6Secret of How to Study Scientifically
1.वैज्ञानिक तरीके से अध्ययन करने के 6 रहस्य (6Secret of How to Study Scientifically),वैज्ञानिक तरीके से अध्ययन कैसे करें? (How to Study in Scientific Way?):
- वैज्ञानिक तरीके से अध्ययन करने के 6 रहस्य (6Secret of How to Study Scientifically) के आधार पर हम अध्ययन करने की सही तकनीक जान सकेंगे।आज के युग में अध्ययन और स्वाध्याय आगे उन्नति करने बढ़ने का उत्तम और आदर्श तरीका है।
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2.अध्ययन में बाधक तत्त्व (Barriers to the study):
- अध्ययन की सही तकनीक न मालूम होने से बहुत से विद्यार्थी फिसड्डी रह जाते हैं या पढ़ाई को बीच में छोड़कर कोई कार्य करने लगते हैं।सोचने वाली बात यह है कि चाहे शैक्षिक परीक्षा हो,प्रवेश परीक्षा हो,प्रतियोगिता परीक्षा हो,जाॅब में सफलता प्राप्त करना हो अथवा जीवन क्षेत्र में किसी भी समस्या से पार पाना हो,व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त करना हो तो सबसे उत्तम माध्यम है अध्ययन और स्वाध्याय करना।परंतु जब तक अध्ययन और स्वाध्याय की सही तकनीक नहीं मालूम होगी तब तक कितना ही पढ़ लिया जाए उसका सुपरिणाम सामने नहीं आएगा।यही कारण है कि बहुत से विद्यार्थियों द्वारा बहुत कठिन परिश्रम करने पर भी वांछित अंक प्राप्त नहीं होते या वांछित परिणाम प्राप्त नहीं हो पाता।
- मैथमेटिक्स ओलिंपियाड हो,ब्रिक्स देशों द्वारा आयोजित परीक्षा हो,जेईई-मेन आदि परीक्षाओं में लाखों परीक्षार्थी भाग लेते हैं,प्रतियोगिता परीक्षाओं में विद्यार्थियों का सैलाब उमड़ पड़ता है परंतु मुश्किल से एक प्रतिशत विद्यार्थियों को सफलता प्राप्त होती है।अपने लिए ऐसे अभ्यर्थी सही करियर का चुनाव नहीं कर पाते,जाॅब या व्यवसाय में असफल हो जाते हैं या अपने व्यक्तिगत,सांसारिक और पारिवारिक दायित्वों का ठीक से निर्वहन नहीं कर पाते हैं।ऐसा होने का कारण होता है उसका उसे कार्य को करने का विधि पूर्वक ज्ञान ना होना अथवा आधी-अधूरी जानकारी का होना।
- ऐसे विद्यार्थियों के सामने अनेक अड़चनें आती है परंतु उस पर ठीक प्रकार से चिंतन-मनन नहीं करते हैं,समस्या की जड़ का पता नहीं लगाते हैं।जब अध्ययन में आने वाले बाधक तत्त्वों का पता लगाते ही नहीं है तो दूर करना तो बहुत दूर की कौड़ी है।यदि इन बाधक तत्त्वों को हटा दिया जाए तो कोई कारण नहीं है कि वे अध्ययन द्वारा अपने लक्ष्य को प्राप्त न कर सकें।इन बाधक तत्वों में मुख्य हैःपढ़ने में अरुचि का होना,पढ़ने में एकाग्र ना होना,पढ़ाई की उपयोगिता न समझना,पढ़ा हुआ समझ में न आना,पढ़ा हुआ याद ना होना,पढ़ने के प्रति जुनून ना होना,अध्ययन से नए ज्ञान का अर्जन न कर पाना क्योंकि ज्ञान अनंत है और ज्ञान प्राप्त करने से नई-नई बातों का ज्ञान होता है,नवीन तकनीक का पता चलता है और प्रगति करने के लिए नवीन ज्ञान ग्रहण करना जरूरी है।इसके अलावा अध्ययन का एनवायरमेंट ना होना,भौतिक अड़चनें जैसे शोरगुल,अशांत वातावरण,पढ़ने का स्थान दुर्गंध हो आदि ऐसी अनेक अड़चनें है जिसके कारण विद्यार्थी के अध्ययन में बाधा खड़ी कर देते हैं।
