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Live Like a Lighthouse: Mastering Panchsheel

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1.प्रकाशस्तम्भ की तरह जिए: पंचशीलों का पालन करें (Live Like a Lighthouse: Mastering Panchsheel):

  • प्रकाशस्तम्भ की तरह जिएं (Live Like a Lighthouse),कैसे जिएं? आइए जानते हैं कि क्या ये बौद्ध धर्म (गौतम बुद्ध) के पंचशील हैं या संयुक्त राष्ट्रसंघ के पंचशील हैं? इन पंचशील के द्वारा विद्यार्थी कैसे प्रकाशस्तम्भ की तरह जी सकता है?

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2.अपना कायाकल्प करें (Rejuvenate yourself):

  • छात्र-छात्राओं आपको क्या करना चाहिए? हमको और आपको दूसरी वाली महत्त्वाकांक्षाओं का स्तर बदल देना चाहिए और कायाकल्प कर देना चाहिए। आत्म-परिष्कार की महत्त्वाकांक्षा (Ambition for self-improvement): हमारे कार्यों में शालीनता,श्रेष्ठता का दिग्दर्शन होना।दो,यही हमारा लक्ष्य होना चाहिए।श्रेष्ठ आदर्शों के लिए,समाज व देश के लिए हमने क्या किया? छोटे दीपक की तरह आप जलिए। दूसरों के लिए प्रकाश पैदा कीजिए।शायद हम यह समझते हैं कि हम बहुत छोटे आदमी हैं और हैसियत भी बहुत कम है और वक्त शायद एक छोटे दीपक के बराबर हो।दीपक कितने पैसे का होता है? पचास पैसे का और तेल एवं बत्ती एक रुपये की।बस,इतनी कीमत का दीपक तमाम रात जलता रहता है और रात भर लोगों को ठोकर-खाने से बचाता है।पैर में चोबा लगने से बचा लेता है,सांप काटने से बचा लेता है और बिच्छू काटने से बचा लेता है।
  • रात भर जलता रहता है और आप छोटे आदमी हैं न? हर्ज की कोई बात नहीं है।छोटा आदमी होना कोई हर्ज की बात नहीं है।रात के तारे के तरीके से आप चमकिए। ‘टिंवकल टिंव्कल लिटिल स्टार !हाऊ आई वंडर व्हाट यू आर।’ आप इस तरह छोटे सितारे के तरीके से चमकिए। आप दूसरे लोगों को रास्ता बताने के लिए चमक सकते हैं।कैसे:’अप ॲबाव दि वर्ल्ड सो हाई,लाइक ए डायमंड इन दि स्काई।’डायमंड के तरीके (In the Diamond Way),हीरे के तरीके से आप‌ जल सकते हैं।
  • लोक मंगल के लिए,दूसरों को रास्ता बताने के लिए,दूसरों को राहत देने के लिए,दूसरों को प्यार देने के लिए,दूसरों को ऊँचा उठाने के लिए,दूसरों को सलाह-मशविरा देने के लिए,दूसरो के घावों के जले हुए घावों पर मरहम-पट्टी लगाने के लिए आप ऐसा नहीं कर सकते हैं क्या? आपको करना चाहिए।
  • अगर आप अपनी दो महत्त्वाकांक्षाएँ बदल दें तो मजा आ जाए।एक तो आप अपना ईमान बदल दें,दृष्टिकोण बदल दें,तो यह आपके लिए सुगम है।कठिन क्या है? पैसा कमाना कठिन है? शायद ईमानदारी से या बेईमानी से भी यह हो सकता है।हम तो वासना को पूरा करेंगे (Will fulfill lust)।कोशिश कीजिए,शायद आपकी इच्छा पूरी हो जाए। नहीं,हम तो बहुत सारी काम वासना पूरी करेंगे।तो कोशिश कीजिए,शायद आपको सफलता मिल जाए।हमारा ऐसा ख्याल है कि शायद आपको इसमें सफलता नहीं मिलेगी और अहंकार को पूरा करने में भी सफलता नहीं मिलेगी।जब आप एम० एल०ए० होंगे,तब एम०पी० वाला मुँह उठाए चला आएगा और आपको कहेगा कि पहले एम०पी० हो जा,तो जानें।जब आप एम० पी० हो जायेंगे,तो मिनिस्टर अंगूठा दिखाएगा (The Minister will show the thumbs up) और कहेगा कि बड़ा चला आया है एम०पी० बनकर।मिनिस्टर हो जा,तो जानें और मिनिस्टर को मुख्यमंत्री धमकाएगा और मुख्यमंत्री को राष्ट्रपति।फिर आपकी महत्त्वाकांक्षाएँ कहाँ रह गई? आपका अहं कहाँ रह गया? आपकी ये इच्छाएँ कभी पूरी नहीं हो सकती।

