Menu

Public Speaking Guide for Students:6 Secret ways of success Speech

Contents hide

1.छात्र-छात्राओं के लिए पब्लिक स्पीकिंग गाइड:सफल स्पीच के 6 गुप्त तरीके (Public Speaking Guide for Students:6 Secret ways of success Speech):

  • क्या आप बोलने से डरते हैं? जानिए किसी भी सांस्कृतिक समारोह,प्रतियोगिता या जयंती पर प्रभावशाली भाषण देने के गुप्त तकनीक और सार्वजनिक बोलने के टिप्स इस आर्टिकल “छात्र-छात्राओं के लिए पब्लिक स्पीकिंग गाइड (Public Speaking Guide for Students)” में।

Also Read This Article:5 Effective Tips to Prepare for Speech

2.श्रोताओं का ध्यान आकर्षित करें (Capture the Audience’s Attention):

  • मजबूत उद्घाटन (Strong Opening):भाषण की शुरुआत किसी दिलचस्प सुविचार (Quote),एक छोटे किस्से (story) या श्रोताओं से एक सवाल पूछने से करें।इससे लोगों का ध्यान तुरन्त आप की तरफ जाएगा।आपकी शुरुआत बोरिंग नहीं होनी चाहिए (जैसे सिर्फ आदरणीय शिक्षक और मित्र…)।विषय से जुदा कोई मजबूत उद्धहरण या कविता की पंक्तियों से शुरू करें।
  • बहुत से छात्र-छात्राओं को स्टेज पर जाते ही गला सूखने लगता है या शब्द भूल जाते हैं।शिक्षण संस्थानों में वार्षिकोत्सव (Annual Function),सांस्कृतिक कार्यक्रम (culturl pogramme) हो या कोई भाषण प्रतियोगिता (speech Competition),मंच भय होना आम बात हैं।लेकिन सही तकनीक के साथ आप भी ऐसे अवसरों पर प्रभावी भाषण दे सकते हैं।
  • दृश्य कनेक्शन (Visual connection):सभी दर्शकों को एक साथ देखने की जगह,एक बार में किसी एक व्यक्ति से 3 सेकण्ड के लिए आई कॉन्टैक्ट बनाएं,फिर दूसरी तरफ देखें।इससे आपका आत्म-विश्वास (confidence) झलकता हैं और दर्शकों को लगता है कि आप उनसे डायरेक्ट बात कर रहे हैं।
  • माईड मैपिंग (Mind Mapping):रटने की जगह कीवर्ड याद रखें।वाणी को शब्द सह रटने की भूल कभी न करें।रटना भूलने का सबसे बड़ा कारण होता है।मुख्य बिन्दु के छोटे-छोटे बुलेट पाइंट्स बनाएं (keywords) और उन्हें मन में कनेक्ट करें और उनके बोलने का अभ्यास करें।स्टेज उपस्थिति और शारीरिक भाषा (stage presence and Body Language):सीधे खड़े रहे।लापरवाह की तरह न खड़े हों और हाथ-पैरों को इधर-उधर न फेंके।हाथों से सहज इशारे करें (Gestures)।चेहरे पर हलकी मुस्कान रखें,जो आपकी घबराहट को छुपा देती है।
  • वायस माड्यूलेशन (Voice Modulation):एक ही टोन (Tone) में भाषण देने से लोग बोर हो जाते हैं। महत्त्वपूर्ण शब्दों पर थोड़ा जोर देकर बोलें।विराम (Pause):हर बड़ी बात के बाद 2 सेकण्ड का ब्रेक लें जिससे बात लोगों के ध्यान में बैठे।
  • गति (pacing):ना ज्यादा तेज बोलें और ना ही बहुत धीमे बोलें।अपनी बात को आसान और सरल शब्दों में कहें।बड़ी-बड़ी और मुश्किल शब्दमाला की जगह ऐसे शब्दों का इस्तेमाल करें जो हर किसी को समझ में आएं।
  • मिरर प्रैक्टिस और रिहर्सल (Mirror Practice & Rehearsal):भाषण को रटने की जगह उसके मुख्य बिंदुओं को समझें।शीशे (दर्पण) के सामने या अपने दोस्तों/घरवालों के सामने बोलने की प्रैक्टिस करें।अपनी आवाज रिकाॅर्ड करके सुनना भी काफी मदद करता है।
  • भाषण को छोटा और केन्द्रित रखें (Keep it Short and Focused):भाषण को छोटा,स्वीट रखें।संक्षिप्तता भाषण की आत्मा होती है।समय का ध्यान रखें।कई लोग बोलते चले जाते हैं,जैसे वे कोई भाषण नहीं बल्कि बोलने की भड़ास निकाल रहे हों।
    स्टेज पर बोलना सिर्फ शब्दों का खेल नहीं है,बच्चों अपनी बात से दर्शकों का दिल जीतने की भी एक कला है।

