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Vector Space in Mathematics

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1.गणित में सदिश समष्टि (Vector Space in Mathematics),अमूर्त बीजगणित में सदिश समष्टि (Vector Space in Abstract Algebra):

गणित में सदिश समष्टि (Vector Space in Mathematics) आबेली समूह होने के साथ-साथ कुछ अभीगृहीतों का पालन करने पर सदिश समष्टि कहा जाता है।इस आर्टिकल में कुछ उदाहरणों के द्वारा सदिश समष्टि को समझेंगे।
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2.गणित में सदिश समष्टि के साधित उदाहरण (Vector Space in Mathematics Solved Examples):

Example:1.निम्नलिखित में,क्या दर्शाए हुए फील्ड पर साधारण योग एवं अदिश गुणन के सापेक्ष सदिश समष्टि है:
(Whether of the following, is a vector space over the field as shown against with ordinary addition and scalar multiplication):
V उन समस्त बहुपदों का समुच्चय जिनकी घात 5 से बड़ी है, F=R
(V is a set of all polynomials whose degree is >5,F=R)
Solution:P(x) स्वेच्छित फील्ड F पर 5 से बड़ी घात पर समस्त बहुपदों का समुच्चय है इसलिए

P(x)=\{p(x): p(x)=a_{6} x^{6}+a_{7} x^{7}+\cdots+a_{n} x^{n}+\cdots=\sum_{n=6}^{\infty} a_{n} x^{n} \cdot \forall a_{n} \in F \}
अब हम P(x) के अवयवों का योग तथा इसके अवयवों का क्षेत्र के अवयवों से गुणन (अर्थात् अदिश गुणन) निम्न प्रकार परिभाषित करते हैं।P(x) के अवयवों को सुविधा के लिए सदिश कहते हैं।
अब यदि p(x)=\sum_{n=6}^{\infty} a_{n} x_{n} \in P(x)  तथा q(x)=\sum_{n=6}^{\infty} b_{n} x^{n} \in P(x)  तब

p(x)+q(x)=\sum_{n=6}^{\infty} a_{n} x^{n}+\sum_{n=6}^{\infty} b_{n} x^{n}=\sum_{n=6}^{\infty}(a_{n}+b_{n}) x^{n}
और साथ ही अदिश गुणन के लिए
यदि a \in F तथा p(x)=\sum_{n=6}^{\infty} a_{n} x^{n} \in P(x)  तब a \cdot p(x)= \sum_{n=6}^{\infty}\left(a \cdot a_{n}\right) x^{n} \in P(x)
अब हम सदिश समष्टि के अभिगृहीतों का परीक्षण करते हैं:
I.अब (P(x),+) एक आबेली ग्रुप सिद्ध करेंगे:
(i) संवृतता:
यदि p(x), q(x) \in P(x) तब

p(x)+q(x)=\sum_{n=6}^{\infty}\left(a_{n}+b_{n}\right) x^{n} \in P(x)
क्योंकि \forall a_{n}, b_{n} \in F \Rightarrow a_{n}+ b_{n} \in F
\therefore  P(x) बहुपद योग (सदिश योग) संक्रिया के लिए संवृत है।
(ii) साहचर्यता:
यदि p(x)=\sum_{n=6}^{\infty} a_{n} x^{n}, q(x)=\sum_{n=6}^{\infty} b_{n} x^{n} तथा r(x)=\sum_{n=6}^{\infty} c_{n} x^{n} समुच्चय p(x) के कोई तीन अवयव हैं तब

[p(x)+q(x)]+r(x)=\left[\sum_{n=6}^{\infty} a_{n} x^{n}+\sum_{n=6}^{\infty} b_{n} x^{n}\right] +\sum_{n=6}^{\infty} c_{n} x^{n} \\ =\sum_{n=6}^{\infty}\left(a_{n}+b_{n}\right) x^{n}+\sum_{n=6}^{\infty} c_{n} x^{n} \\ =\sum_{n=6}^{\infty} \left \{ (a_{n}+b_{n})+c_{n} \right \} x^{n}
[\because  F में योग संक्रिया सहचारी है]