3.छात्र-छात्राएँ अनासक्त योगी की तरह जिएँ (Students should live like unattached yogis):

  • आपकी ये तीनों इच्छाएँ पूरी हो सकती हैं:आप श्रेष्ठ जीवन जीने की महत्त्वाकांक्षा को आसानी से पूरा कर सकते हैं।उसमें कोई रुकावट नहीं है।आप अपने कामों को अच्छा,बेहतरीन,बढ़िया बनाने के लिए अगर अपनी जाफसानी और जिम्मेदारी (Jafsani and Responsibility) को मिला दें तो फिर आप इतने बेहतरीन हो सकते हैं कि फिर उसका क्या कहना।छोटे हो तो क्या,थोड़े हों तो क्या,फिर ऐसे होंगे कि आपके हाथ चूमने के लिए और आपकी कलम चूमने के लिए हर किसी की तबीयत चाहेगी।
  • आप यह काम कर सकते हैं।आप सेवा-सहयोग के लिए कोई न कोई ऐसा तरीका निकाल सकते हैं कि अपने पड़ोसियों से लेकर के अपने घरवालों तक,मुहल्ले वालों से लेकर आस-पास के क्षेत्रों तक के लोगों की शारीरिक,मानसिक और आध्यात्मिक (Mental and Spiritual) सेवा हो सकें।हम समझते हैं कि पैसे से,धन से शायद आपसे सेवा न हो सके और लोगों को कंबल बाँटने,रजाइयां बाँटने और दवाइयाँ बाँटने का मौका शायद आपको न मिले।फिर भी कोई हर्ज की बात नहीं है।इससे क्या बनता-बिगड़ता है।ऋषियों के पास सम्पत्ति कहाँ थी।ऋषियों ने जो बाँटा,प्यार बाँटा,ज्ञान बाँटा,प्रकाश बाँटा (Distribute Light)।आपके पास भी लेकिन आपने कहाँ बाँटीं।पैसा न हो तो उसे मरने दीजिए।पैसे से क्या बनता-बिगड़ता है!
    अगर आप अपने आपमें दो महत्त्वाकांक्षाएँ,दो चीजें बदल पाएं तो हम समझते हैं कि आप बहुत कुछ काम कर सकते हैं।आप इन दो की तैयारी कीजिए।तीसरी तैयारी एक और काम करने की है।इसके लिए कोशिश कीजिए।क्या कोशिश करेंगे? आप नेता बनने की कोशिश मत कीजिए,अभिनेता बनने की कोशिश कीजिए।अभिनेता कौन होता है? (Who is an actor?) जैसे फिल्मों में कोई बादशाह बन जाता है तो कोई कुछ बन जाता है।आप भी बादशाह बन सकते हैं।हिन्दुस्तान में अब तो कोई बादशाह नहीं है।हिंदुस्तान में जो खिताब बादशाह का था उसे गर्वर्नमेंट ने छीन लिया।अब कौन बन सकता है।
  • आप यह सकते हैं कि इस दुनिया में रहते हुए बिना रहने वालों के तरीके से रहें।इससे क्या हो जाएगा? आप ड्रामा खेलने वालों तरीके से सारे काम करते रहेंगे।यह क्या हो गया? इनकी मौत हो गई।कैसे? राजा हरिश्चन्द्र ड्रामा चल रहा था,तभी उनके बेटे की मौत हो गई।सब रोने लगे और जब ड्रामा समाप्त हुआ तो बेटा उठकर भाग गया।यह क्या हो गया? दुनिया का ऐसा ही चक्कर है (Is this how the world goes round?)।
    अपने आपको किसी चीज के बारे में ज्यादा अटैच कर लेनाःयह भी गलत है।अपना काम कीजिए।
