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What is CAB, CAA,PCB AND UCC?

What isCAB, CAA,PCB AND UCC? 

नागरिकता संशोधन बिल,नागरिकता संशोधन एक्ट  इत्यादि क्या हैं?(What is CAB,CAA,PCB AND 
UCC?)-कुछ पाने के लिए कुछ तो खोना पड़ता ही है।सवाल यह भी है कि वे कौन लोग थे जिन्होंने पेट्रोल बम्ब फेंके थे?एक बात ओर केन्द्रीय सरकार को हमने ही तो चुना है।सभी तथ्यों पर भली भांति विचार करके ही टीका-टिप्पणी करनी चाहिए। वैसे हमने हमारे विचार इस आर्टिकल में लिखकर कर दिया है कि भारतीय नागरिकों का सीएबी,सीएए तथा एनआरसी से कोई सम्बन्ध ही नहीं है। वैसे एनआरसी अब लागू ही नहीं हुआ तो फिर उसके बारे में बवाल खड़ा करने का क्या तुक है?
What is CAB, CAA,PCB AND UCC?
What is CAB, CAA,PCB AND UCC? 
1.केंद्र की मोदी सरकार द्वारा (CAB)सीएबी (CAA) सीएए लागू किया गया है ।गुरुवार को इस विधेयक पर राष्ट्रपति कोविंद ने हस्ताक्षर कर दिए ।सीएबी की फुल फॉर्म है सिटीजन अमेंडमेंट बिल अर्थात नागरिक संशोधन बिल तथा लोकसभा व राज्यसभा से पारित होने के बाद यह बिल एक्ट बन गया जिसको सीएए अर्थात् नागरिक संशोधन एक्ट कहा गया अर्थात सीएए सिटीजन अमेंडमेंट एक्ट। इस एक्ट के तहत जो भी ईसाई ,हिंदू ,सिख,जैन ,बौद्ध इत्यादि बांग्लादेश पाकिस्तान अफ़गानिस्तान इत्यादि देशों में प्रताड़ित होता है या उस देश ने उनको निकाल दिया है तो वह भारत की नागरिकता ले सकता है। अन्य देशों के मुस्लिम नागरिक विशेषकर अफगानिस्तान ,पाकिस्तान और बांग्लादेश में प्रताड़ित हो ही नहीं सकते हैं क्योंकि वे मुस्लिम देश हैं इसलिए इस एक्ट में विदेशी मुस्लिम नागरिक को नागरिकता देने का प्रावधान नहीं रखा है ।यह एक नागरिकता लेने से संबंधित है इसलिए भारतीय मुस्लिमों को डरने की जरूरत ही नहीं है क्योंकि वह पहले से ही नागरिक हैं ।इस एक्ट की मानसिकता को बिना समझे ही विरोध प्रदर्शन हो रहा है ।धारा 370, राम मंदिर जैसे मुद्दे शांतिपूर्वक हल हो गए ।इसलिए विपक्ष को अपनी राजनीति को चमकाने का अवसर नहीं मिला क्योंकि कोई भी दुष्प्रचार तभी फैलता है जब जनता साथ हो। इन दोनों मुद्दों पर जनता साथ नहीं थी परंतु जनता सीएबी व सीएए के जाल में फंस कर विपक्ष के हाथ का खिलौना बन गई है।
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2.एनआरसी की फुल फॉर्म नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन(राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर)। एनआरसी को अभी लागू नहीं किया गया है तो इसके बारे में भी कुछ भी नहीं कहा जा सकता है, इसका स्वरूप क्या होगा तथा किस तरह लागू किया जाएगा ,इसके बारे में अभी तक कोई भी खुलासा नहीं हुआ है ।

3.PCB(पीसीबी) पापुलेशन कंट्रोल बिल(जनसंख्या नियंत्रण कानून )है। भारत की जनसंख्या जिस तीव्र गति से बढ़ रही है उस तरह अगर बढ़ती रही तो निश्चित ही भयावह स्थिति हो सकती है ।आज रोजगार ,पेयजल ,चिकित्सा जैसे मुद्दे नहीं सुलझ पाने के पीछे भारत की बढ़ती हुई तेज रफ्तार से जनसंख्या भी एक कारण है ।
प्रश्न-जिस तरह से नागरिकता संशोधन विधेयक पारित होने के बाद देश में हिंसा हो रही है, क्या जनसंख्या नियंत्रण कानून लाने के बाद ऐसे ही हिंसा होगी?
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उत्तर-क्या खेत की फसल को पशु चर जाएंगे अर्थात् नष्ट कर देंगे, इस डर से खेत की बुवाई ही नहीं की जाए।
चीन में भी ऐसा नियम लागू करने के कारण जनसंख्या नियंत्रण में है। इसलिए इस मामले में हमें चीन से सीख लेनी चाहिए। कुछ कानून का भी फर्क तो पड़ता ही है। वैसे बढ़िया तरीका तो यह है कि लोगों को जागरूक किया जाए परन्तु कानून भी आवश्यक है क्योंकि कुछ लोगों को कानून की भाषा ही समझ आती है। वरना लोगों को इतना तो बोध है ही कि भारत कि जनसंख्या किस कदर बढ़ रही है। यदि राष्ट्रीय हित का भी ध्यान न रखें तो यह तो हम समझते ही हैं कि इस मंहगाई के जमाने में पालन-पोषण करना और सांसारिक कर्त्तव्यों का पालन करना कितना कठिन है। कहने का तात्पर्य यह है कि स्वयं के हित को भी ध्यान रखें तो भी जनसंख्या नियंत्रण का पालन करना चाहिए परन्तु हम देख ही रहे हैं कि कौन कितना ध्यान रख रहा है।
प्रश्न- यदि NRC और CAA सभी भारतीय नागरिकों के लिए अच्छा है तो सेवानिवृत्त सेना अधिकारी मोहम्मद सनाउल्लाह और पूर्व राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद के परिवार का क्या हुआ है? जो असम में NRC की लिस्ट से बाहर हो गए हैं?
