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Is Your Child Running Away from Math? 5 Surefire Ways to Stop Palayan

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1.क्या आपका बच्चा भी गणित से भाग रहा है? पलायन रोकने के 5 अचूक उपाय (Is Your Child Running Away from Math? 5 Surefire Ways to Stop Palayan):

  • क्या आपका बच्चा भी गणित से भाग रहा है? (Is Your Child Running Away from Math?) तो “न दैन्यं न पलायनम्” के संदेश को अपनाएं।यह संदेश गणित के विद्यार्थियों को गणित के डर से बाहर निकलने की प्रेरणा,आत्मविश्वास,निरंतर अभ्यास और कर्म करने की प्रेरणा के लिए प्रेरित करता है।सही मार्गदर्शन और रणनीति व अभ्यास से छात्र गणित में सफल हो सकता है।जानिए गणित का डर दूर करने,आत्म-विश्वास बढ़ाने और गणित (Math) में अच्छे मार्क्स लाने के आसान और प्रभावी उपाय।

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2.गणित से भागने का क्या अर्थ है? (What does it mean to run away from math?):

  • उपर्युक्त शीर्षक में गणित से भागने के अर्थ को ठीक से समझें।गणित से भागने का अर्थ है कि गणित को हल न करके,अपने कर्त्तव्य से विमुख हो जाना।जिस प्रकार रेगिस्तान में शुतुरमुर्ग सामने खतरे को देखकर अपनी चोंच और मुँह को रेत में घुसेड लेता है और समझ लेता है कि खतरा टल गया।पर होता यह है कि शिकारी उसका आसानी से शिकार कर लेता है।
    ठीक यही स्थिति गणित से भागने वाले छात्र की होती है।गणित की तरफ से आंख मूंद लेने से गणित हल होने वाली नहीं है और न ही परीक्षा में अच्छे अंक अर्जित किए जा सकते हैं।
  • गणित के सवालों,प्रमेयों और समस्याओं से घबराकर हार स्वीकार करना या निराश होना और उसे हल न करके पलायन करना (मुंह मोड़ लेना) ही गणित में असफलता का कारण है।सफल होने के लिए निष्ठा और बुद्धिमत्ता पूर्वक किया गया प्रयत्न अवश्य सफलता दिला देता है।
  • सहनशीलता,धैर्य,एकाग्रता,दृढ़ संकल्प शक्ति और तीव्र उत्कण्ठा ये सब सद्गुण सफलता अवश्य दिला देते हैं।हम जितना गणित से दूर भागेंगे उतना ही गणित से डरेंगे,गणित को हल करने का प्रयास नहीं करेंगे साथ ही गणित में कमजोर होते चले जाएंगे।हमारी दिल की धड़कने तेज हो जाएंगी,हाथ-पैर कांपने लगेंगे,इसलिए न तो हमें हर हालत में हार स्वीकार करना चाहिए और न ही कर्त्तव्य से विमुख होना चाहिए।
  • गणित को हल करने से पहले ही या तो कुछ छात्र-छात्राएं किसी के कहने या सुनने के आधार पर कठिन मान लेते हैं अथवा शुरुआत में गणित के कोई सवाल समझ में ना आए तो गणित से किनारा कर लेते हैं।
  • गीता का यह संदेश है:अर्जुनस्य प्रतिज्ञा द्वै न दैन्यं न पलायनम्।आयुरक्षति मर्माणि आर्युनं प्रयच्छति।इसका अर्थ है कि न दैन्यं अर्थात् न तो हार या निराशा का प्रदर्शन करना।न पलायनम्:गणित विषय में आने वाली चुनौतियों,समस्याओं से घबराकर मुँह न मोड़ना अर्थात् कर्त्तव्य का पालन (duty) सवालों को हल करना।आयुरक्षति मर्माणि:धैर्य,ज्ञान कठिन स्थलों पर रक्षा करता है।
    यह श्लोक हमें मुसीबत के समय में मानसिक मजबूती (mental strong),विपरीत परिस्थितियों से ना डरकर उनका सामना और कर्त्तव्य करने की प्रेरणा देता है।अपनी कमजोरियों के विरुद्ध संघर्ष करके मजबूत होने का संदेश देता है।लचीलेपन और दृढ़ता से कितना भी कठिन विषय हो हम उसमें पारंगत हो सकते हैं।प्रतिभाशाली विद्यार्थी के बजाय जिस छात्र-छात्रा में गणित को हल करने का अनुशासन (discipline) और नियमितता (consistency) है,वही आगे बढ़ता है।