3.विद्यार्थियों द्वारा भाषण के पूर्व तैयारी करें (Prepare before the student speech):

  • विद्यार्थियों या नए वक्ताओं के लिए भाषण के पूर्व तैयारी इसलिए आवश्यक है,क्योंकि उन्हें कुछ बातों को आत्मसात करना होगा जिसके वे अभ्यस्त नहीं हैं (Which they are not used to?)।उन्हें यह ज्ञात होना चाहिए कि प्रभावशाली भाषण के लिए उनमें निम्न बातें होनी चाहिए:
  • वक्ता की विश्वसनीयता (reliability of Speaker):ये नए वक्ता हैं अतएव श्रोताओं में उनके प्रति विश्वास की कमी होती है।अतएव मंच पर जाते ही वे पहले यह जानना चाहेंगे कि वक्ता की पैठ ‘विषय’ में कैसी है? अगर तैयारी अच्छी तरह नहीं की गई तो उनकी वाणी में वह दम नहीं होगा जो श्रोताओं को जल्द आकर्षित कर सकें।अतएव विषय के विभिन्न बिन्दुओं को अच्छी तरह आत्मसात करना आवश्यक है।
  • इसके लिए नए वक्ता को अपना भाषण एकान्त में बोल-बोलकर तैयार करना चाहिए।फिर उसको पुनः पुनः अपनी स्मृति में सजाने का प्रयास करना चाहिए तथा अपने मित्रों के साथ बातचीत में उनके कुछ बिन्दुओं पर अभिव्यक्ति देनी चाहिए।
  • तर्क (Logic):बात से बात निकलती है।वक्ता जिस बिन्दु से प्रारम्भ करे वह मस्तिष्क में उठने वाला उसका पहला विचार हो।फिर एक विचार से दूसरे विचार-बिन्दु पर आना चाहिए और फिर तीसरे पर।विचार की स्वाभाविकता का पता इस तथ्य से चलता है कि जो विचार वक्ता के मस्तिष्क में उठते हैं:वही श्रोता के मस्तिष्क में भी उठें।
  • संवेदना सृजन (Sensation Generation):एकरसता शिथिलता पैदा करती है।अतएव श्रोताओं की दिलचस्पी बनी रहे इसके लिए आवश्यक है कि कभी-कभी विचारों को एक नया मोड़ दिया जाए।एक नई उक्ति-एक नया भाव पैदा करती है जिससे भय या प्रसन्नता के द्वारा एकरसता भंग होती है।रस माधुर्य ताजगी पैदा करती है।हास्य या व्यंग्य (Homour-Satire) का भी उपयोग किया जा सकता है:शर्त है व्यंग्य व्यक्तिगत न हो और न हास्य असभ्य।

4.विद्यार्थियों द्वारा भाषण की अभिव्यक्ति (Expression of Speech by students):