उत्तर-(1.) सिद्धान्त और व्यवहार में परिवर्तन के कारण।
(2.)नियम तथा अधिनियम को पास कराने व लागू करने का काम केन्द्र व राज्य सरकार का होता है तथा उसको व्यावहारिक रूप में लागू करने का काम सरकारी कर्मचारियों, अधिकारियों का काम होता है।
(3.)नियम व अधिनियम को ठीक तरीके से लागू न करें या कोई कमी,खामी जानबूझकर की जाए तो उस कर्मचारी,अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई होती है। लेकिन जिसके साथ अन्याय हुआ है उसको खुद को आवाज उठानी पड़ती है। शांतिपूर्वक तरीके से।
(4.)यदि हम यह सोचते हों कि सेवानिवृत्त सेना अधिकारी मोहम्मद सनाउल्लाह और पूर्व राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद के परिवार के साथ अन्याय केन्द्र सरकार या राज्य सरकार के इशारे पर हुआ है और कर्मचारी अधिकारी ऐसा कर देंगे तो हम गलत सोचते हैं।यदि कोई कर्मचारी व अधिकारी किसी के इशारे से गलत काम करता है तो उसके खिलाफ कानूनन कार्यवाही करनी चाहिए। यदि सरकार करती होती तो महाराष्ट्र में बीजेपी की 120 के लगभग सीटें थीं इस बार 105 सीटें ही क्यों आती। झारखंड, राजस्थान या मध्यप्रदेश में बीजेपी क्यों हारती। आखिर इन चुनावों को सम्पन्न करने का काम भी कर्मचारियों, अधिकारियों का होता है। हां यह अवश्य होता है कि इनकी मानिटरिंग करने का काम तो लीडरशिप का होता है।पर हर जगह वे खुद तो चौकीदारी नहीं कर सकती हैं और यह सम्भव भी नहीं है। काम तो उन्हीं कर्मचारियों व अधिकारियों से लेना होगा।
(5.)जब बीजेपी लगातार विभिन्न राज्यों में जीत रही थी तब इन्हीं लोगों ने (कांग्रेस,आम आदमी पार्टी,बसपा,सपा, तृणमूल कांग्रेस इत्यादि के मुख्यमंत्री व अध्यक्षों ने) चुनाव आयोग जैसी निष्पक्ष संस्था पर ही सवाल उठा दिए थे कि निष्पक्ष चुनाव नहीं कराए जा रहे हैं। बीजेपी वोटिंग मशीनों को हैक करा रही है।अब विपक्षी दलों की सरकारें आ रही है अर्थात वे जीत रहें हैं है तो वो ही वोटिंग मशीन अब सही हो गई है,अब कोई कुछ नहीं कह रहा है।
(6.)दरअसल लोकतंत्र में सबको अपना-अपना मत व्यक्त करने का अधिकार है।CAB,CAA,NRC इत्यादि जैसे नियमों अधिनियमों से भी सबको सहमत होने न होने का अधिकार है। लेकिन कई लोग इसका विरोध करके अपने आपको फैशन, धर्म निरपेक्ष,शिक्षित तथा बुद्धिजीवी समझते हैं और सड़कों को जाम करना,उत्पात करना, तोड़फोड़ करना,आगजनी इत्यादि करके राष्ट्रीय सम्पति को नुकसान पहुंचाते हैं। जैसे विरोध करने का ठेका उन्होंने ही ले रखा हो। संवैधानिक व्यवस्था को कुछ भी नहीं समझते हैं और कानून को हाथ में लेते हैं।
(7.)उपरोक्त का अर्थ यह नहीं है कि हम किसी पार्टी विशेष का प्रचार कर रहे हैं। हमने हमारा मत व्यक्त किया है, इससे सहमत होने न होने का अधिकार आपको भी है।
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प्रश्न- मोदी जी ने रामलीला मैदान में दिए अपने भाषण में एनआरसी पर चर्चा ना होने जैसे गलत तथ्य क्यों पेश किये जबकि अमित शाह बार बार एनआरसी की बात करते हैं?
उत्तर- कोई भी बात अधिक विश्वसनीय तभी मानी जाती है जब कोई बात आन द रिकाॅर्ड होती है।जब एनआरसी होगी तो ये बात कोई छुपी हुई रहेगी क्या?यदि आपकी बात को सही मान भी लिया जाए अर्थात मोदीजी या अमित शाह गलत बयानी कर भी रहे हैं तो क्या ओर नेता, मंत्री, मुख्यमंत्री गलत बयानी नहीं करते हैं क्या?उन पर आपको कोई आपत्ति क्यों नहीं है?इसका मतलब यह नहीं है कि मोदीजी या अमितशाह को गलत बयानी करने का सर्टिफिकेट दे रहे हैं। बाकायदा लोकसभा में इस पर चर्चा होगी और लोकसभा तथा राज्यसभा में बहुमत से पारित होने पर ही एनआरसी लागू होगा।
यदि नेताओं का दोहरा चरित्र होगा तो वही हाल होगा जोCAB,CAA पर हुआ।इस अधिनियम को लोकसभा व राज्यसभा में तो भारी बहुमत से पारित करा दिया और संसद से बाहर आकर विरोध करना,उत्पात करना न्यायोचित नहीं है। जहां बोलना चाहिए वहां तो बोले नहीं, जहां रोकना चाहिए वहां तो रोकें नहीं और बाहर आकर विरोध, प्रर्दशन करना, न्यायोचित है क्या? लोकसभा में तो समर्थन करें तथा राज्यसभा में विरोध करें तो यह उचित है क्या? वोटरों को लुभाने के लिए ऐसा दोहरा चरित्र रखना चाहिए क्या? इसलिए हम तो यही कहेंगे कि हमें सावधान तथा सतर्क व चौकस रहने की जरूरत है। अपने विवेक से काम करना चाहिए, निर्णय लेना चाहिए।
प्रश्न- एनपीआर ,एनआरसी से कैसे अलग है?
उत्तर- (1.)एनपीआर -इसका अर्थ है नेशनल पोपुलेशन रजिस्टर।यह रजिस्टर हर दस साल पर तैयार किया जाता है। जिससे हम सामान्य भाषा में जनगणना कहते हैं।पिछली जनगणना 2011 में हुई थी। अतः इस हिसाब से यह जनगणना 2021 में पूर्ण होनी है।यह अंग्रेजों के शासनकाल से ही लागू है।पूरे देश की जनगणना की एक्सरसाइज एक साल पहले से ही हो जाती है।इस जनगणना करने का मकसद होता है कि बहुत से बच्चे जन्म लेते हैं उनका रिकॉर्ड तैयार हो सके।दूसरे कई लोग एक प्रांत छोड़कर दूसरे प्रांत में बस जाते हैं,उनकी जानकारी को एकत्रित किया जा सके।ये आंकड़े इसलिए तैयार किए जाते हैं कि सरकार इन आंकड़ों के आधार पर विकास की योजनाओं को तैयार करती है। एनपीआर का एनआरसी से कोई संबंध नहीं है।
एनपीआर भारत में रहनेवाले निवासियों का एक रजिस्टर है।इसे केन्द्रीय सरकार द्वारा राज्य सरकारों की मदद से तैयार करवाया जाता है। नागरिकता कानून,1955 और सिटीजनशिप रूल्स,2003 के प्रावधानों के तहत तैयार होता है।
देश के हर नागरिक की पूरी पहचान और उसकी अन्य व्यक्तिगत जानकारियों के आधार पर उनका डाटाबेस तैयार किया जाता है।
नागरिकता कानून,1955 को 2004 में संशोधित किया गया था जिसके तहत एनपीआर के प्रावधान जोड़ें गए। सिटीजनशिप एक्ट के सेक्शन 14A में यह प्रावधान किया गया है कि केन्द्र सरकार हर नागरिक का अनिवार्य पंजीकरण कर राष्ट्रीय पहचान पत्र जारी कर सकती है। सरकार देश के हर नागरिक का रजिस्टर तैयार कर सकती है और इसके लिए नेशनल रजिस्ट्रेशन अथाॅरिटी भी गठित की जा सकती है।
नागरिकता कानून में 2004 में हुए संशोधन के मुताबिक सेक्शन 14 के तहत किसी भी नागरिक के लिए एनपीआर में रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है। नेशनल रजिस्ट्रेशन आॅफ इंडियन सिटिजंस के लिए पंजीकरण कराना जरूरी है। और एनपीआर इसमें पहला कदम है। अप्रैल,2020से सितंबर,2020 के दौरान एनपीआर तैयार करने में जुटे कर्मचारी घर-घर जाकर डेटा जुटाएंगे। इसके बाद इस इलेक्ट्रॉनिक डेटाबेस के तौर पर तैयार किया जाएगा।फोटोग्राफ, फिंगरप्रिंट्स जैसी चीजों को इसमें शामिल किया जाएगा
(2.)एनसीआर-इसका अर्थ है नेशनल सिटिजनशिप रजिस्टर।यह अभी तक तैयार नहीं किया गया है। कोई भारत से अलग किसी देश का निवासी रोजगार की तलाश में भारत में आकर बस गया है और वह अब जाना नहीं चाहता है।ऐसे लोगों का रजिस्टर तैयार किया जाएगा और यह कार्य सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में होगा।इसके लिए संसद से बिल पारित कराना होगा।ऐसे लोगों की पहचान करके उन्हें अपने देश में भेजा जाएगा।यह इसलिए जरूरी है कि कुछ प्रांतों में भारी संख्या में ऐसे लोग आकर बस गए हैं और उस प्रांत के जो मूल निवासी है वे अल्पमत में आ गए हैं। इससे भारत के मूल निवासी अपने मूल अधिकारों का उपयोग नहीं कर पाते हैं। उनको पानी,बिजली, स्वास्थ्य, रोजगार जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित होना पड़ता है।
प्रश्न- दिल्ली पुलिस का जामिया मिलिया इस्लामिया के अंदर घुसकर छात्रों पर लाठियां बरसाना, कानून की नजरों में कितना सही है?
