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Smart 7 Strategies to Crack Competitive Exam (complete Guide)

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1.प्रतियोगिता परीक्षाओं में सफल होने की स्मार्ट 7 रणनीतियाँ [Smart 7 Strategies to Crack Competitive Exam (complete Guide)]:

  • क्या आप भी परीक्षा देते-देते परेशान हो गये हैं तो जानिये प्रतियोगिता परीक्षाओं में सफल होने की स्मार्ट 7 रणनीतियाँ (Smart 7 Strategies to Crack Competitive Exam) कम्लीट रणनीति और रणनीति का विवरण।

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2.कैसे पा सकते हैं अधिक अंक? (How to get more marks?):

  • प्रतियोगिता परीक्षा में अक्सर पाया जाता है कि कुछ सामान्य स्तर के छात्र-छात्रा सफलता अर्जित कर लेते हैं,जबकि अधिक प्रतिभाशाली छात्रों के हाथ कुछ भी नहीं लगता है।क्या आपने सोचा है कि ऐसा क्यों होता है? अन्य कारणों के अलावा विषय का चयन अर्थात् (सामान्यज्ञान,आंकिक अभियोग्यता,बौद्धिक परीक्षण) इस स्थिति को लाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा करता है।चाहे छात्र-छात्रा कितना भी प्रतिभाशाली क्यों न हो,अगर वह सभी खण्डों की तैयारी नहीं करता है तो उसकी सफलता पर हमेशा प्रश्न चिन्ह लगा रहेगा।अब सवाल यह उठता है कि सभी खण्डों की तैयारी किस प्राथमिकता के आधार पर करें।
  • सर्वप्रथम छात्र-छात्रा उस टॉपिक का अध्ययन करता है या उसकी तरफ आकर्षित होता है,जो सबसे अधिक सरल और सुगम होता है अथवा जिस टॉपिक पर कॉम्पिटेटिव एग्जाम (Competitive Exam) में सबसे अधिक प्रश्न पूछे जाते हैं,इसके अलावा अन्य पर या तो ध्यान नहीं देते हैं या नाममात्र का ध्यान देते हैं।निसन्देह अधिक अंक पाना हर छात्र-छात्रा या अभ्यर्थी को लुभाता है।लेकिन साल दर साल परीक्षा का पैटर्न बदलता रहता है।ऐसा प्रतीत होता है कि जिस विषय (टॉपिक) में छात्र-छात्राएँ अधिक अंक अर्जित करते हैं उसे और अधिक कठोर बना दिया जाता है।प्रश्नों का स्तर ऊँचा कर दिया जाता है या फिर उस टॉपिक के प्रश्नों की संख्या कम कर दी जाती है।अधिक अंक अर्जित करने के लिए तथ्यात्मक जानकारी होना ही काफी नहीं है क्योंकि प्रश्न तथ्यात्मक ही नहीं पूछे जाते हैं।
  • सबसे पहले पूर्ण पाठ्‌यक्रम का अध्ययन करें।आप पायेंगे कि सम्पूर्ण पाठ्यकम के विभिन्न खण्ड होते हैं या भिन्न-भिन्न टॉपिक पर प्रश्न पूछे जाते हैं।जब हम चयनात्मक अध्ययन नीति अपनाएं तो कठिन खण्ड या टाॅपिक वाले को अधिक समय देकर तैयार करें।अब सवाल यह उठता है कि काॅम्पीटेटिव एग्जाम के लिए अध्ययन स्रोत क्या हो? (What is the study source for a competitive exam?) यह एक महत्त्वपूर्ण व निर्णायक सवाल है,अतः किताबों के चयन के प्रति आप सचेत रहें।बाजार में बहुत सारी किताबें विद्यमान हैं,पर हमें प्रामाणिक पुस्तकों का ही अध्ययन करना चाहिए।
    विदेशी लेखकों द्वारा लिखी गई पुस्तकें आमतौर पर उन्हीं के देश के विद्यार्थियों के हित को ध्यान में रख कर लिखी गई होती हैं,अत: वे प्रतियोगिता परीक्षा की मांग के पूरी तरह अनुरूप नहीं है।
  • पाठ्‌यक्रम के अध्ययन व पुस्तकों के चयन के पश्चात् हमें विगत वर्षों में पूछे गए प्रश्नों का अध्ययन करना चाहिए। सामान्यतया पाँच साल के प्रश्न-पत्रों के विश्लेषण से हमें प्रश्नों का स्वरूप ज्ञात हो जाता है।

