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Characteristic of a Ring in Algebra

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1 1.बीजगणित में एक वलय का अभिलक्षण (Characteristic of a Ring in Algebra),गणित में एक वलय का अभिलक्षण (Characteristic of a Ring in Mathematics):

1.बीजगणित में एक वलय का अभिलक्षण (Characteristic of a Ring in Algebra),गणित में एक वलय का अभिलक्षण (Characteristic of a Ring in Mathematics):

बीजगणित में एक वलय का अभिलक्षण (Characteristic of a Ring in Algebra) से पूर्व वलय,क्रमविनिमेय तत्समकी वलय,पूर्णांकीय प्रान्त तथा विभिन्न प्रकार की वलय के बारे में तथा उनके गुणधर्मों का अध्ययन कर चुके हैं।इस आर्टिकल में वलय के अभिलक्षण के बारे में अध्ययन करेंगे।
वलय का अभिलक्षण (Characteristic of a ring):
माना कि <R,+,\bullet > एक वलय है तो वलय R का अभिलक्षण वह धनात्मक न्यूनतम पूर्णांक n है कि n a=0 \forall a \in R
जहाँ 0,R के शून्य को प्रकट करता है अर्थात् <R,+,\bullet > का योज्य तत्समक अवयव है।
यदि ऐसे n का अस्तित्व नहीं है तो हम कहते हैं कि वलय R का अभिलक्षण शून्य या अनन्त है।
पूर्णांकीय प्रान्त तथा क्षेत्र का अभिलक्षण (Characteristic of an Integral Domain):
किसी पूर्णांकीय प्रान्त I या क्षेत्र F का अभिलक्षण वह न्यूनतम धनात्मक पूर्णांक n है जिसके लिए
n.1=0
जहाँ1,I या F का गुणन संक्रिया के लिए तत्समक अवयव है।
यदि ऐसा पूर्णांक का अस्तित्व नहीं हो तो हम कहते हैं कि I या F का अभिलक्षण शून्य या अनन्त है।
एक क्षेत्र जिसका अभिलक्षण अशून्य है,उसे माॅडयूलर क्षेत्र (modular field) कहते हैं।
प्रमेय (Theorem):1.सिद्ध कीजिए कि किसी पूर्णांकीय प्रान्त का लक्षण 0 या n होगा जैसा कि उसके योग समूह के शून्येतर अवयव की कोटि 0 या n है।
(Show that the characteristic of an integral domain is 0 or n according as the order of any non-zero element, regarded as a member of the additive group of the integral domain,is either zero or n.)
उपपत्ति (Proof):माना कि (D,+,\bullet ) एक पूर्णांकीय प्रान्त है यदि D के एक अशून्य अवयव की कोटि शून्य है तो D का अभिलक्षण भी शून्य है तथा a \in D, a \neq 0 साथ ही

O(a)=n \neq 0
जबकि a \in(D,+,\bullet ) तो na=0   …..(1)
यदि b \in D तो (1) से:
(n a).b=0 \Rightarrow (a+a+a……..n बार).b=0
\Rightarrow a.b+a.b+a.b+……n बार=0
\Rightarrow a.(b+b+b………n बार)=0
\Rightarrow a.(nb)=0, a \neq 0 \\ \Rightarrow(n b)=0 क्योंकि D शून्य भाजक रहित है।
यहाँ (1) के अनुसार n एक न्यूनतम धनात्मक पूर्णांक है।
इसलिए योग समूह के शून्येतर अवयव b की कोटि n है।साथ ही n.0=0
अतः n न्यूनतम धनात्मक पूर्णांक ऐसा है कि