- यदि विद्यार्थी में विद्या ग्रहण की ललक और जिज्ञासा हो तो ये सारे तत्त्व धीरे-धीरे हटते चले जाते हैं और विद्यार्थी उत्तरोत्तर अध्ययन की योग्यता प्राप्त करता चला जाता है।एक स्थिति ऐसी आ जाती है कि उसे बाह्य प्रेरणा की जरूरत नहीं होती है,बल्कि अंतःप्रेरणा से वह अध्ययन करने लगता है।अंतर्ज्ञान होने पर उसे फिर बाह्य साधनों की जरूरत नहीं होती,अड़चनें समाप्त होती जाती हैं।
3.अध्ययन में बाधक तत्त्वों को कैसे दूर करें? (How to remove obstacles in study?):
- अध्ययन में बाधक तत्त्वों और रूकावटों को समाप्त करके ही विद्यार्थी बुद्धिमान और ज्ञानी बनता है और तब वह अपने परिवार,समाज,शिक्षा संस्थान,शिक्षकों,विद्वानों से सम्मान प्राप्त करता है।शिक्षा प्राप्त करने के बाद वह केवल डिग्रीधारी विद्यार्थी नहीं होता,बल्कि एक योग्य,कुशल और पात्र विद्यार्थी होता है।ऐसे विद्यार्थी को जाॅब प्राप्त करना या जॉब को हैंडल करने अथवा प्रतियोगिता परीक्षा में सफलता प्राप्त करना मुश्किल नहीं है।वह पद,प्रतिष्ठा और धन अर्जित करता है।धन से वह आवश्यक सुख-सुविधाएँ जुटाता है,अपनी ज़रूरतें पूरी करता है,भोजन,वस्त्र,मकान आदि प्राप्त कर लेता है लेकिन इन सब का उपयोग त्याग की भावना रखकर करता है,सुख-साधनों में आसक्ति रखकर नहीं करता है।ऐसे ज्ञानी और बुद्धिमान विद्यार्थी को सरल और शील गुण संपन्न लड़की शादी के लिए मिल जाती है जिससे उसका आवास मकान नहीं बल्कि घर बन जाता है।
- पढ़ने में अरुचि इसलिए होती है क्योंकि छात्र-छात्रा छोटी मार्ग और खोटे तरीकों से सुखों और लाभों को अर्जित करना चाहता है।दरअसल इन छोटे और खोटे मार्ग से होने वाले नुकसान,दुष्परिणा को वह नहीं जानता है।शॉर्टकट्स से प्राप्त सुख-सुविधाएँ एवं लाभ उसे इसलिए आकर्षित करते हैं क्योंकि एक तो इससे जल्दी से जल्दी मालामाल हो जाता है और दूसरा इसमें कठिन परिश्रम नहीं करना पड़ता है।बस केवल कुछ तिकड़में,उल्टी-सीधी तरकीब,छल-कपट अपनाकर लाभ अर्जित करता है।समाज में आज ऐसे लोग ही अकूत धन-संपत्ति अर्जित करते हैं और समस्त भोग-विलास और विलासिता के सुख-साधनों को भोंगते हैं।विद्यार्थी का मन ऐसे तरीकों से जल्दी आकर्षित होता है और उसकी पढ़ाई के प्रति अरुचि हो जाती है।
- लेकिन एक बात का ध्यान रखना चाहिए कि खोटे,गलत और शॉर्टकट्स तरीकों से प्राप्त सफलता अंततः पतन की ओर ले जाते हैं और उसका दंड भोगना ही पड़ता है।कठिन परिश्रम करके पढ़ाई करने से प्राप्त धनार्जन और सुख-सुविधाओं से असीम आनन्द की प्राप्ति होती है।हालांकि शुरू में पढ़ाई करने में कठिन परिश्रम,कड़ी मेहनत करनी पड़ती है और जिससे इस कड़ी मेहनत के लाभों से आकर्षण हो जाता है तो उसकी पढ़ाई में रुचि बढ़ती जाती है।कठिन परिश्रम अरुचि समाप्त होकर उसकी पढ़ने में रुचि (श्रद्धा) उत्पन्न होती है।और इस तरह से की गई पढ़ाई से उसे प्रसन्नता और आनंद का अनुभव होता है।रुचि पूर्वक लगातार पढ़ने से एकाग्रता बढ़ती है,मन में उत्साह होता है।इस एकाग्रता के द्वारा विद्यार्थी का मन शैक्षणिक व प्रतियोगी परीक्षा और जाॅब में सफलता दिलाने वाले इष्ट विषयों में लगकर उसका ज्ञान प्राप्त कर लेता है।