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3.अध्ययन की रणनीति (Study Strategy):

  • प्रश्नों के स्वरूप से अवगत हो जाने के बाद हमें प्रत्येक टॉपिक के नोट्स बना लेने चाहिए।नोट्स बनाने से जहाँ आपकी अवधारणा स्पष्ट होगी,वहीं लेखन शैली का भी विकास होगा।दूसरों के बनाये गये नोट्स का सहारा तब तक न लें जब तक कि आप उनके स्तर के प्रति आश्वस्त न हो जाएँ।आप अध्ययन चयनात्मक रीति अर्थात प्राथमिकता के क्रम (Order of Priority) से करें क्योंकि सम्पूर्ण पाठ्‌यक्रम पर स्टेप-बाइ-स्टेप ही पकड़ मजबूत बनाई जा सकती है।नोट्स बनाते समय निम्न नियमों का पालन करें:
  • (1.)किताबी भाषा का प्रयोग न करें,समझ कर लिखे गए नोट्स की भाषा ही सरल होती है।
  • (2.) नोट्स बहुआयामी हों यानी इस विषय के सभी पहलू जैसे आधार,कारण,समानता,असमानता,पक्ष व विपक्ष में तर्क आदि का समावेश अवश्य करें।
  • (3) नोट्स मानचित्र,माॅडल व चार्ट युक्त हों।
  • (4.)आपके नोट्स में तथ्य तथा विश्लेषण व सामंजस्य (Analysis and Coherence) होना चाहिए।
    अभ्यास के दौरान सटीकता का ध्यान अवश्य रखें। मुख्य बिन्दुओं पर ध्यान केन्द्रित करते हुए इनके नोट्स बना लें।नोट्स बिन्दु शैली में होने चाहिए।उल्लेख विषय पर केन्द्रित होना चाहिए।अंग्रेजी की कहावत है कि ‘नौ रिस्क नो गम’ (No risk,no game) यह प्रतियोगिता परीक्षा के लिए उपयुक्त है।आप‌को खतरों से खेलना ही पड़े‌गा,क्योंकि सम्पूर्ण पाठ्यक्रम तैयार करना न तो सम्भव है और न ही विवेकपूर्ण।किसी भी एक टॉपिक के विस्तार और गहराई का कोई अन्त नहीं है।
    हाँ,पाठ्यक्रम के सभी टॉपिक्स की तैयारी अवश्य करनी चाहिए।जैसे आप G.K. और गणित की तैयारी कर लें और बौद्धिक परीक्षण की तैयारी न करें तो ऐसा खतरा तो ले डूबता है।किसी भी टॉपिक को छोड़‌ना हानिकारक सिद्ध हो सकता है।अतः हमें प्रत्येक टाॅपिक की तैयारी करनी पड़ेगी।नोट्स से जहाँ हमारा ज्ञान व्यापक होगा,वहीं विषयों के अन्तर्सम्बन्ध को समझ कर हमारी विश्लेषण करने की क्षमता का भी विकास होगा।हाँ,हम टाॅपिक्स का प्राथमिकता क्रम तय कर सकते हैं।

4.लक्ष्य को साधने की कारगर नीति (Effective strategy to achieve the goal):

