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Methods of Evaluation in Mathematics

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1.गणित में मूल्यांकन की विधियाँ (Methods of Evaluation in Mathematics):

  • गणित में मूल्यांकन की विधियों (Methods of Evaluation in Mathematics) द्वारा छात्र-छात्राएं अपनी कमजोरी तथा सबल पक्ष के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकता है।मूल्यांकन की विधियों का चुनाव इस बात पर निर्भर करता है कि उसके द्वारा बालक के व्यवहार परिवर्तन की कितनी स्पष्ट जानकारी मिलती है।छात्र-छात्राओं के मूल्यांकन की विधि का चयन गणित की पाठ्य सामग्री को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।यदि छात्र-छात्राओं पर गलत मूल्यांकन विधि का प्रयोग किया जाएगा तो मूल्यांकन की सही स्थिति प्राप्त नहीं होगी।मूल्यांकन सीखने के अनुभव तथा मूल्यांकन के साधनों में परस्पर संबंध होता है।
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(1.)मूल्यांकन की विधियों से लाभ (Benefits from methods of evaluation):

  • मूल्यांकन की विधि से ज्ञात कर सकते हैं कि अध्ययन के उद्देश्यों को प्राप्त मिल रही है या नहीं। मूल्यांकन विधि में अध्यापन स्थितियों में परिवर्तन कर अध्यापन विधि को प्रभावी बनाया जा सकता है।

(2.)लिखित परीक्षाएँ (Written Examinations):

  • लिखित परीक्षा में छात्र-छात्राओं में लिखित परीक्षा देनी होती है।लिखित परीक्षा के आधार पर छात्र-छात्राओं को गणित की विषयवस्तु को याद करने तथा स्मृति का पता चलता है।लिखित परीक्षा में अनेक चरणों को लिखना होता है।छात्र-छात्रा इनका मौखिक परीक्षाओं द्वारा मूल्यांकन किया जा सकता है।

(3.)मौखिक परीक्षाएं (Oral Examination):

  • इस विधि का प्रयोग उन उपलब्धियों की जांच करने में किया जाता है जिनका मूल्यांकन लिखित परीक्षाओं द्वारा नहीं किया जा सकता है।गणित में चाहते हैं कि विद्यार्थी मानसिक गणित और मौखिक गणित की क्षमता में वृद्धि हो तथा दैनिक जीवन में उपयोगिता का अनुभव करते हैं।गणित के पाठ्यक्रम से बाहर की बातें जानते हों।इन सभी का मूल्यांकन मौखिक परीक्षाओं द्वारा होता है।इसलिए गणित के मूल्यांकन में मौखिक परीक्षाओं को स्थान दिया जाना चाहिए।लिखित परीक्षाओं की कमियों को मौखिक परीक्षाओं द्वारा दूर किया जा सकता है।

(4.)प्रायोगिक परीक्षाएं (Practical Examination):

  • गणित में बहुत से टॉपिक ऐसे हैं जिनको प्रयोगात्मक कार्य (प्रैक्टिकल वर्क) द्वारा स्पष्ट रूप से समझा जाता है।अब से पूर्व गणित के अध्यापन में प्रैक्टिकल वर्क नहीं था।परंतु अब प्रैक्टिकल कार्य का महत्त्व समझ में आया है।छात्र-छात्राओं को प्रेक्टिकल कार्य द्वारा क्षेत्रफल,ऊँचाई एवं दूरी आदि टाॅपिक्स को प्रैक्टिकल वर्क द्वारा ठीक से समझाया जा सकता है।प्रैक्टिकल वर्क करके सीखना पर आधारित है।प्रैक्टिकल वर्क के द्वारा गणित के कई प्रत्ययों, संकल्पनाओं का स्पष्टीकरण कराया जा सकता है।

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(5.)निरीक्षण (Observation):

  • निरीक्षण द्वारा छात्र-छात्राओं की संवेगात्मक स्थिरता,मानसिक परिपक्वता तथा सोचने के तरीकों में यथार्थता की जानकारी कक्षा में निरीक्षण द्वारा प्राप्त हो सकती है।अध्यापक गणित विषय में छात्रों की प्रगति का निरीक्षण कर सकते है। अध्यापक द्वारा किया गया मूल्यांकन वस्तुनिष्ठ होता है।

(6.)साक्षात्कार (Interview):

  • मौखिक परीक्षा तथा साक्षात्कार में अधिक अंतर नहीं है।इनके द्वारा छात्र-छात्राओं की सही जानकारी प्राप्त की जा सकती है।