3.गणित से भागने के कुछ अन्य कारण और समाधान (Some other reasons and solutions to escape from math):

  • जिस छात्र-छात्रा की नींव कमजोर (weak foundation) है उस विद्यार्थी को कितना ही प्रेरित किया जाए परंतु उसकी गणित को हल करने की हिम्मत ही नहीं होती है।कुछ छात्र-छात्राएं ऐसे भी होते हैं जो अपनी कमजोरी का कारण नींव का कमजोर होना मानते हैं,वे कमजोरी को दूर भी कर लेते हैं और आगे बढ़ते हैं।
  • नींव कमजोर हो तो ऐसे छात्र-छात्राओं को स्वयं पिछली कक्षाओं की कमजोरी को दूर करना चाहिए।जो छात्र-छात्रा ऐसा नहीं कर सकते हैं,उन्हें या उनके अभिभावक को चाहिए कि उनको कोचिंग (coaching) या ट्यूशन (tution) करवाई जाए।सत्यम कोचिंग सेंटर (Satyam Coaching Centre) में हम पहले बच्चे की कमजोरी को पकड़ते हैं,फिर वर्तमान कक्षा की गणित पढ़ाने के साथ-साथ उसकी पिछली कमजोरियों को दूर करने का भरसक प्रयास करते हैं।उसे अहसास भी नहीं कराते और कमजोरी को दूर कर देते हैं।
  • मसलन किसी भी विद्यार्थी के लिए जोड़,गुणा,भाग,बाकी,भिन्नों के जोड़,गुणा,भाग,बाकी,लघुत्तम,वर्गमूल आदि गणित की बेसिक चीजें हैं।परंतु हमने देखा है कि दसवीं कक्षा के विद्यार्थियों में भी ये कमजोरियाँ (Basic Weakness of math) पाई जाती हैं।हम दसवीं कक्षा के चैप्टर्स पढ़ाते समय,सवालों को हल कराते समय ही इन कमजोरियों को दूर करवा देते हैं,हमारा फोकस पिछली कमजोरियों को दूर करने पर भी रहता है।
  • सत्यम मैथमेटिक्स (Satyam Mathematics) ब्लॉग पर भी हमने कई लेख ऐसे लिखे हैं कि छात्र-छात्राओं में गणित की कौन-कौन सी कमजोरियाँ होती हैं,उन्हें कैसे दूर करें,कौन सी रणनीति (Strategy) अपनाएँ।
  • गणित में कमजोर रहने का दूसरा कारण है रटने (Rote Learning) के द्वारा छात्र-छात्रा गणित के सवालों को याद करते हैं।जबकि रटने से मानसिक तनाव (mental stress) पैदा होता है और यह तनाव ही गणित के प्रति भय (math phobia) पैदा कर देता है।हम गणित की विषयवस्तु को ठीक से समझाते हैं और समझाने के बाद कोशिश करते हैं कि अधिक से अधिक प्रॉब्लम्स छात्र-छात्रा स्वयं हल करें या हमारे मार्गदर्शन (Guide) से हल करें।
  • उन्हें छोटे-छोटे व सरल सवाल हल कराते हुए जटिल सवालों (Complex problem) को हल करने के लिए प्रेरित करते हैं।जो जटिल सवाल होते हैं उनको चिन्हित करवा देते हैं और बार-बार उनकी पुनरावृत्ति और अभ्यास कराते हैं।इससे उनकी कमजोरियाँ दूर होती हैं और ज्यों-ज्यों उसकी कमजोरियाँ दूर होती हैं उसमें आत्मविश्वास (Self-confidence) पैदा होता है तथा वह खुशी-खुशी सवालों को हल करने लगता है।
  • तीसरा कारण है छात्र-छात्राओं में कठिन परिश्रम (Hard Work) करने की कमी।आधुनिक तकनीकी युग में हर चीज बनी-बनाई (Readymade) मिल जाती है,जिससे छात्र-छात्राओं में अभ्यास करने की कमी पैदा होती है।जैसे उन्हें होमवर्क बताया जाए तो पासबुक मार्केट से खरीद कर नकल कर लेंगे या अपने सहपाठी से नकल करवा लेंगे।उन्हें कोई सवाल हल करने के लिए कहा जाए तो छूटते ही कहेंगे कि मुझे नहीं आता है,आप ही इसे हल कर दें।ऐसे छात्र-छात्राओं को पहले बहुत आसान सवाल (easy questions) और छोटे सवाल हल करवाने चाहिए।उन्हें प्रेरित करना चाहिए ताकि उसमें कठिन परिश्रम करने की आदत पड़े।जब वह स्वयं कुछ सवाल हल करेगा और उसके साथी उसकी प्रशंसा करेंगे,माता-पिता उसको शाबाशी देंगे तो उसे कठिन परिश्रम और अभ्यास (Practice problems) करने की आदत पड़ेगी।

