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The Ramanujan Summation in Mathematics

The Ramanujan Summation in Mathematics

1.श्रीनिवास रामानुजन का परिचय (Introduction of Srinivasa Ramanujan)-

श्री निवास रामानुजन् का जन्म तमिलनाडु प्रान्त के इरोद नामक ग्राम में एक निर्धन परिवार में 22 दिसम्बर, 1887 ई. को हुआ। इनके पिता कुम्भ कोनम् ग्राम के निवासी थे और वहीं पर एक कपड़े वाले के यहाँ मुनीमी करते थे।
रामानुजन् के जन्म के बारे में किंवदन्ती प्रचलित है। कहा जाता है कि विवाह होने के कई वर्ष बाद तक उनकी माता के कोई सन्तान नहीं हुई। इससे वह सदैव चिन्तित रहती थी। अपनी पुत्री को चिन्ताकुल देखकर रामानुजन् के नाना ने नामकल गाँव में जाकर वहाँ की नामागिरि देवी की आराधना की, उसी के फलस्वरूप श्रीनिवास रामानुजन् का जन्म हुआ।
5 वर्ष की आयु में रामानुजन् को स्कूल भेजा गया। वहाँ पर दो वर्ष पढ़ने के बाद वह कुम्भकोनम् हाईस्कूल में पढ़ने भेजे गए। उन्हें गणितशास्त्र में बड़ी दिलचस्पी थी। अपने साथियों और अध्यापकों से कभी वह नक्षत्रों के बारे में कुछ पूछ बैठते थे तो कभी परिधि के बारे में। जब वह तीसरे दर्जे में पढ़ते थे तो एक दिन अध्यापक समझा रहे थे कि किसी संख्या को उसी संख्या से भाग देने पर भजनफल एक होता है। रामानुजन् ने फौरन पूछा, “क्या यह नियम शून्य के लिए भी लागू होता है? “इसी दर्जे में बीजगणित की तीनों श्रेणियों – समान्तर श्रेणी, गुणोत्तर श्रेणी, हरात्मक श्रेणी जो कि आजकल इण्टरमीडिएट कक्षाओं में पढ़ाई जाती हैं – पढ़ लिया था, चौथे दर्जे में त्रिकोणमिति तथा पाँचवे दर्जे में ज्या और कोज्या का विस्तार समाप्त कर लिया था।
17 वर्ष की आयु में रामानुजन् ने हाईस्कूल परीक्षा अच्छे नम्बरों से पास की जिससे वह गणितशास्त्र में इतने लवलीन हो गए कि गणित के सिवाय और किसी काम के न रहे और परिणाम यह हुआ कि ये फेल हो गये। इससे इनकी छात्रवृत्ति रोक दी गयी। अतः आर्थिक स्थिति के खराब होने के कारण इनको अपनी विश्वविद्यालय की शिक्षा खत्म करनी पड़ी।
उन दिनों रामानुजन् को आर्थिक कठिनाईयों ने परेशान कर दिया। इसी समय इनका विवाह भी कर दिया गया। विवाह हो जाने पर कठिनाइयांँ दो गुनी हो गई और वह शीघ्र ही नौकरी ढूँढने के लिए मजबूर हो गए। बड़ी कठिनाईयों के बाद इनको मद्रास ट्रस्ट में 30 रुपये मासिक की नौकरी मिल गई। इसी बीच डाॅ. वाकर, गणित में उनकी दिलचस्पी से बहुत प्रभावित हुए। उनके प्रयत्न से रामानुजन् को मद्रास विश्वविद्यालय से दो वर्ष के लिए 75रु. मासिक छात्रवृत्ति मिल गयी तथा इनको क्लर्की से छुटकारा मिल गया और आर्थिक चिन्ताओं से मुक्त होकर उन्हें अपना सारा समय गणित के अध्ययन में लगाने का सुअवसर प्राप्त हुआ।
जब आपने अपने कुछ लेख ट्रिनिटी कालेज के गणित के फैलो डाॅ. हार्डी तथा दूसरे अंग्रेज गणितज्ञ बड़े प्रभावित हुए। अतः वे लोग रामानुजन् को क्रेम्ब्रिज बुलाने का प्रयत्न करने लगे।
सन् 1947 ई. में जब ट्रिनिटी कालेज के फैलो डाॅ. नोविल भारत आए तो डाॅ. हार्डी ने उनसे रामानुजन् से मिलने तथा उनको केम्ब्रिज लाने का अनुरोध कर दिया था। भारत आने पर प्रो. नोविल ने रामानुजन् से भेंट की। उन्होंने नोविल महोदय की प्रार्थना को स्वीकार कर लिया। इस पर नोविल साहब ने उनको 250 पौण्ड की छात्रवृत्ति देने के अतिरिक्त व्यय तथा यात्रा व्यय देना भी स्वीकार कर लिया। इससे 60 रुपये प्रतिमाह अपनी माता को देने का प्रबंध करके 17 मार्च, 1847 ई. को मि. नोविल के साथ रवाना हो गए।
