin{array}{ll}x & y \\0 & 0 \end{array}\right]=0
अतः वलय शून्यभाजक रहित नहीं है।
Example:3.वास्तविक संख्याओं a,b,c के लिए यदि
a \oplus b=a+b-1 तथा a \odot b=a+b-a b
हो तो सिद्ध करो कि [R,\oplus,\odot] एक क्षेत्र है।
(For real numbers a,b,c we define a \oplus b=a+b-1, a \odot b=a+b-a b Further show that [R,\oplus,\odot] is a field.)
Solution:(i)संवृत्तता (Closure Property):

a, b \in R \\ a \oplus b=a+b-1 \in R \\ a \odot b=a+b-a b \in R
अतः \oplus तथा \odot समुच्चय R में द्विचर संक्रिया संवृत्त है।
(ii)योग का साहचर्य (Associativity of Addition):

a, b, c \in R \\ (a \oplus b) \oplus c=(a+b-1) \oplus c \\ =a+b-1+c-1 \\ =a+b+c-2 \\ a \oplus(b \oplus c) =a \oplus(b+c-1) \\ =a+b+c-1-1 \\ =a+b+c-2 \\ \Rightarrow (a \oplus b) \oplus c=a \oplus(b \oplus c)
अतः R,\oplus के लिए सहचारी है।
(iii)तत्समक अवयव का अस्तित्व (Existence of Identity):

a \oplus e=a+e-1 \\ \Rightarrow a=a+e-1 \Rightarrow e=1 \in R
अतः R में,\oplus संक्रिया तत्समक अवयव का अस्तित्व है।
(iv)प्रतिलोम का अस्तित्व (Existence of Inverse):

a, b \in R \\ a \oplus b=a+b-1 \\ 1=a+b-1 \\ \Rightarrow b=2-a \in R
अतः R में,\oplus संक्रिया के लिए प्रतिलोम का अस्तित्व है।
(v)योग क्रमविनिमेय (Commutativity of Addition):

a, b \in R \\a \oplus b=a+b-1 \\ b \oplus a=b+a-1 \\ \Rightarrow a \oplus b=b \oplus a
अतः R, \oplus संक्रिया के लिए क्रमविनिमेय है।
(vi)गुणन का साहचर्य (Associativity of Multiplication):

(a \odot b)\odot c=(a+b-ab)\odot c\\ \Rightarrow (a \odot b)\odot c=a+b-a b+c-a c-b c+a b c \\ a \odot(b \odot c)=a \odot (b+c-b c) \\ =a+b+c-b c-a b-a c+a b c \\ \Rightarrow (a \odot b)\odot c=a \odot (b \odot c)
अतः R,\odot संक्रिया के लिए सहचारी है।
(vii)गुणन की योग पर बंटनशीलता (Distributivity Multiplication):

a \odot(b \oplus c) =a \odot (b+c-1) \\ =a+b+c-1-a(b+c-1) \\ =a+b+c-1-a b-a c+a \\ =2 a+b+c-a b-a c-1 \\ a \odot b \oplus a \odot c=(a+b-a b) \oplus(a+c-ac) \\ =a+b-a b+a+c-a c-1 \\ =2 a+b+c-a b-a c-1 \\ \Rightarrow a \odot(b \oplus c)=a \odot b \oplus a \odot c
अतः R,\odot  की \oplus पर बंटनशीलता है।
(viii)गुणन की क्रमविनिमेयता (Commutativity of Multiplication):

a \odot b=a+b-a b \\ b \odot a=b+a-b a \\ \Rightarrow a \odot b=b \odot a
अतः R,\odot  संक्रिया के लिए क्रमविनिमेय है।
फलतः R एक क्रमविनिमेय तत्समकी वलय है तथा R एक क्षेत्र है।

Example:4.सिद्ध कीजिए कि a+b \sqrt{3} जहाँ a, b \in z आकार की संख्याएँ सामान्य योग तथा गुणा के लिए वलय है।
(Prove that the set R of numbers of the form a+b \sqrt{3} where a and b are integers is a ring with respect to ordinary addition and multiplication.)
Solution:(i)संवृतता (Closure Property):
माना x_{1}=a_{1}+b_{1} \sqrt{3}, x_{2}=a_{2}+b_{2} \sqrt{3} जहाँ a_{1}, b_{1}, a_{2}, b_{2} \in z