  • यह दुनिया की हवा है।कभी दिन आ गया,कभी रात आ गई;कभी पूरब आ गया,कभी पश्चिम आ गया;कभी नफा होता है,कभी नुकसान होता है,कभी मौत होती है,कभी जिन्दगी होती है।आप इन मामलों में ज्यादा ध्यान न दें,नहीं तो फिर ज्वार-भाटे के तरीके से आपकी जिंदगी नीरस हो जाएगी।जब आप सफलता में बहुत ज्यादा उछलने लगेंगे,तब भी आपकी जिंदगी नीरस हो जाएगी और बैलेंस खो बैठेंगे और जब आप पर मुसीबत आएगी,तब भी आप बैलेंस खो बैठेंगे (If there is trouble, you will lose the balance)।तब आप बराबर झूले के तरीके से झूलेंगे और एक दिन भी चैन से,शांति से व्यतीत करने का मौका नहीं मिलेगा।इसलिए आप कर्मयोगी के तरीके से,अनासक्त योगी के तरीके से जिएं।प्रकाशस्तम्भ की तरह जिएं।
  • फल की आकांक्षा को त्याग कर कर्त्तव्य की आकांक्षा की बाबत आपको ध्यान देना चाहिए।फल हमारे हाथ में नहीं है।हम खूब काम (अध्ययन) करेंगे और हमारी तरक्की हो जाएगी।कोई गारंटी नहीं है।हम तो खूब परिश्रम करेंगे और देखिए हमारा तीन साल का प्रमोशन ड्यू है।हम नहीं कह सकते कि जो तीन साल का प्रमोशन ड्यू है,वह हो जाएगा कि नहीं हो जाएगा।कितने आदमी बैठे हुए हैं।कोई रिश्वत देने वाला है,कोई आगे बढ़ाने वाला है,कोई यह कहने वाला है,कोई ऐफिसेंसी का दावा करने वाला है।
  • तेरा हो सकता है कि नहीं,हमको नहीं मालूम।हमारा प्रमोशन नहीं होगा तो हमें बड़ा दुःख होगा।आपने अपना दुःख और कष्ट उसको बेच रखा है? किसको ? बॉस को।वह चाहे तो आपको प्रसन्न करे,चाहे तो आपको नाराज करे।अपनी खुशी को किसी के हाथों मत बेचिए। बीबी नाराज हो जाए तो दुःखी,बीबी खुश हो जाए तो खुश।धत् तेरे की।सबके हाथ में अपनी खुशी को गिरवी रख आया है।अपनी खुशी को किसी के हाथ में गिरवी मत रखो।अपनी खुशी अपने पास रखें।हम नहीं रख पाएँगे।यह तभी सम्भव है और केवल उसी के लिए सम्भव है,जो आदमी अपने कर्त्तव्य के बारे में संतोष कर लेता है कि हमने अपनी जिम्मेदारी पूरी तरह निभाई और जो हुआ सो हुआ।
  • हमने अध्ययन को पूरी मशक्कत के साथ किया।बस,इसके आगे,अपने कर्त्तव्यों तक सीमित हो जाएँ। क्या होगा? आप और हम नहीं जानते कि आपका क्या होगा? यह भी हो सकता है कि स्कूल और कॉलेज जाने के बाद गुण्डागर्दी और आवारागर्दी करे और किसी की की जेब काटे और जेलखाने चला जाए।इस बारे में हम कुछ नहीं सकते हैं कि ईमानदारी के साथ आद‌मी अपने कर्त्तव्यों को जिम्मेदारी को निभाएं।

4.भूत और भविष्य को छोड़कर वर्तमान में जिएं (Leave the past and the future and live in the present):

