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Changeability Progressiveness and Newness in Mathematics

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2 2.गणित में परिवर्तनशीलता,प्रगतिशीलता और नवीनता (Changeability Progressiveness and Newness in Mathematics),मैथेमेटिक्स में परिवर्तनशीलता, प्रगतिशीलता और नवीनता (Variability Progressiveness and Innovation in Mathematics) के सम्बन्ध में अक्सर पूछे जाने प्रश्न:

1.गणित में परिवर्तनशीलता,प्रगतिशीलता और नवीनता (Changeability Progressiveness and Newness in Mathematics),मैथेमेटिक्स में परिवर्तनशीलता, प्रगतिशीलता और नवीनता (Variability Progressiveness and Innovation in Mathematics):

  • गणित में परिवर्तनशीलता,प्रगतिशीलता और नवीनता (Changeability Progressiveness and Newness in Mathematics) की आवश्यकता क्यों है?अंग्रेजी में कहावत है कि “Man does not live on bread alone” अर्थात् मनुष्य केवल भोजन से जीवित नहीं रहता बल्कि उसे अपनी जिज्ञासा शांति,आत्मोन्नति तथा विकास करने के लिए ओर कुछ भी चाहिए।जैसे: प्रतिष्ठा,शौर्य,उच्च पद,मांगल्य,बुद्धिमता,विवेकशीलता,महानता,सुख-शांति,बाहुबल,कुलवृद्धि आदि।इन सबके लिए हमें विभिन्न क्षेत्रों में परिवर्तनशीलता,प्रगतिशीलता और नवीनता की आवश्यकता है क्योंकि जिस प्रकार तालाब में ठहरा हुआ पानी सड़ जाता है,बदबू देता है और बेकार हो जाता है।उसी प्रकार चाहे गणित शिक्षा का क्षेत्र अथवा अन्य क्षेत्रों हों उसमें भी यदि उपर्युक्त तत्त्वों का समावेश न हो तो ठहराव आ जाता है,आगे विकास नहीं हो पाता है।
  • प्राचीन काल से ही मानव की जीवन शैली में उत्तरोत्तर उत्थान और पतन देखने को मिला है।परंतु पतन से आगे सीख लेकर अपना विकास करता रहा है।शिक्षा द्वारा हम विद्यार्थियों के व्यक्तित्व में परिवर्तन लाते हैं तथा उनको विकास की ओर अग्रसर करते हैं।इस प्रकार विद्यार्थियों का मानसिक,बौद्धिक तथा शारीरिक विकास होता है। कक्षा में शिक्षण द्वारा धीरे-धीरे प्रतिदिन छात्र-छात्राओं की प्रगति में सहायता करते हैं और शिक्षा के उद्देश्यों को प्राप्त करते हैं।गणित के उद्देश्यों में भी विज्ञान की विषय सामग्री में वृद्धि होने से परिवर्तन होते रहते हैं।गणित के अध्ययन से विद्यार्थियों के व्यवहारों में परिवर्तन देखे जा सकते हैं।यह परिवर्तन दो विद्यार्थियों के व्यवहारों में संबंधित परिवर्तन से देख सकते हैं।यदि एक विद्यार्थी गणित में दूसरे विद्यार्थी से अच्छा रहा है तो गुणात्मक परिवर्तन देख सकते हैं।गणित के अध्यापन से विद्यार्थी के व्यक्तित्व में कुछ ऐसे गुण आ जाते हैं जिन्हें दूसरे विषयों द्वारा शायद इतनी मात्रा में प्राप्त नहीं किया जा सकता है।
  • गणित की विषयवस्तु में तीव्र परिवर्तन आया है उसका श्रेय आधुनिक विज्ञान की देन है।परंतु आज गणित ही विज्ञान की जननी है और गणित की सहायता के बिना विज्ञान में प्रगति संभव नहीं है। वर्तमान में जितनी भौतिक प्रगति हम देखते हैं वह सब विज्ञान एवं गणित की देन है।गणित के बिना विज्ञान पंगु हो जाता है।तथ्यों का अध्ययन,संकलन तथा विवेचन गणित के सिद्धांतों की सहायता से किया जाता है।भौतिक विज्ञान की प्रगति में गणित का महत्त्वपूर्ण हाथ है तथा जैविक विज्ञानों के विकास में इसका अधिकाधिक प्रयोग किया जाता है।स्वचालन विज्ञान और साइबरनेटिक्स के आगमन से गणित अध्ययन पर विशेष ध्यान देना ओर भी आवश्यक हो गया है।
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(1.)गणित में परिवर्तनशीलता (Changeability in Mathematics):

