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10 Amazing Secrets of Success:Consistency and Self-discipline

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1.सफलता के 10 अद्भुत रहस्य:निरन्तरता और आत्मानुशासन (10 Amazing Secrets of Success:Consistency and Self-discipline):

  • सफलता के 10 अद्भुत रहस्यों (10 Amazing Secrets of Success) का परिणाम एक दिन में दिखाई नहीं देने लगेगा।सफलता कोई एक दिन का चमत्कार नहीं है,बल्कि ये रोजाना किये जाने वाले छोटे-छोटे प्रयासों का परिणाम है।आइए जानते हैं सफलता के इन 10 सुनहरे नियमों को।

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2.सफलता के लिए क्रिया व विचार तथा भावना में समन्वय (Coordinating Action and Thought and Emotion for Success):

  • सफलता के सूत्र असफलताओं के झंझावातों में से निकलते हैं।सफलता की खोज असफल हुए कारणों में निहित होती है।यदि असफल हुए कारणों को ढूँढ़-खोजकर उनका निराकरण कर दिया जाए तो सफलता शत-प्रतिशत सुनिश्चित है।फिर इस सफलता को कोई रोक नहीं सकता।
  • सफलता के परिदृश्य में केवल उन बातों पर गौर किया जाता है,जिनका क्रियान्वयन करना है,परंतु असफलता से हाथ लगे कारणों में उन स्थितियों का भेद खुलता है,जिन्हें अपनाया गया होता तो सफलता अवश्य मिलती।अतः असफलता के निदान-निराकरण में सफलता का सौंदर्य निखरता है।इस सफलता का सेहरा उसी के सिर पर बंधता-सजता है,जो कर्त्तव्य और भावना के द्वंद्व में जीत जाता है,उनसे उबर जाता है।
  • सफल वही होता है,जो अपने अस्तित्व को धारदार वज्र बनाकर अपने लक्ष्य पर टूट पड़ता है।इससे कम में सफलता नहीं मिल सकती है।अस्तित्व का तात्पर्य है क्रिया,विचार (Idea) और भावना (Emotion):तीनों का समन्वय एवं एकीकरण।जिनके इन पक्षों में संपूर्ण सामंजस्य नहीं होगा,वह टूटेगा,बिखरेगा एवं बँटेगा।बँटे हुए,विभाजित अस्तित्व से सफलता नहीं पाई जा सकती है।
  • सफल तो वही होता है,जो अपने लक्ष्य के प्रति अपने संपूर्ण अस्तित्व को खो देने का साहस कर सके। सफलता के लिए इतनी कीमत तो अदा करनी ही पड़ेगी।इससे कम में काम नहीं चलेगा।हिमालय के शिखरों पर फतह करना भी चाहते हैं और ठंढ से घबराते हैं तो कभी भी इन शिखरों पर जीत का परचम लहराया नहीं जा सकता है।
  • द्वंद्व असफलता का कारण है।द्वंद्व (duel) से समस्त मानसिक एवं भावनात्मक ऊर्जा फँसकर नष्ट हो जाती है।जब ऊर्जा ही नष्ट हो जाएगी तो सफलता के लिए आवश्यक साहस,शौर्य (bravery) एवं पराक्रमी जज्बा कहाँ से मिलेगा!इस जज्बे के लिए ऊर्जा की आवश्यकता पड़ती है और यह ऊर्जा तभी मिलती है,जब कोई द्वंद्व की दलदल से ऊपर उठता है।इसको पीछे छोड़ आगे बढ़ने का साहस करता है।
  • द्वंद्व से ऊपर उठते ही हमें शक्ति मिलेगी।मन एवं भाव नवीन ऊर्जा से भर उठेंगे।ऊर्जान्त्वित मन एवं हृदय विचारों एवं भावनाओं को नई ऊँचाई प्रदान करते हैं।जैसे-जैसे विचारों एवं भावनाओं में सामंजस्य बढ़ेगा,रचनात्मकता एवं सृजनात्मकता (creativity) के नवीनतम आयाम खुलते चले जाएँगे।फिर किसी भी क्षेत्र में कुछ नया करने के लिए विचार ही नहीं मिलेगा,बल्कि उसे पूरा करने के लिए साहस एवं शौर्य भी निरंतर मिलता रहेगा;क्योंकि इसमें भावना की ऊर्जा भी तो समाविष्ट होती है।
  • भावना परिष्कृत होती है तो उसमें बलिदानी जज्बा पैदा होता है।किसी भी कार्य को चाहे वह भौतिक जगत का हो या फिर आध्यात्मिक जगत का,मनोयोग (single-mindedness) एवं साहसपूर्वक किया जा सकता है।यह सफलता का प्रथम सोपान है।

3.मनोयोग एवं साहस का होना (Having Focus and Courage):

