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How to Acquire Virtues of Nobility? 4 Best Techniques for Growing Up

1.बड़प्पन का गुण कैसे प्राप्त करें? बड़े होने की 4 श्रेष्ठ तकनीक (How to Acquire Virtues of Nobility? 4 Best Techniques for Growing Up):

  • बड़प्पन का गुण कैसे प्राप्त करें? (How to Acquire Virtues of Nobility?),क्योंकि मानव होने की यही सार्थकता है।आईए जानते हैं कि बड़प्पन किसे कहेंगे और किसे नहीं तथा बड़प्पन के गुण प्राप्त करने के लिए हमें क्या करना होगा?

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2.बड़प्पन दीखने और होने में फर्क (The difference between looking and being noble):

  • बड़प्पन एक मानवीय गुण है,जिसका तात्पर्य है बड़ा एवं श्रेष्ठ होना।बड़प्पन अर्थात मानवीय गुणों के शिखर पर आरूढ़ होना।बड़ा होना सामान्य बात नहीं है।यह एक असाधारण बात है;क्योंकि इसके होने का मतलब होता है कि अपनी सभी कमियों एवं कमजोरियों को रौंदते हुए श्रेष्ठता का परिचय देना।
  • अपने नुकसान एवं हानि को सहर्ष झेलते हुए,कष्टों-कठिनाइयों को सहजता से अपनाते हुए,मान-प्रतिष्ठा को दांव पर लगाते हुए अर्थात् अपमान को भी सहते हुए,केवल दूसरों का कल्याण सोचना,दूसरों को खुशी एवं प्रसन्नता प्रदान करना।
  • बड़प्पन बड़ा दीखने में नहीं,बल्कि बड़ा होने में है।बड़प्पन पाने के लिए आजकल निरापद रास्ता ढूँढा जाता है।गरीबों में कंबल वितरित करते हुए फोटो खिंचवाने,सार्वजनिक स्थलों पर झाड़ू लेकर कैमरे के सामने रहना,दान देकर उसका प्रचार करना आदि ऐसे अनेक हथकंडे हैं,जिनके आधार पर समाज में यह दर्शाया जाता है कि वे कितने बड़े हैं।बड़प्पन का यह भोंडा प्रदर्शन करता है,जिससे कुछ विशेष होता नहीं है।
  • अपनी सांस्कृतिक मान्यता है कि प्रचार एवं आडम्बर से संचित पुण्य का भारी क्षरण होता है।इन आडंबरों से यदि कुछ पुण्य होता भी है तो इसके प्रचार करने,बखान करने पर वहीं पर क्षय हो जाता है,कुछ शेष बचता नहीं है।बड़प्पन इसमें नहीं है।
  • बड़प्पन एक छायादार एवं फलदार वृक्ष के समान है,जिसके सानिध्य में आने पर व्यक्ति को पोषण के साथ आवासजन्य शीतलता का अनुभव होता है।इससे आंतरिक खुशी होती है:देने वाले को भी और पाने वाले को भी।बड़प्पन खजूर जैसा वृक्ष नहीं है,जो केवल दीखने में बड़ा होता है,पर जिसकी कोई छाया नहीं होती है।इसलिए तो कबीर कहते हैं:”बड़ा हुआ तो क्या हुआ जैसे पेड़ खजूर,पंछी को छाया नहीं फल लागे अति दूर।”
  • बड़प्पन किसी को सुख देने में है,लाभ देने में है,किसी को दो पल मुस्कराहट बांटने में है।बड़प्पन का सार है कि दूसरों को थोड़ी-सी भी शांति प्रदान की जा सके।
    यदि संसार रूप नरककुंड में एक दिन के लिए भी किसी व्यक्ति के चित्त में थोड़ा-सा आनंद एवं शांति प्रदान की जा सके तो उतना ही जीवन सार्थक है।सत्यम कोचिंग सेंटर (Satyam Coaching Centre) का अनुभव तो यही रहा है कि आजन्म हम तो यही देखते रहे हैं,बाकी सब कुछ व्यर्थ की कल्पनाएँ हैं।यही सच्चा बड़प्पन है,जिसमें किसी के अंदर थोड़ी-सी भी खुशी पल भर के लिए भी सही रूप में डाली जा सके।
  • इससे मिलने वाला संतोष एवं सुकून ही बड़प्पन का मुख्य तत्व है,अर्थात बड़ा वह है,जो सदैव दूसरों का भला करता हो,अपनी जान की बाजी लगाकर भी दूसरों को सहयोग देता हो,बल्कि यहां तक कि वह अपने कट्टर दुश्मन तक की समय आने पर भलाई करने में जरा-सा भी संकोच न करता हो।