n x=0 \quad \forall x \in D
अतः D का अभिलक्षण n है।
प्रमेय (Theorem):2.सिद्ध कीजिए कि पूर्णांकीय प्रान्त का अभिलक्षण या तो शून्य है या अखण्डनीय संख्या है।
(Prove that the characteristic of an Integral domain is either zero or a prime number.)
उपपत्ति (Proof):माना कि D एक पूर्णांकीय प्रान्त है।माना कि a \neq 0,a \in D यदि a की कोटि शून्य है [o(a)=0] तो D का अभिलक्षण शून्य है।यदि o(a) परिमित है तो माना o(a)=p तो D का अभिलक्षण p होगा।हमें यह सिद्ध करना है कि p अभाज्य नहीं है तो माना P=P_{1} P_{2} जहाँ P_{1} \neq 1, P_{2} \neq 1 तथा P_{1}<P, P_{2}<P
चूँकि D पूर्णांकीय प्रान्त है इसलिए यह शून्य भाजक रहित है।
a \neq 0 \Rightarrow a.a \neq 0 या a^{2} \neq 0
अब पूर्णांकीय प्रान्त में कोई दो अशून्य अवयवों की कोटि समान है

O(a)=p \Rightarrow O\left(a^{2}\right)=p \Rightarrow p a^{2}=0 \\ \Rightarrow\left(p_{1} p_{2}\right) a^{2}=0 \\ \Rightarrow\left(a^{2}+a^{2}+ \ldots p_{1} p_{2} \text { बार }\right)=0 \\ \Rightarrow\left(p_{1} a\right) \cdot\left(p_{2} a\right)=0 \\ \Rightarrow या तो p_{1} a=0 या p_{2} a=0
[क्योंकि D शून्य भाजक रहित है]
परन्तु P_{1} a \neq 0 क्योंकि P_{1}<p इसी प्रकार P_{2} a \neq 0 क्योंकि P_{2}<p साथ ही p न्यनतम धनात्मक पूर्णांक ऐसा है कि pa=0,अतः यह तो विरोधाभास है।
इसीलिए हमारी कल्पना p अभाज्य नहीं है,गलत है।फलतः p अभाज्य संख्या है।
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2.बीजगणित में एक वलय का अभिलक्षण पर आधारित उदाहरण (Examples Based on Characteristic of a Ring in Algebra):

Example:1.सिद्ध कीजिए कि क्षेत्र का अभिलक्षण या तो शून्य है या अभाज्य संख्या है।
(Prove that the characteristic of a field is either zero or prime number.)
Solution:प्रमेय (Theorem) 6 के अनुसार प्रत्येक क्षेत्र एक पूर्णांकीय प्रान्त होता है।तथा इसी आर्टिकल में प्रमेय 2 के अनुसार पूर्णांकीय प्रान्त का अभिलक्षण या तो शून्य है या अभाज्य संख्या है।अतः क्षेत्र का अभिलक्षण या तो शून्य है या अभाज्य संख्या है।
Example:2.हल सहित ऐसे विषम क्षेत्र का उदाहरण दीजिए जो क्षेत्र न हो।
(Give an example with solution of a skew-field which is not a field.)
Solution:माना M कोटि 2×2 का समुच्चय है जिसका रूप निम्न है:
\left[\begin{array}{cc}a+i b & c+i d \\-c+i d & a-i b\end{array}\right] जहाँ a, b, c, d \in R(वास्तविक संख्याओं का समुच्चय)
सर्वप्रथम हम सिद्ध करेंगे कि समुच्चय M योग और गुणन के लिए वलय है।
(i)संवृतता (Closure Property):
माना A, B \in M