  • परिवर्तनशीलता से तात्पर्य है कि गणित की पाठ्य सामग्री तथा विषयवस्तु में आमूल-चूल परिवर्तन करना।प्राचीन काल में मानव की भौतिक आवश्यकताएं ओर प्रकार की थी परंतु आधुनिक युग में मानव की भौतिक आवश्यकता ओर प्रकार की है।
  • गणित की विषयवस्तु में परिवर्तन से तकनीकी विकास होता है।तकनीकी से क्या तात्पर्य है?मनुष्य के अस्तित्व के लिए कुछ भौतिक मूल्यों यानि वस्तुओं (जैसे भोजन,वस्त्र,आवास आदि) की आवश्यकता होती है।इन मूल्यों या आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए व्यक्ति उत्पादन करता है और उत्पादन के लिए उसे उत्पादन के साधनों की आवश्यकता होती है।उत्पादन में प्रयुक्त साधनों को ही तकनीकी कहा जाता है।वर्तमान तकनीकी में परिवर्तन आने से उत्पादन प्रणाली में परिवर्तन आता है।उत्पादन प्रणाली की विशेषता है कि वह किसी भी स्थिति में काफी समय के लिए स्थिर नहीं रहता है बल्कि सदा ही परिवर्तन तथा विकास की दिशा की ओर अग्रसर रहता है।उत्पादन प्रणाली समाज का मूल है और इसी पर समाज की
  • सामाजिक,सांस्कृतिक,धार्मिक,राजनीतिक संस्थाएं,विश्वास,कला,साहित्य,प्रथाएँ,गणित,विज्ञान एवं दर्शन टिके हुए होते हैं।इसी से जैसे ही उत्पादन प्रणाली में परिवर्तन आता है वैसे ही समाज से संबंधित संपूर्ण बातों में भी परिवर्तन आ जाता है। इस प्रकार तकनीकी से गणित का विकास होता है और गणित के विकास से तकनीकी आगे बढ़ती है।दोनों में अन्योन्याश्रय का सम्बन्ध है।
  • 18 वीं शताब्दी से गणित की सामग्री (विषयवस्तु) में अपार वृद्धि हुई है।यह परिवर्तन पूरे विश्व में देखा जा सकता है।इस क्रांति ने गणित की प्रकृति एवं संरचना में व्यापक परिवर्तन किया है।आज गणित की मात्रा में 100% वृद्धि देखने में आ रही है।गणित में शोध की प्रक्रिया तेज होने से गणित की विषयवस्तु की प्रकृति में भी विस्तृत परिवर्तन हुआ है।
  • जब रूस ने 4 अक्टूबर 1957 को प्रथम बार स्पूतनिक सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में भेज दिया तो सारे विश्व में खलबली मच गई।यह पाया गया कि रूस ने अपने गणित पाठ्यक्रम में परिवर्तन के कारण विज्ञान में ऐसा कारनामा कर दिखाया। इसलिए नई तकनीक के विकास के लिए गणित के पाठ्यक्रमों में परिवर्तन की आवश्यकता महसूस हुई।