6 Techniques of Future Fixation:Comprehension of Past and Manliness of Present
Contents
hide
1.भविष्य के निर्धारण की 6 तकनीक:भूतकाल का ज्ञान और वर्तमान का पुरुषार्थ (6 Techniques of Future Fixation:Comprehension of Past and Manliness of Present):
- भविष्य के निर्धारण की 6 तकनीक (6 Techniques of Future Fixation) से जानिए कि क्या भविष्य हमारे हाथ में है? यदि हाँ तो भविष्य के स्वरूप का निर्धारण किस प्रकार किया जा सकता है? वर्तमान और भूत की उसमें क्या भूमिका है?
Also Read This Article:3 Tips to Build Future in Mathematics
2.भविष्य का निर्धारण हमारे दृष्टिकोण पर निर्भर (Determining the future depends on our vision):
- किसी विद्वान ने कहा है कि मानव को भगवान की सबसे बड़ी देन है कि उसने मानव को भविष्य के अंधकार में रखा है।यदि मानव को भविष्य का पूर्ण ज्ञान हो जाता तो कदाचित वह धैर्य,संयम और जीने की आस सब खो बैठता और उसकी मृत्यु हो जाती।मानव के जीवन का आधार ही ‘बेहतर कल’ है।
आज जो हुआ सो हुआ,परंतु आने वाला कल आज से बेहतर हो इस आस में मानव एक लंबा जीवन व्यतीत कर जाता है।जीवन के प्रति सकारात्मक सोच ही भविष्य के प्रति आश्वस्त होना सिखाती है जिसका निरंतर अभ्यास स्वतः ही प्रस्फुटित होता है।भविष्य वर्तमान से निकलने वाली किरणें हैं।
युवा वर्ग असफलता मिलने पर प्रायः हताश होता हुआ देखा जाता है:यहां तक कि वे कभी-कभी जीवन से पलायन जैसे कठोर एवं अप्रिय कार्य करने का निर्णय तक कर बैठते हैं और फिर गुमनामी की जिंदगी जीते हैं (Gumnami ki jindgi)।क्या वे कभी यह सोचते हैं कि कौनसा ऐसा घुड़सवार है जिसमें एक-दो पटक नहीं लगी है? क्या वे कभी यह सोचते हैं कि परमात्मा नाम की कोई शक्ति है,जो हमारे कल्याण की दृष्टि से हमारे जीवन में सफलता-असफलता का विधान करती है?
अमेरिका के दार्शनिक इमर्सन ने लिखा है कि “हम लोग Lossing winners यानी हारे हुए विजेता हैं।” जीवन में अनेक बार हमारे साथ प्रतिकूल घटनाएं घटित होती हैं,परंतु बाद में हम अनुभव करते हैं कि वे छद्म अनुकूलता लेकर आई थीं।यदि हम यह सोच सकें कि सब कुछ हमारे भले के लिए होता है,तब हम भी स्वीकार कर सकेंगे कि हमारा भविष्य सदैव उज्ज्वल (Bright Future) रहता है।संसार में कौन ऐसा व्यक्ति है जिसने कभी असफलता की कठोरता नहीं चखी है?
- जो अपने भविष्य के निर्माण के प्रति कटिबद्ध रहते हैं,वे भविष्य के प्रति भी आश्वस्त रहते हैं।सत्यम् कोचिंग सेंटर (Satyam Coaching Centre) में हमारा अनुभव रहा है कि विगत का चिंतन हमारे किसी काम नहीं आता है।विगत से सीख अवश्य लेनी चाहिए परंतु उसका चिंतन करने का कोई फायदा नहीं है।वर्तमान का दर्शन एवं भविष्य के निर्माण की योजना ही हमारे काम की वस्तुएं हैं।
अथर्ववेद का यह कथन ध्यातव्य है:अतीत के शोक मनुष्य के पतन के कारण बनते हैं,इसीलिए अतीत पर शोक करने के बजाय मनुष्य को अपने भविष्य की रणनीति तय करनी चाहिए।इस संदर्भ में एक अन्य तथ्य स्मरणीय है।जिसे हम आज सफलता (safalta ) कहते हैं।वह सफलता का अंत न होकर भविष्य में मिलने वाली श्रेष्ठतर सफलता का सोपान है। - अतएव उज्ज्वल भविष्य के निर्माण (Build of bright future) की योजना बनाना हमारा स्थायी कार्यक्रम होना चाहिए।यह कहना क्या उचित नहीं होगा कि सफलता-असफलता सापेक्ष है:यदि हम सापेक्ष उज्ज्वल भविष्य के प्रति आश्वस्त होना चाहते हैं,तो हमें सदैव आशावादी पुरुषार्थी बनना चाहिए।भारत के पुनर्जागरण के अग्रदूत कहा करते थे:”कल को भूल जाओ,क्योंकि अन्ततः तुम्हें भविष्य में ही रहना है।”
- विगत और वर्तमान का उपयोग केवल इतना ही है कि भविष्य के लिए उसे आवश्यक सामग्री प्राप्त करें,परंतु वह सामग्री तभी सार्थक होगी जब उससे प्रेरित कर्म के फल (Result of Action) यानी भविष्य के प्रति हम आश्वस्त होंगे।
आस्था के अभाव में प्रेरणा कुंठित हो जाती है और पुरुषार्थ (purushartha) पंगु बन जाता है।भविष्य इरादेमंद को,संकल्पशील को राह दिखाता है;और जो संकल्पशील नहीं है,वे लड़खड़ाते हुए चलते हैं और भविष्य उनको निर्जीव पदार्थ के रूप में घसीटता रहता है।
3.भविष्य के उज्जवल पक्ष को देखें (Look at the bright side of the future):
- वे जीते-जी अपने शव का भार वहन करते हैं,जो जीते-जी अपने भार को,अपने शव को अपने कंधे पर डालकर अपना जीवन जीने का प्रयास करता है,उसके लिए भविष्य क्या और वर्तमान क्या?
