7 Spells to Understand Role of Women
1.आधुनिक समाज:महिलाओं की भूमिका को समझने के लिए 7 मंत्र (Modern Society:7 Spells to Understand Role of Women):

A practical example of 7 Spells to Understand Role of Women giving instructions for women’s business
- आधुनिक समाज:महिलाओं की भूमिका को समझने के लिए 7 मंत्र (Modern Society:7 Spells to Understand Role of Women) के द्वारा जानिए कि आज महिलाओं की क्या स्थिति है और यह स्थिति प्राप्त करने के लिए कितना संघर्ष करना पड़ा है।
2.आधुनिक समाज में महिलाओं की भूमिका (The Role of Women in Modern Society):
- महिलाओं के स्तर को ऊँचा उठाने के लिए संसद और विधानसभाओं में प्रतिनिधित्व बढ़ाने के लिए आरक्षण का प्रावधान करने की कोशिश की है।”Women Reservation Bill:Exam Key Facts” पूरी जानकारी के लिए पढ़ें।
- वर्तमान पुरुष प्रधान देश में महिलाएं भी किसी अर्थ में पीछे नहीं है।आज महिलाओं की भी पहुँच पुरुषों की तरह समुद्र की गहराई से लेकर आकाश की ऊंचाई तक है।अगर आत्मविश्वास एवं दृढ संकल्प साथ हो तो भारत की हर महिला पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल सकती है,पहले उसका जीवन केवल घर की चाहरदीवारी के भीतर के कार्यों तक ही सीमित रहा था,परन्तु वर्तमान में नारियों (women in present) को दोहरे-तिहरे दायित्व निभाने पड़ते हैं।अब महिलाओं को वह कार्य भी करने पड़ते हैं जो कभी केवल पुरुषों के ही होते थे।
- आधुनिक समाज में मध्य वर्ग तथा उच्च वर्ग की महिलाएं वकील अफसर,प्रधाना-ध्यापक,चिकित्सक,इंजीनियर,पत्रकार व पायलट आदि है।निम्न वर्ग में स्त्रियाँ अखबार बेचना,पान-बीड़ी बेचना,साइकिल के पंचर ठीक करना,जंगल से लकड़ियाँ काटकर लाना,कृषि कार्य में सहयोग देना आदि कार्य करती है।
कहने का तात्पर्य है कि पहले महिलाओं को यह अधिकार नहीं था कि वे बाहर निकलकर पुरुषों के समान जीविका अर्जन कर सकें।परन्तु वर्तमान में पुरुषों के साथ-साथ महिलाओं को भी उक्त अधिकार प्राप्त हैं। - जिस गति से नारी में बदलाव आया है,उस गति से पुरुष में नहीं,पुरुष की नारी पर एकछत्र शासन (Supreme rule) करने की प्रवृत्ति अभी भी समाप्त नहीं हुई है,प्रायः देखा जाता है कि कुछ समझदार पतियों ने परिवार की जरूरतों को दूरदर्शिता की दृष्टि से देखते हुए नौकरी कर रही पत्नी की सलाह भी सुनना शुरू किया है और पत्नी को बराबर का दर्जा देकर जिंदगी को सुखमय बना रहे हैं।परन्तु ऐसे पुरुषों की संख्या बहुत ही कम है।
- मानसिक विशेषज्ञों का कहना है कि महिलाएं कायर या डरपोक (Coward women) नहीं होती है,बल्कि वे तो पुरुषों से कहीं अधिक साहसी होती है,निश्चय ही कामकाजी महिलाएं (working women) परिवार की आर्थिक मदद करने वाली एक महत्त्वपूर्ण इकाई होती हैं।नौकरी आदि से उनकी तार्किक शक्ति में वृद्धि होती है,रहन-सहन के स्तर में सुधार होता है आदि।
- महिलाएं गृहकार्यों में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।वे गृहकार्य,बच्चों का पालन-पोषण,बर्तन,घर की सफाई,कपड़े धोना,सिलाई,वृद्धजन की सेवा आदि अनगिनत कार्यों को करती है,जो कि पुरुषों के कार्यों से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है।
- इतना ही नहीं,वर्तमान में तो महिलाएं बाहरी क्षेत्र में भी कार्य करती है।शिक्षा,व्यवसाय,प्रशासन आदि सम्बन्धी उत्तरदायित्व निर्वाह के साथ वे सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में भी कार्यरत हैं।वे पुलिस अफसर,वायुयान पायलट,जलपोत संचालक आदि के दायित्वों को सम्भाल रही हैं।पुलिस अफसर श्रीमती किरन बेदी के साहस की बातें हमारे समाज में प्रचलित कहानियाँ बन चुकी है।