  • चित्रात्मकता (Graphical Beauty):प्रतीकों के माध्यम से भाषा के द्वारा वैसे ही चित्र खींचे जा सकते हैं जैसे एक चित्रकार अपनी कूँची से चित्र खींचता है या वास्तुकार अपनी छेनी से पत्थर पर जीवंत लकीरें खींचकर भावाभिव्यक्ति देता है।सीधा-सादा बयान प्रभावोत्पादक नहीं होता।चित्रात्मकता के लिए अनुमान,उपमान एवं व्यक्तिगत अनुभव सहायक हैं।स्वयं का भोगा यथार्थ वाणी से ही वस्तु या घटना के चित्र खींच देते हैं।सांख्यिकी के प्रयोग से,तुलनात्मक अभिव्यक्ति से भी व्यक्त किए गए विचार श्रोताओं के मानस पटल पर चित्र खींच देते हैं।
  • ध्यानाकर्षण (calling attention):श्रोताओं का ध्यान सदैव एक सा बना नहीं रहता।प्रारम्भ में ध्यान अधिक होता है:बीच में वह कम हो जाता है।इसके लिए ध्यान यह दिया जाना चाहिए कि ध्यान कम होने के पूर्व ही ध्यानाकर्षण के उपाय किए जाएं।
  • कभी-कभी श्रोताओं से प्रश्न पूछकर या हाथ उठाकर उनमें सहभागिता पैदा की जा सकती है।इसके लिए उनके सही विचारों को समर्थन दिया जाए:वक्ता का ध्यान से श्रोता का प्रश्नोत्तर सुनना भी ध्यान को बँटने नहीं देता।
  • सम्पर्क (Contact):वक्ता को आँखों में आँखें डालकर बातें करनी चाहिए।कुछ वक्ता विषय की जानकारी रखते हैं,लेकिन उनकी आँखों का सम्पर्क सभी श्रोताओं (Eye contact with all listeners) से नहीं साधता तो या तो वे एक ही ओर देखते रह जाते हैं या ऊपर-नीचे या दाएं-बाएं ही देखते रह जाते हैं।वक्ता को चाहिए कि वे बारी-बारी से हर पंक्ति के श्रोताओं से सम्पर्क करें।
  • समापन (conclusion):समापन समय-सीमा के अन्दर ही होना चाहिए।यह विषय के क्लाइमेक्स पर हो तो प्रभावशाली होता है।
    भाषण के पूर्व तैयारी उनके लिए भी आवश्यक है जो कुशल वक्ता हैं।अति आत्मविश्वास के कारण अनेक वक्ताओं को व्याख्यान के दौरान विस्मरण का कष्ट झेलना पड़ता है।कभी-कभी जानी पहचानी सूक्तियाँ या श्लोक वक्ता इसलिए भूल जाता है,क्योंकि भाषण के पूर्व वह उनका रियाज नहीं करता।ऐसी सूक्तियों को भाषण के पूर्व लिखकर याद करना लाभदायक है।

Also Read This Article:Public speaking

5.अध्यापक दिवस पर सार्वजनिक भाषण (Public Speech on Teachers’ Day):

