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Mathematics Students be Humble

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1.गणित के छात्र-छात्राएं विनम्र बने (Mathematics Students be Humble),विनम्रता गणित में सफल छात्र-छात्राओं का गुण (Politeness Personal Quality of Successful Students in Mathematics):

  • गणित के छात्र-छात्राएं विनम्र बने (Mathematics Students be Humble) क्योंकि गणित में सफलता अर्जित करने के लिए यह आवश्यक है।यों गणित में सफल छात्रों में अनेक गुणों की आवश्यकता है जैसे एकाग्रता,मनन-चिंतन,सकारात्मक दृष्टिकोण,विवेकशील,आत्म-विश्वास,प्रश्नचित्त,उत्साही,कठिन परिश्रमी,अध्ययन के प्रति रुचि,लगन,जिज्ञासा,सहनशक्ति,स्थिर बुद्धि,जागरुक,सचेत,आत्मसंयमी,उदार,विश्वसनीय,साहसी,अविचलित,आशावादी,विनम्र,सफलता की ओर अग्रसर,विषय में गहन रुचि,इंद्रिय संयम इत्यादि।परंतु किसी एक आर्टिकल में इन सभी गुणों का वर्णन करना संभव नहीं है।
  • छात्र-छात्राएं इन गुणों को समझ कर अपने आपमें धारण करने की कोशिश कर सकता है।अध्यापक भी इन गुणों की पहचान कर छात्र-छात्राओं को व्यक्तिगत परामर्श द्वारा उनके समायोजन में सहयोग कर सकता है।नीति में कहा गया है कि
  • “विद्या ददाति विनयं विनयाद्याति पात्रताम्।
    पात्रत्वाद्धनमाप्नोति धनाद्धर्मं ततः सुखम्”।। (हितोपदेश)
  • अर्थात् विद्या से विनय की प्राप्ति होती है,विनय से पात्रता (योग्यता) प्राप्त होती है।पात्रता से धन मिलता है,धन से धर्म और धर्म से सुख की प्राप्ति होती है।जो छात्र-छात्राएं गणित तथा अन्य विषयों का ज्ञान प्राप्त करके विनम्र होता है वही योग्य (Educated) होता है अन्यथा वह डिग्रीधारी (Qualified) ही कहलाएगा।योग्यता प्राप्त होने पर ही उसका जीवन सुख शांति से गुजर सकता है अन्यथा उसका जीवन परेशानियों,कष्टों और दुःखों से घिरा रहता है।
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2.विद्यार्थी विनम्रता धारण करें (Students Should be Polit):