A=\left[\begin{array}{lll} a_{1}+i b_{1} & c_{1}+i d_{1} \\ -c_{1}+i d_{1} & a_{1}-i b_{1}\end{array} \right], \quad B=\left[\begin{array}{lll}a_{2}+i b_{2} & c_{2}+i d_{2} \\-c_{2}+i d_{2} & a_{2}-i b_{2} \end{array}\right]
तथा a_{1}, b_{1}, c_{1}, d_{1}, a_{2}, b_{2}, c_{2}, d_{2} वास्तविक हैं
अब A+B=\left[\begin{array}{ll} \left(a_{1}+a_{2}\right)+i\left(b_{1}+b_{2}\right) & \left(c_{1}+ c_{2}\right) +i\left(d_{1}+d_{2}\right) \\ -\left(c_{1}+c_{2}\right)+i\left(d_{1}+d_{2}\right) & \left(a_{1}+ a_{2}\right)-i\left(b_{1}+b_{2}\right) \end{array}\right]
A+B,M के रूप का है अतः A+B \in M \\ A B=\left[\begin{array}{ll} a_{1}+i b_{1} & c_{1}+i d_{1} \\ -c_{1}+i d_{1} & a_{1}-i b_{1} \end{array}\right] \left[\begin{array}{ccc} a_{2}+i b_{2} & c_{2}+i d_{2} \\-c_{2}+i d_{2} & a_{2}-i b_{2} \end{array}\right] \\ =\left[\begin{array}{ll}a_{1} a_{2}-b_{1} b_{2}-c_{1} c_{2}-d_{1} d_{2}+ i(a_{1} b_{2}+b_{1} a_{2}+c_{1} d_{2}-c_{1} d_{1}) & a_{1} c_{2}-b_{1} d_{2}-c_{1} a_{2}+d_{1} b_{2}+ i(a_{1} d_{2}+b_{1} c_{2}+d_{1}a_{2}-c_{1} b_{2}) \\ -(c_{1}a_{2}+d_{1} b_{2}+a_{1}c_{2}-b_{1} d_{2})+i(d_{1} a_{2}+ a_{1} d_{2}-c_{1} b_{2}+b_{1} c_{2}) & (-c_{1}c_{2}-d_{1} d_{2}+a_{1} a_{2}-b_{1} b_{2})-i(c_{1} d_{2}-d_{1} c_{2}+a_{1} b_{2}+b_{1} a_{2})\end{array}\right]
इस प्रकार AB \in M
मैट्रिक्स M योग व गुणन के लिए संवृत है।
(ii)मैट्रिक्स योग तथा गुणन हमेशा सहचारी होता है।
(iii)तत्समक अवयव का अस्तित्व (Existence of Identity):

0=\left[\begin{array}{ll}0 & 0 \\0 & 0 \end{array}\right]=\left[\begin{array}{cc}0+i \cdot 0 & 0+i \cdot 0 \\-0+i \cdot 0 & 0-i \cdot 0 \end{array}\right]
M में शून्य मैट्रिक्स योग के लिए तत्समक है।

A+O=\left[\begin{array}{ccc}a+i b & c+i d \\-c+i d & a-i b\end{array}\right]+\left[\begin{array}{cc}0+i \cdot 0 & 0+i \cdot 0 \\-0+i.0 & 0-i \cdot 0\end{array}\right] \\ =\left[\begin{array}{ll}(a+0)+i(b+0) & (c+0)+i(d+0) \\-(c+0)+i(d+0) & (a+0)-i(b+0)\end{array}\right] \\ =\left[\begin{array}{ll}a+i b & c+i d \\-c+i d & a-i b\end{array}\right]=A
(iv)प्रतिलोम का अस्तित्व (Existence of Inverse):
माना A \in M तथा A=\left[\begin{array}{ll}a+i b & c+i d \\-c+i d & a-i b\end{array}\right] \\ -A=\left[\begin{array}{cc}(-a)+i(-b) & (-c)+i(-d) \\-(-c)+i(-d) & (-a)-i(-b)\end{array}\right] \in M
तथा (-A)+(A)=\left[\begin{array}{cc}0+i \cdot 0 & 0+i \cdot 0 \\-0+i \cdot 0 & 0-i \cdot 0\end{array}\right]=0
अतः -A,A का योज्य प्रतिलोम है।
(v)योग क्रमविनिमेय (Commutativity of Addition):
मैट्रिक्स योग क्रमविनिमेय होता है।
(vi)गुणन की योग पर बंटनशीलता (Distributivity of Multiplication over Addition):
मैट्रिक्स गुणन की योग पर हमेशा बंटनशील होता है।
(vii)गुणात्मक तत्समक का अस्तित्व (Existence of Multiplicative Identity):