3.बड़प्पन के दृष्टान्त (Parables of nobility):

  • बड़े वही होते हैं,जो जनकल्याण के लिए अपना सर्वस्व वार देते हैं और इस त्याग में वे कुछ भी नहीं बचाते हैं,सब कुछ लुटा देते हैं।लुटाने वाला,त्यागने वाला समाज की दृष्टि में कितना भी छोटा क्यों ना हो,वह काल के प्रवाह में सदा बड़ा बना रहता है।
  • नगण्य-सी गिलहरी ने भगवान राम के काम में अपना सारा पुरुषार्थ लुटा दिया।उससे जितना संभव था,उससे भी कहीं अधिक बढ़-चढ़कर उसने अपनी भागीदारी दी।भगवान राम ने उसके इस बड़प्पन को हृदय से स्वीकारा,उसे देख उनकी आंखें नम हो आई,उसे अपनी गोद में बैठाकर अपने हाथों से पुचकारा।मान्यता है कि गिलहरी की पीठ पर पड़े निशान भगवान के हाथों के निशान है।
  • बड़े कार्य,श्रेष्ठ कार्य में भागीदारी,हमें बड़प्पन का दर्जा देते हैं।फिर यह नहीं देखा जाता है कि यह कौन कर रहा है।
    इसके ठीक विपरीत नीच और अधर्म के कार्य में साथ देना बड़प्पन को कमजोर करता है एवं प्रतिष्ठा पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है।अधर्म का साथ देने वाले महादानी एवं पराक्रमी कर्ण,धनुर्धर द्रोण,कृपाचार्य,अश्वत्थामा आदि को इतिहास कभी ऊंची नजरों से नहीं देखता।अनीति का साथ देने से उनकी प्रतिष्ठा को भारी ठेस पहुंची।ये महान व्यक्तित्व के धनी सचमुच में बड़े थे,पर इनके सारे बड़प्पन पर कालिख लग गई।
  • अपने देश की स्वतंत्रता के लिए युद्ध जैसे घोर कर्म से भी परहेज नहीं करने वाले भगत,आजाद,सुभाष,बिस्मिल,राजगुरु आदि को उनकी उम्र एवं कद से बहुत बड़ा माना गया।अनजान-अजनबी ये युवक देश के लिए कुर्बानी देकर इतने बड़े हो गए कि आज भी उनके चरणों में मस्तक नवाया जाता है,सलाम किया जाता है।सही मायने में ये ही बड़े हैं,इनका बड़प्पन सर्वोपरि है।
  • बड़प्पन सत्य का साथ देने में है,पीड़ा निवारण में हैं,मानवता के कल्याण में है ना कि अधर्म का साथ देने में,महत्वाकांक्षा की पूर्ति में या दुष्टता,धृष्टता करने में। बड़प्पन के साथ प्रत्येक श्रेष्ठ कर्म जुड़ा है।जो भी श्रेष्ठ कर्म को करेगा,सदाचरण करेगा,मानवता के कल्याण के लिए कार्य करेगा,वह अवश्य ही बड़प्पन का अधिकारी होगा।
  • बड़ा वह है जिसका दिल औरों के लिए धड़कता है,संवेदित होता है,जो दूसरों के सुख में सुखी एवं दुःख में द्रवित होता है।
    सामान्य रूप से औरों का सुख देखा नहीं जाता,सुख से ईर्ष्या होने लगती है और दुःख से हम प्रसन्न होते हैं या फिर उनका साथ छोड़ देते हैं।दिखावटी रूप में गणित लगाकर दुःख में साथ देना तो एक ढोंग है,व्यवसाय है।इंसानियत नहीं।
  • इंसान की इंसानियत उसके बड़े होने में है,बड़प्पन में है।नीचता,क्षुद्रता,लाभ-हानि का गुणा-भाग,धृष्टता हमें बड़ा नहीं,छोटा बनाती है।ऐसा काम करने वाले कितने ही बड़े क्यों ना हो सदैव वामन बने रहते हैं,बौने बने रहते हैं।भगवान विष्णु ने बली से छल किया था,तीन पग भूमि मांगने में और इसी कारण उन्हें वामन कहा जाता है।यह तो बली का बड़प्पन था कि वे जान-समझ कर भी अपना सर्वस्व होमने को तैयार हो गए थे।
    एकलव्य का बड़प्पन था कि द्रोणाचार्य के दुत्कारने के बावजूद उसने उनकी मिट्टी की प्रतिमा में अपनी श्रद्धा का प्राण भरा और उससे वह सब कुछ सीख लिया जिसकी काट अर्जुन जैसे महान धनुर्धारी के पास नहीं थी।उसने अंगूठा काटकर गुरु दक्षिणा में देने में जरा भी संकोच नहीं किया।बड़प्पन एकलव्य में था ना कि द्रोणाचार्य में।
  • बड़प्पन केवल वही प्राप्त कर सकता है,जो सचमुच में बड़ा होता है,आडंबर एवं प्रदर्शन नहीं करता।बड़ा होना चाहते हैं तो अपने दिल को बड़ा करना पड़ेगा,जिससे हम दूसरों के सुख-दुःख के साथ संवेदित हो सके,हमें अपने विचारों को श्रेष्ठ करना पड़ेगा,जिससे हम दुर्जनों को बदलने एवं दुश्मनों तक का सहयोग एवं सम्मान करने का साहस बटोर सकें।यही बड़प्पन की कसौटी है कि हम दूसरों की पीड़ा को कितना अपना मान कर दूर करने का प्रयास करते हैं।बड़ा बनने के लिए हमें इस कसौटी से गुजरना ही पड़ेगा,तभी बड़प्पन आ सकता है।
  • उपर्युक्त आर्टिकल में बड़प्पन का गुण कैसे प्राप्त करें? बड़े होने की 4 श्रेष्ठ तकनीक (How to Acquire Virtues of Nobility? 4 Best Techniques for Growing Up) के बारे में बताया गया है।
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4.शिक्षक का बड़प्पन (हास्य-व्यंग्य) (Teacher nobility) (Humour-Satire):