20 फरवरी, 1918 को आप राॅयल सोसायटी के फैलो बनाए गये। यह सम्मान प्राप्त करने वाले आप पहले भारतीय थे। 27फरवरी, 1919 को आप लन्दन से भारत के लिए रवाना हुए और 27 मार्च को आप बम्बई पहुँचे। विदेश में रहने और जलवायु अनुकूल न होने से आप बहुत कमजोर हो गए।
स्वास्थ्य खराब होने से इनको कावेरी कोदू मण्डी ले जाया गया। वहाँ से वे कुम्भकोनम् ले जाए गए। इनका स्वास्थ्य दिन-पर-दिन बिगड़ता ही गया। लेकिन मस्तिष्क का प्रकाश अन्त तक मन्द नहीं हुआ। मृत्यु तक वह काम में लगे रहे। Mock Theta Functions पर उनका सब काम मृत्यु-शैय्या पर ही हुआ। हालत खराब होती देखकर वे मद्रास ले जाए गए। 26 अप्रैल, 1920 ई. को मद्रास के पास चेतपुर ग्राम में इस विश्वविख्यात गणितज्ञ का स्वर्गवास हो गया।गणित में रामानुजन योग (The Ramanujan Summation in Mathematics),श्रीनिवास रामानुजन् (Srinivasa Ramanujan):
रामानुजन् की संक्षिप्त जीवनी (Brief Biography of Ramanujan)
3.रामानुजन का संघर्ष जीवन (Ramanujan’s Struggling Life):
सन् 1909 ईस्वी में रामानुजन का विवाह हुआ। परिवार का बोझ सिर पर आ गया।अब वह नौकरी की तलाश करने लगे।इस सिलसिले में दीवान बहादुर रामचंद्रराव से रामानुजन का परिचय हुआ। रामचंद्रराव कलेक्टर थे पर बड़े दयालु प्रकृति के व्यक्ति थे।वह गणित शास्त्र के प्रेमी थे।रामानुजन जब रामचंद्रराव के सामने उपस्थित हुए तो इस छोटे कद के दुबले-पतले,मामूली कपड़े पहने किन्तु चमकीली आंखों वाले तरुण का उनके ऊपर गहरा प्रभाव पड़ा।रामानुजन् ने उन्हें अपनी नोटबुकें दिखाई जिनमें उनके खोजे हुए गणित के फाॅर्मूले लिखे हुए थे।रामानुजन् ने रामचंद्रराव से अपने दिल की बात बता दी।रामानुजन् नौकरी इसलिए चाहते थे कि उनको खाने-पीने की सुविधा मिले ताकि वह दूसरे पर निर्भर रहे बिना गणित का अपना अध्ययन जारी रख सके।
कुछ समय तक रामानुजन् का खर्च रामचंद्रराव ने स्वयं दिया।कोशिश करने पर भी वह रामानुजन् के लिए कोई छात्रवृत्ति प्राप्त नहीं करवा सके। रामानुजन् को दूसरे पर बोझ बने रहना पसंद नहीं था।कुछ दिनों बाद उन्होंने मद्रास पोर्ट ट्रस्ट के ऑफिस में ₹30 मासिक की नौकरी स्वीकार कर ली।
बहुत से लोग नौकरी स्वीकार करते ही पढ़ाई-लिखाई छोड़ देते हैं।परंतु रामानुजन् ने पैसे कमाने के लिए नौकरी नहीं की थी।नौकरी के साथ-साथ वह गणित का अध्ययन भी करते रहे। उन्होंने अपनी गणितीय गवेषणा के बारे में एक लेख तैयार किया।उनका यह लेख 1911 ईस्वी में गणित की एक पत्रिका में प्रकाशित हुआ।उस समय रामानुजन् की आयु केवल 23 साल की थी।अगले साल रामानुजन् ने अपने दो ओर लेख प्रकाशित करवाए।
गणितशास्त्र में कुछ नया खोज कर लेख प्रकाशित करना बहुत बड़ी बात मानी जाती है।लेख प्रकाशित होने से विद्वानों को रामानुजन् की प्रतिभा का पता चला।मद्रास इंजीनियरिंग कॉलेज के प्राध्यापक ग्रिफीथ महाशय और मद्रास पोर्ट ट्रस्ट के चेयरमैन फ्रांसिस स्प्रिंग ने रामानुजन् की बड़ी सहायता की। ये सज्जन चाहते थे कि रामानुजन को इंग्लैंड भेजा जाए।
उस समय इंग्लैंड के प्रख्यात गणितज्ञ डॉक्टर जी. एच. हार्डी की खूब चर्चा थी।हितैषियों की सलाह से रामानुजन् ने डाॅ. हार्डी से पत्र व्यवहार शुरू कर दिया।जनवरी 1913 में रामानुजन ने डॉक्टर हार्डी को जो पत्र लिखा वह इस प्रकार था:
मान्यवर,
मैं यहाँ मद्रास पोर्ट ट्रस्ट के ऑफिस में एक मामूली क्लर्क हूँ।विश्वविद्यालय की उच्च शिक्षा तो मैं हासिल नहीं कर सका किंतु स्कूल की पढ़ाई पूरी कर चुका हूं।स्कूल छोड़ने के बाद से अपना शेष समय मैं गणित के अध्ययन में खर्च करता रहा हूं। विश्वविद्यालय में पढ़ाए जाने वाले गणित से यद्यपि मैं परिचित नहीं हूं फिर भी स्वतंत्र रूप से मैंने गणितशास्त्र में कुछ नए सिद्धांत खोज निकाले हैं। यहां के गणितज्ञ इस खोज को अद्भुत मानते हैं।