उत्तर-पुलिस को कानून-व्यवस्था को बनाए रखना जरूरी होता है।यदि शान्ति पूर्वक विरोध प्रदर्शन करते तो ऐसी स्थिति से बचा जा सकता था।इस प्रकार का प्रर्दशन ओर ज़्यादा हिंसक न हो जाए, इसलिए पुलिस सख्ती बरतती है।हां इसमें यह अवश्य है कि गेहूं के साथ घुन भी पिस जाता है यानि बुरे लोगों के साथ अच्छे लोगों को भी दण्ड मिल जाता है। परन्तु जो चक्की के कीले के पास रहते हैं वे गेहूं बच जाते हैं अर्थात् नहीं पिसते हैं। इसलिए बुरे लोगों की संगत करनी ही नहीं चाहिए।बुरे लोगों की संगत भी खराब होती है तो उनसे दुश्मनी भी खराब होती है। जैसे कोयला को हाथ में लेंगे तो हाथ काला हो जाएगा और गर्म कोयले को हाथ में लें तो हाथ जला देगा।
प्रश्न- नागरिकता संशोधन बिल में तीन ही देश क्यों शामिल किये गए हैं?
उत्तर-स्वतंत्रता से पूर्व जब अंग्रेजों का शासन था उस समय सम्पूर्ण भारत में अफगानिस्तान,पाकिस्तान, बांग्लादेश व वर्तमान भारत का हिस्सा शामिल था। इसलिए हिन्दू,सिख,जैन इत्यादि धर्मों के लोग बंटवारे के समय वहीं रह गए थे। परन्तु अफगानिस्तान,पाकिस्तान व बांग्लादेश मुस्लिम देश हैं क्यों कि बंटवारा धर्म के आधार पर ही हुआ था। अफगानिस्तान,बांग्लादेश व पाकिस्तान ने अपना देश का धर्म मुस्लिम ही रखा परन्तु भारत ने धर्म निरपेक्ष रहना ही उचित समझा इसलिए भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश हैं। अफगानिस्तान,पाकिस्तान व बांग्लादेश में धर्म के आधार पर अन्य सम्प्रदायों पर अत्याचार हुए जिसके कारण वे भागकर भारत में बस गए और लगातार बस रहें हैं फलस्वरूप अफगानिस्तान,बांग्लादेश व पाकिस्तान में अन्य सम्प्रदायों की संख्या लगातार कम हो रही है या कह लीजिए कि नगण्य के बराबर है इसलिएCAB ,CAAमें इन तीन देशों को ही शामिल किया गया है। यहां उल्लेखनीय है कि अफगानिस्तान 1947 से पूर्व ही अलग हो चुका था।
प्रश्न- यदि NRC पूरे भारत में लागू होता है तो क्या होगा?
उत्तर-भारत के हित में तो बढ़िया ही है। परन्तु जो परिवार,व्यक्ति,सत्ता प्राप्त करने या सत्ता में बने रहने की सोचते हैं उनके लिए बढ़िया नहीं है परंतु जो देश के दृष्टिकोण से सोचते हैं अर्थात् देश के दृष्टिकोण से सही है।
प्रश्न- भारत में रहने वाले नागरिको को जिस तरह से अधिकार मिल रहा है पर क्या यहाँ के लावारिस भिखारियों को देश से बाहर कर दिया जाएगा ?
उत्तर- प्रश्न यह नहीं है कि यहां के लावारिस भिखारियों को रहने दिया जाए या नहीं। भावुकता की नहीं भाव की आवश्यकता है। भावुकता में व्यक्ति की सोच संकुचित अर्थात् एड्रेस्ड हो जाती है जबकि भाव में व्यक्ति का दृष्टिकोण व सोच विस्तृत हो जाती है। इसलिए व्यापक दृष्टिकोण से देखेंगे तो जो लोग प्रताड़ित, अत्याचार सहने के कारण यहां बसे हुए हैं,जिनके पास ओर कहीं जाने के लिए जगह है ही नहीं,जिनको धर्म के नाम पर सताया गया है, जो स्वतंत्रता से पूर्व इसी देश के नागरिक थे उनको तो CAA के तहत नागरिकता मिलनी ही चाहिए। परन्तु जो रोजगार, घूमने के उद्देश्य अथवा हमारी कमजोरी का फायदा उठाकर यहां बस गए हैं उनको यहां से निकालने में ही हमारे देश की भलाई है।
प्रश्न- अगर कोई मुसलमान भारत में आज़ादी से भी पहले से रह रहे हैं, लेकिन किसी वजह से उनके पास कागज़ नहीं हैं या कागज़ थे लेकिन चोरी हो गए हैं या बाढ़ में बह गए हैं, तो वो कैसे अपनी नागरिकता साबित कर सकते हैं और कैसे कागजात दुबारा हासिल कर सकते हैं?
उत्तर-( 1.)क्या आपके पास राशन कार्ड नहीं है?क्या आपके पास ड्राइविंग लाइसेंस नहीं है?क्या आपके पास आधार कार्ड नहीं है?क्या आपके पास पैन कार्ड नहीं है?क्या आपके पास मतदाता पहचान पत्र नहीं है?क्या आप तीन लोगों को ले जाकर प्रमाणित नहीं करवा सकते हैं?यदि इनमें से आप कोई भी कार्य नहीं कर सकते हैं तो फिर आप यहां कर क्या रहे हैं?
(2.)कागज़ात प्राप्त करने की जो विधिवत प्रणाली है उसका पालन करके कागजात प्राप्त किए जा सकते हैं।
(3.) वैसे आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि NRC संसद से पारित नहीं हुआ है तथा एनआरसी की सम्पूर्ण प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट की देखरेख में होगी।
(4.)जो मुसलमान भारतीय नागरिक हैं उन्हें बिल्कुल भी डरने व घबराने की जरूरत नहीं है।
प्रश्न- सीएए और एनआरसी के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे बीएचयू के 51 प्रोफेसरों पर आपके क्या विचार हैं?
उत्तर-सबको लोकतंत्र में अपना-अपना विचार और मत लोकतांत्रिक तरीके से व्यक्त करने का अधिकार है परन्तु काम वही होता है जो बहुमत चाहता है।सबको सहमत कराना व्यावहारिक रूप से कठिन है।सबको सहमत कराना तराजू से मेढ़क तौलने के समान है।आप एक को सहमत कराओगे तो दूसरा छिटक जाएगा।
प्रश्न- CAB वास्तव में देश की ज़रूरत थी या इसे केवल चौपट होते अर्थव्यवस्था तथा बढ़ती बेरोजगारी, महंगाई से ध्यान हटाने के लिए लाया गया है?
उत्तर -(1.)यदि थोड़ी देर के लिए यह मान भी लिया जाए तो क्या ऐसा करने से बेरोजगारी, मंहगाई दूर हो जाएगी। देश की अर्थव्यवस्था पटरी पर आ जाएगी।
(2.)दरअसल हमारी मानसिकता यह हो गई कि हर काम सरकार करे। बेरोजगारी खत्म करे तो सरकार करे। सरकार कितने व्यक्तियों को नौकरी दे सकती है। बेरोजगारी की मूल समस्या तो यह है कि आज का युवा वर्ग परिश्रम करना चाहता ही नहीं है, इसमें हमारी शिक्षा प्रणाली का भी दोष है।
(3.)यदि ध्यान भटकाने के इरादे से भी कोई सही काम कर दिया जाए तो बुरा क्या है?