3.महिलाओं का दखल हर क्षेत्र में (Women’s Intervention in Every Field):
- श्रीमती इंदिरा गांधी (Indira Gandhi),श्रीमती भंडारनायके,श्रीमती गोल्डामायर,श्रीमती थैचर,श्रीमती बेनजीर भुट्टो,श्रीमती चन्द्रिका कुमारतुंगे आदि नारियाँ आधुनिक नारी में आए बदलाव को डंके की चोट पर बता रही हैं।इतना ही नहीं,कई नारियाँ विश्व के सर्वोच्च शिखर एवरेस्ट पर भी हो आई हैं,जिनमें बच्छेन्द्रीपाल व संतोष यादव के नाम उल्लेखनीय हैं।
- एक सर्वेक्षण द्वारा यह पता चला है कि औसत स्त्रियाँ पुरुषों से दुगुना परिश्रम करती हैं।विश्व ऑकडे भी यह कहते हैं कि विकासशील देशों में 50% अनाज महिलाओं के परिश्रम से ही पैदा होता है।तंजानिया में श्रमिकों में 80% तो स्त्रियाँ (80% Women in Tanzania are Labours) ही हैं।तंजानिया के एक क्षेत्र में वर्ष में पुरुष औसतन 1,800 घण्टे व स्त्रियाँ 2,600 घण्टे कार्य करती है।
क्यूबा में 95% स्त्रियाँ पुरुषों के साथ खेतों व कारखानों में कार्य करती है।अफ्रीका प्रायद्वीपों में 50% पशुपालन का कार्य स्त्रियों द्वारा ही होता है।भारत में भी - सारी कृषि का आधे से अधिक काम स्त्रियों के हाथों ही पूर्ण होता है।
राजस्थान की पनिहारिनें पानी की व्यवस्था के लिए साल भर में दिल्ली से कलकत्ता तक की दूरी की यात्रा पैदल ही कर लेती हैं।हरियाणा से मिले एक आँकड़े के मुताबिक वहाँ स्त्रियाँ 16 घण्टे की दैनिक मजदूरी करती हैं। - गाँवों में तो अन्य गृहकार्यों के अलावा गाय-भैंसों को चारा-पानी डालना,दूध दुहना,उपले बनाना,दूध बिलोना,हैंडपम्प से पानी भरकर लाना आदि कार्य भी महिलाएं ही करती हैं।महिलाएं सुबह से काम निपटाकर फिर से सायंकालीन के कार्यों में जुट जाती है।
धार्मिक ग्रंथों में ऐसे प्रसंग मिलते हैं कि स्त्री पति के बड़े से बड़े अत्याचार सहकर उसके दोषों को छिपाते हुए पति की प्रसन्नता के लिए अपने अस्तित्व को मिटा देती है।वर्तमान में भी नारी पुरुषों द्वारा किए गए अनेक अत्याचार सह रही है।
- कुछ हजार महिलाओं के हर क्षेत्र में आगे बढ़ने का यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि भारतीय नारी की दुनिया (Life of Indian Women) ही बदल गई है।करोड़ों की संख्या उन माँ-बहिनों की है जो मध्य युग में जी रही हैं।जब तक पत्थर तोड़ने वाली,खेत खलिहान में कार्य करने वाली,खदान आदि में कार्य करने वाली महिलाएं शोषण और अत्याचार से मुक्त नहीं होतीं तब तक यह कहना उचित प्रतीत नहीं होता है कि भारतीय महिला बदल गई है।
कहने का तात्पर्य है कि वैसे तो देखने में प्रतीत होता है कि आज महिलाएं पहले की तरह चाहरदीवारी तक ही सीमित नहीं हैं व आधुनिक महिलाओं ने पुरुषों को विभिन्न क्षेत्रों में सशक्त चुनौती दी है,तथापि क्या महिलाएं अपने ऊपर होने वाले अत्याचारों,शोषण,बलात्कार (outrage,exploitation,rape) के खिलाफ एकजुट आवाज उठा पाएंगी,जो आए दिन पुरुषों द्वारा उन पर किए जाते हैं। - नारी यदि पुरुष के हाथों शोषित हो रही है तो फिर उसको चाहिए कि अपने हक के लिए पुरुषों का सहारा न ले।महिलाओं को तो चाहिए कि वे जागरूक होकर आगे बढ़ें।
4.पति-पत्नी में तालमेल हो (There should be harmony between husband and wife):
- महिलाओं व पुरुषों की परिवार में अलग-अलग भूमिका है।घर में पत्नी को पति की भूमिका निभानी पड़ती है:जैसे पति सेना में हो,रात्रि में ड्यूटी करते हों,विदेश गए हों,इसी प्रकार पुरुष को भी पत्नी के दायित्व का निर्वहन करना पड़ सकता है।अतः भूमिका के सवाल पर स्त्री-पुरुष समान कतार (Women-men in same line) पर खड़े हैं।जरूरत इस बात की है कि कोई अपनी जिम्मेदारी किस हद तक निभाता है?