I=\left[\begin{array}{ll}1 & 0 \\0 & 1\end{array}\right]=\left[\begin{array}{ll} 1+0 \cdot i & 0+i \cdot 0 \\ -0+0 \cdot i & 1-i \cdot 0 \end{array}\right] \in M
अतः इकाई मैट्रिक्स,M का गुणात्मक तत्समक है।
(vii)गुणात्मक प्रतिलोम का अस्तित्व (Existence of Multiplicative Inverse):
माना A, मैट्रिक्स समुच्चय M का अशून्य मैट्रिक्स है तथा माना n=\left[\begin{array}{cc}a+i b & c+i d \\-c+i d & a-i b\end{array}\right] \neq O=\left[\begin{array}{ll}0 & 0 \\0 & 0\end{array}\right] \\ \Rightarrow  a,b,c,d सभी शून्य नहीं है।

|A|=\left|\begin{array}{ll}a+i b & c+i d \\-c+i d & a-i b\end{array}\right|=a^{2}+b^{2}+c^{2}+d^{2} \neq 0
अतः A व्युत्क्रमणीय (non-singular) आव्यूह है फलतः का अस्तित्व है।

A^{-1}=\frac{A d j A}{|(A)|} \\=\frac{1}{a^{2}+b^{2}+c^{2}+d^{2}}\left[\begin{array}{lr}a-i b & -c+i d \\c-i d & a+i b\end{array}\right] \in M \\ A^{-1} का अस्तित्व है तथा A^{-1} \in M
अतः M विषम क्षेत्र (Skew field) है।
क्षेत्र सिद्ध करने के लिए क्रमविनिमेय गुणधर्म का पालन करना आवश्यक है।
माना A, B \in M \\ A=\left[\begin{array}{cc}a_{1}+i b_{1} & c_{1}+i d_{1} \\-c_{1}+i d_{1} & a_{1}-i b_{1} \end{array}\right], B=\left[\begin{array}{ll}a_{2}+ib_{2} & c_{2}+i d_{2} \\-c_{2}+i d_{2} & a_{2}-i b_{2} \end{array}\right] \\ A B=\left[\begin{array}{cc}a_{1}+i b_{1} & c_{1}+i d_{1} \\-c_{1}+i d_{1} & a_{1}-i b_{1} \end{array}\right]\left[\begin{array}{ll}a_{2}+ib_{2} & c_{2}+i d_{2} \\-c_{2}+i d_{2} & a_{2}-i b_{2} \end{array}\right] \\ \left[\begin{array}{llll} (a_{1} a_{2}-b_{1} b_{2}-c_{1} c_{2}-d_{1} d_{2}) &(a_{1} c_{2}-b_{1} d_{2}+c_{1}a_{2}+d_{1} b_{2}) \\ +i(a_{1} b_{2}+ b_{1}a_{2}+c_{1} d_{2}-c_{1} d_{1})& +i(a_{1} d_{2}+b_{1} c_{2}+d_{1} a_{2}-c_{1} b_{2})\\ \quad & \quad\\ -(a_{1}c_{2}-b_{1}d_{2}+c_{1}a_{2}+d_{1}b_{2}) & (a_{1} a_{2}-b_{1} b_{2}-c_{1} c_{2}-d_{1} d_{2}) \\+i(a_{1} d_{2}+b_{1} c_{2}+d_{1} a_{2}-c_{1}b_{2}) & -i(a_{1} b_{2}+b_{1} a_{2}+c_{1} d_{2}-c_{2} d_{1})\end{array} \right] 