(4.)इस तरह तो किसी भी मुद्दे को ध्यान भटकाने वाला कहा जा सकता है।तीन तलाक़,धारा 370,राम मंदिर निर्माण जैसे कई मुद्दों को ध्यान भटकाने वाला कहा जा सकता है।
(5.)तीन तलाक़ पर भी अधिकांश मुस्लिम सहमत नहीं हैं,वे इसे अपने धर्म में हस्तक्षेप बताते हैं। जबकि यह कानून प्रगतिशील तथा आधुनिकता व समयानुकूल है। यह देश संविधान से चलता है न कि सम्प्रदाय विशेष से।
प्रश्न- भारत के अधिकतर बुद्धिजीवी एनआरसी और सीएए का विरोध क्यों कर रहे हैं ?
उत्तर-(1.) कुछ बुद्धिजीवी किसी बात का विरोध करना ही अपना कर्त्तव्य समझते हैं। उनका एक ही मकसद होता है कि किसी तरह समस्या का समाधान न हो बल्कि वो समस्या बनी कैसे रहे?
(2.)इनको बुद्धिजीवी न कहकर तथाकथित सेक्युलर या बुद्धिजीवी कहें तो ज्यादा अच्छा है।
(3.) तथाकथित अथवा केवल बुद्धिजीवी वे होते हैं जो केवल दिमाग से काम लेते हैं। जबकि जो वाकई में बुद्धिजीवी होते हैं वे दिल और दिमाग से काम लेते हैं, उनकेे पास जीवन की वास्तविक सच्चाइयों का तजुर्बा होता है।
प्रश्न- राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) तैयार करने के फायदे या नुकसान क्या होंगे?
उत्तर-(1.)अभी तक तो कोई नुक़सान हुआ नहीं है क्यों राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर का किसी भी ID के रूप में प्रयुक्त नहीं किया जाता है।
(2.) वैसे नुकसान और फायदा उठाना हमारे ऊपर निर्भर करता है और यह केवल राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर के लिए नहीं हैं बल्कि सभी के लिए है कि हम उससे फायदा उठाते हैं या नुकसान करना चाहते हैं। संसार की प्रत्येक वस्तु का फायदा उठाना या नुकसान करना हमारे ऊपर निर्भर करता है।
(3.) उदाहरण के लिए अग्नि से चाहे तो हम हाथ जला सकते हैं और भोजन भी पका सकते हैं। जैसे जहर से कुत्ते काटने वाले को ठीक करने के लिए इंजेक्शन भी तैयार होता है। संसार की कोई ऐसी चीज नहीं है जिससे हम लाभ न उठा सकते हों।
प्रश्न- क्या आप नए नागरिकता कानून से सहमत हैं या फिर असहमत अगर असहमत है तो क्यों?
उत्तर-नया नागरिकता कानून नहीं है, बल्कि नागरिकता कानून,1955 ही है।इस नागरिकता कानून में संशोधन किया गया है जिसे CAA अर्थात् CITIZENSHIP AMENDMENT ACT(नागरिकता संशोधित अधिनियम)कहा गया है। इसके लिए हमने हमारा मत, कारण सहित स्पष्ट कर दिया है। इसके लिए पूरा आर्टिकल तर्क, तथ्यों सहित स्पष्ट कर दिया है।
प्रश्न- एनआरसी और सीएए के बीच विपक्ष ने आर्थिक मंदी का मुद्दा क्यों छोड़ दिया?
उत्तर-(1.)आर्थिक मंदी पहले भी आई है परंतु भारत की जनता साथ नहीं देती है।
(2.)राम मंदिर निर्माण के मुद्दे पर ध्रुवीकरण हो चुका है तथा अब भारत की जनता थोड़ी परिपक्व भी हो चुकी है इसलिए इस मुद्दे पर काफी कुछ नेताओं के स्टेटमेंट्स आए पर जनता ने ध्यान नहीं दिया।
(3.)धारा 370 के कारण जम्मू-कश्मीर कश्मीर कटा हुआ लगता है क्योंकि वहां न तो कोई अन्य प्रान्त का व्यक्ति नौकरी कर सकता था और न ही सम्पत्ति खरीद सकता था और न वहां का व्यक्ति किसी दूसरे प्रान्त के व्यक्ति को सम्पत्ति बेच सकता था।ऐसी स्थिति में भारत की शेष जनता क्यों आन्दोलन करके सिरदर्द मोल लेती। वैसे भी वहां भारत के बहुत सारे सैनिकों को अपनी जान गंवानी पड़ी है।
(4.)जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक नेताओं को नजरबंद कर दिया गया। सरकार का होमवर्क भी अच्छा था तो ऐसी स्थिति में विपक्ष द्वारा स्टेटमेंट्स देने पर भी जनता साथ नहीं हुई और कोई भी आन्दोलन सफल तभी होगा जब जनता साथ होगी।
(5.)अबCAA,NRC का मुद्दा ही बचा था जिस पर कुछ लोग भ्रमित हो गए और विपक्ष का साथ दिया।
प्रश्न- सीएए और एनआरसी कानून क्या है? इसके खिलाफ इतना प्रतिरोध क्यों है?
उत्तर-(1.)ठीक से सीएए और एनआरसी को न समझने के कारण इतना प्रतिरोध हो रहा है।
(2.) कोई भी फैसला लिया जाता है तो उसके विरुद्ध एक प्रकार की नकारात्मक पैदा हो जाती है।लोग बदलाव को पसन्द नहीं करते हैं।जबकि बदलाव प्रगतिशील हो और नवीन प्रयोग हो तो उसका स्वागत करना चाहिए।
(3.) नकारात्मकता में भी एक प्रकार का आकर्षण होता है जैसे आप किसी को कड़वी चीज को किसी को खाने के लिए मना करो तो सामने वाले के मन में तत्काल जिज्ञासा होती है कि इसको तो चखकर देखना चाहिए।इसी प्रकार जब सरकार बार-बार मना कर रही है कि यह किसी भी भारतीय नागरिक की नागरिकता लेने से सम्बन्धित नहीं है।यह भारतीय नागरिकता देने से सम्बन्धित अधिनियम है।आप प्रोटेस्ट मत कीजिए तो लोगों को जिनके प्रोटेस्ट करने का चस्का लगा हुआ है उन्होंने सोचा प्रोटेस्ट तो करना चाहिए।
(4.) कुछ लोगों की मानसिकता हो गई है कि कोई भी काम करने पर उसका प्रोटेस्ट करो।ऐसे लोग मौके की तलाश में रहते हैं ज्योही कोई भला आदमी इनके साथ लग जाता है इनका प्रोटेस्ट आंदोलनों चालू हो जाता है।
प्रश्न-क्या आपको लगता है इतने भारी विरोध के बाद भी मोदी सरकार देश में NRC और NPR लागू करवाने में कामयाब रहेगी ?
उत्तर-(1.)एनपीआर अर्थात नेशनल पापुलेशन रजिस्टर यह पहले से ही लागू है और हर10 साल पर एनपीआर तैयार किया जाता है ।इसमें नया कुछ भी नहीं है,साधारण भाषा में इसे जनगणना कहा जाता है जो कि अंग्रेजों के समय से ही जनगणना करवाई जा रही है।
(2.) एनपीआर का बिना सोचे समझे इसका विरोध किया जा रहा है।
(3) एनआरसी अभी लागू ही नहीं हुई है,इसके बारे में कोई अभी तथ्य सामने नहीं आए हैं,इसलिए इसके बारे में कुछ भी नहीं कहा जा सकता है।
(4.) अगर भारतीय नागरिक और मोदी सरकार चाहेगी तो एनआरसी लागू होगा साथ में न्यायपालिका का समर्थन होना भी आवश्यक है ।
(5.)कोई भी कानून और व्यवस्था लोकतांत्रिक शासन में लागू करने के लिए जनता का समर्थन ,न्यायपालिका का समर्थन और सरकार की इच्छाशक्ति का होना आवश्यक है।
प्रश्न- देशभर के लोग CAA, NRC और NPR के खिलाफ प्रदर्शन क्यों कर रहे है, क्या प्रदर्शन करने से कुछ होता है?