इस पत्र के साथ मैं अपनी कुछ गवेषणाएँ भेज रहा हूं।आपसे मेरा सविनय अनुरोध है कि आप मेरे इन लेख को देखें।मैं एक गरीब भारतीय हूं।मेरे इन लेखों में यदि कुछ भी नवीनता है तो आप इनके प्रकाशन में अवश्य मदद करेंगे।आप इस विषय के ज्ञाता हैं।आप की प्रेरणा से मुझे प्रोत्साहन मिलेगा। कष्ट के लिए क्षमा चाहता हूं।
विनीत
रामानुजन्
रामानुजन् की खोजों को देखकर डॉक्टर हार्डी बड़े प्रभावित हुए।उन्होंने इनके प्रकाशन की व्यवस्था कर दी।साथ ही डॉक्टर हार्डी रामानुजन् को इंग्लैंड बुलाने की कोशिश करते रहे।उनके तथा अन्य हितेषीयों के प्रयत्न से मद्रास विश्वविद्यालय ने रामानुजन् को विदेश जाने के लिए छात्रवृत्ति देना स्वीकार कर लिया।10 मार्च 1914 को रामानुजन् इंग्लैंड रवाना हुए।
रामानुजन इंग्लैंड पहुंच गए।डॉक्टर हार्डी को इससे बड़ी खुशी हुई।साथ ही उनके सामने एक बड़ी समस्या आ खड़ी हुई।रामानुजन् ने उच्च गणित का विधिवत् अध्ययन नहीं किया था।गणित की कुछ बातों पर रामानुजन् का पूर्ण अधिकार था।परंतु कुछ ऐसी भी बातें थी जिनकी रामानुजन् को बहुत कम जानकारी थी।इसलिए रामानुजन् जैसी प्रतिभा को पढ़ाने की जिम्मेदारी डाॅ. हार्डी ने अपने ऊपर ले ली।फिर भी डॉक्टर हार्डी ने स्वीकार किया था: “रामानुजन् को जितना कुछ मैंने पढ़ाया उससे कहीं अधिक मैंने उनसे सीखा है”।
रामानुजन् ब्राह्मण कुल में पैदा हुए थे।वह धर्म-कर्म को मानते थे और कड़ाई से उसका पालन करने के आदी थे।इंग्लैंड में रहते समय वह अपना भोजन स्वयं पकाते थे,शाकाहारी भोजन।इंग्लैंड की कड़ी सर्दी,तिस पर कड़ा परिश्रम।स्वास्थ्य पर असर होना स्वाभाविक था।1917 ईस्वी में तपेदिक के लक्षण दिखाई देने लगे तो उन्हें अस्पताल में भर्ती कर दिया गया।
4.रामानुजन् द्वारा गणित के खोज कार्य का सारांश (Summary of mathematics discovery by Ramanujan):
गणितशास्त्र को मोटे तौर पर मुख्यतः दो भागों में बांटा जाता है:शुद्ध गणित और उपयोगी गणित। गणित के जिन आविष्कारों का विज्ञान में उपयोग होता है उसे उपयोगी गणित कहते हैं।गणित के जिन आविष्कारों का विज्ञान में तत्काल उपयोग होता दिखाई नहीं देता उसे शुद्ध गणित कहते हैं। रामानुजन् ने जो और जितना कुछ खोजा है उसे शुद्ध गणित कहा जाता है।शुद्ध गणित कालांतर में उपयोगी गणित में बदला जा सकता है।रामानुजन की कई गवेषणाएं आरम्भ में शुद्ध गणित थी परंतु अब इनमें से कुछ का विज्ञान में इस्तेमाल होने लगा है।
शुद्ध गणित एक व्यापक विषय है।इसमें संख्या शास्त्र को ऊंचा स्थान प्राप्त है परंतु अब इनमें से कुछ का विज्ञान में इस्तेमाल होने लग गया है।1,2,3,. ….400 जैसी संख्याएं और +,×,-,× जैसी क्रियाओं के मेल से जो गणित रचा जाता है उसे हम संख्याशास्त्र कह सकते हैं,कोई कहेगा इसमें कौन-सी बड़ी बात है?यह सब तो हम अंकगणित में करते ही हैं।किन्तु बात इतनी सरल नहीं है।1,2,3… जैसी संख्याओं के अनन्त क्रम में बहुत से रहस्य छिपे हुए हैं।इन संख्याओं के कुछ रहस्यों का पता अभी तक बड़े-बड़े गणितज्ञ भी नहीं लगा पाए हैं। रामानुजन् ने गणित के क्षेत्र में ऐसे ही कुछ रहस्यों की खोज की।
संख्याशास्त्र का एक उदाहरण लीजिए।कोई भी पूर्णांक ले लीजिए।जैसे:3 इस संख्या को हम तीन भिन्न रूपों में इस प्रकार से लिख सकते हैं:3+0,1+2,1+1+1।जाहिर है कि संख्या 3 को इनके अलावा किसी अन्य तरीके से पूर्णांकों में विभक्त नहीं किया जा सकता।इसी प्रकार 4 और 5 को हम यो विभक्त कर सकते हैं:
4=4+0,3+1,2+2,2+1+1,1+1+1+1
5=5+0,4+1,3+2,3+1+1,2+1+1+1,1+1+1+1+1
लेकिन यह छोटी संख्या की बात हुई।यदि 80,000 जैसी कोई बड़ी समस्या हो तो उसे इसी तरीके से किस प्रकार विभक्त करेंगे?