तथा BA=\left[\begin{array}{ll} (a_{1} a_{2}-b_{1} b_{2}-c_{1} c_{2}-d_{1} d_{2}) & (c_{1}a_{2}-d_{1}b_{2}+a_{1}c_{2}+b_{1}d_{2}) \\ +i(a_{1} b_{2}+a_{2} b_{1}+c_{1} d_{2}+c_{2} d_{1}) & +i(c_{1} b_{2}+a_{2} d_{1}+a_{1} d_{2}-b_{1} c_{2}) \\ \quad & \quad \\-(a_{1} c_{2}+b_{1} d_{2}+c_{1} a_{2}-d_{1} b_{2}) & (-c_{1}c_{2}-d_{1} d_{2}+a_{1} a_{2}-b_{1} b_{2}) \\+i(b_{1} d_{2}-b_{1} c_{2}+a_{2} d_{1}+c_{1} b_{2}) & -i(d_{1} c_{2}-c_{1} d_{2}+a_{1} b_{2}+a_{2} b_{1}) \end{array}\right]\\ A B \neq B A
अतः M क्षेत्र नहीं है।

Example:3.वलय \left[z_{4},+_{4},\bullet_{4} \right] का अभिलक्षण ज्ञात कीजिए।
(Find the characteristic of a ring \left[z_{4},+_{4},\bullet_{4} \right])
Solution:z_{4}=\{0,1,2,3\}
योग के लिए प्रत्येक अवयव की कोटि:
O(0)=1 (तत्समक अवयव की कोटि)

O(1) \Rightarrow 1+1+1+1=4=0 \\ \Rightarrow O(1)=4 \\ O(2) \Rightarrow 2+2=0 \\ \Rightarrow O(2)=2 \\ O(3) \Rightarrow 3+3+3+3=0 \\ O(3)=4
अर्थात् 4a=0 जहाँ a \in Z_{4}
अधिकतम कोटि 4 है अतः दी हुई वलय का अभिलक्षण 4 है।
उपर्युक्त उदाहरणों के द्वारा बीजगणित में एक वलय का अभिलक्षण (Characteristic of a Ring in Algebra),गणित में एक वलय का अभिलक्षण (Characteristic of a Ring in Mathematics) के बारे में ओर अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

3.बीजगणित में एक वलय का अभिलक्षण पर आधारित सवाल (Questions Based on Characteristic of a Ring in Algebra):

(1.)सिद्ध कीजिए कि \left[\begin{array}{ll}a & b \\-\overline{b} & \overline{a}\end{array}\right] ; a, b \in c की सभी मैट्रिसेज का समुच्चय योग एवंम गुणन के लिए एक विभाजन वलय है।क्या यह क्षेत्र (फील्ड) है?
(Prove that the set of matrices of the form \left[\begin{array}{ll}a & b \\-\overline{b} & \overline{a}\end{array}\right] ; a, b \in c is a skew field for matrix addition and multiplication.Is is a field?)
(2.)सिद्ध कीजिए कि गाउसीय पूर्णांकों का समुच्चय J=\{m+i n \mid m, n \in z\}  सम्मिश्र संख्याओं के यौगिक और गुणन क्रियाओं के सापेक्ष एक वलय है।क्या यह पूर्णांकीय प्रान्त है?क्या यह एक क्षेत्र है?
(Show that the set J of Gaussian Integers J=\{m+i n \mid m, n \in z\} form a ring w.r.t. ordinary addition and multiplication of complex numbers.Is it an Integral domain?Is it a field?)
उत्तर (Answers):(1.)क्षेत्र (field) नहीं है।
(2.)पूर्णांकीय प्रान्त (Integral domain) है परन्तु क्षेत्र (Field) नहीं है।
उपर्युक्त सवालों को हल करने पर बीजगणित में एक वलय का अभिलक्षण (Characteristic of a Ring in Algebra),गणित में एक वलय का अभिलक्षण (Characteristic of a Ring in Mathematics) को ठीक से समझ सकते हैं।