नई तकनीक के विकास के लिए गणित शिक्षण को ठोस आधार प्रदान करना आवश्यक है।इसलिए परंपरागत गणित में अंकगणित पढ़ाया जाता था उसमें बदलाव आवश्यक हो गया।ब्रूनर ने विश्व के गणितज्ञों को छोटी कक्षाओं में गणित की संकल्पनाओं का अध्यापन करने में प्रोत्साहित किया।अब तक अंकगणित को महत्वपूर्ण माना जाता रहा है।परंतु अब बीजगणित के पाठ्यक्रम को सम्मिलित किया गया।
  • नवीन पाठ्यक्रम में निम्नलिखित को शामिल किया गया:
    समुच्चय सिद्धांत (Set Theory),तार्किक चिंतन (Reasoning Thinking),प्रायिकता (Probability),समूह सिद्धांत (Group Theory),बीजीय संरचनाएं (Algebraic Concept),समूह (Group),रिंग (Ring),सदिश (Vector),रैखिक प्रोग्रामन (Linear Programming),मॉड्यूलों पद्धति,अवकलन (Differential Calculus),अवकलज (Darivatives),त्रिविम ज्यामिति (Three Dimensional Co-ordinate Geometry),दीर्घवृत्त (Elipse),समाकलन (Integral Calculus),स्थिति विज्ञान (Statics), संबंध (Relation),गणितीय विश्लेषण (Mathematical Analysis),संख्यात्मक विश्लेषण (Numerical Analysis)उच्चिष्ठ और निम्निष्ठ (Maxima and Minima),कार्तीय वक्र (Cartesian Curve),द्वि-समाकलन (Double Integration),प्रसंवादी फलन,प्रतिचित्रण (Mapping),अभिसरण  (Convergence),अतिपरवलय (Hyperbola), गति विज्ञान (Dynamics),परिभ्रमण दीर्घवृत्तज, परिबद्ध क्षेत्रफल (bounded area),समतल परिच्छेद (plane section),स्थानांतरण गति,जड़त्व आघूर्ण (Moment of Inertia),दृढ़ पिण्ड (Rigidity Body),द्विघात अभिसरण (quadratic convergence),वास्तविक विश्लेषण (Real Analysis),उष्मागतिकी (thermodynamics),सदिशों का समाकलन (Integration of Vectors),सांख्यिकी (Statistics),गणितीय संरूपण,गणितीय मॉडलिंग (Mathematical Modeling),सम्मिश्र संख्याएं (Complex Analysis),क्रमचय (Permutations),संचय (Combination),ऊर्जा (Energy),घर्षण आदि।
  • इस परिवर्तन ने गणित के परंपरागत स्वरूप को बदलकर नया रूप प्रदान किया है।परंपरागत गणित के पाठ्यक्रम की प्रासंगिकता समाप्त हो चुकी है तथा गणित शिक्षण को एक नवीन स्वरूप प्रदान किया गया है।माध्यमिक विद्यालय में अंकगणित तथा यूक्लिडियन ज्यामिति के स्थान पर गणितीय संरचनाओं को सम्मिलित किया गया है।