  • सफलता के मूल में मनोयोग एवं साहस का होना आवश्यक है और यह केवल द्वंद्व से पार चले जाने से मिल जाता है।द्वंद्व से पार चले जाने से सकारात्मक विचारों एवं पावन भावनाओं (Sacred Feelings) का बंद स्रोत स्वतः फूट पड़ता है।इस स्रोत के खुलते ही सफलता की अनेक ऊँचाइयाँ खुलती चली जाती हैं।दरअसल असफलता हमारी कमजोरी एवं दुर्बल मानसिकता में है,जो अनगिनत चिपचिपे,धुँधले एवं अस्पष्ट नकारात्मक विचारों से घिरी रहती है।
  • नकारात्मक विचार ये बताते,जताते हैं कि हम कैसे असफल होंगे।इनसे घिरा व्यक्ति उन बातों पर अधिक ध्यान केंद्रित करता है,जिन पर तवज्जो किसी कीमत पर नहीं देनी चाहिए।वह उस मुद्दे पर बहस करना अधिक पसंद करता है,जिसका कोई मूल्य नहीं होता है और जो सफलता के लिए सदा बाधक होता है।
    सफलता के लिए केवल सकारात्मक विचारों को प्रश्रय एवं पनाह देना चाहिए।अतः हमें अच्छे विचारों की साझेदारी (Sharing of ideas) करनी चाहिए।जो भी इन विचारों के वाहक हैं,उनको सहयोगी मानना चाहिए एवं इसके विरुद्ध जाने वालों को बड़ी समझदारी एवं शालीनता से अपने से काट लेना चाहिए।हम असफल इसलिए भी होते हैं,क्योंकि हम नहीं जानते कि जिसे लक्ष्य बनाया है,उसके अनुरूप हमारे अंदर उसे निभाने के लिए क्षमता एवं सामर्थ्य है भी या नहीं।हमारी क्षमता से बड़ी चीज को हम निभा पाने में अक्षम एवं असमर्थ होते हैं।यह असमर्थता हमें हतोत्साहित करती है।
  • बारंबार करने पर भी हम उसे कर नहीं पाते हैं अंत में हमें लगने लगता है कि हम कभी सफल हो ही नहीं सकते।वस्तुतः यह देखना चाहिए कि हम आखिर असफल हो क्यों रहे हैं।यदि अपनी सामर्थ्य के अनुरूप एवं रुचि के अनुसार लक्ष्य निर्धारित किए होते तो अवश्य सफल होते और यदि असफलता हाथ लगती,तो भी हम हताश-निराश नहीं होते (Don’t get frustrated and discouraged) और फिर से उस कार्य में लग जाते।अतः सफलता के लिए आवश्यक है कि लक्ष्य अपनी सामर्थ्य एवं रुचि के अनुरूप हो।
  • सफलता का अन्य मापदंड है सर्वोपरि प्राथमिकता देना। अँगरेजी में कहावत है:’फर्स्ट थिंग्स फर्स्ट’ (First Things First) अर्थात् जिसे सबसे पहले करना है,उसे सर्वोपरि वरीयता देकर सबसे पहले करना चाहिए। वरीयता को प्राथमिकता अवश्य देनी चाहिए,क्योंकि इसके अभाव में अन्य कार्य कितने भी महत्त्वपूर्ण क्यों न हों उस परिस्थिति के लिए गौण ही होते हैं और प्रथम वरीयता की चीज कितनी ही गौण क्यों न हो,अतिमहत्त्वपूर्ण होती है।
  • वक्ता कितना ही विद्वान एवं प्रभावी बोलने वाला क्यों न हो,सबसे पहले माइक की व्यवस्था पर गौर अवश्य करना चाहिए।वह विद्वत्ता की छाप (Stamp of scholarship) तभी छोड़ पाएगा,जब माइक-व्यवस्था,जिससे कि श्रोता ठीक-ठीक सुन-समझ सकें,ठीक हो।इसके लिए माइक-व्यवस्था को देखने वाला ऑपरेटर चाहे कितना भी गौण क्यों न हो,यहाँ उसकी उपयोगिता एवं उपादेयता सर्वप्रथम है,अतः उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

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4.सफलता के अन्य तत्त्व (Other Elements of Success):