  • हम लोग यहाँ अध्यापकों के प्रति सम्मान (Respect for Teachers) व्यक्त करने के लिए एकत्र हुए हैं।भले ही यह एक औपचारिकता मात्र है,परन्तु इस बहाने हमें एक महान एवं आदर्श अध्यापक का स्मरण करने तथा उसके प्रति अपना आदरभाव निवेदन करने का सुखद अवसर तो प्राप्त होता ही है।
    अध्यापक दिवस,हम भारत के द्वितीय राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की स्मृति में मनाते हैं।जब राष्ट्रपति डॉ. राधाकृष्णन के जन्म दिवस को राष्ट्रीय स्तर पर मनाने का प्रश्न उत्पन्न हुआ था,तब उन्होंने यह प्रस्ताव प्रस्तुत कर दिया था कि मेरा जन्म दिवस मेरी व्यक्तिगत वस्तु न होकर राष्ट्र के अध्यापकों को समर्पित दिवस के रूप में मनाया जाना चाहिए,क्योंकि मैं जीवन भर एक अध्यापक के रूप में साधना करता रहा हूँ।मैं यदि एक निष्ठावान अध्यापक न रहा होता,तो सम्भवतः इस गौरवशाली पद तक कदापि न पहुँच पाता।यह दिवस अध्यापक मात्र के लिए इस प्रेरणा का स्रोत होना चाहिए कि एक निष्ठावान अध्यापक उच्चतम पद को प्राप्त कर सकता है।
  • डॉ. राधाकृष्णन का जन्म 5 सितम्बर सन् 1888 को तत्कालीन मद्रास राज्य के तिरुतनी नामक गाँव में हुआ था,जो आजकल आन्ध्र प्रदेश में है।डॉ. राधाकृष्णन कलकत्ता विश्वविद्यालय एवं आक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में दर्शनशास्त्र के प्रोफेसर रहे,बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय तथा आंध्र विश्वविद्यालय के कुलपति रहे। वह सोवियत संघ में भारत के राजदूत रहे।1952-62 की अवधि में वह भारत के उपराष्ट्रपति तथा सन् 1962 से 1967 तक भारत के राष्ट्रपति रहे।उन्होंने अनेक राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय शिष्टमण्डलों (National and International Delegations) का नेतृत्व किया। एक सत्र में उन्होंने यूनेस्को के एक्जीक्यूटिव बोर्ड के अध्यक्ष के पद को भी गौरवान्वित किया,आदि।
  • डॉ. राधाकृष्णन भारतीय दर्शन के उद्भट विद्वान थे। भारतीय दर्शन को पाश्चात्य जगत में उसी की भाषा में हृदयंगम कराना उनकी विशेषता थी,क्योंकि अपने इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए उन्हें वाणी और लेखनी का वरदान एवं समानाधिकार प्राप्त थे।
    डॉ. राधाकृष्णन दर्शन को जीवन व्यवहार की वस्तु मानते थे,उनकी मान्यता थी कि दर्शन का उद्देश्य जीवन की व्याख्या नहीं,बल्कि जीवन को बदलना है।उनकी यह सत्यानुभूति कितनी यथार्थ एवं सटीक थी कि रोटी के ब्रह्म को पहचानने के बाद ही ज्ञान के ब्रह्म (After the bread of Brahma,only knowledge is Brahman) का साक्षात्कार अधिक सरल हो जाता है।
  • उन्होंने दर्शन और संस्कृति पर कई ग्रन्थों का लेखन किया।उनमें सर्वाधिक लोकप्रिय एवं विश्व विख्यात हैं:द फिलॉसोफी ऑफ द उपनिषद्स,भगवद्गीता,ईस्ट एवं वैस्ट,सम रिफ्लेक्शन्स,ईस्टर्न रिलीजन एवं वैस्टर्न थॉट,इण्डियन फिलॉसफी,एन आइडियलिस्ट व्यू ऑफ लाइफ,हिन्दू व्यू ऑफ लाइफ,द एथिक्स ऑफ वेदान्त एण्ड इट्स प्रिसपोजीशन,फिलॉसफी ऑफ रबीन्द्रनाथ टैगोर आदि।इनकी छोटी सी पुस्तिका Search for truth एक अत्यधिक जनप्रिय रचना है.
