To Develop Eligibility for Mathematics
1.गणित हेतु पात्रता विकसित करना (To Develop Eligibility for Mathematics),गणित के लिए पात्रता कैसे विकसित करें? (How to Develop Eligibility for Mathematics?):
- गणित हेतु पात्रता विकसित करने (To Develop Eligibility for Mathematics) के लिए कुछ आदर्शों का,सिद्धांतों का,नियमों का पालन करना होगा तभी आप गणित को हल करने में सक्षम हो सकेंगे।पात्रता विकसित करने के लिए लिए जानते हैं कि क्या कुछ करना होगा?
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- सभी छात्र छात्राओं के लिए उपयोगी लेख।
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2.गणित पढ़ने के लिए क्रिया-कलाप? (Activities for Reading Mathematics?):
- गणित के लिए पात्रता विकसित करने से पहले महान गणितज्ञों,श्रेष्ठ गणित की पुस्तकों के लेखकों,श्रेष्ठ अध्यापकों आदि के जीवन की ओर दृष्टि दौड़ाइए और देखिए कि गणित का अध्ययन करने के लिए उन्होंने क्या कुछ किया है और क्या कुछ कर रहे हैं? कार्ल फ्रेडरिक गाॅस का,आर्यभट का,आर्कमिडीज का,यूक्लिड आदि का जीवन चरित्र पढ़िए।आप देखेंगे कि ये गणितज्ञ ऐसी कोई पूजा-पाठ,प्रार्थना नहीं करते थे यदि करते भी थे तो आधा-एक घंटा करते थे,बाकी का सारा जीवन गणित को हल करने,गणित का अध्ययन,गणित में शोध करने के लिए जीवन को होम दिया,समर्पित कर दिया।
- बाकी भी जो गणितज्ञ हुए हैं अल्बर्ट आइंस्टीन,इसाक न्यूटन,ब्रह्मगुप्त,महावीराचार्य ने क्या उपासना की,क्या पूजा-अर्चना की,हमें नहीं मालूम,कौन-सा मंत्र जपा हमें नहीं मालूम,लेकिन हां उन्होंने गणित में शोध करने के लिए सभी सुखों और ऐश्वर्य को उतार फेंक दिया।बच्चों की,बीवी की,खाने-पीने की कुछ भी सुध-बुध नहीं रहती थी।गणित को आम आदमी के लिए उपयोगी बना देने हेतु अपनी सारी जिंदगी खत्म कर दी।यही उनका असली मंत्र था,यही उनकी असली पूजा थी।
- विद्यार्थी पूछते हैं कि कोई सस्ता सा,कोई सरल सा मार्ग बताइए जिससे गणित का ज्ञान प्राप्त कर सकें,गणित में पारंगत हो सकें।प्रिय छात्र-छात्राओं गणित पढ़ने के लिए कोई सस्ती विधि नहीं मिलेगी,कोई सरल सा मार्ग नहीं मिलेगा।गणित पढ़ना,गणितज्ञ बनना सस्ता नहीं महंगा सौदा है,सरल नहीं काँटों भरी डगर है।कोई चमत्कार नहीं कठिन साधना और तप है।
उन्होंने अपने जीवन का एक-एक क्षण,जीवन का संपूर्ण समय गणित को परिष्कृत करने में बिता दिया था,ऐसे गणितज्ञों में और भगवान में कोई फर्क नहीं रह गया था।जीवन का क्रम और स्वरूप ऐसा बना लिया था की माँ सरस्वती को मजबूर होकर उनके समीप आना पड़ा।
3.गणित के प्रति दीवानगी (Obsession with math):
- आप माँ सरस्वती का कौन सा मंत्र जपते हो,उसके लिए कौन सा व्रत रखते हो,उसको किसका भोग लगाते हो,उसका कौन सा स्त्रोत का पाठ करते हो इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है।आप देखें कि महान् गणितज्ञों ने कितनी साधना की थी।अगर ऐसी दीवानगी हमारे जीवन में आ जाए तो गजब ढहा दे,आप पाएंगे कि आपके चिंतन और आपके स्वरूप सब बदलते चले जाएंगे।आप सारे के सारे गणितज्ञों के क्रिया-कलापों को मत पूछिए वरन उनके जीवन को देखिए।देखिए कि उन्होंने किस तरह से गणित का अध्ययन किया था।