  • सफलता के अन्य तत्त्व हैं:संसाधनों की तुलना में व्यक्तिगत कुशलता (Personal Skills) को अधिक महत्त्व न देना।इससे सफलता बाधित होती है;क्योंकि जो हमारे पास है,उसी से काम चलाना है,न कि किसी की व्यक्तिगत कुशलता से।कार्य-योजना को निरंतर परखते रहना चाहिए।एक बार योजना को क्रियान्वित करने के बाद उसकी तब तक निगरानी करते रहना चाहिए,जब तक कि वह पूर्ण न हो जाए।
  • सामान्य रूप से इसे क्रियान्वित करने के बाद इस पर ध्यान नहीं दिया जाता और कार्य पूर्ण होते-होते रह जाता है।स्कूटर में ईंधन एवं इन्जन का जितना महत्त्व है,उतना नट-बोल्ट का भी है,जिसके बिना दुर्घटना की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है।अतः इस पर भी बराबर ध्यान देना चाहिए।
  • सफलता के लिए प्रारब्ध को दरकिनार नहीं किया जा सकता है।सुख-दुःख तो आएँगे ही,आपत्ति-विपत्ति तो घटेगी ही।इन्हें सहकर ही आगे बढ़ना चाहिए।बुरे प्रारब्ध की दशा में सब कुछ ठीक रहने एवं करने के बावजूद निरंतर असफलता मिलती है और अच्छे प्रारब्ध (Good Luck) में अनायास एवं कम प्रयास में भी सफलताएँ मिलती जाती हैं।सफलता के लिए यह भी एक बड़ा कारक है,जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।
  • अतः बुरी परिस्थिति में कठिनाइयों के अँगारों पर बढ़ चलना,फिर चाहे उसके लिए कितनी ही कीमत क्यों न चुकानी पड़े,यह बलिदानी जज्बा ही सफलता की नई कहानी गढ़ता है।अतः भगवान पर आस्था रखकर अपने चरम प्रयत्न-पुरुषार्थ को लगाकर लक्ष्य की ओर बढ़ना ही सफलता का सूत्र है।

5.लक्ष्य की स्पष्टता (Clarity of Goal):

  • अक्सर हम सोचते हैं कि जो लोग कामयाब हैं,उनके पास या तो शानदार किस्मत थी या वो बचपन से जीनियस थे।लेकिन सचाई इसे बिल्कुल अलग है।
    पहले तय करें कि जाना कहां है? बिना लक्ष्य के मेहनत करना बिल्कुल वैसा ही है जैसे बिना पते के किसी बस में बैठ जाना।
  • अपने लक्ष्य को सिर्फ दिमाग में मत रखें,कागज का उपयोग करें।लक्ष्य हमेशा स्मार्ट (विशिष्ट,मापने योग्य,प्राप्त करने योग्य,यथार्थवादी,समयबद्ध) होना चाहिए।

6.निरंतरता और अनुशासन (Consistency and Discipline):

  • संगति:सफ़लता का सबसे बड़ा रहस्य निरन्तरता और आत्मानुशासन में है।ये लेख का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है।प्रेरणा आपका काम शुरू करने की ऊर्जा देता है,लेकिन अनुशासन और निरंतरता (Discipline and Consistency) आपको आगे बढ़ाती रहती है।
  • सादृश्य (Analogy):एक दिन में 10 घंटे पढ़ने से बेहतर है रोज़ 2 घंटे पूरी लगन से पढ़ना।पानी की एक छोटी सी बूंद भी अगर लगातर एक ही जगह गिरे,तो पत्थर में सुराख कर सकती है।

7.गलती से सीखना और बदलाव (Learning from Mistakes and Changing):

  • गलतियों को असफलता नहीं,फीडबैक समझें।सफ़लता के रास्ते में रुकावटें आना निश्चित है। कामयाब लोग हर गलती से सीखते हैं और अपने तरीके को बदलते हैं,पर लक्ष्य नहीं बदलते।
  • मुख्य पाठ (key lesson):असफ़लता का मतलब रास्ते का ख़तम होना नहीं,बल्कि एक नई तारीख से शुरू करने का मौका है।

8.समय का सही प्रबंधन (Proper management of time):

  • समय को खर्च मत करें,निवेश करें।मुख्य बिंदु (content point):हर इंसान के पास दिन में 24 घंटे ही होते हैं।सफल लोग इस बात पर ध्यान देते हैं कि उनका समय कहां जा रहा है।एक्शन स्टेप (Action Step):तत्काल और महत्त्वपूर्ण कामों के बीच फ़र्क़ समझें।सोशल मीडिया और ध्यान भटकाने वाले काम न करके अपने सबसे उत्पादक घंटे प्राथमिक काम को दें।

9.सकारात्मक दृष्टिकोण और धैर्य (Positive Attitude and Patience):

  • बड़े बदलाव समय मांगते हैं,इसलिए धैर्य रखें।कन्टेन्ट पाइंट (Content Point):बांस का पौधा पहले 5 साल ज़मीन के अंदर अपनी जड़ें मजबूत करता है और फिर अचानक कुछ हफ़्ते में 90 फीट ऊंचा हो जाता है।सफ़लता में भी यही होता है:पहले बदलाव अंदर आता है,फिर बाहर दिखता है।इसलिए अपने ऊपर और अपनी मेहनत पर विश्वास रखें।