उत्तर-(1)CAA,NRC,NPR को ठीक से न समझ पाने के कारण देशभर में विरोध प्रदर्शन हो रहा है।
(2.) कुछ छद्म बुद्धिजीवियों तथा तथाकथित सेकुलर दलों द्वारा भ्रम की स्थिति पैदा करने के कारण विरोध प्रदर्शन हो रहा है।
(3.)CAA,NPR कानून तो पहले से ही थाCAA में संशोधन किया गया है।
(4.) विरोध प्रदर्शन अगर सही बात पर होता है तो इससे जनता की भावनाओं का पता चलता है। हालांकि आजकल सरकार तक अपनी बात पहुंचाने के कई माध्यम है जैसे सोशल मीडिया, समाचार न्यूज़ चैनल,धरना, प्रदर्शन तथा सरकार को सीधे भी अपनी भावनाओं से अवगत कराया जा सकता है।
प्रश्न- क्या CAA के विरोध में शिक्षा संस्थानों में हिंसात्मक आंदोलन कुछ लोगों के शिक्षा के अधिकारों का हनन नहीं है?
उत्तर-(1.) शिक्षा संस्थानों में हिंसात्मक आंदोलन कुछ लोगों के ही नहीं बल्कि आम जनता के मौलिक अधिकारों का भी हनन होता है।
(2.)लेकिन कुछ राजनीतिक दलों का निहित स्वार्थ होने के कारण इन शिक्षा संस्थानों के छात्रों को उनके मुख्य कर्तव्य शिक्षा से ध्यान हटाकर राजनैतिक इस्तेमाल किया जाता है।
(3.)जब तक हमारे देश के राजनीतिक दलों की मानसिकता सत्ता प्राप्ति और वोट प्राप्त करने तथा संकीर्ण मानसिकता की रहेगी तब तक इस प्रकार के हिंसात्मक आंदोलनों से छुटकारा पाना संभव नहीं है।
(4.)हमारे शिक्षा प्रणाली के ढांचे को पूरी तरह से परिवर्तित करके इसमें चारित्रिक और नैतिक शिक्षा को भी शामिल किया जाना चाहिए ।
(5.)ऐसे हिंसात्मक आंदोलनों में जवाबदेही तय की जानी चाहिए और हिंसात्मक आंदोलनों में भाग लेने वालोें, उकसाने वालों, सहयोग करनेवालों को दंड मिलना चाहिए।
(6.)लोगों की मानसिकता परिवर्तित करने के साथ-साथ कानून का भय भी दिखाना चाहिए क्योंकि कुछ लोगों के कानून की भाषा ही समझ में आती है इसलिए सिस्टम को पूरी तरह से बदलने की आवश्यकता है।
(7.)एक बड़ा कारण ओर है इस तरह के हिंसात्मक आंदोलनों का यह भी एक कारण है कि जो सज्जन व्यक्ति है वह निष्क्रिय होकर बैठे हुए हैं अर्थात् जो विद्यार्थी पढ़ना चाहते हैं वे चुपचाप सहन करते हैं और शांतिपूर्वक इनका विरोध नहीं करते हैं, जिससे हिंसात्मक आंदोलन करने वालों को प्रोत्साहन मिलता है।
(8.)यदि हम भारत के सच्चे नागरिक हैं तो इस प्रकार के हिंसात्मक आंदोलनों का किसी न किसी प्रकार विरोध किया जाना चाहिए ताकि जो हिंसात्मक आंदोलन करते हैं वे हतोत्साहित हो और इस प्रकार का कदम उठाने से पहले दस बार सोचे।
(9.)इस प्रकार के अन्य और भी उपाय किए जा सकते हैं जिससे हिंसात्मक आंदोलनों पर रोक लगाई जा सकती है। जैसे सोशल मीडिया,न्यूज चैनल्स तथा अन्य प्लेटफाॅर्म पर इनको एक्सपोज किया जाए।
प्रश्न- सीएए व एनआरसी का विरोध देश में ही नहीं अपितु विदेशों में भी जोर शोर से हो रहा है इसके पीछे क्या कारण हैं ?
उत्तर-(1.) बीजेपी ने जम्मू कश्मीर से धारा 370 ,राम मंदिर निर्माण जैसे क्रिटिकल मुद्दों को बिना किसी विरोध के पास करवा दिया इसलिए विपक्ष के पास ऐसा कोई मुद्दा नहीं था जिससे वह मोदी सरकार का विरोध कर सकते थे।
(2.)एनआरसी एक ऐसा मुद्दा उनके हाथ लग गया जिसका वे विरोध कर रहे हैं अब इस विरोध करने के अंदर और भी कई बातें शामिल हो गई वैसे तो सीएए से पहले नागरिकता कानून लागू है।
(3.)यह कानून ऐसे व्यक्ति जो अफगानिस्तान,पाकिस्तान और बांग्लादेश में हिंदू,सिख,ईसाई,बौद्ध,पारसी जैन इत्यादि प्रताड़ित है और वह पहले भारत के नागरिक थे को नागरिकता देने से संबंधित है।
(4.)CAA नागरिकता देने से संबंधित नियम है किसी की नागरिकता लेने से संबंधित नहीं है। इसलिए भारतीय मुसलमानों को डरने की कोई जरूरत नहीं है ।
(5)भारतीय मुसलमानों में यह भ्रम फैलाया गया है कि भारतीय मुसलमानों की नागरिकता छीन ली जाएगी जबकि वास्तविकता ऐसी है नहीं।
(6.)नागरिकता संशोधन कानून (CAA) संविधान के अनुरूप है या नहीं अब ये फैसला सुप्रीम कोर्ट ही करेगा क्योंकि उसके विरोध में अब देश का राज्य केरल भी सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. केरल की तरफ से दाखिल याचिका में कहा गया है कि ये कानून मनमाने ढंग से बनाया गया है जो संविधान के अनुच्छेद 14 का सीधा उल्लंघन है.
(7.)CAA का विपक्षी दलों तथा अन्य व्यक्तियों द्वारा विरोध करने वाले लोगों का यह मत है कि इस कानून में निम्नलिखित खामियां हैं-
कानून में भारत से भौगोलिक सीमाएं साझा करने वाले सिर्फ तीन देशों- पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के छह अल्पसंख्यक धर्म के सताए गए लोगों को नागरिकता देने का प्रावधान रखा गया है जबकि श्रीलंका, म्यांमार और भूटान के लोगों को इस दायरे से बाहर रखा गया है. इसका कोई तुक या ठोस आधार नहीं है.
इन तीन देशों के सताए गए हिंदू अगर कानून के तहत भारत की नागरिकता पा सकते हैं तो श्रीलंका के तमिल मूल के हिंदू और नेपाल के मधेसियों को इससे बाहर क्यों रखा गया. याचिका के मुताबिक, पाकिस्तान और बांग्लादेश में शिया मुस्लिम, अहमदिया और हाजरा भी उतने ही सताए हुए वर्ग हैं, उन्हें इसमें शामिल क्यों नहीं किया गया. यह याचिका केरल सरकार के वकील जी प्रकाश की तरफ से दायर की गई है.