- दूसरी अड़चन है पढ़ाई में विद्यार्थी का एकाग्र ना होना।एकाग्रता का अर्थ है विद्यार्थी का पढ़ने में मन न लगना,तन्मय होकर न पढ़ना।मन का कार्य किसी विषय को पढ़ने में संलग्न करना होता है।विषय वस्तु को समझने का कार्य तो बुद्धि करती है।एकाग्र ना होने के कई कारण होते हैं।जैसे सोशल मीडिया पर सर्फिंग करने में रुचि होना,खेलने में रुचि होना या मानसिक विकृति का होना,पढ़ाई से होने वाले लाभों का ज्ञान ना होना,आलसी प्रवृत्ति होना,वातावरण शोरगुल,अशांत अथवा दुर्गंधयुक्त होना,पढ़ाई करने के लिए ठीक प्रकार से अपने आप को एडजस्ट न कर पाना आदि बाधाओं के कारण मन एकाग्र नहीं होता है।ये सभी कारण तभी असर करते हैं जब मन की चंचल अर्थात् रजोगुण प्रधान होने से पढ़ाई में अर्थात् रजोगुण प्रधान होने से पढ़ाई में एकाग्रता नहीं सधती है।यदि सत्वगुण से युक्त होता है तो भी इसमें रजगुणों की कुछ ना कुछ मात्रा होती है अतः पढ़ाई में मन एकाग्र नहीं हो पाता है इस कारण मन की एकाग्रता उस तरह तक नहीं सधती जिस स्तर की एकाग्रता ज्ञान प्राप्ति के लिए आवश्यक है।अतः विषयवस्तु का सही चित्रण मन में अंकित नहीं हो पाता क्योंकि बीच-बीच में बाधक तत्व मन को अस्थिर करते रहते हैं।
- जब विद्यार्थी इस रुकावट को हटाकर अपने विषय को पढ़ने का लगातार लंबे काल तक अभ्यास करता है तो इससे उसे विद्यार्थी की उस विषय को पढ़ने के प्रति रुचि उत्पन्न हो जाती है,फिर उसे रुचि उत्पन्न करने के लिए किसी और उपाय की आवश्यकता नहीं पड़ती और अंततः वह अपने विषय में मन को लगाने में सफलता प्राप्त कर लेता है।तो एकाग्रता कायम करने के लिए बार-बार अभ्यास (पढ़ने का) करता है।अभ्यास और वैराग्य से ही चंचल मन काबू में होता है।अभ्यास यानी अच्छे कार्य (अध्ययन) को बार-बार करना और बुरे कार्यों से भी विरक्ति अर्थात् अध्ययन से अरुचि उत्पन्न करने वाले विषयों की तरफ ध्यान न देना से एकाग्रता सधती है।
4.पढ़ा हुआ समझ में ना आना (I don’t understand what I read):
- अध्ययन करने में पढ़ा हुआ समझ में ना आना भी एक रुकावट है।इसका कारण होता है कि आज जिस गति से जनसंख्या बढ़ती जा रही है उस जनसंख्या को शिक्षा मुहैया करना एक बड़ी समस्या है।अतः एक कक्षा में क्षमता से अधिक बच्चों को ठूँस दिया जाता है फलतः एक शिक्षक को सभी छात्र-छात्राओं को समझाना असंभव है।दूसरा कारण है टीचर द्वारा पढ़ाने,समझाने की कला में निपुण न होना।इन दोनों कारणों से छात्र-छात्राएं विषयवस्तु को समझ नहीं पाते हैं।उदाहरणार्थ गणित विषय अमूर्त विषय है अतः उसको समझाना टीचर के लिए टेढ़ी खीर है।जैसे संख्या 2 का ज्ञान करना है तो संख्या 2 का संसार में मूर्त चित्र विद्यमान नहीं है 2 को किसी विषयवस्तु से संबंध जोड़कर समझाना होता है जैसे दो खिलौने,दो पैन आदि।