10.सफलता के 10 अद्भुत रहस्य का निष्कर्ष (Conclusion to 10 Amazing Secrets of Success):

  • लक्ष्य के बिना अंधेरे में तीर चलाने के समान है।लक्ष्य स्पष्ट,अपनी सामर्थ्य और क्षमता तथा यथार्थवादी हो तभी प्राप्त किया जा सकता है।लक्ष्य तय करने के बाद उस पर निरन्तर काम करना होता है।तेज दौड़ने के बजाय धीरे-धीरे दौड़े पर नियमित रूप से दौड़े।जहाँ प्रेरणा 1% कार्य करती है वहीं निरन्तरता और अनुशासन 99% कार्य करता है और निरन्तरता से  ही बड़ा लक्ष्य बौना नजर आने लगता है।इसके साथ ही हम कोई भी कार्य करते हैं तो गलतियाँ भी होना स्वाभाविक है।यदि गलतियों से नहीं सीखते हैं तो पिछड़‌ते चले जाते हैं।जैसे मस्क में एक छेद होने से ही सारा पानी बाहर निकल जाता है,उसी प्रकार गलतियों से न सीखना और अपने दोषों को दूर न करना हमें लक्ष्य से दूर कर देता है।
  • अपने कार्य की समीक्षा करते रहें और जहाँ कहीं बदलाव करने की जरूरत हो वहाँ बदलाव करते रहे।इसके साथ ही समय प्रबन्धन बेहद जरूरी है।महत्त्वपूर्ण और अतिमहत्त्वपूर्ण कार्यों को
  • पहले निपटायें और जो कम महत्त्वपूर्ण हैं उन्हें बाद में।ऐसा नहीं होना चाहिए कि जो काम सामने दिख रहा हो उसी को करने लग गये।इससे आपका लक्ष्य छिटक जाता है।सही और सटीक रणनीति से ही लक्ष्य की प्राप्ति सम्भव है।नकारात्मक विचारों को दिमाग में प्रश्रय न दें।सकारात्मक विचार हमें हर जटिल समस्या और कठिनाइयों में रास्ता दिखाता है।कर्म करें,अपने आप पर विश्वास रखें,भगवान पर विश्वास रखें और आगे बढ़ते जाए।आज से ही एक छोटा कदम प्रारम्भ करें।सफलता के ये 10 नियम तभी काम करेंगे जब आप इन पर अमल करेंगे।आज से ही कोई एक छोटा नियम चुनें और उस पर 21 दिनों तक टिककर काम करें।
    उपर्युक्त आर्टिकल में सफलता के 10 अद्भुत रहस्य:निरन्तरता और आत्मानुशासन (10 Amazing Secrets of Success:Consistency and Self-discipline) के बारे में विस्तृत और गहराई से बताया गया है।
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11.छात्र और टीचर में सफलता पर प्रश्नोत्तर (हास्य-व्यंग्य) (Q&A on Student and Teacher Success) (Humour-Satire):

  • टीचर:लोकेश तुम यह क्या कर रहे हो?
  • लोकेश:मैं सफलता के 10 अद्भुत रहस्य पढ़ रहा हूँ।
  • टीचर:यह गणित का कालांश है,इस समय सवाल हल करो।यह महत्त्वपूर्ण काम है इसे पहले करो।
  • लोकेश:मुझे इन सफलता के 10 अद्भुत रहस्यों को पढ़ने और याद करने से ही सफलता मिल जाएगी।

12.सफलता के 10 अद्भुत रहस्य:निरन्तरता और आत्मानुशासन (Frequently Asked Questions Related to 10 Amazing Secrets of Success:Consistency and Self-discipline) से सम्बन्धित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:

प्रश्न:1.सफलता का मंत्र क्या है? (What is the mantra for success?):

उत्तर:लक्ष्य की तरफ एक-एक कदम बढ़ते हुए चलते रहना और निरन्तर कार्य से ही सफलता अर्जित की जा सकती है।

प्रश्न:2.एक छात्र इतने नियमों का पालन कैसे कर सकता है? (How can a student follow so many rules?):

उत्तर:सफलता के 10 अद्भुत रहस्यों में से एक-एक नियम पर चलते हुए सभी नियमों का पालन कर सकता है।एकदम से 10 नियमों पर चलना कठिन होता है।

प्रश्न:3.सफलता न मिले तो क्या करें? (What to do if you don’t succeed?):

उत्तर:अपने आपकी,अपने कार्य की और अपनी कार्यशैली की समीक्षा करें।यदि आवश्यकता हो तो बदलाव करें।

  • उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर द्वारा सफलता के 10 अद्भुत रहस्य:निरन्तरता और आत्मानुशासन (10 Amazing Secrets of Success:Consistency and Self-discipline) की प्राइमरी टर्म्स के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

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