- अतः आवश्यकता इस बात की है कि पुरुष व स्त्री में तालमेल हो,क्योंकि स्त्री व पुरुष एक-दूसरे के पूरक हैं,दोनों को समय के बदलते परिवेश के अनुरूप अपने आपको ढालना होगा।पुरुष को स्त्रियों पर अत्याचार व शोषण को रोकना होगा,स्त्रियों को सहभागी समझना होगा।
- अत महिलाओं को चाहिए कि वे मार्ग में आने वाले अवरोधों का सामना करके खुद बाधाओं का निराकरण करके अनुकूल वाता-वरण बनाएं।
नेपोलियन बोनापार्ट ने नारी में निहित इन्हीं सम्भावनाओं को लक्ष्य करके कहा था-“मुझे एक योग्य माता दे दो,मैं तुमको एक योग्य राष्ट्र दूँगा”।अतः यह कहना उपयुक्त होगा कि आधुनिक समाज में महिलाओं ने अपनी उपयोगिता जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सिद्ध कर दी है तथा समाज में उनकी महत्त्वपूर्ण भूमिका है।
5.महिलाओं के साथ भेदभाव (Discrimination against women):
- महिलाएं सामाजिक और पेशे दोनों क्षेत्रों में लिंग भेद की शिकार हैं।प्रतिवर्ष 5,00,000 महिलाएं गैर-कानूनी रूप से गर्भपात (abortion) करवाती हैं और यह समाज में महिलाओं की अत्यधिक दयनीय स्थिति को प्रदर्शित करता है।1901 में लिंगानुपात 972 महिलाएं व 1000 पुरुष था,जो कि 2011 में घटकर केवल 940 महिलाएं व 1000 रह गया है।गुजरात में 1000 पुरुषों के मुकाबले स्त्रियों की संख्या 918 रह गई हैं।उत्तरी राज्यों में तो आँकड़े और भी भयावह हैं,पंजाब में यह अनुपात 893 और चण्डीगढ़ में इससे भी कम 818 तक आ गया है।हरियाणा और दिल्ली में यह अनुपात क्रमशः 877 व 866 है।उत्तर प्रदेश में 1000 पुरुषों पर 908 महिलाएं हैं।
- इसके अलावा कुछ संगठित क्षेत्रों को छोड़कर महिलाओं को पुरुष कर्मचारियों की तुलना में कम वेतन दिया जाता है।असंगठित क्षेत्रों में शोषण और भी भयानक है। कार्यस्थलों पर यौन उत्पीड़न,नाबालिग यौन शोषण,घरेलू हिंसा,दहेज,बलि एवं सम्मान के नाम पर हत्याएं बढ़ रही हैं और लगभग सभी समाजों में स्त्री-पुरुषों के बीच काम के बँटवारे में देखभाल व सेवा सुश्रूषा का दायित्व महिलाओं को सौंपा जाता है,इसके लिए उन्हें परिवार और समाज के द्वारा कोई मानदेय नहीं दिया जाता है।नेपाल में महिलाएं प्रति सप्ताह 21 घण्टे अधिक और भारत में 12 घण्टे अधिक काम करती हैं।काम के बोझ की असमानता उन महत्त्वपूर्ण बाधाओं में से एक है,जिसका सामना महिलाओं को उनके पसंदीदा अवसर चुनने में करना पड़ता है।
- और इस सम्बन्ध में हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि मानव विकास का पोषण न केवल आय वृद्धि,स्कूली शिक्षा,अच्छा स्वास्थ्य,अधिकारिता एवं स्वच्छ पर्यावरण से होता है,बल्कि देखभाल व सेवा सुश्रूषा से भी होता है,देखभाल जिसे कभी-कभी सामाजिक उत्पादन भी कहा जाता है,आर्थिक संपोषण के लिए अत्यन्त आवश्यक है।
6.महिलाओं की गिरती स्थिति और उसमें सशक्त कैसे हों? (The deteriorating status of women and how to empower them?):
- कामकाजी महिलाओं के साथ आफिस में छेड़छाड़ की जाती है।यौन-उत्पीड़न किया जाता है।कामकाजी महिलाओं के उत्पीड़न को रोकने के लिए हमने “How to Prevent Sexual Harassment of Working Women?” आर्टिकल लिखा है।पूरी जानकारी के लिए इस आर्टिकल को पूरा पढ़े।