x_{1}+x_{2}=a_{1}+b_{1} \sqrt{3}+a_{2}+b_{2} \sqrt{3} \\ \Rightarrow x_{1}+x_{2}=\left(a_{1}+a_{2}\right)+ \left(b_{1}+b_{2}\right) \sqrt{3}
चूँकि a_{1}+a_{2}, b_{1}+b_{2} \in z \\ \left(x_{1} \cdot x_{2}\right)=\left(a_{1}+b_{1} \sqrt{3}\right) \cdot\left(a_{2}+b_{2} \sqrt{3}\right)\\ =a_{1} a_{2}+\left(a_{1} b_{2}+a_{2} b_{1}\right) \sqrt{3}+3 b_{1} b_{2}\\ \Rightarrow \left(x_{1}.x_{2}\right) =a_{1}a_{2}+3 b_{1} b_{2}+\left(a_{1} b_{2}+a_{2} b_{1}\right) \sqrt{3} \\ a_{1} a_{2}+3 b_{1} b_{2}, a_{1}b_{2}+a_{2} b_{1} \in z
अतः संवृत गुणधर्म का पालन करती है।
(ii)साहचर्यता (Associativity):
माना x_{1} =a_{1}+b_{1} \sqrt{3}, x_{2}=a_{2}+b_{2} \sqrt{3},x_{3}=a_{3}+b_{3} \sqrt{3} \\ \left(x_{1}+ x_{2}\right) +x_{3}=\left(a_{1}+b_{1} \sqrt{3}+a_{2}+b_{2} \sqrt{3}\right)+\left(a_{3}+b_{3} \sqrt{3}\right) \\ =\left[a_{1}+a_{2} +\left(b_{1}+b_{2}\right) \sqrt{3}\right] +\left(a_{3}+b_{3} \sqrt{3}\right) \\ =a_{1}+(a_{2}+a_{3})+\left[b_{1}+(b_{2}+b_{3})\right] \sqrt{3} \\ =a_{1}+\left(a_{2}+ a_{3}\right)+b_{1} \sqrt{3}+\left(b_{2}+b_{3}\right) \sqrt{3} \\ =\left(a_{1}+b_{1} \sqrt{3}\right)+ \left[\left(a_{2}+a_{3}\right)+\left(b_{2}+b_{3}\right) b_{3} \right] \\ =\left(a_{1}+b_{1} \sqrt{3}\right)+\left[\left(a_{2}+b_{2} \sqrt{3}\right)+\left(a_{3}+b_{3} \sqrt{3}\right)\right] \\ \Rightarrow \left(x_{1}+x_{2}\right)+x_{3}=x_{1}+\left(x_{2}+x_{3}\right) \\ \left(x_{1} \cdot x_{2}\right) \cdot x_{3}=\left[\left(a_{1}+b_{1} \sqrt{3}\right) \cdot\left(a_{2}+b_{2} \sqrt{3}\right)\right] \cdot\left(a_{3}+b_{3} \sqrt{3}\right) \\ =\left[a_{1} a_{2}+3 b_{1}b_{2}+\left(a_{1} b_{2}+a_{2} b_{1}\right) \sqrt{3}\right] \cdot\left(a_{3}+b_{3} \sqrt{3}\right) \\ =a_{3}\left(a_{1} a_{2}+3 b_{1} b_{2}\right)+a_{3}\left(a_{1} b_{2}+a_{2} b_{1}\right) \sqrt{3}+ b_{3}\left(a_{1} a_{2}+3 b_{1} b_{2}\right) \sqrt{3}+3\left(a_{1} b_{2}+a_{2} b_{1}\right) \sqrt{3} \\ =a_{1} a_{2} a_{3}+3 b_{1} b_{2} a_{3}+a_{1} a_{3} b_{2} \sqrt{3} +a_{2} b_{1} a_{3} \sqrt{3}+a_{1} a_{2} b_{3} \sqrt{3}+3 \sqrt{3} b_{1} b_{2} b_{3}+3 a_{1} b_{2} b_{3} +3 a_{2}b_{1} b_{3}\\ =a_{1} a_{2} a_{3}+3 b_{1} b_{2} a_{3}+3 a_{1} b_{2} b_{3}+3 a_{2} b_{1} b_{3}+ \left(a_{1} a_{3} b_{2}+a_{2} a_{3} b_{1}+a_{1} a_{2} b_{3}+3 b_{1} b_{2} b_{3}\right) \sqrt{3} \\ x_{1} \cdot\left(x_{2} \cdot x_{3}\right)=\left(a_{1}+b_{1} \sqrt{3}\right) \cdot\left[\left(a_{2}+b_{2} \sqrt{3}\right) \cdot \left(a_{3}+b_{3} \sqrt{3}\right)\right] \\ =(a_{1}+b_{1} \sqrt{3}) \cdot\left[a_{2} a_{3}+3 b_{2} b_{3}+\left(a_{2} b_{3}+a_{3} b_{2}\right)\sqrt{3}\right] \\ =a_{1} a_{2} a_{3}+3 a_{1} b_{2} b_{3}+3 a_{2} b_{1} b_{3}+3 a_{3} b_{1} b_{2}+\left(a_{2} a_{3} b_{1}+3 b_{1} b_{2} b_{3}+a_{1} a_{2} b_{3}+a_{1} a_{3} b_{2}\right) \sqrt{3} \\ \Rightarrow \left(x_{1} \cdot x_{2}\right) \cdot x_{3}=x_{1} \cdot\left(x_{2} \cdot x_{3}\right)
अतः दी हुई आकार a+b \sqrt{3} की संख्याएँ सामान्य योग व गुणन के लिए सहचारी है।
(iii)तत्समक अवयव का अस्तित्व (Existence of Identity):
माना x_{2}=a_{2}+b_{2} \sqrt{3} तत्समक अवयव है।