रामानुजन् ने 1917 में ऐसी ही बड़ी संख्याओं को विभक्त करने के लिए एक फाॅर्मूला खोज निकाला था।
शुद्ध गणित के क्षेत्र में खोज करने वाले बहुत से गणितज्ञ गणितशास्त्र को एक खेल मानते हैं। रामानुजन् ऐसे ही महान गणितज्ञ थे।अंकों और जोड़,गुणा,भाग आदि के चिन्हों के साथ एक प्रकार का खेल खेलते हुए वह गणित के अद्भुत नियम खोज निकालने में समर्थ थे।कहा जाता है कि 10,000 तक की संख्याओं के साथ रामानुजन् की गहरी दोस्ती थी।
5.रामानुजन्-जी.एच.हार्डी संख्या (Ramanujan-G H Hardy Number):
एक बार का किस्सा है।रामानुजन् अस्पताल में भर्ती थे।डॉक्टर हार्डी टैक्सी में बैठकर उन्हें देखने अस्पताल पहुंचे।टैक्सी का नंबर था 1729।रामानुजन् से मिलने पर डॉक्टर हार्डी ने सहज भाव से कह ही दिया कि यह एक अशुभ संख्या है।बात यह थी कि 1729=7×13×19।इसमें 1729 का एक गुणनखंड 13 की संख्या है।यूरोप के अंधविश्वासी लोग इस 13 संख्या से भय खाते हैं।वे संख्या 13 को अशुभ मानते हैं।वे 13 संख्यावाली कुर्सी पर बैठने से बचेंगे,13 संख्यावाले कमरे में ठहरने से बचेंगे।इसलिए डॉक्टर हार्डी ने रामानुजन् से कहा था कि 1729 एक अशुभ संख्या है।लेकिन रामानुजन् ने झट जवाब दिया-नहीं,यह एक अद्भुत संख्या है।यह वह सबसे छोटी संख्या है जिसे हम दो घन संख्याओं के जोड़ से दो तरीकों से व्यक्त कर सकते हैं जैसे:1729=12^3+1^3,1729=10^3+9^3
ऐसी विलक्षण प्रतिभा थी रामानुजन की।उनके जीवन की कुछ बातें भी बड़ी विलक्षण हैं।वह कहा करते थे कि नामगिरी देवी उनके सपनों में आकर गणित के फाॅर्मूले खोजने में उन्हें मदद करती है। परंतु हम जानते हैं कि रामानुजन् की प्रतिभा का रहस्य किसी देवी-देवता की मदद में नहीं बल्कि उनके अपने दिमाग में उनकी लगन और उनके कठोर परिश्रम में निहित था।
6.श्रीनिवास रामानुजन का गणित में योगदान (Srinivasa Ramanujan’s Contribution to Mathematics):
हालांकि श्रीनिवास रामानुजन् के पास शुद्ध गणित में कोई औपचारिक प्रशिक्षण नहीं था परंतु फिर भी उन्होंने गणितीय विश्लेषण (Mathematical Analysis),संख्या सिद्धांत (Number Theory), अनंत श्रृंखला (Infinite Series) और सतत भिन्नों (Continued Fractions) में पर्याप्त योगदान दिया जिसमें गणितीय संख्याओं के हल शामिल थे जिन्हें उस समय हल नहीं किया जा सकता था।
रामानुजन को निम्न कार्यों के लिए जाना जाता है:
लांडो-रामानुजन स्थिरांक (Landau Ramanujan Constant),माॅक थीटा फंक्शन (Mock Theta Functions),रामानुजन् अनुमान (Ramanujan Conjecture),रामानुजन् प्राइम (Ramanujan Prime),रामानुजन्-सोल्डनर स्थिरांक (Ramanujan-Soldner Constant), रामानुजन थीटा फंक्शन (Ramanujan Theta Function),रामानुजन का योग (Sum of Ramanujan),रोजर्स-रामानुजन की सर्वसमिका (Rogers-Ramanujan Identities),रामानुजन की मास्टर प्रमेय (Ramanujan’s Master Theorem),रामानुजन-सातो श्रृंखला (Ramanujan-Sato Series)।
रामानुजन ने स्वतंत्र रूप से अपने छोटे से जीवन में 3900 परिणाम (ज्यादातर सर्वसमिका और समीकरण) संकलित किए।उनके मौलिक और अत्यधिक उच्चस्तरीय अपरंपरागत परिणामों जैसे कि रामानुजन् प्राइम (Ramanujan Prime), रामानुजम थीटा फंक्शन (Ramanujan Theta Function),पार्टीशन फॉर्मूला (Partition Formulae) और माॅक थीटा फंक्शन्स (Mock Theta Function) के कार्य ने आगे के गणितज्ञों के शोध के लिए मार्ग खोल दिया।उनके हजारों परिणामों में से एक दो दर्जन को छोड़कर सभी अब सही साबित हो चुके हैं।उन्होंने 13 साल की उम्र में एडवांसड ट्रिग्नोमेट्री (Advanced Trigonometry) पर एस.एल. लोनी (S.L.Loney) द्वारा लिखित पुस्तक को अपने दम पर परिष्कृत प्रमेयों की खोज करते हुए महारत हासिल की।1902 में रामानुजन् को दिखाया गया था कि घन समीकरणों (Cubic Equations) को कैसे हल किया जाता है।उन्होंने क्वार्टिक (quartic) को हल करने के लिए अपना तरीका विकसित किया।अगले वर्ष उन्होंने क्विंटिक (Quintic) को हल करने की कोशिश की।वे यह नहीं जानते थे कि इसे करणी (Radicals) द्वारा हल नहीं किया जा सकता है।
1903 में जब वे 16 वर्ष के थे तो रामानुजन ने एक मित्र से शुद्ध और अनुप्रयुक्त गणित (Pure and Applied Mathematics) में प्राथमिक परिणामों का एक सारांश लगभग 500 प्रमेयों के संग्रह [जी एस कैर द्वारा लिखित (G.S .Carr)] की पुस्तक एक पुस्तकालय की प्रति प्राप्त की।इस पुस्तक को उनकी प्रतिभा को जगाने में एक प्रमुख तत्त्व के रूप में स्वीकार किया जाता है।अगले वर्ष रामानुजन् ने स्वतंत्र रूप से बरनौली संख्याओं का विकास और जांच की और 15 दशमलव स्थानों तक यूलर-माशेरोनी स्थिरांक की गणना की (Bernoulli numbers and calculated the Euler-Mascheroni Constant up to 15 decimal places)।1910 में रामानुजन् डिप्टी कलेक्टर वी. रामास्वामी अय्यर (V.Ramaswamy After) से मिले जिन्होंने इंडियन मैथमेटिकल सोसायटी की स्थापना की थी। अय्यर ने रामानुजन् को इंडियन मैथमेटिकल सोसायटी मद्रास के सचिव आर रामचंद्रराव (R. Ramachandra Rao) के पास रामानुजन् को परिचय पत्र के साथ भेजा।रामचंद्र राव ने एक प्रसिद्ध बॉम्बे गणितज्ञ प्रोफेसर सल्धाना (Saldhana) को एक और मौका देने के लिए कहा।रामानुजन ने दीर्घवृत्तीय समाकल (Elliptic Integrals),हाइपर्जियोमेट्रिक श्रृंखला और अपसारी श्रृंखला (divergent Series) के सिद्धांत पर चर्चा की।जिसके बाद उन्हें वित्तीय सहायता से अपना शोध जारी रखा।