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(2.)गणित में प्रगतिशीलता (Progressiveness in Mathematics):

  • प्रगतिशीलता का तात्पर्य है कि गणित की विषयवस्तु,गणित के पाठ्यक्रम की मौजूदा स्थिति में धीरे-धीरे परिवर्तन करना तथा परंपरागत अर्थात् रूढ़िगत पाठ्यक्रम में अंधविश्वास रखने का विरोधी है।
  • प्रगतिशीलता भी एक प्रकार का परिवर्तन ही है परंतु यह अपने संसाधनों तथा आवश्यकताओं तथा
    शासन की दृढ़ संकल्पशक्ति पर निर्भर करता है। साथ ही समय के अनुसार सुधार करना प्रगतिशीलता का सूचक है।हालांकि गणित की विषयवस्तु,पाठ्यक्रम तथा तकनीकी की प्रगति की कोई सीमा नहीं है परंतु उपयुक्त बिंदुओं को ध्यान में रखते यह परिवर्तन करना युक्तिसंगत है।उदाहरणार्थ किसी कक्षा के पाठ्यक्रम में अंकगणित के टाॅपिक अनुपात-समानुपात,प्रतिशत,वर्गमूल साझा इत्यादि शामिल हैं तो इनमें साझा,अनुपात-समानुपात,प्रतिशत,वर्गमूल को हटाकर उनके स्थान पर बहुपद,निर्देशांक ज्यामिति,दो चरो वाले रैखिक समीकरण शामिल करना तथा परिमेय संख्याओं,अपरिमेय संख्याओं,वास्तविक संख्याओं को यथावत रखा जा सकता है।इस प्रकार का परिवर्तन प्रगतिशीलता है।
  • यदि सभ्यता के साथ गणित की प्रगति नहीं हुई होती तो आज हम जिस प्रगति के स्तर को प्राप्त कर सके हैं शायद वह प्राप्त नहीं कर पाते।गणित के विकास का इतिहास विद्यार्थियों को जानना चाहिए जिससे उनको यह आभास हो सके कि किस प्रकार गणित ने हमारी सभ्यता और संस्कृति को विकसित करने में सहायता की है।मनुष्य को संख्या बुद्धि का ज्ञान हुआ तथा गणित के विकास का आधार संख्या बुद्धि को ही माना जाना चाहिए।गणित के इतिहास के अध्ययन से विद्यार्थियों को यह विषय गतिशील एवं प्रगति का सूचक लगेगा तथा इस विषय के अध्ययन में रुचि का विकास होगा।
  • गणित की प्रगति को जानकर विद्यार्थी समझेंगे कि गणितीय समस्याएं आखिरकार मानवीय समस्याएं ही है तथा उन्हें अनेक प्रकार से हल किया जा सकता है।गणित की प्रगति के साथ-साथ अनेक समस्याएं उत्पन्न होती रही है तथा गणित के ज्ञान का उपयोग इन समस्याओं को हल करने में सदैव उपयोगी सिद्ध हुआ है।मानव की प्रगति गणित विषय के विस्तार एवं चिंतन के साथ जुड़ी हुई है। गणित विषयवस्तु की जितनी भी शाखाए एवं नवीन क्षेत्र विकसित हुए हैं वे सब मनुष्य की आवश्यकताओं एवं समस्याओं के हल करने की प्रक्रिया की देन है तथा भविष्य में यदि मनुष्य ऐसे ही प्रयास करता रहेगा तो गणित की प्रगति होगी तथा मनुष्य की समस्याओं के गणितीय हल अधिक सुगम एवं उपयोगी होंगे।
  • इस प्रकार संख्याओं के ज्ञान से प्रारंभ हुई गणित प्रगतिशीलता अर्थात् धीरे-धीरे उन टॉपिक्स को पाठ्यक्रम में शामिल करने के कारण आज छात्र-छात्राओं को उच्च-स्तर की गणित सम्मिश्र संख्याएँ,बीजगणित,समुच्चय सिद्धांत इत्यादि माध्यमिक-उच्च माध्यमिक कक्षाओं में अध्ययन कराया जाता है।

(3.)गणित में नवीनता (Newness in Mathematics):