- एक बार एक विद्यार्थी ने शिक्षक से आग्रह किया कि उसे स्कूल में सम्मानित (School mein sammanit) करना चाहिए था,क्योंकि उसने 60% से 70% अंक प्राप्त करने की छलाँग लगाई है;शिक्षक ने उत्तर देते हुए कहा:तुम स्कूल से अधिक बड़े सम्मान (राज्य या देश में) में सम्मानित होना क्यों नहीं चाहते हो? तुम जितने अच्छे अंक लाओगे,उतना ही अधिक सम्मान के अधिकारी होते जाओगे।यदि छात्र ऐसा न करता,तो इस पृथ्वी पर छात्र-छात्राओं का नाम लेना ही भूल जाते।
- भविष्य के प्रति आस्था हमें जीवन दायिनी प्रेरणा एवं ऊर्जा प्रदान करती है।इसके अभाव में हम मृतवत् हो जाएं,निष्क्रिय (inactive) हो जाएं।यदि स्वतंत्रता सेनानी भारत के स्वतंत्र होने का सपना नहीं देखते,उसे प्राप्त करने के लिए संघर्ष न करते,तो आज न भारत स्वतंत्र होता और आज न स्वतंत्रता सेनानी पूजित होते।
- आप कह सकते हैं कि भविष्य किसने देखा है,वह तो सर्वथा अनिश्चित रहता है।अनिश्चित का अर्थ मात्र प्रतिकूल न होकर अनुकूल भी होता है।यह हमारे दृष्टिकोण पर निर्भर है कि हम भविष्य के कौनसे पक्ष (Bhavishya ke konse paksh) को देखने का अभ्यास करें? आस्थारहित के लिए उज्ज्वल भविष्य की संभावना ही निश्शेष हो जाती है,जबकि आस्थावान के लिए अनुकूल की संभावना सदैव प्रस्तुत रहती है,जो भविष्य के निर्माण की प्रक्रिया से अज्ञात हैं वे बताएंगे कि हमारा आज कल का भविष्य बनता है।
- भविष्य के प्रति आस्थावान ही ‘आज’ को श्रेष्ठतम बनाने में प्रयत्नशील होता है।यदि आप परीक्षा में सफलता के प्रति आश्वस्त ना होंगे,तो उसकी प्राप्ति के लिए आज अध्ययन क्यों करेंगे? इस बात को एक कदम आगे बढ़कर हम इस प्रकार कह सकते हैं कि भविष्य के प्रति आस्था हमारे स्वभाव का,हमारे व्यक्तित्व का अनिवार्य भाग है।प्रमाद के कारण हम उसे अवचेतन में सुषुप्तावस्था में पड़ा रहने देते हैं।यदि ऐसा ना होता,तो मानव जीवन में प्रयास अथवा प्रयत्न की संस्था समाप्त हो गई होती।
- छोटे से बड़े होने का रहस्य ही यह है कि जीवन की प्रत्येक अभिव्यक्ति भविष्य के प्रति आस्था का अंश लेकर आती है।आवश्यक है उसके प्रति जागरूक (jagrook) होकर उसे जीवन में प्रत्यक्ष रूप प्रदान करने का प्रयत्न किया जाए।हमें समझ लेना चाहिए कि: भविष्य होता नहीं है,उसका निर्माण किया जाता है।इसके लिए वर्तमान में हमारी तत्परता अनिवार्य है।भविष्य के अंधकार में हम आस्था का दीपक लेकर ही अपना मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं।यदि कहीं असफलता मिलती है,तो इसका तात्पर्य यही है कि हमारे प्रयत्नों में कहीं कोई त्रुटि रह गई है।
- भूतकाल के ज्ञान और वर्तमान के पुरुषार्थ (Comprehension of past and Manliness of present) द्वारा भविष्य के स्वरूप का निर्धारण किया जा सकता है,उसका वास्तविक स्वरूप भले ही अज्ञात बना रहे?