- भारत में कानून व्यवस्था सहित महिलाओं का पूर्ण विकास और प्रगति सुनिश्चित करने के लिए अनेक उपाय किए है,ताकि महिलाओं के लिए समानता के आधार पर मानवाधिकारों का उपयोग और देश में स्वास्थ्य,शिक्षा, रोजगार और उपभोग सुनिश्चित किया जा सके।हमारे देश में स्वास्थ्य,शिक्षा,रोजगार और राजनीतिक एवं आर्थिक अधिकारिता के क्षेत्र में विशेष रूप से महिलाओं के लिए बनाए गए कार्यक्रमों के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं,किन्तु फिर भी इसमें अभी भी काफी सुधार की आवश्यकता है,किन्तु महिला सशक्तिकरण (Women empowerment) का अर्थ क्या है ? हम कब कहेंगे कि महिला सबल हो गई।
क्या नारी भयमुक्त होकर,सम्मान खोए बगैर,जिस लक्ष्य को पाना चाहती है,उसका प्रयास कर सकती है और अपने गन्तव्य तक पहुँच सकती है ? उसे संचार का हक हो,सुरक्षा मिले,आर्थिक निर्भरता समाप्त करने के पर्याप्त साधन उपलब्ध हों,उसकी इच्छा-अनिच्छा एवं सुझावों की परिवार,समाज व देश स्तर पर कदर हो।उसे अपनी योग्यता बढ़ाने का अवसर मिले,धन-सम्पत्ति में हक मिले,रोज-रोज के एकरस उबाऊ तथा कमरतोड़ कामों से राहत मिले,देश की प्रगति तथा देश का गौरव बढ़ाने में सहयोग का पूरा अवसर हो। - संक्षेप में यह कहें कि समाजरूपी रथ में दो पहियों में से एक अगर नारी है,तो उसे भी उतना ही सबल और सुयोग्य होना आवश्यक है,जितना कि पुरुष है।यही सबलता और सुयोग्यता (Strength and Great Ability) महिला सशक्तिकरण की पहचान है।
सशक्तिकरण में शिक्षा का स्थान बड़ा महत्त्वपूर्ण है।कहा जाता है ‘सा विद्या या विमुक्तये’ शिक्षा ऐसी होनी चाहिए,जो चरित्र निर्माण करे तथा आर्थिक उन्नति की ओर ले जाए जहाँ ईमानदारी,कार्यकुशलता,न्याय-परायणता और देशप्रेम जैसे गुणों को तेजस्वी व प्रखर बनाया जाए।
इन सबके साथ ही यह भी जरूरी है कि मीडिया खासकर सिनेमा और T.V. महिलाओं की उपलब्धियों तथा देश के सामाजिक,आर्थिक विकास में महिलाओं की भूमिका को सकारात्मक रूप से प्रस्तुत करें।महिलाओं के साथ अन्याय की घटनाओं को सनसनीखेज समाचार के रूप में नहीं,बल्कि एक शर्मनाक घटना के रूप में प्रस्तुत किया जाना चाहिए और बताया जाना चाहिए कि वैश्वीकरण के प्रयासों के बावजूद अब भी महिलाओं को बराबर का हकदार बनाने के लिए एक सकारात्मक,आशाजनक,उत्साहवर्धक और प्रोत्साहित करने वाला वातावरण निर्मित करना होगा।
सामाजिक कुरीतियों की शिकार (Victims of social evils): - महिलाएं सबसे ज्यादा अन्धविश्वास व सामाजिक कुरीतियों की शिकार होती हैं।कई ग्रामीण क्षेत्रों में उन्हें ‘डायन’ या किसी ‘बुरी आत्मा’ का रूप बताकर पीटा जाता है।जिंदा जला दिया जाता है,शारीरिक व मानसिक यातनाएं दी जाती हैं व उनसे अभद्र भाषा का प्रयोग किया जाता है।इन्हीं मानसिक व शारीरिक यातनाओं से वे घोर निराशा की शिकार हो जाती है व इससे महिलाओं के स्वास्थ्य में गिरावट आती है।इसके अलावा आज के इस वैज्ञानिक युग में भी सती प्रथा,बाल-विवाह,दहेज प्रथा जैसी सामाजिक कुरीतियाँ विद्यमान हैं।
- उपर्युक्त आर्टिकल में आधुनिक समाज:महिलाओं की भूमिका को समझने के लिए 7 मंत्र (Modern Society:7 Spells to Understand Role of Women) के बारे में बताया गया है।
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7.लड़की पर फिदा (हास्य-व्यंग्य) (Fascinated by the girl) (Humour-Satire):
- लड़की (सिपाही से):अंकल आप मेरी मदद करेंगे प्लीज।
- सिपाही:हाँ,हाँ बोलो क्या बात है?