x_{1}=a_{1}+b_{1} \sqrt{3}, a_{1},b_{1}, a_{2}, b_{2} \in z \\ x_{1}+x_{2}=x_{1} \Rightarrow a_{1}+b_{1} \sqrt{3}+a_{2}+b_{2} \sqrt{3}=a_{1}+b_{1} \sqrt{3} \\ \Rightarrow a_{2}+b_{2} \sqrt{3}=0+0 \sqrt{3} \Rightarrow a_{2}=0, b_{2}=0 , 0 \in Z
अतः तत्समक अवयव का अस्तित्व है।
(iv)प्रतिलोम का अस्तित्व (Existence of Inverse):
माना x_{1}=a_{1}+b_{1} \sqrt{3} तथा x_{2}=a_{2}+b_{2} \sqrt{3} प्रतिलोम अवयव है।

x_{1}+x_{2}=0+0 \sqrt{3} \\ a_{1}+b_{1} \sqrt{3}+a_{2}+b_{2} \sqrt{3}=0+0 \sqrt{3} \\ \Rightarrow a_{2}+b_{2} \sqrt{3}=-a_{1}-b_{1} \sqrt{3} \\ \Rightarrow a_{2}=-a_{1}, b_{2}=-b_{1} \\ -a_{1},-b_{1} \in z \\ \left(a_{1}+b_{1} \sqrt{3}\right) \left(a_{2}+b_{2} \sqrt{3}\right)=1+0 \cdot \sqrt{3} \\ \Rightarrow a_{2}+b_{2} \sqrt{3}=\frac{1}{a_{1}+b_{1} \sqrt{3}} \\ \Rightarrow a_{2}+b_{2} \sqrt{3}=\frac{a_{1}-b_{1}\sqrt{3}}{a_{1}-3 b_{1}^{2}}  \\ \Rightarrow a_{2}=\frac{a_{1}}{a_{1}-3 b_{1}^{2}}, b_{2}=\frac{-b_{1}}{a_{1}-3 b_{1}^{2}} \in z
अतः योग तथा गुणन के लिए प्रतिलोम अवयव का अस्तित्व है।
(v)योग क्रमविनिमेय (Commutativity of Addition):
माना x_{1}=a_{1}+b_{1} \sqrt{3} ,x_{2}=a_{2}+b_{2} \sqrt{3} जहाँ a_{1}, b_{1}, a_{2}, b_{2} \in Z \\ x_{1}+x_{2} =a_{1}+b_{1} \sqrt{3}+a_{2}+b_{2} \sqrt{3} \\ =a_{1}+a_{2}+\left(b_{1}+b_{2}\right) \sqrt{3} \\ =a_{2}+a_{1}+ \left(b_{2}+b_{1}\right) \sqrt{3} \\ =a_{2}+b_{2} \sqrt{3}+a_{1}+b_{1} \sqrt{3} \\ \Rightarrow x_{1}+x_{2} =x_{2}+x_{1}
अतः क्रमविनिमेय गुणधर्म का पालन करती है।
(vi)गुणन की योग पर बंटनशीलता (Distributivity of Multiplication):
माना x_{1}=a_{1}+b_{1} \sqrt{3}, x_{2}=a_{2}+b_{2} \sqrt{3}, x_{3}=a_{3}+b_{3} \sqrt{3} \\ x_{1} \cdot\left(x_{2}+ x_{3}\right)= \left(a_{1}+b_{1} \sqrt{3}\right) \cdot\left[a_{2}+b_{2} \sqrt{3}+a_{3}+b_{3} \sqrt{3}\right] \\ =\left(a_{1}+b_{1} \sqrt{3}\right)\left[\left(a_{2}+a_{3}\right)+\left(b_{2}+b_{3}\right) \sqrt{3}\right] \\ =a_{1}\left(a_{2}+a_{3}\right) +a_{1}\left(b_{2} +b_{3}\right) \sqrt{3}+b_{1}\left(a_{2}+a_{3}\right) \sqrt{3} +3 b_{1}\left(b_{2}+b_{3}\right) \\ = a_{1} a_{2}+3 b_{1} b_{2}+\left(a_{1} b_{2}+b_{1}a_{2}\right) \sqrt{3}+\left[\left(a_{1} a_{3}+3 b_{1} b_{3}\right)\right] +\left(a_{1} b_{3}+b_{1} a_{3}\right) \sqrt{3} \quad \\ =x_{1} \cdot x_{2}+x_{1} \cdot x_{3} \\ x_{1} \cdot \left(x_{2}+x_{3}\right)=x_{1} \cdot x_{2}+x_{1} \cdot x_{3}
अतः बंटन गुणधर्म का पालन करती है।
फलतः a+b \sqrt{3} जहाँ a, b \in z आकार की संख्याएँ सामान्य योग व गुणन के लिए वलय है।
उपर्युक्त उदाहरणों के द्वारा बीजीय संरचनाओं में वलय (Ring in Algebraic Structures),बीजगणित में वलय (Ring in Algebra) को समझ सकते हैं।