4.शिक्षक छात्रों को गणित कैसे पढ़ाए? (How do teachers teach students?):

  • शिक्षक को कोशिश करनी चाहिए कि सवालों को हल करते समय वास्तविक जीवन के उदाहरण (Real life examples) दें।जैसे निर्देशांक ज्यामिति पढ़ा रहे हों,तो चतुर्थांश या अष्टांशक (Quadrant and Octant) के लिए कमरे की कोरों के द्वारा समझाएं कि कौन-सा x-अक्ष,y-अक्ष,z-अक्ष और प्रथम,द्वितीय,तृतीय आदि चतुर्थांश होते हैं।बेलन का वक्र पृष्ठ और संपूर्ण पृष्ठ बताना हो तो कागज के द्वारा बेलन और शंकु बनाकर उसकी ऊंचाई,आधार की त्रिज्या,तिर्यक ऊंचाई आदि को समझाए।
    साथ ही उन्हें मूर्त चिंतन (concrete thinking) से अमूर्त चिंतन (Abstract thinking) करना सिखाए। क्योंकि आखिर गणित विषय मूलतः अनुभव निरपेक्ष है और इसकी अधिकांश विषयवस्तु अमूर्त चिंतन के द्वारा समझने और हल करने की कोशिश करनी चाहिए।
  • छात्र-छात्राओं को रोजाना अभ्यास (Regular practice) करने की आदत डालें।रोजाना अभ्यास करने और बार-बार वही प्रश्नावलियाँ (exercise) हल करने से छात्र-छात्राओं को बोरियत पैदा हो सकती है।इस बोरियत को दूर करने के लिए कोई मैथमेटिकल स्टोरी,प्रेरक स्टोरी (motivational story) या कुछ ज्ञानवर्धक पुस्तकें पढ़ने के लिए प्रेरित करना चाहिए ताकि उनकी गणित में पढ़ने की रुचि बनी रहे।
  • याद रखें गणित में सक्सेस का सूत्र है:Success:understanding+practice+patience=perfection।गणित से मुंह मोड़ना,निराश होने के बजाय उन्हें गणित में सिद्धहस्त होने के मंत्र बताएं।उन मंत्रों के अनुसार हल करने के उपाय बताएं।जैसे सूत्र याद करने का मंत्र है कि उन्हें खाली समय में मन ही मन दोहराएं,नोटबुक में लिखें।जब भी छात्र-छात्रा के पास खाली समय होगा तो वह उन्हें मन ही मन दोहराएगा तो पुनरावृत्ति होने से वे सूत्र स्मृति (Memory) में बने रहेंगे यानी याद रहेंगे।छात्र-छात्राओं को प्रेरक छात्र-छात्रा की प्रेरक स्टोरी सुनाएं कि वह कैसे कमजोर था और रुचि,लगन,धैर्य,अभ्यास और कठिन परिश्रम से एक बहुत ही तेज छात्र बन गया।
  • उन्हें बताएं और प्रेरित करें कि गणित इतना भी मुश्किल नहीं है कि उसे हल ही नहीं किया जा सके।बस स्मार्ट वर्क (smart work),सही रणनीति (Right Strategy) और निरंतर अभ्यास करने की जरूरत है।अपने ऊपर आत्मविश्वास रखे और आगे बढ़ते रहें।गणित की कोई ऐसी समस्या नहीं है जिसका कद हमारे से बड़ा हो।कई बहुत कमजोर छात्र-छात्रा गणित में कमजोर थे परंतु हमारे सही मार्गदर्शन और पढ़ने की सही तकनीक (Technique) और कठिन परिश्रम ने उन्हें सिरमौर बना दिया।गणित में 100 में से 100 अंक प्राप्त किये।
  • हर छात्र-छात्रा में यह काबिलियत छुपी हुई है,ऐसा हमने 23 साल के टीचिंग अनुभव से सीखा है।जबकि एक प्रतिभाशाली छात्र,ऐशोआराम में रहने वाला,कठिन परिश्रम से जी चुराने वाला छात्र-छात्रा सामान्य छात्र-छात्रा के स्तर का हो गया।यह कमाल है सही मार्गदर्शन और कड़ी मेहनत का।सही मार्गदर्शन के साथ-साथ छात्र-छात्रा में जिज्ञासा,सीखने की तीव्र उत्कण्ठा होनी चाहिए।गणित प्रेक्टिस (Math practice) चाहती है और जो शिक्षक तथा छात्र-छात्रा इससे जी चुराते हैं वे कोई खास उपलब्धि हासिल नहीं कर पाते।