  • गणित में नवीनता से तात्पर्य है कि गणित की विषय सामग्री,पाठ्यवस्तु अध्यापन में नवीनता प्रदान करने वाले हों।अर्थात् अध्यापन में शिक्षण सामग्री,विषय वस्तु में गणित मशीन,कंप्यूटर,प्रोजेक्टर,फिल्में,गणित प्रयोगशाला,गणित कक्ष,गणित लाइब्रेरी,गणित क्लब,सहायक सामग्रीयाँ माॅडल्स,प्रत्यक्ष वस्तुओं के प्रयोग नवीनता प्रदान करते हैं।
  • गणित में चाॅक,डस्टर,श्यामपट्ट,जड़वत् अभ्यास अध्यापन को जड़ता प्रदान करते हैं।गणित विषय वस्तु कितनी ही प्रगतिशील हो यदि केवल चाॅक,डस्टर,श्यामपट्ट से पढ़ाया जाए तो अध्ययन को रोचक नहीं बनाया जा सकता है।चाॅक,डस्टर तथा श्यामपट्ट का प्रयोग परंपरागत गणित शिक्षण प्रणाली है इससे छात्र-छात्राएं नीरस तथा उबाऊ महसूस करते हैं।नवीन वस्तु कोई भी हो चाहे पुस्तक,नोट्स हो छात्र-छात्राओं में उत्साह का संचार करते हैं।परंतु थोड़े समय बाद उसी पुस्तक से छात्र-छात्राएँ बोरियत महसूस करते हैं।
  • गणित कक्षाओं को सरस व आनन्ददायक नवीन विचारों से संभव किया जा सकता है।गणित मशीन,कंप्यूटर,फिल्में इत्यादि केवल नवीन उपकरण नहीं है बल्कि गणित मशीन व कंप्यूटर के द्वारा गणित में हो रहे विभिन्न अनुसंधान,खोजों तथा विभिन्न विद्वानों के विचारों को ऑनलाइन दिखाया जा सकता है।
  • आज यदि आपके पास कंप्यूटर,लैपटॉप तथा गणित मशीन है तो आप कहीं भी,कभी भी विश्व में गणित में हो रहे कार्यों से परिचित हो सकते हैं।इससे आपकी जानकारी बढ़ने के साथ-साथ ज्ञान में अपार वृद्धि होती है।इस प्रकार विश्व के देशों तथा समय के अनुसार अपने को अपडेट करते रह सकते हैं।
  • अपने आपको अपडेट करना इसलिए भी आवश्यक है कि आज तकनीकी का विकास इतनी द्रुत गति से होता रहता है कि आज कोई गणित खोज हुई है तो कुछ समय बाद ही उसमें संशोधन तथा नई चीज की खोज हो जाती है।इसलिए यदि हम यह फाॅर्मूला लागू करें कि अपने आपको अपडेट करते रहें और आगे बढ़ते रहें तो विश्व के किसी भी देश से हम पिछड़े हुए नहीं रहेंगे।
  • टेलीविजन (Television):टेलीविजन एक ऐसा यंत्र है जिसमें श्रव्य-दृश्य दोनों क्रियाएं उपलब्ध हो जाती है।छात्र-छात्राओं के समक्ष क्रियात्मक दृश्य भी सामने रहता है और दिखाई देता है।गणित में टेलीविजन सबसे अधिक लाभदायक सिद्ध हुआ है। गणित के पूरे-पूरे पाठ टेलीविजन पर प्रसारित किए जाते हैं।यह रेडियो और फिल्म दोनों की भूमिका अदा करता है।जटिल समस्याओं का हल,नया खोजा हुआ ज्ञान तथा मनोरंजनात्मक गणित की सभी बातें बड़ी सुगमता से छात्र-छात्राओं तक पहुंचायी जाती है।यूजीसी कॉलम के अंतर्गत गणित व विज्ञान से संबंधित अनेक प्रोग्राम टेलीविजन पर प्रसारित किए जाते हैं।नवीन तथ्यों,प्रत्ययों व धारणाओं से परिचित कराया जाता है।
  • फिल्म (Film):आजकल कंप्यूटर तथा केलकुलेटर संबंधी गणनाएँ फिल्मों के माध्यम से प्रसारित की जाती है।विज्ञान ने बहुत प्रगति की है याकि हुई है।अनेक यन्त्रों का चलन हो रहा है।गणित की समस्याओं से संबंधित शैक्षिक फिल्मों का निर्माण हुआ है।फिल्मों का महत्त्व इसलिए अधिक है क्योंकि इसमें दृश्य और आवाज दोनों ही साथ-साथ आती है,साथ ही मनोरंजन का पुट भी रहता है।