- लड़की:मेरा चश्मा गिर गया है,उठाकर दे दीजिए।
- सिपाही:चश्मा उठाकर देता है और बोलता है और कुछ।
- लड़की:ये बैग टैक्सी तक पहुँचा दो।
8.आधुनिक समाज:महिलाओं की भूमिका को समझने के लिए 7 मंत्र (Frequently Asked Questions Related to Modern Society:7 Spells to Understand Role of Women) से सम्बन्धित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:
प्रश्न:1.लड़की और लड़के में भेदभाव कैसे करते हैं? (How do you discriminate between a girl and a boy?):
उत्तर:माता-पिता लड़के की तुलना में लड़की को कम महत्त्व देते हैं।कई बार तो उन्हें इलाज के लिए डॉक्टर के पास भी तब ले जाया जाता है,जब उनकी बीमारी बहुत अधिक बढ़ चुकी होती है और इस अवस्था में भी उन्हें कम शिक्षित डॉक्टर के पास ही ले जाया जाता है तथा इलाज पर भी कम पैसा ही खर्च किया जाता है और दवाइयाँ व इलाज के अभाव में वे अल्पायु में ही काल का ग्रास बन जाती है।
प्रश्न:2 कामकाजी महिलाओं के साथ कैसे भेदभाव किया जाता है? (How are working women discriminated against?):
उत्तर:कुछ संगठित क्षेत्रों में पुरुष कर्मचारियों की तुलना में महिलाओं को कम वेतन दिया जाता है और साधन भी कम उपलब्ध कराये जाते हैं।
प्रश्न:3.घर में लड़के और लड़की की शिक्षा पर कैसे भेदभाव किया जाता है? (How is the education of girls and boys discriminated against at home?):
उत्तर:गरीब परिवार का लड़का तो घर पर रहकर पढ़ाई करता है,उसे भोजन भी पर्याप्त व सुपोषित दिया जाता है,किन्तु लड़की स्कूल से आकर न केवल घर का काम सँभालती है,बल्कि माँ-बाप के साथ रोजी-रोटी कमाने में भी हाथ बंटाती है और जीवन की तीनों महत्वपूर्ण अवस्थाओं अर्थात् शैशवावस्था,बाल्यकाल,किशोरावस्था तथा प्रजननकाल में भी महिलाओं को बचा-खुचा व कुपोषित भोजन भी दिया जाता है।लैंगिक असमानता का स्पष्ट उदाहरण हमें शिक्षा के क्षेत्र में भी देखने को मिलता है।
- उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर द्वारा आधुनिक समाज:महिलाओं की भूमिका को समझने के लिए 7 मंत्र (Modern Society:7 Spells to Understand Role of Women) की अछूती टर्म्स जैसे महिलाओं के साथ घर-परिवार व आफिस में कैसे भेदभाव किया जाता है के बारे बताया गया है।
- *”यह आर्टिकल **Satyam Mathematics** ब्लॉग पर **Satyam Coaching Centre** के द्वारा तैयार किया गया है।”*
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Satyam
Lekhak Ke Baare Mein (About the Author) **Satyam Narain Kumawat** **Website Name:Satyam Mathematics** *Owner:satyamcoachingcentre.in* *Sthan:Manoharpur,Jaipur (Rajasthan)* **Teaching Mathematics aur Anya Anubhav** ***Shiksha:**B.sc.,B.Ed.,(M.sc. star Ke Mathematics Ko Padhane ka Anubhav),B.com.,M.com. Ke vishayon Ko Padhane ka Anubhav,Philosophy,Psychology,Religious,sanskriti Mein Gahri Ruchi aur Adhyayan ***Anubhav:**phichale 23 varshon se M.sc.,M.com.,Angreji aur Vigyan Vishayon Mein Shikshaka Ka Lamba Anubhav ***Visheshagyata:*Maths,Adhyatma (spiritual),Yog vishayon ka vistrit Gyan* ****In Brief:I have read about M.sc. books,psychology,philosophy,spiritual, vedic,religious,yoga,health and different many knowledgeable books.I have about 23 years teaching experience upto M.sc. ,M.com.,English and science. Updated on 18.06.2026









