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Milne Thomson Construction Method

1.मिल्न टाॅमसन रचना विधि का परिचय (Introduction to Milne Thomson Construction Method)-

मिल्न टाॅमसन रचना विधि (Milne Thomson Construction Method) को समझने के लिए इसमें प्रयुक्त होनेवाली शब्दावली जैसे विश्लेषिक फलन,संयुग्मी फलन को समझना आवश्यक है।मिल्न टाॅमसन रचना विधि (Milne Thomson Construction Method) में एक संयुग्मी फलन दिया हुआ हो तो उसके आधार पर विश्लेषिक फलन का निर्माण किया जाता है।
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2.विश्लेषिक फलन ( Analytic or Holomorphic of Regular Function)-

किसी प्रांत D पर परिभाषित कोई सम्मिश्रमान फलन किसी बिन्दु पर वैश्लेषिक माना जाता है जबकि वह बिन्दु के प्रतिवेश में स्थित किसी भी बिन्दु पर अवकलनीय हो। कोई फलन किसी समुच्चय में तब वैश्लेषिक होता है जबकि वह समुच्चय के प्रत्येक बिन्दु पर वैश्लेषिक हो।विश्लेषिक फलन को होलोमार्फिक फलन (Holomorphic Function)भी कहते हैं।
प्रतिवेश (neighbourhood)-एक ऐसा समुच्चय होता है जो ऐसे किसी विवृत समुच्चय को आविष्ट करे।
यदि कोई फलन f(z) किसी बिन्दु पर विश्लेषिक न हो तो उस बिन्दु को फलन f(z) का विचित्र बिन्दु (sinular point) कहते हैं।

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3.संयुग्मी सम्मिश्र संख्याएं (congugate complex numbers)-

a+ib और a-ib के प्रकार की दो सम्मिश्र संख्याएं परस्पर संयुग्मी संख्याएं कहलाती है। जहां a और b वास्तविक संख्याएं है।

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4.मिल्न टाॅमसन रचना विधि (Milne Thomson Construction Method)-

मिल्न टाॅमसन रचना विधि (Milne Thomson Construction Method) में जब एक संयुग्मी फलन दिया हो तब विश्लेषिक फलन f(z) का निर्माण किया जाता है।f(z) के निर्माण में निम्न चरणों का पालन किया जाता है-
माना f(z)=u+iv एक विश्लेषिक फलन है जहां u तथा v संयुग्मी फलन है।यह भी माना कि u तथा v में एक का मान ज्ञात है। यहां यह मान लेते हैं कि u दिया हुआ है, इसलिए v ज्ञात करना है।मिल्न टाॅमसन रचना विधि (Milne Thomson Construction Method) में सीधा f(z) ज्ञात करते हैं।यह विधि निम्न अनुसार है-

f(z )=u(x,y)+i v(x,y) and z=x+iy

x=\frac { 1 }{ 2 } (z+\bar { z } ),y=\frac { 1 }{ 2i } (z-\bar { z } )

we can write

f(z)=u\left[ \frac { 1 }{ 2 } (z+\bar { z } ),\frac { 1 }{ 2i } (z-\bar { z } ) \right] +iv\left[ \frac { 1 }{ 2 } (z+\bar { z } ),\frac { 1 }{ 2i } (z-\bar { z } ) \right]………(1)

The equation can be regarded a formal identity in two independent variables z and \bar { z }

putting z=\bar { z } in equation(1),We get

f(z)=u\left( z,0 \right) +iv\left( z,0 \right)

We have f^{ ' }\left( z \right) =\frac { \partial f }{ \partial x } ={ u }_{ x }+i{ v }_{ x }={ u }_{ x }-i{ v }_{ y } (by cauchy-Riemann equations)

let{ u }_{ x }={ \phi }_{ 1 }(x,y),{ u }_{ y }={ \phi }_{ 2 }(x,y) 

Then { u }_{ x }={ \phi }_{ 1 }(x,y),{ u }_{ y }={ \phi }_{ 2 }(x,y) 

Then f^{ ' }\left( z \right) ={ \phi }_{ 1 }(x,y)-i{ \phi }_{ 2 }(x,y)={ \phi }_{ 1 }(z,0)-i{ \phi }_{ 2 }(z,0) 

integrating , We get f\left( z \right) =\int { { \phi }_{ 1 }(z,0) } dz-i\int { { \phi }_{ 2 }(z,0) } dz+c 