=\sum_{n=6}^{\infty}\left\{a_{n}+(b_{n}+c_{n}\right\} x^{n} \\ =\sum_{n=6}^{\infty} a_{n} x^{n}+ \sum_{n=6}^{\infty}\left(b_{n}+c_{n}\right) x^{n} \\ =\sum_{n=6}^{\infty} a_{n} x^{n}+ \left( \sum_{n=6}^{\infty} b_{n} x^{n}+\sum_{n=6}^{\infty}  c_{n} x^{n}\right) \\ =p(x)+[q(x)+r(x)] \\ \therefore  P(x) सदिश योग में सहचारी है।
(iii) योज्य तत्समक का अस्तित्व

O(x)=\sum_{n=6}^{\infty} 0 x^{n} \notin P(x)
फलतः O(x) समुच्चय p(x) का योज्य तत्समक विद्यमान नहीं है।
इसी प्रकार अदिश गुणन के लिए इकाई अवयव 1 विद्यमान नहीं है।
अतः F साधारण योग एवं अदिश गुणन के सापेक्ष सदिश समष्टि नहीं है।

Example:2.मान लो V=\{(a, b) \mid a, b \in R\} तथा F वास्तविक संख्याओं R का क्षेत्र है।जाँच कीजिए कि निम्न प्रकार परिभाषित संक्रियाओं के सापेक्ष V(F) एक सदिश समष्टि है या नहीं।
(Let V=\{(a, b) \mid a, b \in R\} and F be the field of real numbers R.Examine whether V(F) is a vector space or not for the following defined operations.)
2(i):(a,b)+(c,d)=(0,b+d) ;p(a,b)=(pa,pb)
Solution:2(i).(a,b)+(c,d)=(0,b+d) ;p(a,b)=(pa,pb)
माना \alpha=(a,b) तथा x, y \in F तब

(x+y) \alpha =(x+y)(a, b) \\ =\{(x+y) a,(x+y) b\} \\ \Rightarrow(x+y) \alpha =(a x+a y, b x+b y) \\ x \alpha+y \alpha =x(a, b)+y (a, b) \\ =(a x, b x)+(a y, b y) \\ \Rightarrow x \alpha+y \alpha =(0, b x+b y) \\(x+y) \alpha \neq x \alpha+b \alpha
अतः V सदिश समष्टि नहीं है।
2(ii):(a,b)+(c,d)=(a+c,b+d) ;p(a,b)=(0,pb)
Solution:2(ii).(a,b)+(c,d)=(a+c,b+d) ;p(a,b)=(0,pb)
अदिश गुणन से:

1 \cdot \alpha=\alpha, \alpha \in V
1.(a,b)=(0,1.b)=(0,b)
परन्तु (0, b) \neq (a, b)  तथा 1 \cdot \alpha \neq \alpha
अतः V सदिश समष्टि नहीं है।
2(iii): (a, b)+(c, d)=(a+c, b+d) ; p(a, b)=\left(p^{2} a, p^{2} b\right)
Solution:2(ijj) (a, b)+(c, d)=(a+c, b+d) ; p(a, b)=\left(p^{2} a, p^{2} b\right)
अदिश गुणन से:

\left(p+p^{\prime}\right) \alpha =p \alpha+p^{\prime} \alpha ; k, k^{\prime} \in R, \alpha \in V \\ \left(p+p^{\prime}\right)(a, b) =p(a, b)+p^{\prime}(a, b) \\ =\left(p^{2} a, p^{2} b\right)+ \left( p^{\prime^{2}} a, p^{\prime^{2}} b\right) \\ \left(p+p^{\prime}\right)(a, b) =\left(p^{2} a+p^{\prime} a, p^{2} b+p^{\prime} b\right)
परन्तु \left(p+p^{\prime}\right)(a, b)=\left[\left(p+p^{\prime}\right)^{2} a,(p+p^{\prime})^{2} b\right] \\ (p+p^{\prime})^{2} \neq p^{2}+p^{\prime^{2}}