(7.)प्रश्नावली (Questionnaire):

  • प्रश्नावली में अनेक प्रश्नों के द्वारा छात्र-छात्राओं से उत्तरों के आधार पर ज्ञान,रूचि तथा अभिवृत्ति के बारे में जानकारी प्राप्त की जाती है।

(8.)छात्रा द्वारा तैयार की गई सामग्री (Pupils’ Products):

  • बालकों के व्यावहारिक ज्ञान की जानकारी उनके द्वारा बनाई गई वस्तुओं से आसानी से की जा सकती है।गणित में छात्रों द्वारा तैयार किए गए मॉडल,चित्र आदि को मूल्यांकन का आधार बनाया जा सकता है।

(9.)अभिलेख (Records):

  • विद्यार्थियों के अभिलेख भी मूल्यांकन में सहायक होते हैं।कक्षा में तथा घर पर किए गए कार्य की पुस्तकों को भी अभिलेख माना जाना चाहिए।
  • इस प्रकार छात्र-छात्राओं का अनेक प्रकार से मूल्यांकन किया जा सकता है।इन मूल्यांकन के तरीकों से छात्र-छात्राओं की वास्तविक अध्ययन करने की स्थिति का पता चल जाता है।इनका प्रयोग करके छात्र-छात्राएं अपने अध्यययन में आवश्यक परिवर्तन करके सुधार कर सकता है।

(10.)निष्कर्ष (Conclusion of Methods of Evaluation in Mathematics):

  • छात्र-छात्राओं को अध्ययन कराने के लिए अध्यापक कभी-कभी ऐसे अध्यापन की विधि का चयन कर लेते हैं जो छात्र-छात्राओं के लिए उपयुक्त नहीं है होती है।मूल्यांकन के आधार पर यह पता लगा सकते हैं कि छात्र-छात्राओं को अध्ययन किस अंश तक प्राप्त हुआ है।छात्रों के विकास की जानकारी भी मूल्यांकन द्वारा ही होती है।मूल्यांकन के निष्कर्षों के आधार पर अध्यापक तथा छात्र अपने अध्यापन-अध्ययन में परिवर्तन करके उसे ओर प्रभावी बना सकता है।
    मूल्यांकन प्रक्रिया द्वारा अध्यापक को यह पता चल जाता है कि छात्रों में आवश्यक परिवर्तन हो रहे हैं या नहीं।छात्र भी मूल्यांकन के आधार पर यह पता लगा सकता है कि अध्ययन प्रोग्रेसिव है या नहीं।यदि नहीं है तो कहां पर सुधार किया जा सकता है।
  • वस्तुत अध्यापन विधि का प्रयोग छात्र-छात्राओं के स्तर,रुचि तथा योग्यता के अनुसार करना चाहिए। परंपरागत रूप से अध्ययन-अध्यापन करते रहना आवश्यक नहीं है।गणित की उपलब्धियों का मापन तथा मूल्यांकन करते रहना चाहिए जिससे अध्ययन-अध्यापन कार्य को प्रभावी ढंग से किया जा सके।यदि गणित के ज्ञान में कमियां रहेंगी तो छात्र-छात्राएं आगे नहीं बढ़ सकते हैं।मूल्यांकन के द्वारा छात्र-छात्रा आगे बढ़ते हैं।केवल लिखित परीक्षा के आधार पर मूल्यांकन वैध नहीं माना जा सकता है।
  • छात्र-छात्राओं में धैर्य,परिश्रम,लगन,आत्मविश्वास,एकाग्रता,चिंतन,विश्लेषण आदि गुणों का विकास हुआ है या नहीं इसका मालूम मूल्यांकन के द्वारा ही संभव है।लेकिन मूल्यांकन लिखित,मानसिक,मौखिक,साक्षात्कार,निरीक्षण इत्यादि द्वारा किया जाना चाहिए जिससे छात्र-छात्राओं का सम्पूर्ण मूल्यांकन किया जा सके। वस्तुत आधुनिक युग में लिखित परीक्षा के आधार पर मूल्यांकन किया जाता है जो कि समीचीन नहीं है।केवल एक लिखित परीक्षा के आधार पर छात्र-छात्राओं के अध्ययन का मूल्यांकन कर लेना उचित नहीं कहा जा सकता है।हालांकि कुछ विद्वान मूल्यांकन का विरोध करते हैं परन्तु मूल्यांकन के बिना छात्र-छात्राओं के विकास का पता नहीं लगाया जा सकता है।अतः मूल्यांकन विधि में जो कमी है उसे दूर कर दिया जाए तो यह उपयोगी हो सकती है।
  • उपर्युक्त विवरण में गणित में मूल्यांकन की विधियाँ (Methods of Evaluation in Mathematics) के बारे में बताया गया है।