  • बुड्ढे आदमी भूत की तलाश करते रहते हैं कि अरे! हमारे जमाने में बिना फीस लिए गुरुजी पढ़ा दिया करते थे और हमारे जमाने में आदमी वेदों और उपनिषद जैसे कठिन विष‌यों को कंठस्थ कर लेते थे।हमारे जमाने में दुनिया ऐसी थी,वैसी थी।जब देखो,तब रामकहानी,पीछे की बातें दोहराते रहते हैं।ये जो बुड्ढे आदमी हैं,वे उम्र के हिसाब से ही नहीं,अक्ल और समझ के हिसाब से भी बुड्ढे हैं।
  • ये पुराने किस्से,पुरानी रामकहानी कहते और गड़े मुरदे उखाड़ते रहते हैं।और बच्चे? बच्चे भविष्य की कल्पना करते रहते हैं।हम एम ०ए० पास करेंगे,तो अधिकारी बन जाएँगे,बॉस हो जाएंगे।मम्मी हमारा ब्याह हो जाएगा।
  • सफेद बहू आएगी और तुम्हें हवाई हवाज में लेकर चलेंगे।क्यों मुन्ना! हमें भी ले चलेगा? बाबा! आपको नहीं ले चलूँगा।मैं तो अपनी बहन को ले जाऊंगा।उसे मिठाई खिलाऊँगा,लड्डू खिलाऊँगा।अरे! तेरे पास पैसे कहाँ हैं? अभी तो एक रुपया माँग रहा था और कह रहा है कि हवाईजहाज में लेकर चलूँगा।यह भविष्य की कल्पनाएँ करने वाले कौन है?बालक,जिन्हें जब देखो शेखचिल्ली के तरीके (Sheikhchilli methods) से कहते और सोचते रहते हैं कि बड़ा हो जाऊँगा,तो यह बनूँगा।बीएससी (बीटेक) पास करके इंजीनियर बन जाऊँगा।भाड़ हो जाएगा चपरासीगिरी भी नहीं मिलेगी।चपरासीगीरी करना।मैं चपरासीगीरी कैसे कर सकता है? मैं तो जेईई-मैन परीक्षा देकर आया हूँ।ख्वाब देख रहा है।भविष्य क्या हमारे हाथ में है।भविष्य के बारे में कोई गारंटी नहीं कि क्या होने वाला है।
  • जिम्मेदार विद्यार्थी केवल वर्तमान की बात सोचते हैं।आज हम क्या कर सकते हैं? और हमें क्या करना चाहिए? (And what should we do?) आज की परिस्थिति में हमारे लिए क्या मुनासिब है और क्या करना चाहिए? ये सारी की सारी कर्मयोग की निशानियाँ है।गीता में फल की इच्छा के लिए मना किया गया है और आपको इसके लिए मना किया गया है कि आप किसी भी चीज के बारे में ज्यादा अटैचमेंट न रखें कि अपनी सारी की सारी खुशी उस अटैचमेंट पर निछावर कर दें।आप अलग रहकर हर चीज को देखिए।
  • कीचड़ के बाहर रहकर देखिए (सांसारिक प्रपंच) (Worldly Tricks)।लेकिन जो सांसारिक प्रपंचों में बहुत ज्यादा अटैच्ड हो जाता है और मर जाता है।इतना ज्यादा हमे अटैचमेंट मत कीजिए कि मरने के बाद आपको उसी गली,मोहल्ले का कुत्ता होना पडे,चूहा होना पड़े।बेटे से इतना ज्यादा अटैचमेंट मत कीजिए कि बेटे की पालतू बिल्ली होना पड़े।किसी के साथ इतना ज्यादा अटैचमेंट मत रखिए।वैरागी के तरीके से रहिए।कर्त्तव्यनिष्ठ के तरीके से रहिए।योगी के तरीके से रहिए।

5.विभूतियों का सुनियोजन (Organize the luminaries):