L.H.S. \neq R.H.S.
अतः अदिश गुणन के नियम को सन्तुष्ट नहीं करता है। फलतः V, R पर सदिश समष्टि नहीं है।
2(iv):(a,b)+(c,d)=(a,b) ;p(a,b)=(pa,pb)
Solution:2(iv).(a,b)+(c,d)=(a,b) ;p(a,b)=(pa,pb)
(p+p’)(a,b)=[(p+p’)a,(p+p’)b]
=(pa+p’a,pb+p’b) … (1)
p(a,b)+p'(a,b)=(pa,pb)+(p’a,p’b)
=(pa,pb) … (2)

=(pa,pb)+(p’a,p’b) \neq pa, pb+p’b \neq pb
अतः सदिश समष्टि नहीं है।
2(v):(a,b)+(c,d)=(a+c,b+d) ;P(a, b)=(|b| a,|p| b)
Solution:2(v).(a,b)+(c,d)=(a+c,b+d) ; P(a, b)=(|b| a,|p| b) \\ (a+b) \alpha=a \alpha+b \alpha \forall a, b \in F तथा \alpha \in V \\ \left(p+p^{\prime}\right)(a, b)=\left[\mid p+p^{\prime}\mid a,\mid p+p^{\prime}\mid b\right] \cdots(1)\\ p(a, b)+p^{\prime}(a, b) =\left(|p| a,|p| b\right)+ \left( \left|p^{\prime} \right|\right) a,\left(\left|p^{\prime}\right| b\right)\\ =\left(|p| a+ |p^{\prime}|a ;|p|b+| p^{\prime}| b\right)\\ =\left[\left\{|p|+|p^{\prime}|\right\} a,\{|p|+|p^{\prime}|\} b\right] \\ |p+p^{\prime}|\leq |p|+|p^{\prime}|
अतः (1) व (2) से:

(p+p^{\prime})(a, b) \neq p(a, b)+p^{\prime}(a, b)
अतः V(R) सदिश समष्टि नहीं है।
2(vi):(a,b)+(c,d)=(a+c,b+d) ;p(a,b)=(pa,0)
Solution:2(vi).(a,b)+(c,d)=(a+c,b+d) ;p(a,b)=(pa,0)
अदिश गुणन के नियम से:

1 \cdot \alpha=\alpha, \alpha \in V \\ 1 \cdot(a, b)=(0,1 \cdot b)=(0, b)
परन्तु (0, b) \neq(a, b) तथा 1 \cdot \alpha \neq \alpha
अतः V(R) सदिश समष्टि नहीं है।

(a+b) \alpha=a \alpha+b \alpha
2(vii):(a,b)+(c,d)=(a+c,b+d) ;p(a,b)=(pa,b)
Solution:2(vii).(a,b)+(c,d)=(a+c,b+d) ;p(a,b)=(pa,b)
यहाँ (V,+) योगात्मक आबेली समूह है परन्तु सदिश समष्टि का अदिश गुणन सन्तुष्ट नहीं होता है :
(p+p’) (a,b)=[(p+p’)a,b] … (1)
p(a,b)+p'(a,b)=(pa,b)+(p’a,b)
=(pa+p’a,b+b)
=[(p+p’)a,2b] … (2)
(1) व (2) से:

\left(p+p^{\prime}\right)(a, b) \neq p(a, b)+p^{\prime}(a, b)
अतः V(R) सदिश समष्टि नहीं है।
Example:3.कारण सहित बताइए कि निम्न मैट्रिक्स समुच्चयों में से कौनसा समुच्चय वास्तविक संख्याओं के क्षेत्र R पर मैट्रिक्स योग एवं मैट्रिक्स अदिश गुणन के सापेक्ष एक सदिश समष्टि है।
(State with reasons which of the following set of matrices is a vector space over the field R of real numbers with respect to matrix addition and matrix scalar multiplication):