  • जगदीप:लगता है शिक्षक में बड़प्पन है,जो एक बार ट्यूशन कराने पर ही सक्सेस करा दिया है।
  • मनदीपःअरे बड़प्पन वगैरह कुछ नहीं।मैंने मस्का लगा दिया कि सर पास हो गया तो जिंदगी भर आपके नाम की माला जपूगाँ।
  • *”यह आर्टिकल **Satyam Mathematics** ब्लॉग पर **Satyam Coaching Centre** के द्वारा तैयार किया गया है।”*

5.बड़प्पन का गुण कैसे प्राप्त करें? बड़े होने की 4 श्रेष्ठ तकनीक (Frequently Asked Questions Related to How to Acquire Virtues of Nobility? 4 Best Techniques for Growing Up) से संबंधित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:

प्रश्न:1.क्या बड़प्पन उम्र से आती है? (Does nobility come from age?):

उत्तर:बड़प्पन सिर्फ उम्र में नहीं,उम्र के कारण मिले हुए ज्ञान और चतुराई से भी है।

प्रश्न:2.क्या महानता जन्म से प्राप्त होती है? (Does greatness come from birth?):

उत्तर:कुछ जन्म से ही महान होते हैं,कुछ महानता प्राप्त करते हैं और कुछ व्यक्तियों पर महानता लाद दी जाती है।

प्रश्न:3.छात्र-छात्राएं बड़प्पन के गुण कैसे धारण करें? (How do students imbibe the qualities of nobility?):

उत्तर:छात्र-छात्राएं अपनी कोर्स की पुस्तकें पढ़ने के साथ-साथ उदारता,मानवीय गुणों,सफलता में संयम आदि गुणों को भी धारण करने का प्रयास करें।

  • उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर द्वारा बड़प्पन का गुण कैसे प्राप्त करें? बड़े होने की 4 श्रेष्ठ तकनीक (How to Acquire Virtues of Nobility? 4 Best Techniques for Growing Up) के बारे में और अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
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