  • भारत में प्रतियोगिता परीक्षाओं की सर्वाधिक प्रतिष्ठा है। इन्हीं परीक्षाओं के द्वारा क्लर्क से लेकर उच्चाधिकारियों की नियुक्ति की जाती है।चूंकि ये परीक्षाएँ सामान्यतः एक ही चरण में नहीं होती है।बल्कि दो या तीन चरणों में समाप्त होती है।
  • उचित रणनीति एवं पाठ्य सामग्रियों के अभाव में औसत दर्जे के विद्यार्थी अच्छे अंक पाने में विफल रह जाते है जबकि जागरूक विद्यार्थी अच्छे अंक पा जाते हैं।
    अधिकांश विद्यार्थियों को नये टॉपिक पर तैयारी करनी ही पड़ती है।जैसे गणित विषय की पृष्ठभूमि वाले विद्यार्थी को GK. और आर्टस ऐच्छिक विषय वाले विद्यार्थियों को गणित और बौद्धिक परीक्षण के खण्ड की तैयारी करने में कठिनाई का सामना करना पड़ता है।
  • पहले प्रश्नों की प्रकृति सरल एवं विवरणात्मक आधारों से युक्त होती थी।ऐसे प्रश्न समझने में सुविधाजनक थे
    एवं साथ ही यह भी आसानी से पता चल जाता था कि प्रश्नों के उत्तर किस प्रकार दिया जाएगा? उस समय तक पाठ्यक्रम इतना संक्षिप्त होता था कि गम्भीर किस्म के अध्येता पूरे पाठ्यक्रम को आत्मसात कर जाते थे।पूरे पाठ्यक्रम से इतने कम प्रश्न बन पाते थे कि प्रायः प्रतिवर्ष प्रश्नों की पुनरावृत्ति हो जाती थी,यही कारण था कि आरम्भ में काफी अंक मिल जाते थे,लेकिन अब बाजी बिलकुल पलट गयी है।अब गम्भीर किस्म के परीक्षार्थियों को ही अच्छे अंक मिल पाते हैं एवं औसत दर्जे के परीक्षार्थी काफी कम अंक प्राप्त कर पाते हैं,यद्यपि वे भी सभी प्रश्नों के उत्तर देते हैं।
  • सभी अभ्यर्थियों के लिए कोई सामान्य रणनीति नहीं सुझायी जा सकती,क्योंकि तैयारी करने वाले अभ्यर्थीगण कई वर्गों में बँटे होते हैं और उसी के अनुरूप उनके लिए भिन्न-भिन्न रणनीति की आवश्यकता होती है।परीक्षार्थी इस साइट पर विभिन्न लेखों के आधार पर स्वयं भी रणनीति विकसित कर सकते हैं जो उनके पारिवारिक,शैक्षणिक,आर्थिक सहित विभिन्न पृष्ठभूमि के सर्वेधा अनुकूल हो।यद्यपि प्रत्येक वर्ग के परीक्षार्थियों के लिए अलग-अलग रणनीति की आवश्यकता अवश्य है,फिर भी कुछ ऐसी सामान्य बातें हैं जिन्हें जानना सभी वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए अति आवश्यक है।

5.नोट्स कितना बनायें व कैसे? (How much and how to make notes?):