    हिन्दी में अनुवादित इनकी पुस्तकें हैं:भारतीय संस्कृति,सत्य की खोज और संस्कृति तथा समाज।
    डॉ. राधाकृष्णन के दर्शन पर शिप्ली द्वारा सम्पादित अभिनंदन ग्रंथ वस्तुतः दर्शनशास्त्र का विश्व कोश है।इसमें भारतीय दर्शन तथा राधाकृष्णन के द्वारा किए गए शोध कार्य पर अनेक विद्वानों के खोजपूर्ण लेख हैं।
  • जीवन में डॉ. राधाकृष्णन को अनेक सम्मान एवं पुरस्कार प्रदान किए गए।सन् 1954 में भारत सरकार ने उन्हें भारत के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न (Bharat Ratna, the highest honor) द्वारा अलंकृत किया।विश्व प्रसिद्ध टैम्पलटन पुस्रकार भी उन्हें प्रदान किया गया।
    भारतीय संस्कृति के उपासक तथा दार्शनिक,राजनीतिज्ञ,इन दोनों रूपों में उन्होंने यह प्रयत्न किया कि वह सम्पूर्ण मानव समाज का प्रतिनिधित्व कर सकें।वह एक शिक्षक एवं शिक्षाविद् थे।शिक्षक होने का उन्हें गर्व था।
  • भारतीय दर्शन का यह उद्भट विद्वान एवं ओजस्वी व्याख्याता पूर्ण आयु एवं पूर्ण यशस्वी जीवन का लाभ प्राप्त करने के उपरान्त 16 अप्रैल,सन् 1975 को ब्रह्मलीन हो गया।मानव समाज निर्धन हो गया।
  • आज के दिन (5 सितम्बर) प्रायः प्रत्येक विद्यालय में तथा अधिकांश समाज सेवा संस्थाओं में अध्यापक दिवस मनाया जाता है।विद्यालयों के छात्र व्यक्तिगत एवं सामूहिक रूप से अपने गुरुजन को वस्तुएँ सादर भेंट करते हैं और आनन्द का अनुभव करते हैं।सार्वजनिक संस्थाएँ (Public Institutions) किसी वरिष्ठ अध्यापक को आमंत्रित करती हैं,उसकी प्रशंसा करते हुए सुन्दर बातें कही जाती हैं तथा कुछ उपहार भेंट किए जाते हैं।यह परम्परा अपने स्थान पर ठीक है।कम से कम कुछ अध्यापकों को वर्ष में एक दिन अपने बारे में अच्छी-अच्छी बातें सुनने को मिल जाती हैं,परन्तु विचारणीय यह है कि हमारे अध्यापक क्या आज वास्तव में सम्मानित हैं? नहीं,वे आर्थिक कठिनाइयों में जीवनध्यापन करते हुए अपने कर्त्तव्य का पालन करते हैं।वे उपेक्षा और कुण्ठा का जीवन (A life of neglect and frustration) जीते हैं।यहाँ तक कि वरिष्ठतम अध्यापक को किसी भी सार्वजनिक उत्सव में आमंत्रित नहीं किया जाता है।अध्यापक,समाज का और राष्ट्र का निर्माता भले ही हो,परन्तु वह अपने बच्चों के निर्माण में असमर्थ रहता है,लोग टीचर के साथ फटीचर (People are raucous with the teacher) शब्द जोड़कर उसकी हँसी उड़ाते हैं।सड़कों पर आकर आन्दोलन करके अध्यापकों ने अपनी आर्थिक स्थिति में कुछ सुधार अवश्य कर लिया है,परन्तु तुलनात्मक दृष्टि से वह अपेक्षित सुविधाओं में अभी भी वंचित हैं।वह रोटी के ब्रह्म को पहचान चुका है।हम यदि सचमुच यह चाहते हैं कि हमारे गुरुजन सम्मानपूर्वक रहें,सुविधापूर्वक जीवन व्यतीत करते हुए मानव-निर्माण का कार्य पूर्ण मनोयोग के साथ करें,तो हमें अपने समस्त साधनों एवं प्रयत्नों द्वारा उनको आर्थिक दृष्टि से निश्चिंत करना होगा।आज के दिन अध्यापक के प्रति प्रदर्शित सम्मान केवल प्रतीक स्वरूप है,हम यदि इस प्रक्रिया को स्थायी स्वरूप प्रदान कर सकें,तो वही स्व. डॉ. राधाकृष्णन के प्रति हमारी सच्ची आदरांजलि होगी।