(4.)सारांश (Conclusion of Changeability Progressiveness and Newness in Mathematics):

  • गणित के इतिहास में 4 अक्टूबर,1957 एक महत्त्वपूर्ण दिन है जब रूस ने प्रथम बार स्पूतनिक भेजा था।इस घटना ने रूस में गणित की श्रेष्ठता स्थापित किया एवं अमेरिका में अपने गणित अध्ययन-अध्यापन में नवीन गणित का समावेश किया जा चुका है।सारे विश्व में गणित अध्यापन में क्रांति का सूत्रपात हुआ और इसका लाभ भारत को मिला।आज भारत में गणित के पाठ्यक्रमों को महत्त्वपूर्ण स्थान दिया गया है।शैक्षिक तकनीक का प्रभाव गणित के पाठ्यक्रमों पर दिखाई देता है।
  • गणित के अध्यापक को नवीन गणित के साथ आत्मसात करना चाहिए।गणित में सृजनात्मकता, खोज,एकीकरण,अनुप्रयोग आदि को प्रमुख स्थान दिया गया है।फलस्वरूप गणित-अध्यापन का स्वरूप बदला जा चुका है।परंपरागत गणित में व्याप्त निष्क्रियता,क्रूरता,अरुचिपूर्ण विषयवस्तु को दूर करने हेतु पाठ्यक्रमों का सृजन किया गया है। विश्व के प्रसिद्ध गणितज्ञों के निर्णय ‘Euclid must go’ ने गणित में संख्या प्रणाली,आधुनिक बीजगणित,गणितीय सांख्यिकी,प्रायिकता सिद्धान्त, संख्या विश्लेषण,रैखिक प्रोग्रामन,संक्रिया विज्ञान आदि को एकीकृत रूप में सम्मिलित किया गया है।इस प्रकार परिवर्तनशीलता,प्रगतिशीलता तथा नवीनता अपने आप में अलग-अलग नहीं है परंतु ये आपस में अंतर्संबंधित (Interlink) हैं।इसके प्रयोग से गणित में क्रांति संभव है।
  • वस्तुतः लाखों अध्यापक विद्यालय में गणित पढ़ा रहे हैं।लगभग 60% अध्यापक नवीन गणित में प्रशिक्षित नहीं है।गणित अध्यापन के घटिया स्तर के लिए गणित शिक्षकों में समुचित प्रशिक्षण का अभाव है।इन अध्यापकों को ग्रीष्म संस्थाओं,पत्राचार पाठ्यक्रम,टीवी पाठ,खुला विश्वविद्यालय,सेवाकालीन सप्ताहांत संस्थाएं,फिल्मों आदि के माध्यम से प्रशिक्षण प्रदान किया जाना चाहिए।
  • उपर्युक्त आर्टिकल में गणित में परिवर्तनशीलता,प्रगतिशीलता और नवीनता (Changeability Progressiveness and Newness in Mathematics),मैथेमेटिक्स में परिवर्तनशीलता, प्रगतिशीलता और नवीनता (Variability Progressiveness and Innovation in Mathematics) के बारे में बताया गया है।

2.गणित में परिवर्तनशीलता,प्रगतिशीलता और नवीनता (Changeability Progressiveness and Newness in Mathematics),मैथेमेटिक्स में परिवर्तनशीलता, प्रगतिशीलता और नवीनता (Variability Progressiveness and Innovation in Mathematics) के सम्बन्ध में अक्सर पूछे जाने प्रश्न:

प्रश्न:1.गणित में परिवर्तनशीलता क्या है? (What is Changeability in Mathematics?):