7.रामानुजन् का पारिवारिक जीवन (Ramanujan’s family life):
रामानुजन के पिता कुप्पूस्वामी श्रीनिवास अयंगर (Kuppuswamy Srinivasa Iyenger) मूलरूप से तंजावुर (Thanjavur) जिले के रहने वाले थे।उनकी माता कोमालाथम्मल (Komalatammal) गृहिणी थी।रामानुजन् की शादी 14 जुलाई 1909 को जानकी (Janaki) (जानकीअम्मल (Janakiammal) 21 मार्च 1898-13 अप्रैल 1994) को हुई थी।जानकी मरुदुर (Marudur) रेलवे स्टेशन के निकट [करुर जिला (karur district)] के गांव राजेंद्रन (Rajendram) की रहने वाली थी।
8.रामानुजन का सम्मान (Ramanujan honoured):
1904 में टाउन हाई सेकेंडरी स्कूल से स्नातक की उपाधि प्राप्त की तो स्कूल के प्रधानाध्यापक कृष्णस्वामी अय्यर (Krishnaswami Iyer) द्वारा गणित के लिए के. रंगनाथन (K. Ranganatha Rao) पुरस्कार से सम्मानित किया गया।इसके फलस्वरूप उन्हें छात्रवृत्ति मिलना प्रारंभ हुआ है।
6 दिसंबर 1917 को रामानुजन् लंदन में मैथमेटिकल सोसायटी के लिए 2 मई 1918 को उन्हें रॉयल सोसाइटी का फेलो चुना गया,1841 में अर्दासेर कर्सेटजी (Ardaseer Cursetjee) के बाद वे दूसरे भारतीय थे।31 साल की उम्र में रामानुजन् राॅयल सोसायटी के इतिहास में सबसे कम उम्र के फेलो में से एक एक थे।उन्हें दीर्घवृत्तीय फलनों (Elliptic Functions) तथा संख्याओं के सिद्धांत (Theory of Numbers) की खोज के लिए चुना गया था।13 अक्टूबर 1918 को वे कैंब्रिज के ट्रिनिटी कॉलेज के फेलो चुने जाने वाले पहले भारतीय थे।
रामानुजन् का मृत्युपरांत सम्मान (Ramanujan honoured after death):
कोलकाता भारत में बिरला औद्योगिक और तकनीकी संग्रहालय के बगीचे में रामानुजन की प्रतिमा।
2012 का भारतीय डाक टिकट राष्ट्रीय गणित दिवस को समर्पित है और इसमें रामानुजन् है।
भारत की मुहर पर रामानुजन (2011)
उनकी एक साल बाद प्रकृति ने रामानुजन को अन्य प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों और गणित के बीच “वैज्ञानिक पायनियर्स कैलेंडर पर सूचीबद्ध किया जिन्होंने प्रतिष्ठा हासिल की थी।
रामानुजन् का गृहराज्य तमिलनाडु 22 दिसंबर (रामानुजन का जन्मदिन) को ‘राज्य आईटी दिवस’ के रूप में मनाता है।
रामानुजन् को चित्रित करने वाले डाक टिकट भारत सरकार द्वारा 1962,2011,2012 और 2016 में जारी किए गए थे।
रामानुजन् के शताब्दी वर्ष के बाद से उनका जन्मदिन 22 दिसंबर सरकारी कला कॉलेज,कुंभकोणम (Kumbakanam) जहां उन्होंने अध्ययन किया और चेन्नई में आईआईटी मद्रास द्वारा प्रतिवर्ष रामानुजन् दिवस के रूप में मनाया जाता है।
अंतरराष्ट्रीय सैद्धांतिक भौतिकी केंद्र (ICTP) (Centre for Theoretical Physics) ने अंतरराष्ट्रीय गणितीय संघ के सहयोग से विकासशील देशों के युवा गणितज्ञों के लिए रामानुजन् के नाम पर एक पुरस्कार बनाया है जो पुरस्कार समिति के सदस्यों को नामित करता है। तमिलनाडु में स्थित एक निजी विश्वविद्यालय सस्त्र विश्वविद्यालय (SASTRA University) ने रामानुजन् से प्रभावित गणित के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए 32 वर्ष से अधिक उम्र के गणितज्ञ को सालाना दिए जाने वाले 10,000 अमेरिकी डॉलर के शस्त्र रामानुजम पुरस्कार की स्थापना की है।
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC),भारत सरकार द्वारा नियुक्त एक समिति की सिफारिशों के आधार पर,सस्त्र द्वारा स्थापित श्रीनिवास रामानुजन् केंद्र को शस्त्र विश्वविद्यालय के दायरे में एक ऑफ-केंपस केंद्र घोषित किया गया है।SASTRA ने उस घर को खरीदा और पुनर्निर्मित किया जहाँ रामानुजन् कुम्भकोणम में रहते थे।
2011 में उनके जन्म की 125 वीं वर्षगांठ पर भारत सरकार ने घोषणा की कि 22 दिसंबर को हर साल राष्ट्रीय गणित दिवस के रुप में मनाया जाएगा। तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने घोषणा की कि 2012 को राष्ट्रीय गणित दिवस के रूप में मनाया जाएगा।
रामानुजन आईटी सिटी चेन्नई में एक सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड) है जिसे 2011 में बनाया गया था। टाइडल पार्क (Tidal Park) के बगल में स्थित,इसमें दो क्षेत्रों के साथ 25 एकड़ (10 हेक्टेयर) शामिल है जिसमें कुल क्षेत्रफल 5.7 मिलियन वर्ग फुट है।(530000 वर्गमीटर) में से 4.5 मिलियन वर्गफुट (420000 वर्गमीटर) कार्यालय स्थान शामिल है।