6.स्टूडेन्टस के लिए पब्लिक स्पीकिंग गाइड का सारांश (Summary of Public Speaking Guide for Students):

  • स्टूडेन्टस के लिए पब्लिक स्पीकिंग गाइड के मन को मथने वाले प्रश्न (Public Speaking Guide for Students)
    (1.) क्या पब्लिक स्पीकिंग विद्यार्थी के लिए आवश्यक है? क्यों? (Is Public Speaking Required for the Student? Why?)
    (2.) क्या पब्लिक स्पीकिंग के लिए विद्यार्थी को पूर्व तैयारी करनी जरूरी है? (Is it necessary for a student to have a prior preparation for public speaking?)
    (3.)क्या पब्लिक स्पीकिंग में विद्यार्थी कुछ भी बोल सकता है या तर्क और भावों का सम्मिश्रण होना चाहिए? (Can a student speak anything in public speaking or should there be a combination of logic and emotion?)
    (4.)विद्यार्थी को श्रोताओं को बांधे रखने के लिए क्या युक्ति अपनानी चाहिए? (What tactic should a student use to keep his audience engaged?)
    (5.).विद्यार्थी को श्रोताओं का ध्यानारर्षण करने के लिए क्या करना चाहिए? (What should the student do to attract the attention of the audience?)
    (6.)पब्लिक स्पीकिंग की विद्यार्थी के लिए क्या उपयोगिता है? कहाँ-कहाँ है? (What is the utility of public speaking for the student? Where is it?)
    (7.) पब्लिक स्पीकिंग के लिए विद्यार्थी को पूर्व अभ्यास कैसे-कैसे करना चाहिए? (How should students practice pre-practice for public speaking?)
    (8.)पब्लिक स्पीकिंग विद्यार्थी में जन्मजात प्रतिभा होती है या अर्जित में से कौन-सी होती है? यदि जन्मजात प्रतिभा न हो तो पब्लिक स्पीकिंग की कला कैसे विकसित कैसे करें? (Public speaking is an innate talent in a student or earned which of the acquired talents is? If there is no innate talent,then how to develop the art of public speaking?)
  • प्रश्न:1.स्टेज फियर को तुरंत कैसे कम करें? (How can stage fear be reduced immediately?):
    उत्तर:स्टेज पर जाने से पहले 3 बार गहरी सांस लें और अपना ध्यान खुद की घबराहट के बजाय ऑडियंस को सही मैसेज देने पर केंद्रित करें।
    प्रश्न:2.क्या भाषण की पूरी स्क्रिप्ट हाथ में रखकर बोलना चाहिए? (Should one hold the full speech script while speaking?):
    उत्तर:पूरी स्क्रिप्ट रखने के बजाय एक छोटा क्यू कार्ड (Cue Card) रखें जिसमें केवल मुख्य बिंदु (Keywords) लिखे हों।
    प्रश्न:3.स्पीच देते समय अगर बीच में भूल जाएं, तो तुरंत क्या करना चाहिए? (What should be done immediately if you forget your lines while delivering a speech?):
    उत्तर:घबराने के बजाय 2 सेकंड का एक शांत पॉज़ (Pause) लें और गहरी सांस लें। यदि फिर भी पॉइंट याद न आए, तो पिछले पॉइंट को ही एक अलग वाक्य में संक्षेप में दोहराएं और अगले मुख्य बिंदु (Keyword) पर चले जाएं।ऑडियंस को कभी पता नहीं चलता कि आप क्या भूल गए हैं।
    उपर्युक्त आर्टिकल में छात्र-छात्राओं के लिए पब्लिक स्पीकिंग गाइड:सफल स्पीच के 6 गुप्त तरीके (Public Speaking Guide for Students:6 Secret ways of success Speech) के बारे में विस्तार और गहराई से बताया गया है।

\begin{array}{|l|l|}  \hline \text{Event Ka Prakar (Type)} & \text{Focus Area}  \\ \hline \text{**Competition**}  &  \text{Tathya (facts), mazboot tark (logic), aur } \\ & \text{  structured delivery par focus karein.} \\\text{**Jayanti / Historical Events**}  & \text{ Inspiring quotes,  } \\ & \text{ aitihasik mehatwa (historical relevance), } \\ & \text{ aur aadar-bhav par focus karein.}  \\\text{**Cultural / Annual Function**}  &  \text{Utsah (enthusiasm), kahaniyan (storytelling), } \\ &  \text{ aur high energy par focus karein. } \\ \hline \end{array}

  • ### 📢 यदि आपको यह गणित का आर्टिकल पसंद आया हो:
    * 👥 **मित्रों के साथ शेयर करें:** ज्ञान बांटने से बढ़ता है,इसलिए इसे अपने दोस्तों के साथ ज़रूर साझा करें।
    * 🔔 **वेबसाइट को फॉलो करें:** अगर आप यहाँ पहली बार आए हैं, तो हमारे **ईमेल सब्सक्रिप्शन** को फॉलो करें।साथ ही, **Push Notification (घंटी के आइकॉन) को भी अलाउ (Allow) करें** ताकि हर नए ज़रूरी आर्टिकल और टेस्ट सीरीज़ का नोटिस आपके मोबाइल पर तुरंत मिल जाए!
    * 💬 **अपने सुझाव दें:** यदि आपकी कोई समस्या है या कोई सुझाव देना चाहते हैं,तो नीचे **कमेंट** करके हमें ज़रूर बताएं।
    **पूरा आर्टिकल पढ़ने के लिए आपका स्वागत है!** 🙏

Also Read This Article:4 Top Speech Techniques for Students

7.छात्र ने भाषण करने में फजीती करवाई (हास्य-व्यंग्य) (Student was embarrassed in making a speech) (Humor-Satire):