यूक्लिड का समर्पण देखिए,इसाक न्यूटन का चिंतन देखिए,आइंस्टीन का कमाल देखिए।उन्होंने कौन सा जप या अनुष्ठान किया था,कौन सी कुंडलिनी जगाई थी। हम केवल उनके कर्मकांडों को मालूम करना चाहते है और कर्मकाण्डों की माला जप कर गणित के शीर्ष पर पहुंचाना चाहते हैं।गणित के अध्ययन के लिए जीवन का स्वरूप ऐसा होना चाहिए जिस तरह महान गणितज्ञों का श्रेष्ठ जीवन,आदर्श जीवन,उत्कृष्ट जीवन,आकांक्षाओं से रहित जीवन रहा।गणित के अध्ययन में रात-दिन कठिन परिश्रम किए बिना केवल सरस्वती की पूजा करना चाहते हैं और अपने जीवन को सुधारना नहीं चाहते हैं।गणित की साधना का मतलब समझिए,पाइथागोरस को देख लीजिए,कितने देशों की और कितने वर्षों तक खाक छानी थी।
- यूक्लिड को उसके पिता ने प्रलोभन दिया और नहीं माने तो धमकाया कि उसे संपत्ति से वंचित कर दिया जाएगा,यदि यह बेवकूफी भरे कार्य (गणित का अध्ययन) बंद नहीं करेगा।यूक्लिड ने कहा कि मुझे आपकी संपत्ति की बिलकुल जरुरत नहीं,संपत्ति को मेरे भाइयों में बांट दो।आप देख लीजिए की गणित के प्रति कैसी दीवानगी चाहिए।यूक्लिड को ही नहीं किसी भी महान गणितज्ञ का जीवन देख लीजिए।
4.वास्तविक गणित का प्रेमी कौन है? (Who is the real math lover?):
- नहीं श्रीमान जी हमने तो गणित इसलिए ली थी कि जाॅब मिल जाएगा,अच्छी सी नौकरी मिल जाएगी,मालामाल हो जाएंगे।हमने तो गणित को लक्ष्मी का खजाना माना था,इसलिए गणित का अध्ययन किया था।हां,आपने इसलिए गणित ली होगी,लेकिन गणित का अध्ययन इस तरह से करें जैसे ईसाक न्यूटन,गणितज्ञा हाईपेटिया ने की थी।सरस्वती की आराधना करें परंतु चवन्नी देकर हजार रुपए लेना चाहे तो फलीभूत नहीं होगी,यह तो चालाकी हो गई।नाम मात्र का तप करके करोड़पति बनने वाली बात हो गई।ऐसा करके आप गणित के उपासक नहीं,गणित के गुरु बनना चाहते हैं,सरस्वती के उपासक नहीं,सरस्वती के गुरु बनना चाहते हैं।
- उपासक बनने के लिए ठगने की विद्या छोड़नी होगी,चालाकी और धूर्तता को त्यागना होगा।आपको उपासक बनना है तो ब्रह्मगुप्त,महावीराचार्य जैसा बनना चाहिए।आप चाहें कि आप आर्यभट बन जाएं,गणितज्ञ रामचंद्र कापरेकर बन जाएं लेकिन होशियारी,पाखंड,छल-कपट छोड़ना पड़ेगा।
5.पात्रता का विकास करें (Develop Eligibility):
- आपको गणित के अध्ययन हेतु सिद्धांतों को जीवन में शामिल करना पड़ेगा और पात्रता का विकास करना पड़ेगा।अपनी प्रामाणिकता सिद्ध करनी होगी।प्रामाणिकता अर्थात् अपने कर्त्तव्यों का पालन,मर्यादाओं का पालन,लोभ का त्याग करना होगा।स्वाति नक्षत्र में पानी की बूंदे सीप में गिरती हैं और उसमें मोती बनता है।हर जगह मोती नहीं बनता।बंजर भूमि में खेती नहीं होती है।आपको मोती वाली सीप बनना चाहिए और मुंह खोलना चाहिए ताकि स्वाती की बूंदे आपके अंदर प्रवेश करने में समर्थ हो सकें।बरसात होती है तो किसी बर्तन में केवल उतनी ही मात्रा में पानी जमा होता है,जितनी कि उसके पास जगह होती है।आप अपने बर्तन का आकार बड़ाइए,ताकि सरस्वती की कृपा और भगवान के अनुग्रह और गुरु का आशीर्वाद आपके ऊपर छाया रहे और आप उसको हजम कर सकें तथा उसको धारण कर सकें।