(8.) कोई भी कानून व नियम बनाए जाते हैं तो उनमें कोई न कोई खामी निकाली जा सकती है और निकाली जा रही है ।इसका अर्थ यह नहीं है कि नागरिकता कानून में जो नया संशोधन किया गया है वह गलत है। हर व्यक्ति की अपनी अपनी विचारधारा और च्वाईश होती है ।सबको खुश नहीं किया जा सकता है ।सबको खुश करना तराजू से मेंढक तोलने के समान है जिसमें एक को खुश किया जाता है तो दूसरा तराजू से छिटक कर कूद जाता है।जैसे हिमालय पर्वत ऊंचा है तो उसे अभिमानी कहा जाता है ,समुद्र बहुत विशाल है तो उसमें खारेपन की कमी निकाल कर उसकी आलोचना की जाती है।इस प्रकार किसी भी नियम और कानून में यदि हमें कमी निकालनी होगी तो हम उसमें से कोई न कोई कमी निकाल सकते हैं।
(9.)सवाल यह है कि सरकार की मंशा इस नियम को लागू करने के पीछे क्या है हमें लगता है कि सरकार ने अच्छी नियत और मंशा से इस नियम व कानून को लागू किया है उसी संदर्भ में इसे समझा जाना चाहिए।
प्रश्न- क्या सीएए और एनआरसी के खिलाफ प्रदर्शनो ने आपकी मुश्किले बढ़ाई है?
उत्तर-(1.)प्रदर्शनों से आम जनता को परेशानी तो होती है,आवागमन की परेशानी होती है,अपने कर्तव्यों को निर्वाह करने में परेशानी होती है।
(2.)इस तरह की जब खबरें पढ़ते हैं तो लोगों के मन में इस तरह के सवाल उठते हैं कि रोजमर्रा के कार्य के लिए घर से निकला जाए या नहीं निकला जाए।
(3.)प्रदर्शन अगर शांतिपूर्ण तरीके से किए जाएं तब तो कोई दिक्कत नहीं होती है परंतु अक्सर इस तरह के प्रदर्शन जो होते हैं उनमें उत्पात,तोड़फोड़ वगैरे ज्यादा की जाती है और भारत में तो यह आम बात हो गई है कि प्रदर्शनों में जब तक तोड़फोड़,उत्पात नहीं किया जाता है तब तक वह प्रदर्शन नहीं है।
(4.)प्रदर्शन शांतिपूर्वक तरीके से किया जाना चाहिए तभी वास्तव में प्रदर्शन होता है और तभी हमारी बात को सुना जाता है।
(5.) शांतिपूर्ण तरीके के प्रर्दशन से हमारी समझदारी का पता चलता है और तोड़फोड़ करने से हम देश के विरोध में काम कर रहे होते हैं इसलिए इस तरह के प्रदर्शन नहीं किए जाने चाहिए जिसे आम जनता को किसी प्रकार की परेशानी भुगतनी पड़े और प्रदर्शनों में आम जनता को परेशानी भुगतनी पड़ती है।
(6.)CAA ,NRC के प्रदर्शनों ने हमारी मुश्किलें बढ़ाई है।
प्रश्न- आज अगर देश में आवेशित माहौल है तो सबसे महत्वपूर्ण सवाल तो यही कि इसका जिमेदार कौन है? वर्तमान सरकार या भूतकाल में कई गई गलतियाँ?
उत्तर-(1.)इससे पूर्व मनमोहन सिंह कांग्रेस की सरकार में लोग ज्यादा आक्रोशित थे कारण कि भ्रष्टाचार इतना अधिक बढ़ गया था कि उस पर कोई रोकथाम तथा लगाम नहीं लगाई जा रही थी ,न लोगों को संतुष्ट किया जा रहा था।
(2.)पाकिस्तान आए दिन भारत की सीमा पर सीजफायर कर देता था और कांग्रेश की मनमोहन सिंह सरकार कोई भी प्रत्युत्तर नहीं देती थी ।हमारे कई सैनिकों की दुर्दशा की गई थी इसके बावजूद भी कोई कठोर कार्यवाही नहीं की गई ऐसी स्थिति में देश में उबाल था।सैनिकों की दुर्दशा करने के कारण भारत के लोगों ने काफी प्रोटेस्ट भी किया और पाकिस्तान के खिलाफ कार्यवाही करने के लिए खूब प्रोटेस्ट किया इसके बावजूद कांग्रेस की मनमोहन सरकार ने कोई कदम नहीं उठाया।
(3.)वर्तमान में यह पहला बीजेपी सरकार का मुद्दा है जिस पर लोग आक्रोशित हैं परंतु इसके पीछे विपक्षी दलों और कुछ तथाकथित बुद्धिजीवियों का हाथ है अन्यथा यह मुद्दा आक्रोशित होने जैसा है ही नही।
(4.) नागरिकता कानून 1955 पहले से ही था अब वर्तमान सरकार ने पाकिस्तान,अफगानिस्तान तथा बांग्लादेश में जो हिंदू, सिख, ईसाई ,बौद्ध ,पारसी इत्यादि धर्मों के जो प्रताड़ित लोग हैं और पूर्व में भारत के नागरिक थे उनको नागरिकता देने से संबंधित कानून है। इसमें मुसलमानों को उत्तेजित होने या प्रोटेटेस्ट करने या जेएनयू को या जामिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी के छात्रों को प्रोटेस्ट करने जैसी कोई बात है ही नहीं।
(5.)पूर्व सरकारों ने इन मुद्दों को लटकाए रखा इसलिए उनके खिलाफ इन मामलों में प्रोटेस्ट नहीं हुआ है। किसी भी मुद्दे को हल न करना और लटकाए रखने से तो यही प्रतीत होता है वे सरकारें सत्ता में बनी रहना चाहती थी। लोकतंत्रात्मक शासन में ऐसी कार्यप्रणाली उचित नहीं कही जा सकती है क्योंकि जो आगे आनेवाली सरकार होती है और इन कार्यो को निपटाती है उसको लोगों का कोप झेलना पड़ता है।
प्रश्न- ममता बनर्जी द्वारा दिए गये बयान “सीएए के रद्द होने तक विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा” पर आपके क्या विचार हैं?
उत्तर-(1.) लोकतंत्र में सबको अपनी-अपनी बात रखने का अधिकार है इसलिए एक नागरिक के तौर उनको अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है।
(2.)ममता बनर्जी को शरणार्थियों के वोट मिलते हैं, इससे पहले लोकसभा में विपक्ष में थी तथा पश्चिम बंगाल में सीपीम, वामपंथी दलों की सरकार थी तब वे बाग्ंलादेश से आए हुए शरणार्थियों तथा विदेशीयों को भारत से निकालने की बात करती थी,उस समय वामपंथी दलों को उनके वोट मिलते थे।
(3.)अपनी सत्ता को बचाने के लिए, स्वाभाविक है कि वे CAA का विरोध करेंगी ही।
(4.)देश में जब इस तरह के हिमायती रहेंगे तो देश की दुर्दशा होगी ही। कुछ लोग तथा दल विरोध के लिए ही विरोध करते हैं।
(5.)CAA का विरोध कोई भी क्यों कर रहे हैं यह हमें समझने की आवश्यकता है?

What is CAB, CAA,PCB AND UCC?
What is CAB, CAA,PCB AND UCC? 