- अतः अध्यापक को अमूर्त विषय को प्रकृति में स्थित किसी मूर्त (चित्र) से संबंध जोड़कर उसे समझाना चाहिए।इसके अलावा कुछ शब्द भी ऐसे होते हैं जो विद्यार्थी द्वारा सुने हुए नहीं होते हैं अतः वह उन्हें समझ नहीं पाता है।जैसे गणित में प्राचल शब्द होता है।जब तक प्राचल शब्द का अर्थ नहीं बताया जाएगा तब तक विद्यार्थी प्राचल थ्योरी में आया है उसको ठीक से समझ नहीं पाएगा।
- जिन विद्यार्थियों में किसी शब्द को सुनकर अथवा किसी वस्तु को देखकर मन में वैसा का वैसा यथार्थ अर्थ बनाने-समझने की योग्यता विद्यमान न होती है उन्हें बुद्धिमान कहते हैं।कक्षा में विद्यार्थियों की संख्या कम करके तथा छात्र-छात्राओं की तरफ व्यक्तिगत ध्यान देने पर विषयवस्तु समझ में आने लगती है।मेधावी छात्र-छात्राएं विषय को समझ पाते हैं तभी शैक्षणिक,इनामी प्रतियोगिता,प्रवेश परीक्षा,जेईई-मेन्स आदि की तैयारी करते हैं,तो उनके लिए सफलता के अवसर सर्वाधिक होते हैं क्योंकि इन परीक्षाओं में प्रत्येक प्रश्न के वैकल्पिक उत्तरों में से एक सही उत्तर का चयन करने के लिए प्रश्न व चारों उत्तर के स्वरूप को सूक्ष्म रूप से जानने की नितांत आवश्यकता होती है और इस प्रकार की मूलभूत समझ इन मेधावी विद्यार्थियों के पास विद्यमान होती है।मेधावी विद्यार्थियों से निम्न स्तर के दूसरे प्रकार के विद्यार्थी होते हैं उनको अर्थ समझने की पूर्णता ना होने के कारण,उनके मन में अर्थ का अस्पष्ट या अपूर्ण चित्र बनता है यानी उन्हें विषय पूरी तरह समझ में नहीं आता है।उन्हें अल्प बुद्धि विद्यार्थी कहते हैं।उन्हें बार-बार समझाने उन पर व्यक्तिगत ध्यान देने तथा विद्यार्थी द्वारा बार-बार अभ्यास करने पर ही विषय समझ में आता है।
- कुछ विद्यार्थी ऐसे भी होते हैं जो कक्षा में बैठे रहते हैं,केवल शरीर उपस्थित रहता है,क्या पढ़ाया जा रहा है उन्हें कुछ पता नहीं होता है।ऐसे विद्यार्थी परीक्षा में पास होने के लिए शब्दों को अच्छी तरह रट लेते हैं इसलिए उन्हें “रट्टू तोते” कहा जाता है।ऐसे विद्यार्थी पुस्तक में जैसा लिखा होता है वैसा का वैसा रटकर परीक्षा में उतार देते हैं।कुछ विद्यार्थी ऐसे भी होते हैं जिन्हें मूर्ख कहा जाता है,ठस बुद्धि के होते हैं,उन्हें कितना ही पढ़ाया जाए,समझाया जाए परन्तु समझ में बिल्कुल नहीं आता है।नींद आने पर,मादक पदार्थों का सेवन करने पर या अधिक आलस्य का अनुभव करने पर सामान्य बुद्धि वाले भी ऐसी अवस्था (मूर्खता) का अनुभव करते हैं।
