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South African first woman to get PhD in Mathematics

South African first woman to get PhD in Mathematics

1.गणित में पीएचडी प्राप्त करने वाली पहली महिला दक्षिण अफ्रीकी(South African first woman to get PhD in Mathematics)- 

इस आर्टिकल में बताया गया है कि दक्षिण अफ्रीका की महिला डेनी माथेबुला ,अफ्रीका की प्रथम पीएचडी करने वाली महिला बनी। अफ्रीका एक महाद्वीप है और उसमें लगभग 50 या 50 से अधिक देश होंगे ,लेकिन अफ़्रीका जिसमें लगभग विश्व की 20% आबादी निवास करती है का विश्व में विज्ञान, तकनीकी ,इंजीनियरिंग और गणित में कोई विशिष्ट योगदान नहीं है ,बल्कि यह कहे कि ना के बराबर है तो अतिश्योक्ति नहीं होगी ।आज विश्व में वही देश विकसित तथा अग्रणी है जिसका स्टेम के क्षेत्र में दबदबा है। स्टेम में यूरोप, अमेरिका तथा एशिया के कुछ देशों का ही दबदबा है और वे विकसित देशों की श्रेणी में है ।
अफ्रीका देश की महिला डेनी माथेबुला प्रथम महिला पीएचडी करने वाली है ।इसी से अनुमान लगाया जा सकता है कि अफ्रीका देश की स्थिति कैसी है ?ऐसी बात नहीं है कि अफ्रीकी देशों में प्रतिभाओं की कमी है। अफ्रीका देश में जो प्रतिभाशाली पुरुष व महिला हैं उनकी प्रतिभा सुप्त ही रह जाती है ,उसको निखारने व जागृत करने की आवश्यकता है। अफ्रीका में अशिक्षा ,गरीबी ,बीमारी ,रोजगार ,अशुद्ध पेयजल जैसी बहुत सी समस्याएं हैं लेकिन इनमें सबसे मूलभूत कारण है अशिक्षा।अशिक्षा के कारण ही अन्य समस्याएं व्याप्त हैं।
अब डेनी माथेबुला पीएचडी करने पर ही विश्व की सुर्खियों में आ गई है ।अभी अफ्रीका महाद्वीप के देशों को आगे बढ़ने के लिए स्टेम अर्थात् साइंस ,टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग, मैथमेटिक्स को बढ़ावा देना होगा। इनमें भी मैथमेटिक्स की सबसे अधिक भूमिका है ।मैथमेटिक्स का हर क्षेत्र में ,हर विषय में योगदान है ।मैथमेटिक्स को सभी विषयों की रानी इसीलिए कहा जाता है।
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गणित के प्रति बच्चों में रुचि पैदा करने के लिए उन्हें प्राथमिक कक्षाओं से ही संख्या सिद्धांत पढ़ाने के साथ-साथ विशेष ध्यान देने और उनकी गणितीय प्रतिभा को पहचान कर तराशने की जरूरत है ।गणित के विद्यार्थियों को महान गणितज्ञों की जीवनी से परिचित कराने की जरूरत है तथा उन्हें गणित में जागरूक करने की आवश्यकता है ।अफ्रीका या विश्व के महान गणितज्ञों के रूप में एक दिन राष्ट्रीय दिवस के रूप में घोषित किया जा सकता है ।यदि बच्चे गणित में अच्छा कर सकते हैं तो वह हर क्षेत्र में अच्छा कर सकते हैं ।इसलिए गणित में सुधार पर बल दिया जाना चाहिए । गणित ,साइंस ,तकनीकी, इंजीनियरिंग का महत्त्वपूर्ण टूल है ।भौतिकी, रसायन विज्ञान ,खगोल विज्ञान आदि गणित के बिना नहीं समझे जा सकते हैं ।ऐतिहासिक रूप से देखा जाए तो वास्तव में गणित की अनेक शाखाओं का विकास ही इसीलिए किया गया है कि व्यावहारिक जीवन में गणित का प्रयोग किया जा सके ।हम दैनिक जीवन में गणित को कदम कदम पर इस्तेमाल करते हैं। जब समय जानना हो या फिर फुटबॉल, टेनिस ,क्रिकेट खेलते समय स्कोर जानना हो तो हर जगह गणित की जरूरत है।
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डेनी माथेबोला ने पहले बीएससी करने के लिए कंप्यूटर साइंस तथा गणित का चुनाव किया परंतु वह असफल रही।असफलता से उन्होंने हार नहीं मानी और उन्होंने पुनः सांख्यिकी तथा गणित विषय का चुनाव किया जिसके बल पर उन्होंने बीएससी की डिग्री हासिल की। उन्होंने कठिन संघर्ष और अपने दम पर बाद में गणित से पीएचडी की, इसलिए उनकी जितनी प्रशंसा की जाए कम है, इससे अफ्रीकी महिलाओं को प्रेरणा मिलेगी।