V=\left[\begin{array}{cc} a & a+b \\ a+b & b \end{array}\right] \mid a, b \in R
Solution:3(i).\left[\begin{array}{cc} a & a+b \\ a+b & b \end{array}\right] \mid a, b \in R
समुच्चय V मैट्रिक्स योग एवं R पर मैट्रिक्स अदिश गुणन के लिए संवृत है क्योंकि
मान लो v_{1}=\left[\begin{array}{ll} a_{1} & a_{1}+b_{1} \\ a_{1}+b_{1} & b_{1} \end{array}\right] \in V  तथा v_{2}=\left[\begin{array}{ll} a_{2} & a_{2}+b_{2} \\ a_{2}+b_{2} & b_{2} \end{array}\right] \in V
तब v_{1}+v_{2} =\left[\begin{array}{ll}a_{1} & a_{1}+b_{1} \\a_{1}+b_{1} & b_{1}\end{array}\right] +\left[\begin{array}{ll}a_{2} & a_{2}+b_{2} \\a_{2}+b_{2} & b_{2}\end{array}\right] \\ =\left[\begin{array}{ll}a_{1}+a_{2} & a_{1}+b_{1}+a_{2}+b_{2} \\a_{1}+b_{1}+a_{2}+b_{2} & b_{1}+b_{2}\end{array}\right] \in V
[चूँकि a_{1}+a_{2}, b_{1}+b_{2}, a_{1}+b_{1}+a_{2}+b_{2} \in R ]अतः समुच्चय V मैट्रिक्स योग के लिए संवृत है।
पुनः यदि \alpha \in R तो

\alpha V=\alpha\left[\begin{array}{cc}a & a+b \\a+b & b\end{array}\right]=\left[\begin{array}{cc} \alpha a & \alpha(a+b) \\ \alpha(a+b) & \alpha b \end{array}\right] \in V
[चूँकि \alpha a, \alpha b, \alpha(a+b) \in R

\therefore \alpha \in R, v \in V \Rightarrow \alpha v \in V
इसलिए V,R पर मैट्रिक्स अदिश गुणन के लिए संवृत है।इसके पश्चात अब हम यह सिद्ध करेंगे कि V(R) सदिश समष्टि है।
I.(V,+) आबेली (क्रमविनिमेय) ग्रुप है
(i) मैट्रिक्स योग सहचारी एवं क्रमविनिमेय है अतः यह समुच्चय V में सहचारी एवं क्रमविनिमेय है।
(ii)a=b=a+b=0 लेने पर \left[\begin{array}{ll} 0 & 0 \\ 0 & 0 \end{array}\right] \in V योग के तत्समक अवयव है।
(iii)प्रत्येक v=\left[\begin{array}{cc} a & a+b \\ a+b & b \end{array}\right] \in V के लिए

