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Basic Requirements for Life in hindi

1.जीवन के लिए बुनियादी आवश्यकताएं का परिचय (Introduction to Basic Requirements for Life in hindi),जीवन के लिए बुनियादी जरूरतें क्या हैं? (What are Basic Needs for Life in hindi):

  • जीवन के लिए बुनियादी आवश्यकताएं (Basic Requirements for Life in hindi),जीवन के लिए बुनियादी जरूरतें क्या हैं? (What are Basic Needs for Life in hindi):जीवन के मनुष्य की बुनियादी भौतिक आवश्यकताएँ हैं रोटी,कपड़ा और मकान।भूख मिटाने के लिए भोजन अर्थात् रोटी,सर्दी-गर्मी,वर्षात से बचाव के लिए कपड़े तथा रहने के लिए मकान की आवश्यकताएं हैं।परन्तु विचारशील मनुष्य एक ओर आवश्यकता भी अनिवार्य मानते और वह आवश्यकता है शिक्षा।रोटी,कपड़ा और मकान मनुष्य की भौतिक आवश्यकताएँ हैं अर्थात् इनसे मनुष्य की शारीरिक आवश्यकताओं की पूर्ति होती है परन्तु शिक्षा तो आत्मिक व भौतिक दोनों आवश्यकताओं की पूर्ति करती है।
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via https://youtu.be/PB9UCfV6_Wg

2.जीवन के लिए बुनियादी आवश्यकताएं (Basic Requirements for Life in hindi),जीवन के लिए बुनियादी जरूरतें क्या हैं? (What are Basic Needs for Life in hindi):

  • शरीर रक्षा के लिए जिस प्रकार भोजन,वस्त्र,निवास आदि की आवश्यकता है उसी प्रकार प्रकट शरीर से भी बढ़कर अधिक महत्त्वपूर्ण पक्ष मनःक्षेत्र को सही स्थिति में रखे जाने की अतिशय आवश्यकता है।शरीर से तगड़े दीखने वाले भी यदि मानसिक रूप से पिछड़े हुए हैं तो समझना चाहिए कि उनकी गणना एक प्रकार से पिछड़े,गए-गुजरे,अनपढ़ स्तर के लोगों में ही होगी।वे न तो जीवन की महत्त्वपूर्ण आवश्यकताओं का महत्त्व समझ सकेंगे और न उन्हें जुटाने के लिए उत्साह प्रदर्शित करेंगे।अर्द्ध-विक्षिप्त व्यक्ति शारीरिक रुग्णता से ग्रसित लोगों की अपेक्षा कहीं अधिक घाटे में रहते हैं।कदाचित उन्हें अन्धे के हाथ बटेर की तरह कोई अनायास सुयोग हाथ लग भी जाय तो उसका सदुप अनगढ़ों द्वारा बन पड़ना सम्भव नहीं,दुरुपयोग तो अपने आप में विपत्ति ही है जो धन-सम्पदा हाथ लगने पर भी दुर्व्यसन,अहंकार और अनाचार अपनाने के लिए ही उत्तेजित करता है।ऐसी दशा में भी मानसिक प्रखरता को प्रमुखता मिलती है और विचारशीलों द्वारा उसी की अभ्यर्थना होती है।
  • व्यक्तिगत समझदारी की प्रथम मान्यता है कि गुण,कर्म,स्वभाव के रूप में ऊँचे उठने वाले व्यक्ति परिष्कार के लिए हर संभव उपाय करें।इसे सर्वोपरि महत्त्व की सम्पदा माने और उसके संचय,संकलन में किसी प्रकार की कोताही न बरतें।भोजन शरीर को जीवित रखता है तो ज्ञान बुद्धिमत्ता,भावसंवेदना और चेतनात्मक विभूतियों को उपलब्ध कराने में काम आता है।शारीरिक समर्थता अपने स्थान पर आवश्यक है,पर यदि दृष्टिकोण का परिमार्जन,क्रियाकलापों में उत्कृष्टता का समावेश नहीं हुआ तो समझना चाहिए कि कृमि-कीटकों जैसा ही जीवन जीते मनुष्य ने व्यर्थ ही एक सुयोग को गँवाया।
  • इसी तथ्य को ध्यान में रखते हुए आप्तजनों ने हर किसी को स्वाध्यायशील होने के लिए कहा है और उसकी आवश्यकता को क्षुधा निवारण की तरह उपलब्ध करने कराने पर जोर दिया गया है।
  • इस मार्ग में सबसे अधिक वह मूढ़ता है जो मनुष्य को मात्र शरीर होने की मान्यता देती है और पेट भरने से संतुष्ट हो जाती है। जबकि उठनी वह भूख भी उतनी ही तीव्रता से चाहिए कि मनुष्य मानसिक दृष्टि से विवेकशीलों में गिना जा सके और ऐसे निर्णय-निर्धारण कर सकने में समर्थ हो जो मानवी गरिमा को उभारते-निखारते रहते हैं।
  • प्रयत्नशीलों ने अनगढ़ वन्य जन्तुओं को सरकस के कलाकार बना लिया है और उन्हें इतनी कमाई करने में समर्थ बना दिया है कि उस परिकर के समस्त कर्मचारियों की उदरपूर्ति में महती भूमिका निभा सके।कबूतर संदेशवाहक का कार्य करते हैं।घोड़े दौड़ वाली लाॅटरी जीतते हैं और सेना पुलिस के असाधारण सहयोगी माने जाते हैं।प्रशिक्षण ऐसा चमत्कार है जिसके सहारे सपेरे और मदारी रीछ,बन्दर जैसे जानवरों की कमाई से अपना परिवार पाल लेते हैं।मनुष्य का यदि उपयोगी प्रशिक्षण बन पड़े तो वह शिल्पी,संगीतज्ञ,कलाकार,साहित्यकार,इंजीनियर,प्रशिक्षक,डाॅक्टर,वैज्ञानिक,गणितज्ञ और न जाने कितने कला-कौशलों से सम्पन्न होकर अपने तथा दूसरों के लिए असाधारण रूप से उपयोगी सिद्ध हो सकता है।यह तो भौतिक पदार्थ परक प्रशिक्षण की बात हुई,पर बुद्धिमत्ता,दूरदर्शिता,भाव संवेदना,आदर्शवादिता जैसे दिव्य गुणों को अभ्यस्त बनाया जा सके तो समझना चाहिए कि उसे अनुकरणीय,अभिनन्दनीय महामानव बनने का सुयोग-सौभाग्य हस्तगत हो गया है।तत्त्वदर्शी को एक प्रकार से धरती के देवताओं में ही गिना जाता है जो न केवल अपना कल्याण करते हैं वरन् दूसरों के लिए भी सर्वतोमुखी प्रगति की प्रेरणा देने में अग्रिम भूमिका निभाते हैं।चन्दन वृक्ष के निकट झाड़-झंखाड़ों के सुगन्धित हो जाने की मान्यता प्रसिद्ध है पर उससे भी अधिक प्रामाणिक तथ्य यह है कि आत्मचेतना के धनी अपने उदात्त परामर्श और प्रभाव से समीप क्षेत्र के समुदाय को आगे बढ़ाने,ऊँचा उठाने में निश्चित रूप से सफल,समर्थ होते हैं।
  • उपर्युक्त आर्टिकल में जीवन के लिए बुनियादी आवश्यकताएं (Basic Requirements for Life in hindi),जीवन के लिए बुनियादी जरूरतें क्या हैं? (What are Basic Needs for Life in hindi) के बारे में बताया गया है।
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