3.बीजीय संरचनाओं में वलय के सवाल (Ring in Algebraic Structures Questions):

(1.)सिद्ध कीजिए कि समुच्चय Z_{n}=\{0,1,2....,n-1\} द्विआधारी संक्रियायें जोड़ व गुणन प्रमाप n,के सम्बन्ध में एक क्रमविनिमेय तत्समकी वलय है।
(Prove that the set Z_{n}=\{0,1,2....,n-1\} is a commutative ring with respect to the binary operation addition modulo n (+_{n}) and multiplication modulo n (X_{n}).)
(2.)सिद्ध कीजिए कि m+n \sqrt{2} जहाँ m तथा n पूर्णांक हों,आकार की वास्तविक संख्याओं का समुच्चय संख्याओं के योग एवं गुणन के लिए वलय है।
(Prove that the set of all real numbers of the form m+n \sqrt{2} where m and n integers with ordinary addition and multiplication forms a ring.)
उपर्युक्त सवालों को हल करने पर बीजीय संरचनाओं में वलय (Ring in Algebraic Structures),बीजगणित में वलय (Ring in Algebra) को ठीक से समझ सकते हैं।

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4.बीजीय संरचनाओं में वलय (Ring in Algebraic Structures),बीजगणित में वलय (Ring in Algebra) के सम्बन्ध में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:

प्रश्न:1.शून्य भाजक सहित वलय का उदाहरण दीजिये।(Give the example of ring with zero divisor):

उत्तर:वलय [\{0,1,2,3,4,5,6,7 \},+_{8},\bullet_{8} ] में 2,4 तथा 6 शून्य के भाजक हैं क्योंकि 2 \bullet_{8} 4=0,4 \bullet_{8} 2=0,4 \bullet_{8} 6=0,6 \bullet_{8} 4=0

प्रश्न:2.शून्य से भाजक रहित वलय का उदाहरण दीजिए।(Give the example of ring without zero divisor):

उत्तर:(Z,+,•), (Q,+,•) तथा (R,+,•)
ऐसी तीन वलय हैं जो कि शून्य भाजक से रहित हैं क्योंकि दो अशून्य संख्याओं का गुणनफल कभी भी शून्य नहीं हो सकता है।

प्रश्न:3.पूर्णांकीय प्रान्त का उदाहरण दीजिए।(Give the example of integral domain):

उत्तर:(i) (Z,+,•), (Q,+,•) तथा (R,+,•) सब पूर्णांकीय प्रान्त हैं।
(ii)वलय \left[\{(0,1,2),+_{3}\},\bullet_{3}\right] एक पूर्णांकीय प्रान्त है।

प्रश्न:4.क्षेत्र के उदाहरण दीजिये।(Give examples of the field):

उत्तर:(i) (Z,+,•), (Q,+,•) तथा (R,+,•) वलय ऐसे हैं जो कि क्रमविनिमेय तत्समकी वलय हैं तथा प्रत्येक शून्येतर अवयव x का गुणनात्मक प्रतिलोम विद्यमान है।उपर्युक्त सभी क्षेत्र हैं।
(ii)वलय \left[Z_{3}=\{(0,1,2),+_{3}\},\bullet_{3}\right] एक क्षेत्र है।
उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर द्वारा बीजीय संरचनाओं में वलय (Ring in Algebraic Structures),बीजगणित में वलय (Ring in Algebra) के बारे में ओर अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

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Ring in Algebraic Structures

बीजीय संरचनाओं में वलय
(Ring in Algebraic Structures)

Ring in Algebraic Structures

बीजीय संरचनाओं में वलय (Ring in Algebraic Structures) में युग्म द्विचर संक्रिया का अध्ययन
किया जाता है।ग्रुप का स्रोत प्रतिचित्रणों का समुच्चय था जबकि वलय का स्रोत पूर्णांकों का समुच्चय होता है।

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