  • हालांकि निबन्धात्मक व वस्तुनिष्ठ दोनों प्रकार की परीक्षा देने वाले परीक्षार्थियों को नोट्स बनाने चाहिए। इसके माध्यम से उनकी लेखन शैली व विश्लेषणात्मक (Writing Style and Analytical) क्षमता निखरती है।ऐसे में उन परीक्षार्थियों को अच्छे अंक प्राप्त होते है जो पूछे गए प्रश्नों का सारगर्भित उत्तर लिखने में सक्षम होते हैं।हालांकि अनेक परीक्षार्थी सीधे पाठ्य-पुस्तकों से ही पढ़ लेते हैं,क्योंकि आरम्भ से ही उनकी ऐसी प्रवृत्ति होती है और शायद उनका काम चल भी जाता है।परन्तु प्रतियोगिता परीक्षाओं में यह तरीका अधिक कारगर नहीं होता,क्योंकि उपर्युक्त तरीके से कोई भी परीक्षार्थी अपनी बातों को कम से कम शब्दों में प्रस्तुत करने में असफल रहता है।
  • खासकर जब परीक्षा काफी नजदीक हो तो वैसे में सभी किताबों को एक साथ नहीं दुहराया जा सकता और उपर्युक्त तरीका अपनाने वाले विद्यार्थी अच्छे अंक लाने में असफल रहते है,जबकि उनसे कम पढ़कर भी अनेक परीक्षार्थी अच्छे अंक प्राप्त कर लेते हैं,क्योंकि उन्होंने विधिवत् कुछ चयनित अध्यायों पर नोट्स बनाए थे।वस्तुतः कुछ चयनित अध्यायों पर नोट्स बना ही लेना चाहिए,ताकि कम से कम समय में उसे दोहराया जा सके।खासकर जब परीक्षा नजदीक हो तो यही नोट्स रामबाण का काम करता है।
  • नोट्स बनाने से पूर्व यह समस्या आती है कि नोट्स कहाँ से बनायें,कितना बनाएं और कैसे बनायें ? स्तरीय पुस्तकों को ढूँढना आज कोई भी मुश्किल कार्य नहीं है।उनकी मदद से आप नोट्स बना सकते हैं।स्तरीय पुस्तकें काफी बोधगम्य एवं रुचिकर होती हैं।पुस्तकों को संगृहीत करने के उपरांत यह बात सामने आती है कि कितनी मात्रा में नोट्स बनाया जाये ? इसके लिए आपकी क्षमता,परीक्षा के लिए समय तथा अभी और कितने वर्षों तक परीक्षा दे सकते हैं ये बातें असरदार होती हैं।अगर आपको मात्र अंतिम अवसर ही प्राप्त है तो आप मात्र उन्हीं अध्यायों के महत्त्वपूर्ण प्रश्नों पर नोट्स (Notes on Important Questions) बनायें,जो कि उस वर्ष पूछे जाने वाले सम्भावित प्रश्नों में गिने जाते हैं।
  • आप अपने आप को मात्र उन्हीं प्रश्नों तक सीमित कर लें ताकि अगर वे प्रश्न आएं तो आप उन पर बेहतर तरीके से लिख पाएं और अच्छे अंक प्राप्त कर सकें।इससे अधिक विस्तार में जाना आपके लिए सिर्फ अनुपयोगी बल्कि घातक भी होगा,क्योंकि उस स्थिति में आप अपने दूसरे वैकल्पिक विषय एवं सामान्य अध्ययन पर पर्याप्त ध्यान नहीं दे पाएंगे और उन विषयों में आपको अच्छे अंक प्राप्त नहीं होगे।अतः आप महत्त्वपूर्ण एवं सम्भावित प्रश्नों को चुनें और उन पर नोट्स बनाएं।
  • अगर किसी परीक्षार्थी को अभी एक-दो अवसर प्राप्त हों तो वह महत्त्वपूर्ण अध्यायों पर पूरी तरह से अपनी पकड़ बनाने का प्रयास करें,क्योंकि उन्हें अगले वर्षों में भी उनकी आवश्यकता पड़ सकती है।पूरे अध्याय पर नोट्स बनाने से यह सुनिश्चित हो जाता है कि किसी अध्याय से कुछ भी पूछा जाये तो उत्तर दिया जा सकता है।इस प्रकार के परीक्षार्थियों को वैसे अध्यायों का चयन कर लेना चाहिए,जिनसे प्रतिवर्ष प्रश्न पूछे ही जाते हैं।
  • यह बात बिल्कुल सत्य है कि परीक्षा में पूछे जाने जाने वाले प्रश्न कुछ ही अध्यायों से लिये जाते हैं न कि सम्पूर्ण पाठ्यक्रम से।अतः सम्पूर्ण पाठ्‌यक्रम को गहराई और विस्तृत रूप से पढ़ना न तो आवश्यक है और न ही उपयोगी।इसलिए अगर किसी परीक्षार्थी ने पूरे पाठ्यक्रम को विस्तृत और गहराई से नहीं भी पढ़ा है तो यह कतई घबराने की बात नही है,परन्तु उस स्तर तक तो अपनी पकड़ बना ही ली जानी चाहिए जिस स्तर तक काॅम्पीटेटिव एग्जाम में (The level to which in the competitive exam) प्रश्न पूछे जाते हैं।आपको पहले ही बताया जा चुका है कि प्रश्नों की प्रकृति एवं पाठ्यक्रम में कैसा अन्तर्सम्बन्ध है।इसके सहारे आप उन टॉपिक्स के लिए सामग्री का चयन कर सकते हैं और उन पर लिखित नोट्स बना सकते हैं।यही नोट्स आपका हथियार है,जिसके सहारे आप परीक्षा कक्ष में प्रश्न-पत्र से निपट सकेंगे।
  • कुछ परीक्षार्थी ऐसे भी होते हैं जो पहली बार ही परीक्षा दे रहे होते हैं।वैसे अभ्यर्थी न सिर्फ महत्त्वपूर्ण टॉपिक्स (Important Topics) पर ही नोट्स बनाएं,अपितु कुछ वैसे प्रश्नों पर भी नोट्स बना लें जो कि कभी-कभी अपवादस्वरूप पूछ लिये जाते हैं।ऐसे अभ्यधियों को एक दीर्घकालीन रणनीति (Long-term strategy of competitive exams) अपनानी चाहिए ताकि कॉम्पिटेटिव एग्जाम की विभिन्न परीक्षाओं में भी वे बेहतर अंक प्राप्त करने में सफल हो सकें।