  • यदि गणित के विद्यार्थियों को सच्चे अर्थों में गणित का ज्ञान प्राप्त करना है तो उन्हें विनम्रता धारण करना चाहिए।विनम्रता सब गुणों का मूल आधार है।जो विद्यार्थी विनम्र होता है उसमें अहंकार तथा अन्य अवगुणों का दोष नहीं आ पाता है।विनम्र विद्यार्थी की सहायता करने के लिए उसके मित्र,सहपाठी तथा शिक्षक तत्पर रहते हैं।जबकि अहंकारी विद्यार्थी की प्रगति रूक जाती है।उसको सहयोग करने के लिए कोई तैयार नहीं होता है।विनम्रता और अहंकार एक साथ नहीं टिक सकते हैं।जो विनम्र होता है वह अहंकारी नहीं होता है तथा जो अहंकारी होता है वह विनम्र नहीं हो सकता है।
  • अहंकारी और घमण्डी छात्र-छात्राओं को गणित की समस्याओं को बताने के लिए कोई तैयार नहीं होता। बल्कि ऐसे छात्र-छात्रा की अन्य छात्र-छात्राएं उपेक्षा करते हैं।ऐसे छात्र-छात्रा के बारे में टीका-टिप्पणी भी सुनने को मिलती है।यथा अरे उसके पास जाना ही बेकार है वह तो अपने आपको बहुत अहंकारी और घमंडी समझता है।अपने सामने किसी को कुछ समझता ही नहीं है।इससे अहंकारी विद्यार्थी को क्रोध आता है।वह बौखलाएगा और अन्य अनेक गलतियां करेगा।इस प्रकार उसमें अन्य दोष प्रवेश करते जाते हैं।
  • अतः गणित अथवा अन्य विषयों का ज्ञान ग्रहण करना है तो विनम्र बनिए।महाकवि कालिदास ने कहा है कि फल आने पर वृक्ष झुक जाते हैं,वर्षा के समय बादल झुक जाते हैं।इसी प्रकार विद्या ग्रहण करके छात्र-छात्राएं विनम्र हो जाते हैं।विनम्र विद्यार्थी को अधिक अंक प्राप्त होते हैं तथा सफलता प्राप्त करने पर वह घमण्ड नहीं करता है। सफलता प्राप्त करके दूसरों का अपमान नहीं करता है।बल्कि ज्यों-ज्यों उसको सफलता प्राप्त होती जाती है वह ओर अधिक विनम्र होता है।
  • जिन विद्यार्थियों में विनम्रता नहीं आती है वे विद्या का सदुपयोग नहीं कर सकते हैं।जितने भी महापुरुष भगवान बुद्ध,महावीर स्वामी,ईसा मसीह,महात्मा गांधी इत्यादि शुरू में साधारण मनुष्य ही थे परंतु विनम्रता और अन्य सद्गुणों को धारण करके महान बन गए।

3.विनम्रता श्रेष्ठ गुण है (Humility is the Best Quality):

  • विनम्रता छात्र-छात्राओं और व्यक्ति का आभूषण है। गणित जैसे जटिल विषय में ऊपर चढ़ने और विकास करने के लिए तो विनम्रता धारण करना बहुत आवश्यक है।विनम्रता से ही विद्यार्थी गणित के सवालों और समस्याओं को हल कर सकता है। गणित में कदम-कदम पर सहयोग और सहायता की जरूरत होती है।छात्र-छात्राएं अन्य छात्र-छात्राओं का सहयोग व सहायता तभी प्राप्त कर सकते हैं जबकि वे विनम्र होंगे।विद्यार्थियों के आचरण में विनम्रता होती है तो दूसरे छात्र-छात्राओं,शिक्षकों से पूछने में कोई कष्ट नहीं होता है।
  • परंतु अहंकारी छात्र-छात्राएं दूसरे छात्र-छात्राओं व शिक्षकों से पूछने,सहायता व सहयोग पाने में अपना अपमान समझता है।क्योंकि दूसरों से सहयोग व सहायता प्राप्त करने के लिए छोटा बनना पड़ता है।छोटा बनने का अर्थ यह है कि विनम्रता धारण करना।छात्र-छात्राओं को दूसरों का सहयोग व सहायता पाने के लिए अपने स्वभाव में विनम्रता लानी चाहिए।छात्र-छात्राएं विनम्रता से न केवल सहायता व सहयोग प्राप्त कर सकते हैं बल्कि उन्हें विद्यालय व समाज में सम्मान और प्रतिष्ठा भी मिलती है।विनम्रता ऐसा गुण है जो छात्र जीवन के अलावा भी आपको जॉब करने में और जीवन में सब जगह दूसरों का प्यार और स्नेह प्राप्त करने में मदद करता है।
  • जबकि विनम्रता न रखने अर्थात् अहंकारी होने से सर्वनाश होता है।दुर्योधन,रावण अहंकारी थे इसलिए उन्होंने अपने कुल का नाश कराया। आधुनिक युग में भी हिटलर जैसे अहंकारी व्यक्ति के कारण विश्व युद्ध हुआ और लाखों लोग मारे गए। विनम्रता ऐसा गुण है जिसके कारण विद्यार्थी सर्वत्र आदर और प्रशंसा प्राप्त करता है।चरित्र में जितना अहंकार कम होता जाता है उतनी विनम्रता आती जाती है।

4.विनम्रता का दृष्टांत (Parable of Humility):

  • यदि छात्र-छात्राओं में विनम्रता का गुण न हो तो यह अन्य गुणों को बेकार और प्रभावहीन कर देता है। विनम्रता का न होना अहंकार का होना होता है,घमण्ड का द्योतक होता है।छात्र-छात्राओं के व्यक्तित्व को अहंकार पलीता लगा देता है। वास्तविक रूप में विद्यार्थी को बुद्धिमान,प्रतिभावान तभी कहा जा सकता है जब वे विनम्र और मधुरभाषी हों।विद्यार्थी को शिक्षक की फीस चुकाने पर भी शिक्षक के प्रति कृतज्ञ रहना चाहिए क्योंकि विद्यादान अमूल्य है और उसका मूल्य नहीं चुकाया जा सकता है।
  • भवन में दो तरह के पत्थर लगे हुए होते हैं।एक तो नींव में तथा दूसरे भवन की दीवारों में।भवन की दीवारों में लगे हुए पत्थर की चमक-दमक तो दुनिया देखती है और उसकी प्रशंसा भी करती है परंतु नींव में लगे पत्थर को कोई नहीं देखता है।भवन के पत्थर की चमक-दमक,नींव के पत्थर पर ही टिकी रहती है।
  • गणित शिक्षक ज्ञानदेव छात्र-छात्राओं को गणित विषय बहुत सरल भाषा में समझाते थे।छात्र-छात्राएं एकाग्रचित्त होकर उनसे गणित के सवाल समझते थे और हल करते थे।परंतु उनमें एक छात्र बहुत उद्दण्ड था,वह शिक्षक को बहुत बुरा-भला कहता था।एक दिन उसने हद पार कर दी।अन्य छात्र-छात्राओं ने उसको समझाने का प्रयास किया परंतु वह नहीं माना।अन्य छात्र-छात्राएं कहने लगे गुरुजी यह कितना उद्दंड है,निरर्थक ही आपको गालियां बक रहा है परंतु ज्ञानदेव बिल्कुल भी क्रोधित नहीं हुए।
  • उन्होंने कहा कि यह मेरी परीक्षा ले रहा है कि गुरुजी में नम्रता,सरलता और धैर्य कितना है? कोई भी व्यक्ति दुकान से पुस्तकें खरीद है तो उसको भली प्रकार जाँचता है।पुस्तक के पृष्ठ फटे हुए तो नहीं हैं। पुस्तक के पृष्ठ तो गायब नहीं है।पुस्तक की विषय सामग्री अच्छी है या नहीं।एक छोटी सी पुस्तक को खरीदने पर इतनी जांच परख करते हैं तो जिसे गुरु मानना है उससे दस-बीस गालियां दिए बिना कैसे पहचान करेगा? इसलिए यह छात्र निरर्थक ही मुझे गालियां और अपशब्द नहीं बोल रहा है।गुरु या शिक्षक की गुरुता तभी स्वीकार की जाती है जब उसमें विनम्रता,विवेक,बुद्धि,सरलता इत्यादि सदाचरण की सभी बातें मौजूद हों।
  • गणित शिक्षक ज्ञानदेव की विनम्रता तथा सरलता देखकर वह छात्र उनके चरणों में गिर गया और क्षमा याचना करने लगा।
  • उपर्युक्त आर्टिकल में गणित के छात्र-छात्राएं विनम्र बने (Mathematics Students be Humble),विनम्रता गणित में सफल छात्र-छात्राओं का गुण (Politeness Personal Quality of Successful Students in Mathematics) के बारे में बताया गया है।

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5.गणित और दर्पण (हास्य-व्यंग्य) (Mathematics and Mirror) (Humour-Satire):