4.UCC (यूसीसी)यूनीफार्म सिविल कोड  (समान नागरिक संहिता) यानी देश में रहने वाले सभी नागरिकों के लिए समान कानून बनाना ।चाहे वह किसी भी धर्म के मानने वाले हो। भारत का लोकतंत्र 70 वर्ष पुराना हो चुका है यहां पर आपातकाल भी लागू किया गया ,इसके अलावा राज्य सरकारें 356 के द्वारा असंवैधानिक रूप से बर्खास्त की गई परंतु अब शक्ति का स्पष्ट विभाजन हो चुका है। राज्य व केंद्र सरकार भारत के संविधान के साथ खिलवाड़ करती है तों उसके लिए सुप्रीम कोर्ट निगरानी में बैठा हुआ है ।ऐसा हमने देखा भी है जैसे हाल ही में महाराष्ट्र में सुप्रीम कोर्ट ने दखल देकर और उत्तराखंड में दखल देकर संविधान की रक्षा की। आधार कार्ड को सर्वोपरि परिचय पत्र को मानने से इंकार कर दिया और केंद्र सरकार को मानना पड़ा।अब भारत के नागरिक भी समझदार हो गए हैं। उन्होंने अपनी समझदारी का परिचय धारा 370व राम मंदिर जैसे मुद्दों पर दिखाई भी। लेकिन कुछ बुद्धिजीवियों व देश विरोधी ताकतों का साथ देने वालों के जाल में कुछ भारत के नागरिक फंस गए और उन्होंनेे राष्ट्रीय संपत्ति को नुकसान पहुंचाया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर रोक लगाने से मना कर दिया। इसलिए इसमें भी समझदारी दिखाने की आवश्यकता थी। अतः अब भी अपनी समझदारी दिखाने की आवश्यकता हैं। आज कोई भी सरकार मोनोपोली नहीं कर सकती है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट सजग है,जनता जागरूक है,समाचार पत्रों की भी विशिष्ट भूमिका है ।इसलिए भारत के किसी भी नागरिक को डरने की जरूरत नहीं है।
NOTE-भारत सरकार के गजट नोटिफिकेशन के अंग्रेजी और हिंदी अनुवाद को ही प्रामाणिक माना जाए(Only English and Hindi translations of Government of India Gazette notifications should be considered authentic)
5.CAA GAZETTE NOTIFICATION COPY

What is CAB, CAA,PCB AND UCC?

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What is CAB, CAA,PCB AND UCC?

REGISTERED NO. DL—(N)04/0007/2003—19
EXTRAORDINARY
PART II — Section 1
PUBLISHED BY AUTHORITY
No. 71] NEW DELHI, THURSDAY, DECEMBER 12, 2019/AGRAHAYANA 21, 1941 (SAKA)
Separate paging is given to this Part in order that it may be filed as a separ
MINISTRY OF LAW AND JUSTICE
(Legislative Department)
New Delhi, the 12th December, 2019/Agrahayana 21, 1941 (Saka)
The following Act of Parliament received the assent of the President on the
12th December, 2019, and is hereby published for general information:—
THE CITIZENSHIP (AMENDMENT) ACT, 2019
NO. 47 OF 2019
[12th December, 2019.]
An Act further to amend the Citizenship Act, 1955.
BE it enacted by Parliament in the Seventieth Year of the Republic of India as
follows:—
1. (1) This Act may be called the Citizenship (Amendment) Act, 2019.
(2) It shall come into force on such date as the Central Government may, by notification
in the Official Gazette, appoint.
Short title and
commencemen
2. In the Citizenship Act, 1955 (hereinafter referred to as the principal Act), in section 2,
in sub-section (1), in clause (b), the following proviso shall be inserted, namely:—
“Provided that any person belonging to Hindu, Sikh, Buddhist, Jain, Parsi or
Christian community from Afghanistan, Bangladesh or Pakistan, who entered into
India on or before the 31st day of December, 2014 and who has been exempted by the
Central Government by or under clause (c) of sub-section (2) of section 3 of the
Passport (Entry into India) Act, 1920 or from the application of the provisions of the
Foreigners Act, 1946 or any rule or order made thereunder, shall not be treated as
illegal migrant for the purposes of this Act;”.
3. After section 6A of the principal Act, the following section shall be inserted,
namely:—
‘6B. (1) The Central Government or an authority specified by it in this behalf
may, subject to such conditions, restrictions and manner as may be prescribed, on an
application made in this behalf, grant a certificate of registration or certificate of
naturalisation to a person referred to in the proviso to clause (b) of sub-section (1) of
section 2.
(2) Subject to fulfilment of the conditions specified in section 5 or the
qualifications for naturalisation under the provisions of the Third Schedule, a
person granted the certificate of registration or certificate of naturalisation under
sub-section (1) shall be deemed to be a citizen of India from the date of his entry into
India.
(3) On and from the date of commencement of the Citizenship (Amendment)
Act, 2019, any proceeding pending against a person under this section in respect of
illegal migration or citizenship shall stand abated on conferment of citizenship to him:
Provided that such person shall not be disqualified for making application for
citizenship under this section on the ground that the proceeding is pending against
him and the Central Government or authority specified by it in this behalf shall not
reject his application on that ground if he is otherwise found qualified for grant of
citizenship under this section:
Provided further that the person who makes the application for citizenship
under this section shall not be deprived of his rights and privileges to which he was
entitled on the date of receipt of his application on the ground of making such
application.
(4) Nothing in this section shall apply to tribal area of Assam, Meghalaya,
Mizoram or Tripura as included in the Sixth Schedule to the Constitution and the
area covered under “The Inner Line” notified under the Bengal Eastern Frontier
Regulation, 1873.’.
4. In section 7D of the principal Act,—
(i) after clause (d), the following clause shall be inserted, namely:—
“(da) the Overseas Citizen of India Cardholder has violated any of the
provisions of this Act or provisions of any other law for time being in force as
may be specified by the Central Government in the notification published in the
Official Gazette; or”;
(ii) after clause (f), the following proviso shall be inserted, namely:—
“Provided that no order under this section shall be passed unless the
Overseas Citizen of India Cardholder has been given a reasonable opportunity
of being heard.”.
5. In section 18 of the principal Act, in sub-section (2), after clause (ee), the following
clause shall be inserted, namely:—
“(eei) the conditions, restrictions and manner for granting certificate of
registration or certificate of naturalisation under sub-section (1) of section 6B;”.
Amendment
of section 2.
Reg. 5 of 1873.
34 of 1920.
31 of 1946.
Insertion of
new section 6B.
Special
provisions as
to citizenship
of person
covered by
proviso to
clause (b) of
sub-section (1)
of section 2.
Amendment
of section 7D.
Amendment
of section 18.
57 of 1955.
2 THE GAZETTE OF INDIA EXTRAORDINARY [P
6. In the Third Schedule to the principal Act, in clause (d), the following proviso shall
be inserted, namely:—
‘Provided that for the person belonging to Hindu, Sikh, Buddhist, Jain, Parsi or
Christian community in Afghanistan, Bangladesh or Pakistan, the aggregate period of
residence or service of Government in India as required under this clause shall be
read as “not less than five years” in place of “not less than eleven years”.’.
Amendment
of Third
Schedule.
————
DR. G. NARAYANA RAJU,
Secretary to the Govt. of India.
MGIPMRND—4385GI(S3)—12-12-2019.
UPLOADED BY THE MANAGER, GOVERNMENT OF INDIA PRESS, MINTO ROAD, NEW DELHI–110002
AND PUBLISHED BY THE CONTROLLER OF PUBLICATIONS, DELHI–110054.