2.गणित में मूल्यांकन की विधियाँ (Methods of Evaluation in Mathematics) के सम्बन्ध में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:

प्रश्न:1.गणित में मूल्यांकन के कितने तरीके? (How many Methods of Evaluation in Mathematics?):

उत्तर:कक्षा में प्रामाणिक मूल्यांकन गणित का उपयोग करने के छह तरीके
प्रदर्शन मूल्यांकन (Self-assessment)।
छोटी जांच (Short investigations)।
ओपन-रिस्पांस सवाल (Open-response questions)।
विभागों (Portfolios)।
सेल्फ असेसमेंट (Self-assessment)।
बहुविकल्पीय प्रश्न (Multiple-choice questions)।

प्रश्न:2.गणितीय मूल्यांकन क्या है? (What is mathematical evaluation?):

उत्तर:एक बीजीय अभिव्यक्ति (Expression) का मूल्यांकन करने का अर्थ है अभिव्यक्ति का मूल्य ढूंढना जब चर को किसी दिए गए नंबर द्वारा प्रतिस्थापित किया जाता है।एक अभिव्यक्ति का मूल्यांकन करने के लिए,हम अभिव्यक्ति में चर के लिए दिए गए नंबर को प्रतिस्थापित करते हैं और फिर संक्रिया के क्रम (order of operations) का उपयोग करके अभिव्यक्ति को सरल बनाते हैं।

प्रश्न:3.गणित पढ़ाने के अलग-अलग तरीके क्या हैं? (What are the different methods of teaching mathematics?):

उत्तर:गणित के शिक्षण तरीकों में व्याख्यान (lecture),आगमन (inductive), निगमन (deductive),ह्यरिस्टीक (Heuristic) या खोज (discovery method),विश्लेषणात्मक (analytic), सिंथेटिक (synthetic),समस्या समाधान (problem solving),प्रयोगशाला (laboratory) और परियोजना (project method) के तरीके शामिल हैं।शिक्षक पाठ्यक्रम की विशिष्ट इकाई,उपलब्ध संसाधनों और एक कक्षा में छात्रों की संख्या के अनुसार कोई भी तरीका अपना सकते हैं ।

प्रश्न:4.गणित में मूल्यांकन का क्या महत्व है? (What is the importance of evaluation in mathematics?):

उत्तर:मापन (Assessment) और मूल्यांकन (evaluation) गणित शिक्षा में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं क्योंकि वे अक्सर गणित को परिभाषित करते हैं जो मूल्यवान और जानने लायक है।इसके अलावा,ध्वनि मूल्यांकन (sound assessment) छात्रों की गणितीय सोच के बारे में महत्वपूर्ण प्रतिक्रिया प्रदान करता है जो छात्र सीखने में सुधार करने के लिए छात्र और शिक्षक कार्यों को प्रेरित करता है।

प्रश्न:5.गणित में मूल्यांकन और मूल्यांकन में क्या अंतर है? (What is the difference between assessment and evaluation in mathematics?):

उत्तर:मूल्यांकन को किसी वस्तु या व्यक्ति के मूल्यांकन की प्रक्रिया के रूप में परिभाषित किया गया है अर्थात् गुणवत्ता,मूल्य या महत्व को मापने का कार्य।के मुकाबले,मूल्यांकन मूल्यों,संख्या या किसी या कुछ के प्रदर्शन के बारे में निर्णय लेने पर केंद्रित है (As against, evaluation focuses on making a judgement about values,numbers or performance of someone or something.
Comparison Chart.)।
तुलना चार्ट।
तुलना के लिए मूल्यांकन मूल्यांकन
नैदानिक,निर्णयात्मक प्रकृति

  • उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर द्वारा गणित में मूल्यांकन की विधियाँ (Methods of Evaluation in Mathematics) के बारे में ओर अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

Methods of Evaluation in Mathematics

गणित में मूल्यांकन की विधियाँ
(Methods of Evaluation in Mathematics)

Methods of Evaluation in Mathematics

गणित में मूल्यांकन की विधियों (Methods of Evaluation in Mathematics) द्वारा छात्र-छात्राएं
अपनी कमजोरी तथा सबल पक्ष के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकता है।
मूल्यांकन की विधियों का चुनाव इस बात पर निर्भर करता है कि

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