Where c is constant of integration

similarly if v is given, We have

f\left( z \right) =\int { { \psi }_{ 1 }(z,0) } dz+i\int { { \psi }_{ 2 }(z,0) } dz+c

where{ v }_{ y }={ \psi }_{ 1 }(x,y),{ v }_{ x }={ \psi }_{ 2 }(x,y) 

मिल्न टाॅमसन रचना विधि (Milne Thomson Construction Method) तथा प्रसंवादी फलन व यथातथ अवकल समीकरण दोनों में एक संयुग्मी फलन दिया हुआ हो तब विश्लेषिक फलन ज्ञात किया जा सकता है। परन्तु मिल्न टाॅमसन रचना विधि (Milne Thomson Construction Method) में f(z) सीधे ही ज्ञात किया जा सकता है वह भी z के पदों में। जबकि प्रसंवादी फलन व यथातथ अवकल समीकरण की सहायता से ज्ञात करने के लिए पहले यह ज्ञात करना होता है कि फलन प्रसंवादी है या नहीं।यदि फलन प्रसंवादी है तभी यथातथ अवकल समीकरण की सहायता से फलन f(z) ज्ञात किया जा सकता है।f(z) भी कार्तीय निर्देशांकों के रूप में ज्ञात किया जाता है ।यदि इसे z के पदों में ज्ञात करना हो तो z=x+iy की सहायता से z के पदों में ज्ञात किया जाता है जो कि काफी लम्बी प्रक्रिया है।इस आर्टिकल में मिल्न टाॅमसन रचना विधि (Milne Thomson Construction Method) के बारे में बताया गया है।अब उदाहरण के द्वारा मिल्न टाॅमसन रचना विधि (Milne Thomson Construction Method) से फलन f(z) ,z के पदों में ज्ञात करेंगे जिससे इसकी थ्योरी ठीक से समझ में आ जाएगी।

उदाहरण -यदि u-v=(x-y)({ x }^{ 2 }+4xy+{ y }^{ 2 })  तथा f(z)=u+iv,z=x+iy   का  विश्लेषिक फलन है तो f(z) का मान z के पदों में ज्ञात कीजिए |

Solution – u-v=(x-y)({ x }^{ 2 }+4xy+{ y }^{ 2 }) तथा f(z)=u+iv,z=x+iy 

f(z)=u+iv……..(1)              , if(z)=iu-v …….(2)

(1) व (2) का प्रयोग करने पर –

(1+i) f(z)=u-v+i(u+v)

F(z)=u-v+i(u+v)           माना F(z)=(1+i) f(z)

साथ ही यह भी माना कि u-v=U, u+v=V

F(z)=U+iV

f(z) विश्लेषिक फलन है अतः F(z) भी विश्लेषिक फलन होगा |

U=(x-y)({ x }^{ 2 }+4xy+{ y }^{ 2 })\\\frac { \partial U }{ \partial x } ={ x }^{ 2 }+4xy+{ y }^{ 2 }+(x-y)(2x+4y)\\ \\ \\ \frac { \partial U }{ \partial x } ={ 3x }^{ 2 }+6xy+2{ y }^{ 2 }=\Phi (x,y)\\ \\ \\ \frac { \partial U }{ \partial x } =-(x-y)({ x }^{ 2 }+4xy+{ y }^{ 2 })(x-y)(4x+2y)\\ \\ \\ \\ \frac { \partial U }{ \partial x } =(3{ x }^{ 2 }-6xy-3{ y }^{ 2 })=\psi (x,y)

मिल्न विधि से –

F^{ ' }\left( z \right) =\phi (z,0)-i\psi (z,0)\\F^{ ' }\left( z \right) =3{ z }^{ 2 }-i3{ z }^{ 2 }\\ F^{ ' }\left( z \right) =(1-i)z^{ 2 }

दोनों पक्षों का समाकलन करने पर –

F(z)=(1-i)z^{ 3 }+c\\ (1+i)f(z)=(1-i)z^{ 3 }+c\\ f(z)=\frac { 1-i }{ 1+i } { z }^{ 3 }+\frac { c }{ 1+i } \\ f(z)=-i{ z }^{ 3 }+{ c }_{ 1 }

 

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