6.परीक्षा कक्ष में ध्यान रखी जाने वाली बातें (Things to keep in mind in the exam room):

  • (1.)परीक्षा कक्ष में प्रत्येक प्रश्न को दो या तीन बार पढ़ें और उसके मुख्य बिन्दुओं पर ध्यान केन्द्रित करें।प्रश्नों में प्रयुक्त कुछ शब्दों जैसे व्याख्या,विश्लेषणात्मक अध्ययन,समालोचनात्मक परीक्षण आदि का विशेष ध्यान रखें।इन पहलुओं को अगर हम नजरअंदाज करेंगे तो हम अपने उत्तर को प्रश्न की मांग के अनुरूप नहीं ढाल पाएंगे।आमतौर पर विद्यार्थी प्रश्न देखते ही लिखना शुरू कर देता है।उसे सिर्फ उस विषय से मतलब होता है,क्या पूछा जा रहा,इससे उसे प्रायः कोई मतलब नहीं होता।ऐसी स्थिति में जब कम अंक मिलते हैं तो उन्हें हैरानी भी होती है।ऐसे विद्यार्थियों को हमारा सुझाव है कि वे प्रश्न को पढ़ने के पश्चात् थोड़ी देर उस पर चिंतन करें।अगर सम्भव हो तो उस उत्तर के मुख्य बिन्दु को कहीं लिख लें।इस कार्य में समय तो लगता है पर उसके कई लाभ हैं।जिनमें सर्वप्रथम आपका उत्तर व्यवस्थित हो जाता है।दूसरा आपको उत्तर लिखने के क्रम में रुक कर अगले परिच्छेद के बारे में सोचना नहीं पड़ता। तीसरा आपके उत्तर में निरंतरता बनी रहती है।चौथा आप अनावश्यक जानकारी देने में अपना समय नष्ट नहीं करते हैं।पाँचवा आपका उत्तर बहुआयामी हो जाता है।
  • (2) NCERT की पुस्तकों को ‘पुस्तकों का बाइबल’ (The Bible of Books) कहा जाए तो अतिश्योक्ति नहीं होगी।NCERT की नौवीं से बारहवीं तक की सभी पुस्तकों का अध्ययन अनिवार्य है।उत्तर लिखते वक्त हमें NCERT द्वारा प्रयुक्त भाषा का प्रयोग करना चाहिए।अनावश्यक रूप से अलंकृत भाषा का प्रयोग करने से हम कॉम्पिटेटिव एग्जाम में वांछनीय सरल अभिव्यक्ति को नुकसान पहुंचायेंगे।अतः भाषायी जाल का प्रयोग कदापि न करें।
  • (3.) परीक्षा भवन के अंदर जाने से पूर्व जहाँ कुछ विद्यार्थी अति उत्साहित रहते हैं वहीं कुछ घबराते हुए नजर आते हैं।यह इस बात पर निर्भर करता है कि किस परीक्षार्थी ने कितनी गम्भीरतापूर्वक अपनी तैयारी को अंजाम दिया है।गम्भीर किस्म के अध्येता (Serious Kind of Scholars) सामान्यतः आत्मविश्वास से भरे होते हैं,जबकि आधी-अधूरी पढ़ाई करने वाले छात्र-छात्राओं में प्रायः घबराहट पायी जाती है और उसी घबराहट के कारण भी उनका प्रदर्शन प्रभावित होता है।इसलिए अच्छे एवं संतुलित प्रदर्शन के लिए परीक्षार्थियों को आत्मविश्वास से भरा होना चाहिए।
Candidates taking the competitive exam exam in the examination hall