- धारण करने की ताकत इकट्ठी कीजिए।धारण करने की ताकत नहीं है और दुनिया भर से मांगते फिरते हैं।आप उसे कहां रखेंगे,कहां पर? आप यह चाहे की माँ सरस्वती आपको आशीर्वाद दे दे,आप पर शक्तिपात कर दे।लेकिन शक्तिपात करते ही आप उसे धारण न कर सकेंगे,चक्कर खाकर गिर जाएंगे।माँ सरस्वती शक्तिपात कर तो सकती है,लेकिन उसे धारण कैसे किया जाएगा।शक्तिपात के लिए सामर्थ्य और ताकत चाहिए।हजम करने के लिए शक्ति चाहिए,उसको धारण करने के लिए क्षमता चाहिए।आप अपने भीतर उस क्षमता को पैदा कीजिए,फिर माँ सरस्वती शक्तिपात कर देगी।
- पात्रता का विकास यही है,जिसके आधार पर हमारी गणित की साधना सफल होती हुई चली जाती है।माँ सरस्वती की नाव पर सवार होकर के हम अपने को पार कर सकते हैं,लेकिन इसके लिए हमको एक काम करना पड़ेगा।हमको अपनी इच्छाएं माँ सरस्वती को सौंपनी पड़ेगी।आप अपनी इच्छाएँ दीजिए और माँ सरस्वती की शरणागत हो जाइए और यह कहिए कि हमारी कोई इच्छा नहीं है।अब भगवान की इच्छा ही हमारी इच्छा है।अपने विचारों और दृष्टिकोण का नवीनीकरण इस तरह से करेंगे जैसी गणित की साधना हेतु आवश्यक है।गणितशास्त्र आदर्शों और सिद्धांतों की प्रणाली है। गणितज्ञों ने यही किया है।वे कर्मयोगी हैं।कौन-सा योग करते हैं? शीर्षासन,भुजंगासन,ताड़ासन तो क्या शीर्षासन में सिर के बल चलना पड़ता है।नहीं ऐसा तो कोई भी ऐसा आसनों का विकास करने वाला,नट भी कर सकता है।वे गणितज्ञ ऐसे योगी थे जिन्होंने गणित की साधना को ही अपने आप को समर्पित कर दिया है,माँ सरस्वती की ही साधना की है।जिंदगी भर गणित के लिए जिए,गणित के लिए मरे।सारी जिंदगी भर उनके मन में कोई दूसरा ख्याल ही नहीं आया।बस एक ही लक्ष्य,एक ही इरादा,एक ही चीज,एक ही बात,एक ही विचार गणित का अध्ययन ही नजर आता था।उनका शरीर,उनका मन,उनकी आत्मा,धर्म,क्षमताएं गणित की साधना में ही काम आ गई।उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा,इसके अतिरिक्त उन्होंने और कुछ नहीं देखा।
6.इच्छाओं का विसर्जन (Immersion of desires):
- उसका परिणाम क्या हुआ? उसका परिणाम यह है कि उनकी शक्तियां,उनकी सामर्थ्य,उनका तप,उनकी क्षमता अर्थात् माँ सरस्वती की क्षमता,सामर्थ्य आदि हमारे पास असंख्य मात्रा में उड़ती हुई चली आती है।हमने 1% अपना कमाया है तो निन्यानवे प्रतिशत माँ सरस्वती का अर्जित किया है।हमारा संबंध सरस्वती के अकूत भंडार है।हमारे पास तो विद्या का टोटा है,लेकिन हम दूसरों को विद्या दान देते हैं,गणित के सवाल समझाते हैं,दूसरों को गणित में आने वाली समस्याओं को हल कर देते हैं।कहां से गणित की समस्याओं के समाधान सूझ जाते हैं? सरस्वती की अकूत भंडार से।हमने अपने आप को माँ सरस्वती को समर्पित कर दिया है,इसलिए माँ सरस्वती हमारी कमजोरियों और ताकत को संभालती है।
- इसलिए हिम्मत कीजिए,अपने कलेजे को कड़ा कीजिए,बहादुर बनिए और एक चीज का त्याग कीजिए,जिसको इच्छा कहते हैं,कामनाएं कहते हैं।हमें अपनी कामनाएं भगवान के ऊपर नहीं थोपनी चाहिए। आप अपनी कामनाएं खत्म कर दीजिए और भगवान की कामनाओं को अपने रोम-रोम में बसा कर ले जाइए।आप योग्य हो जाइए।अगर आप भगवान में मिल गए,उनकी कामनाओं में शामिल हो गए,अगर आप बूंद की तरह समुद्र में शामिल हो गए,फिर आप गणित पर पकड़ का कमाल देखिए,समर्पण का चमत्कार देखिए।फिर भगवान की सामर्थ्य का,भगवान की कृपा का चमत्कार देखिए।फिर गणित साधना का चमत्कार देखिए।साधना ऐसी ही होनी चाहिए।उल्टा चलने वाला,नाक से पानी पीने वाला,पेट में से हवा निकालने वाला योग साधना नहीं है।आप सच्चे योगी बनिए,फिर उसका मजा देखिए कि उसका क्या फायदा हो सकता है।