  • जो वस्तुएँ आपको मिली हुई हैं,आप उनका ठीक तरह से इस्तेमाल करना सीखें।हमेशा हमारी हवस यही रहती है कि नई चीजें मिलनी चाहिए,परन्तु हम कहते हैं कि जो चीजें आपके पास हैं,उनका इस्तेमाल करना आपको आता है कि नहीं? जिसको आप सबसे कीमती समझते हैं,आज तक वह बनी ही नहीं।संसार में सबसे कीमती चीज है समय जिसको आप समझते भी नहीं?
  • समय से बेहतरीन दौलत हम नहीं समझते कि मनुष्य के पास और कुछ भी होगी।आदमी के पास सबसे कीमती दौलत भगवान ने समय दिया है।यह वह सिक्का है,जिसको लेकर बाजार में जाइए और जो चाहे खरीद कर ले आइए।आपको समय मिला हुआ है।इसकी कीमत पर आप चाहे परलोक खरीद ले आइए,लोक खरीद ले जाइए,सेहत खरीद लीजिए,विद्या खरीद लीजिए,ज्ञान खरीद लीजिए।सबकी दुकानें लगी हुई हैं,जो भी चाहे खरीद लीजिए।इसमें आप अपना समय,श्रम खर्च कीजिए और जो चाहे खरीद लीजिए।
  • दुकाने,मार्किट खुला हुआ पड़ा है।प्रत्येक दुकानदार चिल्ला रहा है।यहाँ से खरीदिए।देखिए यहाँ कैसे अच्छे सामान (Here’s how the good stuff) रखे हुए हैं।हर आदमी चिल्ला रहा है।समय की कीमत को आप समझते नहीं।समय की कीमत को समझिए।

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6.समय की पाबन्दी जरूरी (Punctuality is necessary):

  • समय को-काल को रावण ने पाटी से बांधकर रखा था। आपने अपने काल को कलाई पर बाँधकर रखा है,लेकिन खिलौने के तरीके से,जेवर के तरीके।यह घड़ी कितने रुपये की है? उसमें कितने बजे हैं।आप बेकार में इसे खेलने-कूदने में तोड़-फोड़ दोगे और मरम्मत और करानी पड़ेगी।
  • नहीं,नहीं! मैं घड़ी पहनती हूँ (विद्यार्थी)।घड़ी का मतलब समझती है? घड़ी से मतलब है:समय की पाबन्दि‌याँ। हमारे पास एक कभी धूपघड़ी थी।मुद्दतों तक उससे काम करते रहे।क्या टाइम है,उसी से पता चल जाता था। चाहे धूपघड़ी हो,चाहे देसी घड़ी हो।आप टाइम की पाबन्दी कीजिए।समय का अपव्यय मत कीजिए।
  • प्रत्येक चीज को जिसमें समय भी शामिल है,श्रम भी शामिल है,पैसा भी शामिल है,अक्ल भी शामिल है,हर चीज शामिल है।उसको पूर्ण तरीके से खर्च करना चाहिए।एक तो हम इन्हें बेकार के कामों में खर्च करते हैं,जिसका नाम अनर्थ है (Whose name is meaningless)।अनर्थ उसे कहते हैं,जो खराब कामों में किया जाए।मसलन :अक्ल।अक्ल को आपने परीक्षा में नकल करने में खर्च किया,किसी से लड़ाई-झगड़ा करने में खर्च किया।यह क्या हुआ? अनर्थ कहलाया।पैसे को आपने ऐसे गलत कामों में खर्च किया।मसलन आपने शराब पी (You drank alcohol),किसी को नीचा दिखाने में खर्च किया,तो यह क्या हुआ? यह अनर्थ कहलवाया।एक कहलाता है व्यर्थ।समय का एक हिस्सा अपने गप्पे हाँकने में खर्च कर दिया।यह क्या है? समय को व्यर्थ गँवा रहे हैं।पैसे को व्यर्थ गँवा रहे हैं,जिससे किसी को कोई नुकसान नहीं हो रहा है,न फायदा हो रहा है।ऐसे ही गँवा रहे हैं,खर्च कर रहे हैं।अक्ल को व्यर्थ खर्च कर रहे है।

7.सार्थक कार्य में नियोजन (Planning in Meaningful Tasks):

  • हम बड़े किफायतदार रहे हैं।तो आप शायद यह सोचते होंगे हम बड़े कंजूस हैं।नहीं हम कंजूस नहीं है।हमसे ज्यादा उदार मुश्किल से मिलता है।हमने खूब खर्च किया,लेकिन अच्छे कामों में खर्च किया है।बचा सकते थे,पर हमने अच्छे कामों में खर्च कर दिया।
  • सार्थक कामों में श्रम (Labor in Meaningful Works),सार्थक कामों में अक्ल,सार्थक कार्यों में धन:अगर आप इस तरीके से खर्च कर पाएँ तो आप देखेंगे कि महान गणितजों और वैज्ञानिकों की तरह अपने समय का उपयोग करके आप अमर बन सकते हैं। अगर हम चीजों का ठीक से इस्तेमाल करना सीख पाएँ,जिसमें हमारी सेहत भी शामिल है,हमारा समय भी शामिल है,श्रम भी शामिल है,अक्ल भी शामिल है,पैसा भी शामिल है और कुटुंब भी शामिल है और हमारे नए मित्र भी शामिल है और हमारी हैसियत और परिस्थिति भी शामिल है और हमारी कुशलता भी शामिल है।इन सब चीजों का अगर हम बेहतरीन उपयोग करना सीख पाए तो यह हमारे लिए बड़े सौभाग्य की बात होगी।