- पढ़ा हुआ समझ में आने के लिए तीव्र बुद्धि होना अथवा बुद्धि के प्रयोग की योग्यता होना आवश्यक है अन्यथा विद्यार्थी के मन में देखी,सुनी,पढ़ी हुई वस्तु के स्वरूप में मिथ्या (असत्य) ज्ञान,अज्ञान या संशय बना रहता है इस बुद्धि की वृद्धि और बुद्धि के प्रयोग की योग्यता उत्पन्न करने की विधि को समझना जरूरी है ताकि विद्यार्थी कठिन से कठिन विषयों को भी अच्छी तरह से समझने की क्षमता प्राप्त कर सके।यह अति आवश्यक भी है क्योंकि छोटी कक्षाओं में तो सिलेबस कम होने के कारण विद्यार्थी किताबी कीड़ा बनकर उस विषय को रट लेते हैं परंतु बड़ी कक्षाओं में तो रटना संभव नहीं होता और समझा उसे आता नहीं जिससे उस विद्यार्थी की रुचि पढ़ाई में समाप्त हो जाती है,इसके परिणामस्वरूप एकाग्रता समाप्त होकर पढ़ाई के क्षेत्र में उसे असफलता ही प्राप्त होती है।
5.अध्ययन किया हुआ याद ना होना (Missing the study):
- अध्ययन किया हुआ याद ना होना भी छात्र-छात्राओं के लिए एक बड़ी समस्या है।जो देखा,सुना,पढ़ा समझा जाता है वह स्मरण करने की शक्ति में कमी होने से मस्तिष्क में दर्ज नहीं होना बल्कि भूल जाना।याददाश्त कमजोर होने के कई कारण होते हैं:एकाग्रता पूर्वक अध्ययन न करना,समझकर आत्मसात न करना,चलते तरीके से पढ़न,पढ़ाई को बोझ समझकर करना,अन्य कार्यों में दिलचस्पी होना,पढ़े हुए का बार-बार अभ्यास न करना,लिखकर याद न करना आदि।स्मरण रखने के लिए कुछ बातों पर गौर करना आवश्यक है।विद्यार्थी की याद करने की दृढ़ इच्छाशक्ति हो,उसे स्मरण करने की सही विधि का ज्ञान हो,जिस ज्ञान को याद करना चाहता है उसका बार-बार अभ्यास करना समझ कर तथा लिखकर याद करना,अध्ययन को डूब कर करना,अध्ययन के प्रति श्रद्धा भाव हो आदि बातों का पालन किया जाए तो पढ़ा हुआ ठीक से याद हो जाता है और उस ज्ञान का मस्तिष्क में अंकन होता है लंबे समय तक यह संयोग बना रहा तो फिर विद्यार्थी उस ग्रहण किए गए ज्ञान को कभी नहीं भूलता है अन्यथा उपर्युक्त कारणों की वह विद्यार्थी याद करने में असफल रहता है।
- वर्तमान शिक्षा में सैद्धांतिक ज्ञान तो प्रदान किया जाता है परंतु प्रैक्टिकल (क्रियात्मक) शिक्षण नहीं दी जाती इसलिए भी विद्यार्थी भूल जाते हैं।सैद्धांतिक परीक्षा और प्रायोगिक परीक्षा,जाॅब और व्यवहार में ऐसे विद्यार्थी असफल हो जाते हैं।परीक्षा में कितना लिखना है? कैसे लिखना? कैसे प्रयोग करना? कैसे गृह कार्य (होमवर्क) करना? कैसे पढ़ेंगे ज्ञान को आचरण में लाना? आदि विशेषताओं की प्राप्ति के लिए पढ़ाई में बाधक तत्त्वों को हटाना जरूरी है।छात्र-छात्राओं को सैद्धांतिक ही नहीं क्रियात्मक व व्यावहारिक शिक्षा भी देनी चाहिए।
- अध्ययन के प्रति जुनून नहीं होने के बाधक तत्त्व को हटाने के लिए कोर्स की पुस्तकें पढ़ने के साथ-साथ ज्ञानवर्धक या व्यावहारिक ज्ञान,सत्साहित्य का थोड़ा बहुत अध्ययन करना चाहिए।कोई हाॅबी,भजन,संगीत,नृत्य,लेख लिखना आदि में हाॅबी को समय देना चाहिए इससे अध्ययन में रुचि बनी रहती है और रुचि में वृद्धि होते हुए वह अध्ययन करने में दीवानगी महसूस करता है।एक ही एक विषय पढ़ते रहने से बोरियत हो जाती है जबकि ज्ञानवर्धक व सत्साहित्य का अध्ययन करने से अध्ययन के प्रति लगाव पैदा होता है क्योंकि इन पुस्तकों का अध्ययन करने से समझदारी बढ़ती है।