- सुप्रसिद्ध दार्शनिक प्लेटो ने कहा है:”अपनी इन आंखों से हम जो कुछ देखते हैं,वह केवल वर्तमान होता है।भविष्य देखने वाली आंखें सिर के पीछे होती हैं।हम जब भी भविष्य देखने की इच्छा करते हैं या प्रयास करते हैं,हमारा सिर घूम जाता है और हम फिर वर्तमान में आ जाते हैं।हम अपने वर्तमान को सुंदरतम बनाएं तब ही हमारा भविष्य वैसा होगा जिसकी हम कल्पना करते हैं।”
4.योजना भविष्य के लिए बनाई जाती है (Planning is made only for the future):

Student hopeful of 6 Techniques of Future FixationStudent hopeful of 6 Techniques of Future Fixation
- योजना पूरी प्लानिंग और लक्ष्य भविष्य के गर्भ में ही होता है लेकिन उसे पूरा करने का पुरुषार्थ वर्तमान में किया जाता है।हम योजना तो बना लें और उसको साकार करने (वर्तमान) का प्रयत्न न करें तो ऐसी योजना और लक्ष्य धरे के धरे रह जाते हैं।चाहे योजना और लक्ष्य
- कितना ही व्यावहारिक हो परंतु उससे ज्यादा महत्त्व उसके क्रियान्वयन का है।
कल्पना और सपने देखना अच्छा है पर देखने-भर से वे पूरे नहीं होते हैं।उन्हें साकार करने के लिए उन पर चिंतन और विचार करना जरूरी है।चिन्तन और विचार करने के बाद एकदम से वे क्रियान्वित नहीं होते धीरे-धीरे उन्हें क्रियान्वित करना होता है। - योजना जितनी विचारपूर्वक बनाई जाती है उसके परिणाम उतने ही सुखद होंगे।बहुत से विद्यार्थी सोचते हैं कि मनन-चिंतन की कोई उपयोगिता नहीं है।जब समय कम खर्च करना है तो इसमें भी समय क्यों खर्च करें।जो भी स्थिति सामने आएगी उस समय उसका सामना कर लेंगे।परंतु चिंतन-मनन में लगाया गया समय योजना के क्रियान्वयन में समय की बचत करता है।
- बिना सोच-विचारे किसी भी कार्य को करना अथवा तत्काल स्थिति के अनुसार कार्य करने में समय अधिक लग सकता है।क्या कभी हम स्कूल या शिक्षा संस्थान में जाते हैं तो घर से निकलने के बाद तय करते हैं कि हमें कब,कहां,कितने समय के लिए जाना है? इसलिए चिन्तन-मनन को हल्के स्तर पर नहीं लेना चाहिए,समय प्रबंधन में तत्पर विद्यार्थी कभी चिंतन-मनन की पुनःस्मृति में समय बर्बाद नहीं करते।वे समय पूर्व विस्तार से नहीं तो कम से कम संकेत व बिंदु के रूप में ही उन्हें लिख लेते हैं ताकि उसके आधार पर उन्हें याद हो सके।
हां यह सही है कि भूत और भविष्य के बारे में चिंता नहीं करनी चाहिए क्योंकि चिंता करने से कोई हल नहीं निकलता और यों भी भूत और भविष्य हमारे हाथ में नहीं होता है।यदि हमारे हाथ में होता है तो वर्तमान होता है।इसे एक उदाहरण से समझते हैं।जैसे हम प्रातः रोज सुबह उठते हैं और दिनभर में हमें क्या-क्या,कैसे करना है और कितने समय में करना है इसकी प्लानिंग बनाते हैं और विचार-चिंतन करते हैं।प्रातःकाल जब उठते हैं तो वर्तमान होता है और पूरा दिन भविष्य के गर्भ में होता है। - इस प्रकार योजना बनाकर और उस पर चिंतन-मनन करने से हमारा समय बचता है और कार्य को सही विधि से करने का ढंग सीखते हैं।किसी भी काम को करने से पहले चिंतन-मनन करना दूरदर्शिता (Doordarshita) है,काम करते समय विचार करना बुद्धिमानी (Wisdom) है और काम करने के बाद (बिगड़ जाने के बाद) चिंतन-मनन मूर्खता (Foolishness) है।तात्पर्य यह है कि सपने देखना,भविष्य के लिए प्लानिंग बनाना या लक्ष्य तय करना ही पर्याप्त नहीं है बल्कि उसको साकार भी करना चाहिए।