5.गणित लॉजिक और प्रैक्टिस से पढ़ने का विषय (Mathematics Logic and Practice Se Padhane Ka Vishay):

  • गणित से डरने की जरूरत नहीं बल्कि इससे दोस्ती करें।यह रटने का विषय नहीं है,बल्कि लॉजिक और प्रैक्टिस का विषय है।रटना मस्तिष्क पर अनावश्यक और जबरदस्ती बोझ डालने के समान है।जैसे किसी छात्र की इच्छा नहीं है कि वह अनाज की बोरी उठा कर ले जाए,उस पर जबरदस्ती लादने पर दरवाजे तक जाते ही उसको गिरा देगा और सारा अनाज बिखर जाएगा।
    लेकिन सही लॉजिक से गणित का अभ्यास कराया जाए तो यही विषय आनंददायक,रुचिकर और स्कोरिंग (scoring) हो जाएगा।लगातार मेहनत करते रहें,चुनौतियों से,समस्याओं से घबराएं नहीं।
  • आप खुद हल नहीं कर सकते तो योग्य गुरु के मार्गदर्शन में हल करें।मित्रों,शिक्षकों और संदर्भ पुस्तकों का सहारा लें।यानी आप में गणित को हल करने की तड़प होनी चाहिए।आप यह सोचकर कि शिक्षक ठीक से नहीं पढ़ाते हैं या मेरा तो दिमाग ही ठस है इसलिए गणित को हल नहीं कर सकता,ऐसी नकारात्मक सोच से हम गणित को हल नहीं कर सकते हैं।
    याद रखें गणित के प्रति यह सोच ना रखें कि मुझे तो दसवीं कक्षा उत्तीर्ण करनी है और फिर इससे पीछा छूट जाएगा।गणित का स्काॅप हर जगह है।आपको ऑनलाइन जॉब चाहिए तो कोडिंग वगैराह सीखनी पड़ेगी,कंपटीशन परीक्षा भी गणित के बिना पास नहीं कर सकते हैं।यहां तक की एक गृहिणी को भी गणित का ज्ञान नहीं है,ठस बुद्धि की है तो या तो नमक ज्यादा डाल देगी या मिर्च-मसाला कम डाल देगी।दूध में कितना पानी मिलाना है,सब्जी में कितनी मात्रा पानी की डालनी है आदि सभी बातों में प्रारंभिक गणित का ज्ञान होना चाहिए।
  • जब जीवन के हर क्षेत्र में गणित की आवश्यकता है तो फिर इसे मुंह मोड़ना या भागना उचित नहीं है।गणित के डर (Fear of math) के कारण हम जो कुछ भी गणित में याद करते हैं उसे और भूल जाते हैं।और कहा भी गया है की याद है तो आबाद है भूल गया तो बर्बाद है।
  • छोटी-छोटी स्टेप से गणित के सवाल हल करना सीखें,थोड़ा-थोड़ा समय ही दें परंतु नियमित रूप से दें।धैर्य रखें,उतावलापन ना करें।उतावलेपन से जीभ जल जाती है अर्थात् जैसे गर्म दूध को जल्दी से पीने के चक्कर में मुंह जला बैठते हैं।इसी प्रकार गणित के सवालों और समस्याओं को जल्दी से हल करने के चक्कर में गणित का भय गले लगा लेते हैं।भय,निराशा और लापरवाही से गणित हल करना नहीं सीख सकते हैं।
  • गणित के सवालों को किस तरह रिवीजन करना है,याद करना है,उसे समझें।प्रमेय को पहले ठीक से समझे।जो शब्दावली (Glossary) समझ में नहीं आती है,उसे लिख लें और उनका ठीक अर्थ जानकर फिर से प्रमेय को समझें।कठिन शब्दों को गणित की शब्दावली (Mathematics Glossary) से देख लें।यदि प्रमेय पिछली प्रमेयों को समझने पर समझ आएगी तो पिछली कक्षाओं की प्रमेयों को फुटकर रूप से समझे और पढ़ें।
  • जैसे त्रिभुज के तीनों कोणों और चतुर्भुज के चारों कोणों का योग,अर्धवृत्त का कोण समकोण आदि नवीं कक्षा में पढ़ाए जाते हैं।बोर्ड परीक्षा न होने के कारण छात्र-छात्रा नवीं कक्षा की गणित को सरसरी तौर पर पढ़ते हैं जिससे दसवीं कक्षा की गणित उन्हें ठीक से समझ में नहीं आती है।
  • जो बिल्कुल ठस बुद्धि का छात्र-छात्रा है उसकी बात अलग है,उसे बहुत मेहनत,लगन और साधना करने की जरूरत होती है और ऐसे ठस बुद्धि के छात्र-छात्रा बहुत कम होते हैं।अन्यथा अधिकांश छात्र-छात्रा सामान्य श्रेणी में आते हैं।और वे धैर्य,मेहनत और निरंतर अभ्यास से गणित पर अच्छी पकड़ बना सकते हैं।एक-एक गुण को धारण कर लें तो सभी गुणों को धारण करना आसान हो जाता है।जैसे अगर आपने नियमितता (consistency) के गुण को धारण कर लिया।अब आप रोज चाहे आधा घंटा ही गणित पढ़ें तो धीरे-धीरे धैर्य और कठिन परिश्रम के गुण भी नियमितता के सहारे विकसित होते जाएंगे।
  • इस आर्टिकल में हमने गणित से हार या निराशा स्वीकार न करें और गणित से भागें नहीं अर्थात् कर्त्तव्य से मुंह नहीं मोड़े को आधार बनाकर लिखा है।यदि आपने इन दोनों गुणों को भी धारण कर लिया तो गणित आपकी दोस्त बन जाएगी।
  • उपर्युक्त आर्टिकल में क्या आपका बच्चा भी गणित से भाग रहा है? पलायन रोकने के 5 अचूक उपाय (Is Your Child Running Away from Math? 5 Surefire Ways to Stop Palayan) के बारे में बताया गया है।