One of the Smart 7 Strategies to Crack Competitive Exam While Proving
Candidates the Things to Keep in Mind in the Exam Room

  • (4) कभी-कभी गंभीर किस्म के पढ़ाकू भी अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाते हैं,क्योंकि वे परीक्षा कक्ष के अंदर सहज नहीं रह पाते और अव्यावहारिक प्रश्नों को लिखने की गलती कर बैठते हैं,आगे बढ़ने पर फिर उसे काटते है और फिर दूसरा प्रश्न लिखना आरम्भ कर देते हैं जबकि यह एक अस्वस्थ परम्परा तो है ही और यह किसी के भी प्रदर्शन को बुरा बना सकता है।अतः परीक्षा भवन के अंदर परीक्षार्थियों को संतुलित रहने का प्रयास करना चाहिए।
  • (5.)प्रथमतः आप कक्ष के अंदर अपना स्थान ग्रहण करें और अपने कलम,प्रवेश-पत्र आदि सामने रखें एवं उत्तर पुस्तिका की प्रविष्टियों को सही-सही भरें।खासकर अपने क्रमांक एवं प्रश्न-पत्र की संख्या आदि को पुनः देख लें कि सही है अथवा नहीं।यदि कम्प्यूटर बेस्ड  परीक्षा है तो भी इन बिन्दुओं को जाँचे।
  • (6.)प्रश्न-पत्र मिलते ही उसे शांत होकर पढ़ें।तेजी से पढ़ने पर वह समझ में नहीं आते और जब तक वह समझ में नहीं आएगा,आप सही उत्तर नहीं लिख पायेंगे। अगर पहली बार पढ़ने पर प्रश्न की प्रकृति समझ में न आए तो उसे दुबारा पढ़ें,इससे आप समझ जाएंगे कि प्रश्न की मांग क्या है? इस प्रकार 5 से 7 मिनट में प्रश्न पत्र को बिल्कुल शांत चित्त होकर पढ़ लें और उसके किन-किन प्रश्नों का उत्तर देना है यह आप तय कर लें। कभी-कभी यह भी होता है कि आप किसी प्रश्न के बारे में यह सोच लेते हैं कि इस पर मैं बहुत अच्छी तरह उत्तर दे पाऊंगा,जबकि एक-दो पृष्ठ लिखने के बाद आपके विचारों में न तो तारतम्यता ही रह पाती है और न ही उचित विषयवस्तु।अतः आप आरम्भ में ही यह तय कर लें कि आप किस प्रश्न को अच्छी तरह से लिख पाएंगे।
  • (7.) प्रत्येक प्रश्न का उत्तर लिखने से पूर्व उस प्रश्न एवं उत्तर की विषयवस्तु पर कम से कम दो मिनट अवश्य ही विचार कर लें कि उत्तर में किन-किन बातों को लिखना है ताकि निर्धारित समय में आप सारगर्भित उत्तर दे सकें।ऐसा विचार न करने से कभी-कभी आप अनावश्यक बातें भी लिख जाएंगे और आवश्यक बातों को छोड़ देंगे।
  • (8.)प्रत्येक प्रश्न का उत्तर लिखने से पूर्व उस प्रश्न एवं उत्तर की विषय वस्तु पर कम से कम दो मिनट अवश्य विचार कर लें कि उत्तर में किन-किन बातों को लिखना है ताकि निर्धारित समय में आप सारगर्मित उत्तर दे सकें। ऐसा विचार न करने से कभी-कभी अनावश्यक बातें भी लिख जाएंगे और आवश्यक बातों को छोड़ देंगे।
  • (9.) प्रत्येक प्रश्न समाप्त होने के बाद लगभग 1-2 मिनट का विश्राम लें,तदुपरांत नए प्रश्न को पढ़ने एवं उसके उत्तर लिखने का उपक्रम करें।जब आधे से अधिक प्रश्नों के उत्तर लिखे जा चुके हों तो वैसी स्थिति में परीक्षा कक्ष से बाहर प्रसाधन कक्ष की ओर से भी आप हो आएं ताकि शेष प्रश्नों के उत्तर देने में थोड़ी ताजगी महसूस कर सकें।
  • (10.) जब सभी प्रश्नों का उत्तर आप लिख डालें तो उनकी क्रम संख्या आदि अवश्य देख लें।ऐसा न हो कि प्रश्न संख्या 3 की बजाय 4 लिखे गए हों।इसका अत्यधिक नकारात्मक प्रभाव पड़ता है और कभी-कभी तो ऐसी स्थिति में उस प्रश्न का मूल्यांकन भी नहीं हो पाता।अतः इस प्रकार की सावधानियां अवश्य बरतें।
    (11.)अगर समय रहे तो अपने उत्तर का एक बार सरसरी निगाह से रिवीजन कर लें ताकि आपको संतुष्टि का अहसास हो और आगे की परीक्षाओं के लिए आपमें एक नया आत्मविश्वास पैदा हो सके।