उत्तर:गणितीय तर्क में परिवर्तन छात्रों को गणित में कैसे प्राप्त करने के लिए सीखने के लिए नए और प्रभावी तरीकों के लिए चल रही खोज है (Ongoing search for new and effective ways for students to learn how to achieve in mathematics)।गणित सीखने के दर्शन में परिवर्तन शिक्षा की दुनिया में हमारे अतीत और वर्तमान को प्रभावित किया है।बदलाव का असर भविष्य में शिक्षा पर भी पड़ेगा।

प्रश्न:2.प्रगतिशील शिक्षा के घटक क्या हैं? (What are the components of progressive education?):

उत्तर:प्रगतिशील शिक्षा
कर के सीखने पर जोर-हाथ परियोजनाओं पर (hands-on projects),अभियान सीखने (expeditionary learning),अनुभवात्मक सीखने।
एकीकृत पाठ्यक्रम विषयगत इकाइयों पर केंद्रित था।
शिक्षा में उद्यमिता का एकीकरण (Integration of entrepreneurship in to education)।
समस्या समाधान और आलोचनात्मक सोच पर मजबूत जोर।
समूह कार्य और सामाजिक कौशल का विकास

प्रश्न:3.प्रगतिशील शिक्षा का उद्देश्य क्या है? (What is the purpose of progressive education?):

उत्तर:प्रगतिशील शिक्षा शिक्षण के पारंपरिक तरीकों के लिए एक प्रतिक्रिया है।यह एक शैक्षिक आंदोलन है जो औपचारिक सीखने की तुलना में अनुभव करने के लिए ओर अधिक मूल्य देता है,के रूप में परिभाषित किया गया है।यह अनुभवात्मक सीखने पर अधिक आधारित है जो बच्चे की प्रतिभा के विकास पर ध्यान केंद्रित करता है।

प्रश्न:4.प्रगतिशील शिक्षा आंदोलन कब शुरू हुआ? (When did the progressive education movement start?):

उत्तर:1880 के दशक
प्रगतिशील शिक्षा आंदोलन 1880 के दशक में सामने आया और 20 वीं सदी में अच्छी तरह से जारी रखा।20वीं सदी में प्रगतिशील शिक्षा ने सभी नागरिकों की भागीदारी और जुड़ाव जैसी लोकतांत्रिक अवधारणाओं को उन तरीकों से अपनाया जिनसे सभी के लिए सामाजिक,आर्थिक और राजनीतिक लाभ प्रभावित हुए ।

प्रश्न:5.गणित ज्ञान के 4 प्रकार क्या हैं? (What are the 4 types of math knowledge?):

उत्तर:छात्र के लिए गणितीय अर्थ का निर्माण करने के लिए 5 प्रकार के ज्ञान हैं:सामग्री ज्ञान (Content Knowledge),संरचनात्मक ज्ञान (Structural Knowledge),व्यावहारिक ज्ञान (Pragmatic Knowledge),परिस्थितिजन्य संदर्भ ज्ञान (Situational Context Knowledge) और (जो मैं बुला रहा हूं) आंतरिक ज्ञान (Intrinsic Knowledge)।

प्रश्न:6.गणित में प्रगतिशील क्या मतलब है? (What does progressive mean in math?):

उत्तर:गणित में, ƒ ∈ L2(R) एक प्रगतिशील फलन एक ऐसा फलन है जिसका फोरियर ट्रांसफॉर्म केवल धनात्मक आवृत्तियों द्वारा समर्थित है:इसे सुपर प्रतिगामी (super regressive) कहा जाता है यदि और केवल तभी जब समय प्रतिलोम फलन f(-t) प्रगतिशील है या समान रूप से,यदि।

प्रश्न:7.गणित में नवीनतम खोजें क्या हैं? (What are the latest discoveries in mathematics?):