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2.गणित में पीएचडी प्राप्त करने वाली पहली महिला दक्षिण अफ्रीकी(South African first woman to get PhD in Mathematics)- 

वेंडा विश्वविद्यालय में गणित में पीएचडी प्राप्त करने वाली पहली महिला दक्षिण अफ्रीकी से मिलें.डेन्नी माथेबुला हाल ही में वेन्डा विश्वविद्यालय में गणित में पीएचडी प्राप्त करने वाली पहली महिला दक्षिण अफ्रीकी बनीं।

2018-10-23

Dephney Mathebula,South African first woman to get PhD in Mathematics
Dephney Mathebula,South African first woman to get PhD in Mathematics

जीवन शैली में
डेन्नी माथेबुला हाल ही में वेन्डा विश्वविद्यालय में गणित में पीएचडी प्राप्त करने वाली पहली महिला दक्षिण अफ्रीकी बनीं।दक्षिण अफ्रीका के लिम्पोपो प्रांत के दर्शनीय वेम्बे जिले में थोहोयंडौ में स्थित वेंदा (यूनिवेन) विश्वविद्यालय ने हाल ही में बताया कि डेफनी माथेबुला ने इस वर्ष सितंबर में स्नातक और डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त कर इतिहास रचा था।माथेबुला 2014 से यूनिवेन में गणित व्याख्याता रही हैं।

3.माथेबुला के बारे में(About the Mathebula:):

माथेबुला का जन्म गियानी में हुआ था। ग्रेड 12 में असफल होने और दोहराने के बाद, वह 2002 में वेंडा विश्वविद्यालय में कंप्यूटर विज्ञान और गणित में बीएससी की डिग्री के लिए दाखिला लिया।
विश्वविद्यालय की रिपोर्ट है कि उसने बाद में अपनी डिग्री बदल दी और इसके बजाय गणित और सांख्यिकी में बीएससी की डिग्री के लिए दाखिला लिया।
“3 साल की डिग्री पूरी करने में उसे 5 साल से ज्यादा का समय लगा। लेकिन, सुश्री माथेबुला ने कभी भी उन्हें यह बताने की अनुमति नहीं दी कि, “विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट बताती है।
वह 2009 में गणित में बीएससी ऑनर्स की डिग्री पूरी करने के लिए चली गई। और निश्चित रूप से, यह वहाँ नहीं रुका:

4.माथेबुला ने कहा(Mathebula said):

“जबकि मैं अभी भी सम्मान कर रहा था, मुझे केप टाउन में एक कार्यशाला में भाग लेने का मौका मिला, जो कि अफ्रीकन इंस्टीट्यूट ऑफ मैथमेटिकल साइंसेज (AIMS) में है, जहां वास्तविक जीवन में गणित (बायोमाटमैटिक्स) के आवेदन पेश किए गए थे।
“कार्यशाला के बाद, मुझे नेशनल रिसर्च फ़ाउंडेशन (NRF) द्वारा 2009 में स्टेलनबॉश यूनिवर्सिटी में बायोमैटैमेटिक्स में अपनी दूसरी ऑनर्स की डिग्री हासिल करने के लिए बर्सरी से सम्मानित किया गया, जिसमें मैंने 2010 में स्नातक किया था।”
उनके शोध के हितों में मलेरिया, शिस्टोसोमियासिस और इन्फ्लूएंजा जैसे संक्रामक रोगों के गणितीय मॉडलिंग शामिल हैं।
उसने गणितीय बायोसाइंसेज जर्नल में एक पेपर भी प्रकाशित किया था, जिसे 2014 में पूरे विश्व में 25 हॉटेस्ट लेखों के तहत तीसरे नंबर पर रखा गया था।
“मैं अपने विशेष प्रचारकों, प्रो विंसन गिरा और डॉ। सिमिसो ​​मोयो के मार्गदर्शन और समर्थन के लिए अपनी विशेष प्रशंसा और धन्यवाद व्यक्त करना चाहूंगा। मेरे माता-पिता के लिए एक बड़ा धन्यवाद; श्री डैनियल माथेबुला और श्रीमती डायना मथेबुला ने मुझे प्रशिक्षण देने के लिए और मेरी शिक्षा के लिए और पिछले समय और अब में उनके सभी वित्तीय सहायता के लिए अनुकूल वातावरण बनाने के लिए। सर्वशक्तिमान ईश्वर उनकी कल्पना से परे उन्हें आशीर्वाद दे। ”
वेन्डा विश्वविद्यालय से गणित में डॉक्टरेट के साथ स्नातक करने के लिए बहुत मुट्ठी काली महिला … बहुत पहले …

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