गणित से डर बनाम जीत की तुलनात्मक सारणी (Comparison Table of Fear VS Math Victory):

\begin{array}{|l|l|}  \hline  \text{Fear VS} & \text{Math Victory} \\ \hline  \text{1.Irregular Prctice} & \text{Daily Prctice} \\ \text{2.Hastiness}  &  \text{Patience} \\ \text{3.Discouraged} & \text{Couraged} \\  \text{4.Inconsistency} & \text{consistency} \\ \text{5.Careless} & \text{Alert} \\ \text{6.Lazy} & \text{Hard-Work}  \\  \hline \end{array}

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6.गणित से कैसे न भागूगा? (हास्य व्यंग) (How can I not run away from math?) (Humour-Satire):

  • मां (अंकुर को हिदायत देते हुए):बेटा,जरा ध्यान से पढ़ना,कहीं गणित सर तुम्हारी आंखों में धूल न झोंक दें,यानी तुम गणित से और ज्यादा दूर मत भाग जाना।
  • इस पर अंकुर ने कहा:माँ,तुम चिंता मत करो गणित शिक्षक कितना ही चालाक हो,मैं कमर के बेल्ट से गणित को बाँध लूंगा फिर कैसे भागूँगा।

7.क्या आपका बच्चा भी गणित से भाग रहा है? पलायन रोकने के 5 अचूक उपाय (Frequently Asked Questions Related to Is Your Child Running Away from Math? 5 Surefire Ways to Stop Palayan) से सम्बन्धित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:

प्रश्न:1.कमजोर छात्र गणित से कैसे न डरें? (How not to be afraid of math for weak students?):

उत्तर:रोजाना प्रेक्टिस करें,आसान और छोटे सवालों को हल करें और आवश्यक हो तो योग्य गुरु की मदद लें।

प्रश्न:2.गलतियों से सीखना क्यों जरूरी है? (Why is it important to learn from mistakes?):

उत्तर:गलतियों से सीखने पर हमारे अंदर सुधार होता है और हम गणित में प्रगति कर पाते हैं।

प्रश्न:3.गणित में आत्मविश्वास कैसे बढ़े? (How to increase confidence in mathematics?):

उत्तर:छोटे-छोटे स्टेप को फॉलो करें।आसान व छोटे सवालों को हल करें।बेसिक कमजोरियों को दूर करें।

  • **Students Se Ek Sawal**
    “kya aapko bhee ganit se dar lagata hai? comment karake batayein,ham ganit mein aapke dar ko door karane ki koshish karenge?”
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