-v=\left[\begin{array}{ll} -a & -(a+b) \\ -(a+b) & -b \end{array}\right] \in V जो
v का योज्य प्रतिलोम है फलतः V के प्रत्येक अवयव का योज्य प्रतिलोम V में विद्यमान है।
अतः (V,+) एक क्रमविनिमेय ग्रुप है।
II.अदिश गुणन के लिए बंटनता:
माना \alpha \in R तथा v_{1} v_{2} \in V
तब \alpha\left(v_{1}+v_{2}\right)=\alpha\left\{\left[\begin{array}{cc} a_{1} & a_{1}+b_{1} \\ a_{1}+b_{1} & b \end{array}\right]+\left[\begin{array}{cc} a_{2} & a_{2}+b_{2} \\ a_{2}+b_{2} & b_{2} \end{array}\right]\right. \\ =\alpha\left[\begin{array}{ll} a_{1}+a_{2} & a_{1}+b_{1}+a_{2}+b_{2} \\ a_{1}+b_{1}+a_{2}+b_{2} & b_{1}+ b_{2} \end{array}\right] \\ =\left[\begin{array}{ll} \alpha\left(a_{1} +a_{2}\right) & \alpha\left(a_{1}+b_{1} +a_{2}+b_{2}\right) \\ \alpha \left(a_{1}+b_{1}+a_{2}+b_{2}\right) & \alpha\left(b_{1}+b_{2}\right) \end{array}\right] \\ =\left[\begin{array}{ll} \alpha a_{1}+\alpha a_{2} & \alpha a_{1}+\alpha b_{1}+\alpha a_{2}+\alpha b_{2} \\ \alpha a_{1}+\alpha b_{1}+\alpha a_{2}+\alpha b_{2} & \alpha b_{1}+\alpha b_{2} \end{array}\right] \\ =\left[\begin{array}{ll} \alpha a_{1} & \alpha a_{1}+\alpha b_{1} \\ \alpha a_{1}+\alpha b_{1} & \alpha b_{1} \end{array}\right]+\left[\begin{array}{ll} \alpha a_{2} & \alpha a_{2}+\alpha b_{2} \\ \alpha a_{2}+\alpha b_{2} & \alpha b_{2} \end{array}\right] \\ =\alpha\left[\begin{array}{ll} a_{1} & a_{1}+b_{1} \\ a_{1}+b_{1} & b_{1} \end{array}\right]+\alpha \left[\begin{array}{ll} a_{2} & a_{2}+b_{2} \\ a_{2}+b_{2} & b_{2} \end{array}\right] \\ =\alpha v_{1}+\alpha v_{2}
अतः समुच्चय v में अदिश योग के लिए बंटनता करता है।
III.अदिश योग पर बंटनता:
मान लो \alpha_{1}, \alpha_{2} \in R तथा v \in V  तब

\left(\alpha_{1}+\alpha_{2}\right)V=\left(\alpha_{1}+\alpha_{2}\right)\left[\begin{array}{cc}a & a+b \\a+b & b\end{array}\right] \\ =\left[\begin{array}{ll}\left(\alpha_{1}+\alpha_{2}\right) a & \left(\alpha_{1}+ \alpha_{2} \right)(a+b) \\ \left(\alpha_{1}+\alpha_{2}\right)(a+b) & \left(\alpha_{1}+\alpha_{2}\right) b\end{array}\right] \\ =\left[\begin{array}{ll}\alpha_{1} a+\alpha_{2} a & \alpha_{1}(a+b)+\alpha_{2}(a+b) \\\alpha_{1}(a+b)+\alpha_{2}(a+b) & \alpha_{1} b+\alpha_{2} b\end{array}\right] \\ =\left[\begin{array}{ll}\alpha a & \alpha_{1}(a+b) \\\alpha_{1}(a+b) & \alpha_{1} b\end{array}\right]+\left[\begin{array}{ll}\alpha a & \alpha_{2}(a+b) \\\alpha_{2}(a+b) & \alpha_{2} b\end{array}\right] \\ =\alpha \left[ \begin{array}{ll}a & a+b \\a+b & b\end{array}\right]+\alpha \left[\begin{array}{cc} a & a+b \\ a+b & b \end{array}\right] \\ =\alpha V_{1}+\alpha V_{2}
अतः समुच्चय V में सदिश गुणन अदिश योग पर बंटनता करता है।
IV.अदिश गुणा के लिए साहचर्यता:
मान लो \alpha, \beta \in R एवं v \in V
तब (\alpha \beta) V=(\alpha \beta) \cdot\left[\begin{array}{cc}a & a+b \\a+b & b\end{array}\right] \\ =\left[\begin{array}{cc}(\alpha \beta)a & (\alpha \beta)(a+b) \\ (\alpha \beta)(a+b) & (\alpha \beta) b\end{array}\right]\\ =\left[\begin{array}{ll}\alpha(\beta a) & \alpha\{\beta(a+b)\} \\\alpha\{\beta(a+b)\} & \alpha(\beta b)\}\end{array}\right]\\ =\alpha\left[\begin{array}{cc}\beta a & \beta(a+b) \\\beta(a+b) & \beta b\end{array}\right]\\ =\alpha\left\{\beta\left[\begin{array}{cc}a & a+b \\a+b & b\end{array} \right]\right\}\\ =\alpha(\beta v)
स्पष्टतः V में अदिश गुणन सहचारी है।