5.सपनों को साकार करने में अड़चनें (Obstacles to realizing dreams):
- हम सत्यम मैथमेटिक्स ब्लॉग (Satyam Mathematics Blog) पर अपने अनुभव भी साझा करते हैं।केवल सैद्धांतिक बात ही नहीं करते बल्कि उसकी व्यावहारिक तकनीक भी सुझाते हैं।सपने देखने,लक्ष्य तय करने के बाद असली परेशानी और मुश्किलें उनको साकार करने में ही आती हैं।
- भविष्य,सपने,योजना और लक्ष्य हमारे अंदर उम्मीद जगाते हैं और अपने काम में जुटे रहने का हौसला प्रदान करते हैं।
आप युवा हैं,आपके सामने पूरा भविष्य है।यों हमने युवा वर्ग के भविष्य का निर्माण करने के लिए “2 Strategies to Create Good Future” इस साइट पर लेख पोस्ट किया हुआ है।आप उसे पढ़कर भी जान सकते हैं कि एक विद्यार्थी को क्या कुछ करना चाहिए और किस तरह करना चाहिए।इसमें बताया गया है कि युवावर्ग को अच्छा भविष्य बनाने के लिए अपने श्रेष्ठ आचरण और श्रेष्ठ कर्म,समय का मूल्यांकन और सदुपयोग,विद्या का अर्जन,सुदृढ़ संकल्प का निर्वाह करके,अनुशासन का पालन और कर्त्तव्यपरायणता का पालन करना चाहिए।जन्म से बड़ा आदमी विरले ही होते हैं और जो जन्म से महान होते हैं उन्हें भी पुरुषार्थ करना पड़ता है।
बेहतर भविष्य के अपने सपनों को पूरा करने की कोशिश कभी नहीं छोड़नी चाहिए।यदि आप जाॅब या व्यवसाय (Job or Profession) प्राप्त करने की राह में है तो अपनी व्यावसायिक खूबियों में और सुधार करते रहें,नए तौर-तरीकों को अपनाएँ,मेहनत करें और अपने चाल-चलन को बढ़िया रखें। - अपने अनुभव से कहूं तो हमारे जीवन की सबसे बड़ी ताकत हमारा चरित्र (Character) है।इसलिए भविष्य की योजना बनाने,लक्ष्य को प्राप्त करने में अपने चरित्र के साथ बिल्कुल समझौता न करें।हमारे जीवन में सबसे ज्यादा आनन्दित करने वाले अनुभव सपनों और सच्चे मन से की गई उम्मीदों से निकल कर आए हैं।
- आपको जो अवसर मिलते हैं,अगर आप उन्हें यूं ही नहीं गँवाते,हर अवसर को पूरे मन से थाम लेते हैं,तो आप बहुत कुछ हासिल कर सकते हैं।भविष्य का जो भी खाका बनाएँ वह व्यावहारिक होना चाहिए,लोगों की परेशानियाँ,समस्याएं हल करने वाली यानी उनके हित की होनी चाहिए।
- दरअसल छात्र-छात्राएँ जो भी शिक्षा अर्जित करते हैं,जो भी ज्ञान अर्जित करते हैं वह सैद्धांतिक अधिक होता है और व्यावहारिक बहुत कम या नाम मात्र का होता है।इसलिए उन्हें यह पता नहीं होता है कि कौनसी बातें उन्हें सीखनी चाहिए और कौनसी बातों को भूलकर भी नहीं अपनाना चाहिए।उन्हें ठीक से सही मार्गदर्शन करने वाला भी नहीं मिलता है।इन सब कारणों से वे दुविधा में रहते हैं।यदि कोई बताने वाला मिल भी जाए तो उन्हें यह पता नहीं होता है कि मार्गदर्शक जो भी कुछ बता रहा है वह उसके लिए सही है या गलत है।
- खुद अनुभव करके सीखने में कई अड़चनें हैं,किसी ऐसी मुसीबत में भी फँस सकता है कि उससे बाहर निकलना ही मुश्किल हो जाए।इसलिए हम हर लेख में अपने अनुभव शेयर करते हैं।याद रखें जो धुन के पक्के होते हैं,जिन्हें अपने लक्ष्य को प्राप्त करना है उन्हें केवल और केवल लक्ष्य पर अपनी नजर रखनी चाहिए।लक्ष्य के मार्ग में आने वाली बाधाओं से विचलित बिल्कुल भी नहीं होना चाहिए।
- लक्ष्य तय करना सफलता का पैमाना तो नहीं है पर इससे एक-एक बात बारीकी से हमारे ध्यान में आ जाती है।हम उन पर पर्याप्त ध्यान और समय दे सकते हैं।सफलता को आकार देने में समय के खाँचे में लाने के लिए लक्ष्य (target) व योजना (planning) नींव के पत्थर के समान है और नींव तथा नींव के पत्थर की भूमिका से हम सभी अच्छी तरह परिचित हैं।