7.गणित साधना तप है (Mathematics is sadhana and austerity):
- तप किसे कहते हैं? गणित की समस्याएं ऐसी होती हैं,जिन्हें हम सिद्धांतों की वजह से,आदर्श की वजह से अपने आप बुलाकर स्वीकार करते हैं।जैसे आप गणित के अध्यापक हैं तो कम समस्याएं आएंगी,बजाय गणितज्ञ के और शोध करते हैं तो अधिक समस्याएं सामने आएंगे,इसी का नाम तप है।मुसीबतें किसके पास नहीं आती? किस गणितज्ञ,अध्यापक,गणित के विद्यार्थी के पास मुसीबतें नहीं आई? कोई भी व्यक्ति मुसीबतों से बचा हुआ है क्या? कोई भी एक व्यक्ति का नाम बता दीजिए।किंचित तुममें कोई एक व्यक्ति भी ऐसा हो,जो ये कह सकता हो कि हमने सारी जिंदगी सुख के साथ व्यतीत कर ली,आप में से कोई हो तो बताओ।एक भी नहीं है।हर एक के ऊपर मुसीबतें आती हैं,आएंगी और आनी चाहिए,क्योंकि सुख-सुविधाएँ जहां हमें उन्नति की ओर ले जाती हैं वहीं दुःख-कष्ट,कठिनाइयां,समस्याएं हमें सावधानी की ओर ले जाती हैं,सतर्क बनाती हैं,मजबूत बनाती हैं,बहादुर बनाती हैं।हमारे गणित के ज्ञान को ठीक करती हैं।दुःख भी अपने आप में जरूरी है।शक्कर भी जरूरी है,नमक और मिर्च भी जरूरी है।दोनों के बिना सब्जी नहीं बन सकती।
- समस्याओं की अपनी उपयोगिता है,तो सवालों के हल हो जाने की अपनी उपयोगिता है,लेकिन जब हम समस्याओं,मुसीबतों को,सिद्धांतों के लिए,आदर्शों के लिए इच्छापूर्वक स्वीकार करते हैं,जब हम उन्हें बुलाते हैं कि आप आइए,हम सिद्धांत का जीवन जीना चाहते हैं,आदर्श का जीवन जीना चाहते हैं तो हमें स्वेच्छा से समस्याएं मंजूर करनी पड़ती है।समस्याओं के बिना गणित साधना अपनी पूर्णता तक नहीं पहुंच सकती है।कुछ समस्याएँ थोपी हुई होती हैं और कुछ इच्छानुकूल होती हैं।इसका क्या मतलब होता है? इसका मतलब है कि कोर्स की पुस्तकों को पढ़ना थोपी हुई हैं और गणित की संदर्भ पुस्तकों को हल करना इच्छानुकूल है।कम से कम में,न्यूनतम से न्यूनतम में कोर्स की पुस्तक को पढ़कर इच्छा पूरी हो सकती हैं।इसके बाद हमारा श्रम बच जाता है,समय बच जाता है,अकल बच जाती है,उन सारी चीजों को (बचत को) गणित की संदर्भ पुस्तकों,नई खोज करने में लगाएँ,श्रेष्ठ खोज कार्य में लगाएँ।ये तप कहलाएगा।
- कैसे कहलाएगा? क्योंकि इसमें आपको मुसीबतें उठानी पड़ेगी,अपने आप को मुसीबतों से,समस्याओं को सुलझाने में झोंकना होगा।
8.तपस्वी बनें (Become an ascetic):
- तप का आरंभ यहीं से होता है,तप में क्या-क्या नियम पालन करने पड़ते हैं।जीभ पर काबू रखिए,उपवास कीजिए,भूखे रहिए,ब्रह्मचर्य से रहिए,जमीन पर सोइए,अपने शरीर की सेवा स्वयं कीजिए।ये सारे के सारे तप के नियम हैं।इसका क्या मतलब है? इसका केवल मतलब इतना है कि हम मुसीबतों का स्वेच्छा से अभ्यास करें,तितिक्षा का हम स्वेच्छा से अभ्यास करें।तप का दूसरा पक्ष हैःसादा जीवन,उच्च विचार।उच्च विचार वही विद्यार्थी कर सकता है जो ‘सिंपल लिविंग’ (Simple living) में विश्वास करता है।गणितज्ञ के लिए,विद्वान के लिए यही नियम बताया गया कि उसे मितव्ययी होना चाहिए।जो कुछ आपके पास है,अपने लिए उसका कम से कम इस्तेमाल करें और ज्यादा से ज्यादा औरों को दें।