उत्तर:2019 की 10 सबसे बड़ी गणित सफलताएं (10 Biggest Mathematics Backthroughs)
रिमान परिकल्पना पर प्रगति (Progress on the Riemann Hypothesis)।क्रिएटिव कॉमन्स (Creative Commons)।
तीन क्यूब्स का योग। एंड्रयू डेनियल।(The Sum of Three Cubes. Andrew Daniels)
कोलाट्ज अनुमान (The Collatz Conjecture)।
संवेदनशीलता अनुमान (The Sensitivity Conjecture)।
कैंसर अनुसंधान के लिए एक महान वर्ष (A Great Year for Cancer Research.
Kirigami Gets Mathematized)।
किरिगामी को गणितीकृत किया जाता है (Kirigami Gets Mathematized)।
सूरजमुखी अनुमान (The Sunflower Conjecture)।
रैमसे सिद्धांत में एक सफलता (A Breakthrough in Ramsey Theory)।

प्रश्न:8.सूचना प्रौद्योगिकी और गणितीय नवाचार क्या है? (What is information technology and mathematical innovation?):

उत्तर:टेक (आईटी और मैथमेटिकल इनोवेशन) यूनिवर्सिटी ऑफ दिल्ली का क्लस्टर इनोवेशन सेंटर चार साल का बी टेक (आईटी और मैथमेटिकल इनोवेशन) ऑफर करता है।यह कार्यक्रम गणित के मजबूत विश्लेषणात्मक कौशल और सूचना और प्रौद्योगिकी (आईटी) के अनुप्रयोग कौशल के निर्माण पर केंद्रित है।

प्रश्न:9.गणित में सबसे महत्वपूर्ण खोज क्या है? (What is the most important discovery in mathematics?):

उत्तर:Pi दिवस: इतिहास में 5 सबसे बड़ी गणितीय खोजों
यूलर की सर्वसमिका (Euler’s Identity) के नाम से जाना जाने वाला यह समीकरण इसकी खूबसूरती में आश्चर्यजनक और अपनी सादगी में धोखा देने वाला है ।
फास्ट फोरियर ट्रांसफॉर्म (Fast Fourier Transform)।
गोडेल की अपूर्णता प्रमेय (Gödel’s Incompleteness Theorems)।
फर्मेट का अंतिम प्रमेय (Fermat’s Last Theorem)।
यूक्लिड के तत्व (Euclid’s Elements)।

प्रश्न:10.मानव जाति में गणित का सबसे महत्वपूर्ण योगदान क्या है? (What is the most important contribution of mathematics in humankind?):

उत्तर:विषय मनुष्य को अधिक व्यवस्थित (methodical) और व्यवस्थित (systematic) बनाता है,गणित हमारे जीवन को व्यवस्थित बनाता है और अराजकता को रोकता है।रचनात्मकता (creativity),तर्क (reasoning),अमूर्त (abstract) या स्थानिक सोच (spatial thinking),महत्वपूर्ण सोच (critical thinking) और समस्या को सुलझाने (problem-solving), और यहां तक कि प्रभावी संचार कौशल जैसे गणित का अध्ययन करते समय आपको कुछ गुणों का पोषण किया जाता है।

उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर द्वारा गणित में परिवर्तनशीलता,प्रगतिशीलता और नवीनता (Changeability Progressiveness and Newness in Mathematics),मैथेमेटिक्स में परिवर्तनशीलता, प्रगतिशीलता और नवीनता (Variability Progressiveness and Innovation in Mathematics) के बारे में ओर अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

Changeability Progressiveness and Newness in Mathematics

गणित में परिवर्तनशीलता,प्रगतिशीलता और नवीनता
(Changeability Progressiveness and Newness in Mathematics)

Changeability Progressiveness and Newness in Mathematics

गणित में परिवर्तनशीलता,प्रगतिशीलता और नवीनता (Changeability Progressiveness and Newness in Mathematics)
की आवश्यकता क्यों है?अंग्रेजी में कहावत है कि “Man does not live on bread alone” अर्थात् मनुष्य केवल भोजन से जीवित नहीं रहता

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