  • नेता (विद्यार्थी से):आपको भाषण करना आता है? विद्यार्थीःहाँ,क्यों नहीं? मैं भाषण देने में इतना कुशल हूँ। ऐसा मनमोहक,ओजस्वी और रोचक भाषण देता हूँ कि लोग तालियाँ बजाते ही रहते हैं।
  • विद्यार्थी ज्योंही भाषण के लिए खड़ा हुआ:पब्लिक पर नजर दौड़ाते ही पसीने छूट गए और वह हकलाने लगा।
    लोग जोर-जोर से हँसने लगे।
  • विद्यार्थी का मित्र (बात को सम्हालते हुए):माफ कीजिए मेरे मित्र की तबीयत खराब हो गयी है।मित्र चूँकि अनुभवी था,उसे बोलने का अभ्यास था।उसने ऐसा सारगर्भित भाषण दिया।लोगों ने खड़े होकर करतल ध्वनि से उसका स्वागत किया।
    भाषण खत्म होने के बाद….
  • नेताजी (व्यंग्यपूर्वक):तुम तो भाषण भट्ट ही निकले,मेरी फजीती करवा देते।मैंने तुम्हें युवा देखकर पब्लिक को बाँधने के लिए बुलाया था।
  • मित्र ने बात को सम्हालते हुए:अब बस करो,इसको ज्यादा शर्मिन्दा न करो।
  • मित्र ने एकान्त में उसे कहा (व्यंग्यात्मक भाषा में):हवाबाज कहीं के।विद्यार्थी ने नजरे झुका ली।

8.छात्र-छात्राओं के लिए पब्लिक स्पीकिंग गाइड:सफल स्पीच के 6 गुप्त तरीके (Frequently Asked Questions Related to Public Speaking Guide for Students:6 Secret ways of success Speech) से सम्बन्धित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:

प्रश्न:4.पहली बार स्टेज पर जाने वाले स्टूडेंट्स अपनी घबराहट (Nervousness) कैसे दूर करें? (How can students overcome their nervousness when taking the stage for the first time?):

उत्तर:स्टेज पर जाने से पहले अपनी आँखें बंद करके खुद को एक सफल और आत्मविश्वास से भरी स्पीच देते हुए विज़ुअलाइज़ (Visualize) करें।इसके अलावा,कमरे के पिछले हिस्से में किसी एक स्थिर बिंदु या किसी दोस्त को देखकर बोलना शुरू करें।

प्रश्न:5.स्पीच के लिए सही बॉडी लैंग्वेज (Body Language) क्या होनी चाहिए? (What should be the right body language for speech?):

उत्तर:स्टेज पर दोनों पैरों को कंधे की चौड़ाई के बराबर रखकर सीधे खड़े हों।हाथों को कमर से ऊपर रखें और बोलते समय स्वाभाविक रूप से इस्तेमाल करें।बार-बार जेब में हाथ डालना या पैरों को हिलाना बंद करें।

प्रश्न:6.क्या हर प्रकार की स्पीच के लिए एक ही जैसी तैयारी काफी है? (Is the same type of preparation sufficient for every kind of speech?)

उत्तर:मूल तकनीकें (जैसे कॉन्फिडेंस और वॉइस मॉड्यूलेशन) एक जैसी रहती हैं, लेकिन भाषण की टोन बदलती है।जैसे- प्रतियोगिता में तथ्यों और लॉजिक पर जोर होता है,जबकि सांस्कृतिक कार्यक्रमों में उत्साह और कहानियों पर।

प्रश्न:7.एक आदर्श स्टूडेंट्स स्पीच की समय सीमा (Time Duration) कितनी होनी चाहिए? (What should be the ideal duration for a student speech?):

उत्तर:किसी भी सामान्य इवेंट या कम्पटीशन के लिए 3 से 5 मिनट की स्पीच सबसे आदर्श मानी जाती है।इसमें बात पॉइंट-टू-पॉइंट रहती है और ऑडियंस का ध्यान बना रहता है।

  • उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर द्वारा छात्र-छात्राओं के लिए पब्लिक स्पीकिंग गाइड:सफल स्पीच के 6 गुप्त तरीके (Public Speaking Guide for Students:6 Secret ways of success Speech) की प्राइमरी टर्म्स के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *