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Monday, 4 November 2019

What is General Mental Ability And Reasoning Tests

What is General Mental Ability And Reasoning Tests

1.सामान्य बौद्धिक योग्यता तथा तार्किक परीक्षा क्या है? (What is General Mental Ability And Reasoning Tests) -

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What is General Mental Ability And Reasoning Tests
What is General Mental Ability And Reasoning Tests 
जब बालक जन्म लेता है तब उसमें विशिष्ट क्रियाकलाप होते हैं। ये प्रकृति की देन है। प्रत्येक बालक में यह विशिष्ट गुण अलग-अलग होते हैं। जब ये बड़ हो होते हैं तब उनमें वस्तुओं के सम्बन्ध में समझने की शक्ति अलग-अलग होती हैं । वे उन वस्तुओं के सम्बन्ध में अनेक भिन्न-भिन्न प्रकार के प्रश्न करते हैं। उनमें तर्क-शक्ति का समावेश होता जाता है। इन तर्क शक्तियों के आधार पर वे और योग्यता हासिल करते जाते हैं। उनकी योग्यता की परीक्षा लेने के लिए उनके सम्मुख कुछ समस्याएँ तथा प्रश्न रखे जाते हैं। उनका तर्क के आधार पर कितनी शीघ्रता से शुद्ध व सही हल शीघ्रता से दे सकते हैं। यही उनकी बौद्धिक योग्यता का मापदण्ड है। जिस बालक में तर्क-शक्ति का विकास तेजी से होता है वह कम विकास के बालक की अपेक्षा प्रश्नों व समस्याओं का समाधान शीघ्रता से कर लेता है।
जब किसी योग्य उम्मीदवार का चयन करना होता है तब इसी तर्क परीक्षा तथा बुद्धि परीक्षा के आधार पर चयन करते हैं।
उच्च पदों पर आसीन व्यक्तियों में तार्किक शक्ति तथा बौद्धिक शक्ति अधिक होती है। क्योंकि वे अपनी बुद्धिमता तथा तर्क-शक्ति से सबको सन्तुष्ट करते हैं ।जिन व्यक्तियों में तर्क-शक्ति कम होती है, वे असफल रहते हैं। जब शिक्षक अपने विद्यार्थी को उच्च पद के अनुरूप योग्य बनाना चाहता है, तब स्वयं शिक्षक में भी तर्क-शक्ति का अतुल भण्डार होना चाहिए क्योंकि विद्यार्थी के मन में भी कुछ ऐसे प्रश्न उठते हैं उनका समाधान त्वरित गति से विद्यार्थी को मिलना चाहिए। बुद्धि परीक्षा के प्रश्नों के उत्तर स्पष्ट तथा सारगर्भित होने चाहिए जिससे प्रश्नकर्त्ता सन्तुष्ट हो सके, टालने वाले उत्तर नहीं होने चाहिए क्योंकि ऐसे उत्तरों में बुद्धि का ह्रास होता है। आजकल सभी चयन परीक्षाओं में कुछ ऐसे प्रश्न दिए जाते हैं कि उनका हल तर्क के आधार पर ही होता है। इनके उत्तर देने की एक समय-सीमा होती है ।समय-सीमा के अन्दर अपनी बुद्धि की क्षमता के आधार पर सही व उचित उत्तर देकर वे अपनी योग्यता का परिचय देते हैं  आजकल कोचिंगों में भी विद्यार्थियों को तर्क-शक्ति के प्रश्नों का अभ्यास ही ज्यादा कराया है।
जिस व्यक्ति में तर्क-शक्ति अधिक होती है। वह व्यक्ति अति बुद्धिमान समझा जाता है ।इसलिए जब बालक छोटा होता है, तब वह अपनी जिज्ञासा से किसी वस्तु को देखकर बहुत से प्रश्न करता है, तब वह अपनी जिज्ञासा से किसी वस्तु को देखकर बहुत से प्रश्न करता है, तब उसके प्रश्नों का उत्तर शीघ्रता से सूक्ष्म रूप में देना चाहिए उनको वह शीघ्रता से ग्रहण कर लेता है। इस प्रकार उसकी तर्क-शक्ति का विकास होता जाता है। उसके ज्ञान का भण्डार बढ़ता जाता है। आगे चलकर वह उत्तम व योग्य बनता है ।

2.तर्क-शक्ति तथा उसकी योग्यता की परख(Reasoning power and its ability tested)-

What is General Mental Ability And Reasoning Tests
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किसी व्यक्ति में तर्क-शक्ति की परीक्षा निम्न प्रकार से ली जा सकती है-
(a) भाषा तथा शब्दों से
(b) अशाब्दिक या अभाषिक परीक्षा से।
(a) भाषा तथा शब्दों से -
इस प्रकार की परीक्षा में प्रश्न शब्दों तथा भाषा के रूप में दिये जाते हैं। इस प्रकार की परीक्षा में तार्किक आकृतियों के आधार पर, कोडिंग तथा डीकोडिंग के आधार पर, श्रेणीक्रम परीक्षा, वर्गीकरण परीक्षा के आधार पर तर्क-युक्त प्रश्न दिए जाते हैं।
(b) अशाब्दिक या अभाषिक परीक्षा से - इस प्रकार की परीक्षा में प्रश्न अंकों चित्रों के रूप में होते हैं । रेखाओं के आधार पर चित्र बनाकर परीक्षा ली जाती है ।
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    3.लाभ(Benefit) -

    1.तर्क-शक्ति तथा बौद्धिक परीक्षाओं के लिए एकाग्रता तथा चिंतन शक्ति का होना आवश्यक है
    2.इस प्रकार की परीक्षाओं में कुछ प्रकार बड़े हो सकते हैं लेकिन उनके उत्तर अपनी तर्क-शक्ति से सूक्ष्म होते हैं।
    3.इस प्रकार की परीक्षाओं से योग्य व्यक्ति का चयन होता है। उसके सोचने व समझने की क्षमता उत्तम है ।
    4.प्रश्नों के उत्तर देने के लिए दिशा निर्देश दिए जाते हैं, उनको शीघ्र समझकर उत्तर देना होता है।
    5.सीमित समय में प्रश्नों के उत्तर देने होते हैं। इसलिए समय को ध्यान में रखकर प्रश्नों के उत्तर देने चाहिए।
    6.तर्क के आधार पर प्रश्न हल करने की एक कला है। यह परमात्मा की देन है, इसको आगे विकसित करनी चाहिए।

    4.शाब्दिक (भाषिक) तार्किक परीक्षा(VERBAL REASONING TEST) -

    ऐसे सम्बन्ध जो समान, तुल्य तथा समान्तर होते हैं,  उनको सम-सम्बन्ध (ANALOGY ) कहते हैं। अंकों, वस्तुओं, उम्मीदवारों आदि के बीच तुल्य तथा समान्तर सम्बन्ध ज्ञात करते हैं ।वस्तुओं के समानुपात को a:b::c:d के रूप से प्रगट करते हैं । चिन्ह : अनुपात तथा चिन्ह :: समानुपात को निरूपित करता है। जैसे - 2:4::3:6 क्योंकि जो अनुपात 2:4या 1:2 है। वही अनुपात 3:6 या 1:2 है। इस प्रकार चार वस्तुओं में से जब तीन वस्तुएँ ज्ञात होती है तो चौथी वस्तु को तुरन्त ज्ञात करना होता है।
    जैसे - समानुपात पैन:काॅपी ::मरीज :
    (A)दवा (B) स्याही (C) कागज (D) रिफिल
    (A) दवा क्योंकि मरीज का सम्बन्ध दवा से होता है ।

    5.हल के संकेत(Solution signs) :

    इस प्रकार के प्रकार के प्रश्नों को हल करने के लिए निम्न बातों का ध्यान रखते हैं -
    1.जो सम्बन्ध चिन्ह :: के बायीं ओर होता है। उसी प्रकार का सम्बन्ध दायीं ओर होता है।
    2.प्रत्येक का सम्बन्ध चिन्ह :: के दायीं ओर के चिन्ह के समान ही होना चाहिए।
    3.प्रश्न में शब्दों के क्रम के ऊपर विशेष ध्यान चाहिए जो सम्बन्ध चिन्ह :: के दायीं ओर की वस्तुओं के बीच होता है तथा सम्बन्ध दायीं ओर की वस्तुओं में भी विशेष सम्बन्ध होना चाहिए।
    जैसे - लिखना :पढ़ना ::
    (A) दाल:रोटी (B) गाय:भैंस (C) शक्कर :मिठाई (D) पानी:दूध
    उत्तर - (C) सही है । 

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