V \cdot 1 \in R तथा v \in V \\ 1 \cdot v =1\left[\begin{array}{cc} a & a+b \\ a+b & b \end{array} \right] =\left[\begin{array}{ll} 1 \cdot a & 1 \cdot(a+b) \\ 1 \cdot(a+b)& 1 \cdot b \end{array}\right] \\ =\left[\begin{array}{cc} a & a+b \\ a+b & b \end{array}\right]=v
उपर्युक्त से स्पष्ट है कि v सदिश समष्टि के सभी अभीगृहीतों को सन्तुष्ट करता है।
अतः V वास्तविक संख्याओं के क्षेत्र R पर एक सदिश समष्टि है।
3(ii): \left\{\left[\begin{array}{ll} a & 1 \\ 1 & b \end{array}\right] \mid a, b \in R\right\}
Solution:3(ii). V=\left\{\left[\begin{array}{ll} a & 1 \\ 1 & b \end{array}\right] \mid a, b \in R\right\}
a=b=0 लेने पर

\left[\begin{array}{cc} 0 & 1 \\ 1 & 0 \end{array}\right] जो कि योग के लिए तत्समक अवयव नहीं है। अर्थात् शून्य सदिश विद्यमान नहीं है।फलतः V सदिश समष्टि नहीं है।
उपर्युक्त उदाहरणों के द्वारा गणित में सदिश समष्टि (Vector Space in Mathematics),अमूर्त बीजगणित में सदिश समष्टि (Vector Space in Abstract Algebra) को समझ सकते हैं।

3.गणित में सदिश समष्टि पर आधारित सवाल (Questions Based on Vector Space in Mathematics):

(1.)सिद्ध कीजिए कि मैट्रिक्स समुच्चय V=\left\{\left[\begin{array}{ll} a & 0 \\ 0 & b \end{array}\right] \mid a, b \in R\right\} मैट्रिक्स योग एवं मैट्रिक्स अदिश गुणन के सापेक्ष वास्तविक संख्याओं के क्षेत्र R पर एक सदिश समष्टि है।
(Prove that the matrix set V=\left\{\left[\begin{array}{ll} a & 0 \\ 0 & b \end{array}\right] \mid a, b \in R\right\} is a vector space over the field R of real numbers with respect to matrix addition and matrix scalar multiplication.)
(2.)सिद्ध कीजिए कि फील्ड F किसी भी F के उपफील्ड S पर सदिश समष्टि है।
(Prove that a field F is a vector space over any subfield S of F.)
उपर्युक्त सवालों को हल करने पर गणित में सदिश समष्टि (Vector Space in Mathematics),अमूर्त बीजगणित में सदिश समष्टि (Vector Space in Abstract Algebra) को ठीक से समझ सकते हैं।

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4.गणित में सदिश समष्टि (Vector Space in Mathematics),अमूर्त बीजगणित में सदिश समष्टि (Vector Space in Abstract Algebra) से सम्बन्धित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:

प्रश्न:1.सदिश समष्टि के प्रारम्भिक गुणधर्म क्या हैं? (What are Elementary Properties of Vector Spaces?):