उपर्युक्त आर्टिकल में गणित में रामानुजन योग (The Ramanujan Summation in Mathematics),गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन् (Mathematician Srinivasa Ramanujan) के बारे में बताया गया है।
10.गणित में रामानुजन योग (The Ramanujan Summation in Mathematics),गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन् (Mathematician Srinivasa Ramanujan) के सम्बन्ध में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:
प्रश्न:1.रामानुजन ने क्या आविष्कार किया था? (What Ramanujan invented?):
उत्तर:श्रीनिवास रामानुजन् (Srinivasa Ramanujan)
श्रीनिवास रामानुजन एफआरएस (Fellow of Royal Society) निम्न के लिए जाने जाते हैं:लांडौ-रामानुजन स्थिरांक (Landau-Ramanujan Constant)
माॅक थीटा फंक्शन (Mock Theta Functions) रामानुजन अनुमान (Ramanujan Conjecture)
रामानुजन अभाज्य (Ramanujan Prime) रामानुजन-सोल्डनर स्थिरांक (Ramanujan–Soldner constant)
रामानुजन थीटा फंक्शन (Ramanujan theta function)
रामानुजन की राशि रोजर्स-रामानुजन सर्वसमिका (Ramanujan’s sum Rogers–Ramanujan identities)
रामानुजन के मास्टर प्रमेय रामानुजन-सातो श्रृंखला (Ramanujan’s master theorem Ramanujan–Sato series)
रॉयल सोसाइटी के पुरस्कार फेलो (Awards Fellow of the Royal Society)
प्रश्न:2.1729 एक जादुई संख्या क्यों है? (Why is 1729 a magic number?):
उत्तर:यह 1729 है।गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन् द्वारा खोजा गया,1729 को जादुई संख्या कहा जाता है क्योंकि यह एकमात्र संख्या है जिसे संख्याओं के दो अलग-अलग सेटों के घनों के योग के रूप में व्यक्त किया जा सकता है।
प्रश्न:3.रामानुजन क्यों प्रसिद्ध हैं? (Why is Ramanujan famous?):
उत्तर:एक सहज गणितीय प्रतिभा (intuitive mathematical genius),रामानुजन की खोजों ने गणित के कई क्षेत्रों को प्रभावित किया है,लेकिन वह संभवतः संख्या सिद्धांत और अनंत श्रृंखला में उनके योगदान के लिए सबसे प्रसिद्ध हैं,उनमें से आकर्षक सूत्र (fascinating formulas) जिनका उपयोग असामान्य तरीकों से पाई के अंकों की गणना के लिए किया जा सकता है।
प्रश्न:4 श्रीनिवास रामानुजन की विशेषता क्या है? (What is the Speciality of Srinivasa Ramanujan?):
उत्तर:वह व्यक्ति जो अनंत को जानता था,श्रीनिवास रामानुजन अनंत से अधिक जानते थे।उन्होंने प्रमेयों का योगदान दिया और स्वतंत्र रूप से 3900 परिणामों का संकलन किया।हालाँकि जिज्ञासु दिमाग और गणितीय विज्ञान में डबिंग (dabbling in mathematical science) करने वालों को भी उन्हें हार्डी-रामानुजन संख्या (Hardy-Ramanujan number) के लिए जाना जाएगा।
1729 हार्डी का जादू: रामानुजन नंबर (1729 The magic of Hardy : Ramanujan number)
प्रश्न:5.गणित का आविष्कार किसने किया? (Who invented maths?):
उत्तर:आर्किमिडीज (Archimedes) को गणित का जनक कहा जाता है।गणित प्राचीन काल में विकसित प्राचीन विज्ञानों में से एक है।
प्रश्न:6.भारत में गणित का आविष्कार किसने किया? (Who invented maths in India?):
उत्तर:भारतीय गणित का उदय भारतीय उपमहाद्वीप में 1200 ईसा पूर्व से 18वीं शताब्दी के अंत तक हुआ।भारतीय गणित के शास्त्रीय काल (400 ई. से 1200 ई.) में आर्यभट (Aryabhata),ब्रह्मगुप्त (Brahmagupta),भास्कर द्वितीय (Bhaskara II) और वराहमिहिर (Varahamihira) जैसे विद्वानों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया।
प्रश्न:7.भारत में गणित का राजा कौन है? (Who is king of maths in India?):
उत्तर:श्रीनिवास रामानुजन (Srinivasa Ramanujan):भारत के महानतम गणितज्ञ।भारत एक ऐसा देश है जो अपनी संस्कृति के साथ-साथ कई महापुरुषों के लिए जाना जाता है।
प्रश्न:8.गणित में प्रतिभाशाली कौन था? (Who was brilliant in mathematics?):
उत्तर:यूलर (Euler) और न्यूटन (Newton) को सर्वश्रेष्ठ गणितज्ञ माना जाता है।गॉस (Gauss),वायरस्ट्रास (Weierstrass) और रीमैन (Riemann) को सर्वश्रेष्ठ सिद्धांतवादी माना जाता है।आर्किमिडीज (Archimedes) को अक्सर सबसे महान गणितीय प्रतिभा के रूप में माना जाता है जो कभी जीवित रहे।
प्रश्न:9.क्या रामानुजन योग सत्य है? (Is the Ramanujan summation true?):
उत्तर:”रामानुजन योग” अपसारी श्रृंखला (divergent series) को मान निर्दिष्ट करने का एक तरीका है।जैसे यह सत्य या असत्य नहीं है,बस परिभाषित (या नहीं,जैसा भी मामला हो)।
उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर द्वारा गणित में रामानुजन योग (The Ramanujan Summation in Mathematics),गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन् (Mathematician Srinivasa Ramanujan) के बारे में ओर अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

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2.रामानुजन योग(The Ramanujan Summation) : 1 + 2 + 3 + Summ + -1 = -1/12?