7.काम्पीटेटिव एग्जाम के लिए अंतिम सलाह (Final Advice for Competitive Exams):

  • अंतिम सलाह यह है कि कभी भी बाजारू पुस्तकें मेड इजी (सरल अध्ययन),प्रश्नोत्तरियों,गाइडों आदि का सहारा न लें।इनमें विषय प्रतिपादन अत्यन्त सतही और बेमेल होता है।परीक्षकों के ऊपर इन पुस्तकों के आधार पर प्रस्तुत सामग्री का प्रतिकूल असर पड़‌ता है।वास्तव में इन बाजारू पुस्तकों का प्रणयन गंभीर विद्यार्थियों के लिए होता भी नहीं है।जो भी लेखक इनकी रचना करता है उसके जेहन में केवल उन विद्यार्थियों का ख्याल होता है जिनका उद्देश्य केवल स्नातक व स्नातकोत्तर परीक्षाएं किसी भी तरह पास कर लेना भर होता है।
  • ये पुस्तके काॅम्पीटेटिव एग्जाम के आकांक्षियों के लिए नहीं होती।एक बात और बाजारों में प्रतियोगी परीक्षाओं के नाम पर भारी,भरकम कीमतों में कुछ पुस्तकें बिकती हैं।हमारा तजुर्बा है कि इनका जितने जोर-शोर से प्रचार-प्रसार किया जाता है उतना दम इसमें होता नहीं है।इनके द्वारा केवल आपकी प्रतियोगी भावनाओं का सहारा लेकर प्रकाशकों द्वारा लाभ उठाया जाता है। आप अनावश्यक रूप से ऐसी पुस्तकों के पीछे न दौड़े।केवल उत्कृष्ट विद्वानों की पुस्तकों और उनके आधार पर स्वयं तैयार किए गए नोट्स का सहारा लें।यदि आपका अध्ययन व्यापक और गहरा (Study Comprehensive and Deep) है,यदि आपके नोट्स परिपूर्ण हैं और आपने उनको नियमित अभ्यास द्वारा हृदयंगम कर लिया है तो कोई कारण नहीं कि काॅम्पीटेटिव एग्जाम में आप उच्च अपेक्षित अंक स्तर को न पा सकें।
  • आशा है कि इस अध्ययन नीति से आपका भय जाता रहेगा और आप उत्साह से भर उठेंगे।अगर उपरोक्त सुझावों पर आप अमल करेंगे तो आप अवश्य ही लाभान्वित होंगे और परीक्षा में निश्चित ही अच्छे अंक प्राप्त कर सकेंगे।
    उपर्युक्त आर्टिकल में प्रतियोगिता परीक्षाओं में सफल होने की स्मार्ट 7 रणनीतियाँ (Smart 7 Strategies to Crack Competitive Exam) के बारे में विस्तार और गहराई से समझाया गया है।
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8.रोटी नहीं देगी (हास्य-व्यंग्य) (Bread won’t give):