उत्तर:प्रमेय (Theorem):यदि \left(V,\oplus\right) फील्ड \left ( F,+,\bullet \right ) पर एक सदिश समष्टि है तथा V का शून्य सदिश O है तथा F का योज्य प्रतिलोम अवयव शून्य 0 है साथ ही एक \bullet बाह्य संक्रिया है तब
(If \left(V,\oplus\right) be a vector space over the field \left ( F,+,\bullet \right ) and O be the zero vector of V and zero be the additive identity in F, then
(i) \alpha \odot O=0 \forall \alpha \in F
उपपत्ति (Proof):चूँकि 0 \oplus O=O \\ \Rightarrow \alpha \odot (O \oplus O)= \alpha \odot O \\ \Rightarrow \alpha \odot O \oplus \alpha \odot O=\alpha \odot O \\ \left[\because \alpha \odot \left(V_{1} \oplus V_{2}\right)=\alpha \odot V_{1} \oplus \alpha \odot V_{2}\right] \\ \therefore \alpha \odot 0 \oplus \alpha \odot O=\alpha \odot O \oplus O \\ \left[\because \alpha \odot O \in V \text{ तथा } \alpha \odot O \oplus O=\alpha \odot 0\right]
अतः V संक्रिया के सापेक्ष आबेली ग्रुप है इसलिए V में वाम निरसन नियम (Left Cancellation) नियमानुसार
\alpha \odot 0=0
(ii) 0 \odot V=O \forall v \in V, O \in F
उपपत्ति (Proof): 0 \odot v=(O+O) \odot v \\ =0 \odot v \oplus 0 \odot v\\ \left [ \because (\alpha+\beta) \odot v =\alpha \odot v+\beta \odot v \right ] \\ \therefore O \oplus 0 \odot v=0 \odot v \oplus 0 \odot v \\ \left [\because 0 \odot v \in V, O \oplus 0 \odot v=0 \odot v \right ]
अब V संक्रिया \oplus के सापेक्ष आबेली ग्रुप है इसलिए V में दक्षिण निरसन (Right cancellation) नियमानुसार O=0 \odot v
(iii) \alpha \odot (-V)=-(\alpha \odot V), \forall \alpha \in F, \forall v \in V
उपपत्ति (Proof): \alpha \odot [v \oplus (-v)]=\alpha \odot v \oplus \alpha \odot (-v) \\ \Rightarrow \alpha \odot O= \alpha \odot v \oplus \alpha \odot(-v) \\ \Rightarrow O=\alpha \odot v \oplus \alpha \odot(-v) \left [ \because \alpha \odot O=O \right ]
अतः \alpha \odot v का V में संक्रिया \oplus के सापेक्ष विलोम \alpha \odot (-v) है।
फलतः \alpha \odot(-v)=-(\alpha \odot v)
(iv) (-\alpha) \odot v=-(\alpha \odot v), \forall \alpha \in F, \forall v \in V
उपपत्ति (Proof):अब \alpha \in F, v \in V तब
[\alpha+(-\alpha)] \oplus V=\alpha \odot v \oplus(-\alpha) \odot v \\ \Rightarrow 0 \odot v=\alpha \odot v \oplus (-\alpha) \odot V \\ \Rightarrow O=\alpha \odot v \oplus(-\alpha) \odot v \\ \alpha \odot v का V में संक्रिया \oplus के सापेक्ष प्रतिलोम (-\alpha) \odot v है।
\Rightarrow (-\alpha) \odot v=-(\alpha \odot v)
(v) (-\alpha) \odot v=\alpha \odot(-v), \forall \alpha \in F, \forall v \in V
उपपत्ति (Proof):(iii) व (iv) से:
\alpha \odot (-v)=(-\alpha) \cdot (v)
(vi)\alpha \odot \left(v_{1} \cdot v_{2}\right)=\alpha \odot v_{1}-\alpha \odot v_{2} \forall \alpha \in F तथा (and) \forall v_{1}, v_{2} \in V
उपपत्ति (Proof): \alpha \odot \left(v_{1}-v_{2}\right)=\alpha \cdot\left[v_{1} \oplus\left(-v_{2}\right)\right] \\ =\alpha \odot v_{1} \oplus \alpha \odot\left(-v_{2}\right) \\ =\alpha \odot v_{1} \oplus\left[-\left(\alpha \odot v_{2}\right)\right] \\ \Rightarrow \alpha\left(v_{1}-v_{2}\right)=\alpha \odot v_{1}-\alpha \odot v_{2}
(vii) \alpha \odot v=O \Rightarrow \alpha=0 या v=O
जहाँ (where) \alpha \in F,v \in V
उपपत्ति (Proof):यदि \alpha \odot v तथा \alpha \neq 0 तथा \alpha^{-1} का अस्तित्व होगा क्योंकि \alpha फील्ड का अशून्य अवयव है
\therefore \alpha \odot v=O \Rightarrow \alpha^{-1} \odot (\alpha \odot v)=\alpha^{-1} \odot O\\ \Rightarrow (\alpha^{-1} \alpha)\odot v=O\left [ \because \alpha \odot (\beta \odot v)=(\alpha \cdot \beta) \odot v \right ]\\ \Rightarrow 1 \odot v=O \Rightarrow v=0
पुनः माना \alpha \odot v तथा v \neq 0 तब हमें सिद्ध करना है कि \alpha=0
माना \alpha \neq 0 तब \alpha^{-1} का F में अस्तित्व होगा।
\alpha \odot v=O=\alpha^{-1} \odot (\alpha \odot v)=\alpha^{-1} \odot O \\ \Rightarrow (\alpha^{-1} \alpha)\odot v=O \\ \Rightarrow 1 \odot v=O \Rightarrow v=O
जो कि हमारे मानने (अर्थात् v \neq 0 ) का विरोधाभास है।
\alpha शून्य के बराबर होना चाहिए।
अतः v \neq 0 तथा \alpha \odot v=O \Rightarrow \alpha=0
(viii) \alpha \odot v=\beta \odot v \Rightarrow \alpha=\beta यदि (if)
\alpha,\beta \in F तथा (and) v \neq 0, v \in V
उपपत्ति (Proof):दिया हुआ है:
\alpha \odot v=\beta \odot v \\ \Rightarrow \alpha \odot v-\beta \odot v=O\\ \Rightarrow (\alpha-\beta)\odot v=O\\ \because (\alpha-\beta) \odot v=[\alpha+(-\beta)] \odot v=\alpha \odot v+(-\beta) \odot v=\alpha \odot v-\beta \odot v
या तो \alpha-\beta=0 या v=O
\Rightarrow \alpha-\beta=0 चूँकि v \neq O \\ \Rightarrow \alpha=\beta