The Ramanujan Summation in Mathematics

The Ramanujan Summation in Mathematics

“तुम्हारी बातें हैं किस बारे में? वहाँ कोई रास्ता नहीं है कि सच है! ”- मेरी माँ
यह मेरी माँ ने मुझे तब बताया जब मैंने उन्हें इस छोटी गणितीय विसंगति के बारे में बताया। और यह सिर्फ एक विसंगति है। आखिरकार, यह बुनियादी तर्क को धता बताता है। सकारात्मक संख्याओं को न केवल एक ऋणात्मक, बल्कि एक ऋणात्मक अंश के बराबर कैसे जोड़ा जा सकता है? क्या गला है?
शुरू करने से पहले: मुझे यह बताया गया है कि जब मैं इस लेख में योग के बारे में बात करता हूं, तो यह शब्द के पारंपरिक अर्थों में नहीं है। ऐसा इसलिए है क्योंकि स्वाभाविक रूप से निपटने वाली सभी श्रृंखलाएं एक विशिष्ट संख्या के लिए नहीं होती हैं, इसलिए हम एक अलग प्रकार की रकम के बारे में बात करते हैं, अर्थात् सेसैरो सारांश। गणित में रुचि रखने वाले किसी भी व्यक्ति के लिए, सेसरो योग कुछ अनंत राशियों को मान प्रदान करते हैं जो सामान्य अर्थों में परिवर्तित नहीं होते हैं। “सीज़ेरो राशि को सीमा के रूप में परिभाषित किया गया है, क्योंकि एन अनंत तक जाता है, श्रृंखला के पहले n आंशिक रकम के अंकगणितीय साधनों के अनुक्रम के लिए” – विकिपीडिया। मैं यह भी कहना चाहता हूं कि इस पूरे लेख में मैं काउंटेबल इनफिनिटी की अवधारणा से निपटता हूं, एक अलग प्रकार की अनन्तता है जो एक अनंत संख्या में सेट से संबंधित है, लेकिन एक जहां अगर आपको पर्याप्त समय दिया जाता है तो आप सेट में किसी भी संख्या को गिन सकते हैं। यह मुझे गणित के कुछ नियमित गुणों का उपयोग करने की अनुमति देता है जैसे मेरे समीकरणों में कम्यूटेटिविटी (जो कि मैं पूरे लेख में उपयोग किया गया एक स्वयंसिद्ध है)।

3.रामानुजन योग क्या है(What is Ramanujan Summation)- 

आप में से जो लोग इस श्रृंखला से अपरिचित हैं, जिन्हें श्रीनिवास रामानुजन नामक प्रसिद्ध भारतीय गणितज्ञ के बाद रामानुजन योग  के रूप में जाना जाता है, इसमें कहा गया है कि यदि आप सभी प्राकृतिक संख्‍याओं को जोड़ते हैं, तो वह है 1, 2, 3, 4 , और इसी तरह, अनंत के लिए सभी तरह से, आप पाएंगे कि यह -1/12 के बराबर है। YUP, -0.08333333333
मुझे विश्वास नहीं है? दो समान रूप से पागल दावों को साबित करके यह जानने के लिए पढ़ते रहें कि मैं यह कैसे साबित करता हूं:
1-1 + 1–1 + 1–1… = 1/2
1-2 + 3–4 + 5–6 … = 1/4
सबसे पहले, रोटी और मक्खन। यह वह जगह है जहां वास्तविक जादू होता है, वास्तव में इसके बिना अन्य दो प्रमाण संभव नहीं हैं।
मैं एक श्रृंखला के साथ शुरू करता हूं, ए, जो 1-1 + 1–1 + 1–1 के बराबर है और अनंत बार दोहराया गया है। मैं इसे इस प्रकार लिखूंगा:
A = 1–1 + 1–1 + 1–1 +
फिर मैं एक साफ छोटी चाल है। मैं A को 1 से निकालता हूं
1-A = 1- (1-1 + 1-1 + 1-1 ⋯)
अब तक सब ठीक है? अब यहां वह जगह है जहां विज़ार्ड होता है। यदि मैं समीकरण के दाईं ओर को सरल करता हूं, तो मुझे कुछ बहुत अजीब लगता है:
1-A = 1-1 + 1-1 + 1-1 + 1 ⋯
परिचित दिखता है? यदि आप इसे याद करते हैं, तो ए। हाँ, समीकरण के उस दाईं ओर, वह श्रृंखला है जिसे हमने शुरू किया था। तो मैं उस दाईं ओर के लिए A स्थानापन्न कर सकता हूं, उच्च विद्यालय बीजगणित और उछाल का एक सा कर सकता हूं!
1-A= A
1-A + A = A + A
1 = 2 A
1/2 = A
यह छोटी सुंदरता है दादी की श्रृंखला, जिसे इतालवी गणितज्ञ, दार्शनिक और पुजारी गुइडो ग्रैंड के बाद कहा जाता है। इस श्रृंखला में वास्तव में सब कुछ है, और जब तक यह मेरा व्यक्तिगत पसंदीदा है, इसके पीछे एक अच्छा इतिहास या खोज की कहानी नहीं है। हालांकि, यह बहुत सी रोचक चीजों को साबित करने के लिए दरवाजा खोलता है, जिसमें क्वांटम यांत्रिकी और यहां तक ​​कि स्ट्रिंग सिद्धांत के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण समीकरण भी शामिल है। लेकिन उस पर बाद में। अभी के लिए, हम # 2: 1–2 + 3–4 + 5–6 ⋯ = 1/4 साबित करते हुए आगे बढ़ते हैं।
हम ऊपर के रूप में उसी तरह शुरू करते हैं, जिससे श्रृंखला B = 1–2 + 3–4 + 5–6 … हो जाती है। फिर हम इसके साथ खेलना शुरू कर सकते हैं। इस बार, 1 से B को घटाने के बजाय, हम इसे A. गणितीय रूप से घटाते जा रहे हैं, हमें यह मिलता है:
A-B = (1-1 + 1-1 + 1-1… ) -(1-2 + 3-4 + 5-6 …)
A-B = (1-1 + 1-1 + 1-1 …) – 1 + 2-3 + 4-5-6 ..