SEC. 1] THE GAZETTE OF INDIA EXTRAORDINARY 3
हिंदी अनुवाद(HINDI TRANSLATION)

पंजीकृत नंबर । डीएल (एन) 04/0007 / 2003-19
असाधारण
भाग II – अनुभाग 1
AUTHORITY द्वारा प्रकाशित
नं। 71] नई दिल्ली, गुरुद्वारा, डेमबेर 12, 2019 / आगरा 21, 1941 (SARA)
इस भाग को अलग से पेजिंग दी गई है ताकि इसे एक अलग के रूप में दर्ज किया जा सके
कानून और न्याय मंत्रालय
(विधायी विभाग)
नई दिल्ली, 12 दिसंबर, 2019 / अग्रायण 21, 1941 (शक)
संसद के निम्नलिखित अधिनियम को राष्ट्रपति की सहमति प्राप्त हुई
12 दिसंबर, 2019, और यहां सामान्य जानकारी के लिए प्रकाशित किया गया है: –
CITIZENSHIP (AMENDMENT) ACT, 2019
नंबर । 2019 का 47
[१२ दिसंबर २०१ ९]
नागरिकता अधिनियम, 1955 में संशोधन करने के लिए एक अधिनियम।
इसे भारतीय गणतंत्र के सातवें वर्ष में संसद द्वारा अधिनियमित किया गया
इस प्रकार है: –
1. (1) इस अधिनियम को नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019 कहा जा सकता है।
(2) यह केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचना के अनुसार ऐसी तिथि पर लागू होगा
आधिकारिक राजपत्र में, नियुक्ति।
लघु शीर्षक और
commencemen
2. नागरिकता अधिनियम, 1955 में (बाद में मुख्य अधिनियम के रूप में संदर्भित), धारा 2 में,
उपधारा (1) में, खंड (ख) में, निम्नलिखित अनंतिम सम्मिलित किया जाएगा, अर्थात्: –
“बशर्ते कि कोई भी व्यक्ति हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी या
अफगानिस्तान, बांग्लादेश या पाकिस्तान से ईसाई समुदाय, जिन्होंने प्रवेश किया
दिसंबर, 2014 के 31 वें दिन या उससे पहले भारत और किसके द्वारा छूट दी गई है
की धारा 3 की उप-धारा (2) के उपखंड (सी) के तहत या केंद्र सरकार
पासपोर्ट (भारत में प्रवेश) अधिनियम, 1920 या के प्रावधानों के आवेदन से
विदेशी अधिनियम, १ ९ ४६ या उसके तहत किए गए किसी भी नियम या आदेश को नहीं माना जाएगा
इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए अवैध प्रवासी; “।
3. प्रमुख अधिनियम की धारा 6 ए के बाद, निम्नलिखित अनुभाग डाला जाएगा,
अर्थात्: –
‘6B। (1) केंद्र सरकार या इसके द्वारा इसमें निर्दिष्ट एक प्राधिकरण
ऐसी शर्तों, प्रतिबंधों और तरीके के अधीन, जैसा कि निर्धारित किया जा सकता है, एक पर
इस संबंध में किया गया आवेदन, पंजीकरण का प्रमाण पत्र या प्रमाण पत्र प्रदान करता है
उप-धारा (1) के खंड (बी) के लिए अनंतिम में निर्दिष्ट एक व्यक्ति के लिए प्राकृतिककरण
धारा 2।
(2) धारा 5 या में निर्दिष्ट शर्तों की पूर्ति के अधीन
तीसरी अनुसूची के प्रावधानों के तहत प्राकृतिककरण के लिए योग्यता, ए
व्यक्ति ने पंजीकरण का प्रमाण पत्र या के तहत प्राकृतिककरण का प्रमाण पत्र प्रदान किया
उप-धारा (1) को उसके प्रवेश की तारीख से भारत का नागरिक माना जाएगा
भारत।
(3) नागरिकता (संशोधन) के प्रारंभ होने की तारीख से
अधिनियम, 2019, इस धारा के तहत किसी व्यक्ति के खिलाफ लंबित कोई कार्यवाही
अवैध प्रवास या नागरिकता उसे नागरिकता प्रदान करने पर रोक दी जाएगी:
बशर्ते कि ऐसे व्यक्ति को आवेदन करने के लिए अयोग्य घोषित नहीं किया जाएगा
इस धारा के तहत इस आधार पर नागरिकता कि कार्यवाही लंबित है
उसके और उसके द्वारा केंद्र सरकार या उसके द्वारा निर्दिष्ट प्राधिकारी ऐसा नहीं करेंगे
अगर वह अन्यथा अनुदान के लिए योग्य पाया जाता है तो उस आधार पर उसके आवेदन को अस्वीकार कर दें
इस धारा के तहत नागरिकता:
बशर्ते कि जो व्यक्ति नागरिकता के लिए आवेदन करता है
इस धारा के तहत उसके अधिकारों और विशेषाधिकारों से वंचित नहीं किया जाएगा जो वह था
ऐसे बनाने की जमीन पर उसके आवेदन की प्राप्ति की तारीख के हकदार
आवेदन।
(४) इस खंड में कुछ भी असम, मेघालय के आदिवासी क्षेत्र पर लागू नहीं होगा,
मिजोरम या त्रिपुरा जैसा कि संविधान और छठी अनुसूची में शामिल है
बंगाल पूर्वी सीमा के अंतर्गत अधिसूचित “इनर लाइन” के अंतर्गत आने वाला क्षेत्र
विनियमन, 1873. ‘।
4. मुख्य अधिनियम की धारा 7D में, –
(i) खंड (डी) के बाद, निम्नलिखित खंड को सम्मिलित किया जाएगा, अर्थात्: –
“(दा) ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया कार्डधारक ने किसी का भी उल्लंघन किया है
इस अधिनियम के प्रावधान या किसी अन्य कानून के प्रावधान जो समय के लिए लागू हों
में प्रकाशित अधिसूचना में केंद्र सरकार द्वारा निर्दिष्ट किया जा सकता है
सरकारी राजपत्र; या “;
(ii) क्लॉज (एफ) के बाद, निम्नलिखित अनंतिम सम्मिलित किया जाएगा, अर्थात्: –
“बशर्ते कि इस धारा के तहत कोई भी आदेश पारित नहीं किया जाएगा जब तक कि
ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया कार्डधारक को एक उचित अवसर दिया गया है
सुना जा रहा है। “
5. मुख्य अधिनियम की धारा 18 में, उपधारा (2) में, खंड (ईई) के बाद, निम्नलिखित
खंड, अर्थात् डाला जाएगा: –
“(ईईई) प्रमाणपत्र देने के लिए शर्तें, प्रतिबंध और तरीके
पंजीकरण और धारा 6 बी के उपधारा (1) के तहत प्राकृतिककरण का प्रमाण पत्र; ”।
संशोधन
धारा 2 का।
रेग। 5 का 1873।
34 का 1920।
1946 का 31।
का सम्मिलन
नया खंड 6B
विशेष
प्रावधानों के अनुसार
नागरिकता के लिए
व्यक्ति का
से ढका हुआ
करने के लिए
का खंड (बी)
उपधारा (1)
धारा 2 का।
संशोधन
धारा 7D की।
संशोधन
18 की धारा।
1955 का 57।
2 भारत के राजपत्र के गजेटी [पी
6. मुख्य अधिनियम की तीसरी अनुसूची में, खंड (घ) में, निम्नलिखित अनंतिम होगा
सम्मिलित हो, अर्थात्: –
‘बशर्ते कि हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी या संबंधित व्यक्ति के लिए
अफगानिस्तान, बांग्लादेश या पाकिस्तान में ईसाई समुदाय, की कुल अवधि
भारत में निवास या सेवा इस खंड के तहत आवश्यक होगी
“ग्यारह वर्ष से कम नहीं” के स्थान पर “पांच वर्ष से कम नहीं” के रूप में पढ़ें। ‘
संशोधन
के तीसरे
अनुसूची।
—-
डॉ। जी। नारायण राजू,
सरकार के सचिव। भारत की।
MGIPMRND-4385GI (S3) -12-12-2019।
प्रबंधक, भारत प्रेस, मिन्ट रोड, नई दिल्ली -112 के द्वारा जारी
और प्रकाशनों के नियंत्रक द्वारा प्रकाशित, दिल्ली -110054।
एसईसी। १] भारतीय विदेश मंत्रालय का गजेट ३
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