- कुछ छात्र-छात्राएँ भविष्य की रूपरेखा तैयार करने के बाद बीच में आने वाले प्रलोभन (temptation) के शिकार हो जाते हैं और उनका लक्ष्य व योजना अधर बीच में लटकी हुई रह जाती है।
- उपर्युक्त आर्टिकल में भविष्य के निर्धारण की 6 तकनीक:भूतकाल का ज्ञान और वर्तमान का पुरुषार्थ (6 Techniques of Future Fixation:Comprehension of Past and Manliness of Present) के बारे में बताया गया है।
### 📢 यदि आपको यह गणित का आर्टिकल पसंद आया हो:
* 👥 **मित्रों के साथ शेयर करें:** ज्ञान बांटने से बढ़ता है,इसलिए इसे अपने दोस्तों के साथ ज़रूर साझा करें।
* 🔔 **वेबसाइट को फॉलो करें:** अगर आप यहाँ पहली बार आए हैं, तो हमारे **ईमेल सब्सक्रिप्शन** को फॉलो करें ताकि हर नए आर्टिकल का नोटिफिकेशन आपको तुरंत मिले।
* 💬 **अपने सुझाव दें:** यदि आपकी कोई समस्या है या कोई सुझाव देना चाहते हैं,तो नीचे **कमेंट** करके हमें ज़रूर बताएं।
*पूरा आर्टिकल पढ़ने के लिए आपका वेलकम है!*
Also Read This Article:Introduction to how mathematics is shaping our future?
6.छात्रा के भविष्य का सपना (हास्य-व्यंग्य) (Student’s dream of the future) (Humour-Satire):
- छात्र का सपना होता है कि वह इंजीनियर,डॉक्टर आदि बनेगा।यह सपना जब तक जिंदा रहता है तब तक टीचर देवता लगते हैं।लेकिन ज्योंही सपने पूरे नहीं होते हैं,हकीकत में नहीं बदलते हैं तो टीचर काल देवता लगने लगते हैं।
7.भविष्य के निर्धारण की 6 तकनीक:भूतकाल का ज्ञान और वर्तमान का पुरुषार्थ (Frequently Asked Questions Related to 6 Techniques of Future Fixation:Comprehension of Past and Manliness of Present) से संबंधित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:
प्रश्न:1.भविष्य के स्वरूप का निर्धारण कैसे करें? (How to determine the future appearance?):
उत्तर:भूतकाल के ज्ञान और वर्तमान के पुरुषार्थ द्वारा भविष्य के स्वरूप का निर्धारण करें।
प्रश्न:2.भविष्य की योजना क्यों जरूरी है? (Why is planning for the future important?):
उत्तर:उससे हमें काम की हर बारीकियां पता चल जाती हैं।हमारे सामने एक स्पष्ट लक्ष्य होता है।योजना से हमें काम को बूस्टअप (Boostup) करने की प्रेरणा मिलती है।
प्रश्न:3.क्या भविष्य के बारे में विचार ना करें? (Don’t think about the future?):
उत्तर:भविष्य के बारे में चिंता नहीं चिंतन करें।चिंतन भी उतना ही जितना लक्ष्य प्राप्ति में सहायक हो।
- उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर द्वारा भविष्य के निर्धारण की 6 तकनीक:भूतकाल का ज्ञान और वर्तमान का पुरुषार्थ (6 Techniques of Future Fixation:Comprehension of Past and Manliness of Present) के बारे में और अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
- *”यह आर्टिकल **Satyam Mathematics** ब्लॉग पर **Satyam Coaching Centre** के द्वारा तैयार किया गया है।”*
| No. | Social Media | Url |
|---|---|---|
| 1. | click here | |
| 2. | you tube | click here |
| 3. | click here | |
| 4. | click here | |
| 5. | Facebook Page | click here |
| 6. | click here | |
| 7. | click here |