- तप वहां से आरंभ होता है:जबकि हमको भिन्न-भिन्न कामों के लिए कष्ट उठाने के लिए तैयार रहना पड़ता है।आपने देखा होगा कि अच्छे काम करने वालों को गालियां पड़ती है।गणितज्ञों को बहुत से छात्र-छात्राएं गालियां बकते हैं।सबको मुसीबतें उठानी पड़ी।आप स्वेच्छा से तैयार हो जाइए और कहिए की मुसीबतों आपका स्वागत है,कठिनाइयों आपका स्वागत है।लोग आपको गालियां देंगे।गालियां देने वालों आपका स्वागत है।जब आप श्रेष्ठ सिद्धांतों को कार्यरूप में परिणत करने के लिए खड़े हो गए हों तो जिन-जिन के स्वार्थों को आघात पहुंचा होगा,वे सब आपकी बुराई करेंगे और ढेरों गालियां देंगे।मसलन इन गणितज्ञों ने गणित का इजाद करके हरामजादों ने हमारे लिए मुसीबत खड़ी कर दी।आपको मुसीबतें और कठिनाइयां उठाने के लिए तपस्वी का जीवन जीना चाहिए।अपने अंदर क्षमताओं का विकास करें,उदार बनें ताकि मुसीबतें उठा सकें।
- उपर्युक्त आर्टिकल में गणित हेतु पात्रता विकसित करना (To Develop Eligibility for Mathematics),गणित के लिए पात्रता कैसे विकसित करें? (How to Develop Eligibility for Mathematics?) के बारे में बताया गया है।
- गणित विषय में पूर्णता प्राप्त करने के लिए कठिन संघर्ष करना पड़ता है।एक-एक सवाल,एक-एक थ्योरम को हल करने के लिए जूझना पड़ता है,तभी जाकर कुछ हासिल होता है।
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9.तपस्वी छात्र (हास्य-व्यंग्य) (Ascetic Students) (Humour-Satire):
- टीचर:बताओ अगर किसी प्रश्नावली के बीस में से पांच सवाल आपको बता दूं तो बाकी सवाल कितनी देर में हल कर लोगे।
- छात्रः1 मिनट में।
- टीचरःकैसे,इतनी फुर्ती से।
- छात्रःगूगल पर सर्च कर लो।फौरन हल हो जाएंगे।
10.गणित हेतु पात्रता विकसित करना (Frequently Asked Questions Related to To Develop Eligibility for Mathematics),गणित के लिए पात्रता कैसे विकसित करें? (How to Develop Eligibility for Mathematics?) से संबंधित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नः
प्रश्न:1.गणित का छात्र मजबूत कैसे होता है? (How is a math student strong?):
उत्तर:तपस्वी का जीवन जीने से।तपने के बाद हर चीज मजबूत होती है।लेकिन तप के लिए साहस और हिम्मत चाहिए।
प्रश्न:2.क्या तपस्वी के लिए मुसीबतें जरूरी है? (Is troubles necessary for the ascetic?):
उत्तर:बिना गणित की समस्याओं को हल किये गणित का साधक नहीं बना जा सकता है।मुसीबतें हमारे व्यक्तित्व का निर्माण करती है।
प्रश्न:3.सच्ची शांति कैसे मिले? (How can you find true peace?):
उत्तर:संघर्ष करने से,कठिन परिश्रम करके सवालों को हल करने से सच्ची शांति मिलती है।
- उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर द्वारा गणित हेतु पात्रता विकसित करना (To Develop Eligibility for Mathematics),गणित के लिए पात्रता कैसे विकसित करें? (How to Develop Eligibility for Mathematics?) के बारे में और अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
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Satyam
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