प्रश्न:2.सदिश समष्टि में अदिश और सदिश अवयवों को कैसे प्रदर्शित करते हैं? (How Scalar and Vector Elements are Represented in Vector Space?):

उत्तर:जब भी एक अदिश को वेक्टर द्वारा गुणा किया जाता है तो परिणाम वेक्टर होता है। शून्य के दो प्रकार होंगे। एक शून्य वेक्टर है जिसे बोल्ड (O) प्रकार के रूप में दर्शाया गया है जहाँ O, V का एक अवयव है और दूसरा शून्य अदिश है जिसे साधारण 0 के रूप में दर्शाया गया है जो कि F का एक अवयव है।आमतौर पर V के अवयव अर्थात् वेक्टर को \alpha,\beta,\gamma …..द्वारा दर्शाया जाएगा जबकि F के अवयव के रूप में अदिश को a,b,c,… द्वारा दर्शाया जाएगा।

प्रश्न:3.शून्य समष्टि किसे कहते हैं? (What is Called Null Space?):

उत्तर:एक सदिश समष्टि जिसमें केवल एक अवयव होता है योजक पहचान O को शून्य समष्टि या शून्य वेक्टर समष्टि कहा जाता है इसे {0} के रूप में दर्शाया जाता है।
उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर द्वारा गणित में सदिश समष्टि (Vector Space in Mathematics),अमूर्त बीजगणित में सदिश समष्टि (Vector Space in Abstract Algebra)में ओर अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

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Vector Space in Mathematics

गणित में सदिश समष्टि
(Vector Space in Mathematics)

Vector Space in Mathematics

गणित में सदिश समष्टि (Vector Space in Mathematics) आबेली समूह होने के
साथ-साथ कुछ अभीगृहीतों का पालन करने पर सदिश समष्टि कहा जाता है।

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