फिर हम थोड़ी-थोड़ी शर्तों के अनुसार फेरबदल करते हैं, और हम देखते हैं कि एक और दिलचस्प पैटर्न उभर रहा है।
A-B = (1-1) + (-1 + 2) + (1-3) + (-1 + 4) + (1-5) + (-1 + 6) …
A-B = 0 + 1–2 + 3–4 + 5 +
एक बार फिर, हमें वह श्रृंखला मिलती है जिसे हमने शुरू किया था, और पहले से, हम जानते हैं कि A = 1/2, इसलिए हम कुछ और मूल बीजगणित का उपयोग करते हैं और आज के हमारे दूसरे दिमाग को उड़ाने वाला तथ्य साबित करते हैं।
A-B = B
A = 2 B
1/2 = 2 B
1/4 = B
और वोइला! इस समीकरण में एक फैंसी नाम नहीं है, क्योंकि यह कई गणितज्ञों ने वर्षों से सिद्ध किया है जबकि एक साथ एक विरोधाभासी समीकरण को लेबल किया जा रहा है। फिर भी, इसने शिक्षाविदों के बीच एक बहस छेड़ दी, और यहां तक ​​कि बेसल समस्या में यूलर के शोध का विस्तार करने और रीमैन ज़ेटा फ़ंक्शन जैसे महत्वपूर्ण गणितीय कार्यों की ओर ले जाने में मदद की।
अब केक पर आइसिंग के लिए, जिस चीज का आप इंतजार कर रहे हैं, वह बड़ी चीज है। एक बार फिर से हम श्रृंखला C = 1 + 2 + 3 + 4 + 5 + 6 … को शुरू करते हैं, और आप यह अनुमान लगाने में सक्षम हो सकते हैं, हम B से C को घटाते जा रहे हैं।
B-C = (1–2 + 3–4 + 5–6 1) – (1 + 2 + 3 + 4 + 5 + 6 1)
क्योंकि गणित अभी भी भयानक है, हम यहां कुछ नंबरों के क्रम को फिर से व्यवस्थित करने जा रहे हैं, इसलिए हमें कुछ ऐसा मिलता है जो परिचित दिखता है, लेकिन शायद आप जिस पर संदेह कर रहे हैं वह न हो।
B-C = (1-2 + 3-4 + 5-6 1-2) -1-2-3-4-5-6 =
B-C = (1-1) + (-2-2) + (3-3) + (-4-4) + (5-5) + (-6-6)…
B-C = 0-4 + 0-8 + 0-12 +
B-C = -4-8-12-
नहीं क्या आप सही उम्मीद कर रहे थे? अच्छी तरह से अपने मोज़े पर पकड़, क्योंकि मैं अपनी आस्तीन ऊपर एक आखिरी चाल है कि यह सब इसके लायक बनाने जा रहा है।यदि आप ध्यान दें, दाईं ओर की सभी शर्तें -4 के गुणक हैं, तो हम उस स्थिर कारक को बाहर निकाल सकते हैं, और लो n ‘निहारना, हमें वही मिलता है जो हमने शुरू किया था।
B-C = -4 (1 + 2 + 3) …
B-C = -4 C
B = -3 C
और चूंकि हमारे पास B = 1/4 के लिए एक मान है, हम बस उस मूल्य को डालते हैं और हम अपना जादुई परिणाम प्राप्त करते हैं:
1/4 = -3 सC
1 / -12 = C या C = -1/12
अब, यह महत्वपूर्ण क्यों है। शुरुआत के लिए अच्छी तरह से, यह स्ट्रिंग सिद्धांत में प्रयोग किया जाता है। दुर्भाग्य से स्टीफन हॉकिंग संस्करण नहीं है, लेकिन वास्तव में स्ट्रिंग सिद्धांत के मूल संस्करण में (जिसे बोसोनिक स्ट्रिंग थ्योरी कहा जाता है)। अब दुर्भाग्य से बोसोनिक स्ट्रिंग सिद्धांत को ब्याज के वर्तमान क्षेत्र द्वारा कुछ हद तक खत्म कर दिया गया है, जिसे सुपरसिमेट्रिक स्ट्रिंग सिद्धांत कहा जाता है, लेकिन मूल सिद्धांत का अभी भी सुपरस्ट्रिंग्स को समझने में इसका उपयोग होता है, जो कि उपरोक्त अद्यतन सिद्धांत के अभिन्न अंग हैं।
रामानुजन योग  का सामान्य भौतिकी के क्षेत्र में भी बड़ा प्रभाव पड़ा है, विशेष रूप से इस घटना के समाधान को कासिमिर प्रभाव के रूप में जाना जाता है। हेंड्रिक कैसिमिर ने भविष्यवाणी की कि एक निर्वात में रखी गई दो अपरिवर्तित प्रवाहकीय प्लेटें, क्वांटम उतार-चढ़ाव द्वारा आभासी कणों की ब्रेड की उपस्थिति के कारण इन प्लेटों के बीच एक आकर्षक बल मौजूद है। कासिमिर के समाधान में, वह बहुत ही राशि का उपयोग करता है जिसे हमने प्लेटों के बीच ऊर्जा की मात्रा को साबित करने के लिए सिद्ध किया है। और यही कारण है कि यह मूल्य इतना महत्वपूर्ण है।
तो आपके पास यह है, रामानुजन योग , जो कि 1900 की शुरुआत में खोजा गया था, जो अभी भी भौतिकी की कई विभिन्‍न शाखाओं में लगभग 100 वर्षों से प्रभाव डाल रहा है, और अभी भी ऐसे लोगों के खिलाफ दांव जीत सकता है, जो समझदार नहीं हैं।

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