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4.बीजगणित में एक वलय का अभिलक्षण (Characteristic of a Ring in Algebra),गणित में एक वलय का अभिलक्षण (Characteristic of a Ring in Mathematics) के सम्बन्ध में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:

प्रश्न:1.किसी वलय का अभिलक्षण कैसे ज्ञात करते हैं? (How do you find the characteristic of a ring?):

उत्तर:वलय के सभी अवयवों की योग के लिए कोटि ज्ञात करते हैं।जो सबसे अधिक कोटि होती है वह वलय का अभिलक्षण होता है।दूसरे शब्दों में n a=0 \quad \forall a \in R (जहां n धनात्मक पूर्णांक है)।यदि ऐसे n का अस्तित्व नहीं है तो हम कहते हैं कि वलय R का अभिलक्षण शून्य या अनंत है।

प्रश्न:2.क्षेत्र तथा पूर्णांकीय प्रांत में क्या संबंध होता है? (What is the relation between field and integral domain?):

उत्तर:प्रत्येक क्षेत्र एक पूर्णांकीय प्रांत होता है परंतु इसका विलोम सत्य हो यह आवश्यक नहीं है।जैसे पूर्णांकों का वलय <R,+,\bullet> एक ऐसा वलय है जो कि पूर्णांकीय प्रांत तो है परंतु इसका प्रत्येक अशून्य अवयव प्रतिलोमी नहीं होता,(-1,1) के अतिरिक्त किसी भी अशून्य अवयव का प्रतिलोम Z में नहीं है। फलत: यह क्षेत्र नहीं है।

प्रश्न:3.पूर्णांकों के वलय तथा परिमेय संख्याओं की वलय का अभिलक्षण क्या होता है? (What is the characteristic of the ring of integers and the ring of rational numbers?):

उत्तर:पूर्णांकों की वलय का अभिलक्षण शून्य तथा परिमेय संख्याओं का अभिलक्षण भी शून्य होता है। परंतु I_{6}={0,1,2,3,4,5} तब वलय \left(I_{6},+_{6}, X_{6}\right) का अभिलक्षण निम्न प्रकार ज्ञात करते हैं:
o(0)=1 (तत्समक अवयव की कोटि)
\Rightarrow O(1)=6 \\ O(2) \Rightarrow 2+2+2=6 \\ \Rightarrow O(2)=3 \ O(3) \Rightarrow 3+3=0 \\ \Rightarrow O(3)=2 \ O(4) \Rightarrow 4+4+4+4+4+4=0 \ \Rightarrow O(4)=6 \\ \Rightarrow 0(5) \Rightarrow 5+5+5+5+5+5=0 \\ \Rightarrow O(5)=6 \\ O(1) \Rightarrow 1+1+1+1+1+1=0
I_{6} के सभी अवयवों में अधिकतम कोटि 6 है।अर्थात् 6(a)=0 \forall a \in I_{6}
अतः I_{6} का अभिलक्षण 6 है।
उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर द्वारा बीजगणित में एक वलय का अभिलक्षण (Characteristic of a Ring in Algebra),गणित में एक वलय का अभिलक्षण (Characteristic of a Ring in Mathematics) के बारे में ओर अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

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बीजगणित में एक वलय का अभिलक्षण
(Characteristic of a Ring in Algebra)

Characteristic of a Ring in Algebra

बीजगणित में एक वलय का अभिलक्षण (Characteristic of a Ring in Algebra) से पूर्व वलय,क्रमविनिमेय
तत्समकी वलय,पूर्णांकीय प्रान्त तथा विभिन्न प्रकार की वलय के बारे में तथा उनके गुणधर्मों का अध्ययन कर चुके हैं।

3 Comments
  1. Aditya February 26, 2022 / Reply
  2. Aditya February 26, 2022 / Reply

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