  • टीचर एक स्टूडेंट से मोबाइल पर सोशल मीडिया पर सर्फिंग करने पर समय बर्बाद करने से बहुत परेशान थी,लेकिन कभी कुछ कहती नहीं थी।एक दिन उससे रहा नहीं गया तो वह बोली तुम्हारा ध्यान काॅम्पीटेटिव एग्जाम की तैयारी करने पर नहीं रहता है।
  • टीचर:बेटा,छोड़ दे ये सोशल मीडिया चलाना,यह तुझे रोटी नहीं देने वाली।
  • छात्र:हाँ,मैडम मुझे पता है यह मुझे रोटी नहीं देने वाली,लेकिन रोटी बनाने वाली देगी।

9.प्रतियोगिता परीक्षाओं में सफल होने की स्मार्ट 7 रणनीतियाँ [Frequently Asked Questions Related to Smart 7 Strategies to Crack Competitive Exam) से सम्बन्धित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:

प्रश्न:1.काम्पीटेटिव एग्जाम में शीर्ष पर पहुँचने का क्या मंत्र है? (What is the mantra to top a competitive exam?):

उत्तर:एक सार्थक शुरुआत शीर्ष पर पहुँचने की प्रथम एवं आवश्यक सीढ़ी होती है।समय गंवाने का अर्थ होता है:सुनहरा अवसर खो देना।

प्रश्न:2.ग्रामीण क्षेत्र के प्रतियोगी को परीक्षा की तैयारी के लिए क्या विशेष प्रयास करने चाहिए? (What special efforts should a contestant from rural areas make to prepare for the exam?):

उत्तर:आज गाँव और शहरों में कोई खास अन्तर नहीं रह गया है केवल ऑफलाइन कोचिंग को छोड़कर।अध्ययन सामग्री,ऑनलाइन कन्टेन्ट,समाचार पत्र आदि गाँवो में भी उपलब्ध हैं।बस केवल गम्भीरतापूर्वक प्रयास करने की जरूरत है।

प्रश्न:3.ग्रामीण छात्र-छात्रा किस प्रकार परीक्षा रणनीति बनाएँ? (How should rural students adopt examination strategy?):

उत्तर:नियमित रूप से पुस्तकें पढ़ें।शिक्षक से सम्पर्क करके लाभ उठाएं।नियमित रूप से समाचार पत्र पढ़ें।गाँव में कोचिंग नहीं है तो पत्राचार द्वारा कोचिंग करें।स्वयं के नोट्स बनाएं।नियमित रूप से पढ़ने की आदत डालें।

  • उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर द्वारा प्रतियोगिता परीक्षाओं में सफल होने की स्मार्ट 7 रणनीतियाँ (Smart 7 Strategies to Crack Competitive Exam) की प्राइमरी टर्म्स के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

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