8.प्रकाशस्तम्भ की तरह जीने का सारांश (Summary of live like a lighthouse):

  • (a)प्रकाशस्तम्भ की तरह जीने के लिए बुद्धि को परिष्कृत करने वाले प्रश्न (Questions that refine the intellect to live like a lighthouse):
    (1.)अपना कायाकल्प करने से आप क्या समझते हैं? (What do you mean by rejuvenating yourself?):
    (2.)आपके श्रेष्ठ जीवन जीने का आधार क्या है? (What is the basis for living your best life?)
    (3.)हमारा सबसे बड़ा शत्रु कौन है? उसे कैसे काबू में करें? (Who is our greatest enemy? How to control him?)
    (4.)आपका पंचशीलों को पालन करने के बारे में क्या विचार है? (What is your opinion about following the five precepts?)
    (5.)रोज अध्ययन व चिन्तन न करने वाले विद्यार्थी कैसे होते हैं? (How are students who do not study and think every day?)
    (6.)उक्त लेख को पढ़ने के बाद तुम व्यवहार में क्या परिवर्तन करना चाहोगे? (After reading the above article,how would you like to change your behavior?)
    (8.)पंचशील को पालन करने की आपके अनुसार क्या युक्तियाँ हो सकती है? (What tips do you think can be to follow the Panchsheel?)
    (7.)तुम अपने व्यवहार में इन परिवर्तनों को क्यों करना चाहते हो? (Why do you want to make these changes in your behavior?)
    (9.)तुम किसी बात के सही या गलत होने को कैसे जानते हो? (How do you know if something is right or wrong?)
  • (b)लाइटहाउस की तरह जिएं के महत्त्वपूर्ण सिद्धान्त
    (Important Principles of Live Like a Lighthouse):
    (1.)अपना कायाकल्प करें (Rejuvenate yourself)
    (2.)छात्र-छात्राएँ अनासक्त योगी की तरह जिएं (Students should live like unattached yogis)
    (3.)भूत और भविष्य को छोड़कर वर्तमान में जिएं (Leave the past and the future and live in the present)
    (4.)विभूतियों का सुनियोजन करें (Organize the luminaries)
    (5.)समय की पाबन्दी जरूरी (Punctuality is necessary)
    (6.)सार्थक कार्यों में नियोजन करें (Plan into meaningful tasks)
  • (c)प्रकाशस्तम्भ की तरह कैसे जिएं? (How to live like a lighthouse?):
    (1.)उज्ज्वल और लगातार चमकें। (SHINE BRIGHTLY & Consistently):
    अपने चरित्र,मूल्यों और आंतरिक प्रकाश को दूसरों के लिए एक दृढ़ प्रकाशस्तंभ बनने दें। (Let your character,values and inner light be a steadfast beacon to others)
    (2.)तूफानों में डटे रहो। (STAND FIRM IN STORMS):
    जीवन की चुनौतियों और प्रतिकूलताओं के खिलाफ लचीले,जमीन से जुड़े और मजबूत बनें। (Be resilient, grounded, and strong against life’s challenges and adversity)
    (3.)सुरक्षा के लिए दूसरों का मार्गदर्शन करें (GUIDE OTHERS TO SAFETY):
    कठिन समय से निपटने वालों के लिए दिशा,समर्थन और आशा का स्रोत बनें। (Be a source of direction,support,and hope for those navigating difficult times)
    (4.)आशा की किरण बनें। (BE A BEACON OF HOPE):
    आशावाद को प्रेरित करें और सकारात्मक संभावनाओं और बेहतर दिनों की ओर इशारा करें। (Inspire optimism and point the way toward positive possibilities and better days)
    (5.)बिना शर्त सेवा करें। (SERVE UNCONDITIONALLY):
    बदले में कुछ भी उम्मीद किए बिना,उपयोग की वास्तविक इच्छा से दूसरों की मदद करें। (Help others without expecting anything in return, out of a genuine desire to be of use)
    (6.)अपनी नींव बनाए रखें।(MAINTAIN YOUR FOUNDATION):
    अपनी व्यक्तिगत अखंडता,भलाई और मूल्यों पर ध्यान दें ताकि आपका प्रकाश मजबूत बना रहे। (Tend to your personal integrity, well-being, and values so your light remains strong)
    (7.)अनुग्रह के साथ तत्वों का मौसम। (WEATHER THE ELEMENTS WITH GRACE)
    सभी मौसमों और परिस्थितियों में अनुकूलन करें,सहन करें और संयम बनाए रखें (Adapt,endure and maintain composure through all seasons and conditions)
    उपर्युक्त आर्टिकल में प्रकाशस्तम्भ की तरह जिए: पंचशीलों का पालन करें (Live Like a Lighthouse: Mastering Panchsheel) के बारे में विस्तार और गहराई से बताया गया है।
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9.पुत्र का पिता के प्रति दृष्टिकोण (हास्य-व्यंग्य) (Son’s attitude towards his father) (humor-satire):

  • पिता (पुत्र से):तुमने आज फिर अध्ययन नहीं किया। तुम्हारी कोचिंग भी लगा रखी है।
  • पुत्रःपापा आज पढ़ने का मन नहीं कर रहा था,मूड ऑफ हो रहा था।
  • पिता :मैंने तुमसे पहले भी कहा था कि जब तक जीवन में श्रेष्ठ आदर्शों को नहीं अपनाओगे,कर्त्तव्य का पालन नहीं करोगे तो मूड ऑफ ऐसे ही होता रहेगा।
  • पुत्रःअब ध्यान रखूँगा,नियमित रूप से पढ़ूँगा।
  • पिता:तुम ऐसे ही रोजाना कहते हो।तुम सीधे तरीके से नहीं मानोगे।चलो मुर्गा बन जाओ।
  • पुत्र:रोने लगता है।
  • पिता:अरे मैं तो तुमसे प्रेम करता हूँ,तुम्हारे भले के लिए ही कर रहा हूँ।
  • पुत्रःमैं बड़ा हो जाऊँगा तो आपको उल्टा लटकाऊँगा और लम्बा कर दूँगा।अभी छोटा हूँ ना तो प्रेम का प्रमाण नहीं दे सकता वरना प्रेम तो मैं भी आपसे करता है।

10.प्रकाशस्तम्भ की तरह जिए: पंचशीलों का पालन करें (Frequently Asked Questions Related to Live Like a Lighthouse: Mastering Panchsheel) से सम्बन्धित अकसर पूछे जाने वाले प्रश्नः

प्रश्न:1.प्रकाशस्तम्भ से क्या आशय है? (What do you mean by lighthouse?):

उत्तर:अपनी इच्छाओं को परिष्कृत करना क्योंकि इच्छाओं में बड़ी ताकत है।हम उन्हें परिष्कृत कर तीनो एषणओं (पुत्र,धन और सम्मान पाने की इच्छा) से परे चले जाएँ।यही प्रकाशस्तम्भ की तरह जीना है।

प्रश्न:2.पंचशील में क्या शामिल है? (What does Panchsheel consist of?):

उत्तरःइच्छाओं को परिष्कृत करना,कर्मयोगी की तरह जीना,श्रम,इंद्रियों,समय आदि का भरपूर उपयोग करना।

प्रश्न:3.प्रकाशस्तम्भ का एक उदाहरण दो। (Give an example of a lighthouse):

उत्तर:राजा हरिश्चंद्र से प्रेरणा लें।समझ लें कि अच्छे ख्वाब,श्रेष्ठ आदर्श कभी मर नहीं सकते।वे सतत प्रेरणा देते रहेंगे।

  • उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर द्वारा प्रकाशस्तम्भ की तरह जिए: पंचशीलों का पालन करें (Live Like a Lighthouse: Mastering Panchsheel) की प्राइमरी टर्म्स के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

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