  • छात्र (माँ से):आज सुबह न जाने किसका मुंह देखकर उठा था कि गणित का एक भी सवाल हल नहीं हुआ।दिमाग खराब हो गया।
  • मां (छात्र से):मेरी मानो तो शयनकक्ष में लगे दर्पण को हटा दो वरना रोजाना यही शिकायत रहेगी।

6.गणित के छात्र-छात्राएं विनम्र बने (Mathematics Students be Humble),विनम्रता गणित में सफल छात्र-छात्राओं का गुण (Politeness Personal Quality of Successful Students in Mathematics) से संबंधित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नः

प्रश्न:1.क्या दुर्जन व्यक्ति विद्या ग्रहण नहीं कर सकता है? (Can a Person Who is Not Disabled?):

उत्तरःदुर्जन व्यक्ति विद्या पाकर अहंकारी हो जाता है।वह विद्या का प्रयोग विवाद करने,दूसरों को नीचा दिखाने तथा अपने अहंकार का प्रदर्शन करने के लिए करता है।दुर्जनों के हाथ में पढ़कर अच्छी चीज भी बुरी बन जाती है।असली विद्वान वही है जो विद्या पाकर व्यर्थ के वाद-विवाद में नहीं पड़ता है बल्कि विनम्रता धारण करता है।

प्रश्न:2.विद्यार्थी विद्या से विनय कैसे सीख सकता है? (How Can a Student Learn Humility from Vidya?):

उत्तर:विद्या को आचरण में उतारने पर ही विद्यार्थी विनयावनत  होता है।विनम्र होने पर विद्यार्थी में पात्रता (योग्यता) आती है।इस पात्रता का उपयोग विद्यार्थी जाॅब प्राप्त करने और अपने जीवन को सुख-शांति से गुजारने में कर सकता है।अगर विद्या प्राप्त करके विद्यार्थी घमंडी और अहंकारी हो जाए तो वह विद्या का दुरुपयोग करने लगता है।व न तो खुद सुख-शांति से रहता है और न दूसरों को सुख-शांति से रहने देता है।

प्रश्न:3.विद्या प्राप्त करने का पात्र कौन होता है? (Who is Eligible to Receive Education?):

उत्तर:विद्या ऐसे विद्यार्थी को देनी चाहिए जो सुपात्र हो।विद्या देने का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होता है जब विद्या प्राप्त करने वाला विद्या का सदुपयोग करता है,दुरुपयोग नहीं करता है।कुपात्र को विद्या देने से उसका दुरुपयोग होता है।सुपात्र से तात्पर्य है कि जिस विद्यार्थी का हृदय निष्कपट हो,पवित्र हो जो ब्रह्मचर्य का पालन करता हो, जो आलसी न हो,कर्मठ हो। परन्तु वस्तुतः आधुनिक युग में विद्या का स्वरूप ही बदल गया है।अब विद्या जाॅब प्राप्त करने का साधन बन गई है।इसलिए अब पात्र व कुपात्र का विचार ही नहीं किया जाता है।अब न पहले जैसी विद्या हैं न शिक्षक हैं और न छात्र हैं।

  • उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर द्वारा गणित के छात्र-छात्राएं विनम्र बने (Mathematics Students be Humble),विनम्रता गणित में सफल छात्र-छात्राओं का गुण (Politeness Personal Quality of Successful Students in Mathematics) के बारे में ओर अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

Mathematics Students be Humble

गणित के छात्र-छात्राएं विनम्र बने
(Mathematics Students be Humble)

Mathematics Students be Humble

गणित के छात्र-छात्राएं विनम्र बने (Mathematics Students be Humble)
क्योंकि गणित में सफलता अर्जित करने के लिए यह आवश्यक है।यों गणित में
सफल छात्रों में अनेक गुणों की आवश्यकता है जैसे एकाग्रता,मनन-चिंतन,सकारात्मक

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