इसके अलावा हमारे आसपास में अध्ययन करने का एनवायरमेंट नहीं होता है तब भी अध्ययन में बाधा उत्पन्न होती है।एनवायरमेंट ना हो तो किसी लाइब्रेरी में जाकर अथवा शिक्षा संस्थान की लाइब्रेरी में अध्ययन करने से इस बाधा को हटाया जा सकता है।नई-नई बातें,खोज (शैक्षिक अध्ययन व जॉब आदि के लिए) कर अपने क्षेत्र में सुधार कर,उन्नति करने से भी विद्यार्थी सफल होता चला जाता है।सृजन करने की क्षमता का विकास होता है।पश्चिमी देश अर्जित ज्ञान में बार-बार अभ्यास करके,सृजन करके आगे से आगे इसीलिए बढ़ रहे हैं।
- उपर्युक्त आर्टिकल में वैज्ञानिक तरीके से अध्ययन करने के 6 रहस्य (6Secret of How to Study Scientifically),वैज्ञानिक तरीके से अध्ययन कैसे करें? (How to Study in Scientific Way?) के बारे में बताया गया है।
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6.छात्र का अध्ययन का तरीका (हास्य-व्यंग्य) (Student’s Way of Studying) (Humour-Satire):
- भाई (छात्र से):प्रश्न पत्र देकर लौटे छात्र से एक प्रश्न का उत्तर सुनकर भौंचक रह गया।0.00756 का वर्गमूल ज्ञात करो।उसका जवाब छात्र ने लिखा छात्र स्वयं करें।
- यह पूछने पर कि उसने यह उत्तर क्यों लिखा।उसने वन वीक सीरीज निकालकर बताया कि उस सवाल का यही उत्तर लिखा है।भाई ने अपना सिर पीट लिया।
7.वैज्ञानिक तरीके से अध्ययन करने के 6 रहस्य (Frequently Asked Questions Related to 6Secret of How to Study Scientifically),वैज्ञानिक तरीके से अध्ययन कैसे करें? (How to Study in Scientific Way?) से संबंधित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:
प्रश्न:1.अध्ययन करने की जरूरत क्यों है? (Why is the study needed?):
उत्तर:एकाग्रता,बुद्धि,स्मृति,प्रतिभा,सृजनात्मकता बढ़ाने,पढ़ाई,जाॅब,व्यवसाय,ईनामी परीक्षा और प्रतियोगिता परीक्षा में सर्वोत्तम सफलता प्राप्त करने का अध्ययन एक उत्तम साधन है।
प्रश्न:2.आधुनिक युग में बच्चों को कैसे पढ़ाया जाता है? (How are children taught in the modern age?):
उत्तर:जानकारी,शाब्दिक जानकारी को बच्चों के मस्तिष्क में ठूँस-ठूँस कर भर दिया जाता है।ऐसी शिक्षा बच्चों के बोझ बन जाती है।ऐसा पढ़ना भाड़ झोंकने के और कुछ नहीं।
प्रश्न:3.आज के बच्चे कैसे पढ़ते हैं? (How do today’s children read?):
उत्तर:गाइड और सीरीज से पढ़कर कम मेहनत में पढ़कर उत्तीर्ण होना ही उनका एकमात्र लक्ष्य है।
- उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर द्वारा वैज्ञानिक तरीके से अध्ययन करने के 6 रहस्य (6Secret of How to Study Scientifically),वैज्ञानिक तरीके से अध्ययन कैसे करें? (How to Study in Scientific Way?) के बारे में और अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
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Satyam
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